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भावनगर में ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम: प्रधानमंत्री ने कई परियोजनाओं को शुरू किया

गुजरात के भावनगर में 20 सितम्बर को ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम आयोजित किया गया था. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने इस कार्यक्रम को संबोधित किया. इस इस दौरान उन्होंने 32 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया.

प्रधानमंत्री के संबोधन के मुख्य बिन्दु

  • देश का लक्ष्य 2047 तक वैश्विक समुद्री व्यापार में हिस्सेदारी को तीन गुना करना है.
  • दूसरे देशों पर भारत की निर्भरता उसके सबसे बड़े दुश्‍मनों में से एक है.
  • वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश को आत्मनिर्भर बनना होगा.
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का समुद्री क्षेत्र अगली पीढ़ी के सुधारों के दौर से गुजर रहा है.

कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास

  • इस अवसर पर, प्रधानमंत्री ने 32 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया.
  • श्री मोदी ने 7.8 हजार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की कई प्रमुख समुद्री परियोजनाओं के साथ-साथ मुंबई अंतर्राष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल का भी उद्घाटन किया.
  • उन्होंने अहमदाबाद के पास प्राचीन शहर लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) की प्रगति की समीक्षा की. NMHC का विकास 4.5 हजार करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है. लोथल सिंधु घाटी सभ्यता का महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था. NMHC दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री संग्रहालय होगा.

क्रिटिकल खनिजों की उपलब्धता के लिए एक विशेष प्रोत्साहन योजना को मंजूरी

  • भारत सरकार ने देश में क्रिटिकल खनिजों (Critical Minerals) की पुनर्चक्रण (Recycling) क्षमता को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है. यह मंजूरी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 3 सितम्बर को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में दी गई.
  • यह योजना पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) के माध्यम से क्रिटिकल खनिजों (लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ तत्वों जैसे खनिज) की उपलब्धता को बढ़ावा देना है.
  • यह योजना वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहेगी. इसके लिए ₹1,500 करोड़ की राशि निर्धारित की गई है.

योजना के मुख्य बिन्दु

  • इस योजना का उद्देश्य नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (NCMM) के तहत वैकल्पिक स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिजों का घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और संसाधनों के पुनः उपयोग सुनिश्चित करना है.
  • क्रिटिकल खनिजों जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकल आदि की आपूर्ति भारतीय उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इन खनिजों की खदानों की खोज, नीलामी और उत्पादन शुरू होने में लंबा समय लगता है.
  • ऐसे में सरकार ने इनकी आपूर्ति को शीघ्र सुनिश्चित करने के लिए ‘सेकेंडरी स्रोतों’ से पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) को एक व्यावहारिक समाधान माना है.
  • इस योजना से सरकार को कम समय में घरेलू स्तर पर खनिज उत्पादन की नई क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

प्रोत्साहन राशि

  • इस योजना के तहत पात्र पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) इकाइयों की स्थापना हेतु पूंजीगत व्यय पर 20% सब्सिडी दी जाएगी. इसमें मशीनरी, संयंत्र और संबंधित यूटिलिटीज़ शामिल हैं. निर्धारित समय सीमा के बाद उत्पादन शुरू होने पर सब्सिडी दर घट जाएगी.

क्रिटिकल खनिज (Critical Minerals) क्या हैं?

  • क्रिटिकल खनिज (critical minerals) वे खनिज हैं जो किसी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक हैं, लेकिन उनकी आपूर्ति में बाधा आने का खतरा रहता है क्योंकि वे सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं या कुछ खास देशों में ही पाए जाते हैं.
  • इनका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा (जैसे सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहन) और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण उद्योगों में होता है.
  • दुर्लभ पृथ्वी तत्व (Rare Earth Elements – REEs), लिथियम, निकेल और कोबाल्ट, इंडियम और टेल्यूरियम कुछ महत्वपूर्ण क्रिटिकल खनिजों के उदाहरण हैं.

नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (NCMM)

  • भारत ने भी आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए 30 महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान की है. इन खनिजों के क्षेत्र में अपनी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए भारत ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (NCMM) को मंजूरी दी है.

पीएम स्वनिधि योजना को मार्च 2030 तक बढ़ाया गया, पुनर्गठन को मंजूरी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री स्‍वनिधि योजना (PM SVANidhi Scheme) के पुनर्गठन को मंजूरी दी है. यह मंजूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 27 अगस्त को हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में दी गई.

मंत्रिमंडल ने इस योजना के 31 दिसंबर 2024 से आगे की अवधि के विस्तार का भी अनुमोदन किया. इसे अब 31 मार्च, 2030 तक बढ़ा दिया गया है.

पुनर्गठित योजना की प्रमुख विशेषता

  • इस योजना का कुल परिव्यय 7,332 करोड़ रुपए है. पुनर्गठित योजना का लक्ष्य 50 लाख नए लाभार्थियों सहित 1.15 करोड़ लाभार्थियों को लाभ देना है.
  • पुनर्गठित योजना की प्रमुख विशेषताओं में बढ़ी हुई ऋण राशि, लाभार्थियों के लिए यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड का प्रावधान और खुदरा एवं थोक लेनदेन के लिए डिजिटल कैशबैक प्रोत्साहन शामिल हैं.
  • इस योजन के तहत दिए जाने वाले ऋण के प्रथम किश्त को 10,000 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए तथा ऋण के द्वितीय किश्त को 20,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए तक किया गया है. जबकि तृतीय किश्त पहले की तरह 50,000 रुपए है.
  • यूपीआई लिंक्‍ड रुपे क्रेडिट कार्ड से स्ट्रीट वेंडरों को किसी भी आकस्मिक व्यावसायिक और व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तत्काल ऋण उपलब्ध हो सकेगा.

योजना का कार्यान्वयन

  • प्रधानमंत्री स्‍वनिधि योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी आवास एवं शहरी मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग (DFS) पर संयुक्त रूप से रहेगी. इसमें DFS की भूमिका ऋण या क्रेडिट कार्ड तक पहुंच को सुविधाजनक बनाने की रहेगी.

प्रधानमंत्री स्‍वनिधि योजना (PM SVANidhi Scheme)

  • प्रधानमंत्री स्‍वनिधि योजना का पूरा नाम प्रधानमंत्री रेहडी-पटरी विक्रेता आत्‍मनिर्भर निधी (PM Street Vendor’s AtmaNirbhar Nidhi) है.
  • सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान रेहड़ी-पटरी वालों की सहायता के लिए 1 जून 2020 को इस योजना की शुरुआत थी.
  • इसका उद्देश्य रेहड़ी-पटरी वालों (स्ट्रीट वेंडरों) को अपना व्यवसाय फिर से शुरू करने के लिए बिना किसी गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान करना है.
  • इस योजना के तहत ₹15,000 का पहला ऋण मिलता है, जिसके बाद आवश्यकतानुसार ₹25,000 और ₹50,000 तक के ऋण भी दिए जा सकते हैं. इस ऋण के पुनर्भुगतान पर 7% की ब्याज सब्सिडी भी दी जाती है.

तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए ‘मेरिट’ योजना को मंजूरी

केंद्र सरकार ने तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता व शोध को बढ़ावा देने के लिए ‘मेरिट’ (MERITE) योजना को मंजूरी दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 9 अगस्त को हुई बैठक में यह मंजूरी दी गई.

क्या है मेरिट (MERITE) योजना?

  • मेरिट (MERITE) का पूरा नाम मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च इम्प्रूवमेंट इन टेक्निकल एजुकेशन है.
  • यह योजना देशभर के 275 तकनीकी संस्थानों (175 इंजीनियरिंग कॉलेज और 100 पॉलिटेक्निक कॉलेज) में लागू होगी.
  • योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP-2020) के अनुरूप तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता, समानता और प्रशासनिक दक्षता को सुदृढ़ करना है.
  • इस योजना की अवधि 2025-26 से 2029-30 तक होगी. योजना की कुल लागत ₹4,200 करोड़ होगी जिसमें ₹2,100 करोड़ का ऋण विश्व बैंक से और शेष राशि केंद्र सरकार से मिलेगा.

लाभार्थी संस्थान

  • इस योजना के अंतर्गत चुने गए सरकारी/सरकारी सहायता प्राप्त तकनीकी संस्थान — जैसे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NITs), राज्य इंजीनियरिंग संस्थान, पॉलिटेक्निक और संबद्ध तकनीकी विश्वविद्यालय (ATUs) — को सहायता दी जाएगी.
  • मेरिट योजना से कुल मिलाकर 7.5 लाख छात्र-छात्राओं को सीधा लाभ मिलेगा.

मेरिट योजना के मुख्य उद्देश्य

  • शिक्षा का डिजिटलीकरण करना
  • बहु-विषयक (multidisciplinary) कार्यक्रमों के दिशा-निर्देश तैयार करना
  • विद्यार्थियों के सीखने की क्षमता और रोज़गार योग्यता को बढ़ावा देना
  • अनुसंधान और नवाचार के लिए सशक्त वातावरण बनाना
  • श्रम बाजार के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करना
  • शैक्षणिक नेतृत्व, विशेषकर महिलाओं, को प्रोत्साहन देना

योजना का कार्यान्वयन

  • योजना को AICTE और NBA जैसे विनियामक निकायों के माध्यम से लागू किया जाएगा. IITs, IIMs जैसे प्रमुख संस्थान इसके क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाएंगे.

स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 पुरस्कार: इंदौर लगातार आठवें वर्ष भारत का सबसे स्वच्छ शहर

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 17 जुलाई 2025 को स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार (Swachh Survekshan Awards) 2024-25 नई दिल्ली में प्रदान किए.
  • यह स्वच्छ सर्वेक्षण का नौवां संस्करण था. इस संस्करण का विषय (थीम) था – कम करें, पुनः उपयोग करें और पुनर्चक्रण करें (Reduce, Reuse, Recycle).
  • मध्य प्रदेश का इंदौर लगातार आठवें वर्ष भारत का सबसे स्वच्छ शहर बना रहा. सूरत दूसरे स्थान पर रहा, जबकि नवी मुंबई को तीसरा स्थान हासिल हुआ.

विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कृत शीर्ष विजेता

सुपर स्वच्छ लीग श्रेणी

10 लाख या उससे अधिक के आबादी वाले शहर

  1. इंदौर (मध्य प्रदेश)
  2. सूरत (गुजरात)
  3. नवी मुंबई (महाराष्ट्र)

3 लाख से 10 लाख की आबादी वाले शहर

  1. नोएडा (उत्तर प्रदेश)
  2. चंडीगढ़
  3. मैसूरु (कर्नाटक)

50,000 से 3 लाख तक की आबादी वाले शहर

  1. नई दिल्ली (NDMC)
  2. तिरूपति (आंध्र प्रदेश)
  3. अंबिकापुर (छत्तीसगढ़)

20,000 से 50,000 तक की आबादी वाले शहर

  1. वीटा (महाराष्ट्र)
  2. सवाद (महाराष्ट्र)
  3. देवलाली प्रवर (महाराष्ट्र)

20,000 से कम आबादी वाले शहर

  1. पंचगनी (महाराष्ट्र)
  2. पाटन (छत्तीसगढ़)
  3. पन्हाला (महाराष्ट्र)

राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता श्रेणी

दस लाख या उससे अधिक के आबादी वाले शहर

  1. अहमदाबाद (गुजरात)
  2. भोपाल (मध्य प्रदेश)
  3. लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

3 लाख से 10 लाख आबादी वाले शहर

  1. मीरा भयंदर (महाराष्ट्र)
  2. बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
  3. जमशेदपुर (झारखंड)

50,000 से 3 लाख तक आबादी वाले शहर

  1. देवास (मध्य प्रदेश)
  2. करहद (महाराष्ट्र)
  3. करनाल (हरियाणा)

20,000 से 50,000 आबादी वाले शहर

  1. पणजी (गोवा)
  2. अस्का (ओडिशा)
  3. कुम्हारी (छत्तीसगढ़)

20,000 से कम आबादी वाले शहर

  1. बिल्हा (छत्तीसगढ़)
  2. चिकिति (ओडिशा)
  3. शाहगंज (मध्य प्रदेश)

मंत्रिस्तरीय पुरस्कार श्रेणी

  1. विशाखापत्तनम
  2. जबलपुर
  3. गोरखपुर

मंत्रिस्तरीय पुरस्कार श्रेणी (तेजी से स्वच्छ हो रहे शहर)

  1. पटना
  2. रायपुर
  3. सोनीपत

स्वच्छ सर्वेक्षण: एक दृष्टि

  • स्वच्छ सर्वेक्षण को 2016 में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत शुरू किया गया था. यह सर्वेक्षण प्रतिवर्ष आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा आयोजित किया जाता है.
  • 2016 में केवल 73 शहरी स्थानीय निकायों के साथ शुरू किया गया स्वच्छ सर्वेक्षण, विस्तारित होकर 4,500 से ज़्यादा शहरों को कवर कर चुका है.

केन्द्रीय जीवंत गांव कार्यक्रम-II योजना को मंजूरी दी गई

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल की 4 अप्रैल 2025 को हुई बैठक में ‘जीवंत गांव कार्यक्रम-II’ (Vibrant Villages Programme-II) को मंजूरी दी. थाईलैंड की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री मोदी ने बैंकॉक से वर्चुअली माध्यम से इस बैठक की अध्यक्षता की थी.
  • जीवंत गांव कार्यक्रम-II की अवधि वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक है. जीवंत गांव कार्यक्रम-II, 2023 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए जीवंत गांव कार्यक्रम-I का पूरक होगा.
  • इस योजना के लिए कुल आवंटन 6,839 करोड़ रुपये है. यह केंद्र सरकार द्वारा 100% वित्तपोषित है. इसका क्रियान्वयन केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है.
  • जीवंत गांव कार्यक्रम-II में 17 राज्य/संघ राज्य क्षेत्र- अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा संघ राज्य क्षेत्र लद्दाख और संघ राज्य क्षेत्र जम्मू और कश्मीर शामिल हैं.

जीवंत गांव कार्यक्रम (VVP-II): एक दृष्टि

  • जीवंत गांव कार्यक्रम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के साथ लगे पिछड़े गांवों का विकास करना है, ताकि लोग इन क्षेत्रों से पलायन न करें और शत्रुतापूर्ण दुष्प्रचार का शिकार न बनें.
  • यहाँ पर्यटन, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देकर इन लोगों के लिए आजीविका के अवसर पैदा करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.
  • जीवंत गांव कार्यक्रम का पहला चरण (जीवंत गांव कार्यक्रम-I) केंद्र सरकार द्वारा 15 फरवरी, 2023 को शुरू किया गया था.
  • इसमें अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के 19 जिलों के 46 ब्लॉकों के चुनिंदा गाँव शामिल थे.

वित्त मंत्री ने एनपीएस वात्सल्य योजना का शुभारंभ किया

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 18 सितंबर को दिल्ली में एनपीएस-वात्सल्य योजना (NPS Vatsalya Scheme) का शुभारंभ किया. इस योजना में माता-पिता को पेंशन अकाउंट में निवेश कर अपने बच्चों के भविष्य के लिए बचत करने की सुविधा दी गई है.

एनपीएस वात्सल्य योजना: मुख्य बिन्दु

  • एनपीएस-वात्सल्य योजना योजना के तहत माता-पिता या अभिभावक अपने नाबालिग बच्चों के लिए खाते खोल सकते हैं और उनके रिटायरमेंट की बचत में योगदान कर सकते हैं.
  • जब नाबालिग 18 वर्ष का हो जाता है, तब माता-पिता के पास खाता नियमित एनपीएस खाते में बदलने का विकल्प होता है, जिससे रिटायरमेंट की योजना को आसानी से आगे बढ़ाया जा सकता है.
  • इस योजना की एक खास बात यह है कि माता-पिता अपने बच्चे के रिटायरमेंट के लिए बचत उसके शैशवावस्था से ही शुरू कर सकते हैं.
  • योजना के तहत वात्सल्य खाता खोलने के लिए न्यूनतम योगदान 1000रु पये है. इसके बाद अंशधारकों को सालाना 1,000 रुपये का योगदान करना होगा.

प्रधानमंत्री जनजातीय उन्‍नत ग्राम अभियान को स्‍वीकृति

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 18 सितंबर 2024 को प्रधानमंत्री जनजातीय उन्‍नत ग्राम अभियान (PMJUGA) को स्‍वीकृति दी. इस अभियान में लगभग 63 हजार गांवों को शामिल किया जाएगा और इससे पांच करोड़ से अधिक जनजातीय लोगों को लाभ होगा.

PMJUGA: मुख्य बिन्दु

  • इस अभियान का उद्देश्य आदिवासियों की सामाजिक आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना है. योजना पर कुल 79.156 हजार करोड रुपये खर्च आएगा जिसमें से केंद्र सरकार 56.33 हजार करोड रुपये देगी जबकि 22.82 हजार करोड रुपये राज्यों की हिस्सेदारी होगी.
  • देशभर में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आदिवासी बहुल 549 जिलों और 2740 ब्लाकों में यह अभियान लागू होगा.
  • योजना के तहत देश के आकांक्षी जिलों और आदिवासी बहुल गावों का समग्र विकास किया जाएगा. जिसमें देश भर के 63000 आदिवासी बहुल गावों को कवर किया जाएगा. इस योजना से पांच करोड़ आदिवासियों को लाभ होगा.
  • इस योजना के तहत आवंटित राशि अगले पांच वर्ष में चार उद्देश्यों से संबंधित योजनाओं पर खर्च होगी जिसमें गावों में इन्फ्रास्ट्रक्टर का विकास, पक्के घरों का निर्माण, आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देना जिसमें कौशल विकास, उद्यमिता को प्रोत्साहन और स्वरोजगार को बढ़ावा देना शामिल है.
  • गांव के हर घर तक स्वच्छ पेयजल सुविधा, बिजली कनेक्शन, मोबाइल मेडिकल यूनिट की स्थापना, आयुष्मान कार्ड, एलपीजी कनेक्शन, सहित सभी तरह की सरकारी सुविधा मुहैया कराया जाएगा.
  • इस योजना के अंतर्गत विभिन्न मंत्रालय मिल कर काम करेंगे जिसमें शहरी विकास मंत्रालय 20 लाख घरों का निर्माण करेगा और 25000 किलोमीटर ग्रामीण सड़क का निर्माण होगा.

‘महिला सुरक्षा छत्र’ योजना को 2025-26 तक जारी रखने का फैसला

केंद्र सरकार ने महिला सुरक्षा के लिए चलाई जा रही महत्वाकांक्षी योजना ‘महिला सुरक्षा छत्र’ (Umbrella Scheme on Safety of Women) को 2025-26 तक जारी रखने का फैसला किया है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में 21 फ़रवरी को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया.

मुख्य बिन्दु

  • यह योजना 2021-22 से चल रही है. इस योजना पर होने वाले कुल व्यय 1,179.72 करोड़ रुपये में से 885.49 करोड़ रुपये गृह मंत्रालय अपने बजट से प्रदान करेगा जबकि 294.23 करोड़ रुपये निर्भया फंड से दिए जाएंगे.
  • इस योजना का मकसद भारत में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध की घटनाओं को रोकना है. साल 2022 में महिलाओं के ख़िलाफ़ 4,45,256 मामले दर्ज किए गए थे.
  • देश के 13557 पुलिस थानों में महिला हेल्प डेस्क और 827 मानव तस्करी रोधी इकाइयां स्थापित की गई हैं. शेष 3329 पुलिस थानों में भी महिला हेल्प डेस्क स्थापित किये जाएंगे.

प्रधानमंत्री ने महिला किसान ड्रोन केंद्र ‘ड्रोन दीदी योजना’ का शुभारंभ किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 नवंबर को महिला किसान ड्रोन केंद्र ‘ड्रोन दीदी योजना’ का शुभारंभ किया था. इस पहल के अंतर्गत महिला स्‍व-सहायता समूहों को ड्रोन प्रदान किए जाएंगे, ताकि इस प्रौद्योगिकी का उपयोग आजीविका के लिए किया जा सके.

मुख्य बिन्दु

  • इस योजना के तहत 1261 करोड़ रुपये के कुल व्यय के साथ महिलाओं को 15 हजार ड्रोन वितरित किए जाएंगे. महिलाओं को ड्रोन की उडान और इसके उपयोग से संबंधित आवश्‍यक प्रशिक्षण दिया जाएगा.
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चल रहे अभियान को ड्रोन दीदी से अधिक मजबूती मिलेगी. इससे आय के अतिरिक्त साधन उपलब्ध होंगे.
  • इस योजना से किसानों को बहुत ही कम कीमत पर ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक मिल पाएगी. जिसकी मदद से समय, दवा, उर्वरक की बचत होगी. इसके साथ ही खेती में ड्रोन का इस्तेमाल बढने से खेती भी उन्नत होगी.
  • ड्रोन के इस्तेमाल से यूरिया, डीएपी और पेस्टीसाइड का छिड़काव समान ढंग से होगा जिससे शरीर पर दुष्प्रभाव कम होगा और उर्वरक की खपत भी कम हो जाएगी.

प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण अन्‍न योजना को पांच वर्ष के लिए बढाया गया

सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण अन्‍न योजना (PMGKAY)  को 1 जनवरी 2024 से पांच वर्ष के लिए बढा दिया है. प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में 28 नवंबर को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस बारे में फैसला किया गया था.

मुख्य बिन्दु

  • इस योजना के अंतर्गत देश में 81 करोड से अधिक गरीबों को प्रतिमाह पांच किलोग्राम और अंत्‍योदय परिवारों को 35 किलोग्राम अनाज निशुल्क दिया जाता है.
  • कोरोना काल में लॉकडाउन से प्रभावित गरीबों की मदद के लिए इस योजना को शुरू किया गया था.
  • इससे पांच वर्ष तक 11.80 लाख करोड रुपये की अनुमानित लागत से खाद्य और पोषण सुरक्षा दी जाएगी.

पीएम-श्री के अंतर्गत साढ़े चौदह हजार स्कूलों को उन्नत बनाये जाने की घोषणा

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने उभरते भारत के लिए प्रधानमंत्री विद्यालय योजना ‘पीएम-श्री’ (PM-SHRI) के अंतर्गत देश भर में साढ़े चौदह हजार स्कूलों को उन्नत बनाये जाने की घोषणा की है.

मुख्य बिन्दु

  • श्री मोदी ने कहा कि पीएम-श्री विद्यालय देश के मॉडल स्कूल बनेंगे, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की मूल भावना के अनुरूप होंगे. पीएम-श्री विद्यालयों में शिक्षा की आधुनिक और सशक्त नीति अपनायी जाएगी.
  • इन स्कूलों में पढ़ाई के दौरान एक खोज उन्मुखी, सीखने पर केंद्रित शिक्षण के तरीके पर जोर दिया जाएगा. इन स्कूलों में नवीनतम तकनीक, स्मार्ट क्लासरूम, खेल और अन्य सहित आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दिया जाएगा.