Tag Archive for: Literature Award

डेमोन गैलगट को उनके उपन्‍यास द प्रॉमिस के लिए बुकर पुरस्‍कार के लिए चुना गया

दक्षिण अफ्रीका के उपन्‍यासकार डेमोन गैलगट (Damon Galgut) को 2021 के बुकर पुरस्‍कार (Booker Prize) के लिए चुना गया है. यह पुरस्कार उनके उपन्‍यास ‘द प्रॉमिस’ (The Promise) के लिए दिया गया.

श्री गैलगट को वर्ष 2003 और 2010 में भी इस पुरस्‍कार के लिए नामित किया गया था. उन्हें 2003 में ‘द गुड डॉक्टर’ (The Good Doctor) और 2010 में ‘इन अ स्ट्रेंज रूम’ (In a Strange Room) के लिए नामित किया गया था.

बुकर पुरस्‍कार: एक दृष्टि

  • बुकर पुरस्‍कार के पूरा नाम ‘मैन बुकर पुरस्कार फ़ॉर फ़िक्शन’ (Man Booker Prize for Fiction) है.
  • बुकर पुरस्कार की स्थापना सन् 1969 में इंगलैंड की बुकर मैकोनल कंपनी द्वारा की गई थी.
  • यह पुरस्‍कार राष्ट्रमंडल (कॉमनवैल्थ) या आयरलैंड के नागरिक द्वारा लिखे गए मौलिक अंग्रेजी उपन्यास के लिए हर वर्ष दिया जाता है.
  • बुकर पुरस्कार विजेता को 60 हज़ार पाउण्ड की राशि विजेता लेखक को दी जाती है.
  • पहला बुकर पुरस्कार इंगलैंड के उपन्यासकार पी एच नेवई (P. H. Newby) को ‘Something to Answer For’ के लिए दिया गया था.

बुकर पुरस्‍कार पाने वाले भारतीय: एक दृष्टि
कुल 5 बार यह पुरस्कार भारतीय मूल के लेखकों को मिला है. ये लेखक हैं- वी एस नाइपॉल, अरुंधति राय, सलमान रश्दी, किरण देसाई और अरविन्द अडिग.

लेखकउपन्यासवर्ष
1. वी एस नाइपॉलइन ए फ़्री स्टेट1971
2. सलमान रश्दीमिडनाइट्स चिल्ड्रेन1981
3. अरुंधति रायद गॉड ऑफ़ स्माल थिंग्स1997
4. किरण देसाईद इनहैरिटैंस ऑफ लॉस2006
5. अरविन्द अडिगद व्हाइट टाइगर2008

उड़िया कवि राजेंद्र किशोर पांडा को कुवेम्पु राष्ट्रीय पुरस्कार के लिये चुना गया

उड़िया कवि डॉ. राजेंद्र किशोर पांडा को ‘कुवेम्पु पुरस्कार’ (Kuvempu Rashtriya Puraskar) 2020 के लिये चुना गया है. डॉ. पांडा ओडिशा के एक प्रसिद्ध कवि एवं उपन्यासकार हैं. अब तक उनके कुल 16 कविता संग्रह और एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं.
उन्हें वर्ष 2010 में ‘गंगाधर राष्ट्रीय पुरस्कार’ और वर्ष 1985 में ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था.

कुवेम्पु पुरस्कार

  • यह 20वीं सदी के दिवंगत कन्नड़ कवि कुप्पली वेंकटप्पा ‘कुवेम्पु’ की स्मृति में स्थापित एक राष्ट्रीय पुरस्कार है.
  • कुवेम्पु कन्नड़ भाषा के पहले लेखक थे जिन्हें रामायण के उनके स्वयं के संस्करण ‘श्री रामायण दर्शनम’ के लिये ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
  • यह पुरस्कार प्रतिवर्ष भारतीय संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी भाषा के साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाले लेखक को दिया जाता है.
  • इस पुरस्कार के तहत विजेताओं को 5 लाख रुपए का नकद पुरस्कार तथा एक रजत पदक एवं एक प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाता है.

फ़्रांसिसी लेखक डेविड डिओप को अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार 2021 दिया गया

फ़्रांसिसी लेखक डेविड डिओप (David Diop) को अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार (International Booker Prize 2021) 2021 दिया गया है. वे इस पुरस्कार को जीतने वाले पहले फ़्रांसिसी हैं. उन्हें उनकी पुस्तक ‘At Night All Blood is Black’ के लिए यह पुरस्कार दिया गया है.

इस पुस्तक का अंग्रेजी में अनुवाद एना मोश्कोवाकिस (Anna Moschovakis) द्वारा किया गया है. डेविड डिओप पुरस्कार के रूप में मिली 50,000 पाउंड की राशि को अनुवादक एना के साथ साझा करेंगे.

अन्तर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार: एक दृष्टि

  • यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष किसी भी भाषा के काल्पनिक कथा उपन्यास को दिया जाता है जिसका अनुवाद अंग्रेजी में हुआ है और प्रकाशन ब्रिटेन अथवा आयरलैंड में हुआ हो.
  • इस पुरस्कार का उद्देश्य दुनिया भर से गुणवत्तापूर्ण साहित्य के प्रकाशन और पढ़ने को प्रोत्साहित करना और अनुवादकों के काम को बढ़ावा देना है.
  • यह पुरस्कार मूल बुकर पुरस्कार से अलग है. मूल बुकर पुरस्कार परीक्षा की दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण है.
  • इस पुरस्कार विजेता को 50,000 पाउंड की इनाम राशि प्रदान की जाती है. नियमों के अनुसार यह ईनाम राशि लेखक और अनुवादक के बीच बराबर-बराबर बांटी जाती है.

डॉ ताहेरा कुतुबुद्दीन को 15वां शेख जायद बुक पुरस्कार से सम्मानित किया गया

भारतीय अमेरिकी डॉ ताहेरा कुतुबुद्दीन (Dr Tahera Qutbuddin) को 15वां शेख जायद बुक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. उन्होंने 2019 में लीडन के ब्रिल एकेडमिक पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित अपनी नवीनतम पुस्तक “अरबी ओरेशन – आर्ट एंड फंक्शन (Arabic Oration – Art and Function)” के लिए पुरस्कार जीता.

मुंबई में जन्मी डॉ. ताहेरा कुतुबुद्दीन, शिकागो विश्वविद्यालय में अरबी साहित्य के प्रोफेसर हैं. वह यह पुरस्कार जीतने वाली भारतीय मूल की पहली व्यक्ति बनी हैं.

शेख जायद बुक पुरस्कार

शेख जायद बुक पुरस्कार को अरब जगत का नोबेल पुरस्कार माना जाता है. अरबी ओरेशन – आर्ट एंड फंक्शन पुस्तक में, वह सातवीं और आठवीं सदी की अपनी मौखिक अवधि में अरबी साहित्य का एक व्यापक सिद्धांत प्रस्तुत करती है.

शरण कुमार लिंबाले को 30वें सरस्वती सम्मान से सम्मानित किया जायेगा

मराठी लेखक डॉक्टर शरण कुमार लिंबाले को वर्ष 2020 का सरस्वती सम्मान से सम्मनित किया गया है. उन्हें यह पुरस्कार उनके उपन्यास ‘सनातन’ के लिए दिया गया है.

केके बिरला फाउंडेशन के चयन परिषद ने शरण कुमार लिंबाले को 30वें सरस्वती सम्मान के लिए चुना है. ‘सनातन’ एक मराठी उपन्यास है जिसका प्रकाशन 2010 में हुआ था.

सरस्वती सम्मान: एक दृष्टि

  • सरस्वती सम्मान केके बिड़ला फ़ाउंडेशन द्वारा साहित्य के लिए दिया जाने वाला पुरस्कार है. इसकी शुरूआत 1991 में हुई थी.
  • यह सम्मान प्रतिवर्ष संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज भाषाओं की में प्रकाशित उत्कृष्ट साहित्यिक कृति को दिया जाता है.
  • यह सम्मान दस साल की अवधि में प्रकाशित किसी श्रेष्ठ कृति को दिया जाता है.
  • इस सम्मान के तहत उन्हें को 15 लाख रुपए, प्रतीक चिन्ह और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाता है.
  • 27वां सरस्वती सम्मान (वर्ष 2017 के लिए) सितांशु यशचन्द्र को और  28वां सरस्वती सम्मान (वर्ष 2018 के लिए) तेलुगू के प्रख्यात कवि डा. के शिवा रेड्डी को दिया गया था.
  • पहला सरस्वती सम्मान डा. हरिवंश राय बच्चन को उनकी चार खंडों की आत्मकथा के लिए मिला था.
  • अब तक यह सम्मान विजय तेंदुलकर,पद्मा सचदेव, गोविन्द मिश्र, सुरजीत पातर, शंख घोष, डा. इंदिरा पार्थसारथी, सुनील गंगोपाध्याय और मनोज दास, रमाकांत रथ, प्रो के अय्यप्प पणिक्कर, डॉक्टर एम वीरप्पा मोइली जैसे लेखकों को मिल चुका है.
  • 29वां सरस्वती सम्मान (वर्ष 2017 के लिए) प्रख्यात सिंधी लेखक वासदेव मोही को दिया गया था.

राजकमल झा को रबिंद्रनाथ टैगोरे साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया

पत्रकार लेखक राजकमल झा को तीसरे रबिंद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. उन्हें यह पुरस्कार उनके उपन्यास ‘द सिटी एंड द सी’ (The City and The Sea) के लिए दिया गया है. पुरस्कार विजेता की घोषणा डेनमार्क के कोपनहेगन में ऑनलाइन की गई.

झा की किताब ‘द सिटी एंड द सी’ दिसंबर 2012 के निर्भया बलात्कार एवं हत्या मामले पर आधारित है. पुरस्कार की दौड़ में अमिताव घोष की ‘गन आईलैंड’, निर्मला गोविंदराजन की ‘टैबू’ और रणजीत होसकोटे की ‘जोनाह्वेल’ भी शामिल थीं.

रबिंद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार: एक दृष्टि

रबिंद्रनाथ टैगोर साहित्य पुरस्कार की स्थापना 2018 में अमेरिका के प्रकाशक बुंडालो ने विश्व शांति, साहित्य, कला, शिक्षा और मानवाधिकारों के मंच के तौर पर की थी. पुरस्कार स्वरुप पांच हजार डॉलर की राशि प्रदान की जाती है.

वर्ष 2019 में यह पुरस्कार ब्रिटिश मूल के भारतीय उपन्यासकार राणा दासगुप्ता को उनके उपन्यास ‘सोलो’ के लिए दिया गया था.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को वातायन अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को वातायन अन्तर्राष्ट्रीय शिखर सम्मान (Vatayan Lifetime Achievement Award) से सम्मानित किया गया है. उन्हें यह सम्मान 21 नवंबर को आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम में दिया गया. निशंक को यह सम्मान साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए दिया गया है.

निशंक अब तक 75 से ज्यादा पुस्तकें लिख चुके हैं. जिनका कई विदेशी भाषाओं में अनुवाद भी किया जा चुका है. निशंक को उनके साहित्य, गंगा के लिए समर्पित अभियान स्पर्श गंगा जैसी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जा चुका है. लंबे समय के बाद देश को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाने में उनकी अहम भूमिका रही है.

वातायन अन्तर्राष्ट्रीय शिखर सम्मान: एक दृष्टि

  • ब्रिटेन स्थित फ्रेडरिक पिनकॉट यूके अवार्ड 2014 की विजेता संस्था वातायन की ओर से यह पुरस्कार साहित्य और कला के क्षेत्र से जुड़े विद्वानों को दिया जाता है.
  • वातायन संस्था ने इस पुरस्कार की शुरूआत 28 नवंबर 2003 को महान रोमांटिक कवि विलियम ब्लेक के जन्मदिन के अवसर पर प्रसिद्ध भाषा वैज्ञानिक डॉ सत्येंद्र प्रसाद ने शुरू की थी.
  • प्रसून जोशी, जावेद अख्तर, निदा फाजली जैसे साहित्यकारों को यह सम्मान मिल चुका है.

डगलस स्टुअर्ट को उनके उपन्यास ‘शगी बेन’ के लिए बुकर पुरस्कार 2020 से सम्मानित किया गया

स्कॉटलैंड-अमेरिकी लेखक डगलस स्टुअर्ट (Douglas Stuart) को उनके पहले उपन्यास ‘शगी बेन’ (Shuggie Bain) के लिए वर्ष 2020 का बुकर पुरस्कार दिया गया है. कोरोना वायरस के मद्देनजर बुकर पुरस्कार 2020 के समारोह को लंदन के राउंडहाउस से विडियो कांफ्रेंसिंग माध्यम से प्रसारित किया गया था.

अवनी दोशी को ‘बर्नट शुगर’ के लिए नामित किया गया था

इस पुरस्कार के लिए 6 लेखकों को नामित किया गया था. इन नामित लेखकों में दुबई में बसीं भारतीय मूल की लेखिका अवनी दोशी भी थीं. उन्हें उनके पहले उपन्यास ‘बर्नट शुगर’ उपन्यास के लिए नामित किया गया था.

डगलस स्टुअर्ट और शगी बेन: एक दृष्टि

डगलस स्टुअर्ट न्यूयॉर्क में रहने वाले स्कॉटलैंड के लेखक हैं. वह बुकर पुरस्कार जीतने वाले दूसरे स्कॉटिश नागरिक हैं. इससे पहले वर्ष 1994 में जेम्स केमैन को ‘हाउ लेट इट वाज, हाउ लेट’ के लिए पुरस्कार मिला था.

डगलस स्टुअर्ट के उपन्यास ‘शगी बेन’ की कहानी ग्लासगो की पृष्ठभूमि पर आधारित है. इस उपन्यास का प्रकाशन अमेरिका में ‘ग्रोव अटलांटिक’ और ब्रिटेन में ‘पिकाडोर’ ने किया है.

बुकर पुरस्‍कार: एक दृष्टि

  • बुकर पुरस्‍कार के पूरा नाम ‘मैन बुकर पुरस्कार फ़ॉर फ़िक्शन’ (Man Booker Prize for Fiction) है.
  • बुकर पुरस्कार की स्थापना सन् 1969 में इंगलैंड की बुकर मैकोनल कंपनी द्वारा की गई थी.
  • यह पुरस्‍कार राष्ट्रमंडल (कॉमनवैल्थ) या आयरलैंड के नागरिक द्वारा लिखे गए मौलिक अंग्रेजी उपन्यास के लिए हर वर्ष दिया जाता है.
  • बुकर पुरस्कार विजेता को 60 हज़ार पाउण्ड की राशि विजेता लेखक को दी जाती है.
  • पहला बुकर पुरस्कार इंगलैंड के उपन्यासकार पी एच नेवई (P. H. Newby) को ‘Something to Answer For’ के लिए दिया गया था.

बुकर पुरस्‍कार पाने वाले भारतीय: एक दृष्टि
कुल 5 बार यह पुरस्कार भारतीय मूल के लेखकों को मिला है. ये लेखक हैं- वी एस नाइपॉल, अरुंधति राय, सलमान रश्दी, किरण देसाई और अरविन्द अडिग.

लेखकउपन्यासवर्ष
1. वी एस नाइपॉलइन ए फ़्री स्टेट1971
2. सलमान रश्दीमिडनाइट्स चिल्ड्रेन1981
3. अरुंधति रायद गॉड ऑफ़ स्माल थिंग्स1997
4. किरण देसाईद इनहैरिटैंस ऑफ लॉस2006
5. अरविन्द अडिगद व्हाइट टाइगर2008

मलयालम लेखक एस हरीश ने साहित्य के लिए जेसीबी पुरस्कार 2020 जीता

वर्ष 2020 का साहित्य के लिए जेसीबी पुरस्कार एस हरेश को दिया गया है. उन्हें यह पुरस्कार उनके उपन्यास ‘मूंछ’ (Moustache) के लिए दिया गया है. उपन्यास ‘मूंछ’ का अंग्रेजी में अनुवाद जयश्री कलाथिल द्वारा किया गया है और हार्पर कॉलिन्स इंडिया द्वारा प्रकाशित किया गया है.

विजेता की घोषणा, लॉर्ड बम्फोर्ड, अध्यक्ष, द्वारा एक आभासी पुरस्कार समारोह में की गई थी. साहित्य के लिए जेसीबी पुरस्कार को भारत में सबसे महंगा साहित्यिक पुरस्कार माना जाता है. इस पुरस्कार के तहत मलयालम लेखक को 25 लाख रुपये नकद और अनुवादक को अतिरिक्त 10 लाख रुपये का पुरस्कार मिलेगा.

नीदरलैंड की मारिके रिजनेवेल्ड को अन्तर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार दिया गया

वर्ष 2020 का अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार नीदरलैंड की 29 वर्षीय मारिके लुकास रिजनेवेल्ड को दिया गया है. वह यह पुरस्कार जीतेने वाली सबसे कम उम्र की लेखक बन गई हैं.

रिजनेवेल्ड को यह पुरस्कार उनकी की पुस्तक ‘द डिस्कम्फर्ट ऑफ इवनिंग’ (The Discomfort of Evening) के लिए दिया गया है. यह पुस्तक ग्रामीण नीदरलैंड के एक कट्टर ईसाई समुदाय के एक किसान परिवार की कहानी है. इस पुस्तक को पहली बार डच भाषा में 2018 में प्रकाशित किया गया था. मिशेल हचिसन ने इस पुस्तक का अंग्रेजी में अनुवाद किया है.

अन्तर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार: एक दृष्टि

  • यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष किसी भी भाषा के काल्पनिक कथा उपन्यास को दिया जाता है जिसका अनुवाद अंग्रेजी में हुआ है और प्रकाशन ब्रिटेन अथवा आयरलैंड में हुआ हो.
  • इस पुरस्कार का उद्देश्य दुनिया भर से गुणवत्तापूर्ण साहित्य के प्रकाशन और पढ़ने को प्रोत्साहित करना और अनुवादकों के काम को बढ़ावा देना है.
  • यह पुरस्कार मूल बुकर पुरस्कार से अलग है और इसका लक्ष्य विश्वभर में अच्छे उपन्यास के अधिक प्रकाशन और उसे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है.
  • इस पुरस्कार विजेता को 50,000 पाउंड की इनाम राशि प्रदान की जाती है. नियमों के अनुसार यह ईनाम राशि लेखक और अनुवादक मिशेल हचिसन के बीच बराबर-बराबर बांटी जाएगी.

राष्ट्रपति ने 61वें वार्षिक ललित कला अकादमी पुरस्कार प्रदान किए

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 4 मार्च को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में 15 कलाकारों को 61वें वार्षिक ललित कला अकादमी पुरस्कार (61st Annual Lalit Kala Akademi Awards) 2020 प्रदान किए. पुरस्कार प्राप्त करने वाले इन कलाकारों की कृतियों को 22 मार्च 2020 तक ललित कला अकादमी की गैलरी में 61वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया जाएगा.

पुरस्कार प्राप्तकर्ता

अनूप कुमार मंजूखी गोपी, डेविड मालाकार, देवेंद्र कुमार खरे, दिनेश पंड्या, फारुक अहमद हलदर, हरि राम कुंभावत, केशरी नंदन प्रसाद, मोहन कुमार टी, रतन कृष्ण साहा, सागर वसंत कांबले, सतविंदर कौर, सुनील तिरुवयूर, तेजस्वी नारायण सोनवणे, यशपाल सिंह और यशवंत सिंह को पुरस्कार प्रदान किए गए.

ललित कला अकादमी पुरस्कार

प्रतिभावान कलाकारों को सम्मानित करने के लिए ललित कला अकादमी में प्रतिवर्ष प्रदर्शनी और पुरस्कार समारोह आयोजित किया जाता है. इस समारोह में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को सम्मानित किया जाता है. कलाकारों का चयन अकादमी द्वारा गठित निर्णायक मंडल के एक सम्मानित पैनल द्वारा किया जाता है. पुरस्कार प्राप्तकर्ता को एक लाख रुपये नकद और एक पट्टिका दिया जाता है.

ललित कला अकादमी की स्थापना 1954 में भारत सरकार द्वारा की गयी थी. यह एक स्वायत्त संस्था है. यह ललित कलाओं के क्षेत्र यथा मूर्तिकला, चित्रकला, ग्राफकला, गृहनिर्माणकला आदि में कार्य कराती है. इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है.

सिंधी लेखक वासदेव मोही को 29वें सरस्वती सम्मान से सम्मानित किया जायेगा

वर्ष 2019 के सरस्वती सम्मान प्रख्यात सिंधी लेखक वासदेव मोही को दिए जाने की घोषणा की गयी है. उन्हें 29वां सरस्वती सम्मान दिया जायेगा.

वासदेव मोही को यह सम्मान उनके 2012 में प्रकाशित लघु कथा संग्रह ‘चेकबुक’ के लिए दिया गया है. इस लघुकथा संग्रह में समाज के हाशिए के तबकों और पीड़ाओं के बारे में बात की गई है. उन्होंने कविता, कहानी और अनुवाद की 25 किताबें लिखी हैं. उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है.

सरस्वती सम्मान: एक दृष्टि

  • सरस्वती सम्मान केके बिड़ला फ़ाउंडेशन द्वारा साहित्य के लिए दिया जाने वाला पुरस्कार है. इसकी शुरूआत 1991 में हुई थी.
  • यह सम्मान प्रतिवर्ष संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज भाषाओं की में प्रकाशित उत्कृष्ट साहित्यिक कृति को दिया जाता है.
  • यह सम्मान दस साल की अवधि में प्रकाशित किसी श्रेष्ठ कृति को दिया जाता है.
  • इस सम्मान के तहत उन्हें को 15 लाख रुपए, प्रतीक चिन्ह और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाता है.
  • 27वां सरस्वती सम्मान (वर्ष 2017 के लिए) सितांशु यशचन्द्र को मिला था.
  • पहला सरस्वती सम्मान डा. हरिवंश राय बच्चन को उनकी चार खंडों की आत्मकथा के लिए मिला था.
  • अब तक यह सम्मान विजय तेंदुलकर,पद्मा सचदेव, गोविन्द मिश्र, सुरजीत पातर, शंख घोष, डा. इंदिरा पार्थसारथी, सुनील गंगोपाध्याय और मनोज दास जैसे लेखकों को मिल चुका है.
  • वर्ष 2018 का सरस्वती सम्मान तेलुगू के प्रख्यात कवि डा. के शिवा रेड्डी को दिया गया था.