कल्पाक्कम स्थित PFBR ने क्रिटिकेलिटी हासिल की, जानिए क्या होता है क्रिटिकेलिटी
तमिलनाडु के कल्पाक्कम में स्थित 500 MWe ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ (PFBR) ने हाल ही में ‘क्रिटिकेलिटी’ (Criticality) हासिल की है.
क्रिटिकेलिटी क्या है?
- ‘क्रिटिकेलिटी’ परमाणु रिएक्टर की वह अवस्था है जब उसके अंदर चल रही नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया (Nuclear Chain Reaction) आत्मनिर्भर (Self-sustaining) हो जाती है.
- परमाणु रिएक्टर में ऊर्जा तब पैदा होती है जब एक न्यूट्रॉन किसी परमाणु (जैसे यूरेनियम या प्लूटोनियम) से टकराकर उसे तोड़ता (Fission) है. इस टूटने से भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है और साथ ही 2 या 3 नए न्यूट्रॉन भी निकलते हैं.
- इस प्रक्रिया को नियंत्रण में रखने के लिए वैज्ञानिकों ने एक पैमाना बनाया है जिसे ‘न्यूट्रॉन गुणन कारक’ (Neutron Multiplication Factor – k) कहते हैं:
- उप-क्रांतिक (Sub-critical, k < 1): जब पैदा होने वाले नए न्यूट्रॉनों की संख्या, खत्म होने वाले न्यूट्रॉनों से कम होती है. इस अवस्था में चेन रिएक्शन धीरे-धीरे कमजोर होकर बंद हो जाती है. रिएक्टर चालू नहीं हो पाता.
- क्रांतिक अवस्था (Critical, k = 1): यह वह आदर्श अवस्था है जो कल्पाक्कम PFBR ने हासिल की है. इसका मतलब है कि हर विखंडन से निकलने वाले न्यूट्रॉनों में से ठीक एक न्यूट्रॉन ही अगले परमाणु को तोड़ने के लिए आगे बढ़ता है. बाकी को कंट्रोल रॉड्स द्वारा सोख लिया जाता है. इससे ऊर्जा का उत्पादन एक समान और स्थिर गति से लगातार चलता रहता है.
- अति-क्रांतिक (Super-critical, k > 1): जब एक न्यूट्रॉन कई न्यूट्रॉनों को जन्म देता है और वे सभी आगे परमाणुओं को तोड़ते हैं. यह एक अनियंत्रित विस्फोट (परमाणु बम) का रूप ले सकता है.
कल्पाक्कम PFBR के लिए इसका महत्व
- भारत का परमाणु कार्यक्रम तीन चरणों (Three-Stage) में बंटा है. PFBR का ‘क्रिटिकल’ होना आधिकारिक रूप से भारत के परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण (Stage-2) की सफलता की शुरुआत है.
- PFBR एक ‘फास्ट ब्रीडर’ (Fast Breeder) रिएक्टर है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ऊर्जा बनाने के लिए जितना ईंधन (प्लूटोनियम-यूरेनियम – MOX) खर्च करता है, उससे कहीं ज्यादा नया ईंधन (प्लूटोनियम-239) पैदा करता है.
- ‘क्रिटिकेलिटी’ हासिल करने का अर्थ है कि वह बिना किसी बाहरी मदद के स्थिर रूप से ऊर्जा और नया ईंधन बना रहा है.
