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राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का 28वां सम्मेलन

राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का 28वां सम्मेलन (28th CSPOC) 14-16 जनवरी तक भारत की मेजबानी में आयोजित किया गया था.

यह सम्मेलन संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है.

सम्मेलन से जुड़ी मुख्य जानकारियां

  • सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली (संसद भवन परिसर के ऐतिहासिक ‘संविधान सदन’ के सेंट्रल हॉल) में आयोजित किया गया था.
  • सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जबकि अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया था.
  • यह CSPOC के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा सम्मेलन था. इसमें 42 राष्ट्रमंडल देशों और 4 अर्ध-स्वायत्त संसदों के 61 अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों ने भाग लिया.
  • प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना पर जोर दिया और भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को राष्ट्रमंडल देशों के साथ साझा करने की प्रतिबद्धता जताई.
  • सम्मेलन के अंत में, लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, समावेशी और जवाबदेह बनाने पर सहमति बनी.

सम्मेलन के मुख्य विषय

  • संसदीय कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग.
  • सांसदों पर सोशल मीडिया का प्रभाव.
  • लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में अध्यक्षों की भूमिका.
  • मतदान से परे नागरिक भागीदारी और सार्वजनिक समझ बढ़ाने की रणनीतियां.

CSPOC: एक दृष्टि

  • CSPOC (Conference of Speakers and Presiding Officers of the Commonwealth) एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंच है. यह राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के प्रमुखों (जैसे लोकसभा अध्यक्ष) को एक साथ लाता है.
  • CSPOC का प्राथमिक लक्ष्य संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करना है. इसमें राष्ट्रमंडल के स्वतंत्र संप्रभु देशों की राष्ट्रीय संसदों के अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी शामिल होते हैं.
  • कनाडा के तत्कालीन हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष, माननीय लुसिएन लैम (Lucien Lamoureux) की पहल पर इसे 1969 में शुरू किया गया था. कनाडा की संसद इसके सचिवालय के रूप में कार्य करती है.
  • CSPOC का पूर्ण सम्मेलन हर दो साल में एक बार आयोजित किया जाता है. पिछला सम्मेलन (27वां) जनवरी 2024 में युगांडा में आयोजित किया गया था. अगला सम्मेलन (29वां) 2028 में यूनाइटेड किंगडम में आयोजित किया जाएगा.
  • इस सम्मेलन के समापन पर, ओम बिरला ने अगले सम्मेलन की अध्यक्षता ब्रिटेन (UK) के हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष सर लिंडसे हॉयल को सौंपी.

भारत-वाइमर प्रारूप की पहली बैठक पेरिस में आयोजित की गई

भारत-वाइमर प्रारूप (India-Weimar Format) की पहली ऐतिहासिक बैठक 7 जनवरी 2026 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित की गई थी.

भारत-वाइमर प्रारूप की बैठक: मुख्य बिन्दु

  • भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वाइमर त्रिकोण (Weimar Triangle) के सदस्य देशों—फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड—के अपने समकक्षों के साथ इस चर्चा में भाग लिया.
  • यह पहली बार था जब भारत ने इस यूरोपीय समूह (वाइमर त्रिकोण) के साथ ‘3+1’ के प्रारूप में बातचीत की.
  • 35 साल के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी गैर-यूरोपीय देश को इस प्रारूप में आमंत्रित किया गया.
  • बैठक के दौरान मुख्य रूप से तीन विषयों पर चर्चा हुई:
  1. भारत-यूरोपीय संघ (EU) संबंध विशेष रूप से आगामी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चर्चा.
  2. हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना.
  3. वैश्विक सुरक्षा और शांति पर इसके प्रभावों पर विचार-विमर्श.

इस बैठक के रणनीतिक मायने

  • इंडो-पैसिफिक: फ्रांस और जर्मनी दोनों की इंडो-पैसिफिक नीतियां हैं. भारत के साथ इनका जुड़ना चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करता है.
  • सुरक्षा और रक्षा: पोलैंड की बढ़ती सैन्य ताकत और जर्मनी-फ्रांस की तकनीक भारत के रक्षा विनिर्माण (Defense Manufacturing) के लिए महत्वपूर्ण है.
  • यूक्रेन संघर्ष: पोलैंड की भौगोलिक स्थिति के कारण, इस बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पर भी चर्चा की गई.
  • टेक्नोलॉजी: सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा (Green Energy) और एआई (AI) पर सहयोग.

वाइमर त्रिकोण (Weimar Triangle) क्या है?

  • ‘वाइमर त्रिकोण’ फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड के बीच एक क्षेत्रीय समूह है.
  • इसकी स्थापना 1991 में पोलैंड के शहर ‘वाइमर’ में हुई थी.
  • इसका उद्देश्य यूरोपीय एकीकरण और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है.
  • भारत-वाइमर प्रारूप (India-Weimar Format)
  • यह पहली बार है जब भारत इन तीन यूरोपीय शक्तियों (फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड) के साथ एक साथ ‘3+1’ के प्रारूप में जुड़ रहा है.
  • यह बैठक भारत की यूरोप के साथ बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते कद को दर्शाती है.

7वां कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन की बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई

7वां कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन (7th Colombo Security Conclave – CSC) की बैठक 20-21 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित की गई थी. यह हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है.

सम्मेलन की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने की थी. इस बैठक में सदस्य देशों और पर्यवेक्षक देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSAs) और उच्च-स्तरीय अधिकारियों ने भाग लिया.

मुख्य एजेंडा और चर्चा के बिंदु

  • हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डकैती, नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध मछली पकड़ने और मानव तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाना.
  • आतंकवाद-रोधी रणनीतियों, खुफिया जानकारी साझा करने और क्षमता निर्माण पर चर्चा.
  • साइबर हमलों से निपटने और महत्वपूर्ण साइबर बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए सहयोग.
  • समुद्री डोमेन जागरूकता और अन्य सुरक्षा-संबंधी जानकारी के लिए रियल-टाइम सूचना साझाकरण तंत्र को मजबूत करना.
  • प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकटों के दौरान समन्वय और सहयोग.
  • हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना.

कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन

  • कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन एक क्षेत्रीय सुरक्षा समूह है जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी, साइबर सुरक्षा और सूचना साझाकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है.
  • इसकी शुरुआत भारत, श्रीलंका और मालदीव ने की थी, जिसमें बाद में मॉरीशस ने भी पूर्ण सदस्य के रूप में हिस्सा लिया. बांग्लादेश और सेशेल्स पर्यवेक्षक सदस्य हैं.

छठा ग्लोबल फिनटेक सम्मेलन मुंबई में आयोजित किया गया

छठा ग्लोबल फिनटेक सम्मेलन (GFF) का आयोजन 7 से 9 अक्टूबर, 2025 तक मुंबई में आयोजित किया गया. सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया था.

  • इस सम्मेलन का थीम था ‘एआई द्वारा संचालित एक बेहतर दुनिया के लिए वित्त को सशक्त बनाना’ (‘Empowering Finance for a Better World Powered by AI’).
  • सम्मेलन का आयोजन पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और फिनटेक कन्वर्जेंस काउंसिल (FCC) ने किया था.
  • प्रधानमंत्री मोदी और भारत की यात्रा पर आए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के 6ठे संस्करण में भाग लिया और मुख्य भाषण दिए.

फिनटेक (FinTech) क्या है?

  • फिनटेक (FinTech) शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- ‘फाइनेंस’ (Finance) और ‘टेक्नोलॉजी’ (Technology).
  • फिनटेक का मतलब वित्तीय सेवाओं को बेहतर, तेज, आसान और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग करना है. यह काम स्मार्टफोन ऐप, वेबसाइट और अन्य सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जाता है.
  • डिजिटल भुगतान, मोबाइल बैंकिंग, ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म आदि फिनटेक के कुछ सामान्य उदाहरण हैं.

ग्लोबल फिनटेक सम्मेलन (GFF)

  • ग्लोबल फिनटेक सम्मेलन (Global Fintech Fest) वित्तीय प्रौद्योगिकी (FinTech) पर केंद्रित एक वार्षिक और विश्व-स्तर का सबसे बड़ा आयोजन है.
  • यह दुनिया के सबसे बड़े फिनटेक आयोजनों में से एक है जो भारत के मुंबई में आयोजित होता है.
  • यह सम्मेलन दुनिया भर के फिनटेक नेताओं, नीति निर्माताओं, नियामकों, निवेशकों और नवप्रवर्तकों को एक मंच पर लाता है ताकि वित्तीय सेवाओं के भविष्य पर चर्चा, सहयोग और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके.
  • यह आयोजन पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और फिनटेक कन्वर्जेंस काउंसिल (FCC) द्वारा आयोजित किया जाता है.
  • इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ब्लॉकचेन, भुगतान, उधार (लेंडिंग) और बीमा प्रौद्योगिकी (InsurTech) जैसे क्षेत्रों में नए फिनटेक समाधानों और उत्पादों का प्रदर्शन करना.

नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रोटेक्निकल आयोग की बैठक

  • लंदन स्थित अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रोटेक्निकल आयोग (IEC) की 89वीं आम बैठक (GM) और प्रदर्शनी 15 से 19 सितंबर 2025 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जा रहा है.
  • यह चौथी बार है जब भारत प्रतिष्ठित IEC आम बैठक की मेजबानी कर रहा है. इससे पहले वर्ष 1960, 1997 और 2013 में भारत ने इस बैठक की मेजबानी की थी.
  • IEC की GM प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने किया.
  • बैठक में 100 से अधिक देशों के 2,000 से अधिक विशेषज्ञ भाग लेंगे, जो अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रोटेक्निकल मानकों को निर्धारित करने पर विचार-विमर्श.
  • इस प्रदर्शनी में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, स्मार्ट लाइटिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी विनिर्माण में नवाचारों को प्रदर्शित किया जाएगा और यह भारतीय स्टार्ट-अप्स के लिए एक वैश्विक नेटवर्किंग मंच प्रदान करेगी.

अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रोटेक्निकल आयोग (IEC)

  • IEC की स्थापना सन् 1906 में लंदन में विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक प्रौद्योगिकियों के लिए समान मानक स्थापित करने के उद्देश्य से की गई थी.

खाद्य तथा शांति के लिए पहला एमएस स्वामीनाथन पुरस्कार एडेमोला एडेनले को दिया गया

एमएस स्वामीनाथन शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन

  • नई दिल्ली के पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में 7 से 9 अगस्त तक एमएस स्वामीनाथन शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (MS Swaminathan Centenary International Conference) आयोजित किया गया था. यह सम्मेलन प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था.
  • इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने किया. सम्मेलन का विषय था- ‘सदाबहार क्रांति, जैव-खुशहाली का मार्ग’

खाद्य तथा शांति के लिए पहला एमएस स्वामीनाथन पुरस्कार

  • इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खाद्य तथा शांति के लिए पहला एमएस स्वामीनाथन पुरस्कार’ प्रदान किए.
  • इस पुरस्‍कार की शुरूआत एमएस स्‍वामीनाथन रिर्सच फाउंडेशन (MSSRF) और विश्व विज्ञान अकादमी (TWAS) द्वारा एमएस स्‍वामीनाथन की विरासत को सम्मानित करने के लिए किया है.
  • यह एक अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार है जो विकासशील देशों के उन व्यक्तियों को दिया जाएगा, जिन्‍होंने वैज्ञानिक अनुसंधान, नीति विकास, खाद्य सुरक्षा में सुधार, समानता और शांति को आगे बढ़ाने में उत्कृष्ट योगदान दिया है.

पहले प्राप्तकर्ता

  • खाद्य तथा शांति के लिए पहला एमएस स्वामीनाथन पुरस्कार नाइजीरियाई वैज्ञानिक डॉ. एडेमोला एडेनले (Dr. Ademola Adenle) को दिया गया है.
  • उन्हें नाइजीरिया में भुखमरी कम करने में उनके परिवर्तनकारी कार्यों के लिए सम्मानित किया गया है.

एमएस स्‍वामीनाथन: ‘हरित क्रांति’ का जनक

  • एमएस स्‍वामीनाथन भारत के आनुवंशिक वैज्ञानिक थे जिन्हें भारत की ‘हरित क्रांति’ का जनक माना जाता है.
  • उन्होंने 1966 में मैक्सिको के बीजों (मैक्सिकन गेहूँ की एक किस्म) को पंजाब की घरेलू किस्मों के साथ मिश्रित करके उच्च उत्पादकता वाले गेहूं के संकर बीज विकिसित किए.
  • इसके कारण भारत के गेहूँ उत्पादन में भारी वृद्धि हुई. इस कार्य के द्वारा भारत को अन्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा सकता था.
  • ‘हरित क्रांति’ कार्यक्रम के तहत ज़्यादा उपज देने वाले गेहूं और चावल के बीज ग़रीब किसानों के खेतों में लगाए गए थे.
  • एमएस स्वामीनाथन को ‘भारत सरकार’ द्वारा सन 1967 में ‘पद्म श्री’, 1972 में ‘पद्म भूषण’ और 1989 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया था.

स्वामीनाथन आयोग

  • नवंबर 2004 में एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया गया था. इस आयोग की मुख्य सिफारिशें हैं:
  • किसानों को फ़सल उत्पादन मूल्य से पचास प्रतिशत ज़्यादा दाम मिले.
  • किसानों को अच्छी गुणवत्ता के बीज रियायती मूल्य पर प्रदान किये जाएं.
  • किसानों की मदद के लिए गांवों में ज्ञान चौपाल (विलेज नॉलेज सेंटर) हों.
  • महिला किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड दिए जाएँ.
  • प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में किसानों की मदद के लिए कृषि जोखिम फंड हों.
  • पूरे देश में हर फसल के लिए फसल बीमा की सुविधा हों.
  • खेती के लिए कर्ज की व्यवस्था हों.
  • गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा मिले.

आर्द्रभूमि पर 15वां रामसर सम्मेलन  जिम्बाब्वे  में आयोजित की गई

  • आर्द्रभूमि पर रामसर कन्वेंशन का 15वां COP (15th meeting of the Conference of the Parties) 23 से 31 जुलाई 2025 तक जिम्बाब्वे के विक्टोरिया फॉल्स में आयोजित की गई थी.
  • भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया. सम्मेलन में आर्द्रभूमि के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने के भारत के प्रस्ताव को पारित किया गया.
  • इस सम्मेलन का विषय- ‘हमारे साझा भविष्य के लिए आर्द्रभूमि का संरक्षण’ था.
  • रामसर कन्वेंशन के COP का आयोजन रामसर सचिवालय द्वारा हर तीन साल में किया जाता है. इसका सचिवालय स्विट्ज़रलैंड के ग्लैंड में स्थित है.

आर्द्रभूमि पर रामसर कन्वेंशन

  • आर्द्रभूमि पर रामसर कन्वेंशन का नाम ईरान के रामसर शहर के नाम पर रखा गया है क्योंकि यहीं  फरवरी 1971 में आर्द्रभूमि और उनके पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था.

अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि

  • अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि को रामसर स्थल कहा जाता है. रामसर स्थल पानी में स्थित मौसमी या स्थायी पारिस्थितिक तंत्र हैं. इनमें मैंग्रोव, दलदल, नदियाँ, झीलें, डेल्टा, बाढ़ के मैदान और बाढ़ के जंगल, चावल के खेत, प्रवाल भित्तियाँ, समुद्री क्षेत्र (6 मीटर से कम ऊँचे ज्वार वाले स्थान) के अलावा मानव निर्मित आर्द्रभूमि जैसे- अपशिष्ट जल उपचार तालाब और जलाशय आदि शामिल होते हैं.
  • आर्द्रभूमियां प्राकृतिक पर्यावरण का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं. ये बाढ़ की घटनाओं में कमी लाती हैं, तटीय इलाकों की रक्षा करती हैं, साथ ही प्रदूषकों को अवशोषित कर पानी की गुणवत्ता में सुधार करती हैं.
  • आर्द्रभूमि मानव और पृथ्वी के लिये महत्त्वपूर्ण हैं. 1 बिलियन से अधिक लोग जीवनयापन के लिये उन पर निर्भर हैं और दुनिया की 40% प्रजातियाँ आर्द्रभूमि में रहती हैं तथा प्रजनन करती हैं.

22वां शांगरी-ला वार्ता सिंगापुर में आयोजित किया गया

  • 22वां शांगरी-ला वार्ता (22nd Shangri-La Dialogue) 1 जून 2025 को सिंगापुर में आयोजित किया गया था.
  • सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान ने किया.
  • 2024 में आयोजित शांगरी-ला वार्ता के 21वें संस्करण में भारत सरकार का कोई भी अधिकारी शामिल नहीं हुआ था.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2018 में इस डायलॉग में भाग लेने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे.

शांगरी-ला वार्ता

  • शांगरी-ला वार्ता (SLD) एक अंतर-सरकारी सुरक्षा सम्मेलन है जो अंतर्राष्ट्रीय सामरिक अध्ययन संस्थान (IISS) द्वारा सिंगापुर में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है.
  • पहला शांगरी-ला वार्ता 2002 में सिंगापुर के शांगरी-ला होटल में आयोजित किया गया था. तब से यह होटल शांगरी-ला वार्ता का स्थायी स्थल बन गया है.
  • शांगरी-ला वार्ता शुरू करने का श्रेय ब्रिटिश रणनीतिकार सर जॉन चिपमैन को दिया जाता है. वे IISS के प्रमुख थे.
  • शांगरी-ला वार्ता को एशिया में एक प्रमुख रक्षा शिखर सम्मेलन माना जाता है. यह सम्मेलन, क्षेत्र में सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एशिया-प्रशांत, यूरोप, उत्तरी अमेरिका और पश्चिम एशिया के विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को एक साथ लाता है.

पहला विश्व ऑडियो विजुअल और मनोरंजन शिखर सम्मेलन मुंबई में आयोजित किया गया

  • पहला विश्व ऑडियो-विजुअल और मनोरंजन शिखर सम्मेलन (Audio Visual & Entertainment Summit-WAVES) 2025 भारत की मेजवानी में 1 से 4 अप्रैल 2025 तक आयोजित किया गया था.
  • WAVES 2025 का आयोजन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मुंबई के जियो कन्‍वेशन सेंटर में किया है.
  • सम्‍मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने किया. सम्‍मेलन की थीम थी ‘कनेक्टिंग क्रियेटर्स, कनेक्टिंग कंट्रीज’.
  • WAVES 2025 फिल्म, प्रसारण, डिजिटल मीडिया, एनिमेशन, रेडियो, वीएफएक्स, गेमिंग, संगीत, विज्ञापन, प्रिंट, कॉमिक्स और संबंधित प्रौद्योगिकियों सहित मीडिया और मनोरंजन क्षेत्रों पर केंद्रित था.
  • WAVES 2025  का उद्देश्य विश्व के मीडिया और मनोरंजन क्षेत्रों में खुले और निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं को बढ़ावा देना, सामग्री निर्माण और दर्शकों की भागीदारी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के नैतिक उपयोग पर चर्चा करना और जिम्मेदार पत्रकारिता को बढ़ावा देना शामिल था.

8वां हिंद महासागर सम्मेलन मस्कट में आयोजित किया गया

  • 8वां हिंद महासागर सम्मेलन (8th Indian Ocean Conference) 16-17 फरवरी 2025 को ओमान की राजधानी मस्कट में आयोजित किया गया था. इस वर्ष सम्मेलन का विषय है समुद्री साझेदारी के नए क्षितिज की यात्राएँ.
  • इसका आयोजन ओमान में इंडिया फाउंडेशन ने ओमान के विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया था. सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस जयशंकर ने किया.
  • विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने मस्कट में सम्मेलन से अलग मॉरीशस, मालदीव, नेपाल, भूटान और श्रीलंका के विदेश मंत्रियों के साथ बैठकें की. अपनी ओमान यात्रा के दौरान डॉ. जयशंकर ने ओमान, ब्रुनेई और ईरान के अपने समकक्षों से भी मुलाकात की.

हिंद महासागर सम्मेलन: एक दृष्टि

  • हिंद महासागर सम्मेलन एक प्रमुख परामर्शी मंच है जो हिन्द महासागर के देशों को साथ लाने का कार्य करता है.
  • सम्मेलन का उद्देश्य क्षेत्र के महत्वपूर्ण देशों और प्रमुख समुद्री साझेदारों को एक साझा मंच पर लाना है, ताकि क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (SAGAR) के लिए क्षेत्रीय सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जा सके.
  • हिंद महासागर सम्मेलन की शुरुआत इंडिया फाउंडेशन ने 2016 में सिंगापुर में की थी, जिसमें 30 देशों ने हिस्सा लिया था.

जर्मनी में 60वां म्‍यूनिख सुरक्षा सम्‍मेलन आयोजित किया गया

  • म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (Munich Security Conference) के 60वें संस्करण का आयोजन 14 से 15 फरवरी 2025 तक किया गया था.
  • म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा चिंताओं को संबोधित करने के लिए कूटनीतिक पहल का एक मंच है. इस मंच की स्थापना वर्ष 1963 में हुआ था. इसका आदर्श वाक्य ‘संवाद के माध्यम से शांति की स्थापना’ है.
  • सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने किया था. उन्होंने नॉर्वे के वित्त मंत्री और म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के मनोनीत अध्यक्ष जेन्स स्टोलटेनबर्ग से मुलाकात की. डॉ जयशंकर ने श्री स्टोलटेनबर्ग के साथ वैश्विक सुरक्षा ढांचे पर महत्‍वपूर्ण बातचीत की.
  • सम्‍मेलन से अलग यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा से मुलाकात की. दोनों नेताओं ने यूक्रेन संघर्ष समाप्‍त करने की दिशा में जारी प्रयासों पर विचार-विमर्श किया.
  • सम्मेलन के दौरान डॉ. जयशंकर ने अर्जेंटीना के विदेश और व्यापार मंत्री गेरार्डो वर्थीन से भी मुलाकात की. उन्होंने वैश्विक मामलों पर भी अपने विचार साझा किए.

पहला एशियाई बौद्ध शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित हुआ

पहला एशियाई बौद्ध शिखर सम्मेलन (First Asian Buddhist Summit) 5 और 6 नवंबर 2024 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया था. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि थीं. सम्मेलन का विषय ‘एशिया को मजबूत बनाने में बुद्ध धम्म की भूमिका’ था.

मुख्य बिन्दु

  • सम्मेलन का उद्देश्य एशिया भर में संघ नेताओं, विद्वानों, विशेषज्ञों को एक साथ लाना ताकि बौद्ध समुदाय के सामने आने वाली समकालीन चुनौतियों का समाधान किया जा सके.
  • सम्मेलन का आयोजन भारत सरकार के केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के सहयोग से किया गया था.
  • बौद्ध धर्म की उत्पत्ति भारत में छठी ईसा पूर्व में हुई थी. नेपाल के लुंबिनी में जन्मे राजकुमार सिद्धार्थ ने बिहार के बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया और उत्तर प्रदेश के सारनाथ में धम्म की मौलिक अवधारणाओं का प्रचार करना शुरू किया, जिसे धम्म चक्र प्रवर्तन कहा जाता है.
  • बौद्ध धर्म भारत से श्रीलंका, दक्षिण पूर्व एशिया, चीन, तिब्बत, जापान और मध्य एशिया में फैल गया.
  • पहला वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन, अप्रैल 2023 में नई दिल्ली में आयोजित किया गया था और इसका उद्घाटन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था.
  • साझा बौद्ध विरासत पर पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा मार्च 2023 में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के सहयोग से आयोजित किया गया था. यह शंघाई सहयोग संगठन की भारतीय अध्यक्षता के हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था.
  • अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ, बौद्ध निकायों का एक वैश्विक छत्र संगठन है जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है. अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में बौद्ध विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देना है.