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PPP मॉडल के माध्यम से भारतनेट परियोजना के कार्यान्वयन को मंजूरी

सरकार ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल (Public-Private Partnership- PPP) के माध्यम से भारतनेट परियोजना के कार्यान्वयन को मंजूरी दी है. इसके लिये 19,041 करोड़ रुपए तक की व्यवहार्यता अंतराल अनुदान सहायता को मंज़ूरी दी.

सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP)

सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership- PPP) प्रक्रिया में एक सरकारी एजेंसी और एक निजी क्षेत्र की कंपनी के बीच सहयोग शामिल है जिसका उपयोग परियोजनाओं के वित्तपोषण, निर्माण और संचालन के लिये किया जा सकता है.

भारतनेट परियोजना

यह ऑप्टिकल फाइबर का उपयोग कर विश्व का सबसे बड़ा ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी कार्यक्रम है और भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (BBNL) द्वारा कार्यान्वित एक प्रमुख मिशन है.

वर्ष 2019 में संचार मंत्रालय ने संपूर्ण देश भर में ब्रॉडबैंड सेवाओं की सार्वभौमिक और समान पहुँच की सुविधा हेतु ‘राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन’ (National Broadband Mission) भी शुरू किया था.

विश्व निवेश रिपोर्ट 2021: FDI प्राप्त करने वाला दुनिया का 5वां सबसे बड़ा देश बना भारत

भारत ने साल 2020 के दौरान 64 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त किया है. इसके साथ ही यह FDI हासिल करने वाला दुनिया का पांचवा सबसे बड़ा देश बन गया है. संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNCTAD (UN Conference on Trade and Development ) द्वारा हाल ही में जारी द्वारा जारी विश्व निवेश रिपोर्ट (World Investment Report 2021) 2021 यह जानकारी दी गई है.

  • रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 की दूसरी लहर ने देश की समग्र आर्थिक गतिविधियों को बुरी तरह से प्रभावित किया, लेकिन इसके मजबूत फंडामेंटल्स ने मध्यम अवधि के लिए उम्मीद की किरण को बनाए रखा है.
  • रिपोर्ट के अनुसार 2020 में भारत में FDI 27 प्रतिशत बढ़कर 64 अरब डॉलर हो गया, जो 2019 में 51 अरब अमेरिकी डॉलर था.
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी की वजह से 2020 में वैश्विक विदेशी निवेश प्रवाह बुरी तरह प्रभावित हुआ है. इस दौरान विदेशी निवेश प्रवाह 35 प्रतिशत गिरकर 1 लाख करोड़ डॉलर रह गया, जो कि एक साल पहले की अवधी में डेढ़ लाख करोड़ डॉलर था.
  • विश्व निवेश रिपोर्ट 2021 के अनुसार वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह 2021 में 10 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की उम्मीद है.

स्वर्ण आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग 15 जून से लागू

स्वर्ण आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग 15 जून से लागू हो गयी है. इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ता आभूषण खरीदते समय ठगी का शिकार न हों.

स्वर्ण आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग: मुख्य बिंदु

  • अनिवार्य हॉलमार्किंग स्वर्ण आभूषणों के उपभोक्ता को आभूषणों पर अंकित शुद्धता को सुनिश्चित करती है.
  • अनिवार्य हॉलमार्किंग लागू होने के बाद ज्वैलर्स को केवल 14, 18 और 22 कैरेट के सोने के आभूषण बेचने की अनुमति होगी.
  • नए प्रावधानों के अन्तर्गत पुराने आभूषणों की भी हॉलमार्किंग की जा सकेगी. भारत में फिलहाल केवल 30 प्रतिशत स्वर्णाभूषणों पर ही हॉलमार्क चिन्ह अंकित है.
  • समूची हॉलमार्किंग योजना से संबंधित मुद्दों की देख-रेख के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा. इसमें विभिन्न हितधारकों की प्रतिनिधि, राजस्व अधिकारी और विधि विशेषज्ञ शामिल होंगे.
  • भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards) की हॉलमार्किंग योजना के अन्तर्गत आभूषण विक्रेताओं का पंजीकरण किया जाता है जो हॉलमार्क युक्त स्वर्णाभूषणों की बिक्री कर सकते हैं.

इथेनॉल उत्पादन के लिए पुणे में E100 पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत

भारत ने इथेनॉल (Ethanol) क्षेत्र के विकास के लिए पुणे में E100 पायलट प्रोजेक्ट (E100 pilot project) शुरू किया है. यह प्रोजेक्ट इथेनॉल के उत्पादन और वितरण से संबंधित है. इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के अवसर पर की.

मुख्य बिंदु

  • प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आने वाले वर्षों में भारत इथेनॉल आधारित कई प्रोजेक्ट शुरू करेगा. उन्होंने कहा कि 2020 में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 21,000 करोड़ रुपये का इथेनॉल खरीदा है.
  • भारत ने 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण को पूरा करने का संकल्प लिया है. आज करीब 8.5 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित किया जा रहा है.
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि एथेनॉल भारत की 21वीं सदी की प्राथमिकताओं से जुड़ गया है. यह पर्यावरण के साथ-साथ किसानों के जीवन की भी मदद कर रहा है. इससे देश के गन्ना किसानों को बड़ा लाभ हुआ है.
  • भारत समग्र दृष्टिकोण के साथ अपने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम पर काम कर रहा है. स्वच्छ ऊर्जा पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी – दोनों एक साथ आगे बढ़ सकते हैं. भारत ने इस रास्ते को चुना है.
  • पिछले कुछ वर्षों में, अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ हमारे वन क्षेत्र में भी वृद्धि हुई है. हाल ही में देश में बाघों की आबादी दोगुनी हो गई है.

इथेनॉल इंधन क्या होता है?

इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में इंधन की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. इथेनॉल में 35 फीसदी फीसद ऑक्सीजन होता है. इथेनॉल का उत्पादन यूं तो मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होता है लेकिन शर्करा वाली कई अन्य फसलों से भी इसे तैयार किया जा सकता है.

इंधन के रूप में इथेनॉल उपयोग के फायदे

इथेनॉल के इस्तेमाल से 35 फीसदी कम कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन होता है. यह सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन के उत्सर्जन को भी कम करता है.

इथेनॉल इको-फ्रैंडली इंधन है और पर्यावरण को जीवाश्म ईंधन से होने वाले खतरों से सुरक्षित रखता है.

इंधन के रूप में इथेनॉल का विश्व में उपयोग

ब्राजील में लगभग 40 प्रतिशत गाड़ियां 100 फीसदी इथेनॉल से चलती हैं, यही नहीं बाकी गाड़ियां भी 24 फीसदी इथेनॉल मिला ईंधन उपयोग कर रही हैं. ब्राजील जैसे देश के लिए यह करना आसान इसलिए हुआ क्योंकि उनके पास भारत से तीन गुना जमीन और आबादी उत्तर प्रदेश जितनी है.

स्वीडन और कनाडा में भी इथेनॉल पर गाड़ियां चल रही है. कनाडा में तो इथेनॉल के इस्तेमाल पर सरकार की तरफ से सब्सिडी भी दी जा रही है.

न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की गयी

सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए एक विशेषज्ञ समूह का गठन किया है. इससे संबंधित आदेश श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 3 जून को जारी किया. यह समिति राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी के निर्धारण पर तकनीकी जानकारी और सिफारिश देगी.

अजीत मिश्रा समिति के अध्यक्ष

इस विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ के निदेशक प्रोफेसर अजीत मिश्रा होंगे. विशेषज्ञ समूह के सदस्यों में प्रोफेसर तारिका चक्रवर्ती (IIM कोलकाता) अनुश्री सिन्हा (सीनियर फेलो, नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च), विभा भल्ला (संयुक्त सचिव) एच श्रीनिवास (महानिदेशक, वीवी गिरी नेशनल लेबर इंस्टीट्यूट) शामिल हैं. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के वरिष्ठ श्रम एवं रोजगार सलाहकार डीपीएस नेगी सदस्य सचिव हैं.

सरकार ने न्यूनतम मजदूरी पर इससे पहले जनवरी 2018 में अनूप सत्पथी की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था. इस समिति ने 2018 की कीमतों के अनुसार न्यूनतम मजदूरी को 375 रुपये प्रति दिन या 9,750 रुपये प्रति माह तय करने की सिफारिश की थी. इन सिफारिशों को स्वीकार नहीं किया गया था.

मजदूरी निर्धारण के लिए वैज्ञानिक मानदंड

यह समिति मजदूरी दरों को तय करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वोत्तम प्रथाओं को देखेगा और मजदूरी निर्धारण के लिए एक वैज्ञानिक मानदंड विकसित करेगा.

राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी का तात्पर्य ऐसे वेतन से है, जो पूरे देश में सभी श्रेणियों के श्रमिकों पर लागू होता है.

NSO ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए राष्ट्रीय आय के अनंतिम अनुमान जारी किए

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 31 मई को वित्त वर्ष 2020-21 के लिए राष्ट्रीय आय के अनंतिम अनुमान जारी किए. ये अनुमान स्थिर (2011-12) और वर्तमान मूल्यों दोनों पर ही जारी किए गये हैं.

मुख्य बिंदु

  • वर्ष 2020-21 में स्थिर मूल्यों (2011-12) पर अब वास्तविक (GDP) 135.13 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है, जबकि 2019-20 के लिए GDP का पहला संशोधित अनुमान 145.69 लाख करोड़ रुपये था जो 29 जनवरी, 2021 को जारी हुआ था.
  • 2020-21 के दौरान GDP की वृद्धि -7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2019-20 में यह 4 प्रतिशत रही थी.
  • वर्ष 2020-21 में वर्तमान मूल्यों पर जीडीपी के 197.46 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है, जबकि 2019-20 में पहला संशोधित अनुमान 203.51 लाख करोड़ रुपये था. जिससे 2019-20 की 7.8 प्रतिशत बढ़ोतरी की तुलना में -3.0 प्रतिशत बदलाव प्रदर्शित हो रहा है.
  • वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में स्थिर मूल्यों (2011-12) पर जीडीपी 38.96 लाख करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि 2019-20 की चौथी तिमाही में यह 38.33 लाख करोड़ रुपये रहा था. इस प्रकार 1.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी प्रदर्शित होती है.

ईरान ने ONGC द्वारा खोजी गयी गैस फील्ड परियोजना के ठेका स्थानीय कंपनी को दिया

ईरान ने फारस की खाड़ी की फरजाद-B परियोजना का काम अपनी घरेलू कंपनियों को देने का फैसला किया है. इससे भारतीय कंपनी ऑयल एवं नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) इस दौड़ से बाहर हो गई है. यह ठेका 1.78 अरब डॉलर का था.

हाल ही में हुए एक समझौते के तहत ईरान के नेशनल इरानियन ऑयल कंपनी (NIOC) ने फरजाद-B गैस फील्ड के विकास के लिए पेट्रोपर्स ग्रुप के साथ 1.78 अरब अमेरिकी डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं.

फरजाद-B गैस फील्ड परियोजन क्या है?

फरजाद-B गैस फील्ड ईरान के फारस की खाड़ी में है. इसकी खोज भारतीय कंपनी ONGC विदेश लिमिटेड (OVL) ने की थी. OVL ने 2008 में फारस ऑफशोर एक्सप्लोरेशन ब्लॉक में एक विशाल गैस फिल्ड की खोज की थी. OVL और उसके पार्टनर्स ने इस खोज और डेवलपमेंट के लिए 11 अरब डॉलर तक निवेश करने की पेशकश की थी. इसे बाद में फरजाद-B नाम दिया गया.

फरजाद-B गैस फील्ड में 21,700 अरब घनफुट गैस का भंडार है. इसका 60 प्रतिशत निकाला जा सकता है. परियोजना से रोज 1.1 अरब घन फुट गैस प्राप्त की जा सकती है.

OVL इस परियोजना के परिचालन में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी की इच्छुक थी. उसके साथ इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) और ऑयल इंडिया लि (OIL) भी शामिल थीं. इन दोनों की 40 और 20 प्रतिशत की हिस्सेदार थी.

OVL के नेतृत्व में भारतीय कंपनियों का एक समूह परियोजना पर अब तक 40 करोड़ डॉलर यानी करीब 3 हजार करोड़ रुपये खर्च कर चुका है. ईरान की नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी (NIOC) ने फरवरी 2020 में कंपनी को बताया था कि वह फरजाद-B परियोजना का ठेका किसी ईरानी कंपनी को देना चाहती है.

ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL)

OVL सरकारी कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) की सब्सिडिअरी है. ONGC ने इसे विदेशी परियोजनाओं में निवेश करने के लिए बनाया है. OVL ने ईरान के इस गैस क्षेत्र के विकास पर 11 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बनाई थी.

सरकार ने देश में बैटरी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए PLI योजना को मंजूरी प्रदान की

सरकार ने बैटरी भंडारण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना को मंजूरी प्रदान की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में 12 मई को हुई केंद्रीय मंत्रीमंडल की बैठक में इस योजना को मंजूरी प्रदान की गई. इस योजना के लिए 18,100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.

इस योजना का लक्ष्‍य 50 गीगावाट घंटा (Gigawatt hours – GWh) ‘उन्नत रसायन सेल बैटरी भंडारण’ (Advanced Chemistry Cell) क्षमता हासिल करना है. यह फैसला आत्मनिर्भर भारत का एक परिदृश्य होने के साथ ही मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है. इसके तहत अब उन्नत क्षमता की बैटरी का निर्माण देश में ही किया जायेगा.

एडवांस्‍ड केमिस्‍ट्री बैटरी सेल स्‍टोरेज (ACC) के है?

एडवांस्‍ड केमिस्‍ट्री बैटरी सेल स्‍टोरेज (Advanced Chemistry Cell) एक अत्यधिक क्षमता के उर्जा भंडारण (storage) उपकरण है. यह रासायनिक उर्जा को संग्रहीत (store) करता और फिर वे आवश्यकता होने पर इसे वापस विद्युत ऊर्जा में बदला जा सकता है.

ACC के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना: मुख्य बिंदु

  • मेक इन इंडिया अभियान को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से उन्नत रसायन सेल बैटरी भंडारण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम से 45,000 करोड़ रुपये का निवेश होने की संभावना है.
  • मौजूदा समय में 20000 करोड़ रुपये का बैटरी स्टोरेज आयात किया जाता है. PLI योजना के तहत आयात कम होगा और देश में उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा.
  • इस योजना से इलेक्ट्रिकल व्हीकल और इलेक्ट्रिकल मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा. सभी तरह के वाहनों में बैटरी का इस्तेमाल हो सकता है.
  • भारत में 1.36 लाख मैगावाट का सौर ऊर्जा उत्‍पादन हो रहा है, लेकिन सौर उर्जा से तैयार होने वाली बिजली का उपयोग दिन में ही कर सकते हैं. अगर बैटरी स्टोरेज होगा तो उसके आधार पर ये काम आसानी से होगा.
  • इसके जरिये डीजल जेनरेटर को रिप्लेस किया जा सकेगा, बैटरी स्टोरेज डीजल जेनरेटर का भी विकल्प है. दिन में सौर ऊर्जा के जरिये बिजली उत्पादन और उसका बैटरी स्टोरेज के जरिये रात में इस्तेमाल संभव हो सकेगा.

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना क्या है?

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (Production Linked Incentives) योजना के तहत देश में उत्पादन को बढावा देने के लिए कंपनियों को नकद प्रोत्साहन (कैश इंसेंटिव) दिया जाता है.

सरकार ने ऑटोमोबाइल, नेटवर्किंग उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, उन्नत रसायन विज्ञान, टेलिकॉम, फार्मा, और सोलर पीवी निर्माण, स्पेशलिटी स्टील आदि के क्षेत्र में इस योजना को मंजूरी दी है.

इंडियन ऑयल ने UCO आधारित बायोडीजल मिश्रित डीजल की आपूर्ति शुरू की

सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल ने 4 मई को UCO (Used Cooking Oil) आधारित बायोडीजल मिश्रित डीजल की आपूर्ति शुरू की है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इंडियन ऑयल के टिकरीकलां टर्मिलन, दिल्ली से IOI योजना के तहत UCO आधारित बायोडीजल मिश्रित डीजल की पहली आपूर्ति शुरू की.

UCO आधारित बायोडीजल क्या है?

बायोडीजल एक वैकल्पिक ईंधन है, जो पारंपरिक या फॉसिल डीजल की तरह है. यह बायोडीजल खाना पकाने के लिए इस्तेमाल किए गए तेल (Used Cooking Oil) से बना है. संक्षिप्त में इसे UCO आधारित बायोडीजल कहते हैं. यह वनस्पति तेलों, एनिमल फैट, चरबी और वेस्ट कुकिंग ऑयल से उत्पादित किया जाता है. बायोडीजल का एक विशिष्ट लाभ इसकी कार्बन न्यूट्रेलिटी है.

सरकार ने UCO (Used Cooking Oil) आधारित बायोडीजल की पहल 10 अगस्त, 2019 को विश्व जैव ईंधन दिवस के अवसर पर की थी. इस पहल में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के साथ पेट्रोलियम एवंप्राकृतिक गैस मंत्रालय शामिल हैं.

यह पहल, स्वदेशी बायोडीजल (Biodiesel) आपूर्ति को बढ़ाने, आयात निर्भरता कम करने और ग्रामीण रोजगार को पैदा करके राष्ट्र को पर्याप्त आर्थिक लाभ प्रदान करेगी.

इसका मुख्य उद्देश्य इस्तेमाल किये गये खाना के तेल के एकत्रित करना और उसे बायोडीजल में बदलना है. जीवाश्म डीजल में इस बायोडीजल को मिलाया जायेगा. जीवाश्म डीजल में यह बायोडीजल 7 प्रतिशत तक होगा.

बायो-डीजल का उपयोग करने का मुख्य लाभ इसकी कार्बन-तटस्थता है. इसके अलावा, यह पूरी तरह से गैर विषैला और बायोडिग्रेडेबल है.

प्रधानमंत्री ने देश भर में स्वामित्व योजना के तहत ई-प्रापर्टी कार्ड का वितरण किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल को देश में स्वामित्व योजना के अमल की शुरुआत की. उन्होंने इसकी शुरुआत ग्रामीण लोगों को ई-प्रापर्टी कार्ड का वितरण कर की. वर्चुअल माध्यम से आयोजित एक कार्यक्रम में चार लाख से अधिक लोगों को उनकी सम्पत्ति के ई-प्रापर्टी कार्ड दिए गये.

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल 2020 को भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ‘स्वामित्व योजना’ की घोषणा की थी. प्रधानमंत्री ने छह राज्‍यों- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड में प्रायोगिक तौर पर ‘स्‍वामित्‍व योजना’ की शुरूआत की थी.

क्या है स्‍वामित्‍व योजना?

भारत की 60% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है. ज्यादातर लोगों के पास उनकी संपत्ति के स्वामित्व के दस्तावेज नहीं हैं. अंग्रेजों के समय से ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनों का बंदोबस्त होता आया है. यही बंदोबस्त ग्राम विवाद का मुख्य कारण होता है. स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक मिल जाएगा. इसके बाद फिर किसी भी प्रकार का विवाद नहीं होगा.

स्‍वामित्‍व योजना के मुख्य बिंदु

  • इसके तहत देश के सभी गांवों में ड्रोन के माध्यम से गांव की हर संपत्ति की मानचित्रण किया जायेगा. इसके बाद गांव के लोगों को उस संपत्ति का मालिकाना प्रमाण-पत्र दिया जाएगा.
  • इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में नियोजन तथा राजस्‍व संग्रह को सुचारू बनाने और संपदा अधिकारों पर स्‍पष्‍टता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.
  • संपत्ति का मालिकाना प्रमाण-पत्र मिलने से शहरों की तरह गांवों में भी बैंकों से आसानी से ऋण लिए जा सकेगा. इसके लिए ग्रामीणों से न्यूनतम डॉक्युमेंट मांगे जाएंगे.

राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2021

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर वर्ष 2021 के लिए राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार भी किये. ये पुरस्कार दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तीकरण पुरस्कार, नानाजी देखमुख राष्ट्रीय गौरव ग्रामसभा पुरस्कार और ग्राम पंचायत विकास योजना पुरस्कार जैसी विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत दिए गए. पुरस्कार के तहत दी जाने वाली पांच लाख से 50 लाख रुपए तक की राशि विजेता पंचायतों के बैंक खातों में इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सीधे अंतरित की गई.

रिजर्व बैंक ने एआरसी के कामकाज की समीक्षा के लिए समिति का गठन किया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ‘एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों’ (ARC) के कामकाज की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया है. यह समिति ARC को बढ़ती जरूरतों के अनुरूप काम करने के लिए उचित उपायों का सुझाव देगी. समिति अपनी पहली बैठक की तारीख से तीन माह के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी.

इस समिति में छह सदस्य होंगे. RBI के पूर्व कार्यकारी निदेशक सुदर्शन सेन को इसका अध्यक्ष बनाया गया है. यह समिति ARC के लिए मौजूदा कानूनी और नियामकीय ढांचे की समीक्षा करेगी और उनकी दक्षता में सुधार के उपाय सुझाएगी.

इसके अलावा समिति दबाव वाली संपत्तियों के निपटान में ARC की भूमिका की समीक्षा करेगी. इनमें दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (IBC) शामिल है. समिति प्रतिभूति प्राप्तियों की तरलता में सुधार और कारोबार के लिए सुझाव देगी. इसे अलावा समिति को ARC के कारोबारी मॉडल की भी समीक्षा करनी होगी.

वर्ष 2020-21 के दौरान कर संग्रह के आंकड़े जारी, अनुमान से 8.2 प्रतिशत अधिक कर संग्रह

वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2020-21 के दौरान देश में अप्रत्यक्ष कर संग्रह के शुरुआती आंकड़े हाल ही में जारी किये. इन आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020-21 के दौरान देश में कर संग्रह 9.89 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से 8.2 प्रतिशत अधिक रहा. देश में अप्रत्यक्ष कर संग्रह 12 प्रतिशत बढ़कर 10.71 लाख करोड़ रुपये रहा.

वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2020-21 में कर संग्रह के आंकड़े: मुख्य बिंदु

  • वर्ष 2020-21 के दौरान देश में अप्रत्यक्ष कर संग्रह 12 प्रतिशत बढ़कर 10.71 लाख करोड़ रुपये रहा. यह वृद्धि वस्तु एवं सेवा कर (GST) में 8 प्रतिशत कमी के बाद भी दिखी है. इससे पिछले वर्ष (2019-20) अप्रत्यक्ष कर संग्रह 9.54 लाख करोड़ रुपये रहा था.
  • सीमा शुल्क और पेट्रोल एवं डीजल पर कर बढ़ाए जाने तथा दूसरी छमाही में खपत में कुछ तेजी आने के कारण अप्रत्यक्ष कर संग्रह में वृद्धि हुई है.
  • अप्रत्यक्ष कर संग्रह में वर्ष 2020-21 के कारण वित्त वर्ष 2021 में कुल कर संग्रह 20.16 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष के 20.05 लाख करोड़ रुपये से कुछ अधिक रहा. प्रत्यक्ष कर संग्रह में 10 प्रतिशत कमी के बाद भी कुल कर संग्रह अधिक रहा है.
  • अप्रत्यक्ष कर में GST, उत्पाद शुल्क एवं सीमा शुल्क आते हैं. वित्त वर्ष 2021 में सीमा शुल्क के रूप में 1.32 लाख करोड़ रुपये वसूले गए, जो उससे पिछले वित्त वर्ष के 1.09 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 21 प्रतिशत अधिक रहे.
  • केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर (बकाये) से होने वाला संग्रह भी आलोच्य अवधि के दौरान 58 प्रतिशत बढ़कर 3.91 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया.