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62वां म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन म्यूनिख में संपन्न हुआ

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (MSC) 2026, 13 से 15 फरवरी 2026 तक जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित हुआ था. यह इस सम्मेलन का 62वां संस्करण था.

सम्मेलन में चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ (जर्मनी), कीर स्टार्मर (यूके), उर्सुला वॉन डेर लेयेन (EC), वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की (यूक्रेन) जैसे प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया.

MSC 2026: मुख्य बिंदु

  • इस साल की म्यूनिख सुरक्षा रिपोर्ट का शीर्षक ‘Under Destruction’ (विनाश के अधीन) रखा गया था. यह रिपोर्ट इस बात पर केंद्रित थी कि कैसे वर्तमान वैश्विक व्यवस्था और नियम धीरे-धीरे टूट रहे हैं.
  • अमेरिका की बदलती नीतियों के बीच यूरोपीय नेताओं (जैसे चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ और कीर स्टार्मर) ने ‘यूरोप फर्स्ट’ और रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने पर जोर दिया.
  • राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने सम्मेलन में भाग लिया और रूसी मिसाइल हमलों से बचाव के लिए पश्चिमी देशों से हवाई रक्षा प्रणालियों (जैसे पैट्रियट मिसाइल) की निरंतर आपूर्ति की मांग की.
  • ईरान में अस्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहन चर्चा हुई. सम्मेलन के दौरान म्यूनिख की सड़कों पर ईरान सरकार के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन भी देखे गए.
  • यह सम्मेलन स्पष्ट करता है कि दुनिया अब एक बहुध्रुवीय (multipolar) व्यवस्था की ओर बढ़ रही है जहाँ पारंपरिक गठबंधन (जैसे NATO) नए दबावों का सामना कर रहे हैं.

भारत की भागीदारी

  • भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सम्मेलन में हिस्सा लिया. उन्होंने वैश्विक संघर्षों के बीच भारत के संतुलित और स्वतंत्र दृष्टिकोण को साझा किया.
  • उन्होंने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के अध्यक्ष वोल्फगैंग इचिंगर से मुलाकात की और विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों में भाग लिया, जिनमें रोमानिया की विदेश मंत्री और जर्मन संसद (बुंडेस्टैग) के नेताओं के साथ मुलाकातें शामिल थीं.

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन: एक दृष्टि

  • म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (Munich Security Conference) कोई औपचारिक निर्णय लेने वाली संस्था नहीं है, बल्कि दुनिया भर के नेताओं के लिए अनौपचारिक रूप से मिलने और वैश्विक संकटों पर बात करने का एक मंच है.
  • यह हर साल फरवरी में जर्मनी के म्यूनिख शहर (होटल बायरिशर होफ) में आयोजित किया जाता है. इसकी शुरुआत 1963 में हुई थी. इस सम्मेलन का मूल मंत्र है ‘Peace through Dialogue’ (संवाद के माध्यम से शांति).
  • इसमें दुनिया भर से राष्ट्राध्यक्ष, विदेश और रक्षा मंत्री, अंतरराष्ट्रीय संगठनों (जैसे UN, NATO, EU) के प्रमुख, खुफिया एजेंसियों के निदेशक आदि शामिल होते हैं.
  • यहाँ नेता बिना किसी सख्त प्रोटोकॉल के जटिल मुद्दों पर चर्चा करते हैं. अक्सर जिन देशों के बीच आधिकारिक संबंध तनावपूर्ण होते हैं, उनके नेता यहाँ निजी तौर पर बातचीत कर सकते हैं.

पारंपरिक चिकित्सा पर WHO का दूसरा वैश्विक शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित

पारंपरिक चिकित्सा पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का दूसरा वैश्विक शिखर सम्मेलन नई दिल्ली के भारत मंडपम में 17-19 दिसंबर 2025 को आयोजित किया गया था. इसमें 100 से अधिक देशों के मंत्रियों, वैज्ञानिकों, पारंपरिक चिकित्सकों और स्वदेशी नेताओं ने भाग लिया.

मुख्य बिन्दु

  • यह शिखर सम्मेलन भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और WHO द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था. यह दूसरा शिखर सम्मेलन था (पहला 2023 में गांधीनगर, गुजरात में हुआ था).
  • सम्मेलन का विषय (Theme)- ‘संतुलन बहाल करना: स्वास्थ्य और कल्याण का विज्ञान और अभ्यास’ (Restoring Balance: The Science and Practice of Health and Well-being) था.
  • अश्वगंधा पर डाक टिकट: इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने हिस्सा लिया था. उन्होंने आयुर्वेद की प्रमुख जड़ी-बूटी ‘अश्वगंधा’ के महत्व को वैश्विक स्तर पर रेखांकित करने के लिए एक स्मारक डाक टिकट जारी किया.
  • आयुष उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक वैश्विक प्रमाणन मानक की शुरुआत की गई.
  • STAG-TM की स्थापना: पारंपरिक और एकीकृत चिकित्सा के लिए एक नए सलाहकार निकाय (Strategic and Technical Advisory Group) की घोषणा की गई.
  • भारत ने पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक कैंसर देखभाल (Integrative Cancer Care) के साथ जोड़ने की प्रतिबद्धता जताई.
  • दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय: इस अवसर पर WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस के साथ प्रधानमंत्री ने दिल्‍ली में नए WHO – दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया. इस कार्यालय में WHO के भारतीय कार्यालय का भी संचालन होगा.
  • प्रधानमंत्री ने योग प्रशिक्षण पर WHO की तकनीकी रिपोर्ट और ‘फ्रॉम रूट्स टू ग्लोबल रीच: 11 इयर्स ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन इन आयुष’ नामक पुस्तक का भी विमोचन किया.

यूनेस्को अंतर-सरकारी समिति का 20वां सत्र भारत की मेजबानी में संपन्न हुआ

यूनेस्को (UNESCO) की ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ (ICH) की सुरक्षा के लिए अंतर-सरकारी समिति का 20वां सत्र (20th Session of UNESCO Intergovernmental Committee) हाल ही में भारत की मेजबानी में संपन्न हुआ है.

यह सत्र 8 से 13 दिसम्बर तक नई दिल्ली के लाल किला में आयोजित किया गया था. इस बैठक की अध्यक्षता यूनेस्को में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि विशाल वी. शर्मा ने की थी.

मुख्य बिन्दु

  • इस आयोजन में 185 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिससे भारत को अपनी समृद्ध विरासत और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का मौका मिला.
  • यह भारत के लिए कूटनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक ऐतिहासिक आयोजन था.
  • इस सत्र के दौरान दुनिया भर से 60 से अधिक सांस्कृतिक धरोहरों के नामांकन पर विचार किया गया.
  • भारत ने इस वर्ष यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची के लिए प्रकाश पर्व दिपावली को नामांकित किया था जिसे इस सूची में शामिल कर लिए गया.

दीपावली यूनेस्को सांस्कृतिक विरासत में शामिल

इस सत्र का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय दीपावली (Deepavali) को ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ (Intangible Cultural Heritage of Humanity) की सूची में शामिल करना रहा.

यह भारत की तरफ से इस सूची में शामिल होने वाला 16वां विरासत है. इस सूची में शामिल कुछ प्रमुख नाम हैं:

  • दीपावली (2025)
  • गुजरात का गरबा (2023)
  • कोलकाता की दुर्गा पूजा (2021)
  • कुंभ मेला (2017)
  • नवरोज (2016)
  • योग (2016)
  • लद्दाख का बौद्ध मंत्रोच्चारण (2012)
  • छऊ नृत्य (2010)
  • रामलीला (2008)
  • कुटियाट्टम (संस्कृत थिएटर) (2008)

भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन की परिषद के लिए पुनः निर्वाचित हुआ

भारत को वर्ष 2026-2027 के द्विवार्षिक कार्यकाल के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की परिषद (Council) के लिए पुनः निर्वाचित किया गया है.

मुख्य बिन्दु

  • यह निर्वाचन दिसंबर 2025 में लंदन में आयोजित IMO की 34वीं आम सभा (Assembly) के दौरान हुआ. भारत IMO की परिषद में सबसे ज़्यादा वोटों के साथ निर्वाचित हुआ. भारत को 169 में से 154 वोट मिले.
  • भारत को श्रेणी ‘बी’ (Category ‘B’) के तहत फिर से चुना गया है. श्रेणी ‘बी’ उन 10 प्रमुख देशों का प्रतिनिधित्व करती है, जिनकी अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार में सबसे अधिक रुचि है. भारत इस श्रेणी के तहत लगातार IMO परिषद का सदस्य रहा है.
  • IMO परिषद में भारत का पुनः निर्वाचन समुद्री क्षेत्र में भारत के बढ़ते प्रभाव, विशेषज्ञता और वैश्विक समुद्री सुरक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) क्या है?

  • अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (International Maritime Organization) संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है जो नौवहन सुरक्षा, सुरक्षा, और जहाजों द्वारा समुद्री और वायुमंडलीय प्रदूषण की रोकथाम के लिए जिम्मेदार है.
  • IMO का मुख्यालय लंदन, यूनाइटेड किंगडम में है. इसका उद्देश्य: अंतर्राष्ट्रीय समुद्री यातायात को नियंत्रित करने वाले मानकों और विनियमों को स्थापित करना.

IMO परिषद के निर्वाचित सदस्य (2026-2027)

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) परिषद के 2026-2027 कार्यकाल के लिए तीनों श्रेणियों (A, B, और C) के लिए चुने गए सदस्यों की सूची इस प्रकार है:

IMO परिषद में कुल 40 सदस्य होते हैं, जिन्हें तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

श्रेणी A: अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सेवाएं प्रदान करने में सबसे अधिक रुचि रखने वाले 10 देश. ये वे देश हैं जो वैश्विक शिपिंग सेवाओं के प्रमुख प्रदाता हैं:

  1. चीन (China)
  2. ग्रीस (Greece)
  3. इटली (Italy)
  4. जापान (Japan)
  5. लाइबेरिया (Liberia)
  6. नॉर्वे (Norway)
  7. पनामा (Panama)
  8. कोरिया गणराज्य (Republic of Korea)
  9. यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom)
  10. संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America)

श्रेणी B: अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार में सबसे अधिक रुचि रखने वाले 10 देश. ये वे देश हैं जिनका अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार सबसे अधिक है. भारत इसी श्रेणी का सदस्य है:

  1. ऑस्ट्रेलिया (Australia)
  2. ब्राजील (Brazil)
  3. कनाडा (Canada)
  4. फ्रांस (France)
  5. जर्मनी (Germany)
  6. भारत (India)
  7. नीदरलैंड (Netherlands)
  8. स्पेन (Spain)
  9. स्वीडन (Sweden)
  10. संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates)

श्रेणी C: समुद्री परिवहन और नौवहन में विशेष रुचि रखने वाले 20 देश. ये वे देश हैं जिनकी समुद्री परिवहन या नौवहन में विशेष रुचि है, और जिनका चुनाव भौगोलिक क्षेत्रों के उचित प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करता है:

  1. बहामास (Bahamas)
  2. बांग्लादेश (Bangladesh)
  3. चिली (Chile)
  4. साइप्रस (Cyprus)
  5. डेनमार्क (Denmark)
  6. मिस्र (Egypt)
  7. फिनलैंड (Finland)
  8. इंडोनेशिया (Indonesia)
  9. जमैका (Jamaica)
  10. केन्या (Kenya)
  11. मलेशिया (Malaysia)
  12. माल्टा (Malta)
  13. मैक्सिको (Mexico)
  14. मोरक्को (Morocco)
  15. पेरू (Peru)
  16. फिलीपींस (Philippines)
  17. कतर (Qatar)
  18. सऊदी अरब (Saudi Arabia)
  19. सिंगापुर (Singapore)
  20. तुर्किये (Türkiye)

IUCN विश्व संरक्षण कांग्रेस 2025 UAE में आयोजित किया गया

IUCN विश्व संरक्षण सम्मेलन (IUCN World Conservation Congress) 9 अक्तूबर से 15 अक्तूबर 2025 तक अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में आयोजित किया गया था.

इस सम्मेलन का थीम ‘परिवर्तनकारी संरक्षण को शक्ति प्रदान करना’ (Powering Transformative Conservation) था.

मुख्य बिन्दु

  • सम्मेलन में एक 20-वर्षीय रणनीतिक विज़न ‘अबू धाबी कॉल टू एक्शन’ जारी किया गया.
  • भारत का प्रतिनिधित्व: भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय राज्य मंत्री (MoS) श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने किया था.
  • भारत ने अपनी जैव विविधता के संरक्षण की स्थिति का आकलन और निगरानी करने के लिए ‘राष्ट्रीय रेड लिस्ट रोडमैप और विज़न 2025-2030’ का अनावरण किया. इसका उद्देश्य IUCN के वैश्विक मानकों के अनुरूप भारत की 11,000 से अधिक प्रजातियों के विलुप्त होने के जोखिम का आकलन करना है.
  • अगला सम्मेलन: अगली IUCN कांग्रेस सितंबर 2027 में पनामा में आयोजित की जाएगी.

आईयूसीएन (IUCN)

  • IUCN का पूर्ण रूप इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (International Union for Conservation of Nature) है. इसकी स्थापना 5 अक्टूबर 1948 को फ्रांस के फॉनटेनब्लियू में हुई थी. इसका मुख्यालय ग्लैंड, स्विट्जरलैंड है.
  • यह प्रकृति के संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग की दिशा में काम करने वाला एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन है. IUCN दुनिया में लुप्तप्राय प्रजातियों की रेड लिस्ट जारी करने के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध है.

IUCN विश्व संरक्षण सम्मेलन

  • IUCN विश्व संरक्षण सम्मेलन दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली संरक्षण कार्यक्रम है, जो हर चार साल में एक बार आयोजित किया जाता है.
  • यह सम्मेलन दुनिया के नेताओं, सरकारों, नागरिक समाज, स्वदेशी लोगों के संगठनों और वैज्ञानिकों को एक साथ लाता है ताकि प्रकृति संरक्षण और सतत विकास से संबंधित वैश्विक प्राथमिकताओं को निर्धारित किया जा सके.

रासायनिक अस्त्र निषेध संगठन की एशियाई क्षेत्र की बैठक नई दिल्ली में आयोजित हुई

  • रासायनिक अस्त्र निषेध संगठन (OPCW) की 23वीं क्षेत्रीय बैठक (एशियाई क्षेत्र) 1 से 3 जुलाई 2025 तक दिल्ली में आयोजित हुई थी. भारत में इसकी मेजबानी राष्ट्रीय रासायनिक हथियार सम्मेलन प्राधिकरण ने इसकी की.
  • बैठक में एशिया क्षेत्र के 24 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें आस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान, चीन, कंबोडिया, इराक, भारत, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, किर्गिस्तान, कुवैत, लेबनान, मलेशिया, म्यांमार, मालदीव, फिलीपींस, ओमान, कोरिया गणराज्य, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और वियतनाम शामिल थे.
  • इस बैठक में OPCW और एशिया और प्रशांत क्षेत्र में शांति और निरस्त्रीकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र क्षेत्रीय केंद्र (UNRCPD) के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया.
  • OPCW बैठक में रासायनिक हथियार सम्मेलन के प्रावधानों को लागू करने में समस्या और संभावित समाधान पर चर्चा किया जाता है.
  • यह बातचीत द्विपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देती है और राष्ट्रीय प्राधिकरणों के बीच नेटवर्क को मजबूत करती है.

रासायनिक अस्त्र निषेध संगठन (OPCW): एक दृष्टि

  • OPCW (रासायनिक अस्त्र निषेध संगठन) रासायनिक अस्‍त्र समझौते (CWC) के लिए कार्यान्वयन निकाय है. यह समझौता 1997 में लागू हुआ था.
  • यह संगठन रासायनिक अस्‍त्रों को स्थायी रूप से समाप्त करने के वैश्विक प्रयास की निगरानी करते हैं.
  • रासायनिक अस्‍त्रों को खत्म करने में अपने व्यापक प्रयासों के लिए OPCW को 2013 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया था.
  • OPCW सम्मेलन दुनिया में रासायनिक हथियारों के उत्पादन, भंडारण और उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाता है.
  • OPCW के 193 सदस्य देश हैं. जिन देशों ने सम्मेलन पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं- अंगोला, दक्षिण सूडान, मिस्र और उत्तर कोरिया.
  • OPCW का मुख्यालय द हेग, नीदरलैंड में है.

IBCA की पहली बैठक दिल्ली में आयोजित, भूपेंद्र यादव अध्यक्ष चुने गए

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को सर्वसम्मति से इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) का अध्यक्ष चुना गया है.

IBCA की पहली बैठक

  • IBCA की पहली बैठक 16 जून 2025 को नई दिल्ली में आयोजित की गई थी. इसकी अध्यक्षता भूपेन्द्र यादव ने की. बैठक में भूपेंद्र यादव को IBCA का अध्यक्ष चुना गया.
  • वर्तमान में नौ देश – भारत, भूटान, गिनी, लाइबेरिया, सूरीनाम, कंबोडिया, एस्वातिनी, सोमालिया और कजाकिस्तान- इस संगठन के सदस्य हैं. इन सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व उनके मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों द्वारा किया गया.

अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट अलायंस: एक दृष्टि

  • अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट अलायंस (International Big Cat Alliance), भारत की एक पहल है जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 अप्रैल 2023 को कर्नाटक के मैसूर में प्रोजेक्ट टाइगर की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में की थी.
  • यह 96 बिग कैट रेंज देशों और गैर-रेंज देशों का एक बहु-देशीय, बहु-एजेंसी गठबंधन है जिसका उद्देश्य 7 बिग कैट और उनके आवासों का संरक्षण करना है.
  • इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) की औपचारिक स्थापना भारत सरकार द्वारा मार्च 2024 में की गई थी.
  • IBCA 23 जनवरी 2025 को अस्तित्व में आया, जब इसको न्यूनतम आवश्यक देशों द्वारा अनुमोदित कर दिया गया.
  • IBCA का स्थायी सचिवालय भारत में स्थापित किया जाएगा. IBCA की सभा, सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है.
  • IBCA का उद्देश्य सात बिग कैट (सात बड़ी बिल्लियों) के संरक्षण में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना.
  • सात बिग कैट (सात बड़ी बिल्लियों) में शामिल हैं:
  1. बाघ (पैंथेरा टाइग्रिस)
  2. शेर (पैंथेरा लियो)
  3. तेंदुआ (पैंथेरा पार्डस)
  4. प्यूमा (प्यूमा कॉनकोलर)
  5. जगुआर (पैंथेरा ओनका)
  6. हिम तेंदुआ (पैंथेरा यूनिया)
  7. चीता (एसिनोनिक्स जुबेटस)

भारत में प्यूमा और जगुआर नहीं पाए जाते हैं.

भारत के दो स्थलों को रामसर धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया गया

  • रामसर कन्वेंशन (Ramsar Convention) के तहत भारत के दो और ऐतिहासिक आर्द्रभूमि स्थलों को रामसर धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया गया है. इसके साथ ही भारत में रामसर स्‍थलों की संख्‍या 91 हो गई है.
  • राजस्थान के फलौदी में खीचन और उदयपुर में मेनार आर्द्रभूमि को रामसर स्थलों की प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया है.
  • रामसर सूची का उद्देश्य वैश्विक जैव विविधता का संरक्षण और मानव जीवन को बनाए रखना है.

रामसर स्थल: एक दृष्टि

  • अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि (वेटलैंड) को रामसर स्थल कहा जाता है. रामसर स्थल पानी में स्थित मौसमी या स्थायी पारिस्थितिक तंत्र हैं.
  • इनमें मैंग्रोव, दलदल, नदियाँ, झीलें, डेल्टा, बाढ़ के मैदान और बाढ़ के जंगल, चावल के खेत, प्रवाल भित्तियाँ, समुद्री क्षेत्र (6 मीटर से कम ऊँचे ज्वार वाले स्थान) के अलावा मानव निर्मित आर्द्रभूमि जैसे- अपशिष्ट जल उपचार तालाब और जलाशय आदि शामिल होते हैं.
  • आर्द्रभूमियां प्राकृतिक पर्यावरण का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं. ये बाढ़ की घटनाओं में कमी लाती हैं, तटीय इलाकों की रक्षा करती हैं, साथ ही प्रदूषकों को अवशोषित कर पानी की गुणवत्ता में सुधार करती हैं.
  • आर्द्रभूमि मानव और पृथ्वी के लिये महत्त्वपूर्ण हैं. 1 बिलियन से अधिक लोग जीवनयापन के लिये उन पर निर्भर हैं और दुनिया की 40% प्रजातियाँ आर्द्रभूमि में रहती हैं तथा प्रजनन करती हैं.

रामसर स्थल का दर्जा

  • रामसर स्थल का दर्जा उन आर्द्रभूमियों को दिया जाता है जो रामसर कन्वेंशन (Ramsar Convention) के मानकों को पूरा करते हैं.
  • रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमि के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संधि है. यह आर्द्रभूमि एवं उनके संसाधनों के संरक्षण तथा उचित उपयोग हेतु राष्ट्रीय कार्रवाई और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिये रूपरेखा प्रदान करती है.
  • रामसर स्थल नाम कैस्पियन सागर पर स्थित ईरानी शहर रामसर के नाम पर रखा गया है क्योंकि यहीं 02 फरवरी 1971 को रामसर कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए गए थे. भारत ने इस संधि पर 1 फरवरी 1982 को हस्ताक्षर किये थे.
  • रामसर स्थलों की सूची रामसर सम्मेलन के सचिवालय द्वारा रखी जाती है, जो स्विट्जरलैंड के ग्लैंड में स्थित अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) मुख्यालय में स्थित है.
  • रामसर साइट का दर्जा प्राप्त आर्द्रभूमि अंतरराष्ट्रीय महत्व रखते हैं और उनके संरक्षण और उनके संसाधनों के इस्तेमाल के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्राप्त होता है.
  • दुनिया भर में रामसर साइट की संख्या 2,500 से ज्यादा है, जो करीब 25 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा के क्षेत्र में फैले हैं.

भारत और विश्व में रामसर स्थल

  • भारत में अब कुल 91 रामसर स्थल हैं जो देश की कुल भूमि का लगभग 5% है. ये क्षेत्र देश के 13.58 लाख हैक्‍टेयर भूमि में फैले हैं.
  • आर्द्रभूमि के राज्य-वार वितरण में तमिलनाडु (20 रामसर स्थल) पहले और गुजरात दूसरे स्थान पर है (एक लंबी तटरेखा के कारण). इसके बाद आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल का स्थान है.
  • प्रथम भारतीय रामसर स्थल- केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान) और चिल्का झील (ओडिशा) है, जिसे 1981 में शामिल किया गया था.
  • भारत में सबसे बड़ा रामसर स्थल पश्चिम बंगाल का सुंदरबन और सबसे छोटा रामसर हिमाचल प्रदेश में रेणुका है.
  • भारत के इंदौर और उदयपुर को ‘वेटलैंड (आर्द्र भूमि) सिटी’ का दर्जा दिया गया है. यह उपलब्धि हासिल करने वाले ये भारत के पहले शहर हैं. दुनिया भर में कुल 31 शहरों को ‘वेटलैंड सिटी’ का दर्जा प्राप्त है.
  • रामसर सूची के अनुसार, सबसे अधिक रामसर स्थलों वाले देश यूनाइटेड किंगडम (175) और मेंक्सिको (144) हैं.
  • विश्व में अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमि का क्षेत्रफल 150,000 वर्ग किमी से अधिक है. विश्व में सबसे बड़ा आर्द्रभूमि का क्षेत्र ब्राजील का है, जिसका 267,000 वर्ग किमी क्षेत्र आता है.

भारत यूरोड्रोन कार्यक्रम में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हुआ

  • भारत आधिकारिक तौर पर एक पर्यवेक्षक राष्ट्र के रूप में यूरोप के मल्टीनेशनल ‘यूरोड्रोन’ (Eurodrone) कार्यक्रम में शामिल हो गया है.
  • यह घोषणा ऑर्गनाइजेशन ऑफ ज्वाइंट आर्मामेंट कोऑपरेशन (OCCAR) ने हाल ही में की है. OCCAR के निदेशक जोआचिम सकर ने 21 जनवरी को बर्लिन में भारतीय दूतावास को पर्यवेक्षक राष्ट्र का स्वीकृति पत्र सौंपा.
  • यूरोड्रोन में यूरोप की कई प्रमुख कंपनियां शामिल है. यह मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्यूरेंस (MALE) रिमोटली पायलटेड एयर सिस्टम (RPAS) कार्यक्रम है.
  • इस प्रोग्राम में शामिल होने से भारतीय रक्षा उद्योगों को फायदा होने की उम्मीद है. इससे भारत को यूरोप की स्टेट ऑफ ऑर्ट रक्षा तकनीक के मिलने की संभावना भी कई गुना ज्यादा बढ़ जाएगी.
  • OCCAR यूरोप की कई प्रमुख डिफेंस प्रोजेक्ट की देखरेख करता है. इनमें A400M एटलस एयरलिफ्टर, बॉक्सर आर्मर्ड यूटिलिटी व्हीकल, टाइगर अटैक हेलीकॉप्टर और होराइजन मिड-लाइफ अपग्रेड (MLU)/FREMM मल्टीरोल फ्रिगेट शामिल हैं.
  • भारत अब जापान के बाद यूरोड्रोन कार्यक्रम में पर्यवेक्षक का दर्जा पाने वाला दूसरा एशिया-प्रशांत देश बन गया है.
  • पर्यवेक्षक बनने से भारत को यूरोड्रोन के तकनीकी डेटा तक पहुंच और विमानों के लिए ऑर्डर देने की क्षमता बढ़ जाएगी. हालांकि, पर्यवेक्षक देश प्लेटफ़ॉर्म के डिज़ाइन, विकास या भाग लेने वाले देशों के बीच वर्कशेयर के वितरण के बारे में निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल नहीं होते हैं.
  • यूरोड्रोन चार-देशीय पहल है, जिसमें जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन शामिल हैं. 2016 में शुरू किए गए यूरोड्रोन कार्यक्रम का अनुमानित मूल्य €7 बिलियन ($7.3 बिलियन) है. एयरबस, डसॉल्ट और लियोनार्डो जैसे प्रमुख उद्योग भागीदार इस परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं.

इंडोनेशिया BRICS समूह का पूर्ण सदस्य बना

  • इंडोनेशिया को BRICS समूह का पूर्ण सदस्य स्वीकार कर लिया गया है. इसकी घोषणा BRICS समूह के वर्तमान अध्यक्ष देश ब्राज़ील ने 6 जनवरी 2024 को की थी.
  • अगस्त 2023 में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान BRICS सदस्य देशों ने इंडोनेशिया की सदस्यता को स्वीकृति दी थी.
  • इंडोनेशिया की सदस्यता, दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते, यह BRICS की एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिति को मजबूत करेगा.
  • इंडोनेशिया वैश्विक व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने का समर्थन करता है, जो BRICS का एक प्रमुख उद्देश्य है.

जानिए क्या है ब्रिक्स और इसकी अहमियत…»

नई दिल्ली में ITU के कार्यालय और नवाचार केंद्र का लोकापर्ण, 6G मिशन का अनावरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के क्षेत्रीय कार्यालय और नवाचार केंद्र का लोकापर्ण किया. यह सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष संस्‍था है जिसका मुख्यालय जिनेवा में है.

मुख्य बिन्दु

  • भारत ने क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना के लिए आईटीयू के साथ मार्च 2022 में एक मेजबान देश के रूप में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.
  • भारत द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित यह क्षेत्रीय कार्यालय दिल्ली के महरौली में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) भवन में स्थित है.
  • ITU क्षेत्रीय कार्यालय भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालद्वीव, अफगानिस्तान और ईरान को सेवा प्रदान करेगा, राष्ट्रों के बीच समन्वय बढाएगा और क्षेत्र में पारस्परिक रूप से लाभदायक आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहन देगा.

6G मिशन का अनावरण

  • प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान भारत 6G दृष्टिपत्र का अनावरण किया और 6G अनुसंधान और विकास केंद्र का शुभारंभ भी किया.
  • यह मिशन दो चरणों में 2030 तक चलेगा. यह भारत को 6G R&D, मैन्युफैक्चरिंग हब बनाएगा. 6G 1Tbps की स्पीड के साथ, 5G से 100 गुना तेज होगा.

भारत, वासेनार व्यवस्था की अध्यक्षता पहली जनवरी को संभालेगा

भारत, वासेनार व्यवस्था (Wassenaar Arrangement-WA) की अध्यक्षता पहली जनवरी को संभालेगा. वासेनार व्यवस्था बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण प्रशासन है जिसमें सदस्य देश पारम्‍परिक हथियारों के हस्तांतरण जैसे विभिन्न मुद्दों पर सूचना का आदान-प्रदान करते हैं.

भारत 7 दिसम्बर 2017 को वासेनार व्यवस्था का 42वां सदस्य बना था.

भारत के निर्यात नियंत्रण प्रशासन में प्रवेश से परमाणु अप्रसार क्षेत्र में देश की साख बढे़गी, हालांकि भारत परमाणु अप्रसार संधि का सदस्य नहीं है. जानिए क्या है वासेनार अरेंजमेंट…»