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पहली बार मानव में सूअर के हृदय का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया

पहली बार मानव में सूअर के हृदय का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया है. यह प्रत्यारोपण अमेरिका के यूनिवर्सिटी आफ मैरीलैंड मेडिकल स्कूल के शल्य चिकित्सक डॉ. बार्टले ग्रिफिथ ने की. इस प्रत्यारोपण में 57 साल के एक व्यक्ति में आनुवंशिक रूप से परिवर्तित एक सूअर का दिल प्रत्यारोपण किया गया.

अमेरिका के दवा नियामक (FDA) ने इस सर्जरी के लिए 31 दिसम्बर 2021 को मंजूरी दी थी. सूअर के दिल के प्रत्यारोपण की यह आपात मंजूरी 57 साल के पीड़ित व्यक्ति डेविड बेनेट की जान बचाने के लिए अंतिम उपाय के रूप में दी गयी थी.

इस प्रत्यारोपण से हृदय की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लाखों लोग के दिल के प्रत्यारोपण का नया रास्ता खुल गया है. यह शल्य चिकित्सा पशुओं के अंगों के इंसान में प्रत्यारोपण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी.

बेनेट का परंपरागत रूप से होने वाले हृदय प्रत्यारोपण नहीं हो सकता था, इसलिए अमेरिकी चिकित्सकों ने यह बड़ा फैसला लेकर सूअर का दिल प्रत्यारोपित कर दिया.

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने स्वदेशी कोविड रोधी टीके कोवैक्‍सीन को मंजूरी दी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्वदेशी कोविड रोधी टीके को-वैक्सीन (Covaxin) के आपात उपयोग की अनुमति दी है. जी-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने को-वैक्‍सीन को WHO की मंजूरी दिए जाने पर  बल दिया था. उन्‍होंने कहा था कि भारत 2022 तक कोविड की 500 करोड़ वैक्सीन का उत्पादन करेगा.

को-वैक्सीन को भारत बायोटेक और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने मिलकर बनाया है. WHO ने को-वैक्सीन से पहले फाइजर-बायोएनटेक, एस्ट्राजेनेका/SII कोविशील्ड, जॉनसन एंड जॉनसन, मॉडर्ना और सिनोफार्म के कोविड रोधी टीकों को आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दी थी.

प्रधानमंत्री ने भारतीय अंतरिक्ष संघ का शुभारंभ किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 अक्तूबर को ‘भारतीय अंतरिक्ष संघ’ (Indian Space Association – ISpA) का शुभारंभ किया था. ISpA अंतरिक्ष और उपग्रह कंपनियों का प्रमुख उद्योग संगठन है जो भारतीय अंतरिक्ष उद्योग का सामूहिक प्रतिनिधि होगा.

मुख्य बिंदु

भारतीय अंतरिक्ष संघ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप देश को स्‍वालम्‍बी, प्रौद्योगिकी-सक्षम और प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति बनाने में सहयोग देगा.

ISpA के संस्थापक सदस्यों में नेल्को (टाटा समूह), भारती एयरटेल, लार्सन एंड टुब्रो, मैपमायइंडिया, वनवेब, वालचंदनगर इंडस्ट्रीज और अनंत टेक्नोलॉजी लिमिटेड शामिल हैं. मुख्य सदस्यों में BEL, गोदरेज, ह्यूजेस इंडिया, सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स, एज़िस्टा-BST एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड और मैक्सार इंडिया शामिल हैं.

ISpA के प्रथम अध्यक्ष जयंत पाटिल (एलएंडटी-एनएक्सटी रक्षा के वरिष्ठ कार्यकारी उपाध्यक्ष) होंगे.

ISpA क्या है?

ISpA देश में अंतरिक्ष और उपग्रह कंपनियों के लिए एक प्रमुख उद्योग निकाय के रूप में कार्य करेगा. यह भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेगा, जिसमें भारत में क्षमता निर्माण और अंतरिक्ष आर्थिक हब और इन्क्यूबेटरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.

WHO ने विश्व की पहली मलेरिया वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी दी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मलेरिया के खिलाफ विश्व की पहली वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी दी है. इस वैक्सीन का नाम ‘RTS,S/AS01’ है. WHO ने यह निर्णय घाना, केन्या और मलावी में 2019 से चल रहे एक पायलट प्रोग्राम (प्रायोगिक कार्यक्रम) की समीक्षा के बाद लिया है. यहां वैक्सीन की 20 लाख से अधिक खुराक दी गई थीं, जिसे पहली बार 1987 में दवा कंपनी GSK द्वारा बनाया गया था.

मुख्य बिंदु

  • वायरस और बैक्टीरिया के खिलाफ कई टीके मौजूद हैं, लेकिन यह पहली बार है जब WHO ने मानव परजीवी के खिलाफ व्यापक उपयोग के लिए एक टीके की सिफारिश की है. यह टीका प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (Plasmodium falciparum) के खिलाफ काम करता है, जो पांच परजीवी प्रजातियों में से एक और सबसे घातक है.
  • उप-सहारा अफ्रीका मलेरिया से सबसे अधिक प्रभावित है. मलेरिया से एक वर्ष में दुनियाभर में चार लाख से अधिक लोगों की मौत होती है, जिनमें ज्यादातर अफ्रीकी बच्चे शामिल हैं.
  • मलेरिया के लक्षणों में बुखार, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना, बुखार और पसीना आना शामिल हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर दो मिनट में एक बच्चे की मलेरिया से मौत होती है.

कई अमेरिकी अधिकारी हवाना सिंड्रोम से पीड़ित, जानिए क्या है हवाना सिंड्रोम

हाल के दिनों में कई अमेरिकी अधिकारी हवाना सिंड्रोम से पीड़ित हुए हैं. अमेरिकी सीआईए डायरेक्टर बिल बर्न्स हाल में भारत के दौरे पर थे. इस दौरे पर बर्न्स की टीम के एक सदस्य में हवाना सिंड्रोम के लक्षण दिखाई दिए हैं.

क्या है हवाना सिंड्रोम?

2016 में अमेरिकी खुफिया के कई अधिकारी और राजनयिक क्यूबा की राजधानी हवाना में थे. इस दौरान कई कर्मचारियों को मिचली, तेज सिरदर्द, थकान, चक्कर आने की दिक्कतें आने लगी. कई कर्मचारी को नींद की समस्या भी दिखी. इस सबका लंबे वक्त तक असर रहा. इस रहस्यमय बीमारी से प्रभावित कर्मचारियों में से तो कुछ तो ठीक हो गए लेकिन कई लोगों के सामान्य काम-काज भी महीनों तक प्रभावित रहे. इसे हवाना सिंड्रोम कहा गया.

अमेरिका इस रहस्यमय बीमारी के बारे में जांच करता रहा है. 2020 में अमेरिकी नेशनल एकेडमिक्स ऑफ़ साइंसेज ने हवाना सिंड्रोम का संभावित कारण डायरेक्टेड माइक्रोवेव रेडिएशन को बताया था. हालांकि यह अब तक साफ नहीं हो सका है कि ये इंसान की जान ले सकते हैं या स्थायी नुकसान पहुंचा सकते हैं.

रूस, चीन, यूरोप सहित कई एशियाई देशों में तैनात अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के साथ भी ऐसा हो चुका है. कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इसके हवाना सिंड्रोम के पीछे रूसी खुफिया एजेंसी का हाथ है. हालांकि अमेरिकी सरकार ने इस सिंड्रोम को लेकर आधिकारिक तौर पर अभी तक किसी भी देश का नाम नहीं लिया है.

देश के पहले ‘क्वांटम कंप्यूटर सिम्युलेटर टूलकिट’ लांच किया गया

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने स्वदेश विकसित देश के पहले ‘क्वांटम कंप्यूटर सिम्युलेटर (QSim) टूलकिट’ लांच किया है. इसका विकास IIT रुड़की, IISC बंगलूरू और सी-डैक की साझा पहल से किया गया है.

QSim: मुख्य बिंदु

QSim (Quantum Computer Simulator) पहला स्वदेशी टूलकिट है. इससे प्रोग्रामिंग के व्यावहारिक पहलुओं को सीखने और समझने में मदद मिलेगी. इसे भारत में क्वांटम कंप्यूटिंग अनुसंधान के नए युग की शुरुआत माना जा रहा है. साथ ही शोधकर्ताओं और छात्रों को कम खर्च पर क्वांटम कंप्यूटिंग में बेहतर शोध करने का अवसर मिलेगा.

क्वांटम कंप्यूटिंग से क्रिप्टोग्राफी, कंप्यूटेशनल केमिस्ट्री और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में कंप्यूटिंग पावर में कई गुनी वृद्धि की संभावना है.

पेगासस जासूसी आरोप, जानिए क्या है पेगासस और कैसे काम करता है

हाल के दिनों में पेगासस जासूसी (Pegasus Spyware) आरोप चर्चा में है. एक वैश्विक सहयोगी जांच परियोजना से पता चला है कि इजरायली कंपनी, एनएसओ ग्रुप (NSO Group) के पेगासस स्पाइवेयर से भारत में 300 से अधिक मोबाइल नंबरों को टारगेट किया गया, जिसमें वर्तमान सरकार के दो मंत्री, तीन विपक्षी नेता, एक जज, कई पत्रकार और व्यवसायी शामिल हैं. सरकार ने इन आरोपों को आधारहीन बताया है.

हालाँकि, डेटाबेस में फोन नंबर की मौजूदगी मात्र इस बात की पुष्टि नहीं करती है कि संबंधित डिवाइस पेगासस से संक्रमित हुए या सिर्फ हैक करने का प्रयास किया गया.

पेगासस क्या है?

पेगासस इजराइल के एनएसओ ग्रुप (NSO Group) द्वारा विकसित एक स्पाइवेयर (spyware) मोबाइल App है. यह App लोगों के फोन के जरिए उनकी जासूसी करते हैं. पेगासस एक लिंक भेजता है और यदि उपयोगकर्ता लिंक पर क्लिक करता है, तो उसके फोन पर पेगासस इंस्टॉल हो जाता है.

एक बार पेगासस इंस्टॉल हो जाने के बाद यह उस मोबाइल के मैसेजिंग ऐप से पासवर्ड, संपर्क सूची, कैलेंडर ईवेंट, टेक्स्ट संदेश और लाइव वॉयस कॉल सहित उपयोगकर्ता के निजी डेटा को चुरा सकता है. फोन के आसपास की सभी गतिविधियों को रिकॉर्ड करने के लिए फोन कैमरा और माइक्रोफोन को भी चालू किया जा सकता है.

जेफ बेजोस ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा पूरी की

दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति जेफ बेजोस (Jeff Bezos) ने 20 जुलाई को अपनी अंतरिक्ष यात्रा पूरी की. वह सिर्फ 11 मिनट के भीतर अंतरिक्ष की यात्रा कर धरती पर लौट आए. उनके साथ 3 और यात्री थे. इनमें एक उनके भाई मार्क, 82 साल की वैली फंक और 18 साल के ओलिवर डेमेन शामिल थे.

मुख्य बिंदु

  • जेफ बेजोस ने यह अंतरिक्ष यात्रा अपनी स्पेस कंपनी ‘ब्लू ओरिजिन’ (Blue Origin) के स्पेसशिप ‘न्यू शेपर्ड’ (New Shepard) और कैप्सूल के माध्यम से की. यह न्यू शेपर्ड रॉकेट की कुल 16वीं उड़ान और अंतरिक्ष यात्रियों के साथ पहली उड़ान थी. न्यू शेपर्ड पूरी तरह स्वचालित रॉकेट विमान है, जिसे भीतर से नहीं चलाया जा सकता.
  • ‘न्यू शेपर्ड’ स्पेसशिप को बनाने में भारतीय संजल गावंडे ने अहम भूमिका निभाई है. 30 वर्षीय संजल गावंडे महाराष्ट्र के एक छोटे से शहर कल्याण की रहने वाली हैं.
  • जेफ बेजोस अमेजन संस्थापक हैं. वह दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं. जेफ बेजोस की कुल दौलत 206 बिलियन डॉलर के करीब है.
  • 11 जुलाई को अमेरिकी अंतरक्षि यान कंपनी वर्जिन गैलेक्टिक (Virgin Galactic) के रिचर्ड ब्रेनसन सहित छह लोगों ने अंतरिक्ष की यात्रा की थी. इन्हीं छह लोगों में भारतीय मूल की सिरिशा बांदला का नाम भी शामिल था.

भारत में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, जानिए क्या है ब्लैक फंगस

इन दिनों भारत में कोरोना वायरस के साथ ही ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. कोविड-19 के साथ-साथ फंगल संक्रमण भी हो सकता है, खासकर उन लोगों को जो पहले से ही गंभीर रोगों से पीड़ित हैं या जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है.

ब्लैक फंगस का वैज्ञानिक नाम ‘म्यूकोरमायकोसिस’ है. फिलहाल देश के कई राज्यों में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. एक रिपोर्ट के अनुसार, कोविड ​​​​-19 के साथ-साथ यह फंगल संक्रमण उन लोगों में होता है, जिन्हें मधुमेह या HIV जैसी मौजूदा बीमारियां हैं.

दुर्लभ किस्म की यह बीमारी आंखों में होने पर मरीज की रोशनी के लिए घातक साबित हो रही है. यह शरीर में बहुत तेजी से फैलती है. इस बीमारी से शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं.

ब्लैक फंगस के लक्षण

विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लैक फंगस के कारण सिर दर्द, बुखार, आंखों में दर्द, नाक बंद या साइनस के अलावा देखने की क्षमता पर भी असर पड़ता है.

अन्तरिक्ष यान वोयेजर-1 ने अन्तरिक्ष से आती के ध्वनि का पता लगाया

अमेरिकी अन्तरिक्ष एजेंसी (NASA) के अन्तरिक्ष यान (spacecraft) वोयेजर-1 (Voyager-1) ने अन्तरिक्ष से आती से आती भिनभिनाने की ध्वनि (humming sound) का पता लगाया है. इस ध्वनि का पता वोयेजर के प्लाज्मा वेव सिस्टम इंस्ट्रूमेंट द्वारा पता लगाया गया है.

वैज्ञानिकों ने इसे तारे के बीच अन्तरिक्ष (interstellar space) में थोड़े मात्रा में गैस की मौजूदगी के कारण बताया है. इस आवाज को “प्लाज्मा वेव परसिस्‌टन्‍ट्‌” (persistent plasma waves) नाम दिया गया है. यह ध्वनि तब सुनी गयी जब वोयेजर-1 ने हेलियोस्फीयर से बाहर निकलकर इंटरस्टेलर स्पेस में प्रवेश किया.

वोयेजर-1 (Voyager-1) क्या है?

वोयेजर-1 (Voyager-1), अमेरिकी अन्तरिक्ष एजेंसी (NASA) का एक अन्तरिक्ष यान (spacecraft) है, जिसे 1977 में प्रक्षेपित किया गया था. इसे बाहरी सौर मंडल और रास्ते में आने वाले शनि और बृहस्पति जैसे ग्रहों का अध्ययन करने के लिए भेजा गया था. वोयेजर-1 अन्तरिक्ष यान 44 वर्षों से लगातार सेवा कर रहा है.

NASA के इन्जेन्यूटी हेलिकॉप्टर ने मंगल पर कई सफल उड़ानें पूरी की

अमेरिका की स्पेस एजेंसी (NASA) के हेलिकॉप्टर इन्जेन्यूटी (Ingenuity) ने मंगल ग्रह पर अब तक कई सफल उड़ानें पूरी कर ली हैं. NASA ने मंगल ग्रह के अध्ययन के लिए इन्जेन्यूटी हेलिकॉप्टर और परसेवरांस रोवर (Perseverance rover) के हाल ही में भेजा था.

NASA ने मंगल पर इन्जेन्यूटी हेलिकॉप्टर के उड़ान का हाल ही में विडियो जारी किया है. यह विडियो मंगल गृह की सतह से परसेवरांस रोवर (Perseverance rover) द्वारा रिकॉर्ड किया गया है. तीन मिनट के इस में जेजेरो क्रेटर (Jezero crater) में बहने वाली हवाओं को दिखाया गया है. परसेवरांस रोवर ने मंगल ग्रह के जेजेरो क्रेटर पर लैंडिंग की थी.

हेलिकॉप्टर इन्जेन्यूटी ने अपनी पांचवी उड़ान (फ्लाइट) के दौरान मंगल ग्रह के करीब 10 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचा. इस हेलिकॉप्टर ने मंगल पर लैंड होने से पहले हाई-रेजॉलूशन तस्वीरें भी लीं.

चौथी फ्लाइट के दौरान NASA को हेलिकॉप्टर की आवाज भी सुनाई दी. यह आवाज थी इन्जेन्यूटी के रोटर ब्लेड्स की थी. यह 262 फीट दूर खड़े परसेवरांस रोवर से रिकॉर्ड की हुई थी. पृथ्वी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी ग्रह पर आवाज रिकॉर्ड की गयी हो.

नासा का मार्स मिशन (Mars Mission) 2020

अमेरिकी अन्तरिक्ष एजेंसी (NASA) ने मंगल ग्रह के अध्ययन के लिए जुलाई 2020 में मार्स मिशन (Mars Mission) 2020 शुरू की थी. इस मिशन में नासा ने इन्जेन्यूटी हेलिकॉप्टर और परसेवरांस रोवर (Perseverance rover) को मंगल गृह पर भेजा था. इस मिशन को ‘एटलस वी लॉन्च वाहन’ (Atlas V Launch Vehicle) से प्रक्षेपित किया गया था.

NASA के पार्कर सोलर प्रोब ने पहली बार शुक्र ग्रह से आ रही आवाज रिकॉर्ड की

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के पार्कर सोलर प्रोब ने शुक्र ग्रह से आ रही आवाज और रेडियो सिग्नल को रिकॉर्ड किया है. यह आवाज शुक्र के ऊपरी वातावरण से आ रही थी.

नासा ने पार्कर सोलर प्रोब को सूरज का अध्ययन करने के लिए भेजा था. सूरज की परिक्रमा करते हुए जब यह प्रोब शुक्र के ऊपर से गुजरा तो उसने इस भयंकर आवाज को सुना.

पार्कर सोलर प्रोब ने इस आवाज को शुक्र के करीब से तीसरी बार उड़ने के दौरान 11 जुलाई 2020 को रिकॉर्ड किया था. उस समय पार्कर प्रोब और शुक्र के बीच की दूरी मात्र 832 किलोमीटर ही थी. इससे पहले भी पार्कर प्रोब ने शुक्र के करीब से दो बार उड़ान भरी थी, लेकिन इतनी नजदीकी से कभी भी नहीं गुजरा था.

पार्कर सोलर प्रोब: एक दृष्टि

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने ‘पार्कर सोलर प्रोब’ अंतरिक्षयान को सूरज के बाहरी कोरोना के बारे में अध्ययन करने के लिए 2018 में लॉन्च किया था. इस प्रोब को नासा का ‘गोडार्ड स्पेस सेंटर’ संचालित कर रहा है.

यह प्रोब हर चक्कर के दौरान सूरज के नजदीक जाने की कोशिश कर रहा है. 2025 तक इस प्रोब को सूरज के 4.3 मिलियन मील की दूरी तक पहुंचाने का प्लान है. अगर इस प्रोब ने सूरज की गर्मी को बर्दाश्त कर लिया तो इसे और नजदीक तक पहुंचाया जाएगा.

शुक्र ग्रह

धरती की जुड़वा बहन कहे जाने वाले शुक्र ग्रह से आ रहे प्राकृतिक रेडियो सिग्नल से मिली आवाज की जांच से इस ग्रह के वातावरण के बारे में और अधिक जानकारी मिल सकती है. शुक्र को सौर मंडल का सबसे गर्म ग्रह माना जाता है क्योंकि सूरज से अधिक नजदीक होने के कारण बुध का वायुमंडल नष्ट हो चुका है. जिस कारण वह उष्मा को अवशोषित नहीं कर पाता है.

नासा के अनुसार, पृथ्वी और शुक्र दोनों जुड़वा दुनिया हैं. ये दोनों ग्रह पहाड़ी, समान आकार और संरचना के हैं. लेकिन, दोनों का रास्ता शुरू से ही अलग है. शुक्र में एक चुंबकीय क्षेत्र की कमी होती है. इसकी सतह का तापमान इतना ज्यादा होता है कि सीसा भी पिघल जाए. इस ग्रह का अध्ययन करने के लिए भेजा गया स्पेसक्राफ्ट भी गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाता है.