भारत का त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम
- भारत का ‘त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम’ की परिकल्पना 1950 के दशक में भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने की थी.
- भारत के पास ‘यूरेनियम’ का भंडार बहुत कम है, लेकिन हमारे दक्षिणी और पूर्वी तटों (जैसे केरल और ओडिशा की रेत) में ‘थोरियम’ का दुनिया का सबसे बड़ा भंडार (लगभग 25%) मौजूद है.
- थोरियम का सीधा उपयोग ईंधन के रूप में नहीं किया जा सकता. इसे पहले एक ज्वलनशील (fissile) पदार्थ में बदलना पड़ता है. इसी थोरियम का उपयोग करके भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह तीन चरणों वाला मास्टरप्लान बनाया गया था:
चरण 1: दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR – Pressurised Heavy Water Reactor)
- इस चरण में ईंधन के रूप में भारत में उपलब्ध ‘प्राकृतिक यूरेनियम’ का उपयोग किया जाता है. यूरेनियम से बिजली बनाई जाती है. रिएक्टर को ठंडा रखने और न्यूट्रॉन की गति को धीमा करने के लिए ‘भारी जल’ (Heavy Water – D2O) का उपयोग होता है.
- इस प्रक्रिया के अंत में बिजली के साथ-साथ बाई-प्रोडक्ट के रूप में प्लूटोनियम-239 (Pu-239) निकलता है. (यह प्लूटोनियम ही दूसरे चरण की चाबी है).
चरण 2: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR – Fast Breeder Reactor)
- इस चरण में ईंधन के रूप में चरण 1 से निकला प्लूटोनियम-239 और प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग किया जाता है. कल्पाक्कम का PFBR इसी चरण का हिस्सा है.
- इसे ‘ब्रीडर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह खपत से अधिक नया ईंधन पैदा करता है. इसमें भारी जल के बजाय ‘तरल सोडियम’ (Liquid Sodium) का उपयोग कूलेंट के रूप में होता है.
- जब रिएक्टर में पर्याप्त प्लूटोनियम बन जाता है, तो रिएक्टर के चारों ओर (Blanket में) थोरियम (Th-232) रखा जाता है. रिएक्टर के न्यूट्रॉन थोरियम से टकराकर उसे यूरेनियम-233 (U-233) में बदल देते हैं.
- इस प्रक्रिया के अंत में बिजली के साथ-साथ मुख्य उत्पाद के रूप अधिक प्लूटोनियम और यूरेनियम-233 प्राप्त होता है.
चरण 3: उन्नत भारी जल रिएक्टर (AHWR – Advanced Heavy Water Reactor)
- इस चरण में ईंधन के रूप में चरण 2 से प्राप्त यूरेनियम-233 (U-233) और थोरियम (Th-232) का उपयोग होता है.
- यह भारत के परमाणु कार्यक्रम का अंतिम चरण है. इसमें U-233 और थोरियम का उपयोग करके बिजली बनाई जाएगी. यह रिएक्टर थोरियम को लगातार नए U-233 में बदलता रहेगा, जिससे ईंधन की एक अंतहीन साइकिल बन जाएगी.
- इसके मुख्य उत्पाद के रूप में सदियों तक चलने वाली स्वच्छ और असीमित बिजली मिलेगी.
