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संयुक्त राष्ट्र गंभीर वित्तीय संकटों का सामना कर रहा है

संयुक्त राष्ट्र (UN) वर्तमान में अपने अस्तित्व के सबसे गंभीर वित्तीय संकटों में से एक का सामना कर रहा है. महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हाल ही में चेतावनी दी है कि यदि सदस्य देशों ने अपना बकाया भुगतान नहीं किया, तो संगठन दिवालियापन की दौड़ में फंस सकता है.

वित्तीय संकट की वर्तमान स्थिति

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, यदि सदस्य देशों ने अपने निर्धारित योगदान का भुगतान नहीं किया, तो जुलाई 2026 तक संयुक्त राष्ट्र के पास दैनिक कार्यों को चलाने के लिए भी धन समाप्त हो सकता है.

संकट के मुख्य कारण

  • कई देशों ने अपने हिस्से का बजट जमा नहीं किया है. वर्ष 2025 के अंत तक यह बकाया लगभग 760 मिलियन डॉलर था.
  • अमेरिका संयुक्त राष्ट्र का सबसे बड़ा योगदानकर्ता है, लेकिन वर्तमान में उस पर 2.2 अरब डॉलर से अधिक का बकाया है, जो कुल बकाया राशि का लगभग 95% है.
  • संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार, बजट के अप्रयुक्त हिस्से को सदस्य देशों को वापस करना पड़ता है. 2026 की शुरुआत में ही उसे 300 मिलियन डॉलर वापस करने पड़े, जिससे नकदी का संकट और गहरा गया.

वित्तीय संकट काम करने के लिए उठाए गए कदम

  • 2026 के लिए नियमित बजट में लगभग 15% की कमी की गई है (3.7 अरब डॉलर के मूल प्रस्ताव से घटाकर 3.2 अरब डॉलर).
  • कर्मचारियों की संख्या में लगभग 18.8% की कटौती का प्रस्ताव है. नई भर्तियों पर रोक लगा दी गई है.
  • शांति सेना मिशनों के बजट में कटौती हुई है, जिससे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है.
  • मानवाधिकारों और मानवीय सहायता से जुड़े कार्यक्रमों को भी सीमित किया जा रहा है.
  • गैर-जरूरी आधिकारिक यात्राओं और सम्मेलनों पर कड़ा अंकुश लगाया गया है.

संयुक्त राष्ट्र के बजट में शीर्ष 10 योगदानकर्ता देश

स्थानदेशUN बजट में हिस्सा (%)
1अमेरिका22.00%
2चीन15.25%
3जापान8.03%
4जर्मनी6.11%
5यूनाइटेड किंगडम4.37%
6फ्रांस4.31%
7इटली3.30%
8कनाडा2.63%
9दक्षिण कोरिया2.57%
10रूस1.86%

भारत की स्थिति

  • भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो समय पर अपने वित्तीय दायित्वों को पूरा करते हैं. भारत ने 3 फरवरी 2026 को ही 2026 के नियमित बजट के लिए अपने 35.18 मिलियन डॉलर के योगदान का पूरा भुगतान कर दिया है.
  • भारत  संयुक्त राष्ट्र के ‘Honor Roll’ (सम्मान सूची) में शामिल है. ‘Honor Roll’ उन सदस्य देशों की एक प्रतिष्ठित सूची है जो संगठन के प्रति अपनी वित्तीय प्रतिबद्धता को पूरी निष्ठा के साथ निभाते हैं.
  • वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के बजट में भारत का योगदान लगभग 1.044% है.

4 दिसंबर को एकतरफा बलपूर्वक उपायों के खिलाफ़ अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जाएगा

  • प्रत्येक वर्ष 4 दिसंबर को एकतरफा बलपूर्वक उपायों के खिलाफ़ अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International Day against Unilateral Coercive Measures) मनाया जाएगा.
  • इसकी घोषणा संयुक्त राष्ट्र ने की है. इसके लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पारित किया था.
  • इसका उद्देश्य एकतरफा बलपूर्वक उपायों के प्रतिकूल प्रभावों के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है, जो अकसर अंतर्राष्ट्रीय कानून या संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करते हैं.
  • यह दिवस अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति में संवाद, आपसी सम्मान, समझ, सहिष्णुता और बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर देता है.
  • एक देश द्वारा दूसरे देश के विरुद्ध अपनाए गए एकतरफा बलपूर्वक उपाय, अंतर्राष्ट्रीय कानून और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार के विरुद्ध हैं.
  • एकतरफा बलपूर्वक उपाय विकासशील देशों को पूर्ण आर्थिक और सामाजिक विकास प्राप्त करने से भी रोकता है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा पारित प्रस्ताव

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस दिवस से संबंधित प्रस्ताव हाल ही में पारित किया था. इस प्रस्ताव के पक्ष में 116, विपक्ष में 51 और 6 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया.
  • संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगी पश्चिमी देशों जैसे – ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जापान, कनाडा और यूरोपीय संघ ने इस प्रस्ताव के खिलाफ़ मतदान किया.
  • विकसित पश्चिमी देशों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने राजनीतिक और रणनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए बलपूर्वक उपायों (प्रतिबंधों) का उपयोग करता रहा है.

भारत को संयुक्त राष्ट्र के ECOSOC का सदस्य देश के रुप में चुना गया

  • भारत को वर्ष 2026 से 2028 की अवधि के लिए संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) के सदस्य देश के रुप में चुना गया है.
  • भारत ने चुनाव में मतदान करने वाले 189 देशों में से 181 वोट हासिल किए. 193 देश संयुक्त राष्ट्र महासभा के सदस्य हैं.

ECOSOC: एक दृष्टि

  • ECOSOC (United Nations Economic and Social Council) संयुक्त राष्ट्र के छह मुख्य अंगों में से एक है.  यह आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों से संबंधित नीतियों की सिफारिश करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
  • ECOSOC के 54 सदस्य देश हैं. इसके एक तिहाई (18 सदस्य) प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा गुप्त मतदान के माध्यम से चुने जाते हैं.
  • ECOSOC की सदस्यता पांच क्षेत्रीय समूह में विभाजित है. ये पांच क्षेत्रीय समूह हैं- एशिया-प्रशांत देश (11 सीटें), अफ्रीकी देश (14 सीटें), पूर्वी यूरोपीय देश (6 सीटें), लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देश (10 सीटें) और पश्चिमी यूरोपीय और अन्य देश (13 सीटें)
  • ECOSOC की स्थापना 26 जून 1945 को हुई थी. इसका मुख्यालय अमेरिका के न्यूयॉर्क में है.

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2025 को क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2025 को ‘क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी’ का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष (International Year of Quantum Science and Technology) घोषित किया है. 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 7 जून 2024 को इस आशय का एक प्रस्ताव पारित किया था.

मुख्य बिन्दु

  • इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र ने 2025 को सहकारिता का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष, शांति और विश्वास का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष और ग्लेशियर संरक्षण का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया था.
  • 2024 को अंतर्राष्ट्रीय कैमलिड्स वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. (बैक्ट्रियन ऊंट, ड्रोमेडरी ऊंट, लामा, अल्पाका, गुआनाको और विकुआना को कैमलिड्स या ऊंट जानवर माना जाता है.)
  • जागरूकता और कार्रवाई के माध्यम से किसी विषय के उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र एक या अधिक विषयों को अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के फोकस के रूप में घोषित कर सकता है.

संयुक्त राष्ट्र ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर पहला वैश्विक प्रस्ताव अपनाया

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 24 मार्च 2024 को सर्वसम्मति से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर पहला वैश्विक प्रस्ताव पारित किया था.

प्रस्ताव के मुख्य बिन्दु

  • यह प्रस्ताव संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रायोजित और रूस, चीन और क्यूबा सहित 123 देशों द्वारा सह-प्रायोजित किया गया था.
  • इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शक्तिशाली नई तकनीक सभी देशों को लाभान्वित करे, मानवाधिकारों का सम्मान करे और सुरक्षित और भरोसेमंद हो.
  • प्रस्ताव में विकसित और विकासशील देशों के बीच डिजिटल विभाजन को समाप्त करने के महत्व पर जोर दिया गया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी देशों को एआई पर चर्चा में भाग लेने का मौका मिले.
  • यह प्रस्ताव एआई के विकास को आकार देने और इसके संभावित नुकसान को कम करने के लिए दुनिया भर की सरकारों द्वारा की गई पहलों की श्रृंखला में नवीनतम है.
  • एआई तकनीक के तेजी से विकास ने इसके संभावित जोखिमों और लाभों के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसमें मानवाधिकारों, व्यक्तिगत डेटा संरक्षण और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर इसका प्रभाव शामिल है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है?

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का हिन्दी नाम कृत्रिम बुद्धिमत्ता है जिसकी शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी.
  • यह कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित रोबोट या फिर मनुष्य की तरह इंटेलिजेंस तरीके से सोचने वाला सॉफ़्टवेयर बनाने का एक तरीका है. जॉन मैकार्थी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जनक माना जाता है.
  • AI इसके बारे में अध्ययन करता है कि मानव मस्तिष्क कैसे सोचता है और समस्या को हल करते समय कैसे सीखता है, कैसे निर्णय लेता है और कैसे काम करता.
  • भारत में राष्ट्रीय स्तर पर AI कार्यक्रम की रूपरेखा बनाने के लिये नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 78वें सत्र के अध्यक्ष की भारत यात्रा

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 78वें सत्र के अध्यक्ष डेनिस फ्रांसिस, विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर के निमंत्रण पर 22-26 जनवरी तक भारत की यात्रा पर थे. श्री फ्रांसिस की यात्रा के दौरान, आपसी हित के महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मुद्दों पर विदेश मंत्री के साथ बातचीत हुई थी.

मुख्य बिन्दु

  • भारत यात्रा के दौरान उन्होंने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की बात कही. उन्होंने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक वास्‍तविकता को नहीं दर्शाती है.
  • नई दिल्‍ली में श्री फ्रांसिस ने कहा कि संयुक्‍त राष्‍ट्र भू-राजनीतिक अस्थिरताओं से निपटने में संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के प्रदर्शन से संतुष्‍ट नहीं है. यह परिषद अब तक शांति और सुरक्षा संबंधी निर्णय लेने में असमर्थ रही है.
  • संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के अध्‍यक्ष ने अफ्रीकी संघ को जी-20 का पूर्ण सदस्‍य बनाने में भारत की भूमिका की भी सराहना की.
  • इससे पहले श्री फ्रांसिस ने विदेश मंत्री डॉक्‍टर एस जयशंकर के साथ बातचीत की. डॉक्‍टर जयशंकर ने अंतर्राष्‍ट्रीय संस्‍थानों विशेषकर संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर श्री फ्रांसिस के विचार की सराहना की.

संयुक्त राष्ट्र महासभा का 78वां अधिवेशन, भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री ने किया

संयुक्त राष्ट्र महासभा का 78वां अधिवेशन (78th Session of the UN General Assembly) 18 से 26 सितम्बर तक न्यूयॉर्क में आयोजित किया गया था. इस अधिवेशन का विषय (थीम) था- विश्वास का पुनर्निर्माण और वैश्विक एकजुटता को फिर से जागृत करना: सभी के लिए शांति, समृद्धि, प्रगति और स्थिरता की दिशा में 2030 एजेंडा और इसके सतत विकास लक्ष्यों पर कार्रवाई में तेजी लाना.

78वां अधिवेशन: मुख्य बिन्दु

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा के 78वें अधिवेशन में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने किया था. वे इस अधिवेशन में भाग लेने के प्रयोजन से 22 से 30 सितंबर तक अमरीका यात्रा पर थे.
  • अमेरिका की इस यात्रा के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने न्यूयॉर्क में क्‍वाड देशों के विदेश मंत्रियों के साथ चर्चा की. बैठक के दौरान उन्होंने हिन्‍द प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा करने और क्वाड प्रतिबद्धताओं को पूरा करने पर चर्चा की.
  • इस यात्रा के दौरान विदेश मंत्री विभिन्न बहुपक्षीय और द्विपक्षीय बैठकों में भाग लिया. उन्होंने जापान के विदेश मंत्री योको कामिकावा के साथ बैठक में विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी पर दृष्टिकोण का आदान-प्रदान किया.
  • उन्होंने मैक्सिको, बोस्निया और हर्जेगोविना और आर्मेनिया के अपने समकक्षों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं.
  • विदेश मंत्री जयशंकर ने अर्मेनियाई समकक्ष अरारत मिर्ज़ोयान से भी मुलाकात की और कॉकस में मौजूदा स्थिति के उनके साझा आकलन की सराहना की.

संबोधन के मुख्य बिन्दु

  • डॉक्टर जयशंकर ने 26 सितम्बर को 78वें अधिवेशन में भारत का पक्ष रखा था. अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि, अब वे दिन नहीं रहे हैं, जब कुछ देश एजेंडा तय करते थे और बाकी देशों से उनके अनुरूप चलने की उम्मीद की जाती थी.
  • डॉ. जयशंकर ने बल देकर कहा कि आम सहमति बनाना अनिवार्यता है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को सुरक्षा परिषद को समसामयिक बनाना चाहिए और इसके लिए प्रभावशीलता और विश्वसनीयता दोनों ही आवश्‍यक है.
  • उन्होंने कहा कि आतंकवाद, उग्रवाद और हिंसा पर राजनीतिक सुविधा के अनुसार प्रतिक्रियाएं निर्धारित नहीं की जानी चाहिए.
  • विदेश मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान और घरेलू मामलों में हस्तक्षेप का इस्तेमाल अपनी सुविधा अनुसार नहीं किया जा सकता है.

भारत और संयुक्त राष्ट्र ने संयुक्त क्षमता निर्माण अभियान की शुरूआत की

भारत और संयुक्त राष्ट्र ने ग्‍लोबल साउथ के लिए संयुक्त क्षमता निर्माण अभियान (India-UN Capacity Building Initiative) की शुरूआत की है. इस अभियान की घोषणा 22 सितम्बर को न्‍यूयार्क में भारत संयुक्त राष्ट्र – ग्‍लोबल साउथ कार्यक्रम में की गई.

  • इसका उद्देश्य भारत के विकास के अनुभव, सर्वोत्तम प्रक्रिया और विशेषज्ञता को ग्‍लोबल साउथ के देशों के साथ साझा करना है.
  • भारत संयुक्त राष्ट्र अभियान पहले से चल रहे भारत संयुक्‍त राष्‍ट्र विकास भागीदारी कोष से जुडेगा. इसके अंतर्गत पिछले छह वर्ष से 61 देशों में चल रही 75 विकास परियोजनाए हैं.
  • न्यूयॉर्क में डॉ. जयशंकर ने कहा कि पूर्व और पश्चिम के मतभेदों तथा उत्तर और दक्षिण की भारी असमानताओं के कारण जी-20 की भारत की अध्यक्षता बहुत चुनौतीपूर्ण थी. डॉ. जयशंकर संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा के 78वें सत्र में भाग लेने के लिए न्‍यूयॉर्क गए थे.

भारतीय पहल: संयुक्‍त राष्‍ट्र में शांति सैनिकों को समर्पित मैमोरियल वॉल बनाने का प्रस्ताव

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भारत द्वारा पेश प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है. इस प्रस्ताव के तहत संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक मेमोरियल वॉल (Memorial wall) का निर्माण किया जाना है. प्रस्ताव में कहा गया है कि इस मेमोरियल वॉल का निर्माण तीन साल में पूरा कर लिया जाएगा.

मुख्य बिन्दु

  • संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने 14 जून को यह प्रस्ताव पेश किया था, जिसे 190 देशों ने समर्थन दिया. बाद में संयुक्त राष्ट्र ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया.
  • इस मेमोरियल वॉल पर संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन पर बलिदान हुए सैनिकों के नाम लिखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी.
  • साल 2015 में भारत ने संयुक्त राष्ट्र में एक वर्चुअल मेमोरियल वॉल लॉन्च की थी, जिसमें शांति मिशन में  बलिदान हुए भारतीय सैनिकों के श्रद्धांजलि दी गई थी.
  • साल 2015 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका दौरे पर गए थे, उस वक्त भी संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण में पीएम मोदी ने शांति मिशन के दौरान बलिदान हुए सैनिकों की याद में मेमोरियल वॉल बनाने का सुझाव दिया था.

संयुक्त राष्ट्र ने यूक्रेन में स्थायी शांति की आवश्यकता पर एक प्रस्ताव पारित किया

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यूक्रेन में व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी शांति तक पहुंचने की आवश्यकता पर एक प्रस्ताव पारित किया है. इसमें रूस से दुश्मनी समाप्त करने और यूक्रेन से अपनी सेना वापस लेने का आह्वान किया गया है.

141 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया जबकि सात सदस्यों ने इसका विरोध किया. भारत सहित 32 सदस्यों ने मतदान में भाग नहीं लिया. 75 से अधिक देशों के विदेश मंत्रियों और राजनयिकों ने यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने वाले प्रस्ताव के समर्थन का आग्रह किया.

संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन करता है और वह हमेशा बातचीत और कूटनीति को ही एकमात्र रास्ता मानता है.

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव एंतोनियो गुतेरस ने भारत की यात्रा संपन्न की

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव एंतोनियो गुतेरस 18 से 20 अक्तूबर तक भारत यात्रा पर थे. श्री गुतेरस की यह दूसरी भारत यात्रा थी. इससे पहले वे अक्तूबर 2018 में भारत की यात्रा पर आए थे.

मुख्य बिन्दु

  • इस यात्रा के दौरान वे मुम्‍बई के होटल ताज पैलेस में 26/11 के आतंकी हमले के मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित किए.
  • श्री गुतेरस गुजरात के एकता नगर (केवडिया) में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के साथ मिशन लाइफ पुस्तिका, लोगो और टैगलाइन का शुभारम्‍भ किया.
  • विदेश मंत्री डॉक्टर एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुतेरस के साथ द्विपक्षीय वार्ता में हिस्सा लिया था. इस वार्ता में वैश्विक मुद्दों, जी-20 देशों के सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता, संयुक्त राष्ट्र के साथ भारत के सहयोग विषय पर विचार किए गए.
  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव, भारत के पहले सौर ऊर्जा गांव मोढेरा का दौरा किया. वे मोढेरा के सूर्य मंदिर भी गए.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के केवडि़या में श्री गुतरस की उपस्थिति में पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली ‘मिशन लाइफ’ की पुस्तिका, लोगो और टैगलाईन का शुभारंभ किया.
  • ‘मिशन लाइफ’ पर्यावरण की रक्षा और संरक्षण की दिशा में भारत के नेतृत्व शुरू किया गया जनांदोलन है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद ने भारत की यात्रा संपन्न की

संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष और मॉलदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद 28-29 अगस्त को भारत की यात्रा थे. श्री शाहिद का उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा के साथ भेंट वार्ता की जिसमें, संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका के बारे में भी बातचीत हुई.

मुख्य बिन्दु

  • संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा अध्‍यक्ष ने कहा कि लोगों के बीच संपर्क और महत्‍वपूर्ण समझौते भारत और मालदीव के संबंधों को उत्‍कृष्‍ट बनाते हैं.
  • उन्‍होंने कहा कि मॉलदीव और भारत के संबंध दोनों देशों के इतिहास में अब तक के सर्वोच्‍च स्‍तर पर हैं.
  • श्री अब्दुल्ला शाहिद ने कहा कि आंकतवाद का कोई धर्म या जाति नहीं होती बल्कि यह एक बुराई है जिसका दुनिया को मिलकर मुकाबला करना होगा.
  • उन्होंने भारत को विश्व औषधालय बताया और कहा कि भारत ने न केवल पड़ोसी देशों की मदद की बल्कि लेटिन अमरीकी देशों और प्रशांत क्षेत्र के देशों की भी सहायता की.