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ISRO ने संचार उपग्रह जी-सैट 24 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 23 जून को संचार उपग्रह ‘जी-सैट 24’ (GSAT-24) का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया. यह प्रक्षेपण फ्रेंच गयाना के कौरू से एरियन 5 रॉकेट द्वारा किया गया.

मुख्य बिंदु

  • इसरो ने इसका निर्माण न्‍यू स्‍पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के लिये किया है. NSIL इसरो की वाणिज्यिक शाखा है.
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों के बाद NSIL का यह पहला मांग आधारित संचार उपग्रह मिशन है. इस उपग्रह की मांग टेलीविजन सेवा प्रदाता टाटा स्काई (टाटा समूह) ने किया था.
  • जी सैट-24 4180 किलोग्राम वजन वाला 24 केयू बैंड का संचार उपग्रह है, जो पूरे भारत में DTH ऐप की जरूरतें पूरी करेगा.
  • फ़्रेंच गयाना दक्षिण अमेरिका के उत्तरी अटलांटिक तट पर फ्रांस का एक विदेशी विभाग/क्षेत्र और एकल क्षेत्रीय प्राधिकरण है.

इसरो ने शुक्र की कक्षा में अंतरिक्षयान भेजने की योजना बनाई

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्र की कक्षा में अंतरिक्षयान भेजने की योजना बनाई है. इसका उद्देश्य शुक्र ग्रह की सतह का अध्ययन और इसके वातावरण में मौजूद सल्फ्यूरिक एसिड के बादलों के रहस्य का पता लगाना है. इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने यह घोषणा हाल ही में की थी. चंद्रयान और मंगलयान की सफलता के बाद इसरो शुक्र ग्रह के लिए मिशन पर काम कर रहा है.

शुक्र मिशन क्यों है महत्वपूर्ण

  • शुक्र ग्रह धरती का सबसे नजदीकी ग्रह है. यह आकार में पृथ्वी जैसा ही है. उसे सोलर सिस्टम का पहला ग्रह माना जाता है जहां जीवन था. धरती की तरह वहां भी महासागर था. वहां की जलवायु भी धरती की तरह थी.
  • शुक्र ग्रह अब जीवन के लायक नहीं है. वहां सतह का तापमान 900 डिग्री फारेनहाइट यानी 475 डिग्री सेल्सियस है. शुक्र का वातावरण कॉर्बन डाई-ऑक्साइड और सल्फ्यूरिक एसिड के पीले बादलों से घिरा हुआ है. शुक्र के वातावरण का घनत्व पृथ्वी के मुकाबले 50 गुना ज्यादा है. वीनस के अध्ययन से धरती पर भी जीवन के संभावित विनाश को टाला जा सकता है.
  • भारत दिसंबर 2024 तक शुक्र मिशन को लॉन्च करना चाहता है. इसकी वजह ये है कि उस वक्त पृथ्वी और शुक्र ग्रह की स्थिति ऐसी रहेगी कि किसी स्पेसक्राफ्ट को वीनस तक पहुंचने में कम से कम ईंधन लगे. अगर दिसंबर 2024 में लॉन्चिंग नहीं हो पाती है तो फिर उसके 7 साल बाद यानी 2031 में उस तरह की अनुकूल खगोलीय स्थिति बन पाएगी.
  • अबतक अमेरिका, रूस, यूरोपियन स्पेस एजेंसी और जापान ही वीनस मिशन लॉन्च किए हैं. सबसे पहले फरवरी 1961 में रूस ने शुक्र के लिए टी. स्पूतनिक मिशन को लॉन्च किया था लेकिन वह नाकाम हो गया. अगस्त 1962 में अमेरिका का मैरिनर-2 मिशन पहला सफल मिशन था.

डॉ. एस सोमनाथ इसरो के नए चेयरमैन नियुक्त

डॉ. एस. सोमनाथ को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. उन्होंने के सिवन का स्थान लिया है. उन्हें कार्मिक मंत्रालय द्वारा वरिष्ठता के आधार नियुक्त किया गया है. डॉ. सोमनाथ तीन साल के लिए इसरो के निदेशक के रूप में कार्य करेंगे.

डॉ. सोमनाथ ने स्ट्रक्चरल डिजाइन, लॉन्च व्हीकल सिस्टम इंजीनियरिंग, स्ट्रक्चरल डायनेमिक्स, मैकेनिज्म डिजाइन, पायरोटेक्निक में विशेषज्ञता हासिल की है.

इसरो के अध्यक्ष: एक दृष्टि

इसरो के अध्यक्ष भारतीय अंतरिक्ष विभाग के कार्यकारी अधिकारी होते हैं. विक्रम साराभाई इसरो के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले अध्यक्ष थे. उन्होंने 12 साल तक अपनी सेवाएं दी. डॉ. एस सोमनाथ इसरो अध्यक्ष नियुक्त होने वाले चौथे केरलवासी हैं. इससे पहले के. राधाकृष्णन, माधवन नायर और के. कस्तूरीरंगन इसरो अध्यक्ष रह चुके हैं.

गगनयान के लिए क्रायोजेनिक इंजन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने हाल ही में अन्तरिक्ष में मानव भेजने के मिशन ‘गगनयान’ के लिए क्रायोजेनिक इंजन की क्षमता सफलतापूर्वक परीक्षा किया था. यह परीक्षण तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में किया गया था.

गगनयान मिशन के लिए क्रायोजेनिक इंजन की क्षमता के लिए कई और परीक्षण किया जाना है. यह परीक्षण गगनयान के लिए क्रायोजेनिक इंजन की विश्वसनीयता और मजबूती सुनिश्चित करता है.

गगनयान मिशन

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अन्तरिक्ष में मानव भेजने के गगनयान मिशन की योजना बनाई है. इस मिशन के तहत दो मानव रहित उड़ानें और एक मानव सहित अंतरिक्ष उड़ान संचालित किया जायेगा. मानव सहित अंतरिक्ष उड़ान में एक महिला सहित तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्री होंगे. गगनयान पृथ्वी से 300-400 किमी की ऊंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा में 5-7 दिनों तक पृथ्वी का चक्कर लगाएगा.

ISRO का भू-पर्यवेक्षी उपग्रह GISAT-1 का प्रक्षेपण लक्ष्‍य के अनुरूप संपन्‍न नहीं हुआ

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 12 अगस्त को भू-पर्यवेक्षी उपग्रह GISAT-1 (EOS-03) का प्रक्षेपण किया था, लक्ष्‍य के अनुरूप संपन्‍न नहीं हो सका. यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्‍द्र से GSLV-F10 रॉकेट के माध्यम से किया गया था. यह GSLV की 14वीं उड़ान थी.

यह मिशन लक्ष्‍य के अनुरूप संपन्‍न नहीं हुआ. इस प्रक्षेपण का पहला और दूसरा चरण सामान्‍य रहा था. लेकिन क्रायो‍जनिक चरण का प्रक्षेपण तकनीकी व्‍यवधान के कारण नहीं हो सका.

GISAT-1 एक अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (Earth Observation Satellite) है. इसे GSLV-F10 रॉकेट द्वारा जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में रखा जाना था.

GSLV का पूर्ण रूप Geosynchronous Satellite Launch Vehicle है. इसमें ठोस रॉकेट बूस्टर और तरल-ईंधन वाले इंजन का उपयोग किया गया है. उपग्रह को इंजेक्ट करने के लिए आवश्यक थ्रस्ट के लिए तीसरा चरण एक क्रायोजेनिक इंजन द्वारा संचालित की जाती है.

भारत के प्रस्तावित सौर मिशन ‘आदित्य एल-1’ के लिए सपोर्ट सेल ‘AL1SC’ की स्थापना की गयी

भारत के प्रस्तावित पहला सौर मिशन ‘आदित्य एल-1’ (Aditya L-1 Mission) से प्राप्त होने वाले आंकड़ों को एक वेब इंटरफेस पर जमा करने के लिए एक कम्युनिटी सर्विस सेंटर की स्थापना की गई है. इस सेंटर का नाम ‘आदित्य L1 सपोर्ट सेल’ (AL1SC) दिया गया है. इसकी स्थापना उत्तराखंड स्थित हल्द्वानी में किया गया है.

आदित्य L1 सपोर्ट सेल (AL1SC): मुख्य बिंदु

  • इस सेंटर को भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (ISRO) और भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंस (ARIES) ने मिलकर बनाया है.
  • सपोर्ट सेल ‘AL1SC’ की स्थापना का उद्देश्य भारत के प्रस्तावित पहले सौर अंतरिक्ष मिशन आदित्य L1 (Aditya-L1) से मिलने वाले सभी वैज्ञानिक विवरणों और आंकड़ों का अधिकतम विश्लेषण करना है. इस केंद्र का उपयोग अतिथि पर्यवेक्षकों (गेस्ट ऑब्जर्वर) द्वारा किया जा सकेगा. यह विश्व के प्रत्येक इच्छुक व्यक्ति को आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण करने की छूट देगा.
  • AL1SC की स्थापना ARIES के उत्तराखंड स्थित हल्द्वानी परिसर में किया गया है, जो इसरो के साथ संयुक्त रूप काम करेगा.
  • यह केंद्र दुनिया की अन्य अंतरिक्ष वेधशालाओं से भी जुड़ेगा. सौर मिशन से जुड़े आंकड़े उपलब्ध कराएगा, जो आदित्य L1 से प्राप्त होने वाले विवरण में मदद कर सकते हैं.

भारत का प्रस्तावित सौर मिशन ‘आदित्य एल-1’

  • ‘आदित्य एल-1’ (Aditya-L1) भारत का प्रस्तावित पहला सौर मिशन है. इसरो (ISRO) ने अगले वर्ष (2022 में) इस मिशन को प्रक्षेपित करने की योजना बनायी है.
  • इसरो द्वारा आदित्य L-1 को 400 किलो-वर्ग के उपग्रह के रूप में वर्गीकृत किया है जिसे ‘ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान-XL’ (PSLV- XL) से प्रक्षेपित (लॉन्च) किया जाएगा.
  • आदित्य L-1 को सूर्य एवं पृथ्वी के बीच स्थित एल-1 लग्रांज/ लेग्रांजी बिंदु (Lagrangian point) के निकट स्थापित किया जाएगा. आदित्य L-1 का उद्देश्य ‘सन-अर्थ लैग्रैनियन प्वाइंट 1’ (L-1) की कक्षा से सूर्य का अध्ययन करना है.
  • यह मिशन सूर्य का नज़दीक से निरीक्षण करेगा और इसके वातावरण तथा चुंबकीय क्षेत्र के बारे में अध्ययन करेगा.
    आदित्य L-1 को सौर प्रभामंडल के अध्ययन हेतु बनाया गया है. सूर्य की बाहरी परतों, जोकि डिस्क (फोटोस्फियर) के ऊपर हजारों किमी तक फैला है, को प्रभामंडल कहा जाता है.
  • प्रभामंडल का तापमान मिलियन डिग्री केल्विन से भी अधिक है. सौर भौतिकी में अब तक इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिल पाया है कि प्रभामंडल का तापमान इतना अधिक क्यों होता है.
  • आदित्य L-1 देश का पहला सौर कॅरोनोग्राफ उपग्रह होगा. यह उपग्रह सौर कॅरोना के अत्यधिक गर्म होने, सौर हवाओं की गति बढ़ने तथा कॅरोनल मास इंजेक्शंस (CMES) से जुड़ी भौतिक प्रक्रियाओं को समझने में मदद करेगा.

लग्रांज/लेग्रांजी बिंदु क्या होता है?

सूर्य के केंद्र से पृथ्वी के केंद्र तक एक सरल रेखा खींचने पर जहां सूर्य और पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल बराबर होते हैं, वह लग्रांज बिंदु (Lagrangian point) कहलाता है.

लग्रांज बिंदु पर सूर्य और पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल समान रूप से लगने से दोनों का प्रभाव बराबर हो जाता है. इस स्थिति में वस्तु को ना तो सूर्य अपनी ओर खींच पाएगा, ना पृथ्वी अपनी ओर खींच सकेगी और वस्तु अधर में लटकी रहेगी.

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO): एक दृष्टि

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) भारत का राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान है. इसकी स्थापना वर्ष 1969 में की गई थी. इस संस्थान का प्रमुख काम उपग्रहों का निर्माण करना और अंतरिक्ष उपकरणों के विकास में सहायता प्रदान करना है.

आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंस (ARIES)

‘आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंस’ (ARIES), भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संचालित एक स्वायत्त संस्थान है. यह संस्थान उत्तराखंड की मनोरा पीक (नैनीताल) में स्थित है. इसकी स्थापना 20 अप्रैल, 1954 को की गई थी. इस संस्थान के कार्यक्षेत्र खगोल विज्ञान, सौर भौतिकी और वायुमंडलीय विज्ञान इत्यादि हैं.

ISRO ने साउंडिंग रॉकेट RH-560 का परीक्षण किया, हवाओं के बदलाव से जुड़े अध्ययन में मदद करेगा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 13 मार्च को अपने साउंडिंग रॉकेट RH-560 का परीक्षण किया था. यह परीक्षण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा परीक्षण केंद्र से किया गया था.

इसरो के साउंडिंग रॉकेट की मदद से इसरो वायुमंडल में मौजूद तटस्थ हवाओं में ऊंचाई पर होने वाले बदलावों और प्लाज्मा की गतिशीलता का अध्यन किया जाएगा. यह रॉकेट हवाओं में व्यवहारिक बदलाव और प्लाज्मा गतिशीलता पर अध्यन की दिशा में नए आयाम स्थापित करेगा.

ISRO ने PSLV-C51 राकेट से ब्राजील के अमे‍जोनिया-1 सहित 19 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 28 फरवरी को ब्राजील के अमे‍जोनिया-1 सहित 19 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया. यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C51 अन्तरिक्ष यान के माध्यम से किया गया. यह ISRO की वाणिज्यिक संस्था ‘न्‍यू स्‍पेस इंडिया लिमिटेड’ का पहला मिशन था.

इस प्रक्षेपण में PSLV-C51 द्वारा ब्राजील के अमेजोनिया-1 उपग्रह के साथ 18 अन्य उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा गया. ISRO ने इस बार सैटेलाइट के अलावा भगवद गीता की एक इलेक्ट्रॉनिक कॉपी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फोटो भी अंतरिक्ष में भेजी है.

मुख्य तथ्यों पर एक दृष्टि

  • PSLV-C51, PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) का 53वां और इस वर्ष का पहला मिशन था. इस अंतरिक्ष यान के शीर्ष पैनल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर उकेरी गई है.
  • PSLV-C51 रॉकेट ने ब्राजील के 637 किलोग्राम भार के एमेजोनिया-1 उपग्रह को सफलतापूर्वक उसकी कक्षा में स्थापित किया. बाद में एक घंटे से अधिक समय के अंतराल के बाद इसने शेष 18 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया.
  • अमेजोनिया-1, ब्राजील के नेशनल इंस्‍टीट्यूट फॉर स्‍पेस रिसर्च का प्रकाशीय पृथ्‍वी पर्यवेक्षण उपग्रह है. यह अमेजन क्षेत्र में वनों की कटाई की निगरानी और ब्राजील के लिए विविध कृषि के विश्लेषण के लिए उपयोगकर्ताओं को दूरस्थ संवेदी आंकड़े मुहैया कराएगा. साथ ही मौजूदा ढांचे को और मजबूत बनाएगा.
  • अमेजोनिया-1 के साथ 18 अन्य उपग्रह को भी सफलतापूर्वक उसकी कक्षा में स्थापित किया गया है. इन उपग्रहों में चेन्नई की स्पेस किड्ज़ इंडिया (SKI) का उपग्रह भी शामिल है. SKI ने एक एसडी कार्ड में भगवद्गीता की इलेक्ट्रॉनिक प्रति को अंतरिक्ष भेजा है.

ISRO ने संचार उपग्रह CMS-01 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 17 दिसम्बर को भारत के नये संचार उपग्रह CMS-01 का प्रक्षेपण किया. यह प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्‍द्र से किया गया. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का यह अपने देश में 77वां प्रक्षेपण था.

प्रक्षेपण PSLV C-50 अन्तरिक्ष यान से

CMS-01 का प्रक्षेपण PSLV C-50 अन्तरिक्ष यान से किया गया. PSLV का ये 52वां अभियान था. इस अभियान में PSLV C-50 ने CMS-01 उपग्रह को भू-समतुल्‍य अंतरण कक्षा में प्रक्षेपित किया. यह अभियान केवल 21 मिनट में पूरा हो गया.

CMS-01 उपग्रह: एक दृष्टि

CMS-01 संचार उपग्रह (Communication Satellite) है. यह उपग्रह 2011 में प्रक्षेपित की गई GSAT-2 संचार उपग्रह का जगह लेगा. इसका उपयोगी जीवनकाल सात वर्ष का होगा. इसकी मदद से टीवी चैनलों की पिक्चर गुणवत्ता सुधरने के साथ ही आपदा प्रबंधन के दौरान मदद मिलेगी.

CMS-01 उपग्रह में ट्रांसपोंडर लगे हैं, जिनसे Extended-C Band का इस्‍तेमाल करते हुए सेवाएं प्रदान की जा सकेंगी. इस उपग्रह के दायरे में भारत की मुख्य भूमि, अंडमान निकोबार और लक्षद्वीप द्वीप समूह होंगे.

ISRO ने GSLV-F 10 जियो इमेजिंग सैटेलाइट, GISAT-1 के प्रक्षेपण की घोषणा की

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 5 मार्च को जियो इमेजिंग सैटेलाइट- GISAT-1 का प्रक्षेपण करेगा. यह प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से किया जायेगा.

इस प्रक्षेपण में GSLV-F 10 राकेट के माध्यम से GISAT-1 सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (भू-समकालीन स्थानांतरण कक्षा- GTO) में स्थापित किया जाएगा. इसके बाद, उपग्रह प्रणोदन प्रणाली का उपयोग करके अंतिम भूस्थिर कक्षा में पहुंच जाएगा. यह GSLV का 14वां उड़ान होगा.

GISAT-1: एक दृष्टि

  • GISAT-1 एक अत्याधुनिक तेजी से धरती का अवलोकन करने वाला उपग्रह है. इसका वजन 2,275 किलोग्राम है.
  • इस GSLV उड़ान में पहली बार चार मीटर व्यास का ओगिव आकार का पेलोड फेयरिंग (हीट शील्ड) प्रवाहित किया जा रहा है.
  • GISAT-1 में इमेजिंग कैमरों की एक विस्तृत श्रंखला है. ये निकट इंफ्रारेड और थर्मल इमेजिंग करने में सक्षम हैं. इन कैमरों में हब्बल दूरदर्शी जैसा 700 एमएम का एक रिची च्रीटियन प्रणाली का टेलीस्कोप का इस्तेमाल किया गया है.
  • इसमें कई हाइ-रिजोल्यूशन कैमरे हैं जो उपग्रह की ऑन-बोर्ड प्रणाली द्वारा ही संचालित होंगे. इसकी एक और खासियत ये है कि ये 50 मीटर से 1.5 किलोमीटर की रिजोल्यूशन में फोटो ले सकता है.

ISRO ने स्कूली छात्रों के लिए यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम का दूसरा संस्करण शुरू किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 3 फरवरी को ‘युवा विज्ञानी कार्यक्रम- युविका’ (ISRO Young Scientist Programme) 2020 शुरू किया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूली छात्रों को अंतरिक्ष की जानकारी और उसकी टेकनोलॉजी की समझ को विकसित करना है.

युविका 2020 के लिए 24 फरवरी, 2020 तक www.isro.gov.in पर आवेदन किए जा सकते हैं. यह कार्यक्रम गर्मियों के छुट्टियों के दौरान दो सप्ताह 11 मई से 22 मई 2020 तक चलेगा.

इसरो का युविका कार्यक्रम 2019 में शुरू किया गया था. 2020 में इस कार्यक्रम का दूसरा संस्करण है. इस कार्यक्रम का मकसद बच्चों को स्पेस टक्नोलॉजी, स्पेस साइंस जैसी चीजों के बारे में जागरूक करना है.

योग्यता

जिन स्टूडेंट्स ने आठवीं की परीक्षा पास कर ली है और नौवीं में पढ़ाई कर रहे हैं, वह इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं. इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सीबीएसई, आईसीएसई और राज्‍य पाठ्यक्रम को मिलाकर हर राज्‍य/केंद्र शासित प्रदेश से तीन विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा.

चयन

उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन पंजीकरण के जरिए किया जाएगा. इसके लिए 24 फरवरी तक ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया चलेगी. 8वीं के प्राप्त मार्क्स और एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में प्रदर्शन के आधार स्टूडेंट्स का चयन होगा.

ISRO के संचार उपग्रह जीसैट-30 का फ्रेंच गुयाना से सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के संचार उपग्रह जीसैट-30 का 17 जनवरी को सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया. यह प्रक्षेपण फ्रेंच गुयाना के कोउरू लांच बेस से ‘एरियन-5’ रॉकेट (अन्तरिक्ष-यान) के माध्यम से किया गया. फ्रेंच गुयाना दक्षिण अमेरिका के उत्तर पूर्वी तट पर फ्रांस के क्षेत्र में स्थित है.

जियोसिनक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में प्रक्षेपित किया गया
प्रक्षेपण में उपग्रह जीसैट-30 को जियोसिनक्रोनस (भूतुल्यकालिक) ट्रांसफर ऑर्बिट में प्रक्षेपित किया गया. आने वाले दिनों में धीरे-धीरे करके चरणबद्ध तरीके से उसे जियोस्टेशनरी (भूस्थिर) कक्षा में भेजा जाएगा. जियोस्टेशनरी कक्षा की ऊंचाई भूमध्य रेखा से करीब 36,000 किलोमीटर होती है. जीसैट-11 को जियोस्टेशनरी कक्षा में 74 डिग्री पूर्वी देशांतर पर रखा जाएगा.

उपग्रह जीसैट-30: एक दृष्टि

  • जीसैट-30 टेलीविजन, दूरसंचार और प्रसारण के लिए गुणवत्‍तापूर्ण सेवाएं उपलब्‍ध कराएगा.
  • 30 वर्ष की मिशन अवधि वाला यह उपग्रह डीटीएच, टेलीविजन अपलिंक और वीसैट सेवाओं के लिए क्रियाशील संचार उपग्रह है.
  • तीन हजार 357 किलोग्राम के इस उपग्रह में 12-सी और 12-केयू बैंड के ट्रांसपोंडर लगे हैं.
  • यह उपग्रह केयू बैंड में भारतीय मुख्य भूमि और द्वीपों को, सी बैंड में खाड़ी देशों, बड़ी संख्या में एशियाई देशों और आस्ट्रेलिया को कवरेज प्रदान करेंगा.
  • यह अपेक्षाकृत अधिक कवरेज के साथ इनसैट-4A का स्‍थान लेगा, जिसकी अवधि समाप्‍त हो रही है.
  • भारत के अलावा ऑस्‍ट्रेलिया, खाड़ी देश, और बड़ी संख्‍या में अन्‍य एशियाई देश भी इसके दायरे में आयेंगे.
  • जीसैट-30 का पेलोड विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किया गया है कि ट्रांसपोंडरों की संख्‍या अधिक से अधिक बढ़ाई जा सके.