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भारत में हाथियों की डीएनए-आधारित जनगणना रिपोर्ट

भारत में हाथियों की डीएनए-आधारित जनगणना रिपोर्ट हाल ही में जारी की गई थी. इस रिपोर्ट का शीर्षक था ‘स्टेटस ऑफ एलिफेंट्स इन इंडिया: डीएनए-आधारित समकालिक अखिल भारतीय जनसंख्या अनुमान (SAIEE 2021-25)’.

  • यह भारत में जंगली हाथियों की संख्या का अनुमान लगाने के लिए पहली बार डीएनए-आधारित वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग करने वाली एक ऐतिहासिक रिपोर्ट है.

SAIEE 2021-25: मुख्य बिन्दु

  • भारत में जंगली हाथियों की संख्या आठ वर्षों में लगभग 25% कम हो गई है, जो घटते जंगलों और मनुष्यों के साथ बढ़ते संघर्ष से बढ़ते खतरों को रेखांकित करती है. पूरे भारत में हाथियों की वर्तमान संख्या 22,446 है, जो वर्ष 2017 में 29,964 थी.
  • कर्नाटक में हाथियों की संख्या सबसे अधिक 6,013 है, उसके बाद असम (4,159), तमिलनाडु (3,136), केरल (2,785) और उत्तराखंड (1,792) का स्थान है.
  • क्षेत्रीय रूप से, पश्चिमी घाट 11,934 हाथियों के साथ सबसे बड़ा गढ़ बना हुआ है. पूर्वोत्तर की पहाड़ियाँ और ब्रह्मपुत्र के बाढ़ के मैदान में हाथियों की संख्या 6,559, जबकि मध्य भारतीय उच्चभूमि और पूर्वी घाट में कुल 1,891 हाथी हैं.
  • कॉफी, चाय के बागानों, कृषि भूमि और बुनियादी ढाँचे के विकास के कारण हाथियों के गलियारे (Elephant Corridors) और आवास तेजी से सिमट रहे हैं.
  • मध्य भारत और पूर्वी घाट जैसे क्षेत्रों में आवास की हानि के कारण संघर्ष में वृद्धि हुई है. इस क्षेत्र में भारत के 10% से भी कम हाथी हैं, लेकिन हाथियों के कारण होने वाली लगभग 45% मानव मृत्यु यहीं होती है.

नमूना पंजीकरण सर्वेक्षण 2023 की रिपोर्ट: भारत में जन्म दर में उल्लेखनीय गिरावट

  • भारत के महापंजीयक कार्यालय ने 4 सितम्बर को नमूना पंजीकरण सर्वेक्षण (SRS) 2023 की रिपोर्ट जारी की थी.
  • रिपोर्ट के अनुसार, देश की सकल जन्म दर (Crude Birth Rate – CBR) और कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate – TFR) में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है.

रिपोर्ट के मुख्य बिन्दु

  • 2022 में सकल जन्म दर (CBR)  19.1 थी, जो 2023 में घटकर 18.4 रह गई. CBR एक निश्चित समयावधि में प्रति 1,000 जनसंख्या पर जीवित जन्मों की संख्या को मापती है.
  • कुल प्रजनन दर (TFR)  पहली बार दो वर्षों बाद गिरावट के साथ 1.9 हो गई, जबकि 2021 और 2022 में यह 2.0 पर स्थिर थी. TFR वह औसत संख्या है जितने बच्चे एक महिला अपने प्रजनन काल में जन्म देती है.
  • बिहार में सबसे अधिक CBR (25.8) और TFR (2.8) दर्ज की गई, जिससे यह जनसंख्या वृद्धि के मामले में अग्रणी बना हुआ है. तमिलनाडु ने सबसे कम CBR (12) और दिल्ली ने सबसे कम TFR (1.2) दर्ज की.
  • 18 राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों ने 2.1 से कम TFR दर्ज की, जो कि जनसंख्या प्रतिस्थापन स्तर से नीचे है.
  • देश की बुजुर्ग जनसंख्या (60 वर्ष से ऊपर) में 0.7% की वृद्धि हुई है, और यह अब कुल जनसंख्या का 9.7% हो गई है. केरल में सबसे अधिक बुजुर्ग जनसंख्या अनुपात (15%) दर्ज किया गया. असम, दिल्ली और झारखंड में यह अनुपात 7.6% से 7.7% के बीच है.

नमूना पंजीकरण सर्वेक्षण (SRS)

  • नमूना पंजीकरण सर्वेक्षण (Sample Registration System) भारत के महापंजीयक कार्यालय द्वारा किया जाने वाला एक बड़े पैमाने पर, नियमित जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण है.
  • SRS का उद्देश्य राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर जन्म दर, मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर, और कुल प्रजनन दर (TFR) जैसे महत्वपूर्ण सूचकांकों के विश्वसनीय वार्षिक अनुमान प्रदान करना है.
  • यह सर्वेक्षण गांवों और शहरी क्षेत्रों से डेटा एकत्र कर प्रमुख जनसांख्यिकीय सूचकांकों के विश्वसनीय वार्षिक अनुमान प्रदान करता है.

राष्ट्रीय वार्षिक महिला सुरक्षा रिपोर्ट एवं सूचकांक 2025

  • राष्ट्रीय वार्षिक महिला सुरक्षा रिपोर्ट एवं सूचकांक (NARI) 2025 हाल ही में जारी की गई थी. इस रिपोर्ट को डेटा साइंस कंपनी पीवैल्यू एनालिटिक्स द्वारा तैयार किया गया है जिसका विमोचन राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने किया था.
  • इस रिपोर्ट में भारत में महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित और असुरक्षित शहरों के नाम जारी किए गए हैं. रिपोर्ट को 31 शहरों की 12,770 महिलाओं की रायशुमारी के आधार पर तैयार किया गया है.
  • इस रायशुमारी में 10 में से 6 महिलाओं ने अपने शहर में सुरक्षित महसूस करने की बात कही है. रात में सुरक्षित महसूस करने की धारणा में भारी गिरावट आई है, खासकर सार्वजनिक परिवहन में और मनोरंजन स्थलों पर.

NARI रिपोर्ट 2025: महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित और असुरक्षित भारतीय शहर

सबसे सुरक्षित शहर

  • रिपोर्ट में कोहिमा, विशाखापत्तनम, भुवनेश्वर, आइजोल, गंगटोक, ईटानगर और मुंबई को भारत में महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित शहर बताया गया है.
  • इसके लिए मुख्य कारक मजबूत लैंगिक समानता, नागरिक भागीदारी, पुलिस व्यवस्था और महिला-अनुकूल बुनियादी ढांचे को बताया गया है.

सबसे असुरक्षित शहर

  • रिपोर्ट में रांची, श्रीनगर, कोलकाता, दिल्ली, फरीदाबाद, पटना और जयपुर को महिलाओं की सुरक्षा के मामले में सबसे निचले पायदान पर रखा गया है.
  • इसका कारण कमजोर संस्थागत प्रतिक्रिया, पितृसत्तात्मक मानदंडों और शहरी बुनियादी ढांचे में कमी जैसे कारकों को बताया गया है.

IMF रिपोर्ट: भारत के UPI ने भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में क्रांति लाई

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 20 जुलाई, 2025 को ‘बढ़ते खुदरा डिजिटल भुगतान’ (Growing Retail Digital Payments) विषय पर एक रिपोर्ट जारी की थी. इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत के UPI ने भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में क्रांति लाई है.

IMF रिपोर्ट के मुख्य बिन्दु

  • भारत अपनी स्वदेश विकसित एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (UPI) प्रणाली की बदौलत तेज़ भुगतान प्रणालियों में एक वैश्विक नेता के रूप में उभरा है.
  • UPI से प्रतिदिन 64 करोड़ से ज़्यादा लेन-देन हो रहा है, जबकि अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी ‘वीज़ा’ (VISA) से प्रतिदिन लगभग 63.9 करोड़ लेनदेन होता है.
  • UPI, भारत में लगभग 85% और विश्व में लगभग 50% वास्तविक समय वैश्विक डिजिटल भुगतान संसाधित करता है.
  • जून 2025 में UPI ने 18.39 अरब लेनदेन के माध्यम से 24.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान संसाधित किया. यह जून 2024 में हुए 13.88 अरब लेनदेन की संख्या से 32 प्रतिशत अधिक है.

भारत में त्वरित भुगतान प्रणाली

  • भारत में दो त्वरित (वास्तविक समय) भुगतान प्रणालियाँ हैं: IMPS और UPI. दोनों प्रणालियों को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने विकसित किया है.
  • इन दोनों भुगतान प्रणालियों के जरिए धनराशि तुरंत लाभार्थी के बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी जाती है. यह 24×7 और 365 दिन उपलब्ध है.
  • IMPS का पूरा नाम Immediate Payment Service है. UPI का पूरा नाम Unified Payments Interface है.
  • IMPS को भारत में नवंबर 2010 में पेश किया गया था. UPI को बेहतर सुरक्षा सुविधाओं के साथ 2016 में लाया गया था.

UPI क्या है?

  • UPI एक मोबाइल आधारित तेज़ भुगतान प्रणाली है जो व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) और व्यक्ति से व्यापारी (P2M) भुगतानों को सपोर्ट करती है.
  • UPI से भुगतान, भीम (BHIM) मोबाईल ऐप (Mobile App) के माध्यम से होता है. अन्य सभी भुगतान ऐप्स (गूगल-पे, पेटीएम, फोन-पे आदि) भी भीम ऐप का ही उपयोग करते है.
  • भीम का पूरा नाम Bharat Interface for Money है जिसे NPCI ने विकसित है.

IMPS और UPI में मुख्य अंतर

  • IMPS के लिए लाभार्थी के बैंक खाते और IFSC कोड जैसे विवरणों की आवश्यकता होती है. UPI वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) का उपयोग करता है.
  • IMPS का उपयोग मुख्य रूप से बैंक खातों के बीच फंड ट्रांसफर के लिए किया जाता है, जबकि UPI का उपयोग पीयर-टू-पीयर भुगतान (P2P) और व्यक्ति से व्यापारी (P2M) लेनदेन के लिए भी किया जाता है.
  • UPI में दो-कारक प्रमाणीकरण का एक अतिरिक्त चरण होता है, जो इसे IMPS की तुलना में अधिक सुरक्षित बनाता है.

NPCI क्या है?

  • NPCI का पूरा नाम National Payments Corporation of India है. IMPS, UPI, BHIM, रुपे-कार्ड, फास्टैग आदि को NPCI ने ही विकसित किया है.
  • यह भारत में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों को संचालित करने वाला एक संगठन है. इसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और भारतीय बैंक संघ (IBA) ने मिलकर बनाया है.
  • NPCI का स्वामित्व बैंकों के एक संघ के पास है, जिसमें भारत में कार्यरत सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और कुछ विदेशी बैंक शामिल हैं.
  • NPCI ने भारत में डिजिटल भुगतान को एक नई दिशा दी है और देश को एक डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

UPI का अंतर्राष्ट्रीय उपयोग

  • उपयोग में आसानी और इसकी मज़बूत सुरक्षा विशेषताओं को देखते हुए, भारत सरकार UPI आधारित भुगतान प्रणाली को निर्यात करने का प्रयास कर रही है.
  • NPCI ने वर्ष 2020 में भारत के बाहर रुपे-कार्ड (घरेलू कार्ड योजना) और UPI जैसी स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के लिए एक सहायक कंपनी NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) की स्थापना की.
  • 2021 में UPI प्रणाली अपनाने वाला पहला देश भूटान बना था. 2022 में नेपाल ने UPI को अपनाया. यूएई, श्रीलंका, फ्रांस, सिंगापुर और मॉरीशस में भी UPI मौजूद है.

NSO ने पहली बार मासिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) रिपोर्ट जारी की

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने 15 मई 2025 को पहली बार मासिक आधार पर श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) रिपोर्ट जारी की थी.

आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS): एक दृष्टि

  • PLFS (Periodic Labour Force Survey) रिपोर्ट, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी किया जाता है. NSO, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत आता है.
  • पहले PLFS रिपोर्ट को त्रैमासिक और वार्षिक रूप से जारी किया जाता था. अब इसे मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक रूप से जारी किए जाने का निर्णय लिया गया है.
  • PLFS के तिमाही परिणाम अब ग्रामीण, शहरी तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के लिए संयुक्त रूप से जारी किए जाएंगे.
  • PLFS रिपोर्ट में तीन प्रमुख रोजगार और बेरोजगारी संकेतकों – श्रम बल भागीदारी दर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात और वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (CWS) में अखिल भारतीय स्तर पर बेरोजगारी दर- का अनुमान लगाया जाता है.
  • सरकार रोजगार और श्रम कल्याण के बारे में नीतियां बनाने के लिए PLFS रिपोर्ट में रोजगार और बेरोजगारी के आंकड़ों का उपयोग करती है.

अप्रैल 2025 PLFS रिपोर्ट

  • अप्रैल 2025 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच वर्तमान साप्ताहिक स्थिति में श्रम बल भागीदारी दर 55.6% थी.
  • 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए, यह ग्रामीण क्षेत्रों में 58.0% और शहरी क्षेत्रों में 50.7% थी.
  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों के लिए, दरें क्रमशः 79.0% और 75.3% थीं. ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के लिए, यह 38.2% थी.
  • 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच बेरोजगारी 5.1% थी. पुरुषों की बेरोज़गारी दर 5.2% थी, जबकि महिलाओं की बेरोज़गारी दर 5.0% थी.
  • सर्वेक्षण किए गए लोगों की कुल संख्या 3,80,838 थी, जिनमें से 2,17,483 ग्रामीण क्षेत्रों में और 1,63,355 शहरी क्षेत्रों में थे.

परिभाषा

  1. श्रम बल भागीदारी दर (LFPR): यह जनसंख्या का वह प्रतिशत है जो श्रम बल में है (अर्थात्, काम कर रहे हैं, काम की तलाश कर रहे हैं, या काम के लिए उपलब्ध हैं).
  2. श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR): इसे जनसंख्या में कार्यरत व्यक्तियों के प्रतिशत के रूप में परिभाषित किया जाता है.
  3. बेरोजगारी दर (UR): इसे श्रम बल में बेरोजगार व्यक्तियों के प्रतिशत के रूप में परिभाषित किया जाता है.

नमूना पंजीकरण प्रणाली रिपोर्ट 2021 जारी: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार

भारत के महापंजीयक (RGI) ने 7 मई 2025 को नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) रिपोर्ट 2021 जारी किया था. इस रिपोर्ट में वर्ष 2019 से 2021 की अवधि को कवर किया गया है. इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.

नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) रिपोर्ट 2021 के मुख्य बिन्दु

  • मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) 2014-16 में प्रति लाख जीवित जन्मों पर 130 से 37 अंक घटकर 2019-21 में 93 हो गया है.
  • शिशु मृत्युदर (IMR) वर्ष 2014 में प्रति 1000 जन्म पर 39 थी जो 2021 में प्रति 1000 जन्म पर घटकर 27 हो गई.
  • नवजात मृत्यु दर (NMR) 2014 में प्रति 1000 जन्म पर 26 थी जो 2021 में प्रति 1000 जन्म पर घटकर 19 आ गई.
  • इसी तरह पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) 2014 में प्रति 1000 जन्म पर 45 थी जो 2021 में प्रति 1000 जन्म पर घटकर 31 हो गई.
  • जन्म के समय लिंग अनुपात भी बेहतर हुआ है और यह 2014 में 899 से सुधरकर 2021 में 913 हो गया है. कुल प्रजनन दर (TFR) 2021 में 2.0 पर स्थिर है, जो 2014 में 2.3 से उल्लेखनीय सुधार है.
  • 8 राज्यों का MMR पहले ही SDG लक्ष्य (2030 तक 70 से कम या उसके बराबर) तक पहुंच चुके हैं. ये राज्य हैं- केरल (20), महाराष्ट्र (38), तेलंगाना (45), आंध्र प्रदेश (46), तमिलनाडु (49), झारखंड (51), गुजरात (53) और कर्नाटक (63).
  • 12 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पहले ही U5MR का SDG लक्ष्य (2030 तक 25 से कम) प्राप्त कर चुके हैं. इनमें केरल (8), दिल्ली (14), तमिलनाडु (14), जम्मू और कश्मीर (16), महाराष्ट्र (16), पश्चिम बंगाल (20), कर्नाटक (21), पंजाब (22), तेलंगाना (22), हिमाचल प्रदेश (23), आंध्र प्रदेश (24) और गुजरात (24) शामिल हैं.
  • 6 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पहले ही NMR का एसडीजी लक्ष्य (2030 तक 12 से कम) प्राप्त कर चुके हैं. इनमें केरल (4), दिल्ली (8), तमिलनाडु (9), महाराष्ट्र (11), जम्मू-कश्मीर (12) और हिमाचल प्रदेश (12)शामिल हैं.
  • मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में भारत की प्रगति वैश्विक औसत से अधिक है. संयुक्त राष्ट्र मातृ मृत्यु दर अनुमान अंतर-एजेंसी समूह (UN-MMEIG) रिपोर्ट 2000-2023 के अनुसार, भारत की MMR में 2020 से 2023 तक 23 अंकों की कमी आई है.
  • 1990 से 2023 तक पिछले 33 वर्षों में 48 प्रतिशत की वैश्विक कमी की तुलना में भारत की MMR में अब 86 प्रतिशत की कमी आई है.

स्वास्थ्य संकेतक: एक दृष्टि

  • मातृ मृत्यु दर (MMR): प्रति 100000 जीवित जन्मे बच्चों पर माता की मृत्यु की संख्या.
  • कुल प्रजनन दर (TFR): यह एक महिला द्वारा अपने प्रजनन जीवन चक्र के दौरान पैदा किए जा सकने वाले बच्चों की औसत संख्या.
  • नवजात मृत्यु दर (NMR): किसी वर्ष में प्रति 1000 जीवित जन्मे बच्चों के जीवन के पहले 28 दिनों के दौरान होने वाली मौतों की संख्या.
  • शिशु मृत्यु दर (IMR): किसी वर्ष में प्रति 1000 जीवित जन्मे बच्चों में से एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु.
  • 5 वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर (U5MR): किसी वर्ष में प्रति 1000 जीवित जन्मे बच्चों में से 5 वर्ष की आयु के बीच बच्चे की मृत्यु.

विश्व के शक्तिशाली देशों की सूची में भारत तीसरे स्थान पर

ऑस्ट्रेलिया के एक संस्थान, लोवी इन्स्टिटयूट थिंक टैंक ने हाल ही में एशिया में शक्तिशाली देशों की एक सूची ‘एशिया पावर इंडेक्स 2024’ जारी की थी.  इस सूची में भारत को एशिया में तीसरा सबसे बड़ा शक्तिशाली देश बताया गया है.

मुख्य बिन्दु

  • वर्ष 2024 के इस सूची में भारत ने जापान को पीछे छोड़ा है. इस इंडेक्स में अब केवल अमेरिका एवं चीन ही भारत से आगे है. रूस तो पहले ही इस इंडेक्स में भारत से पीछे हो चुका है.
  • वर्ष 2023 के इंडेक्स में भारत को 36.3 अंक प्राप्त हुए थे जो वर्ष 2024 के इंडेक्स में 2.8 अंक बढ़कर 39.1 हो गया एवं भारत इस इंडेक्स में चौथे स्थान से तीसरे स्थान पर आ गया है.
  • आर्थिक क्षमता, सैन्य (मिलिटरी) क्षमता, अर्थव्यवस्था में लचीलापन, भविष्य में संसाधनों की उपलब्धता, कूटनीतिक, राजनयिक एवं आर्थिक सम्बंध एवं सांस्कृतिक प्रभाव जैसे मापदंडों पर उक्त 27 देशों एवं क्षेत्रों का आंकलन कर विभिन्न देशों को इस इंडेक्स में स्थान प्रदान किया गया है.
  • उक्त इंडेक्स में अमेरिका, 81.7 अंकों के साथ प्रथम स्थान पर है. चीन 72.7 अंकों के साथ द्वितीय स्थान पर है. जापान को 38.9 अंक, ऑस्ट्रेलिया को 31.9 अंक एवं रूस को 31.1 अंक प्राप्त हुए.
  • यूक्रेन युद्ध के कारण, एशियाई क्षेत्र में रूसी शक्ति और प्रभाव में गिरावट आई है क्योंकि रूस के अधिकतर  संसाधनों और समय का उपयोग यूक्रेन में युद्ध की लिया किया जा रहा है.

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने भारत रोजगार रिपोर्ट 2024 जारी की

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)  ने मानव विकास संस्थान द्वारा (IHD) के साथ मिलकर भारत रोजगार रिपोर्ट (India Employment Report) 2024 जारी की है.

भारत रोजगार रिपोर्ट 2024: मुख्य बिन्दु

  • ILO की रिपोर्ट के मुताबिक देश के कुल बेरोजगार युवाओं में पढ़े-लिखे बेरोजगारों की संख्या भी 2000 के मुकाबले दोगुनी हुई है.
  • 2000 में पढ़े-लिखे युवा बेरोजगारों की संख्या कुल युवा बेरोजगारों में 35.2% थी. 2022 में ये बढ़कर 65.7% हो गई है. इसमें उन्हें पढ़े-लिखे युवाओं को शामिल किया गया है, जिन्होंने कम से कम 10वीं तक की पढ़ाई पूरी की है.
  • रिपोर्ट के अनुसार देश में लोगों का वेतन ज्यादातर एक जैसा रहा है, या ये घटा है. रिपोर्ट में भारत के युवाओं में बुनियादी डिजिटल लिटरेसी की कमी के बारे में बताया गया है. इस वजह से उनकी रोजगार की क्षमता में रुकावट आ रही है.
  • भारत की महिला श्रमबल भागीदारी दर 2022 में 32.8% के साथ दुनिया में सबसे कम बनी हुई है, जो पुरुषों की तुलना में 2.3 गुना कम है

भारत टीबी रिपोर्ट जारी: टीबी के मामलों में 16% की गिरावट

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 27 मार्च 2024 को ‘भारत टीबी रिपोर्ट’ (India TB Report) 2023 जारी की थी. इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में टीबी मरीजों की संख्या दिन पर दिन कम होती जा रही है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय प्रत्येक वर्ष भारत टीबी रिपोर्ट प्रकाशित करता है.

टीबी रिपोर्ट: मुख्य बिन्दु

  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2015 से 2022 तक टीबी (तपेदिक) के मामलों में 16% की गिरावट देखी गई, जो वैश्विक गिरावट 9% से अधिक है.
  • 2015 में 100,000 जनसंख्या में टीवी के मामलों की संख्या 237 थी. जो 2022 में 199 हो गई थी. वहीं मृत्यु दर 2015 के मुकाबले में 2022 में प्रति लाख 23 हो गई थी.
  • टीबी की गिरावट में सबसे ज्यादा उछाल उत्तर प्रदेश और बिहार राज्य में देखा गया है. 2023 में अधिसूचित कुल टीबी मामलों में से 60.7% पुरुष, 39.2% महिलाएं और 0.04% ट्रांसजेंडर थे.

भारत में टीबी उन्मूलन का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 तक भारत से टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है. टीबी उन्मूलन को लेकर राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (एनएसपी) 2017-25 में तेजी से टीबी की बीमारी को कम करने की दिशा में काम करने का निर्णय लिया था.

तपेदिक (टीबी): एक दृष्टि

  • क्षय रोग या तपेदिक (टीबी) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाला एक संक्रामक रोग है. यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है.
  • टीबी हवा के माध्यम से फैलता है जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है. इसके सामान्य लक्षणों में लगातार खांसी, बुखार, रात में पसीना आना और वजन कम होना शामिल हैं.

SIPRI 2024 रिपोर्ट: भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश

स्वीडन की स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI)  ने वैश्विक हथियारों की खरीद से संबंधित एक रिपोर्ट 11 मार्च 2024 को जारी किए थे. इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत पिछले 5 वर्षों (2019-2023) में दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश रहा है.

SIPRI रिपोर्ट 2024: मुख्य बिन्दु

  • यूरोप का हथियार आयात 2014-2018 की तुलना में 2019-2023 में दोगुना हो गया. इसका सबसे बड़ा कारण रूस और यूक्रेन की जंग को माना जा रहा है.
  • 2019-2023 की अवधि में अमेरिका का हथियारों का निर्यात भी 17 फीसदी बढ़ गया है. हालांकि रूस जो कि हथियारों के निर्यात में परंपरागत रूप से बड़ा देश माना जाता रहा है, उसके निर्यात में बड़ी गिरावट हुई है. रूस हथियार बेचने के मामले में अमेरिका और फ्रांस के बाद तीसरे स्थान पर पहुंच गया है.
  • फ्रांस का हथियार निर्यात 2014-18 और 2019-23 के बीच 47 फीसदी बढ़ा है. फ्रांस के हथियार का सबसे बड़ा खरीदार भारत रहा है, जो फ्रांस के कुल निर्यात का करीब 30 फीसदी रहा.
  • रूस जब से यूक्रेन के साथ जंग में उलझा, तभी से हथियारों का निर्यात कम हो गया. रूस का हथियार निर्यात 2014-18 और 2019-23 के बीच 53 फीसदी तक गिर गया है. रूस के हथियारों में 34 फीसदी भारत ने खरीदे.
  • भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक है. 2014-18 और 2019-23 के बीच भारत का हथियार आयात 4.7 फीसदी बढ़ा. 2019-2023 की अवधि के दौरान कुल वैश्विक हथियार आयात में भारत की हिस्सेदारी 9.8 प्रतिशत थी.
  • दुनिया का शीर्ष हथियार आयातक बने रहने के बावजूद, 2013-17 और 2018-22 के बीच भारत के आयात में 11 प्रतिशत की गिरावट आई है. इस गिरावट का मुख्य कारण स्थानीय डिजाइनों से बदलने के प्रयासों को माना गया.
  • भारत ने सबसे ज्यादा हथियार रूस से खरीदे. भारत के कुल हथियार आयात का यह 36 फीसदी रहा. 1960-64 के सोवियत समय के बाद यह पहली बार है जब भारत के हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी 50 फीसदी से कम है.
  • रिपोर्टके अनुसार पाकिस्तान के हथियार खरीदने में 43 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. 2019-23 में पाकिस्तान दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा हथियार आयातक रहा. सबसे ज्यादा 82 फीसदी हथियार पाकिस्तान ने चीन से खरीदे.
  • दुनिया में हथियारों के सबसे बड़े खरीदार: भारत (9.8%), सऊदी अरब (8.4%), कतर (7.6%), यूक्रेन (4.9%), पाकिस्तान (4.3%), जापान (4.1%), मिस्र (4.0 %), ऑस्ट्रेलिया (3.7%), दक्षिण कोरिया (3.1%) और चीन (2.9%).

एक देश- एक चुनाव पर गठित कोविंद समिति ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को रिपोर्ट सौंपी

एक देश- एक चुनाव (One Nation, One Election) के लिए गठित कोविंद समिति ने 14 मार्च को अपनी रिपो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी. इस रिपोर्ट में 2029 में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की गई है.

रिपोर्ट के मुख्य बिन्दु

  • 18626 पेज की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2029 से देश में पहले चरण लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं. इसके बाद 100 दिनों के भीतर दूसरे चरण में स्थानीय निकाय चुनाव कराए जाएं.
  • केवल 15 राजनीतिक दलों को छोड़कर शेष 32 दलों ने न केवल साथ-साथ चुनाव प्रणाली का समर्थन किया बल्कि सीमित संसाधनों की बचत, सामाजिक तालमेल बनाए रखने और आर्थिक विकास को गति देने के लिए ये विकल्प अपनाने की ज़ोरदार वकालत की.
  • ‘एक देश एक चुनाव’ का जिस जिस ने विरोध किया, उसमें 15 राजनीतिक दलों के अलावा हाईकोर्ट के तीन रिटायर्ड जज और एक पूर्व राज्य चुनाव आयुक्त भी शामिल थे.
  • इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के चार रिटायर न्यायमूर्ति जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस शरद अरविंद बोबडे एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में थे.
  • ‘एक देश एक चुनाव’ का विरोध करने वालों की दलील है कि ‘इसे अपनाना संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन होगा. ये अलोकतांत्रिक, संघीय ढांचे के विपरीत, क्षेत्रीय दलों को अलग-अलग करने वाला और राष्ट्रीय दलों का वर्चस्व बढ़ाने वाला होगा’.
  • रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विधि आयोग के प्रस्ताव पर सभी दल सहमत हुए तो यह 2029 से ही लागू होगा. साथ ही इसके लिए दिसंबर 2026 तक 25 राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने होंगे. मध्यप्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और मिजोरम विधानसभाओं का कार्यकाल 6 महीने बढ़ाकर जून 2029 तक किया जाए. उसके बाद सभी राज्यों में एक साथ विधानसभा-लोकसभा चुनाव हो सकेंगे.
  • त्रिशंकु सदन या अविश्वास प्रस्ताव की स्थिति में नए सदन के गठन के लिए फिर से चुनाव कराए जा सकते हैं. इस स्थिति में नए लोकसभा (या विधानसभा) का कार्यकाल, पहले की लोकसभा (या विधानसभा) की बाकी बची अवधि के लिए ही होगा.
  • रिपोर्ट में एक नए संवैधानिक प्रावधान, अनुच्छेद 324 A का सुझाव दिया गया है, जो संसद को यह सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाने का अधिकार देगा कि नगरपालिका और पंचायत चुनाव आम चुनावों के साथ-साथ आयोजित किए जाएं.
  • संविधान के अनुच्छेद 325 में संशोधन करने की भी सिफारिश की है ताकि भारत के चुनाव आयोग को राज्य चुनाव आयोगों के परामर्श से एक सामान्य मतदाता सूची तैयार करने और सभी चुनावों के लिए एक एकल मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) जारी करने की अनुमति मिल सके.

कोविंद की अगुवाई में सितंबर 2023 में बनी थी समिति

एक देश- एक चुनाव (One Nation, One Election) की संभावनाओं के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में सितंबर 2023 में एक समिति का गठन किया गया था.

इस समिति में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस के पूर्व नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद, 15वें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एनके सिंह, लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ. सुभाष कश्यप, वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और चीफ़ विजिलेंस कमिश्नर संजय कोठारी शामिल थे. इसके अलावा विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर क़ानून राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल और डॉ. नितेन चंद्रा समिति में शामिल थे.

गोल्डमैन सैच रिपोर्ट: भारत 2075 तक विश्‍व की दूसरी सबसे बडी अर्थव्‍यवस्‍था होगी

निवेश बैंक गोल्डमैन सैच (Goldman Sachs) ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट के अनुसार भारत 2075 तक जापान, जर्मनी और अमरीका को पीछे छोडते हुए विश्‍व की दूसरी सबसे बडी अर्थव्‍यवस्‍था होगी.

गोल्डमैन सैच रिपोर्ट: मुख्य बिन्दु

  • 140 करोड की आबादी के साथ भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) बढ कर 52.5 ट्रिलियन डॉलर हो जाने का अनुमान है, जो अमरीका के GDP के अनुमान से अधिक है.
  • वर्तमान में, भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका के बाद दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.
  • नवाचार, प्रौद्योगिकी, उच्च पूंजी निवेश और बढ़ती श्रमिक उत्पादकता आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था की मदद करेगी.
  • अगले दो दशकों में भारत का निर्भरता अनुपात क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम होगा. निर्भरता अनुपात को कुल कामकाजी उम्र की आबादी के खिलाफ आश्रितों की संख्या से मापा जाता है.