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कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर 8.1% ब्याज दर को मंजूरी

केंद्र सरकार ने 2021-22 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि जमा (EPF) पर 8.1% ब्याज दर को मंजूरी दी है. EFPO ने मार्च में 2021-22 के वित्तीय वर्ष के लिए कर्मचारियों के PF फंड पर ब्याज दर 8.5% से घटाकर 8.1% निर्धारित किया था. यह 1977-78 के बाद से कर्मचारियों द्वारा अपने रिटायरमेंट फंड में जमा की गई सबसे कम ब्याज दर है.

EFPO अपने एनुअल एक्रुअल्स का 85% सरकारी सिक्योरिटीज और बांड्स सहित डेबिट उपकरणों में और 15% ईटीएफ के माध्यम से इक्विटी में निवेश करता है. डेबिट और इक्विटी दोनों से होने वाली आय का उपयोग ब्याज भुगतान की गणना के लिए किया जाता है.

EPFO के नियम

  • एक कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता को जोड़कर जो राशि बनती है, उसका 12% हिस्सा उसके पीएफ खाते में जमा किया जाता है. इसमें कंपनी का भी 12% कंट्रीब्यूशन होता है जिसमें में से 3.67% कर्मचारी के पीएफ अकाउंट (EPF) में जाता है और बाकी के 8.33% कर्मचारी पेंशन स्कीम (EPS) में जाता है.
  • कंपनी का योगदान दो हिस्सों में बंटा होता है, एक हिस्सा पेंशन फंड यानी ईपीएस में जाता एवं दूसरा हिस्सा ईपीएफ में जाता है.

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EFPO): एक दृष्टि

EFPO भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है. यह देश में भविष्य निधि के विनियमन और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है. EFPO सालाना आधार पर EPF योजना के लिए ब्याज दर तय करता है.

अर्थव्यवस्था की वृद्धि से संबंधित आंकड़े जारी, 2021-22 में वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत

केंद्र सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय ने भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि से संबंधित आंकड़े 31 मई को जारी किये थे. इन आंकड़े के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत रही थी. और इस प्रकार भारत दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन गई है.

अर्थव्यवस्था (GDP) वृद्धि: मुख्य बिंदु

  • वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत रही थी. यह सरकार की तरफ से जारी 8.9 प्रतिशत के विकास दर के अनुमान से कम है. वित्त वर्ष 2020-21 में विकास दर -6.6 प्रतिशत रही थी.
  • वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में विकास दर 4.1 प्रतिशत रही. कोरोना की तीसरी लहर और यूक्रेन क्राइसिस का असर मार्च तिमाही में जीडीपी वृद्धि पर पड़ा है.
  • चौथी तिमाही की विकास दर तीसरी तिमाही की 5.4 प्रतिशत विकास दर से कम है, लेकिन चौथी तिमाही में कुल जीडीपी 40.78 लाख करोड़ रहा जबकि तीसरी तिमाही (अक्तूबर-दिसंबर) में जीडीपी 38.21 लाख करोड़ रुपये था. वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही का जीडीपी 39.18 लाख करोड़ रुपये था.
  • वित्त वर्ष 2021-22 में भारत का जीडीपी 1,47,35,515 करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्त वर्ष 2020-21 में देश का जीडीपी 1,35,58,473 करोड़ रुपये तो वित्त वर्ष 2019-20 में 1,45,15958 करोड़ रुपये का था.
  • वित्त वर्ष 21-22 में कर संग्रह में मजबूती और खर्च पर नियंत्रण की वजह से राजकोषीय घाटा जीडीपी का 6.7 प्रतिशत रहा, जबकि सरकार ने राजकोषीय घाटा जीडीपी के 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था.

वित्त वर्ष 2021-22 में पिछले वर्ष के मुकाबले क्षेत्रवार वृद्धि

  1. कृषि व संबंधित सेक्टर: 3 प्रतिशत
  2. खनन (माइनिंग): 11.5 प्रतिशत
  3. विनिर्माण (मैन्यूफैक्चरिंग): 9.9 प्रतिशत
  4. बिजली, पानी आपूर्ति, गैस व अन्य सेवा: 7.5 प्रतिशत
  5. कंस्ट्रक्शन: 11.5 प्रतिशत
  6. ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट, कम्यूनिकेशंस: 11.1 प्रतिशत
  7. फाइनेंशियल, रियल एस्टेट व अन्य प्रोफेशनल्स: 4.2 प्रतिशत
  8. रक्षा, लोक प्रशासन व अन्य: 12.6 प्रतिशत

सरकार की वित्तीय स्थिति

वित्त वर्ष 2021-22 में सरकार की प्राप्ति 22,07,634 करोड़ रुपये जबकि सरकार का कुल खर्च 37,94,171 करोड़ रुपये रहा. वित्त वर्ष 21-22 में 8,05,390 करोड़ रुपये कर्ज के ब्याज चुकाने में खर्च हुए.

चीन को पीछे छोड़ अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना

वाणिज्य मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2021-22 में हुए द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़े हाल ही में जारी किये थे. इन आंकड़ों के अनुसार अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया है. भारत के साथ व्यापार के मामले में अमेरिका ने चीन को पीछे छोड़ा है.

अमेरिका के साथ व्यापार: मुख्य बिंदु

  • 2021-22 में अमेरिका और भारत का द्वपिक्षीय व्यापार बढ़कर 119.42 अरब डॉलर पर पहुंच गया. 2020-21 में यह आंकड़ा 80.51 अरब डॉलर का था.
  • 2021-22 में भारत का अमेरिका को निर्यात बढ़कर 76.11 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो 2020-21 वित्त वर्ष में 51.62 अरब डॉलर रहा था.
  • 2021-22 में अमेरिका से भारत का आयात बढ़कर 43.31 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो 2020-21 वित्त वर्ष में 29 अरब डॉलर था.
  • चीन के साथ व्यापार: मुख्य बिंदु
  • 2021-22 में भारत-चीन द्वपिक्षीय व्यापार 115.42 अरब डॉलर रहा, जो 2020-21 में 86.4 अरब डॉलर था.
  • चीन को भारत का द्वारा किया गया निर्यात मामूली बढ़कर 21.25 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो 2020-21 में 21.18 अरब डॉलर रहा था.
  • इस दौरान चीन से भारत का आयात बढ़कर 94.16 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो 2020-21 में 65.21 अरब डॉलर पर था.
  • वित्त वर्ष के दौरान भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 72.91 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो 2020-21 में 44 अरब डॉलर रहा था.

UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार

2021-22 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) 72.9 अरब डालर के साथ भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था. इसके बाद सऊदी अरब (42.85 अरब डॉलर) चौथे, इराक (34.33 अरब डॉलर) पांचवें और सिंगापुर (30 अरब डॉलर) छठे सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार थे.

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम को 2025-26 तक जारी रखने की मंजूरी

सरकार ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) को 2025-26 तक जारी रखने की मंजूरी दी है. अब यह कार्यक्रम पन्द्रहवें वित्त आयोग की अवधि वर्ष 2021-22 से वर्ष 2025-26 तक जारी रहेगा. इसके लिए लगभग 13.54 हजार करोड रुपये का परिव्यय स्वीकृत किया गया है.

सरकार ने इस योजना को संशोधित करने का निर्णय लिया है. इसके अनुसार विनिर्माण इकाइयों के लिए अधिकतम परियोजना लागत 25 लाख डॉलर से बढ़ाकर 50 लाख डॉलर और सेवा इकाइयों के लिए 10 लाख डॉलर से बढ़ाकर 20 लाख डॉलर कर दी है.

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम: एक दृष्टि

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय इस कार्यक्रम को लागू कर रहा है. इसका उद्देश्य गैर-कृषि क्षेत्र में छोटे उद्यम लगाकर बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना है.

वर्ष 2008-09 में यह कार्यक्रम लागू होने के बाद से 7.80 लाख सूक्ष्म उद्यमों को 20 हजार करोड रुपये की सब्सिडी दी गई है. इससे लगभग 64 लाख युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं.

वित्त वर्ष 2021-22 में भारत में 83.57 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ

वित्त वर्ष 2021-22 में भारत में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 83.57 अरब डॉलर पर पहुंच गया. यह पिछले वित्त वर्ष की अपेक्षा दो प्रतिशत अधिक है. इस दौरान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) इक्विटी प्रवाह 1 प्रतिशत घटकर 58.77 अरब डॉलर रहा.

2021-22 में FDI: मुख्य बिंदु

  • विभिन्न निवेशक देशों में सिंगापुर 15.87 अरब डॉलर के निवेश के साथ शीर्ष पर रहा. इसके बाद अमेरिका (10.55 डॉलर) और मॉरीशस (9.4 डॉलर) का स्थान है.
  • कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर क्षेत्र में बीते वित्त वर्ष के दौरान 14.5 अरब डॉलर की सबसे अधिक FDI आया. इसके बाद 7.1 अरब डॉलर के साथ सेवा क्षेत्र और ऑटोमोबाइल उद्योग का स्थान है. 2020-21 की तुलना में विनिर्माण क्षेत्रों में FDI प्रवाह में 76% की वृद्धि हुई.
  • कर्नाटक कुल FDI  प्रवाह में 38% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष प्राप्तकर्ता राज्य है, इसके बाद महाराष्ट्र (26%) और दिल्ली (14%) है.

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: GST परिषद की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं

वास्तु एवं सेवा कर (GST)  परिषद और केंद्र-राज्य संबंध के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई को एक ऐतिहासिक फैसला दिया. जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि GST परिषद की सिफारिशें केंद्र और राज्यों के लिए बाध्यकारी नहीं हैं. कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील को अस्वीकार कर दिया कि GST परिषद की सिफारिशें विधायिका और कार्यपालिका के लिए बाध्यकारी हैं.

न्यायालय ने गुजरात हाई कोर्ट के एक फैसले को बरकरार रखते हुए यह निर्णय दिया. दरअसल, हाई कोर्ट ने फैसला दिया था कि समुद्री माल ढुलाई पर एकीकृत जीएसटी असंवैधानिक है.

मुख्य बिंदु

  • कोर्ट ने कहा कि GST परिषद सिर्फ अप्रत्यक्ष कर प्रणाली तक सीमित एक संवैधानिक निकाय नहीं है, बल्कि संघवाद और लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु भी है.
  • सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के पास GST पर कानून बनाने की शक्तियां हैं लेकिन परिषद को एक व्यावहारिक समाधान प्राप्त करने के लिए सामंजस्यपूर्ण तरीके से काम करना चाहिए.
  • न्यायालय कहा कि अनुच्छेद 246A के मुताबिक संसद और राज्य विधायिका के पास कराधान के मामलों पर कानून बनाने की एक समान शक्तियां हैं. वहीं अनुच्छेद 279 कहता है कि केंद्र और राज्य एक-दूसरे से स्वतंत्र रहते हुए काम नहीं कर सकते.

जीएसटी परिषद: एक दृष्टि

  • देश में GST लागू करने के लिए भारतीय संविधान में 101वां संशोधन (122वां संशोधन विधेयक) किया गया था. GST और जीएसटी परिषद से संबंधित प्रावधान अनुच्छेद 279-A में दिए गये हैं. इस अनुच्छेद के अनुसार जीएसटी महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र और राज्यों के लिए सिफारिशें करेगा.
  • देश के वित्त मंत्री को जीएसटी परिषद के पदेन अध्यक्ष होते हैं. इस परिषद में सभी राज्य और संघ शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि होते हैं. GST परिषद में केंद्र का एक तिहाई मत होता है. जबकि दो तिहाई मत राज्यों का होता है. किसी भी सहमति पर पहुंचने के लिए तीन चौथाई बहुमत जरूरी होता है.

फाइबर उत्पादकता में सुधार हेतु भारतीय कपास परिषद का गठन किया गया

केंद्रीय मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भारतीय कपास परिषद के गठन की मंजूरी दे है. प्रसिद्ध वयोवृद्ध कपास व्यापारी श्री सुरेश भाई कोटक को परिषद् का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.

  • इस परिषद में वस्त्र मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारतीय कपास निगम और कपास अनुसंधान संस्थान का प्रतिनिधित्व रहेगा.
  • प्रस्तावित परिषद की पहली बैठक 28 मई 2022 को निर्धारित की गई है. परिषद इस क्षेत्र में ठोस सुधार लाने के लिए चर्चा, विचार-विमर्श और एक मजबूत कार्य योजना तैयार करेगी.

वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान भारत में कच्चे तेल के उत्पादन में 2.67 प्रतिशत की गिरावट

वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान भारत में कच्चे तेल के उत्पादन में 2.67 प्रतिशत की गिरावट आई है. पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2021-22 में कच्चे तेल का उत्पादन 296.9 लाख टन रहा, जो इससे पिछले वित्त वर्ष के 305 लाख टन के मुकाबले 2.63 प्रतिशत कम है. 80 फीसदी से ज्यादा कच्चे तेल का आयात करता है.

मुख्य बिंदु

  • मंत्रालय ने बीते वित्त वर्ष के दौरान 336.1 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य तय किया था, जिसके मुकाबले वास्तविक उत्पादन 11.67 प्रतिशत कम था.
  • पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत में कच्चे तेल का उत्पादन घटा है. यह आंकड़ा 2017-18 में 357 लाख टन, 2018-19 में 342 लाख टन, 2019-20 में 322 लाख टन और 2020-21 में 305 लाख टन तक गिर गया.
  • इस कमी की प्रमुख वजह कुछ तेल भंडार की उम्र बढ़ना है, जहां प्राकृतिक उत्पादन में गिरावट आई है. निकासी दर बढ़ाने के लिए तकनीक में निवेश करके उत्पादन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है.
  • ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) ने वित्त वर्ष 2021-22 में 194.5 लाख टन कच्चे तेल का उत्पादन किया, जो लक्ष्य से 13.82 प्रतिशत कम है.
प्राकृतिक गैस के उत्पादन में 18.66 प्रतिशत की वृद्धि

हालांकि, वित्त वर्ष 2021-22 में प्राकृतिक गैस का उत्पादन 18.66 प्रतिशत बढ़कर 34 अरब घन मीटर हो गया. इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसकी सहयोगी बीपी पीएलसी द्वारा नए क्षेत्रों से उत्पादन शुरू करने का विशेष योगदान रहा. यह उत्पादन पूर्वी अपतटीय KG-D6 ब्लॉक में शुरू किया गया है.

ऑयल इंडिया ने असम में देश का पहला शुद्ध हरित हाइड्रोजन संयंत्र चालू किया

सरकारी स्वामित्व वाले तेल अन्वेषक कंपनी ने ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने असम में 99.999 प्रतिशत शुद्ध हरित हाइड्रोजन के निर्माण में सक्षम एक पायलट संयंत्र शुरू किया है. यह देश में इस तरह का पहला संयंत्र है.

मुख्य बिंदु

  • इसकी उत्पादन क्षमता प्रति दिन 10 किलोग्राम है जिसे बढ़ाकर 30 किलोग्राम प्रति दिन किया जाएगा.. OIL ने इस पायलट संयंत्र को अपने जोरहाट पंप स्टेशन पर तीन महीने के रिकॉर्ड समय में चालू किया है.
  • हरित हाइड्रोजन का उत्पादन मौजूदा 500 किलोवॉट सौर संयंत्र द्वारा 100 किलोवॉट अनियन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (AEM) इलेक्ट्रोलाइजर संरचना का उपयोग करके उत्पन्न बिजली से किया जाएगा. AEM प्रौद्योगिकी का देश में पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है.

भारत ने पहली बार सेवा निर्यात में 250 अरब डॉलर का लक्ष्‍य प्राप्‍त किया

भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 में सेवा निर्यात में 250 अरब डॉलर का लक्ष्‍य प्राप्‍त किया है. यह पिछले वित्त वर्ष 2020-21 की तुलना में 21.31 प्रतिशत अधिक है. भारत ने पहली बार सेवा निर्यात में 250 अरब डॉलर का लक्ष्‍य प्राप्‍त किया है.

मार्च 2022 में सेवा निर्यात लगभग 22.5 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष मार्च 2021 की तुलना में 8.31 प्रतिशत अधिक है. वर्ष 2021-22 में भारत का कुल वस्‍तु और सेवा निर्यात रिकॉर्ड करीब 670 अरब डॉलर रहा.

भारत ने कोविड वैश्विक महामारी के कारण विश्‍वव्‍यापी आर्थिक मंदी और यूरोप में हाल के घटनाक्रम के बावजूद निर्यात के ऊंचे लक्ष्‍य हासिल किये हैं.

2021-22 में भारत में सोने के आयात में 33.34 प्रतिशत की वृद्धि

पिछले वित्त वर्ष 2021-22 में भारत में सोने के आयात में 33.34 प्रतिशत बढ़कर 46.14 अरब डॉलर पर पहुंच गया. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 में भारत का सोने का आयात 34.62 अरब डॉलर रहा था. लेकिन वित्त वर्ष 2021-22 में सोने का आयात बढ़ने से देश का व्यापार घाटा बढ़कर 192.41 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो एक साल पहले 102.62 अरब डॉलर रहा था.

मुख्य बिंदु

  • चीन के बाद भारत सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है. भारत में सोने का आयात मुख्य रूप से आभूषण उद्योग की मांग को पूरा करने के लिए किया जाता है.
  • वित्त वर्ष 2021-22 में रत्न एवं आभूषणों का निर्यात करीब 50 प्रतिशत बढ़कर 39 अरब डॉलर पर पहुंच गया.
  • रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में देश का चालू खाते का घाटा बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 2.7 प्रतिशत या 23 अरब डॉलर पर पहुंच गया.
  • अप्रैल, 2021 से फरवरी, 2022 के दौरान मात्रा के लिहाज से सोने का आयात 842.28 टन रहा.
  • भारत ज्यादातर सोना, स्विट्जरलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण अफ्रीका, पेरू और घाना से आयात करता है.

भारत का कृषि निर्यात 50 बिलियन डॉलर, अब तक के उच्चतम स्तर पर

वाणिज्यिक आसूचना एवं सांख्यिकी महानिदेशालय (DGCI&S) ने वर्ष 2021-22 के दौरान देश में कृषि उत्पादन से संबंधित आंकड़े 6 अप्रैल को जरी किया था.

DGCI&S 2022 रिपोर्ट: मुख्य बिंदु

  • इन आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 में कृषि उत्पाद (समुद्री तथा कृषि उत्पाद सहित) का निर्यात 50 बिलियन डॉलर से अधिक था. यह अब तक का सबसे अधिक कृषि उत्पाद निर्यात है.
  • (DGCI&S) द्वारा जारी अनंतिम आंकड़ों के अनुसार 2021-22 के दौरान कृषि निर्यात 19.92 प्रतिशत बढ़कर 50.21 बिलियन डॉलर हो गया. यह वृद्धि दर 2020-21 के 17.66 प्रतिशत यानी 41.87 बिलियन से अधिक है.
  • 2021-22 में चावल (9.65 बिलियन डॉलर), गेहूं (2.19 बिलियन डॉलर), चीनी (4.6 बिलियन डॉलर) तथा अन्य अनाजों (1.08 बिलियन डॉलर) के लिए यह अब तक का सबसे अधिक निर्यात है. भारत ने चावल के लिए विश्व बाजार में लगभग 50 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर लिया है.
  • गेहूं निर्यात में अप्रत्याशित 273 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. जहां 2020-21 में गेहूं निर्यात 568 मिलियन डॉलर का था वहीं यह 2021-22 में चार गुना बढ़कर 2119 मिलियन डॉलर हो गया.
  • समुद्री उत्पादों का निर्यात अब तक का सबसे अधिक 7.71 बिलियन डॉलर हुआ है. मसालों का निर्यात लगातार दूसरे वर्ष बढ़कर 4 बिलियन डॉलर का हो गया है.