डेली कर्रेंट अफेयर्स
10-12 अप्रैल 2026

यूपीएससी, एसएससी, बैंक, रेलवे सहित केंद्र एबं राज्य सरकारों द्वारा आयोजित सभी प्रतियोगिता परीक्षा के लिए उपयोगी.

कल्पाक्कम स्थित PFBR ने क्रिटिकेलिटी हासिल की, जानिए क्या होता है क्रिटिकेलिटी

तमिलनाडु के कल्पाक्कम में स्थित 500 MWe ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ (PFBR) ने हाल ही में ‘क्रिटिकेलिटी’ (Criticality) हासिल की है.

क्रिटिकेलिटी क्या है?

  • ‘क्रिटिकेलिटी’ परमाणु रिएक्टर की वह अवस्था है जब उसके अंदर चल रही नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया (Nuclear Chain Reaction) आत्मनिर्भर (Self-sustaining) हो जाती है.
  • परमाणु रिएक्टर में ऊर्जा तब पैदा होती है जब एक न्यूट्रॉन किसी परमाणु (जैसे यूरेनियम या प्लूटोनियम) से टकराकर उसे तोड़ता (Fission) है. इस टूटने से भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है और साथ ही 2 या 3 नए न्यूट्रॉन भी निकलते हैं.
  • इस प्रक्रिया को नियंत्रण में रखने के लिए वैज्ञानिकों ने एक पैमाना बनाया है जिसे ‘न्यूट्रॉन गुणन कारक’ (Neutron Multiplication Factor – k) कहते हैं:
  • उप-क्रांतिक (Sub-critical, k < 1): जब पैदा होने वाले नए न्यूट्रॉनों की संख्या, खत्म होने वाले न्यूट्रॉनों से कम होती है. इस अवस्था में चेन रिएक्शन धीरे-धीरे कमजोर होकर बंद हो जाती है. रिएक्टर चालू नहीं हो पाता.
  • क्रांतिक अवस्था (Critical, k = 1): यह वह आदर्श अवस्था है जो कल्पाक्कम PFBR ने हासिल की है. इसका मतलब है कि हर विखंडन से निकलने वाले न्यूट्रॉनों में से ठीक एक न्यूट्रॉन ही अगले परमाणु को तोड़ने के लिए आगे बढ़ता है. बाकी को कंट्रोल रॉड्स द्वारा सोख लिया जाता है. इससे ऊर्जा का उत्पादन एक समान और स्थिर गति से लगातार चलता रहता है.
  • अति-क्रांतिक (Super-critical, k > 1): जब एक न्यूट्रॉन कई न्यूट्रॉनों को जन्म देता है और वे सभी आगे परमाणुओं को तोड़ते हैं. यह एक अनियंत्रित विस्फोट (परमाणु बम) का रूप ले सकता है.

कल्पाक्कम PFBR के लिए इसका महत्व

  • भारत का परमाणु कार्यक्रम तीन चरणों (Three-Stage) में बंटा है. PFBR का ‘क्रिटिकल’ होना आधिकारिक रूप से भारत के परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण (Stage-2) की सफलता की शुरुआत है.
  • PFBR एक ‘फास्ट ब्रीडर’ (Fast Breeder) रिएक्टर है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ऊर्जा बनाने के लिए जितना ईंधन (प्लूटोनियम-यूरेनियम – MOX) खर्च करता है, उससे कहीं ज्यादा नया ईंधन (प्लूटोनियम-239) पैदा करता है.
  • ‘क्रिटिकेलिटी’ हासिल करने का अर्थ है कि वह बिना किसी बाहरी मदद के स्थिर रूप से ऊर्जा और नया ईंधन बना रहा है.

भारत का त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम

  • भारत का ‘त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम’ की परिकल्पना 1950 के दशक में भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने की थी.
  • भारत के पास ‘यूरेनियम’ का भंडार बहुत कम है, लेकिन हमारे दक्षिणी और पूर्वी तटों (जैसे केरल और ओडिशा की रेत) में ‘थोरियम’ का दुनिया का सबसे बड़ा भंडार (लगभग 25%) मौजूद है.
  • थोरियम का सीधा उपयोग ईंधन के रूप में नहीं किया जा सकता. इसे पहले एक ज्वलनशील (fissile) पदार्थ में बदलना पड़ता है. इसी थोरियम का उपयोग करके भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह तीन चरणों वाला मास्टरप्लान बनाया गया था:

चरण 1: दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR – Pressurised Heavy Water Reactor)

  • इस चरण में ईंधन के रूप में भारत में उपलब्ध ‘प्राकृतिक यूरेनियम’ का उपयोग किया जाता है. यूरेनियम से बिजली बनाई जाती है. रिएक्टर को ठंडा रखने और न्यूट्रॉन की गति को धीमा करने के लिए ‘भारी जल’ (Heavy Water – D2O) का उपयोग होता है.
  • इस प्रक्रिया के अंत में बिजली के साथ-साथ बाई-प्रोडक्ट के रूप में प्लूटोनियम-239 (Pu-239) निकलता है. (यह प्लूटोनियम ही दूसरे चरण की चाबी है).

चरण 2: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR – Fast Breeder Reactor)

  • इस चरण में ईंधन के रूप में चरण 1 से निकला प्लूटोनियम-239 और प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग किया जाता है. कल्पाक्कम का PFBR इसी चरण का हिस्सा है.
  • इसे ‘ब्रीडर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह खपत से अधिक नया ईंधन पैदा करता है. इसमें भारी जल के बजाय ‘तरल सोडियम’ (Liquid Sodium) का उपयोग कूलेंट के रूप में होता है.
  • जब रिएक्टर में पर्याप्त प्लूटोनियम बन जाता है, तो रिएक्टर के चारों ओर (Blanket में) थोरियम (Th-232) रखा जाता है. रिएक्टर के न्यूट्रॉन थोरियम से टकराकर उसे यूरेनियम-233 (U-233) में बदल देते हैं.
  • इस प्रक्रिया के अंत में बिजली के साथ-साथ मुख्य उत्पाद के रूप अधिक प्लूटोनियम और यूरेनियम-233 प्राप्त होता है.

चरण 3: उन्नत भारी जल रिएक्टर (AHWR – Advanced Heavy Water Reactor)

  • इस चरण में ईंधन के रूप में चरण 2 से प्राप्त यूरेनियम-233 (U-233) और थोरियम (Th-232) का उपयोग होता है.
  • यह भारत के परमाणु कार्यक्रम का अंतिम चरण है. इसमें U-233 और थोरियम का उपयोग करके बिजली बनाई जाएगी. यह रिएक्टर थोरियम को लगातार नए U-233 में बदलता रहेगा, जिससे ईंधन की एक अंतहीन साइकिल बन जाएगी.
  • इसके मुख्य उत्पाद के रूप में सदियों तक चलने वाली स्वच्छ और असीमित बिजली मिलेगी.

संक्षिप्त सामयिक घटनाचक्र

कल्पाक्कम फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने हासिल की ‘क्रिटिकेलिटी’

तमिलनाडु के कल्पाक्कम में स्थित 500 MWe ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ (PFBR) ने सफलतापूर्वक ‘क्रिटिकेलिटी’ (Criticality) हासिल कर ली है. यह उपलब्धि भारत के होमी भाभा द्वारा परिकल्पित ‘त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम’ (Three-Stage Nuclear Programme) के दूसरे चरण (Stage 2) के आधिकारिक संचालन को चिह्नित करती है. यह रिएक्टर प्लूटोनियम-यूरेनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग करता है.

आर्टेमिस-2 ने तोड़ा अपोलो 13 का रिकॉर्ड

नासा के क्रू-लूनर फ्लाईबाय मिशन ‘आर्टेमिस-2’ (Artemis II) के ओरियन कैप्सूल ने पृथ्वी से 4,00,171 किलोमीटर की दूरी तय करके इतिहास रच दिया है. इसने 1970 के ‘अपोलो 13’ मिशन द्वारा मनुष्यों के पृथ्वी से सबसे दूर जाने के रिकॉर्ड को आधिकारिक तौर पर तोड़ दिया है.

मूडीज ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया

अमेरिकी रेटिंग एजेंसी ‘मूडीज रेटिंग्स’ (Moody’s) ने अप्रैल में अपनी नवीनतम ‘क्रेडिट ओपिनियन रिपोर्ट ऑन इंडिया’ जारी की है. इस रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर के अनुमान को 6.8% से घटाकर 6.0% कर दिया है.

अमेरिका की ईरान पर नई टैरिफ चेतावनी

पश्चिम एशिया में चल रहे भारी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला संकट के बीच अमेरिका ने घोषणा की है कि जो भी देश ईरान को हथियारों की आपूर्ति करेगा, उस पर तत्काल प्रभाव से 50% अमेरिकी टैरिफ (Tariffs) लगाए जाएंगे.

भारत-बांग्लादेश संबंधों का संस्थागत ‘रीसेट’

पड़ोसी देश बांग्लादेश में राजनीतिक सत्ता परिवर्तन (Post-Hasina phase) के बाद, भारत और बांग्लादेश अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘लीडर-सेंट्रिक’ (व्यक्ति-केंद्रित) से हटाकर अधिक ‘संस्थागत’ (Institutional) बनाने की दिशा में उच्च स्तरीय वार्ता कर रहे हैं. इसमें 4,096 किमी सीमा प्रबंधन और 54 साझा नदियों (विशेषकर तीस्ता और गंगा) के जल बंटवारे पर मुख्य रूप से फोकस किया जा रहा है.

नीति आयोग (NITI Aayog) की नई पहल – ATL Sarthi

नीति आयोग के ‘अटल इनोवेशन मिशन’ (AIM) ने तेलंगाना के हैदराबाद में ‘एटीएल सारथी’ (ATL Sarthi) और ‘मेंटर इंडिया एकेडमी’ (Mentor India Academy) नाम से दो नई पहलों की शुरुआत की है. इसका उद्देश्य देश भर में अटल टिंकरिंग लैब्स के प्रदर्शन को सुव्यवस्थित और अधिक उन्नत करना है.

मिशन कर्मयोगी के तहत वैज्ञानिकों के लिए नई क्षमता निर्माण योजना

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत विशेष रूप से ‘वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के लिए प्रशासनिक क्षमता निर्माण’ पर अपनी तरह का पहला समर्पित कार्यक्रम लॉन्च किया है.

आर्टेमिस-2 मिशन की ऐतिहासिक और सफल वापसी

नासा (NASA) का 10 दिवसीय ऐतिहासिक ‘क्रू-लूनर फ्लाईबाय’ मिशन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है. 11 अप्रैल 2026 को चारों अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर ‘ओरियन’ (Orion) कैप्सूल प्रशांत महासागर में सुरक्षित रूप से उतर गया. इस कैप्सूल ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय लगभग 40,000 किमी/घंटा की गति और 2,760°C के अत्यधिक तापमान का सामना किया. इस मिशन की पूर्ण सफलता ने 2027 में प्रस्तावित ‘आर्टेमिस-3’ (जिसमें इंसान चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेंगे) का रास्ता साफ कर दिया है.

एशियाई विकास बैंक (ADB) का ‘एशियन डेवलपमेंट आउटलुक 2026’

ADB ने 11 अप्रैल को अपनी प्रमुख रिपोर्ट जारी करते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान 7.0% पर बरकरार रखा है. ADB ने स्पष्ट किया है कि मजबूत निवेश और विनिर्माण क्षेत्र में तेजी भारत के विकास का मुख्य इंजन बने हुए हैं.

QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग बाय सब्जेक्ट 2026

वैश्विक उच्च शिक्षा विश्लेषक ‘क्वाक्वेरेली साइमंड्स’ (QS) ने विषय-आधारित विश्वविद्यालय रैंकिंग (QS Rankings) 2026 जारी की है. इस वर्ष भारतीय विश्वविद्यालयों में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ‘डेवलपमेंट स्टडीज’ में भारत में शीर्ष पर और विश्व स्तर पर टॉप 20 में शामिल है. वहीं, IIM अहमदाबाद और IIM बैंगलोर ने ‘बिजनेस एंड मैनेजमेंट स्टडीज’ में विश्व के शीर्ष 50 संस्थानों में अपनी जगह बनाए रखी है.