नासा का आर्टेमिस-2 मिशन: मनुष्य एक बार फिर से चंद्रमा के करीब पहुंचा

अमरीका के अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का ‘आर्टेमिस-2’ (Artemis II) मिशन हाल के दिनों में सुर्खियों में रहा है. 50 से अधिक वर्षों के बाद मनुष्य एक बार फिर से चंद्रमा के करीब पहुंच गया है.

आर्टेमिस-2 (Artemis II) मिशन

  • आर्टेमिस-2 (Artemis II) मिशन 1972 के अपोलो मिशन के बाद इंसानों को चंद्रमा के करीब ले जाने वाला पहला मिशन है.
  • यह एक 10 दिवसीय ‘क्रूड लूनर फ्लाईबाय’ (Crewed lunar flyby) मिशन था. इसका मतलब है कि अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग नहीं की, बल्कि उसके चारों ओर चक्कर लगाकर सुरक्षित पृथ्वी पर वापसी की.
  • इस मिशन में नासा के सबसे शक्तिशाली रॉकेट ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) और यात्रियों के बैठने के लिए ‘ओरियन’ (Orion) कैप्सूल का उपयोग किया गया.
  • इस मिशन ने चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का ही उपयोग करके अंतरिक्ष यान को वापस धरती की ओर धकेलने की सुरक्षित तकनीक का इस्तेमाल किया.

घटनाक्रम: एक दृष्टि

  • इसे 1 अप्रैल 2026 को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया.
  • 6 अप्रैल को ओरियन कैप्सूल पृथ्वी से लगभग 4,06,771 किलोमीटर दूर पहुँच गया, जिसने ‘अपोलो 13’ के सबसे दूर तक जाने वाले मानव अंतरिक्ष उड़ान के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया.
  • 10 दिनों की सफल यात्रा के बाद 10 अप्रैल 2026 को प्रशांत महासागर में इसकी सुरक्षित वापसी हुई.

चालक दल

  • रीड वाइसमैन (Reid Wiseman): मिशन कमांडर (NASA).
  • विक्टर ग्लोवर (Victor Glover): मिशन पायलट. (यह चंद्रमा के मिशन पर जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति हैं).
  • क्रिस्टीना कोच (Christina Koch): मिशन विशेषज्ञ. (यह चंद्रमा के मिशन पर जाने वाली पहली महिला हैं).
  • जेरेमी हैनसेन (Jeremy Hansen): मिशन विशेषज्ञ. (यह कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी – CSA के हैं और चंद्रमा की यात्रा करने वाले पहले गैर-अमेरिकी नागरिक हैं).

आर्टेमिस-3 मिशन

  • आर्टेमिस-2 की पूरी उड़ान भविष्य के ‘आर्टेमिस-3’ मिशन के लिए एक तकनीकी परीक्षण थी. आर्टेमिस-3 के जरिए ही नासा इंसानों को सचमुच चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारने की तैयारी कर रहा है.