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सीपी राधाकृष्णन ने भारत के 15वें उप-राष्ट्रपति के रूप से शपथ ली

सीपी राधाकृष्णन ने 12 सितम्बर को भारत के 15वें उप-राष्ट्रपति (15th Vice-President of India) के रूप से शपथ ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राधाकृष्णन को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में उन्हें पद ओर गोपनीयता  की शपथ दिलाईं.


राधाकृष्णन ने 9 सितम्बर को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में भारत का 15वां उपराष्ट्रपति चुना गया था. भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था जिसके बाद यह पद रिक्त था.

15वें उपराष्ट्रपति के लिए चुनाव

  • भारत के 15वें उपराष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया था जबकि बी सुदर्शन रेड्डी INDIA गठबंधन सहित विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार थे.
  • इस चुनाव में नव निर्वाचित उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अपने प्रतिद्वंद्वी बी सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों के अंतर से हराया.
  • उपराष्ट्रपति चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य, जिनमें मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं, मतदान में हिस्सा लेते हैं.
  • वर्तमान में लोकसभा में 542 सदस्य और राज्यसभा में 239 सदस्य हैं. इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल की कुल संख्या 542+239=781 है और जीत के लिए बहुमत का आंकड़ा 781÷2+1=391 था.
  • इस चुनाव में 767 सांसदों ने वोट डाले, जिसमें से 15 वोट अमान्य घोषित कर दिया गया. वहीं बीजेडी, बीआरएस और शिरोमणि अकाली दल के 12 सांसदों ने मतदान में भाग नहीं लिया.
  • इस चुनाव में सीपी राधाकृष्णन को 452 वोट जबकि सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले. नतीजों का ऐलान राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी ने किया.

भारतीय संविधान में उप-राष्ट्रपति

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 में भारत के उप-राष्ट्रपति होने की बात कही गई है. उप-राष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है. उनका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है.
  • अनुच्छेद 65 के अनुसार, राष्ट्रपति की मृत्यु, इस्तीफे या हटाने की स्थिति में उपराष्ट्रपति उस तारीख तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा जब तक कि नए राष्ट्रपति की नियुक्ति नहीं की जाती.
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67 (क) के अनुसार, उपराष्ट्रपति भारत के राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र दे सकता है.

उपराष्ट्रपति चुनाव

  • संविधान का अनुच्छेद 324 तहत, उपराष्ट्रपति चुनाव भारतीय निर्वाचन आयोग संपन्न कराता है. इसके लिए निर्वाचन आयोग एक निर्वाचन अधिकारी नियुक्त करता है.
  • राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों पदों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से (आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति) होता है. यानी चुनाव जनता की बजाय उनके द्वारा चुने गए जन प्रतिनिधि करते हैं.
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66 में उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया का उल्लेख है. उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य, जिनमें मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं, मतदान में हिस्सा लेते हैं. प्रत्येक मत का मूल्य समान होता है.
  • वहीं राष्ट्रपति के चुनाव में लोक सभा और राज्य सभा के निर्वाचित सदस्य और राज्यों के विधानमंडलों के सदस्यों को भी मतदान का अधिकार होता है. राष्ट्रपति चुनाव में किसी भी सदन के मनोनीत सदस्य को वोट नहीं डाल सकते.
  • राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति चुनाव में किसी भी संदेह या विवाद सामने आने पर संविधान के अनुच्छेद-71 के मुताबिक, फैसले का अधिकार केवल देश की सुप्रीम कोर्ट को है.
  • इस चुनाव में गुप्त मतदान की प्रक्रिया अपनाई जाती है. निर्वाचक मंडल के सदस्य अपनी इच्छा के अनुसार मतदान कर सकते हैं और वे संबंधित पार्टी के व्हिप से बाध्य नहीं होते.

नामांकन एवं पात्रता

  • उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन भरने के लिए उम्मीदवार को कम-से-कम 20 सांसद बतौर प्रस्तावक और 20 सांसद बतौर अनुमोदक की आवश्यकता होती है. 15,000 रुपये जमानत राशि के रूप में जमा कराना अनिवार्य होता है.
  • उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं होना चाहिए.
  • कोई भी भारतीय नागरिक उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार हो सकता है जो 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो और राज्यसभा के सदस्य के रूप में चुनाव लड़ने की योग्यता रखता हो.

सीपी राधाकृष्णन

  • सीपी राधाकृष्णन का पूरा नाम चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन है. उनका जन्म 20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में हुआ था.
  • उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने से पहले वह भारतीय जनता पार्टी के सदस्य थे. वे आरएसएस जैसे संगठनों में सक्रिय रूप से शामिल रहे थे. वे कोयंबतूर से दो बार लोकसभा के लिए चुने गए थे.
  • वह 31 जुलाई 2024 से महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रहे हैं. इससे पहले, उन्होंने 18 फरवरी 2023 से 30 जुलाई 2024 तक झारखंड के राज्यपाल के रूप में कार्य किया. साथ ही, उन्होंने तेलंगाना और पुदुचेरी में भी अतिरिक्त प्रभार संभाला.

अब तक के उपराष्ट्रपति

  1. डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन: 13 मई 1952 से 12 मई 1962
  2. जाकिर हुसैन: 13 मई 1962 से 12 मई 1967
  3. वीवी गिरि: 13 मई 1967 से 3 मई 1969
  4. गोपाल स्वरूप पाठक: 31 अगस्त 1969 से 30 अगस्त 1974
  5. बीडी जत्ती: 31 अगस्त 1974 से 30 अगस्त 1979
  6. मोहम्मद हिदायतुल्ला: 31 अगस्त 1979 से 30 अगस्त 1984
  7. आर वेंकटरमण: 31 अगस्त 1984 से 24 जुलाई 1987
  8. शंकर दयाल शर्मा: 3 सितम्बर 1987 से 24 जुलाई 1992
  9. केआर नारायणन: 31 अगस्त 1992 से 24 जुलाई 1997
  10. कृष्णकांत: 21 अगस्त 1997 से 27 जुलाई 2002
  11. भैरों सिंह शेखावत: 19 अगस्त 2002 से 21 जुलाई 2007
  12. मोहम्मद हामिद अंसारी: 11 अगस्त 2007 से 19 जुलाई 2017
  13. एम वेंकैया नायडू: 11 अगस्त 2017 से 10 अगस्त 2022
  14. जगदीप धनखड़: 11 अगस्त 2017 से 21 जुलाई 2025
  15. सीपी राधाकृष्णन: 12 सितम्बर से वर्तमान

भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से त्यागपत्र दिया

भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया. उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को सौंपा. उन्होंने त्यागपत्र का कारण, स्‍वास्‍थ्‍य प्राथमिकता और चिकित्‍सा परामर्श के पालन को बताया है.

त्यागपत्र देने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति

  • वीवी गिरि और भैरों सिंह शेखावत के बाद जगदीप धनखड़ अपने कार्यकाल के दौरान त्यागपत्र देने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति हैं.
  • 10वें उपराष्ट्रपति कृष्णकांत एकमात्र ऐसे उपराष्ट्रपति हैं जिनका कार्यकाल के दौरान निधन (27 अगस्त 2002) हो गया था.
  • आर वेंकटरमन, शंकर दयाल शर्मा और केआर नारायणन ने भारत के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र दे दिया था.

राज्य सभा के सभापति

  • अनुच्छेद-64 के तहत उप-राष्ट्रपति भारतीय संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं. इसलिए राज्य सभा के उप-सभापति, नए उप-राष्ट्रपति के निर्वाचित होने तक राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी होंगे.

जगदीप धनखड़: एक दृष्टि

  • जगदीप धनखड़ मूल रूप से राजस्थान के झुंझुनू जिले में हुआ था. वे पेशे से एक वकील हैं, बाद में राजनीति में आ गए. वह भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे है.
  • वह 1989 में झुंझुनू संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सदस्य चुने गए थे. 1993 में किशनगढ़ विधानसभा सीट से राजस्थान विधानसभा सदस्य चुने गए.
  • उन्होंने 1990 में केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया. वे 2019-2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे.
  • जगदीप धनखड़ ने 11 अगस्त 2022 को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी.

भारतीय संविधान में उप-राष्ट्रपति

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 में भारत के उप-राष्ट्रपति होने की बात कही गई है. उप-राष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है. उनका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है.
  • अनुच्छेद 65 के अनुसार, राष्ट्रपति की मृत्यु, इस्तीफे या हटाने की स्थिति में उपराष्ट्रपति उस तारीख तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा जब तक कि नए राष्ट्रपति की नियुक्ति नहीं की जाती.
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67 (क) के अनुसार, उपराष्ट्रपति भारत के राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र दे सकता है.

उपराष्ट्रपति चुनाव

  • संविधान का अनुच्छेद 324 तहत, उपराष्ट्रपति चुनाव भारतीय निर्वाचन आयोग संपन्न कराता है. इसके लिए निर्वाचन आयोग एक निर्वाचन अधिकारी नियुक्त करता है.
  • राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों पदों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से (आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति) होता है. यानी चुनाव जनता की बजाय उनके द्वारा चुने गए जन प्रतिनिधि करते हैं.
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66 में उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया का उल्लेख है. उपराष्ट्रपति चुनाव में लोक सभा और राज्य सभा के सदस्य, जिनमें मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं, मतदान में हिस्सा लेते हैं.
  • वहीं राष्ट्रपति के चुनाव में लोक सभा और राज्य सभा के निर्वाचित सदस्य और राज्यों के विधानमंडलों के सदस्यों को भी मतदान का अधिकार होता है. राष्ट्रपति चुनाव में किसी भी सदन के मनोनीत सदस्य को वोट नहीं डाल सकते.
  • राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति चुनाव में किसी भी संदेह या विवाद सामने आने पर संविधान के अनुच्छेद-71 के मुताबिक, फैसले का अधिकार केवल देश की सुप्रीम कोर्ट को है.
  • उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन भरने के लिए उम्मीदवार को कम-से-कम 20 सांसद बतौर प्रस्तावक और 20 सांसद बतौर समर्थक दिखाने की शर्त पूरी करनी होती है. उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं होना चाहिए.

नए उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए समय-सीमा

  • संविधान में भारत के कार्यवाहक उपराष्ट्रपति पद का कोई उल्लेख नहीं है. अतः नए उपराष्ट्रपति के निर्वाचित होने तक यह पद रिक्त रहेगा.
  • संविधान के अनुच्छेद 68 (ख) के अनुसार मृत्यु, त्यागपत्र, पदच्युति या अन्य किसी कारण से पद रिक्त होने की स्थिति में, नए उपराष्ट्रपति के लिए चुनाव यथाशीघ्र कराया जाएगा.
  • अतः संविधान में नए उप-राष्ट्रपति के चुनाव के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है, यदि यह पद किसी कारण से रिक्त हो जाता है.

राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल और दरबार हॉल के नाम बदले गए

राष्ट्रपति भवन के ‘दरबार हॉल’ और ‘अशोक हॉल’ के नाम को नाम बदल दिया गया है. अब राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल को ‘गणतंत्र मंडप’ के नाम से जाना जाएगा जबकि अशोक हॉल का नाम बदलकर ‘अशोक मंडप’ किया गया है.

दरबार हॉल (गणतंत्र मंडप) में क्या खास

राष्ट्रपति भवन का सर्वाधिक भव्य कक्ष दरबार हॉल ही है, जिसका नाम अब गणतंत्र मंडप कर दिया गया है. दरबार हॉल को पहले थ्रोन रूम के नाम से जाना जाता था और जहां पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत की प्रथम सरकार ने 15 अगस्त, 1947 को शपथ ली थी.

अशोक हॉल (अशोक मंडप) की खासियत

अशोक मंडप कलात्मक रूप से निर्मित विशाल यह स्थान अब महत्त्वपूर्ण समारोहिक आयोजनों, विदेशों के मिशनों के प्रमुखों के पहचान-पत्र प्रस्तुत करने के लिए प्रयोग किया जाता है जिसे पहले स्टेट बॉल रूम के लिए उपयोग में लाया जाता था.

राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan): एक दृष्टि

  • ब्रिटिश वास्तुकार एडवर्ड लुटियन को भारत की नई राजधानी और वायसराय के लिए एक कार्यालय/निवास स्थान डिजाइन करने का काम सौंपा गया था.
  • वायसराय ब्रिटिश सम्राट का भारत में प्रतिनिधि होता था और ब्रिटिश सम्राट की ओर से भारत पर शासन करता था.
  • वायसराय हाउस का निर्माण वायसराय लॉर्ड हार्डिंग (1910-1916) के कार्यकाल में शुरू हुआ और 1929 में वायसराय लॉर्ड इरविन के कार्यकाल में पूरा हुआ. लॉर्ड इरविन वायसराय हाउस में रहने वाले पहले वायसराय थे.
  • आजादी के बाद 15 अगस्त 1947 को वायसराय हाउस का नाम बदलकर गवर्नमेंट हाउस कर दिया गया.
  • भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के कार्यकाल के दौरान गवर्नमेंट हाउस का नाम बदलकर राष्ट्रपति भवन कर दिया गया.
  • मुख्य भवन 5 एकड़ के क्षेत्र में फैला है और इसमें चार मंजिलों में 340 कमरे हैं. राष्ट्रपति भवन का प्रसिद्ध मुगल गार्डन 15 एकड़ क्षेत्र में है.

द्रौपदी मुर्मू नेलडाकू विमान में उडान भरने वाली चौथी राष्‍ट्रपति बनी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 8 अप्रैल को असम के तेजपुर वायुसेना अड्डे से सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थीं. भारतीय राष्ट्रपति तीनों सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर हैं.

मुख्य बिन्दु

  • यह किसी लड़ाकू विमान की उनकी पहली उड़ान थी. मुर्मू पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल के बाद किसी लड़ाकू विमान में उड़ान भरने वाली तीसरी भारतीय राष्ट्रपति हैं. हालांकि, उनके पूर्ववर्तियों ने पुणे वायुसेना अड्डे से उड़ान भरी थी.
  • राष्ट्रपति मुर्मू वह असम की तीन दिन की यात्रा पर थीं. असम के तेजपुर वायुसेना अड्डे से उनके साथ ग्रुप कैप्टन नवीन कुमार तिवारी ने सुखोई-30 एमकेआई में उड़ान भरी थी.

राष्ट्रपति भवन के उद्यान उत्सव 2023 की शुरुआत

राष्ट्रपति भवन के उद्यान उत्सव 2023 की शुरुआत 29 जनवरी को हुई थी. इसका उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था. इस बार यह उद्यान लगभग दो महीने के लिए खुला रहेगा.

इस उद्यान में ट्यूलिप के फूलों की समय-समय पर खिलने वाली 12 अनूठी प्रजातियों के साथ कई अन्य आकर्षण भी यहां देखे जा सकेंगे.

स्वतंत्रता के 75 वर्ष के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे आजादी का अमृत उत्सव के अंतर्गत राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन के इस उद्यान को अमृत उद्यान का नाम दिया है.

जगदीप धनखड़ ने भारत के 14वें उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली

नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 11 अगस्त को देश के 14वें उप-राष्ट्रपति (14th Vice-President of India) के रूप मे शपथ ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें शपथ दिलाईं. उप-राष्ट्रपति के रूप में श्री एम वेंकैया नायडु का कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त हो गया था. 6 अगस्त को उप-राष्ट्रपति पद के चुनाव में जगदीप धनखड़, भारत के 14वें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे.

  • इस चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया था जबकि मार्गरेट अल्वा विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार थीं.
  • नव निर्वाचित उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मार्गरेट अल्वा को 346 मतों के अंतर से हराया था. धनखड़ को  कुल डाले गए 725 में से 528 वोट मिले. वहीं, अल्वा को 182 वोट मिले. जबकि 15 वोट अमान्य रहे.
  • जगदीप धनखड़ का जन्म राजस्थान में हुआ था. वह भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे है. इससे पहले वह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे. 1993 से 1998 तक किशनगढ़ (राजस्थान) से विधायक चुने गए थे.

भारतीय संविधान में उपराष्ट्रपति

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 में भारत के उपराष्ट्रपति होने की बात कही गई है. अनुच्छेद 64 के अनुसार उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति (अध्यक्ष) होता है.
  • अनुच्छेद 65 के अनुसार, राष्ट्रपति की मृत्यु, इस्तीफे या हटाने की स्थिति में उपराष्ट्रपति उस तारीख तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा जब तक कि नए राष्ट्रपति की नियुक्ति नहीं की जाती.

उपराष्ट्रपति चुनाव

  • उपराष्ट्रपति चुनाव भारतीय निर्वाचन आयोग संपन्न कराता है. इसके लिए निर्वाचन आयोग एक निर्वाचन अधिकारी नियुक्त करता है.
  • राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों पदों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से (आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति) होता है. यानी चुनाव जनता की बजाय उनके द्वारा चुने गए जन प्रतिनिधि करते हैं.
  • उपराष्ट्रपति चुनाव में लोक सभा और राज्य सभा के सदस्य, जिनमें मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं, मतदान में हिस्सा लेते हैं.
  • वहीं राष्ट्रपति के चुनाव में लोक सभा और राज्य सभा के निर्वाचित सदस्य और राज्यों के विधानमंडलों के सदस्यों को भी मतदान का अधिकार होता है. राष्ट्रपति चुनाव में किसी भी सदन के मनोनीत सदस्य को वोट नहीं डाल सकते.
  • राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति चुनाव में किसी भी संदेह या विवाद सामने आने पर संविधान के अनुच्छेद-71 के मुताबिक, फैसले का अधिकार केवल देश की सुप्रीम कोर्ट को है.
  • उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन भरने के लिए उम्मीदवार को कम-से-कम 20 सांसद बतौर प्रस्तावक और 20 सांसद बतौर समर्थक दिखाने की शर्त पूरी करनी होती है. उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं होना चाहिए.

अब तक के उपराष्ट्रपति

  1. डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन 13 मई 1952 से 12 मई 1962
  2. जाकिर हुसैन 13 मई 1962 से 12 मई 1967
  3. वीवी गिरि 13 मई 1967 से 3 मई 1969
  4. गोपाल स्वरूप पाठक 31 अगस्त 1969 से 30 अगस्त 1974
  5. बीडी जत्ती 31 अगस्त 1974 से 30 अगस्त 1979
  6. मोहम्मद हिदायतुल्ला 31 अगस्त 1979 से 30 अगस्त 1984
  7. आर वेंकटरमण 31 अगस्त 1984 से 24 जुलाई 1987
  8. शंकर दयाल शर्मा 3 सितम्बर 1987 से 24 जुलाई 1992
  9. केआर नारायणन 31 अगस्त 1992 से 24 जुलाई 1997
  10. कृष्णकांत 21 अगस्त 1997 से 27 जुलाई 2002
  11. भैरों सिंह शेखावत 19 अगस्त 2002 से 21 जुलाई 2007
  12. मोहम्मद हामिद अंसारी 11 अगस्त 2007 से 19 जुलाई 2017
  13. एम वेंकैया नायडू 11 अगस्त 2017 से 10 अगस्त 2022
  14. जगदीप धनखड़ 11 अगस्त 2017 से वर्तमान

द्रौपदी मुर्मू ने भारत की 15वीं राष्ट्रपति के रूप से शपथ ली

नवनिर्वाचित राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 जुलाई को भारत की 15वीं राष्‍ट्रपति पद की शपथ ग्रहण की. भारत के प्रधान न्‍यायाधीश एनवी रमना ने श्रीमती मुर्मू को शपथ दिलाये. शपथग्रहण समारोह संसद के केन्‍द्रीय कक्ष में आयोजित किया गया था.

21 जुलाई को आए राष्ट्रपति चुनाव परिणाम में राष्ट्रपति मुर्मू ने यशवंत सिन्हा को पराजित किया था. राष्ट्रपति चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने द्रौपदी मुर्मू को जबकि विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से यशवंत सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था.

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू: एक दृष्टि

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति पद पर आसीन होने वाली पहली आदिवासी और दूसरी महिला हैं. 64 वर्षीय श्रीमती मूर्मु सबसे कम आयु की राष्ट्रपति हैं.
  • वे देश की पहली ऐसी राष्ट्रपति हैं, जिनका जन्म स्वतंत्रता के बाद हुआ है. उनका जन्म 20 जून, 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले में हुआ था.
  • श्रीमती मूर्मु ने वर्ष 1997 में पहली बार राजनीति में प्रवेश किया जब वे ओडिसा में रायरंगपुर अधिसूचित क्षेत्र परिषद की पार्षद चुनी गईं.
  • श्रीमती मूर्मु वर्ष 2000 से 2009 तक रायरंगपुर विधान सभा क्षेत्र से दो बार विधायक भी चुनी गईं. उन्होंने ओडि़सा सरकार में वाणिज्य, परिवहन, मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास मंत्री का पदभार संभाला.
  • वह झारखंड की पहली महिला राज्यपाल थीं. साथ ही किसी भी राज्य की राज्यपाल बनने वाली पहली आदिवासी नेता बनीं.

राष्ट्रपति चुनाव से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी…»

द्रौपदी मुर्मू भारत की 15वीं राष्ट्रपति राष्ट्रपति निर्वाचित

द्रौपदी मुर्मू भारत की 15वीं राष्ट्रपति राष्ट्रपति निर्वाचित हुई हैं. 21 जुलाई को आए राष्ट्रपति चुनाव परिणाम में उन्होंने यशवंत सिन्हा को पराजित कर निर्वाचित हुई. वह 25 जुलाई को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी. प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनवी रमना संसद के केन्द्रीय कक्ष में उन्हें राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाएंगे.

  • राष्ट्रपति चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने द्रौपदी मुर्मू को जबकि विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से यशवंत सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था.
  • इस चुनाव में द्रौपदी मुर्मू को 64 प्रतिशत (कुल 6,76,803 मत) और यशवंत सिन्हा को 36 प्रतिशत (कुल 3,80,177 मत) वोट मिले. मतगणना के बाद निर्वाचन अधिकारी पीसी मोदी ने मुर्मू के 64.03 फीसदी मतों के साथ चुनाव जीतने की आधिकारिक घोषणा की.

देश की 15वीं राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू

  • द्रोपदी मुर्मू, झारखंड की पहली महिला राज्यपाल थीं. 64 वर्षीय द्रौपदी मुर्मू देश की सबसे कम उम्र की राष्ट्रपति होंगी.
  • वह भारत की पहली राष्ट्रपति होंगी जिनका जन्म स्वतंत्रता के बाद हुआ है. उनका जन्म 20 जून, 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले में हुआ था.
  • मुर्मू आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली देश की पहली महिला राष्ट्रपति हैं.

14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

  • देश के 14वें राष्ट्रपति के तौर पर 25 जुलाई 2017 को शपथ लेने वाले रामनाथ कोविंद पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद 24 जुलाई को राष्ट्रपति भवन से विदाई लेंगे.
  • उनका जन्म उत्तर प्रदेश में कानपुर जिले के गांव परौंख में सामान्य परिवार में हुआ था. वह देश के दूसरे दलित राष्ट्रपति हैं. केआर नारायण देश के प्रथम दलित राष्ट्रपति थे.
  • भारत के राष्ट्रपति के रूप में, कोविंद को छह देशों – मेडागास्कर, इक्वेटोरियल गिनी, एस्वातीनी, क्रोएशिया, बोलीविया और गिनी गणराज्य से सर्वोच्च राजकीय सम्मान प्राप्त हुए.
  • कोविंद ने भारत के सशस्त्र बलों के सुप्रीम कमांडर के तौर पर मई 2018 में लद्दाख के सियाचिन में दुनिया के सबसे ऊंचे रण ‘कुमार पोस्ट’ की ऐतिहासिक यात्रा की थी.

सोलहवें राष्ट्रपति के चुनाव की घोषणा, राष्ट्रपति का चुनाव से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने भारत के सोलहवें राष्ट्रपति के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है. मुख्‍य निर्वाचन आयुक्‍त राजीव कुमार ने इसकी घोषणा 9 जून को की। घोषणा के तहत मतदान 18 जुलाई को कराया जाएगा. राष्‍ट्रपति राम नाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्‍त हो रहा है.

राष्‍ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल करता है, जिसमें लोकसभा, राज्‍यसभा और राज्‍य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्‍य शामिल होते हैं. इसमें दिल्ली और पुद्दुचेरी की विधानसभाओं के सदस्य भी शामिल हैं. राष्ट्रपति का चुनाव से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी…»

कपिलदेव त्रिपाठी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नये सचिव नियुक्त किये गये

कपिलदेव त्रिपाठी को 20 अप्रैल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का सचिव नियुक्त किया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने कपिलदेव त्रिपाठी की अनुबंध के आधार पर नियुक्ति को मंजूरी दी गयी. उनका कार्यकाल राष्ट्रपति कोविंद के कार्यकाल तक होगा.

कपिलदेव त्रिपाठी, संजय कोठारी का स्थान लेंगे, जिन्हें केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) का प्रमुख बनाया गया है. संजय कोठारी की राष्ट्रपति के सचिव के रूप में नियुक्ति जुलाई 2017 में हुई थी.

62 वर्षीय कपिलदेव त्रिपाठी केंद्र सरकार में विभिन्न पदों पर सेवाएं दे चुके हैं. वह जून 2018 में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए थे. वह केंद्रीय सतर्कता आयोग में सचिव तथा भारी उद्योग व सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय में संयुक्त सचिव रह चुके हैं.

मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति

मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet ACC) की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं. गृहमंत्री इस समिति के सदस्य होते हैं. कैबिनेट सचिवालय, सार्वजनिक उपक्रमों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सभी उच्च स्तर की नियुक्तियों और सेवा विस्तार का फैसला मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ही करती है.