स्वदेशी निर्देशित बम प्रणाली ‘तारा’ का पहला सफल परीक्षण

  • भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने एक स्वदेशी रूप से विकसित ‘निर्देशित बम’ (Guided Bomb) प्रणाली का पहला सफल परीक्षण किया, जिसे ‘तारा’ (TARA) नाम दिया गया है.
  • यह परीक्षण 7 मई 2026 को ओडिशा के तट पर सफलतापूर्वक आयोजित किया गया था.
  • इस परीक्षण के दौरान, ‘तारा’ बम को भारतीय वायुसेना के एक जगुआर (Jaguar) लड़ाकू विमान से दागा गया था.
  • ‘तारा’ का सफल परीक्षण आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है.

‘तारा’ (TARA) क्या है?

  • TARA का पूर्ण रूप ‘टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज-एक्सटेंशन ऑटोनोमस’ (Tactical Advanced Range-extension Autonomous) है.
  • यह भारत का पहला स्वदेशी मॉड्यूलर रेंज-एक्सटेंशन (ग्लाइड) किट है, जिसे DRDO की ‘रिसर्च सेंटर इमारत’ (RCI), हैदराबाद द्वारा विकसित किया गया है.
  • इसका वजन लगभग 250 किलोग्राम (kg) है और इसकी मारक क्षमता (Range) लगभग 100 से 150 किलोमीटर तक बताई जा रही है.
  • यह प्रणाली ‘अनगाइडेड’ (सामान्य) बमों को ‘प्रिसिजन-गाइडेड’ (सटीक) स्मार्ट बमों में बदल देती है, जिससे वे लगभग 100-150 किलोमीटर से दुश्मन के ठिकानों को नष्ट कर सकते हैं.
  • इसे विशेष रूप से वायुसेना के लिए विकसित किया गया है. यह भारत को इजराइल के स्पाइस-2000 या अमेरिकी JDAM बमों जैसी क्षमता स्वदेशी रूप से प्रदान करता है.
  • यह ‘स्मार्ट बम’ दुश्मन के हवाई सुरक्षा क्षेत्र के बाहर से ही दागा जा सकता है और यह अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदने के लिए हवा में ‘ग्लाइड’ (तैरते हुए) करता है.
  • ‘तारा’ से पहले, DRDO ने ‘गौरव’ (Gaurav) और ‘गौतम’ (Gautam) नामक स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन (SAAW) और ग्लाइड बम भी विकसित किए हैं. ‘तारा’ उसी श्रृंखला की अगली और अधिक उन्नत कड़ी है.