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बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित, सत्तारूढ़ गठबंधन को बहुमत

निर्वाचन आयोग ने 14 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम घोषित कर दिए. बिहार विधानसभा के सभी 243 सीटों के लिए मतदान 6 और 11 नवंबर को हुए थे.

मुख्य बिन्दु

  • सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 202 जीतकर बहुमत हासिल हासिल की.
  • गठबंधन के घटक दल भारतीय जनता पार्टी 89 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जनता दल (यूनाइटेड) ने 85 सीट जीतीं. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 19 सीट मिली. HAM (जीतन राम मांझी) ने 5 सीटें और RLM ने 4 सीटें जीती.
  • विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाले महागठबंधन को केवल 35 सीट हासिल हुई. राजद (RJD) ने 25 सीटें, कांग्रेस (INC) ने 6 सीटें और वाम दल (Left) ने 4 सीटें जीती. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने 5 सीटें जीती.

बिहार के 2 नए आर्द्रभूमि को अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि का दर्जा दिया गया

बिहार के दो आर्द्रभूमि को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि यानी रामसर स्थल का दर्जा दिया गया है. ये स्थल हैं- बक्सर जिले में स्थित गोकुल जलाशय (448 हेक्टेयर) और पश्चिम चंपारण जिले की उदयपुर झील (319 हेक्टेयर).

इसके साथ ही बिहार में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 5 हो गई है, जबकि भारत में कुल संख्या 93 तक पहुँच गई है.

गोकुल जलाशय

  • बक्सर का गोकुल जलाशय गंगा नदी की बाढ़ से निर्मित एक महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि है. गर्मियों में यह दलदली क्षेत्र व कृषि भूमि में बदल जाता है, जबकि मानसून में जलभराव से लबालब हो जाता है.
  • यहां 50 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं. स्थानीय लोग मछली पालन, सिंचाई और खेती के लिए इस पर निर्भर हैं.

उदयपुर झील

  • पश्चिम चंपारण की उदयपुर झील, एक प्राकृतिक ऑक्सबो झील है. यह झील उदयपुर वन्यजीव अभयारण्य से घिरी हुई है.
  • यहां 280 से अधिक वनस्पति प्रजातियां और 35 प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें असुरक्षित श्रेणी की कॉमन पोचार्ड जैसी प्रजातियाँ भी शामिल हैं.

बिहार में पहले से ही तीन रामसर स्थल हैं– बेगूसराय की काबर झील (काबर ताल) तथा जमुई जिले के नागी एवं नकटी पक्षी अभयारण्य.

आर्द्रभूमि पर रामसर कन्वेंशन

  • आर्द्रभूमि पर रामसर कन्वेंशन का नाम ईरान के रामसर शहर के नाम पर रखा गया है क्योंकि यहीं  फरवरी 1971 में आर्द्रभूमि और उनके पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था.

अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि

  • अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि को रामसर स्थल कहा जाता है. रामसर स्थल पानी में स्थित मौसमी या स्थायी पारिस्थितिक तंत्र हैं. इनमें मैंग्रोव, दलदल, नदियाँ, झीलें, डेल्टा, बाढ़ के मैदान और बाढ़ के जंगल, चावल के खेत, प्रवाल भित्तियाँ, समुद्री क्षेत्र (6 मीटर से कम ऊँचे ज्वार वाले स्थान) के अलावा मानव निर्मित आर्द्रभूमि जैसे- अपशिष्ट जल उपचार तालाब और जलाशय आदि शामिल होते हैं.
  • आर्द्रभूमियां प्राकृतिक पर्यावरण का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं. ये बाढ़ की घटनाओं में कमी लाती हैं, तटीय इलाकों की रक्षा करती हैं, साथ ही प्रदूषकों को अवशोषित कर पानी की गुणवत्ता में सुधार करती हैं.
  • आर्द्रभूमि मानव और पृथ्वी के लिये महत्त्वपूर्ण हैं. 1 बिलियन से अधिक लोग जीवनयापन के लिये उन पर निर्भर हैं और दुनिया की 40% प्रजातियाँ आर्द्रभूमि में रहती हैं तथा प्रजनन करती हैं.

भारत और विश्व में रामसर स्थल

  • भारत में अब कुल 93 रामसर स्थल हैं जो देश की कुल भूमि का लगभग 5% है. ये क्षेत्र देश के 13.58 लाख हैक्‍टेयर भूमि में फैले हैं.
  • आर्द्रभूमि के राज्य-वार वितरण में तमिलनाडु (20 रामसर स्थल) पहले और गुजरात दूसरे स्थान पर है (एक लंबी तटरेखा के कारण). इसके बाद आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल का स्थान है.
  • प्रथम भारतीय रामसर स्थल- केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान) और चिल्का झील (ओडिशा) है, जिसे 1981 में शामिल किया गया था.
  • भारत में सबसे बड़ा रामसर स्थल पश्चिम बंगाल का सुंदरबन और सबसे छोटा रामसर हिमाचल प्रदेश में रेणुका है.
  • रामसर सूची के अनुसार, सबसे अधिक रामसर स्थलों वाले देश यूनाइटेड किंगडम (176) और मेंक्सिको (144) हैं. अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमि का क्षेत्रफल (148,000 वर्ग किमी) सबसे अधिक बोलीविया में है.

बिहार में फल्गु नदी पर देश का सबसे बड़ा रबर बांध का उद्घाटन

बिहार में हाल ही में देश का सबसे बड़ा रबर बांध का उद्घाटन किया गया था. यह बांध फल्गु नदी पर बनाया गया है. इस बांध का उद्घाटन बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार ने किया था. इस डैम का निर्माण 312 करोड़ रुपए की लागत से हुआ है.

मुख्य बिन्दु

  • इस बांध का नाम गया जी डैम रखा गया है. यह 411 मीटर लंबा और 3 मीटर ऊंचा यह रबर डैम 312 करोड़ की लागत से बना है. यह बांध 17 मिमी मोटे रबर से बना है.
  • इसमें फल्गु नदी के सतही और उप-सतही जल प्रवाह को रोककर जल का संचयन किया गया है और ठहरे हुए पानी के समय-समय पर प्रतिस्थापन के लिए बोरवेल की स्थापना की गई है.
  • फल्गू नदी बिहार के गया से गुज़रती है. इस नदी का हिन्दू व बौद्ध धर्मों में महत्व है. भगवान विष्णु का विष्णूपाद मंदिर इसके किनारे खड़ा है. इसकी धाराएँ अंत में पुनपुन नदी में विलय हो जाती हैं, जो स्वयं गंगा नदी की एक उपनदी है. फल्गु नदी झारखण्ड के पलामू जिले से निकली है.

नीतीश कुमार ने 7वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की

नीतीश कुमार ने 16 नवम्बर को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की. राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल फागू चौहान ने कुमार को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी. उन्होंने 7वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की है.

शपथ ग्रहण समारोह में नीतीश कुमार के साथ कुल 15 नवनिर्वाचित सदस्यों ने शपथ ली. इसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) से 7, मुख्यमंत्री समेत वाली जनता दल U (JDU) से 6 और हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (HAM) व विकासशील इंसान पार्टी (VIP) से एक-एक नवनिर्वाचित सदस्यों ने शपथ ली.

बहुमत के लिए 122 सदस्यों की जरूरत

243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा के लिए हाल ही में चुनाव कराये गये थे. राज्य विधानसभा या लोकसभा में बहुमत के लिए आधे से अधिक निर्वाचित सदस्यों की जरूरत होती है. इस प्रकार यहाँ सरकार बनाने के लिए 122 या इससे अधिक सदस्यों की जरूरत थी.

इस चुनाव में राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक गठवंधन (NDA) को 125 सीटें मिलीं थीं. NDA के घटक दलों में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली JDU को 43 सीटें मिलीं जबकि BJP को 74 सीट हासिल हुई थी. दो अन्य घटक दलों VIP और HAM को 4-4 सीटें प्राप्त हुई. इस चुनाव में 75 सीटें जीत कर राष्ट्रीय जनता दल सबसे बड़ी पार्टी रही.

तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को उप-मुख्यमंत्री का पद

BJP ने कटिहार से निर्वाचित विधायक तारकिशोर प्रसाद को विधानमंडल दल का नेता और बेतिया से निर्वाचित विधायक रेणु देवी को विधानमंडल दल का उप-नेता चुना है. इन्हें राज्य में उप-मुख्यमंत्री का पद दिया गया है.

उप-मुख्यमंत्री का पद: एक दृष्टि

  • भारतीय संविधान में उप-प्रधानमंत्री या उप-मुख्यमंत्री पद का कोई उल्लेखन नहीं है अर्थात यह पद संवैधानिक नहीं है. इस पद पर आसीन व्यक्ति को प्रधानमंत्री/ मुख्यमंत्री की शक्तियां प्राप्त नहीं होतीं और न ही वह प्रधानमंत्री/ मुख्यमंत्री अनुपस्थिति में प्रदेश की अगुवाई कर सकता है. उसे कोई अतिरिक्त वेतन, भत्ता देने का भी प्रावधन नहीं है.
  • पंडित नेहरू की सरकार में सरदार वल्लभ भाई पटेल देश के पहले उप-प्रधानमंत्री थे. इसके बाद मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह और जगजीवन राम भी उप-प्रधानमंत्री रहे. हालांकि देवीलाल पहले ऐसे नेता रहे, जिन्होंने 1989 में उप-प्रधानमंत्री की बकायदा शपथ ली थी.
  • एसएम कृष्णा देश का पहला उप-मुख्यमंत्री थे. कर्नाटक में 1994 में वह उप-मुख्यमंत्री बने थे. इसके बाद कर्नाटक में ही 2004 में सिद्धारमैया उप-मुख्यमंत्री बने थे.

प्रधानमंत्री ने कोसी रेल महासेतु को राष्‍ट्र को समर्पित किया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 18 सितम्बर को वीडियो कॉन्‍फ्रेंस के जरिए ऐतिहासिक कोसी रेल महासेतु राष्‍ट्र को समर्पित किया. उन्होंने बिहार की जनता के लिए यात्री सुविधाओं से संबंधित 12 रेल परियोजनाओं का भी शुभारंभ किया.

कोसी रेल महासेतु की लंबाई 1.9 किलोमीटर है. इसको बनाने में 5.16 अरब रुपये की लागत आई है. इस सेतु के शुरू हो जाने से निर्मली और सरायगढ़ के बीच की दूरी 298 किलोमीटर से घटकर 22 किलोमीटर हो गयी है.

निर्मली और भापताही के बीच एक रेल संपर्क 1934 में भारी बाढ़ और भारत-नेपाल में भीषण भूकंप के कारण बह गया था. यह रेल संपर्क 1887 में उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा बनाया गया था.

कोसी नदी: एक दृष्टि

कोसी नदी, गंगा नदी की प्रमुख सहायक नदी है. यह नेपाल, भारत और तिब्बत से होकर बहती है. इस नदी के कारण आई बाढ़ के कारण इसे ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है.

राजगीर में विश्‍व शांति स्‍तूप की 50वीं जयंती मनाई गयी

बिहार के राजगीर में 25 अक्टूबर को विश्‍व शांति स्‍तूप की 50वीं जयंती मनाई गयी. राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस अवसर पर आयोजित समारोह का उद्घाटन किया. इस कार्यक्रम में तीन सौ से अधिक बौद्ध भिक्षु, उपासक और जापान, थाईलैंड, श्रीलंका, भूटान, नेपाल, अमरीका सहित 13 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए.

समारोह को संबोधित करते हुए राष्‍ट्रपति ने कहा है कि भगवान बुद्ध और महात्‍मा गांधी के संदेश वर्तमान समय के संघर्षमय संकट को दूर करने में काफी मदद कर सकते हैं.

बिहार सरकार ने पान मसाले के उत्पादन, संरक्षण और बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबन्ध लगाया

बिहार सरकार ने राज्य पान मसाले के उत्पादन और बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगा दिया है. राज्य सरकार ने प्रदेश में सभी प्रकार के पान मसाने के उत्पादन, संरक्षण और बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबन्ध का आदेश 30 अगस्त को जारी किया.

सरकार ने इस आदेश से पूर्व जून से अगस्त के बीच तमाम ब्रांड्स के पान मसालों का सैंपल इकट्ठा कर इनकी जांच कराई थी. इस जाँच में सभी सैंपल में मैग्निशियम कार्बोनेट की अत्यधिक मात्रा मिली थी.

सरकार को टेस्ट की रिपोर्ट में यह बताया गया था कि इस प्रकार के पान मसालों के सेवन से हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है.


बिहार की कोसी और मेची नदी को आपस में जोड़ने की परियोजना को मंजूरी

केंद्र सरकार ने बिहार की कोसी और मेची नदी को आपस में जोड़ने की 4900 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है. इस बात की घोषणा बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने की. मध्य प्रदेश की केन-बेतवा के बाद देश में नदियों को आपस में जोड़ने वाली यह दूसरी बड़ी परियोजना है जिसे मंजूरी दी गयी है.

केंद्र सरकार ने सिंचाई हेतु कोसी के पूर्वी तट पर 76.20 किलोमीटर लंबी नहर के निर्माण को मंजूरी दी है. इस परियोजना से न केवल उत्तरी बिहार को बार-बार आने वाली बाढ़ से निजात मिलेगी बल्कि अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार जिलों में 2.14 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होगी.