Tag Archive for: Important Days- November

27 नवम्बर 2021: 12वां राष्ट्रीय अंगदान दिवस

प्रत्येक वर्ष 27 नवम्बर को राष्ट्रीय अंगदान दिवस (National Organ Donation Day) मनाया जाता है. इस वर्ष 12वां अंगदान दिवस मनाया गया. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य सामान्य मनुष्य को मृत्यु के बाद अंगदान करने की प्रतिज्ञा दिलाने के लिए प्रोत्साहित करना हैं. यह दिवस राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) द्वारा मनाया जाता है.

जागरूकता की कमी के कारण, लोगों के मन में अंगदान के बारे में भय और मिथक विद्यमान हैं. अंगदान में अंगदाता के अंगों जैसे कि हृदय, लीवर (यकृत), गुर्दे, आंत, फेफड़े, और अग्न्याशय का दान उसकी मृत्यु के पश्चात ज़रूरतमंद व्यक्ति में प्रत्यारोपित करने के लिए किया जाता है.

13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस
पूरे विश्व में अंगदान दिवस प्रतिवर्ष 13 अगस्त को मनाया जाता है.

26 नवम्बर: संविधान दिवस, भारतीय संविधान की 72वीं वर्षगांठ

प्रत्येक वर्ष 26 नवंबर को ‘संविधान दिवस’ (Constitution Day) के रूप में मनाया जाता है. संविधान सभा द्वारा 1949 में इसी दिन भारतीय संविधान को मंजूरी दी गयी और 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया था. इस वर्ष यानी 2021 में हमारे संविधान को अंगीकार किए जाने की 72वीं वर्षगांठ है.

संविधान दिवस को संविधान निर्माता डॉं. भीमराव अंबेडकर को याद किया जाता है. डॉं. अंबेडकर संविधान सभा के प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे.

भारत सरकार ने 26 नवम्बर को संविधान दिवस के रूप में मनाने की घोषणा 19 नवंबर 2015 को की थी. प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुंबई में बीआर अम्बेडकर की ‘स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी मेमोरियल’ की आधारशिला रखने के दौरान इसकी घोषणा की थी. उनकी 125वीं जयंती वर्ष के रूप में 26 नवम्बर 2015 को पहली बार संविधान दिवस मनाया गया था.

भारतीय संविधान: एक दृष्टि

  • संविधान निर्माण के लिए 29 अगस्त 1947 को भारत के संविधान का मसौदा तैयार करनेवाली समिति की स्थापना की गई थी और इसके अध्यक्ष के तौर पर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की नियुक्ति हुई थी.
  • संविधान सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए. दो दिन बाद इसे लागू किया गया था.
  • भारतीय संविधान को विश्व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता है, जिसमें 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां शामिल हैं.
    यह हस्तलिखित संविधान है. इसे तैयार करने में 2 साल 11 महीने और 17 दिन का वक्त लगा था.

26 नवम्बर: राष्ट्रीय दुग्ध दिवस, वर्गीज कुरियन का जन्मदिन

प्रत्येक वर्ष 26 नवंबर को संपूर्ण देश में ‘राष्ट्रीय दुग्ध दिवस’ (National Milk Day) मनाया जाता है. विश्‍व में यह दिवस 1 जून को जबकि भारत में आज के दिन मनाया जाता है. भारत में राष्ट्रीय दुग्ध दिवस ‘श्वेत क्रांति’ के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन के जन्मदिन के अबसर पर मनाया जाता है. दुनिया के सबसे बड़े कृषि कार्यक्रम ‘ऑपरेशन फ्लड’ के जनक डॉ. कुरियन का ये जन्म शताब्दी वर्ष भी है.

किसी व्यक्ति के जीवन में दूध के महत्व को बताने के उद्देश्य यह दिवस मनाया जाता है. पहली बार यह दिवस इंडियन डेयरी एसोसिएशन (IDA) द्वारा 26 नवंबर, 2014 को मनाया गया था.

डॉ वर्गीस कुरियन: एक दृष्टि

  • डॉ वर्गीस कुरियन को ‘मिल्कमैन ऑफ़ इंडिया’ के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने भारत में डेरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सराहनीय योगदान दिया था. कुरियन ने अमूल ब्रांड की स्थापना एवं सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
  • कुरियन ने ‘ऑपरेशन फ्लड’ में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. ऑपरेशन फ्लड को 1970 में शुरू किया गया था, यह विश्व का सबसे बड़ा डेरी विकास कार्यक्रम था. इस ऑपरेशन के चलते भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बन सका.
  • वर्गीस कुरियन को वर्ष 1963 में रमन मैगसेसे पुरस्कार (Ramon Magsaysay Award) से सम्मानित किया गया था. भारत सरकार ने 1999 में देश के दुसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ प्रदान किया था.

25 नवंबर: अन्तर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस

प्रत्येक वर्ष 25 नवम्बर को महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिये अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International Day for the Elimination of Violence Against Women) मनाया जाता है. यह दिवस महिलाओं पर हो रही हिंसा को रोकने के लिए लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से मनाया जाता है.

इस वर्ष यानी 2021 में अन्तर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस का मुख्य विषय (थीम) ‘ऑरेंज द वर्ल्ड: अब महिलाओं के खिलाफ हिंसा समाप्त करें!’ (Orange the World: End Violence against Women Now!) है.

घरेलू हिंसा, के साथ-साथ महिलाओं को बाहर भी कई बार शारीरिक और मानसिक यातनाएं झेलनी पड़ती हैं. इसी भेदभाव को खत्म करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने 17 नवंबर 1999 को 25 नवंबर का दिन अन्तर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस के रूप में घोषित किया था. वर्ष 2000 से हर साल 25 नवंबर को अन्तर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस मनाया जाने लगा.

21 नवम्बर को विश्व टेलीविजन दिवस मनाया गया

प्रत्येक वर्ष 21 नवम्बर को ‘विश्व टेलीविजन दिवस’ (World Television Day) मनाया जाता है. यह दिवस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक विविधता के स्तंभ का जश्न मनाने के उद्देश्य से मनाया जाता है.

संयुक्त राष्ट्र ने विश्व टेलीविजन दिवस मनाये जाने की शुरुआत 1996 में की थी. पहला विश्व टेलीविजन दिवस 21 नवंबर 1997 को मनाया गया था.

टेलीविजन के आविष्कारक जॉन लोगी बेयर्ड थे. बेयर्ड ने वर्ष 1924 में बक्से, बिस्किट के टिन, सिलाई की सुई, कार्ड और बिजली के पंखे से मोटर का इस्तेमाल कर पहला टेलीविजन बनाया था. टेलीविजन के रिमोट कंट्रोल का आविष्कार 1950 में यूजीन पोली ने किया था. मार्च 1954 में वेस्टिंगहाउस ने पहला कलर टीवी सेट बनाया.

भारत में टेलीविजन: मुख्य तथ्य

  1. भारत में पहला प्रसारण दिल्ली में 15 सितंबर 1959 में प्रायोगिक तौर पर शुरू किया गया था. शुरू में इसका नाम ‘टेलिविजन इंडिया’ था, 1975 में इसका नाम बदलकर दूरदर्शन रखा गया. शुरू में इसे सिर्फ 7 शहरों में दिखाया जाता था.
  2. टीवी पर पहली बार कृषि दर्शन कार्यक्रम की शुरुआत 1966 में की गई. यह टीवी पर सबसे लंबे समय तक चलने वाला कार्यक्रम था.
  3. 1980 के दशक में इसका प्रसारण देश के सभी शहरों में किया जाने लगा. 15 अगस्त 1982 को पहली बार इसका रंगीन प्रसारण शुरू किया गया.
  4. 16 दिसबंर 2004 को डायरेक्ट टू होम (DTH) सर्विस शुरू हुई, इसने छोटे परदे की दुनिया में क्रांतिकारी बदला लाया.
  5. पहला प्राइवेट चैनल 2 अक्टूबर 1992 को जी टीवी आया था. जी टीवी नए कार्यक्रमों के साथ दर्शकों के सामने आया.

20 नवंबर: विश्व बाल दिवस

प्रत्येक वर्ष 20 नवंबर को विश्व बाल दिवस (World Children’s Day) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य दुनिया भर में बच्चों के बीच जागरूकता और बच्चों के कल्याण के लिए काम करना है.

इस वर्ष यानी विश्व बाल दिवस 2021 की थीम: ‘प्रत्येक बच्चे के लिए एक बेहतर भविष्य’ (A Better Future for Every Child) है.

पहला विश्व बाल दिवस 20 नवंबर 1954 को मनाया गया था. इस दिन बाल अधिकारों को अपनाया गया था. बाल अधिकारों को चार अलग-अलग भांगों में बांटा गया है- जीवन जीने का अधिकार, संरक्षण का अधिकार, सहभागिता का अधिकार और विकास का अधिकार.

भारत में बाल दिवस 14 नवंबर को मनाया जाता है

भारत में बाल दिवस देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन यानी 14 नवंबर को मनाया जाता है. पंडित नेहरू बच्चों को बेहद प्यार करते थे और यही कारण है कि बाल दिवस उनकी जयंती के मौके पर मनाया जाता है.

19 नवंबर: विश्‍व शौचालय दिवस

प्रत्येक वर्ष 19 नवंबर को विश्‍व शौचालय दिवस (World Toilet Day) के रूप में मनाया जाता है. इस दिवस को मानाने का उद्देश्य शौचालय को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाना और स्‍वच्‍छता को वैश्विक विकास की प्राथमिकता बनाना है.

इस वर्ष यानी 2021 में विश्‍व शौचालय दिवस का मुख्य विषय (थीम) “मूल्यवान शौचालय” (Valuing Toilets) है.

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा ने वर्ष 2001 में विश्‍व शौचालय दिवस मानाने शुरुआत की थी. यह दिन विश्‍व में सफाई की समस्‍याओं के प्रति कदम उठाने की दिशा में हमें प्रेरित करता है.

मानव मल से जानलेवा बीमारियां फैलती हैं और इसके लिए शौचालय का प्रयोग जरूरी है. आज विश्‍व में लगभग 450 करोड़ लोगों के घरों में शौचालय नहीं है. इसे देखते हुए समावेशी विकास के लक्ष्‍यों के तहत वर्ष 2030 तक हर घर में शौचालय का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया है.

नवंबर का तीसरा गुरुवार: विश्व फिलॉस्पी दिवस से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

प्रत्येक वर्ष नवंबर के तीसरे गुरुवार को विश्व फिलॉस्पी दिवस (World Philosophy Day) के रूप में मनाया जाता है. इस वर्ष यानी 2021 में यह 18 नवम्बर को मनाया गया. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य दर्शन के मूल्य को सामने लाना और मानव विचारों का विकास करना है.

यूनेस्को ने इस दिवस को मनाने की घोषणा 2001 में की थी. पहला विश्व फिलॉस्पी दिवस साल 2002 में मनाया गया था. यूनस्कों की तरफ से कहा गया है कि इस दिन का मकसद लोगों को उनके विचार प्रकट करने के लिए प्रोत्साहित करना है. ताकी सभी संस्कृति के लोग एक दूसरे के विचारों की इज्जत करें और उस पर विश्वास करें.

18 नवंबर: राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस

प्रत्येक वर्ष 18 नवंबर को राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस (National Naturopathy Day) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य भोजन ही केवल चिकित्सा है पर बल देना है. इस दिन लोगों को प्राकृतिक उपचार एवं खान-पान के विषय में जानकारी प्राप्त होगी.

प्राकृतिक चिकित्सा दिवस को मनाये जाने की घोषणा आयुष मंत्रालय ने नवंबर 2018 में की थी. पहला प्राकृतिक चिकित्सा दिवस 2018 में मनाया गया था. आयुष (AYUSH) का पूर्ण रूप Ayurveda, Yoga and Naturopathy, Unani, Siddha and Homeopathy है.

प्राकृतिक चिकित्सा में विभिन्न विधियां आहार चिकित्सा, उपवास चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा, जल चिकित्सा, मालिश चिकित्सा, सूर्य किरण चिकित्सा, वायु चिकित्सा, क्षेत्रीय वनौषधियां का बिना दुष्प्रभाव प्रयोग होता है. इसमें मुख्य उपचार मिट्टी की पट्टी, मिट्टी का स्नान, सूर्य स्नान, गर्म और ठंडा सेक, कटी स्नान, मेहन स्नान, पैर-हाथ का गर्म सेंक, वाष्प स्नान, पूर्ण टब स्नान, रीढ़ स्नान सर्वांग गीली चादर लपेट, छाती की पट्टी, व घुटने की पट्टी, एनिमा, जलनेती, वमन, माथे की पट्टी, पेट की पट्टी रोगानुसार मालिश की क्रियाएं की जाती है.

16 नवंबर: अन्तर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस

प्रत्येक वर्ष 16 नवंबर को अन्तर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस (International Day for Tolerance) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य सहिष्णुता के प्रति लोगों में जागरूकता उत्पन्न करना है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1995 को संयुक्त राष्ट्र असहिष्णुता वर्ष घोषित किया था. 1996 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रत्येक वर्ष 16 नवंबर को अन्तर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस मनाने का निर्णय लिया था.

यूनेस्को ने वर्ष 1995 में महात्मा गांधी की 125वीं जयंती के अवसर पर सहिष्णुता और अहिंसा को बढ़ावा देने के लिए ‘मदनजीत सिंह पुरस्कार’ की स्थापना की थी. यह पुरस्कार वैज्ञानिक, कलात्मक, सांस्कृतिक या संचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रत्येक 2 वर्ष में प्रदान किया जाता है.

15 नवम्‍बर: भगवान बिरसा मुंडा की जयन्‍ती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया गया

15 नवम्‍बर को भगवान बिरसा मुंडा की जयन्‍ती को जनजातीय गौरव दिवस (Birsa Mundas Birth Anniversary: Janjati Gaurav Divas) के रूप में मनाया गया. जनजातीय गौरव दिवस मनाये जाने का फैसला हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने किया था. इस दिन को भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में घोषित किया गया है.

बिरसा मुंडा को पूरे देश में जनजाती‍य समुदाय में भगवान माना जाता है. इस दिन वीर स्‍वतन्‍त्रता सेनानी बिरसा मुंडा का स्‍मरण किया जाता है जिससे आने वाली पीढियां देश के लिए उनके बलिदान के बारे में जान सकें.

बिरसा मुंडा: एक दृष्टि

झारखंड राज्य जो पहले बिहार का हिस्सा था, का गठन 15 नवंबर 2000 को हुआ था. झारखंड के सपूत बिरसा मुंडा का जन्म भी 15 नवंबर को ही हुआ था. उनका जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के खूंटी जिले के उलीहातू गांव में हुआ था. वह मुंडा जनजाति से संबंधित थे. मुंडा जनजाति ज्यादातर छोटा नागपुर के पाठारों में निवास करती है.

  • बिरसा मुंडा ने शुरुआती पढ़ाई के दौरान ही यह समझ लिया था कि अंग्रेज यहां रहने वालों का शोषण करते हैं. स्थानीय जमींदार भी इसमें पीछे नहीं रहते. ये आदिवासियों से बेगार करवाते हैं और अंग्रेज जबरन कर वसूलते हैं. इसलिए उन्होंने अंग्रेजों और जमींदारों के खिलाफ एक सशक्त आदिवासी आंदोलन चलाया और अपने समाज में मौजूद कुछ कुरीतियों को भी हटाने का काम किया.
  • उन्होंने आदिवासियों के पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण अंधविश्वास और अशिक्षा को माना. इसलिए बिरसा ने मुंडाओं के बीच फैली झाड़-फूंक आदि को बेकार बताना शुरू किया. उन्होंने सफाई से रहने पर जोर दिया. यह भी बताया कि सफाई न रखने पर क्या नुकसान होता है. उन्होंने शिक्षा के महत्व को भी समझाया. उन्होंने अपने समाज के लोगों में राजनीतिक चेतना जगाने का काम भी किया.
  • बिरसा मुंडा ने लोगों को एकत्रित किया और 1 अक्टूबर 1894 को विद्रोह कर दिया. इन्होंने लगान माफी के लिए भी आंदोलन किया. लोगों ने बेगार करना बंद कर दिया. इससे उस इलाके का काम पूरी तरह ठप हो गया. अगले ही साल इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 2 साल की सजा हुई. बिरसा के शिष्यों ने अकाल के वक्त भी लोगों की भरपूर सहायता की. इस काम ने उन्हें जीते ही महापुरुष का दर्जा दे दिया. उस दौर में लोग उन्हें ‘धरती बाबा’ कहकर पुकारने लगे.
  • झारखंड में बिरसा न सिर्फ सामाजिक व राजनीतिक चेतना के प्रतीक हैं बल्कि वह धार्मिक चेतना के भी अग्रणी माने जाते हैं. बिरसा ने एक नए धर्म का सृजन किया जिसे ‘बिरसाइत धर्म’ कहा जाता है. झारखंड और बिहार में लोग उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं.
  • बिरसा मुंडा को बड़ा खतरा मानते हुए अंग्रेजों ने उन्हें जेल में डाल दिया और स्लो पॉइजन दिया. इस वजह से वह 9 जून 1900 को 25 साल से भी कम उम्र में शहीद हो गए.

15 नवम्बर: झारखंड स्‍थापना दिवस, बिरसा मुंडा की जयंती

15 नवम्बर को झारखंड स्‍थापना दिवस (Jharkhand Foundation Day) के रूप में मनाया जाता है. इसी दिन सन् 2000 में बिहार के विभाजन से झारखंड को पृथक राज्‍य का दर्जा दिया गया था.

बिरसा मुंडा जयंती पर पृथक राज्‍य का दर्जा

झारखंड को पृथक राज्‍य का दर्जा बिरसा मुंडा की जयंती के मौके पर मिला था. अंग्रेजी की गोलियों के सामने तीर-कमान से लड़ने वाले बिरसा मुंडा का जन्‍म 15 नवंबर 1875 को हुआ था. उनके जन्‍मदिन को देश भर में बिरसा मुंडा जयंती (Birsa Munda Jayanti) के रूप में मनाया जाता है.

उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अपनी जमीन और जंगलों पर कब्जा करने के लिए ‘उलगुलान’ (Great Tumult) नामक आंदोलन का नेतृत्व किया था. बिरसा मुंडा को 3 मार्च 1900 को ब्रिटिश सेना ने गिरफ्तार कर लिया था. 9 जून 1900 को रांची जेल में उनकी रहस्‍यमयी मौत हो गई. झारखंड के लोग बिरसा मुंडा को भगवान का अवतार मानते हैं.