तीसरा ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ ओस्लो में संपन्न

  • तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन (3rd India-Nordic Summit) 15-16 मई 2026 को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित किया गया था.
  • इस सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ‘नॉर्डिक 5’ देशों (नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड) के शीर्ष नेता ने हिस्सा लिया.
  • सम्मेलन के मुख्य बिंदु
  • इस सम्मेलन का मुख्य फोकस ‘व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते’ (TEPA) को धरातल पर उतारना, ब्लू एवं ग्रीन इकोनॉमी, डिजिटल इनोवेशन (AI और 6G) और मोबिलिटी फ्रेमवर्क पर रहा.
  • चूँकि भारत 2013 से ‘आर्कटिक परिषद’ का पर्यवेक्षक देश है, इसलिए भारत ने अपनी 2022 की ‘आर्कटिक नीति’ के तहत यहाँ जलवायु अनुसंधान और सतत संसाधन प्रबंधन पर महत्वपूर्ण समझौते किए.

आर्कटिक अनुसंधान पर विशेष ध्यान

  • भारत साल 2013 से ‘आर्कटिक परिषद’ (Arctic Council) का एक पर्यवेक्षक (Observer) देश है. इस आर्कटिक परिषद में सभी 5 नॉर्डिक देश (साथ ही अमेरिका, रूस और कनाडा) स्थायी सदस्य के रूप में शामिल हैं.
  • भारत की 2022 की ‘आर्कटिक नीति’ के तहत, इस सम्मेलन में आर्कटिक क्षेत्र में हो रहे जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों के पिघलने और उसके वैश्विक मानसून पर पड़ने वाले प्रभावों के संयुक्त अध्ययन को लेकर नॉर्वे और भारत के बीच अहम रणनीतिक प्रगति हुई.
  • भारत का वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र ‘हिमाद्रि’ नॉर्वे के स्वालबार्ड में ही स्थित है.

भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन

  • ‘नॉर्डिक देश’ (Nordic Countries) उत्तरी यूरोप के 5 देशों (नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड) का एक भौगोलिक और सांस्कृतिक समूह है.
  • भारत इन पांचों नॉर्डिक देशों के साथ एक अलग कूटनीतिक मंच के जरिए जुड़ता है, जिसे ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ (India-Nordic Summit) कहा जाता है.
  • दुनिया में केवल अमेरिका और भारत ही ऐसे देश हैं जो नॉर्डिक देशों के साथ इस ‘समूह स्तर’ (Summit-level) पर वार्ता करते हैं.

नॉर्डिक देशों का रणनीतिक महत्व

  • नॉर्डिक देशों के पास दुनिया के सबसे बड़े ‘सॉवरेन वेल्थ फंड्स’ (जैसे नॉर्वे का सरकारी पेंशन फंड) हैं. भारत अपनी बुनियादी ढांचा (Infrastructure) परियोजनाओं के लिए इन फंड्स से बड़े निवेश को आकर्षित करने का प्रयास कर रहा है.