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Tag Archive for: Supreme Court

सर्वोच्च न्यायालय ने देश में पहली बार इच्छा मृत्यु की अनुमति दी

March 13, 2026/by Team EduDose

भारत के न्यायिक और चिकित्सा इतिहास में 11 मार्च 2026 को एक बेहद ऐतिहासिक फैसला आया है. सर्वोच्च न्यायालय ने देश में पहली बार किसी मरीज के लिए ‘निष्क्रिय इच्छा मृत्यु’ (Passive Euthanasia) की अनुमति दी है.

यह फैसला 2018 के उस ऐतिहासिक आदेश का पहला व्यावहारिक प्रयोग है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने ‘सम्मान के साथ मरने के अधिकार’ (Right to die with dignity) को मौलिक अधिकार माना था.

क्या था मामला?

  • अगस्त 2013 में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिरने के कारण 32 वर्षीय हरीश राणा के सिर में गंभीर चोट आई थी. तब से वह ‘परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट’ (PVS) यानी कोमा जैसी स्थिति में थे. उनके ठीक होने की कोई चिकित्सीय उम्मीद नहीं बची थी.
  • 13 साल तक उनकी देखभाल करने के बाद, उनके माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उनके बेटे को इस कष्टदायक जीवन से मुक्त किया जाए.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

  • यह फैसला जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने सुनाया.
  • अदालत ने हरीश राणा को दी जा रही ‘क्लिनिकली असिस्टेड न्यूट्रिशन एंड हाइड्रेशन’ (CANH) यानी जीवन रक्षक प्रणाली को हटाने की अनुमति दे दी.
  • कोर्ट ने दिल्ली के एम्स अस्पताल को निर्देश दिया है कि हरीश को ‘पेलिएटिव केयर’ (Palliative Care) विभाग में भर्ती किया जाए, ताकि जीवन रक्षक प्रणाली हटाते समय मरीज को कोई दर्द या तकलीफ न हो और उनकी गरिमा पूरी तरह बनी रहे.

‘सक्रिय’ और ‘निष्क्रिय’ इच्छा मृत्यु में अंतर

  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि भारत में सक्रिय इच्छा मृत्यु (Active Euthanasia) आज भी गैरकानूनी और अपराध है.
  • सक्रिय इच्छा मृत्यु में मरीज को मारने के लिए सीधे तौर पर कोई दवा या जहर का इंजेक्शन दिया जाता है.
  • निष्क्रिय इच्छा मृत्यु में मरीज से कृत्रिम रूप से जिंदा रखने वाली मशीनें (जैसे वेंटिलेटर या फीडिंग ट्यूब) हटा ली जाती हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से उसकी मृत्यु हो सके.
  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से ‘निष्क्रिय इच्छा मृत्यु’ पर एक स्पष्ट कानून बनाए जाने को कहा है, ताकि मरीजों के परिवारों को लंबी कानूनी लड़ाई न लड़नी पड़े.

संवैधानिक पहलू

  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘निष्क्रिय इच्छा मृत्यु’ को दी गई मंजूरी का कानूनी आधार संविधान के अनुच्छेद 21 और ‘लिविंग विल’ (Living Will)  के आधार पर है.
  • भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को ‘प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण’ (Right to Life and Personal Liberty) देता है.
  • कोर्ट ने माना कि ‘जीने के अधिकार’ का मतलब सिर्फ सांस लेते रहना नहीं है, बल्कि ‘सम्मान और गरिमा के साथ जीना’ है.
  • यदि कोई व्यक्ति को ऐसी बीमारी है, जहां उसके ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है, और मेडिकल मशीनें केवल उसकी पीड़ा को बढ़ा रही हैं, तो उस जीवन में कोई ‘गरिमा’ नहीं बचती.
  • कोर्ट ने फैसला दिया कि जब गरिमापूर्ण जीवन संभव न रहे, तो ‘गरिमापूर्ण मृत्यु’ भी अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का ही हिस्सा है.
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https://www.edudose.com/wp-content/uploads/2014/05/Logo.png 0 0 Team EduDose https://www.edudose.com/wp-content/uploads/2014/05/Logo.png Team EduDose2026-03-13 20:47:062026-03-16 20:56:35सर्वोच्च न्यायालय ने देश में पहली बार इच्छा मृत्यु की अनुमति दी

सर्वोच्च न्यायालय ने मासिक धर्म स्‍वास्‍थ्‍य को मौलिक अधिकार बताया

February 4, 2026/by Team EduDose

सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में अपने विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से मासिक धर्म स्‍वास्‍थ्‍य (Menstrual Health) को संविधान के तहत मौलिक अधिकार माना है.

मुख्य बिन्दु

न्यायालय ने मासिक धर्म स्वास्थ्य को केवल एक जैविक प्रक्रिया नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा (Dignity), समानता (Equality) और स्वास्थ्य के अधिकार से जोड़ा है. संविधान के तहत, इसे मुख्य रूप से अनुच्छेद 14, 15, 17 और 21 के दायरे में देखा गया है.

मुख्य निर्णय और संवैधानिक पहलुओं का विवरण

इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन बनाम केरल राज्य 2018:

  • कोर्ट ने 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं (मासिक धर्म वाली आयु) के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को असंवैधानिक घोषित किया.
  • जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने अपने ऐतिहासिक मत में कहा कि मासिक धर्म के आधार पर महिलाओं को रोकना ‘अस्पृश्यता’ (Untouchability) का एक रूप है, जो संविधान के अनुच्छेद 17 का उल्लंघन है.
  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जैविक कारणों के आधार पर भेदभाव करना महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है.

जया ठाकुर बनाम भारत संघ 2023-24:

  • कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह देश भर के स्कूलों में छात्राओं के लिए सैनिटरी पैड वितरण, अलग शौचालय और कचरा निपटान की व्यवस्था के लिए एक ‘राष्ट्रीय मासिक धर्म स्वच्छता नीति’ (National Menstrual Hygiene Policy) तैयार करे.
  • कोर्ट ने माना कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता सुविधाओं की कमी लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, जो उनके गरिमामय जीवन जीने के अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है.

मासिक धर्म अवकाश:

कोर्ट ने चिंता जताई कि यदि इसे अनिवार्य किया गया, तो भविष्य में नियोक्ताओं (Employers) द्वारा महिलाओं को काम पर रखने में हिचकिचाहट हो सकती है, जो उनके रोजगार के अधिकार के विपरीत होगा.

संबंधित संवैधानिक अनुच्छेद

अनुच्छेदसंबंध
अनुच्छेद 14कानून के समक्ष समानता; जैविक आधार पर भेदभाव की मनाही.
अनुच्छेद 15लिंग के आधार पर भेदभाव का निषेध.
अनुच्छेद 17मासिक धर्म को ‘अशुद्धता’ मानकर भेदभाव करना अस्पृश्यता के समान है.
अनुच्छेद 21स्वास्थ्य और स्वच्छता के साथ गरिमामय जीवन जीने का अधिकार.
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पाँच उच्च न्यायालयों में नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति

July 16, 2025/by Team EduDose
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुवाहाटी, पटना और झारखंड उच्च न्यायालयों में नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति चार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों का स्थानांतरण किया है.
  • नए नियुक्ति और स्थानांतरित किए जाने वाले न्यायाधीशों के नामों की सिफ़ारिश सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 26 मई 2025 को की थी. कॉलेजियम की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) करते हैं.
  • कॉलेजियम की सिफ़ारिश को राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा यह अधिसूचना जारी की गई थी.

पाँच उच्च न्यायालयों में नए मुख्य न्यायाधीश

  1. मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय: न्यायमूर्ति संजीव सचेदवा को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है. इससे पहले वे इस न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश थे.
  2. पटना उच्च न्यायालय: पटना उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश न्यायमूर्ति विपुल मनुभाई पंचोली को पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद पर पदोन्नत किया गया है.
  3. कर्नाटक उच्च न्यायालय: दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विभु बाखरू को कर्नाटक उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है.
  4. गुवाहाटी उच्च न्यायालय: पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार को गुवाहाटी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है. गुवाहाटी उच्च न्यायालय असम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम का उच्च न्यायालय है.
  5. झारखंड उच्च न्यायालय: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान को झारखंड उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है. वे न्यायमूर्ति एमएस रामचंद्र राव का स्थान लेंगे, जिनका त्रिपुरा उच्च न्यायालय में स्थानांतरण किया गया है.

चार उच्च न्यायालयों में मुख्य न्यायाधीशों का स्थानांतरण

  1. राजस्थान उच्च न्यायालय: न्यायमूर्ति केआर श्रीराम को मद्रास उच्च न्यायालय से राजस्थान उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया है.
  2. तेलंगाना उच्च न्यायालय: न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह को त्रिपुरा उच्च न्यायालय से तेलंगाना उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया है.
  3. त्रिपुरा उच्च न्यायालय: न्यायमूर्ति एमएस रामचंद्र राव को झारखंड उच्च न्यायालय से त्रिपुरा उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया है.
  4. मद्रास उच्च न्यायालय: न्यायमूर्ति मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव को राजस्थान उच्च न्यायालय से मद्रास उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया गया है.

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति : मुख्य तथ्य

  • संविधान के अनुच्छेद 214 से 237 तक में राज्य की न्यापालिका का उल्लेख है. संविधान का अनुच्छेद 214 यह बतलाता है कि प्रत्येक राज्य में एक न्यायालय होगा.
  • संविधान के अनुच्छेद 216 के अनुसार राष्ट्रपति आवश्यकतानुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित करते हैं.
  • अनुच्छेद 217 उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति से सम्बंधित है. राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करता है.
  • राष्ट्रपति किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने से पहले सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम (मुख्‍य न्‍यायाधीश के नेतृत्‍व में बनी वरिष्ठ न्यायाधीशों की समिति) के साथ परामर्श करता है.
  • सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और उस राज्य के राज्यपाल से परामर्श करता है जहाँ उच्च न्यायालय का मुख्य पीठ स्थित है.
  • कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित नाम भारत के राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी होता है.

कॉलेजियम प्रणाली (Collegium System of Supreme Court): एक दृष्टि

  • देश की न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रणाली को कॉलेजियम प्रणाली कहा जाता है.
  • 1990 में सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों के बाद कॉलेजियम प्रणाली बनाई गई थी.
  • कॉलेजियम प्रणाली के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश के नेतृत्‍व में बनी चार वरिष्ठ न्यायाधीशों की समिति, न्यायाधीशों के नियुक्ति का फैसला करती है.
  • सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा स्थानांतरण का फैसला भी कॉलेजियम ही करता है.
  • हाईकोर्ट के कौन से न्यायाधीश पदोन्‍नत होकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे यह फैसला भी कॉलेजियम ही करता है.
  • कॉलेजियम प्रणाली का उल्‍लेखन न तो मूल संविधान में है और न ही उसके किसी संशोधन में.
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न्यायमूर्ति बीआर गवई ने भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली

May 15, 2025/by Team EduDose
  • न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्‍ण गवई ने 14 मई को भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में उन्हें शपथ दिलाई. न्यायमूर्ति गवई ने मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्‍ना का स्थान लिया है जो 13 मई सेवानिवृत्त हो गए.
  • मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई इस पद तक पहुंचने वाले पहले बौद्ध न्यायाधीश हैं. वह पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बाला कृष्णन के बाद अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले भारत के दूसरे मुख्य न्यायाधीश हैं.
  • जस्टिस गवई का कार्यकाल छह महीने का होगा और वह 23 दिसंबर को 65 वर्ष की आयु पूरी करने पर सेवानिवृत्त होंगे.
  • कानून मंत्रालय ने जस्टिस गवई की भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में नियुक्ति की अधिसूचना 29 अप्रैल को जारी की थी.
  • निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनका नाम 16 अप्रैल को सीजेआई खन्ना द्वारा केंद्र सरकार को सिफारिश के रूप में भेजा गया था.

सीजेआई की नियुक्ति की प्रक्रिया

  • संविधान के अनुच्छेद 124 भारत के राष्ट्रपति को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने की शक्ति प्रदान करता है.
  • केंद्रीय विधि मंत्रालय ने वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के अनुशंसा से सीजेआई की नियुक्ति की अधिसूचना जारी करता है. केंद्रीय विधि मंत्रालय वर्तमान मुख्य न्यायाधीश द्वारा अनुशंसित नाम को प्रधानमंत्री के पास भेजता है.
  • राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह के आधार पर भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करते हैं.
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न्यायमूर्ति संजीव खन्ना भारत के 51वें मुख्य़ न्यायाधीश बने

November 12, 2024/by Team EduDose

सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने भारत के 51वें मुख्य़ न्यायाधीश के रूप में  11 नवंबर 2024 को शपथ ली. राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें शपथ दिलाई. न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने न्यायमूर्ति धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ का स्थान लिया, जो 10 नवंबर 2024 को सेवानिवृत्त हो गए थे. न्यायमूर्ति खन्ना 13 मई 2025 को सेवानिवृत्त होंगे, जब वह 65 वर्ष के होंगे.

मुख्य बिन्दु

  • जस्टिस संजीव खन्ना 1983 में दिल्ली बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुए थे. उन्हें 2005 में दिल्ली उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश और 2006 में साइन न्यायाधीश बनाया गया. जनवरी 2019 में उन्‍हें सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया.
  • जस्‍टिस संजीव खन्‍ना सर्वोच्‍च न्‍यायालय के कई ऐतिहासिक निर्णयों का हिस्सा रहे हैं-जैसे अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले को बरकरार रखना, चुनावी बॉन्‍ड योजना को समाप्त करना तथा चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के उपयोग को बरकरार रखना.

भारत के मुख्य न्यायाधीश: एक दृष्टि

  • भारत का मुख्य न्यायधीश (Chief Justice of India) भारतीय न्यायपालिका तथा सर्वोच्च न्यायालय का अध्यक्ष होता है. न्यायमूर्ति श्री एचजे कनिया भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश थे.
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(2) के अनुसार राष्ट्रपति अपनी इच्छानुसार सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सलाह पर मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करते हैं. वहीं अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर करते हैं.
  • सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का वेतन 2,80,000 मासिक और न्यायाधीश का वेतन 2,50,000 मासिक है. इनके लिए वेतन संसद तय करती है जो कि संचित निधि से पारित होती है. न्यायाधीश का कार्यकाल 65 वर्ष की आयु तक होता है.

भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India): एक दृष्टि

  • भारत के सर्वोच्च न्यायालय को 1937 में भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत भारत के संघीय न्यायालय के रूप में स्थापित किया गया था.
  • 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने के बाद संघीय न्यायालय को भारत के सर्वोच्च न्यायालय में परिवर्तित कर दिया गया. भारत का सर्वोच्च न्यायालय 28 जनवरी 1950 को अस्तित्व में आया.
  • भारत के सर्वोच्च न्यायालय में कुल 34 न्यायाधीश होते हैं जिनमें एक मुख्य न्यायाधीश और 33 अन्य न्यायाधीश शामिल हैं. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं.
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सुप्रीम कोर्ट के ध्वज और प्रतीक चिन्ह का अनावरण

September 3, 2024/by Team EduDose

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 1 सितंबर 2024 को सर्वोच्च न्यायालय के ध्वज और प्रतीक चिन्ह का अनावरण किया. सर्वोच्च न्यायालय के 75वीं वर्षगांठ पर नई दिल्ली में आयोजित जिला न्यायपालिका के राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान नए झंडे का अनावरण हुआ.

मुख्य बिन्दु

  • सर्वोच्च कोर्ट के नए झंडे पर संस्कृत भाषा में ‘यतो धर्मस्य ततो जय’ लिखा हुआ है. जिसका अर्थ है ‘जहां धर्म है वही विजय है.
  • इस झंडे के सबसे ऊपर अशोक चक्र, बीच में सुप्रीम कोर्ट की बिल्डिंग और सबसे नीचे संविधान की किताब है.
  • इस नए ध्वज और प्रतीक चिह्न का इस्तेमाल क्रॉस टेबल फ्लैग, सिंगल टेबल फ्लैग, कार फ्लैग, पोल फ्लैग और वुडन फ्रैम में भी किया जाएगा.
  • इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए अदालतों में ‘स्थगन की संस्कृति’ को बदलने के प्रयास किए जाने की जरूरत है.

भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India): एक दृष्टि

भारत के सर्वोच्च न्यायालय को 1937 में भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत भारत के संघीय न्यायालय के रूप में स्थापित किया गया था.

26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने के बाद संघीय न्यायालय को भारत के सर्वोच्च न्यायालय में परिवर्तित कर दिया गया. भारत का सर्वोच्च न्यायालय 28 जनवरी 1950 को अस्तित्व में आया.

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में कुल 34 न्यायाधीश होते हैं जिनमें एक मुख्य न्यायाधीश और 33 अन्य न्यायाधीश शामिल हैं. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं.

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https://www.edudose.com/wp-content/uploads/2014/05/Logo.png 0 0 Team EduDose https://www.edudose.com/wp-content/uploads/2014/05/Logo.png Team EduDose2024-09-03 13:44:392024-09-05 13:31:11सुप्रीम कोर्ट के ध्वज और प्रतीक चिन्ह का अनावरण

सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST वर्ग के आरक्षण में उप-वर्गीकरण की अनुमति दी

August 5, 2024/by Team EduDose

सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त को सुनाए अपने फैसले में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) सूची के भीतर आरक्षण प्रयोजनों के लिए उप-वर्गीकरण (सब कैटेगरी) की मंजूरी दे दी. कोर्ट ने कहा कि अब राज्य सरकार द्वारा अधिक जरूरतमंदों को फायदा देने के लिए उप-वर्गीकरण स्वीकार्य होगा.

मुख्य बिन्दु

  • यह फैसला, दविंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली उच्चतम न्यायालय की सात-न्यायाधीशों की पीठ ने 6:1 के बहुमत से फैसला सुनाया.
  • इस फैसले ने 2004 के ई वी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले में पहले पांच-न्यायाधीशों की पीठ के फैसले को पलट दिया.
  • ई वी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले में, उच्चतम न्यायालय ने कहा गया था कि एससी/एसटी सूची एक समरूप समूह है और इसमें कोई उप-वर्गीकरण नहीं हो सकता है.
  • मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने फैसले में ऐतिहासिक साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित जातियां एक समरूप वर्ग नहीं हैं. उप-वर्गीकरण संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं करता है और न ही संविधान के अनुच्छेद 341(2) का उल्लंघन करता है.
  • उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 15 और 16 में ऐसा कुछ भी नहीं है जो राज्य को किसी जाति को उप-वर्गीकृत करने से रोकता हो.
  • न्यायमूर्ति बीआर गवई ने कहा कि राज्य को अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग में क्रीमी लेयर की पहचान करने तथा उन्हें सकारात्मक आरक्षण के दायरे से बाहर करने के लिए नीति बनानी चाहिए.
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सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर अपना फैसला सुनाया

April 30, 2024/by Team EduDose

सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में दर्ज मतों का वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) पर्चियों के साथ शत-प्रतिशत की मांग करने वाली याचिकाओं पर 26 अप्रैल को अपना निर्णय सुनाया. यह फैसला न्‍यायाधीश संजीव खन्‍ना और दीपांकर दत्‍ता की एक पीठ ने सुनाया.

मुख्य बिन्दु

  • सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपीएटी की पर्चियों के साथ ईवीएम के आंकड़ों के शत-प्रतिशत मिलान वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया.
  • सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने निर्वाचन आयोग के लिए दो निर्देश दिए. न्‍यायालय ने कहा कि ईवीएम में सिंबल्‍स लोड किए जाने के बाद सिंबल लोडिंग यूनिट – एसएलयू को सील करके कंटेनरों में सुरक्षित रख लिया जाना चाहिए.
  • इस सील पर उम्‍मीदवार और उनके प्रति‍निधियों के हस्‍ताक्षर होने चाहिए. सील किए गए कंटेनरों को परिणाम घोषित होने के कम से कम 45 दिनों तक ईवीएम के साथ स्‍टोर रूम में रखा जाना चाहिए. उन्‍हें ईवीएम की तरह ही खोला और सील किया जाना चाहिए.
  • अन्‍य निर्देश में न्‍यायालय ने कहा कि ईवीएम के पांच प्रतिशत में बर्न्‍ट मेमोरी सेमीकंट्रोलर, कंट्रोल यूनिट है. दो या तीन उम्‍मीदवारों के लिखित अनुरोध पर परिणामों की घोषणा के बाद ईवीएम निर्माता के इंजीनियरों द्वारा प्रत्‍येक विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के हिसाब से बैलेट यूनिट और वीवीपीएटी की जांच और सत्‍यापन किया जाना चाहिए.
  • इस प्रकार का अनुरोध परिणामों की घोषणा के बाद सात दिनों के भीतर किया जाना चाहिए. इस प्रकार के अनुरोध पर होने वाले खर्च को उम्मीदवार वहन करेगा. यदि ईवीएम से छेडछाड की गई है तो वह खर्च उम्मीदवार को लौटा दिया जाएगा.
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28 जनवरी 2024 को सर्वोच्च न्यायालय की हीरक जयंती मनाई गई

January 30, 2024/by Team EduDose

28 जनवरी 2024 को सर्वोच्च न्यायालय की हीरक जयंती (75वीं वर्षगांठ) मनाई गई थी. इस अवसर पर दिल्‍ली स्थित न्यायालय सभागार में हीरक जयंती (Diamond Jubilee) समारोह आयोजित किया गया था.

मुख्य बिन्दु

  • इस समारोह का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने किया था. प्रधानमंत्री ने इस समारोह में न्यायिक पहुँच तथा पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से कई नागरिक-केंद्रित सूचना तथा प्रौद्योगिकी पहलों का शुभारंभ किया गया. इन पहलों में डिजिटल सुप्रीम कोर्ट रिपोर्ट (SCR), डिजिटल कोर्ट 2.0 और सर्वोच्‍च न्‍यायालय की नई वेबसाइट की शुरूआत शामिल है.
  • डिजिटल सुप्रीम कोर्ट रिपोर्ट (SCR) में वर्ष 1950 के बाद से सर्वोच्च न्यायालय की रिपोर्ट के सभी 519 खंड उपलब्ध होंगे. इनमें 36 हजार से अधिक मुकदमों का ब्‍यौरा दिया गया है. SCR से सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय नागरिकों को निशुल्‍क डिजिटल रूप में उपलब्ध हो सकेंगे.
  • डिजिटल कोर्ट 2.0, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से न्यायालय की कार्रवाई का वास्तविक समय प्रतिलेखन करने में सहायता करेगा जो कुशल रिकॉर्ड-कीपिंग और न्यायिक प्रक्रियाओं की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण सफलता है.
  • सर्वोच्च न्यायालय की नई वेबसाइट अब द्विभाषी प्रारूप (अंग्रेज़ी व हिंदी) में उपलब्ध है जो न्यायिक जानकारी तक निर्बाध पहुँच के लिये एक उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफेस प्रदान करती है.

सर्वोच्च न्यायालय: एक दृष्टि

  • सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को की गई थी. इसने भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत स्थापित भारत के संघीय न्यायालय का स्थान लिया था.
  • भारतीय संविधान के (भाग V में) अनुच्छेद 124 से 147 तक सर्वोच्च न्यायालय के संगठन, स्वतंत्रता, क्षेत्राधिकार, शक्तियों, प्रक्रियाओं आदि से संबंधित हैं.
  • भारत के सर्वोच्च न्यायालय में भारत के मुख्य न्यायाधीश और 34 अन्य न्यायाधीश शामिल हैं जिनकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है.
  • भारत के मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त किसी भी अन्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिये भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श अनिवार्य है.
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समलैंगिक शादी को कानूनी वैधता पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय का निर्णय

October 18, 2023/by Team EduDose

सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने का अनुरोध करने वाली 21 याचिकाओं पर 17 अक्तूबर को फैसला सुनाया। अपने फैसले में न्‍यायालय ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्‍यता देने के लिए विशेष शादी अधिनियम में संशोधन से इंकार कर दिया है.

मुख्य बिन्दु

  • मुख्‍य न्‍यायाधीश डी.वाई चन्‍द्रचूड की अध्‍यक्षता में पांच न्‍यायाधीशों की पीठ ने केंद्र सरकार की इस दलील पर सहमति व्‍यक्‍त की कि कानून में संशोधन से अन्‍य कानूनों पर असर पड़ सकता है.
  • पीठ के अन्‍य सदस्‍यों में न्‍यायमूर्ति एस.के.कौल, न्‍यायमूर्ति रविन्‍द्र भट्ट, न्‍यायमूर्ति हिमा कोहली तथा न्‍यायमूर्ति पी.एस.नरसिम्‍हा शामिल थे.
  • पीठ सर्वसम्‍मति से देश में समलैंगिक विवाह की अनुमति देने के लिए अधिनियम में संशोधन नहीं करने का फैसला दिया.
  • न्‍यायालय ने केंद्र सरकार को राशन कार्ड, पेंशन, ग्रेच्‍युटी और उत्‍तराधिकारी सहित समलैंगिक जोड़ों की चिंताओं के लिए मंत्रिमंडल सचिव की अध्‍यक्षता में एक उच्‍चस्‍तरीय समिति गठित करने की सलाह दी है.
  • मुख्‍य न्‍यायाधीश ने कहा कि शादी के अधिकार में संशोधन का अधिकार विधायिका के पास है लेकिन समलैंगिक लोगों के पास पार्टनर चुनने और साथ रहने का अधिकार है. इस अधिकार की जड़ें संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और आज़ादी के हक तक जाती हैं.
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उच्चतम न्यायालय ने इच्छा मृत्यु के बारे में अपने आदेश में संशोधन किया

January 26, 2023/by Team EduDose

उच्चतम न्यायालय ने इच्छा मृत्यु के बारे में अपने 2018 के आदेश में संशोधन किया है. न्यायालय ने मरणासन्न रोगियों से लाइफ सपोर्ट हटाने की प्रक्रिया को रोगियों, उनके परिवारों और डॉक्टरों के लिए कम बोझिल बनाने का प्रावधान किया है.

न्यायालय ने उस शर्त को हटा दिया जिसमें एक गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को लाइफ स्पोर्ट हटाने के लिए मजिस्ट्रेट की स्वीकृति अनिवार्य थी.

न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि दस्तावेज़ पर अब ‘लिविंग विल’ पर दो साक्ष्यों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए जाएंगे.

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उच्चतम न्‍यायालय ने विमुद्रीकरण के निर्णय को सही ठहराया

January 3, 2023/by Team EduDose

उच्‍चतम न्‍यायालय ने वर्ष 2016 में 500 और 1000 रुपये के विमुद्रीकरण (Demonetisation) के निर्णय को सही ठहराया है. पांच न्‍याधीशों की संविधान पीठ ने 4:1 बहुमत से केन्द्र सरकार के नोटबंदी के फैसले को चुनौती देने वाली 58 याचिकाओं को खारिज कर दिया.

मुख्य बिन्दु

  • न्यायमूर्ति एसए नज़ीर की अध्यक्षता में, बीआर गवई, एएस बोपन्‍ना, वीपी राम सुब्रह्मण्‍यम और बीवी नागरत्‍न की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ केन्द्र के फैसलों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी.
  • इस फैसले पर न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर, एएस बोपन्ना, बीआर गवई और वी रामासुब्रमण्यम ने केन्‍द्र सरकार के निर्णय को सही ठहराया.  न्यायमूर्ति नागरत्‍न ने फैसले पर असहमति व्यक्त की. इसमें उन्होंने माना कि RBI एक्ट की धारा 26(2) का पूरी तरह पालन किए बिना नोटबंदी लागू की गई. हालांकि, अल्पमत के इस फैसले का कोई व्यवहारिक असर नहीं होगा.
  • सरकार ने शपथपत्र में न्यायालय को बताया था कि नोटबंदी का उद्देश्य नकली नोट, काले धन, कर चोरी और आतंकी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने पर रोक लगाना था.
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