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प्रधानमंत्री ने मतुआ धर्म महामेला को संबोधित किया

अखिल भारतीय मतुआ महासंघ ने 29 मार्च से 5 अप्रैल तक मतुआ धर्म महामेला आयोजित किया है. इसका आयोजन श्री श्रीहरिचंद ठाकुर की 211वीं जयंती के अवसर पर पश्चिम बंगाल के श्रीधाम ठाकुरनगर, ठाकुरबाड़ी में किया गया है. प्रधानमंत्री ने 29 मार्च को वीडियो कॉफ्रेंस के माध्‍यम से इस महामेला को संबोधित किया.

श्री श्रीहरिचंद ठाकुर: एक दृष्टि

श्री श्री हरिचंद ठाकुर जी ने स्वतंत्रता से पहले अविभाजित बंगाल में प्रताडित, दलित और वंचित लोगों के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया था. उन्होंने 1860 में बांग्लादेश में ओरकंडी से सामाजिक और धार्मिक आंदोलन शुरू किया था. आंदोलन के बाद मतुआ धर्म की स्‍थापना हुई थी.

भारतीय चीनी और इथेनॉल सम्मेलन  मुंबई में आयोजित किया गया

मुंबई में 19 मार्च को ‘भारतीय चीनी और इथेनॉल सम्मेलन’ (Sugar & Ethanol India Conference- SEIC) 2022 आयोजित किया गया था. इस सम्मेलन का आयोजन चीनी मंडी, समाचार और सूचना पोर्टल द्वारा चीनी और सहयोगी उद्योगों के लिए किया गया था. इसमें उद्योग से जुड़े घरेलू और वैश्विक अग्रणी विशेषज्ञ देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी के व्यापार में मुख्य चुनौतियों और जोखिम से निपटने संबंधी कार्यनीतियों पर चर्चा की गयी. इसके अतिरिक्त भारत में अधिक नवोन्मेषी सतत चीनी और इथेनॉल क्षेत्र बनाने पर भी बातचीत हुई.

मुख्य बिंदु

  • केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस सम्मेलन को संबोधित किया था. अपने संबोधन में उन्होंने इथेनॉल, मिथेनॉल, जैव-डीजल, इलेक्ट्रिक, हरित हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन बताते हुए कहा कि भारत को ऊर्जा आयातक की बजाय ऊर्जा निर्यातक बनाये जाने पर जोर दिया.
  • श्री गडकरी ने कहा कि किसानों को गरीबी से निकालने के लिए अन्नदाता के बजाय ऊर्जादाता बनाना चाहिए. श्री गडकरी ने कहा कि ऊर्जा और विद्युत क्षेत्र की दिशा में कृषि का विविधिकरण समय की आवश्यकता है.
  • उन्होंने कहा कि सरकार विमानन क्षेत्र में इथेनॉल का इस्तेमाल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. श्री ग़डकरी ने कहा कि इस समय गन्ने का उत्पादन बढ़ा है लेकिन यह स्थिति आने वाले वर्षों में नहीं रहेगी. इसलिए चीनी को इथेनॉल में बदलने का काम तेज गति से किया जाना चाहिए.
  • उन्होंने इथोनॉल निर्माणकर्ता से पैट्रोल के विकल्प के रूप में अपने एरिया में इथोनॉल के पम्‍प खोले जाने का अनुरोध किया. इसके कारण पॉल्‍यूशन, हमारा इम्‍पोर्ट भी कम होगा, और गांव के लोगों को रोजगार मिलेगा.

वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद की 25वी बैठक

वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (FSDC) की 25वी बैठक 22 फरवरी को मुम्बई में आयोजित की गयी थी. इस बैठक की अध्‍यक्षता वित्तमत्री निर्मला सीतारामन ने की थी. बैठक में FSDC के विभिन्न अधिदेशों और वैश्विक और घरेलू स्‍तर पर बदलते घटनाक्रम से उपजी वित्तीय चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श किया गया.

परिषद में इस बात पर जोर दिया गया किया कि सरकार और सभी नियामकों को वित्तीय स्थितियों और महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थानों के कामकाज पर निरंतर निगरानी रखने की आवश्यकता है. परिषद ने विकास और व्यापक आर्थिक स्थिरता के साथ एक समावेशी आर्थिक विकास के लिए आवश्यक उपायों पर भी चर्चा की.

वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (FSDC)

सरकार ने वित्तीय बाजार नियामकों के सहयोग से FSDC की स्थापना की थी. यह संस्था, अर्थव्यवस्था के मैक्रो-विवेकपूर्ण पर्यवेक्षण, विशेष रूप से बड़े वित्तीय समूहों के कामकाज की निगरानी करती है, और वित्तीय क्षेत्र के अंतर-नियामक समन्वय और विकास के मुद्दों को हल करती है. यह वित्तीय जागरूकता को बढ़ावा देने पर भी केंद्रित है.

बीटिंग द रिट्रीट के साथ गणतंत्र दिवस के आयोजन का औपचारिक समापन

29 जनवरी को बीटिंग द रिट्रीट (Beating the Retreat)  के साथ गणतंत्र दिवस के आयोजन का औपचारिक समापन हो गया. इस खास मौके पर तीनों सेनाएं विशेष धुनें बजाकर राष्ट्रपति से अपनी बैरकों में वापस जाने के की अनुमति मांगती हैं. पारंपरिक धुनों के साथ मार्चपास्ट करती सेनाएं गणतंत्र दिवस समारोह के समापन की घोषणा भी करती हैं.

सैनिक मार्च करते हुए वापस जाते समय, लोकप्रिय धुन, सारे जहाँ से अच्छा बजाते हैं. शाम 6 बजे बिगुलर्स रिट्रीट की धुन बजाते हैं. राष्ट्रीय ध्वज को उतार लिया जाता है तथा राष्ट्रगान गाया जाता है और इस प्रकार गणतंत्र दिवस के आयोजन का औपचारिक समापन होता है.

बीटिंग द रीट्रीट परंपरा

बीटिंग द रीट्रीट एक परंपरा है. युद्धकाल में संध्या हो जाने पर बिगुल बजने के बाद सेनाएं अपने-अपने शिविरों में वापस चली जाती थीं. बीटिंग द रीट्रीट इसी परंपरा का हिस्सा है. भारत के गणतंत्र दिवस समारोह का समापन बीटिंग द रीट्रीट कार्यक्रम के बाद होता है.

फार्मास्युटिकल क्षेत्र का पहला वैश्विक नवाचार शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया

फार्मास्युटिकल क्षेत्र का पहला वैश्विक नवाचार शिखर सम्मेलन 18-19 नवम्बर को आयोजित किया गया था. इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से किया था. इस सम्मेलन में 12 सत्र हुए जिसमें देश-विदेश के 40 से अधिक विशेषज्ञों ने भाग लिया.

सम्मेलन के मुख्य बिंदु

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर जोर दिया है, जो भारत को दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में अग्रणी बना सके.
  • उन्होंने कहा कि भारतीय फार्मास्‍युटिकल उद्योग देश के आर्थिक विकास का एक प्रमुख घटक है. भारतीय स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में वर्ष 2014 के बाद से 12 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ है.
  • उन्होंने कहा कि भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र द्वारा अर्जित वैश्विक विश्वास की वजह से अब भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाने लगा है.

प्रधानमंत्री ने सिडनी संवाद को सम्‍बोधित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सम्मेलन से पहले सिडनी संवाद (Sydney Dialogue) को सम्‍बोधित किया था. अपने संबोधन में उन्होंने सभी लोकतांत्रिक देशों का आह्वान किया कि वे क्रिप्टो-करेंसी के मुद्दे पर संगठित रूप से कार्य करें. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इसका संचालन गलत हाथों में न जाये अन्यथा युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो सकता है.

उन्‍होंने भारत में हो रहे पांच महत्‍वपूर्ण बदलावों को रेखांकित किया. ये बदलाव हैं:

  1. भारत में विश्व के सबसे विस्तृत सार्वजनिक सूचना प्रौदयोगिकी ढांचे का विकास
  2. शासन तथा कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए डिजिटल टेक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल
  3. स्‍टार्टअप के लिए तेजी से विकसित होता अनुकूल तंत्र
  4. उद्योग और सेवा क्षेत्रों का बडे पैमाने पर डिजिटल रूपांतरण और
  5. टेलीकॉम टेक्‍नोलॉजी में स्‍वेदेशी क्षमता के विकास के लिए निवेश

भारतीय सैन्‍य प्रमुखों का आठवां सम्‍मेलन

भारतीय सैन्य प्रमुखों का आठवां सम्मेलन 16-18 सितम्बर नई दिल्ली में आयोजित किया गया था. सम्‍मेलन में भारतीय सेना के तीव्र रूपांतरण, आत्‍मनिर्भर और मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों के जरिये सेना की आत्‍मनिर्भरता और आधुनिक युद्ध लडने के लिए भारतीय सैनिकों के कौशल जैसे मुद्दों पर विचार किया गया.

इस सम्मेलन में भारतीय सेना के वर्तमान और सेवानिवृत्‍त अध्‍यक्ष हिस्‍सा लेते हैं. इस सम्‍मेलन की खास बात यह है कि इसमें नेपाल सेना के पूर्व अध्‍यक्ष भी हिस्‍सा लेते है, जो भारतीय सेना के ऑनरेरी चीफ रहे हैं. यह सम्‍मेलन एक ऐसा मंच है जहां भारतीय सेना के पूर्ववर्ती और वर्तमान अधिकारी विचारों का आदान-प्रदान करते हैं.

टॉयकैथॉन-2021 के ग्रैंड फिनाले का आयोजन

टॉयकैथॉन-2021 के ग्रैंड फिनाले का आयोजन ऑनलाइन माध्यम से 22 से 24 जून तक किया गया था. इसका उद्देश्‍य अभिनव खिलौनों और खेलों के लिए विभिन्न स्रोतों से नए विचार और सुझाव आमंत्रित करना था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 जून को इसके प्रतिभागियों के साथ बातचीत की थी. प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि परम्परा और प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भर भारत की ताकत हैं. उन्होंने कहा कि खिलौने और गेम्‍स, परम्परा तथा प्रौद्योगिकी को एक साथ जोड़ते हैं. उन्होंने खिलौना और खेल उद्योग को ‘टॉयकोनॉमी’ की संज्ञा दी.

इस साल 5 जनवरी को शिक्षा मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, सूक्षम, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय, डीपीआईआईटी, वस्त्र मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय तथा एआईसीटीई द्वारा टॉयकैथॉन 2021 की शुरूआत संयुक्त रूप से की थी.

इस दौरान, देश भर से लगभग 1.2 लाख प्रतिभागियों ने टॉयकैथॉन 2021 के लिए 1700 से अधिक विचार प्रस्तुत किए हैं. इनमें 15 67 विचारों को टॉयकैथॉन ग्रैंड फिनाले के लिए चुना गया है.

क्या है टॉयकैथॉन?

टॉयकैथॉन-2021 का उद्देश्य भारत में खिलौना उद्योग को बढ़ावा देना है, ताकि खिलौना बाजार के व्यापक हिस्से पर भारत अग्रणी हो सके.

देश के खिलौना बाजार का आकार 1 अरब डॉलर से ज्‍यादा है, जिसमें से 80 प्रतिशत खिलौने आयात किए जाते हैं. टॉयकैथॉन सरकार की और से घरेलू खिलौना उद्योग और स्थानीय निर्माताओं के लिए एक सिस्‍टम बनाने का प्रयास है, जो इस्‍तेमाल नहीं हो पाए संसाधनों का दोहन कर घरेलू उद्योग को बढ़ावा दे सके.

केवडिया में संयुक्त कमांडर सम्मेलन आयोजित किया गया

गुजरात में केवडिया के स्‍टेच्‍यू ऑफ यूनिटी परिसर में 4 से 6 मार्च तक संयुक्त कमांडर सम्मेलन (Combined Commander’s Conference) आयोजित किया गया था. इस वार्षिक आयोजन में तीन सेनाओं की संयुक्‍त कमान रणनीति, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों पर विशेष रूप से चर्चा की गयी.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस सम्‍मेलन के समापन सत्र की अध्‍यक्षता की. सम्‍मेलन के दौरान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, थलसेना के कमांडरों और रक्षा मंत्रालय के सचिव स्‍तर के अधिकारियों ने हिस्‍सा लिया था. पहली बार इसमें जवानों के साथ-साथ जूनियर कमीशंड ऑफीसर भी शामिल हुए.

कमांडरों का यह संयुक्‍त सम्‍मेलन सैन्‍य अधिकारियों के बीच विचार-विमर्श का एक महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम है जिसे तीन वर्ष बाद आयोजित किया गया था.

इस साल के सम्‍मेलन की कार्यसूची में कई नए विषय शामिल किये गये और इसे बहुस्‍तरीय, विचार-विमर्श आधारित, अनौपचारिक तथा तीस जवानों और जूनियर कमीशंड अधिकारियों को शामिल कर ज्ञानवर्धक बनाया गया.

मेरीटाइम इंडिया समिट-2021 आयोजित किया गया

मेरीटाइम इंडिया समिट-2021 आयोजन 2 से 4 मार्च तक किया गया था. वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से आयोजित इस सम्मेलन का उदघाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. इस सम्मलेन का आयोजन बंदरगाह पोत और जलमार्ग मंत्रालय डिजीटल मंच ‘www.maritimeindiasummit.in’ पर किया गया था.

सम्‍मेलन में भारतीय नौवहन क्षेत्र के लिए अगले दशक की योजना पर चर्चा हुई और वैश्विक नौवहन क्षेत्र में भारत को अग्रणी बनाने की दिशा में विचार-विमर्श किया गया. इस शिखर सम्मलेन का विषय ‘भारतीय समुद्री क्षेत्र में व्यापार के संभावित अवसरों की खोज करना और आत्मनिर्भर भारत बनाना’ था.

मैरीटाइम इंडिया सम्‍मेलन के अवसर पर चाबहार दिवस

मैरीटाइम इंडिया सम्‍मेलन के अवसर पर 4 मार्च को चाबहार दिवस मनाया गया था. वर्चुअल माध्‍यम से आयोजित इस सम्‍मेलन में अफगानिस्‍तान, आर्मेनिया, ईरान, कजाखस्‍तान, रूस और उज्‍बेकिस्‍तान के मंत्रियों ने भाग लिया. विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने भारत का प्रतिनिधित्व किया.

चाबहार बंदरगाह: एक दृष्टि

  • चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) दक्षिण-पूर्वी ईरान में स्थित ओमान की खाड़ी के तट एक बंदरगाह है. यह पाकिस्तान के गवादर बंदरगाह के पश्चिम की तरफ मात्र 72 किलोमीटर की दूरी पर हैं. इस बंदरगाह का विकास भारत के सहयोग से किया गया है.
  • इस बंदरगाह की भौगोलिक स्थिति इस प्रकार है कि पाकिस्तान के रास्ते का उपयोग किये बिना भारत अफगानिस्तान, यूरोप तथा मध्य एशिया के साथ व्यापर कर सकता है. भारत ने मई 2016 में ईरान और अफगानिस्तान के साथ एक त्रिपक्षीय कनेक्टिविटी समझौते पर हस्ताक्षर था.
  • चाबहार बंदरगाह के पहले चरण (शाहिद बेहेश्ती) के क्रियान्वयन के लिए समझौते पर हस्ताक्षर फरवरी, 2018 किये गये थे. इस समझौते के तहत भारतीय कंपनी ‘इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड’ इसके संचालन का अंतरिम प्रभार दिया गया था.

भारत में पहली बार खिलौना मेले का आयोजन किया गया

भारत में 27 फरवरी से 2 मार्च तक पहला ‘खिलौना मेला’ (India Toy Fair) 2021 का आयोजन किया गया था. इस मेले का उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कान्‍फ्रेंस के माध्‍यम से किया था. इस मेले के आयोजन का उद्देश्य स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देना था जिससे भारत को खिलौना उद्योग के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाया जा सके.

खिलौना मेला (The India Toy Fair) 2021: मुख्य बिंदु

  • खिलौना मेला 2021 का आयोजन कपड़ा मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के सहयोग से किया गया था.
  • इस मेले का आयोजन माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियानों को बढावा देने के लिए किया गया था.
  • इस मेले का उद्देश्य नीति निर्माताओं, खिलौना निर्माताओं एवं वितरकों, निवेशकों, उद्योग विशेषज्ञों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), कारीगरों, स्टार्ट-अप्स, बच्चों, माता-पिता और शिक्षकों को एक मंच साझा करना था.
  • इस मेले में 1,000 से अधिक वर्चुअल स्टॉल, वर्चुअल प्रदर्शनी, राज्य सरकारों द्वारा आयोजित वेबीनार, पैनल चर्चा/वेबीनारों के साथ ज्ञान सत्र, शिल्प प्रदर्शनियां, प्रतियोगिताएं, क्विज आदि शामिल थे.
  • मेले में राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT), शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) और स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) के 75 प्रदर्शनी स्टॉल भी शामिल थे.

विश्‍व सतत विकास शिखर सम्‍मेलन 2021 का आयोजन

विश्‍व सतत विकास शिखर सम्‍मेलन (World Sustainable Development Summit) 2021 का आयोजन 10 से 12 फरवरी तक किया गया था. यह बीसवां शिखर सम्‍मेलन था. इस सम्‍मेलन का मुख्‍य विषय ‘सबके लिए सुरक्षित और संरक्षित पर्यावरण और हमारा साझा भविष्‍य’ था. इस सम्‍मेलन में विश्‍व में सतत विकास को लेकर चर्चा हुई. इसके अलावा, इस सम्‍मेलन के दौरान चर्चा किए जाने वाले प्रमुख विषयों में ऊर्जा एवं उद्योग परिवर्तन, अनुकूल तथा लचीलापन, प्राकृतिक आधारित समाधान, जलवायु वित्‍तीय अर्थव्‍यवस्‍था, स्‍वच्‍छ महासागर और वायु प्रदूषण शामिल थे.

सम्मलेन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने वीडियो कॉन्‍फ्रेंस के माध्‍यम से किया था. दुनिया के अनेक देशों के प्रतिनिधियों के अलावा व्‍यापार प्रमुखों, विद्वानों, जलवायु वैज्ञानिकों, युवाओं और सिविल सोसाइटी के लोगों ने सम्‍मेलन में भाग लिया. सम्‍मेलन में गयाना के राष्‍ट्रपति डॉक्‍टर मोहम्‍मद इरफान अली, पापुआ न्‍यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्‍स मारापे, मॉलदीव की पीपुल्‍स मजलिस के अध्‍यक्ष मोहम्‍मद नशीद, संयुक्‍त राष्‍ट्र की उप-महासचिव अमिना मोहम्‍मद और केन्‍द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी भाग लिया था.

इस सम्मलेन का आयोजन नई दिल्‍ली स्थित द एनर्जी एण्‍ड रिसोर्सेज इंस्टिटयूट (TERI) द्वारा किया गया था. भारत का पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय तथा पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय इस शिखर सम्‍मेलन के प्रमुख भागीदार थे.

द एनर्जी एण्‍ड रिसोर्सेज इंस्टिटयूट (TERI) क्या है?

TERI उर्जा, जलवायु परिवर्तन तथा सतत विकास इत्यादि विषयों के सन्दर्भ में कार्य करता है. इसकी स्थापना दरबारी सेठ ने 1974 में की थी वर्तमान में TERI एक विश्वस्तरीय थिंक टैंक के रूप में उभर कर आया है.

13वें एयरो इंडिया 2021 का आयोजन बेंगलुरु में किया गया

13वें एयरो इंडिया (13th edition of AERO INDIA) 2021 का आयोजन 3 से 5 फरवरी तक बेंगलुरु में किया गया था. यह एयरो इंडिया हवाई शो का 13वां संस्करण था. इस हवाई शो में देश-विदेश की लगभग 600 कंपनियों ने हिस्सा लिया था.

एयरो इंडिया 2021 के दौरान नागरिक उड्यन मंत्रालय ने एक सेमीनार आयोजित किया था. इस सेमीनार का विषय ‘The dynamism of civil aviation – Making India a civil aviation hub’ था. सेमीनार में एयर लाइंस, एयरपोर्ट, ड्रोन्‍स, आर एंड डी और मैन्‍युफैक्‍चरिंग जैसे विषय शामिल थे.

एशिया के सबसे बड़े इस हवाई शो का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था. एयरो इंडिया 2021 के उदघाटन समारोह में भारतीय रक्षा क्षेत्र में हुई उपलब्धि की झांकी प्रस्‍तुत की गयी. इसमें भारत में ही तैयार लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस, एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर ध्रुव, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर और यूटिलिटी हेलीकॉप्टर द्वारा फ्लाईपास्ट आयोजित हुआ था. फ्रांस से ख़रीदे गये विमान राफेल और अमेरिका का B1B बॉम्बर ने भी फ्लाइपास्‍ट में भाग लिया था.

एयरो इंडिया 2021 के समापन समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हिस्सा लिया था. इस अवसर पर एक बंधन समारोह भी हुआ जहां देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 200 से अधिक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गये.

एयरो इंडिया: एक दृष्टि

एयरो इंडिया हवाई शो का आयोजन प्रत्येक दो वर्ष में किया जाता है. इस शो के दौरान हवाई रक्षा क्षेत्र की टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन किया जाता है. यह एशिया का सबसे बड़ा हवाई शो है. इस शो के दौरान डिफेंस से संबंधित डील्स की जाती है.