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भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बना

नवीनतम आर्थिक आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमानों के अनुसार, भारत अब जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (4th Largest Economy) बन गया है. भारत की जीडीपी वर्तमान में 4.18 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है.

मुख्य बिन्दु

  • यह उपलब्धि भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है क्योंकि भारत अब विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के और करीब पहुँच गया है.
  • आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत अपनी वर्तमान गति (7-8%) बनाए रखता है, तो वह 2027 के अंत तक जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा.

विश्व के शीर्ष 5 अर्थव्यवस्थाएं

रैंकदेशनॉमिनल जीडीपी (लगभग)
1अमेरिका~$29-30 ट्रिलियन
2चीन~$19-20 ट्रिलियन
3जर्मनी~$4.8 ट्रिलियन
4भारत~$4.4 – 4.5 ट्रिलियन
5जापान~$4.2 ट्रिलियन

भारत की उपलब्धि के महत्वपूर्ण कारक

  • वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की 7.4% की वृद्धि दर ने इसे प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज बनाए रखा है.
  • जापान की अर्थव्यवस्था में लंबे समय से जारी स्थिरता और येन (Yen) की कमजोरी के कारण उसकी जीडीपी में गिरावट आई.
  • UPI और डिजिटल इंडिया जैसे सुधारों ने उत्पादकता में भारी वृद्धि की है.
  • सरकार द्वारा सड़कों, रेलवे और बंदरगाहों पर बड़े पैमाने पर खर्च ने आर्थिक गतिविधियों को गति दी है.

भारतीय अर्थव्यवस्था से संबंधित कुछ मुख्य बिन्दु

  • ‘क्रय शक्ति समानता’ (Purchasing Power Parity) के आधार पर, भारत पहले से ही चीन और अमेरिका के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.
  • विशाल जनसंख्या के कारण ‘प्रति व्यक्ति जीडीपी’ (GDP per capita) के मामले में भारत अन्य शीर्ष देशों से काफी पीछे है.

2025-26 में जीडीपी में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने 7 जनवरी 2026 को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रथम अग्रिम अनुमान जारी किए. इसके अनुसार भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है. यह वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष (2024-25) की 6.5 प्रतिशत की तुलना में काफी बेहतर है.

वर्तमान वित्त वर्ष के लिए जीडीपी के पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार इसे 201 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है. जबकि 2024-25 के लिए इसका अनंतिम अनुमान 187 लाख करोड़ रुपये से अधिक था.

इन आंकड़ों के साथ भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है.

NSO द्वारा जारी रिपोर्ट: मुख्य बिंदु

  • वास्तविक जीडीपी (Real GDP): 7.4% (स्थिर कीमतों पर)
  • नॉमिनल जीडीपी (Nominal GDP): 8.0% (वर्तमान कीमतों पर)
  • सकल मूल्य वर्धित (GVA) वृद्धि: 7.3%
  • प्रति व्यक्ति उपभोग: 6.1% की वृद्धि

क्षेत्रवार अनुमानित वृद्धि दर

  • वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाएँ: 9.9%
  • व्यापार, होटल, परिवहन और संचार: 7.5%
  • विनिर्माण (Manufacturing): 7.0%
  • निर्माण (Construction): 7.0%
  • कृषि (Agriculture): 3.1%

अन्य संस्थानों के अनुमानों से तुलना

NSO का 7.4% का यह अनुमान भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अनुमान से भी थोड़ा अधिक है. दिसंबर 2025 की मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने इसे 7.3% रहने का अनुमान लगाया था. SBI (Ecowrap) रिपोर्ट के अनुसार यह वृद्धि 7.5% तक जा सकती है.

इलेक्‍ट्रोनिक घटक विनिर्माण योजना के तीसरे चरण के प्रस्तावों को मंजूरी

केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) ने 2 जनवरी 2026 को इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना (ECMS) के तीसरे चरण (Tranche-3) के तहत 22 नए प्रस्तावों को मंजूरी दी है.

मुख्य बिन्दु

  • इस योजना का मुख्य उद्देश्य विदेशों से आयात होने वाले महंगे इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का निर्माण भारत में ही करना है. यह केंद्र सरकार का भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का वैश्विक हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
  • इसमें लगभग 41863 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है. इन परियोजनाओं से 2.58 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन होने की उम्मीद है.

योजना का महत्व

  • वर्तमान में भारत कई महत्वपूर्ण घटकों के लिए चीन और अन्य देशों पर निर्भर है. इस योजना से भारत आत्मनिर्भर बनेगा.
  • आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2026 को एक ‘ऐतिहासिक वर्ष’ बताया है क्योंकि इसी वर्ष 4 सेमीकंडक्टर इकाइयां अपना व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने वाली हैं.
  • सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को $500 बिलियन तक ले जाना है.

मंजूरी प्राप्त 22 प्रस्ताव मुख्य रूप से 11 श्रेणियों के उत्पादों का निर्माण करेंगे:

  • 5 मूल घटक (Bare Components): PCB (सर्किट बोर्ड), कैपेसिटर, कनेक्टर, एनक्लोजर (कैबिनेट) और लिथियम-आयन सेल.
  • 3 उप-संयोजन (Sub-assemblies): कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल और ऑप्टिकल ट्रांससीवर.
  • 3 आपूर्ति श्रृंखला वस्तुएं (Supply Chain items): एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न, एनोड सामग्री और लैमिनेट.

इन प्रस्तावों में देश-विदेश की कई दिग्गज कंपनियां शामिल हैं:

  • सैमसंग डिस्प्ले (Samsung Display Noida)
  • डिक्सन टेक्नोलॉजीज (Dixon Technologies)
  • फॉक्सकॉन (Yuzhan Technology India)
  • हिंडाल्को इंडस्ट्रीज (Hindalco)
  • टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics)

RBI की पाँचवी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा: रेपो दर में 25 प्रतिशत की कटौती

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समि‍ति (MPC) की बैठक 3 से 5 दिसंबर 2025 तक मुंबई में हुई थी. बैठक की अध्यक्षता बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की थी.

यह चालू वित्त वर्ष (2025-26) की पाँचवी द्विमासिक (दिसम्बर-जनवरी) मौद्रिक नीति (5th Bi-Monthly Monetary Policy) समीक्षा बैठक थी.

MPC की बैठक, दिसम्बर 2025: मुख्य बिंदु

RBI ने प्रमुख नीतिगत दर रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत (25 बेसिस पॉइंट्स) की कटौती की है.

RBI ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने आर्थिक अनुमानों को संशोधित किया है:

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि अनुमान:

  • पहले का अनुमान: 6.8%
  • नया अनुमान: 7.3%

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति अनुमान:

  • पहले का अनुमान: 2.6%
  • नया अनुमान: 2.0%

रेपो रेट कटौती का महत्व

  • रेपो रेट में कटौती से बैंकों पर ब्याज दरें घटाने का दबाव बढ़ेगा, जिससे होम लोन और अन्य कर्जों की EMI कम हो सकती है.
  • यह कटौती वित्तीय प्रणाली में तरलता (Liquidity) को बढ़ाएगी और उपभोक्ताओं तथा व्यवसायों के लिए उधार लेने की लागत को कम करके आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करेगी.

वर्तमान दरें: एक दृष्टि

नीति रिपो दर5.25%
प्रत्‍यावर्तनीय रेपो दर (RRR)3.35%
स्थायी जमा सुविधा (SDF)5.00%
सीमांत स्‍थायी सुविधा दर (MSF)5.50%
बैंक दर5.50%
नकद आरक्षित अनुपात (CRR)3.00%
वैधानिक तरलता अनुपात (SLR)18%

मौद्रिक नीति समि‍ति (MPC): एक दृष्टि

  • RBI की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) भारत सरकार द्वारा गठित एक समिति है. इसका गठन RBI अधिनियम 1934 के प्रावधानों के तहत 29 सितंबर 2016 को किया गया था.
  • यह भारत सरकार द्वारा निर्धारित मुद्रास्फीति लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आरबीआई की नीतिगत ब्याज दर निर्धारित करती है.
  • मौद्रिक नीति समिति में वर्तमान में 6 सदस्य हैं. इसमें तीन सदस्य RBI से होते हैं और तीन अन्य स्वतंत्र सदस्य भारत सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं.
  • समिति की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर करता है. इस समिति का गठन उर्जित पटेल कमिटी की सिफारिश के आधार किया गया था.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI): एक दृष्टि

  • भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) भारत का केन्द्रीय बैंक है. यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है.
  • RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को RBI ऐक्ट 1934 के अनुसार हुई. प्रारम्भ में इसका केन्द्रीय कार्यालय कोलकाता में था जो सन 1937 में मुम्बई आ गया.
  • पहले यह एक निजी बैंक था किन्तु सन 1949 से यह भारत सरकार का उपक्रम बन गया है.
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत अनिवार्य रूप से मौद्रिक नीति के संचालन की जिम्मेदारी सौपीं गई है.

क्या होता है रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर और एसएलआर?

केंद्र सरकार ने श्रम संहिताओं को पूरे देश में लागू किया

केंद्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 से चार श्रम संहिताओं (Four Labour Codes) को पूरे देश में लागू कर दिया. ये श्रम संहिताएँ भारत के श्रम कानूनों को सरल, आधुनिक और एकीकृत बनाने के लिए एक बड़ा सुधार है.

इन चार संहिताओं ने 29 पुराने और जटिल केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित कर दिया है, जिससे भारत का श्रम विनियमन ढांचा सरल और आधुनिक बन गया है.

ये चार संहिताएं निम्नलिखित हैं:

  1. मज़दूरी संहिता, 2019 (Code on Wages, 2019): न्यूनतम मजदूरी, समय पर वेतन भुगतान और बोनस से संबंधित.
  2. औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (Industrial Relations Code, 2020): औद्योगिक विवादों, श्रमिकों की छंटनी और कर्मचारियों की शर्तों से संबंधित.
  3. सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020): कर्मचारी भविष्य निधि (PF), राज्य बीमा (ESIC), ग्रेच्युटी और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों से संबंधित.
  4. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य-दशा संहिता, 2020 (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020): कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और श्रमिकों के कामकाजी घंटों से संबंधित.

प्रमुख बदलाव

  1. न्यूनतम मजदूरी की गारंटी: अब देश भर में सभी कर्मचारियों (असंगठित क्षेत्र के श्रमिक भी शामिल) को न्यूनतम मजदूरी का कानूनी अधिकार मिला है.
  2. गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सुरक्षा: पहली बार, ओला, ज़ोमैटो आदि के लिए काम करने वाले गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा (PF, ESIC, आदि) के दायरे में लाया गया है.
  3. ग्रेच्युटी का नियम: ग्रेच्युटी के लिए आवश्यक 5 साल की सेवा की शर्त को कुछ मामलों में घटाकर 1 साल कर दिया गया है.
  4. ओवरटाइम का भुगतान: सामान्य कार्य घंटों से अधिक काम करने पर सामान्य मजदूरी की कम से कम दोगुनी दर से भुगतान करना होगा.
  5. नियुक्ति पत्र: सभी कर्मचारियों के लिए नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) देना अनिवार्य कर दिया गया है.
  6. महिलाओं के लिए समान अवसर: महिलाओं को समान काम के लिए समान वेतन की गारंटी और सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए रात्रि पाली (Night Shift) में काम करने की अनुमति दी गई है.

निर्यातकों के लिए एक नई ऋण आश्वासन योजना को मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निर्यातकों के लिए एक नई ऋण आश्वासन योजना (Credit Guarantee Scheme for Exporters – CGSE) को मंजूरी दी है.

यह योजना निर्यातकों, खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), को वित्तीय सहायता और तरलता (liquidity) प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है.

CGSE योजना के मुख्य बिंदु

  • यह योजना भारतीय निर्यातकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और देश के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई है.
  • इस योजना का उद्देश्य भारत को 1 ट्रिलियन (एक लाख करोड़) डॉलर के निर्यात लक्ष्य का समर्थन करना और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देना है. यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को भी मजबूत करेगी.
  • यह योजना सदस्य ऋणदाता संस्थानों (MLIs) को राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के माध्यम से 100% क्रेडिट गारंटी कवरेज प्रदान करती है.
  • इसका उद्देश्य पात्र निर्यातकों (MSMEs सहित) को अतिरिक्त ऋण सुविधा के रूप में ₹20,000 करोड़ तक की सहायता प्रदान करना है.
  • इस योजना के तहत, निर्यातकों को बिना किसी संपार्श्विक (यानी, बिना किसी गारंटी या सुरक्षा) के ऋण तक पहुँचने में मदद मिलेगी.

मंत्रिमंडल ने निर्यात संवर्धन मिशन को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹25,060 करोड़ के परिव्यय के साथ निर्यात संवर्धन मिशन (Export Promotion Mission – EPM) को मंजूरी दी है.

यह एक प्रमुख पहल है, जिसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा को मज़बूत करने के लिए की गई थी. इसकी घोषणा विशेष रूप से MSME, पहली बार निर्यात करने वाले और श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बढावा देने के लिए की गई थी.

EPM के मुख्य बिन्दु

  • यह मिशन वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक चलेगा. इसका उद्देश्य निर्यातकों के लिए एक व्यापक, लचीला और डिजिटल रूप से संचालित ढाँचा प्रदान करना है.
  • यह मिशन निर्यात क्षेत्र की संरचनात्मक चुनौतियों जैसे सीमित और महंगा व्यापार वित्त, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन की उच्च लागत और कमजोर ब्रांडिंग को दूर करने पर ध्यान केंद्रित करेगा.
  • यह मिशन भारत के निर्यात को एकल, परिणाम-आधारित और अनुकूलनीय तंत्र की ओर ले जाकर वैश्विक व्यापार चुनौतियों का तेजी से जवाब देने में मदद करेगा.

मिशन का उद्देश्य और प्रभाव

  • EPM का लक्ष्य उन संरचनात्मक चुनौतियों को दूर करना है जो भारतीय निर्यात को बाधित करती हैं:
  • भारतीय निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना, विशेष रूप से कपड़ा, चमड़ा, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों में.
  • विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध सेवाओं में नए रोजगार के अवसर पैदा करना.
  • गैर-पारंपरिक जिलों और क्षेत्रों से निर्यात को बढ़ावा देना और नए बाजारों में विस्तार करना.

SJ-100 यात्री जेट के सह-उत्पादन के लिए भारत-रूस ने एक MoU पर हस्ताक्षर किए

भारत में एक पूर्ण यात्री विमान का उत्पादन के लिए भारत और रूस ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस समझौता ज्ञापन पर भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) ने 27 अक्टूबर 2025 को हस्ताक्षर किए हैं.

समझौते के मुख्य उद्देश्य

  • इस MoU के तहत, HAL को भारत में घरेलू ग्राहकों के लिए SJ-100 विमानों का निर्माण (Manufacture) करने का अधिकार प्राप्त होगा.
  • यह पहली बार होगा जब भारत में एक पूर्ण यात्री विमान का उत्पादन किया जाएगा, जिससे यह कदम भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के लिए एक बड़ा कदम है.

SJ-100 यात्री जेट

  • SJ-100 यात्री जेट को पहले सुखोई सुपरजेट 100 नाम से जाना जाता था. यह रूस द्वारा विकसित एक क्षेत्रीय यात्री विमान है. यह मध्यम दूरी की उड़ानों के लिए डिज़ाइन किया गया एक आधुनिक विमान है.
  • HAL का मानना है कि SJ-100 भारत की उड़ान योजना (UDAN Scheme) के तहत छोटी दूरी की कनेक्टिविटी के लिए गेम चेंजर साबित होगा.

रामयपटनम में विशाल ग्रीनफील्ड रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स निर्माण परियोजना

आंध्र प्रदेश के रामयपटनम में एक विशाल ग्रीनफील्ड रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स परियोजना विकसित की जा रही है. इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹1 लाख करोड़ है.

रामयपटनम ग्रीनफील्ड रिफाइनरी परियोजना

  • यह परियोजना भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) संयुक्त रूप से विकसित करेंगे. दोनों कॉम्पनियों इससे संबंधित एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं.
  • इस परियोजना की रिफाइनिंग क्षमता 9 से 12 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष होगी. इसमें 1.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष एथिलीन क्रैकर यूनिट भी शामिल होगी.
  • इस परियोजना के लिए आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा लगभग 6,000 एकड़ भूमि आवंटित की गई है. यह वित्तीय वर्ष 2030 तक वाणिज्यिक परिचालन शुरू करने की उम्मीद है.
  • यह परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पेट्रोकेमिकल आत्मनिर्भरता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच FTA लागू

  • भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच मुक्‍त व्यापार समझौता (FTA) 1 अक्तूबर से लागू हो गया है. इस समझौते पर 10 मार्च 2025 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे.
  • यूरोपीय मुक्‍त व्यापार संघ चार देशों का महत्वपूर्ण क्षेत्रीय समूह है. इसके सदस्य आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड हैं.
  • स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. इसके बाद नॉर्वे का स्थान आता है.

समझौते की विशेषताएं

  • यह समझौता वस्तुओं के व्यापार, व्यापार को आसान बनाने और निवेश को बढ़ावा देने, सेवाओं में बाजार पहुंच, बौद्धिक संपदा अधिकारों और व्यापार वस्त्र विकास से जुड़ा है.
  • भारत यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के तहत 100 प्रतिशत गैर कृषि उत्पादों पर बाजार पहुंच दी गई है और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों पर टैरिफ में छूट दी गई है.
  • इस समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की गारंटी दी गई है. इससे देश में 10 लाख सीधे रोजगार के अवसर बनने की संभावना है.
  • यह समझौता भारतीय निर्यातकों को व्यापार और निवेश के लिए एक अच्छा माहौल बनाएगा. इससे भारत की बने सामानों का निर्यात बढ़ेगा और सेवा क्षेत्र को भी ज्यादा बाजारों तक पहुंच मिलेगी.

जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण का औपचारिक शुभारंभ

केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 24 सितंबर 2025 को वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) का औपचारिक रूप से शुभारंभ किया था.

यह न्यायाधिकरण GST से संबंधित विवादों के समाधान को सुगम बनाने और भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में विश्वास को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण योगदान देगा.

GSTAT क्या है?

  • GSTAT का पूरा नाम ‘Goods and Services Tax Appellate Tribunal’ (वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण) है.
  • यह एक वैधानिक निकाय है, जिसे वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 के तहत स्थापित किया गया है.
  • इसका उद्देश्य पूरे भारत में जीएसटी विवादों के लिए एक एकीकृत अपीलीय मंच (वन नेशन, वन फोरम) तैयार करना है.
  • यह ‘नागरिक देवो भव’ और अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों के सिद्धांतों के अनुरूप नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देगा.

GSTAT का संचालन

  • जीएसटीएटी का संचालन नई दिल्ली में एक प्रधान पीठ (Principal Bench) और देशभर में 45 स्थानों पर 31 राज्य पीठों (State Benches) के माध्यम से होगा.
  • प्रत्येक पीठ में 2 न्यायिक सदस्य, 1 केंद्रीय तकनीकी सदस्य और 1 राज्य तकनीकी सदस्य होंगे.
  • इसे तीन ‘S’ के आधार पर तैयार किया गया है:
  1. Structure (संरचना): न्यायिक + तकनीकी विशेषज्ञता
  2. Scale (विस्तार): राज्य पीठें और सरल मामलों के लिये एकल सदस्यीय पीठें
  3. Synergy (समन्वय): प्रौद्योगिकी, प्रक्रियाएँ और मानवीय विशेषज्ञता

अध्यक्ष और सदस्य

  • सरकार ने मई, 2024 में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संजय कुमार मिश्रा को GSTAT की प्रधान पीठ का अध्यक्ष नियुक्त किया था.
  • अगस्त, 2025 में, सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश मयंक कुमार जैन को पीठ का न्यायिक सदस्य नियुक्त किया. सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ए वेणु प्रसाद और सेवानिवृत्त आईआरएस अधिकारी अनिल कुमार गुप्ता तकनीकी सदस्य (राज्य) और तकनीकी सदस्य (केंद्र) होंगे.

भारत ने अपनी पहली राष्ट्रीय भूतापीय ऊर्जा नीति जारी की

  • भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के लिए अपनी पहली राष्ट्रीय भूतापीय ऊर्जा नीति (National Policy on Geothermal Energy) 2025 जारी की है. इस नीति को 17 सितम्बर को केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने जारी किया.
  • इसके साथ ही भारत उन देशों की बढ़ती सूची में शामिल हो गया है जो 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए भूमिगत ताप ऊर्जा उत्पादन की दिशा कर रहे हैं.

राष्ट्रीय भूतापीय ऊर्जा नीति 2025: मुख्य उद्देश्य

  • यह नीति देश की नवीकरणीय ऊर्जा संरचना का उन्नयन करने और 2070 तक ‘नेट ज़ीरो उत्सर्जन’ लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक अहम पहल है.
  • भारत के भूतापीय संसाधनों को स्वच्छ, विश्वसनीय और सतत ऊर्जा स्रोत के रूप में विकसित करना इस नीति का प्रमुख उद्देश्य है.
  • भारत में भूतापीय संसाधन का उपयोग अभी तक ऊर्जा उत्पादन में नहीं लिया जाता था.
  • इस नीति का लक्ष्य लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और गुजरात जैसे क्षेत्रों में 381 गर्म झरनों और 10 भूतापीय क्षेत्रों को विकसित करना है.
  • इसमें कर छूट, आयात शुल्क में छूट और व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण जैसे प्रोत्साहन शामिल हैं.

भूतापीय ऊर्जा क्या है?

  • भूतापीय ऊर्जा, पृथ्वी की सतह के नीचे से प्राप्त होने वाली ऊष्मा ऊर्जा है. यह एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है क्योंकि पृथ्वी के अंदर गर्मी का प्रवाह लगातार बना रहता है.
  • इसमें पृथ्वी के आंतरिक भाग में गर्मी, मैग्मा, रेडियोधर्मी तत्वों के क्षय, या गर्म भूजल का उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिया किया जाता है.