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चालू वित्त वर्ष  की तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था 8.4% की दर से बढ़ी

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने चालू वित्त वर्ष (2023-24) की तीसरी तिमाही (अकतूबर-दिसंबर) के जीडीपी आंकड़े (Indian Economy Growth Data) 29 फ़रवरी को जारी किए थे. इस तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था 8.4% की दर से बढ़ी है.

मुख्य बिन्दु

  • आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 8.4% रही जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 4.3% थी.
  • तीसरी तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र में 11.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इस दौरान कृषि क्षेत्र में 0.8 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई.
  • इस अवधि में निजी उपभोग वृद्धि भी धीमी पड़कर 3.6 प्रतिशत रही. कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि निजी उपभोग में सुस्ती उच्च जीडीपी वृद्धि के लिए चिंता की बात है.
  • चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में सकल मूल्य-वर्धन (जीवीए) के हिसाब से विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 11.6 प्रतिशत बढ़ा जबकि एक साल पहले की समान अवधि में इसमें 4.8 प्रतिशत की गिरावट आई थी.
  • सामान अवधि में खनन और उत्खनन में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो एक साल पहले सिर्फ 1.4 प्रतिशत थी. निर्माण क्षेत्र ने अपनी वृद्धि दर को एक साल पहले की तरह 9.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है.
  • वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं की वृद्धि दर भी बीती तिमाही में 7 प्रतिशत रही जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 7.7 प्रतिशत रही थी.
  • सार्वजनिक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं ने पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के 3.5 प्रतिशत के मुकाबले 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की.
  • आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021-22 और 2022-23 में देश की प्रति व्यक्ति आय क्रमशः 1,50,906 रुपये और 1,69,496 रुपये रहने का अनुमान है.
  • एनएसओ ने चालू वित्त वर्ष के लिए में आर्थिक वृद्धि दर अनुमान को बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया गया जो पहले 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था. वहीं 2023-24 में मौजूदा कीमतों पर जीडीपी 293.90 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो 2022-23 के 269.50 लाख करोड़ रुपये से 9.1 प्रतिशत अधिक है.

एफडीआई नीति में संशोधन: अंतरिक्ष क्षेत्र में शत-प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति में संशोधन को मंजूरी दी है. संशोधित FDI नीति के अंतर्गत अंतरिक्ष क्षेत्र में 100 प्रतिशत FDI की अनुमति दी गई है. मौजूदा FDI नीति के मुताबिक, स्वचालित मार्ग के तहत 49 प्रतिशत तक विदेशी निवेश की अनुमति है.

मुख्य बिन्दु

  • इस संशोधन के तहत, उपग्रहों, ग्राउंड सेगमेंट, और उपयोगकर्ता सेगमेंट के लिए घटकों और प्रणालियों/उप-प्रणालियों के निर्माण के लिए 100 प्रतिशत FDI की अनुमति दी गई है.
  • उपग्रहों की एंड टू एंड मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई और ऑपरेशन सैटेलाइट डाटा प्रोडक्ट्स ग्राउंड सेगमेंट और यूजर सेगमेंट एक्‍टीवी‍टीज में अब 74 प्रतिशत तक FDI की अनुमति होगी. लॉन्च व्हीकल और स्‍पेस पोर्टल में 39 प्रतिशत तक FDI की अनुमति रहेगी.
  • संशोधित नीति के तहत दी गई अनुमति का उद्देश्य अंतरिक्ष क्षेत्र में भारतीय कंपनियों में निवेश के लिए निवेशकों को आकर्षित करना है.
  • FDI नीति में सुधार देश में कारोबार में सुगमता बढ़ाएगा, जिससे FDI प्रवाह बढ़ेगा और इस प्रकार यह निवेश, आय और रोजगार में वृद्धि में योगदान देगा.
  • इससे कंपनियां सरकार की ‘मेक इन इंडिया (एमआईआई)’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को विधिवत प्रोत्साहित करते हुए देश के भीतर अपनी विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करने में सक्षम होंगी.

सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर संसद में एक श्वेत पत्र प्रस्तुत किया

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 8 फरवरी को संसद में भारतीय अर्थव्यवस्था पर एक ‘श्वेत पत्र’ जारी किया था. वित्त मंत्रालय की ओर से तैयार ये श्वेत-पत्र 2004 से 2014 के बीच यूपीए सरकार और 2014 से 2024 के बीच एनडीए सरकार के आर्थिक प्रदर्शन की तुलना करता है.

2004 से 2014 तक मनमोहन सिंह ने यूपीए सरकार का नेतृत्व किया था. वहीं 2014 से एनडीए सरकार का नेतृत्व नरेंद्र मोदी कर रहे हैं.

श्वेत-पत्र के मुख्य बिन्दु

  • यूपीए सरकार को विरासत में अच्छी अर्थव्यवस्था मिली थी, जो और ज़्यादा सुधारों को लिए तैयार थी. लेकिन उसने दस साल के दौरान आर्थिक सुधारों को पूरी तरह छोड़ दिया.
  • 2008 के ग्लोबल वित्तीय संकट के बाद यूपीए सरकार किसी भी तरह ऊंची विकास दर को बनाए रखना चाहती थी. लेकिन इसके लिए उसने मैक्रो इकोनॉमिक बुनियादों की परवाह नहीं की. जैसे इस दौरान महंगाई दर काफी ज़्यादा हो गई.
  • राजकोषीय घाटा काफी बढ़ गया. बैंकों का एनपीए संकट भी काफी ज़्यादा हो गया, जिससे देश में आर्थिक गतिविधियों को झटका लगा.
  • यूपीए सरकार का दशक गलत नीतियों और घोटालों से भरा पड़ा था. यूपीए सरकार ने बाज़ार से भारी मात्रा में कर्ज़ लिया और इसे गैर उत्पादक खर्चों में लगाया. सरकार ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ में फंसी रही.
  • इसमें आईएमएफ के आंकड़ों के हवाले से कहा गया है कि मोदी सरकार की तुलना में मनमोहन सरकार में महंगाई किस कदर ज़्यादा रही.
  • मोदी सरकार के कार्यकाल में स्वच्छता अभियान के तहत बड़ी संख्या में शौचालय बनाए गए समावेशी बैंकिंग की दिशा में बड़े कदम उठाए गए. बहुत बड़ी आबादी का बैंक में खाता खुला और सीधे उनके खातों में कल्याणकारी योजनाओं का पैसा पहुंचा.
  • 2004 से 2008 (यूपीए-1 सरकार का कार्यकाल) तक अर्थव्यवस्था ने तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की लेकिन ये अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के आर्थिक सुधारों और अनुकूल ग्लोबल हालात का नतीजा थी.

क्या होता है श्वेत पत्र?

‘श्वेत पत्र’ किसी ख़ास मुद्दे पर जानकारी देने के लिए जारी किया जाता है. इसकी शुरुआत सन् 1922 में ब्रिटेन में हुई थी. सरकार के अलावा किसी भी संस्था, कंपनी, ऑर्गेनाइजेशन द्वारा श्वेत पत्र जारी किया जा सकता है.

केन्द्रीय वित्त मंत्री ने लोकसभा में अंतरिम बजट 2024 प्रस्तुत किया

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारामन ने वर्ष 2024 का अं‍तरिम बजट 1 फ़रवरी को लोकसभा में प्रस्तुत किया था. वित्त मंत्री के रूप में श्रीमती सीतारामन का यह छठ बजट था.
यह मौजूदा लोकसभा का आखिरी बजट था. पिछले तीन पूर्ण केन्‍द्रीय बजट की तरह यह अंतरिम बजट भी पेपर रहित था.

यह अं‍तरिम बजट था, इस वर्ष आम चुनाव होने के बाद नई सरकार पूर्ण केन्‍द्रीय बजट पेश करेगी. अंतरिम बजट का उद्देश्य नई सरकार के कार्यभार संभालने के बाद पूर्ण बजट पेश करने तक सरकारी व्यय तथा आवश्यक सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करना है.

रुपया कहाँ से आया और कहाँ गया
सरकार की आमदनीसरकार का खर्च
  • ऋण से इतर पूंजी प्राप्तियां: 1%
  • कर से इतर राजस्व: 7%
  • वस्तु एवं सेवा कर (GST) : 18%
  • केन्द्रीय उत्पाद शुल्क: 5%
  • सीमा शुल्क: 4%
  • आय कर: 19%
  • निगम कर: 17%
  • उधार और अन्य देयताएं: 28%
  • ब्याज: 20%
  • रक्षा: 8%
  • सब्सिडी: 6%
  • वित्त आयोग और अन्य खर्च: 8%
  • करों और शुल्कों में राज्यों का हिस्सा: 20%
  • पेंशन: 4%
  • केन्द्रीय प्रायोजित योजनाएं: 8%
  • केन्द्रीय क्षेत्र की योजना: 16%
  • अन्य खर्च: 9%

अंतरिम बजट 2024-25: मुख्य बिन्दु

  • इस बजट में सर्वांगीण, सर्वव्यापी तथा सर्व-समावेशी विकास के साथ वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना की गई है.
  • वर्ष 2024-2025 के लिये पूंजीगत व्यय में 11.1% की वृद्धि की घोषणा की गई. पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर 11,11,111 करोड़ रुपए किया गया जो सकल घरेलू उत्पाद का 3.4% होगा.
  • वित्त वर्ष 2023-24 के लिये वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.3% रहने का अनुमान है, जो RBI के संशोधित विकास अनुमान के अनुरूप है.
  • ऋण ग्रहण के अतिरिक्त 30.80 लाख करोड़ रुपए की कुल प्राप्तियाँ होने का अनुमान है. कुल व्यय का अनुमान 47.66 लाख करोड़ रुपए है. कर प्राप्ति का अनुमान 26.02 लाख करोड़ रुपए है.
  • वर्ष 2024-25 में राजकोषीय घाटा GDP का 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो वर्ष 2025-26 तक इसे 4.5% से कम करने (बजट 2021-22 में घोषित) के लक्ष्य के अनुरूप है.
  • सरकार मध्यम वर्ग के व्यक्तियों को अपना घर खरीदने या निर्माण करने के लिए “मध्यम वर्ग के लिए आवास” योजना शुरू करेगी.
  • प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) 3 करोड़ घरों के अपने लक्ष्य के करीब है, अगले पांच वर्षों के लिए 2 करोड़ घरों का अतिरिक्त लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
  • वित्त वर्ष 2010 तक के मुद्दों के लिए 25,000 रुपये तक की सीमा और वित्त वर्ष 2011-15 के लिए 10,000 रुपये तक की सीमा के साथ बकाया प्रत्यक्ष कर मांग को वापस लेने से लगभग 1 करोड़ कर दाताओं को लाभ होगा.
  • 1 करोड़ घरों को छत पर सौर ऊर्जा लगाने में सक्षम बनाना, प्रति माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करना.

बजट पूर्व भारतीय अर्थव्यवस्था की समीक्षा, क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण

प्रत्येक वर्ष सरकार द्वारा संसद में बजट प्रस्तुत किया जाता है. वर्ष 2024 में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिर बजट है, जो कि अंतरिम बजट है, जबकि पूर्ण बजट इस साल होने वाले आम चुनावों के बाद नई सरकार के गठन के बाद पेश होगा.

प्रत्येक वर्ष पूर्ण बजट पेश किए जाने से पूर्व संसद में आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) को रखा जाता है. हालांकि ये अंतरिम बजट है, इसलिए आर्थिक सर्वेक्षण पेश नहीं किया जाएगा.

क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण?

  • वित्त वर्ष 1950-51 में पहली बार देश का इकोनॉमिक सर्वे पेश किया गया था. आर्थिक सर्वेक्षण में सरकारी नीतियों, प्रमुख आर्थिक आंकड़े और क्षेत्रवार आर्थिक रूझानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है.
  • आर्थिक सर्वेक्षण बजट का मुख्य आधार होता है और इसमें इकोनॉमी की पूरी तस्वीर सामने आती है और इसे पिछले वित्तीय वर्ष की समीक्षा के आधार पर तैयार किया जाता है. इसके जरिए सरकार देश की अर्थव्यवस्था की ताजा हालत के बारे में बताती है.
  • आर्थिक सर्वेक्षण दो हिस्सों में पेश होता है, जिसके पहले हिस्सों में देश की अर्थव्यवस्था की ताजा हालत के बारे में जानकारी साझा की जाती है. वहीं दूसरे हिस्से में विभिन्न सेक्टर्स के प्रमुख आंकड़े दिए जाते हैं. ये दस्तावेज आर्थिक मामलों के विभाग के मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में तैयार किया जाता है.
  • मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में तैयार किए गए इस दस्तावेज को अंतिम रूप देने के बाद वित्त मंत्री द्वारा अनुमोदित दिया जाता है.

वित्त मंत्रालय ने भारतीय आर्थिक समीक्षा पेश की

वित्त मंत्रालय ने अंतरिम बजट 2024 से पहले 29 जनवरी को आर्थिक समीक्षा (Economy Review) पेश की थी. यह समीक्षा आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा तैयार किया गया था. समीक्षा में पिछले 10 साल में अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन की तुलना सामने रखी गई है.

आर्थिक समीक्षा 2024: मुख्य बिन्दु

प्रत्येक वर्ष पूर्ण बजट पेश किए जाने से पूर्व संसद में आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) को रखा जाता है. हालांकि ये अंतरिम बजट है, इसलिए आर्थिक सर्वेक्षण पेश नहीं किया जाएगा. इसकी जगह संक्षिप्त आर्थिक समीक्षा पेश किया गया.

  • आर्थिक समीक्षा में उम्मीद जताई गई है कि वित्त वर्ष 2024-25 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि (GDP Growth) 7 प्रतिशत के करीब रह सकती है.
  • वित्त वर्ष 2023-24 लगातार तीसरा ऐसा वर्ष है जब भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की जा रही है जबकि वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था 3 प्रतिशत से अधिक की दर से विकास के लिए संघर्षरत है.
  • आर्थिक समीक्षा में अनुमान दिया गया है कि अगले 3 साल में भारतीय अर्थव्यवस्था 5 लाख करोड़ डॉलर का स्तर पार कर लेगी. जबकि 2030 तक अर्थव्यवस्था 7 लाख करोड़ डॉलर का स्तर पार कर सकती है.
  • प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत बैंको में खाता खुलवाने वाली महिलाओं की संख्‍या 2015-16 के 53 प्रतिशत की तुलना में 2019-21 में बढकर 78.6 प्रतिशत हो गई है.
  • रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत विश्व में अमरीका और ब्रिटेन के बाद तीसरी सबसे बडी वित्त प्रौद्योगिकी अर्थव्‍यवस्‍था है.

दसवां वाईब्रेन्‍ट गुजरात वैश्विक शिखर सम्मेलन गांधीनगर में आयोजित किया गया

दसवां वाईब्रेन्‍ट गुजरात वैश्विक शिखर सम्मेलन (10th Vibrant Gujarat Global Summit) 2024 गांधीनगर के महात्मा मंदिर में आयोजित किया गया था. इसका उद्घाटन 10 जनवरी को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किया था. यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा ‘ग्लोबल ट्रेड शो’ था.

मुख्य बिन्दु

  • वर्ष 2024 के वाईब्रेन्‍ट गुजरात वैश्विक शिखर सम्मेलन का विषय ‘भविष्य का प्रवेश द्वार’ था. इसमें 34 भागीदार देशों और 16 भागीदार संगठनों ने हिस्सा लिया था.
  • भारतीय उद्योगपतियों के साथ-साथ लगभग 200 से अधिक वैश्विक सीईओ ने भी इस शिखर सम्मेलन में भाग लिया.
  • इस शिखर सम्मेलन का उपयोग उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में निवेश के अवसरों को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच के रूप में भी किया गया था.
  • यह शिखर सम्मेलन सेमि कंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, ई-मोबिलिटी और अंतरिक्ष विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों पर केंद्रित था.
  • ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, यूएई, यूके, जर्मनी, नॉर्वे सहित 20 देशों के प्रतिनिधित्व करने वाले अनुसंधान क्षेत्र के एक हजार से अधिक प्रदर्शक इस व्यापार शो में भाग लिए. प्रधानमंत्री ने विश्‍व नेताओं शीर्ष कम्‍पनियों के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक किए.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्‍त अरब अमीरात के राष्‍ट्रपति शेख मोहम्‍मद बिन जायद अल नाहयान ने सरदार वल्‍लभ भाई पटेल अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डे के बाहर रोड शो किए.
  • विभिन्न क्षेत्रों में अत्याधुनिक उत्पादनों और सेवाओं को इस व्यापार शो में प्रस्तुत किया गया, जिनमें इलेक्ट्रिक वाहन, ग्रीन हाइड्रोजन, नवीनीकरणीय ऊर्जा और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते उद्योग भी शामिल थे.
  • भारत ने संयुक्‍त अरब अमीरात (UAE) के साथ चार समझौते किए. यह नूतन स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल, नवीकरणीय ऊर्जा, फूड पार्क और लॉजिटिक्‍स के क्षेत्र में सहयोग और निवेश से संबंध‍ित हैं.उद्योग जगत ने इस सम्‍मेलन में गुजरात में 2.38 लाख करोड रुपये से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की.
  • सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन ने 35 हजार करोड रुपये के निवेश से गुजरात में दूसरी कार निर्माण इकाई स्‍थापित करने का वायदा किया.
  • रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने दक्षिण गुजरात के हाजिरा में भारत की पहली कार्बन फाइबर इकाई स्‍थापित करने की बात कही.
  • अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने गुजरात में दो लाख करोड रुपये निवेश करने को कहा है. इससे अगले पांच वर्ष में एक लाख लोगों को प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष रोजगार मिलेगा.
  • कच्‍छ के खावडा में विश्‍व का सबसे बडा ग्रीन ऊर्जा पार्क अडानी समूह बना रहा है. इससे तीस गीगा वाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्‍पन्‍न होगी.
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा है कि भारत 2028 तक 5 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा.
  • श्रीमती सीतारामन ने कहा क‍ि भारत में 2023 तक पिछले 23 वर्ष में 919 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ जिसमें से 65 प्रतिशत निवेश पिछले 9 वर्षों में आया है.

राष्ट्रीय आय का अग्रिम अनुमान जारी, GDP वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने 5 जनवरी को चालू वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए राष्ट्रीय आय का पहला अग्रिम अनुमान (FI) जारी किया था. यह अनुमान स्थिर (2011-12) और वर्तमान दोनों कीमतों पर जारी किया गया था.

मुख्य बिन्दु

  • वित्तीय वर्ष 2023-24 में स्थिर (2011-12) कीमतों पर वास्तविक जीडीपी ₹171.79 लाख करोड़ के स्तर तक पहुंचने का अनुमान है. 2023-24 के दौरान वास्तविक डीपी में 7.3 प्रतिशत वृद्धि होने का अनुमान है, जबकि 2022-23 में यह 7.2 प्रतिशत थी.
  • वर्ष 2023-24 में मौजूदा कीमतों पर जीडीपी ₹296.58 लाख करोड़ अनुमानित है. 2023-24 के दौरान 8.9 प्रतिशत वृद्धि अनुमानित है जबकि 2022-23 में यह 16.1 प्रतिशत थी.
  • NSO के अनुमान के अनुसार, निवेश और सरकार के व्यय के कारण खनन, विनिर्माण और वित्तीय सेवा क्षेत्र में वृद्धि होगी यह समग्र रूप से जीडीपी की वृद्धि दर को तेज़ करने में सहायक होगी.
  • सरकार का अनुमान है कि निवेश और विनिर्माण में वृद्धि के कारण दूसरी छमाही में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रह सकती है.
  • राष्ट्रीय आय के अग्रिम अनुमान संकेतक-आधारित हैं और बेंचमार्क-सूचक पद्धति का उपयोग करके संकलित किए जाते हैं यानी पिछले वर्ष (2022-23) के लिए उपलब्ध अनुमान क्षेत्रों के प्रदर्शन को प्रतिबिंबित करने वाले महत्‍वपूर्ण संकेतकों का उपयोग करके निकाले जाते हैं.

1 जनवरी 2024 से डिब्बा बंद उत्पादों को लेकर नया नियम लागू हुआ

सरकार की ओर से डिब्बा बंद यानी पैकेजिंग सामानों को लेकर एक नया नियम 1 जनवरी 2024 से लागू हो गया. इसके बाद सभी कंपनियों को डिब्बा बंद किए हुए सामानों पर निर्माण की तिथि के साथ प्रति ईकाई बिक्री मूल्य लिखना होगा.

मुख्य बिन्दु

  • उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नोटिस के अनुसार, अब कंपनियों के लिए सामान के ‘प्रति इकाई बिक्री मूल्य’ के साथ केवल ‘मैन्यूफैक्चरिंग की तारीख’ प्रकाशित करना अनिवार्य किया गया है.
  • चूंकि पैकेट बंद सामान की बिक्री विभिन्न मात्राओं में की जाती है, ऐसे में महत्वपूर्ण है कि उपभोक्ता डिब्बा बंद सामान की प्रति इकाई बिक्री कीमत से अवगत हों, जिससे वह सभी जानकारी के साथ सोच-विचार कर वस्तु खरीद सके.
  • उदाहरण के लिए 5किलोग्राम के पैकेट बंद गेहूं के आटे में अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के साथ प्रति किलो इकाई बिक्री मूल्य भी प्रकाशित होगा. इसी प्रकार, एक किलो से कम मात्रा वाले डिब्बा बंद उत्पाद के पैकेट पर बिक्री मूल्य प्रति ग्राम होगा.

2023-24 की दूसरी तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.6 प्रतिशत बढ़ी

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने चालू वित्त वर्ष (2023-24) की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के दौरान देश के जीडीपी के आधिकारिक आंकड़े 30 नवंबर 2023 को प्रकाशित किए थे.

मुख्य बिन्दु

  • इसके अनुसार 2023-24 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भारत की अर्थव्यवस्था (GDP) 7.6 प्रतिशत की गति से आगे बढ़ी है. पिछले वर्ष 2022-23 की इसी तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.2 प्रतिशत रही थी.
  • अर्थव्यस्था के वृद्धि दर्ज करने का प्रमुख कारण विनिर्माण, खनन और सेवा क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन है. जिसके परिणामस्वरूप भारत विश्व में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाला देश बन गया है.
  • हालांकि वित्त वर्ष 2023-24 के प्रथम तिमाही की तुलना में भारत के अर्थव्यवस्था की विकास दर कम रही है. प्रथम तिमाही में विकास दर 7.8 प्रतिशत रही थी.
  • भारत विश्व में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है. जबकि चीन, जुलाई-सितंबर के दौरान 4.9 प्रतिशत की विकास दर रही है.
  • 2023-24 की दूसरी तिमाही में वर्तमान कीमतों पर जीडीपी या सकल घरेलू उत्पाद 71.66 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जबकि 2022-23 की दूसरी तिमाही में यह 65.67 लाख करोड़ रुपये था.
  • कृषि क्षेत्र की जीवीए (ग्रॉस वैल्यू एडेड) वृद्धि सितंबर 2023 तिमाही में घटकर 1.2 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले 2.5 प्रतिशत थी.
  • विनिर्माण क्षेत्र के जीवीए में 13.9 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जबकि एक साल पहले की अवधि में इसमें 3.8 प्रतिशत की गिरावट आई थी.
  • खनन और उत्खनन में उत्पादन दूसरी तिमाही में बढ़कर 10 प्रतिशत हो गया, जिसमें एक साल पहले 0.1 प्रतिशत की गिरावट आई थी.

दुर्लभ और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण खनिज पदार्थों की नीलामी शुरू

सरकार दुर्लभ और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण खनिज पदार्थों की नीलामी शुरू की है. नीलामी का उद्देश्‍य अर्थव्यवस्था के साथ साथ स्‍वच्‍छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है.

केन्द्रीय कोयला और खान मंत्री प्रहलाद जोशी ने 29 नवंबर को इस नीलामी प्रक्रिया के पहले चरण की शुरुआत की थी. इस चरण में 20 ब्लॉकों की बिक्री शुरू हुई है. इस नीलामी में  लिथियन और ग्रेफाइट जैसे मिनरल्स के लिए बोली मंगाई गई है.

मुख्य बिन्दु

  • बिक्री के लिए रखे ये 20 ब्लॉक देश भर में फैले हुए हैं. ये खनिज देश के आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम माने जाते हैं.
  • खान मंत्रालय के अनुसार यह एक ऐतिहासिक पहल है जो भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी, राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाएगी और स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की ओर हमारे संक्रमण का समर्थन करेगी.
  • भारत वर्ष  2030 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों से 50 प्रतिशत बिजली उत्पादन हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है. ऊर्जा क्षेत्र में इस महत्वाकांक्षी योजना से इलेक्ट्रिक कारों, वायु और सौर ऊर्जा परियोजनाओं तथा बैटरी भण्डारण प्रणालियों की माँग बढेगी और इन खनिज पदार्थों की मांग में भी वृद्धि होगी.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का सपना देखा है, इस कारण देश में पहली बार ‘महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों’ की ऑनलाइन नीलामी का ऐलान एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम है.
  • दरअसल, लिथियम की बढ़ती जरूरतों के मद्देनजर भारत सरकार इसकी सप्लाई चेन सुरक्षित करने के तरीके तलाश रही है. इसी क्रम में विदेशों में खानों की खुदाई और उनसे निकले महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग के लिए खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL) की स्थापना वर्ष 2019 में की गई.
  • इस संयुक्त उद्यम कंपनी की स्थापना तीन केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों- नैशनल एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO), हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) और मिनरल एक्सप्लोरेशन कंपनी लिमिटेड की भागीदारी के साथ की गई.
  • यह उद्यम विदेशों में रणनीतिक खनिजों की पहचान, अधिग्रहण, विकास और प्रसंस्करण का काम देखता है.
  • भारत, दुनिया के टॉप ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जकों में से एक है, जो ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और चिली जैसे संसाधन संपन्न देशों में प्रमुख खनिजों को सुरक्षित करने के लिए विदेशी समझौते कर रहा है.

नीलामी के लिए जारी 20 खनिज भंडारों की लिस्ट

ओडिसा, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, तमिलनाडु और गुजरात स्थित इन ब्लॉकों में ग्रेफाइट, लिथियम, मॉलिबेडनम, निकल, कॉपर और पोटाश के खान शामिल हैं.

ब्लॉक का नामखनिजराज्य
चुटिया-नौहट्टा ग्लूकोनाइट ब्लॉकग्लूकोनाइटबिहार
पिपराडीह-भुरवा ग्लूकोनाइट ब्लॉकग्लूकोनाइटबिहार
गेनजाना निकेल, क्रोमियम और पीजीई ब्लॉकनिकेल, क्रोमियमबिहार
कुंडोल निकेल और क्रोमियम ब्लॉकनिकेल और क्रोमियमगुजरात
मुस्कनिया-गारेरियातोला-बरवाड़ी पोटाश ब्लॉकपोटाशझारखंड
दुधियासोल पूर्व निकेल और तांबा ब्लॉकनिकेल और तांबाओडिशा
बाबजा ग्रेफाइट और मैंगनीज ब्लॉकग्रेफाइट और मैंगनीज अयस्कओडिशा
बिरपल्ली ग्रेफाइट और मैंगनीज ब्लॉकग्रेफाइट और मैंगनीजओडिशा
अखरखटा ग्रेफाइट ब्लॉकग्रेफाइटओडिशा
वेल्लाक्कल सेंट्रल (सेगमेंट-ए) मोलिब्डेनम ब्लॉकमोलिब्डेनम अयस्कतमिलनाडु
नोचिपट्टी मोलिब्डेनम ब्लॉकमोलिब्डेनम अयस्कतमिलनाडु
वेलम्पट्टी उत्तर ए और बी मोलिब्डेनम ब्लॉकमोलिब्डेनम अयस्कतमिलनाडु
कुरुंजकुलाम ग्रेफाइट ब्लॉकग्रेफाइटतमिलनाडु
इलुप्पाकुडी ग्रेफाइट ब्लॉकग्रेफाइटतमिलनाडु
मन्नादीपट्टी सेंट्रल मोलिब्डेनम ब्लॉकमोलिब्डेनमतमिलनाडु
मरुदिपट्टी (सेंट्रल) मोलिब्डेनम ब्लॉकमोलिब्डेनमतमिलनाडु
कुर्चा ग्लूकोनाइट ब्लॉकग्लूकोनाइटउत्तर प्रदेश
पहाड़ी कलां-गोरा कलां फॉस्फोराइट ब्लॉकफॉस्फोराइटउत्तर प्रदेश
सालल-हैमना लिथियम, टाइटेनियम और बॉक्साइट (एल्यूमिनस लेटेराइट) ब्लॉकलिथियम, टाइटेनियम और बॉक्साइट (एल्यूमिनस लेटेराइट)जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश
कटघोरा लिथियम और आरईई ब्लॉकलिथियम और आरईईछत्तीसगढ़

विपणन वर्ष 2024-25 के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को मंजूरी

सरकार ने विपणन वर्ष 2024-25 के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को 18 अक्तूबर को मंजूरी दी थी. यह मंजूरी माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने दी.

मुख्य बिन्दु

  • विपणन सीजन 2024-25 के लिए छह फसलों के MSP में वृद्धि को मंजूरी दी गई है, ताकि उत्पादकों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जा सके.
  • गेहूं का MSP 150 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर 2,275 रुपए क्विंटल किया गया है. रबी की 5 अन्य फसलों जौ, चना, मसूर, सरसों, कुसुम की MSP में भी बढ़ोतरी की गई है.
  • रबी फसल की बुआई लौटते मानसून और पूर्वोत्तर मानसून के समय की जाती है. इन फसलों की कटाई आमतौर पर गर्मी के मौसम में अप्रैल में होती है. रबी की प्रमुख फसलें गेहूं, चना, मटर, सरसों और जौ है.

विपणन वर्ष 2024-25 के लिए रबी फसलों का MSP

फसलप्रति क्विंटल MSPवृद्धि
गेहूं2275150
जौ1850115
सरसों5650200
चना5440105
कुसुभ5800150
मसूर6425425

MSP (Minimum Support Price) क्या है?

MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य वह कीमत होती है, जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है. इसे सरकारी भाव भी कहा जा सकता है. MSP की घोषणा सरकार द्वारा कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की संस्तुति पर वर्ष में दो बार रबी और खरीफ के मौसम में की जाती है.

सरकार फसलों की MSP तय करती है ताकि किसानों की उपज का वाजिब भाव मिल सके. इसके तहत सरकार फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया, नैफेड जैसी सरकारी एजेसिंयों की मदद से किसानों की फसलों को खरीदती है.

MSP में 23 फसलें शामिल होती हैं

  • 7 प्रकार के अनाज (धान, गेहूं, मक्का, बाजरा, ज्वार, रागी और जौ)
  • 5 प्रकार की दालें (चना, अरहर/तुअर, उड़द, मूंग और मसूर)
  • 7 तिलहन (रेपसीड-सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल, कुसुम, निगरसीड)
  • 4 व्यावसायिक फसलें (कपास, गन्ना, खोपरा, कच्चा जूट)

पारंपरिक शिल्‍पकारों को सहयोग देने के लिए ‘पीएम-विश्‍वकर्मा’ योजना को मंजूरी

केंद्र सरकार ने पारंपरिक शिल्पकारों और कारीगरों को सहयोग देने के लिए ‘पीएम-विश्‍वकर्मा’ योजना को मंजूरी दी है. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में 16 अगस्त को मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति ने पांच वर्ष की अवधि के लिए इस योजना को स्वीकृति दी. इस योजना पर 13 हजार करोड रुपये की लागत आएगी.

मुख्य बिन्दु

  • इस योजना का उद्देश्य हाथों और औजारों के जरिए काम करने वाले शिल्पकारों और कारीगरों की पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक कौशल को मजबूती तथा बढ़ावा देना है.
  • इस योजना के अंतर्गत शुरूआत में 18 पारंपरिक उद्योग-धंधों को शामिल किया जाएगा. इनमें बढई, नाव बनाने वाले, सुनार, राज मिस्री, खिलौने बनाने वाले, लौहार और कुम्हार शामिल हैं.
  • इस  योजना के अंतर्गत कौशल (स्‍कील) प्रशिक्षण दिया जाएगा. दो तरह के स्‍कील प्रोगाम होंगे- बेसिक और एडवांस्‍ड स्‍कील्‍स.  स्‍कील लेने के दौरान 500 रुपये प्रतिदिन स्‍टाईफंड भी दिया जाएगा. फिर माडर्न टूल्‍स खरीदने के लिए 15 हजार रुपये तक का सपोर्ट मिलेगा.
  • इस  योजना के अंतर्गत अधिकतम 5 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर 1 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाएगा. इससे 30 लाख से अधिक परिवार लाभान्वित होंगे.