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मंत्रिमंडल ने निर्यात संवर्धन मिशन को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹25,060 करोड़ के परिव्यय के साथ निर्यात संवर्धन मिशन (Export Promotion Mission – EPM) को मंजूरी दी है.

यह एक प्रमुख पहल है, जिसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा को मज़बूत करने के लिए की गई थी. इसकी घोषणा विशेष रूप से MSME, पहली बार निर्यात करने वाले और श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बढावा देने के लिए की गई थी.

EPM के मुख्य बिन्दु

  • यह मिशन वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक चलेगा. इसका उद्देश्य निर्यातकों के लिए एक व्यापक, लचीला और डिजिटल रूप से संचालित ढाँचा प्रदान करना है.
  • यह मिशन निर्यात क्षेत्र की संरचनात्मक चुनौतियों जैसे सीमित और महंगा व्यापार वित्त, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन की उच्च लागत और कमजोर ब्रांडिंग को दूर करने पर ध्यान केंद्रित करेगा.
  • यह मिशन भारत के निर्यात को एकल, परिणाम-आधारित और अनुकूलनीय तंत्र की ओर ले जाकर वैश्विक व्यापार चुनौतियों का तेजी से जवाब देने में मदद करेगा.

मिशन का उद्देश्य और प्रभाव

  • EPM का लक्ष्य उन संरचनात्मक चुनौतियों को दूर करना है जो भारतीय निर्यात को बाधित करती हैं:
  • भारतीय निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना, विशेष रूप से कपड़ा, चमड़ा, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों में.
  • विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध सेवाओं में नए रोजगार के अवसर पैदा करना.
  • गैर-पारंपरिक जिलों और क्षेत्रों से निर्यात को बढ़ावा देना और नए बाजारों में विस्तार करना.

SJ-100 यात्री जेट के सह-उत्पादन के लिए भारत-रूस ने एक MoU पर हस्ताक्षर किए

भारत में एक पूर्ण यात्री विमान का उत्पादन के लिए भारत और रूस ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस समझौता ज्ञापन पर भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) ने 27 अक्टूबर 2025 को हस्ताक्षर किए हैं.

समझौते के मुख्य उद्देश्य

  • इस MoU के तहत, HAL को भारत में घरेलू ग्राहकों के लिए SJ-100 विमानों का निर्माण (Manufacture) करने का अधिकार प्राप्त होगा.
  • यह पहली बार होगा जब भारत में एक पूर्ण यात्री विमान का उत्पादन किया जाएगा, जिससे यह कदम भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के लिए एक बड़ा कदम है.

SJ-100 यात्री जेट

  • SJ-100 यात्री जेट को पहले सुखोई सुपरजेट 100 नाम से जाना जाता था. यह रूस द्वारा विकसित एक क्षेत्रीय यात्री विमान है. यह मध्यम दूरी की उड़ानों के लिए डिज़ाइन किया गया एक आधुनिक विमान है.
  • HAL का मानना है कि SJ-100 भारत की उड़ान योजना (UDAN Scheme) के तहत छोटी दूरी की कनेक्टिविटी के लिए गेम चेंजर साबित होगा.

रामयपटनम में विशाल ग्रीनफील्ड रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स निर्माण परियोजना

आंध्र प्रदेश के रामयपटनम में एक विशाल ग्रीनफील्ड रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स परियोजना विकसित की जा रही है. इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹1 लाख करोड़ है.

रामयपटनम ग्रीनफील्ड रिफाइनरी परियोजना

  • यह परियोजना भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) संयुक्त रूप से विकसित करेंगे. दोनों कॉम्पनियों इससे संबंधित एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं.
  • इस परियोजना की रिफाइनिंग क्षमता 9 से 12 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष होगी. इसमें 1.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष एथिलीन क्रैकर यूनिट भी शामिल होगी.
  • इस परियोजना के लिए आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा लगभग 6,000 एकड़ भूमि आवंटित की गई है. यह वित्तीय वर्ष 2030 तक वाणिज्यिक परिचालन शुरू करने की उम्मीद है.
  • यह परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पेट्रोकेमिकल आत्मनिर्भरता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच FTA लागू

  • भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच मुक्‍त व्यापार समझौता (FTA) 1 अक्तूबर से लागू हो गया है. इस समझौते पर 10 मार्च 2025 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे.
  • यूरोपीय मुक्‍त व्यापार संघ चार देशों का महत्वपूर्ण क्षेत्रीय समूह है. इसके सदस्य आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड हैं.
  • स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. इसके बाद नॉर्वे का स्थान आता है.

समझौते की विशेषताएं

  • यह समझौता वस्तुओं के व्यापार, व्यापार को आसान बनाने और निवेश को बढ़ावा देने, सेवाओं में बाजार पहुंच, बौद्धिक संपदा अधिकारों और व्यापार वस्त्र विकास से जुड़ा है.
  • भारत यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के तहत 100 प्रतिशत गैर कृषि उत्पादों पर बाजार पहुंच दी गई है और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों पर टैरिफ में छूट दी गई है.
  • इस समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की गारंटी दी गई है. इससे देश में 10 लाख सीधे रोजगार के अवसर बनने की संभावना है.
  • यह समझौता भारतीय निर्यातकों को व्यापार और निवेश के लिए एक अच्छा माहौल बनाएगा. इससे भारत की बने सामानों का निर्यात बढ़ेगा और सेवा क्षेत्र को भी ज्यादा बाजारों तक पहुंच मिलेगी.

जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण का औपचारिक शुभारंभ

केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 24 सितंबर 2025 को वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) का औपचारिक रूप से शुभारंभ किया था.

यह न्यायाधिकरण GST से संबंधित विवादों के समाधान को सुगम बनाने और भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में विश्वास को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण योगदान देगा.

GSTAT क्या है?

  • GSTAT का पूरा नाम ‘Goods and Services Tax Appellate Tribunal’ (वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण) है.
  • यह एक वैधानिक निकाय है, जिसे वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 के तहत स्थापित किया गया है.
  • इसका उद्देश्य पूरे भारत में जीएसटी विवादों के लिए एक एकीकृत अपीलीय मंच (वन नेशन, वन फोरम) तैयार करना है.
  • यह ‘नागरिक देवो भव’ और अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों के सिद्धांतों के अनुरूप नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देगा.

GSTAT का संचालन

  • जीएसटीएटी का संचालन नई दिल्ली में एक प्रधान पीठ (Principal Bench) और देशभर में 45 स्थानों पर 31 राज्य पीठों (State Benches) के माध्यम से होगा.
  • प्रत्येक पीठ में 2 न्यायिक सदस्य, 1 केंद्रीय तकनीकी सदस्य और 1 राज्य तकनीकी सदस्य होंगे.
  • इसे तीन ‘S’ के आधार पर तैयार किया गया है:
  1. Structure (संरचना): न्यायिक + तकनीकी विशेषज्ञता
  2. Scale (विस्तार): राज्य पीठें और सरल मामलों के लिये एकल सदस्यीय पीठें
  3. Synergy (समन्वय): प्रौद्योगिकी, प्रक्रियाएँ और मानवीय विशेषज्ञता

अध्यक्ष और सदस्य

  • सरकार ने मई, 2024 में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संजय कुमार मिश्रा को GSTAT की प्रधान पीठ का अध्यक्ष नियुक्त किया था.
  • अगस्त, 2025 में, सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश मयंक कुमार जैन को पीठ का न्यायिक सदस्य नियुक्त किया. सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ए वेणु प्रसाद और सेवानिवृत्त आईआरएस अधिकारी अनिल कुमार गुप्ता तकनीकी सदस्य (राज्य) और तकनीकी सदस्य (केंद्र) होंगे.

भारत ने अपनी पहली राष्ट्रीय भूतापीय ऊर्जा नीति जारी की

  • भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के लिए अपनी पहली राष्ट्रीय भूतापीय ऊर्जा नीति (National Policy on Geothermal Energy) 2025 जारी की है. इस नीति को 17 सितम्बर को केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने जारी किया.
  • इसके साथ ही भारत उन देशों की बढ़ती सूची में शामिल हो गया है जो 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए भूमिगत ताप ऊर्जा उत्पादन की दिशा कर रहे हैं.

राष्ट्रीय भूतापीय ऊर्जा नीति 2025: मुख्य उद्देश्य

  • यह नीति देश की नवीकरणीय ऊर्जा संरचना का उन्नयन करने और 2070 तक ‘नेट ज़ीरो उत्सर्जन’ लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक अहम पहल है.
  • भारत के भूतापीय संसाधनों को स्वच्छ, विश्वसनीय और सतत ऊर्जा स्रोत के रूप में विकसित करना इस नीति का प्रमुख उद्देश्य है.
  • भारत में भूतापीय संसाधन का उपयोग अभी तक ऊर्जा उत्पादन में नहीं लिया जाता था.
  • इस नीति का लक्ष्य लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और गुजरात जैसे क्षेत्रों में 381 गर्म झरनों और 10 भूतापीय क्षेत्रों को विकसित करना है.
  • इसमें कर छूट, आयात शुल्क में छूट और व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण जैसे प्रोत्साहन शामिल हैं.

भूतापीय ऊर्जा क्या है?

  • भूतापीय ऊर्जा, पृथ्वी की सतह के नीचे से प्राप्त होने वाली ऊष्मा ऊर्जा है. यह एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है क्योंकि पृथ्वी के अंदर गर्मी का प्रवाह लगातार बना रहता है.
  • इसमें पृथ्वी के आंतरिक भाग में गर्मी, मैग्मा, रेडियोधर्मी तत्वों के क्षय, या गर्म भूजल का उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिया किया जाता है.

7 अगस्त 2025: 11वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया गया

प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day) मनाया जाता है. इस दिवस का उद्देश्य हथकरघा उद्योग के महत्व एवं आमतौर पर देश के सामाजिक आर्थिक योगदान में इसके महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना और हथकरघा को बढ़ावा देना, बुनकरों की आय को बढ़ाना और उनके गौरव में वृद्धि करना है.

11वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की थीम: इस वर्ष की थीम ‘हथकरघा – महिला सशक्तिकरण, राष्ट्र सशक्तिकरण’ था.

7 अगस्‍त का विशेष महत्‍व

  • हथकरघा दिवस मनाने के लिए 7 अगस्‍त का दिन भारतीय इतिहास में विशेष महत्‍व का होने के कारण चुना गया है.
  • इसी दिन 1905 में ब्रिटिश सरकार द्वारा बंगाल के विभाजन के विरोध में स्‍वदेशी आंदोलन शुरू हुआ था. इस दिन कोलकाता के टाउनहॉल में एक महा जनसभा में स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक रूप से शुरुआत की गई थी.
  • भारत सरकार ने इसी की याद में हर वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में घोषित किया था.
  • पहला राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2015 में मनाया गया था. 7 अगस्त 2025 को 11वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया गया.

11वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 7 अगस्त 2025 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 11वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह की अध्यक्षता की. इस कार्यक्रम का आयोजन वस्त्र मंत्रालय ने किया था.
  • कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के जीवंत हथकरघा क्षेत्र और देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा सांस्कृतिक पहचान में इसके योगदान को सम्मानित करना था.
  • इस अवसर पर कुल 24 बुनकरों को सम्मानित किया गया, जिनमें 5 को संत कबीर पुरस्कार और 19 को राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया.
  • संत कबीर पुरस्कार में तीन लाख पचास हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है, जबकि राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार में दो लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है.

नीति आयोग ने भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स का पहला संस्करण जारी किया

  • नीति आयोग ने 4 अगस्त को नई दिल्ली में भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (India Electric Mobility Index-IEMI) का पहला संस्करण जारी किया था.
  • IEMI सूचकांक में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) का मूल्यांकन 100 अंक में किया गया है. यह मूल्यांकन तीन मुख्य विषयों के अंतर्गत 16 संकेतकों के आधार पर किया गया है.
  • ये विषय हैं:  इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की प्रगति, चार्जिंग बुनियादी ढांचे का विकास और ईवी अनुसंधान और नवाचार की स्थिति.

पहला IEMI सूचकांक 2025

  1. अग्रणी राज्य/UTs (65-99 अंक तक): दिल्ली, महाराष्ट्र, चंडीगढ़.
  2. च्छा करने वाले राज्य (50-64 अंक तक): कर्नाटक, तमिलनाडु, हरियाणा.
  3. आकांक्षी राज्य/UTs (0-49 अंक तक): ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, लद्दाख, आंध्र प्रदेश जैसे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी ई-मोबिलिटी पहलों में पिछड़ रहे हैं और उन्हें लक्षित हस्तक्षेप की आवश्यकता है.

भारत में इलेक्ट्रिक वाहन: 200 बिलियन डॉलर का अवसर

  • आयोग ने ‘200 बिलियन डॉलर का अवसर: भारत में इलेक्ट्रिक वाहन’ (Unlocking a 200 Billion Dollar Opportunity: Electric Vehicles in India) शीर्षक से एक रिपोर्ट भी जारी की थी.
  • इस रिपोर्ट का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन पर दिए जाने वाले प्रोत्साहनों से हटकर अनिवार्यता की ओर बढ़ना है.
  • इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों के लिए वित्तपोषण को सक्षम बनाना भी है, जिन्हें वर्तमान में अपनाने में महत्वपूर्ण बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है.

भारत 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, मॉर्गन स्टेनली का अनुमान

  • अमेरिकी बहुराष्ट्रीय वित्तीय सेवा प्रदाता मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) के अनुसार, भारत 2028 तक जापान और जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा.
  • मॉर्गन स्टेनली ने 23 जुलाई 2025 को ‘भारत का राज्य-नेतृत्व आर्थिक परिवर्तन’ रिपोर्ट जारी की थी जिसमें यह अनुमान व्यक्त किया है.
  • मॉर्गन स्टेनली एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय निवेश बैंक और वित्तीय सेवा कंपनी है. इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क शहर के मिडटाउन मैनहट्टन में है.

मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) रिपोर्ट के मुख्य बिन्दु

  • 2035 तक भारतीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दोगुना होकर 10.6 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगा.
  • भारतीय जीडीपी वर्तमान में 4.19 ट्रिलियन डॉलर से, 2035 तक दोगुनी होकर 10.6 ट्रिलियन डॉलर होने की उम्मीद है.
  • 2035 तक तीन से पाँच राज्यों का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक होना का अनुमान है.
  • रिपोर्ट में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और गुजरात की पहचान की गई है जिनका GSDP 1 ट्रिलियन डॉलर होने की संभावना है.
  • महाराष्ट्र, गुजरात और तेलंगाना को वर्तमान में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों के रूप में पहचाना गया है.
  • उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने पिछले पाँच वर्षों में रैंकिंग में सबसे उल्लेखनीय सुधार दिखाया है.
  • अगले दशक में भारत के कुल वैश्विक विकास में 20% योगदान देने की भी उम्मीद है.

भारतीय अर्थव्यवस्था: वर्तमान स्थिति

  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) वर्तमान में भारत को अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान के बाद दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था मानता है.
  • IMF का अनुमान है कि भारत 2025 तक जापान को पीछे छोड़कर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. हालांकि, नीति आयोग के अनुसार, भारत पहले ही जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है.
  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने, भारतीय अर्थव्यवस्था के 2028 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाने का अनुमान व्यक्त किया था.

यूरोपीय संघ ने भारत के नायरा एनर्जी लिमिटेड पर प्रतिबंध लगाया

एनर्जी लिमिटेड की रिफाइनरी पर प्रतिबंध

  • यूरोपीय संघ (EU) ने गुजरात स्थित नायरा एनर्जी लिमिटेड की एक रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगा दिया है. इस रिफाइनरी में रूसी सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट 49.13% हिस्सेदारी है.
  • यह रिफाइनरी भारत की दूसरी सबसे बड़ी रिफाइनरी है, जो प्रतिदिन 4,00,000 बैरल तेल का उत्पादन करती है. पूरे भारत में 6,300 से ज़्यादा पेट्रोल पंप संचालित करती है.
  • ईयू ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन में रूस द्वारा अपना सैन्य अभियान शुरू करने के बाद से रूस पर प्रतिबंधों के अपने 18वें पैकेज के हिस्से के रूप में रूसी तेल की कीमतों पर कम मूल्य सीमा की भी घोषणा की है.

यूरोपीय संघ तीसरे देशों से पेट्रोलियम उत्पादों को नहीं खरीदेगा

  • यूरोपीय संघ (EU) ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाए हैं.  इसके तहत यूरोपीय संघ अब तीसरे देशों से आने वाले उन पेट्रोलियम उत्पादों को नहीं खरीदेगा, जो रूसी कच्चे तेल से बने हैं.
  • इससे भारत का ईयू को 15 अरब डॉलर (लगभग 1,29,281 करोड़) का पेट्रोलियम उत्पाद बेचना खतरे में है.
  • भारत, रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर, उसे रिफाइन कर फिर डीजल, पेट्रोल और जेट ईंधन (एटीएफ) बनाकर यूरोप को निर्यात करता है.
  • भारत को अब ईयू को पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करने के लिए अन्य स्रोतों से कच्चा तेल खरीदना होगा. इससे भारत की ऊर्जा लागत बढ़ सकती है.

रूसी कच्चे तेल की मूल्य सीमा घटाकर 47.6 डॉलर प्रति बैरल

  • यूरोपीय संघ ने रूसी कच्चे तेल की मूल्य सीमा 60 डॉलर प्रति बैरल से 15% घटाकर 47.6 डॉलर प्रति बैरल करने का भी फैसला किया है.
  • यूरोपीय संघ ने G7 देशों और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर इस मूल्य सीमा को लागू किया है, जो रूसी तेल के परिवहन, बीमा और वित्तपोषण पर प्रतिबंध लगाते हैं जब तक कि तेल निर्दिष्ट मूल्य सीमा से कम पर नहीं बेचा जाता.
  • यूरोपीय संघ (EU) रूसी कच्चे तेल के लिए एक मूल्य सीमा तय करता है ताकि रूस के ऊर्जा राजस्व को सीमित किया जा सके, जिससे यूक्रेन पर उसके आक्रमण के लिए वित्तपोषण कम हो सके.

IMF रिपोर्ट: भारत के UPI ने भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में क्रांति लाई

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 20 जुलाई, 2025 को ‘बढ़ते खुदरा डिजिटल भुगतान’ (Growing Retail Digital Payments) विषय पर एक रिपोर्ट जारी की थी. इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत के UPI ने भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में क्रांति लाई है.

IMF रिपोर्ट के मुख्य बिन्दु

  • भारत अपनी स्वदेश विकसित एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (UPI) प्रणाली की बदौलत तेज़ भुगतान प्रणालियों में एक वैश्विक नेता के रूप में उभरा है.
  • UPI से प्रतिदिन 64 करोड़ से ज़्यादा लेन-देन हो रहा है, जबकि अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी ‘वीज़ा’ (VISA) से प्रतिदिन लगभग 63.9 करोड़ लेनदेन होता है.
  • UPI, भारत में लगभग 85% और विश्व में लगभग 50% वास्तविक समय वैश्विक डिजिटल भुगतान संसाधित करता है.
  • जून 2025 में UPI ने 18.39 अरब लेनदेन के माध्यम से 24.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान संसाधित किया. यह जून 2024 में हुए 13.88 अरब लेनदेन की संख्या से 32 प्रतिशत अधिक है.

भारत में त्वरित भुगतान प्रणाली

  • भारत में दो त्वरित (वास्तविक समय) भुगतान प्रणालियाँ हैं: IMPS और UPI. दोनों प्रणालियों को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने विकसित किया है.
  • इन दोनों भुगतान प्रणालियों के जरिए धनराशि तुरंत लाभार्थी के बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी जाती है. यह 24×7 और 365 दिन उपलब्ध है.
  • IMPS का पूरा नाम Immediate Payment Service है. UPI का पूरा नाम Unified Payments Interface है.
  • IMPS को भारत में नवंबर 2010 में पेश किया गया था. UPI को बेहतर सुरक्षा सुविधाओं के साथ 2016 में लाया गया था.

UPI क्या है?

  • UPI एक मोबाइल आधारित तेज़ भुगतान प्रणाली है जो व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) और व्यक्ति से व्यापारी (P2M) भुगतानों को सपोर्ट करती है.
  • UPI से भुगतान, भीम (BHIM) मोबाईल ऐप (Mobile App) के माध्यम से होता है. अन्य सभी भुगतान ऐप्स (गूगल-पे, पेटीएम, फोन-पे आदि) भी भीम ऐप का ही उपयोग करते है.
  • भीम का पूरा नाम Bharat Interface for Money है जिसे NPCI ने विकसित है.

IMPS और UPI में मुख्य अंतर

  • IMPS के लिए लाभार्थी के बैंक खाते और IFSC कोड जैसे विवरणों की आवश्यकता होती है. UPI वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) का उपयोग करता है.
  • IMPS का उपयोग मुख्य रूप से बैंक खातों के बीच फंड ट्रांसफर के लिए किया जाता है, जबकि UPI का उपयोग पीयर-टू-पीयर भुगतान (P2P) और व्यक्ति से व्यापारी (P2M) लेनदेन के लिए भी किया जाता है.
  • UPI में दो-कारक प्रमाणीकरण का एक अतिरिक्त चरण होता है, जो इसे IMPS की तुलना में अधिक सुरक्षित बनाता है.

NPCI क्या है?

  • NPCI का पूरा नाम National Payments Corporation of India है. IMPS, UPI, BHIM, रुपे-कार्ड, फास्टैग आदि को NPCI ने ही विकसित किया है.
  • यह भारत में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों को संचालित करने वाला एक संगठन है. इसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और भारतीय बैंक संघ (IBA) ने मिलकर बनाया है.
  • NPCI का स्वामित्व बैंकों के एक संघ के पास है, जिसमें भारत में कार्यरत सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और कुछ विदेशी बैंक शामिल हैं.
  • NPCI ने भारत में डिजिटल भुगतान को एक नई दिशा दी है और देश को एक डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

UPI का अंतर्राष्ट्रीय उपयोग

  • उपयोग में आसानी और इसकी मज़बूत सुरक्षा विशेषताओं को देखते हुए, भारत सरकार UPI आधारित भुगतान प्रणाली को निर्यात करने का प्रयास कर रही है.
  • NPCI ने वर्ष 2020 में भारत के बाहर रुपे-कार्ड (घरेलू कार्ड योजना) और UPI जैसी स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के लिए एक सहायक कंपनी NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) की स्थापना की.
  • 2021 में UPI प्रणाली अपनाने वाला पहला देश भूटान बना था. 2022 में नेपाल ने UPI को अपनाया. यूएई, श्रीलंका, फ्रांस, सिंगापुर और मॉरीशस में भी UPI मौजूद है.

अनुसंधान विकास और नवाचार योजना को मंजूरी

  • भारत सरकार ने अनुसंधान विकास और नवाचार योजना (Research Development and Innovation – RDI) को मंजूरी दी है. यह मंजूरी 1 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में दी गई. इसका कुल बजट ₹1 लाख करोड़ निर्धारित किया गया है.
  • RDI योजना का उद्देश्य रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में निजी क्षेत्र द्वारा संचालित अनुसंधान, विकास और नवाचार को प्रोत्साहित करना है.
  • यह योजना ऊर्जा, रक्षा, सेमीकंडक्टर, एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और बायोटेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों पर केंद्रित होगी.
  • प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) की गवर्निंग बोर्ड इस योजना का संचालन करेगी.