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गूगल ने विशाखापट्टणम में एआई केन्‍द्र बनाने की घोषणा की

गूगल ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टणम में अपना पहला और सबसे बड़ा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर हब स्थापित करने की घोषणा की है.

परियोजना से जुड़ी मुख्य बातें

  • गूगल अगले पाँच वर्षों (2026-2030) में इस AI हब पर लगभग 15 अरब डॉलर (लगभग $1.25 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करेगा.
  • यह अमेरिका के बाहर गूगल का सबसे बड़ा AI हब और डेटा सेंटर होगा.
  • इस परियोजना के लिए गूगल ने अडानी समूह और भारती एयरटेल के साथ साझेदारी की है.
  • इसमें गीगावाट-स्तरीय कंप्यूटिंग क्षमता वाला डेटा सेंटर, एक नया अंतर्राष्ट्रीय सबसी केबल गेटवे (समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली केबल का हब) और बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा का बुनियादी ढांचा शामिल होगा.
  • इसका उद्देश्य भारत में AI नवाचार को तेज करना, डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और देश की कंप्यूटिंग क्षमताओं को बढ़ाना है.

गूगल ने दुनिया का सबसे तेज क्वांटम कंप्यूटिंग चिप ‘क्वांटम सुपरिमेसी’ विकसित किया

गूगल (Google) ने दुनिया का सबसे तेज क्वांटम कंप्यूटिंग चिप विकसित करने का दावा किया है. इस चिप का नाम ‘क्वांटम सुपरिमेसी’ (Quantum Supremacy) दिया गया है.

यह दुनिया का मौजूदा सबसे तेज सुपर कंप्यूटर जिस काम को करने में 10 हजार साल लेता है उसे करने में ये नई चिप सिर्फ 200 सेकेंड लेगी. अगर गूगल का यह दावा सही साबित हुआ तो यह खोज कंप्यूटिंग की दुनिया को पूरी तरह बदल देगी.

गूगल ने 23 अक्टूबर को क्वांटम सुपरिमेसी की रिपोर्ट साइंटिफिक जर्नल ‘नेचर’ (Nature) में पब्लिश किया था. इस रिपोर्ट में गूगल ने इस बात का खुलासा किया कि उसने एक नया 54 qubit प्रोसेसर बनाया है जिसे साइकामोर (Sycamore) नाम दिया गया है.

IBM ने गूगल के इस दावे को गलत ठहराने की कोशिश की है. IBM ने कहा है कि खास तरह के कैलकुलेशन करने के लिए सुपर कंप्यूटर को 10000 साल लगेंगे, ऐसा नहीं है. क्योंकि सुपर कंप्यूटर इसी टास्क को सिर्फ 2.5 दिन में परफॉर्म कर सकते हैं.

उल्लेखनीय है कि क्वांटम सुपरिमेसी का कूटबद्ध सॉफ्टेवयर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में तत्काल इस्तेमाल होगा. इससे अधिक कुशल सौर पैनल, दवा बनाने और अधिक तेज गति से वित्तीय लेन-देन में मदद मिलेगी.

अमेरिका के फेडरल ट्रेड कमिशन ने YouTube पर 170 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया

अमेरिका के फेडरल ट्रेड कमिशन (FTC) ने Google की विडियो सर्विस YouTube पर 170 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया है. YouTube पर यह जुर्माना गैर-कानूनी तरीके से बच्चों की निजी जानकारी इकट्ठा करने के कारण लगाया गया है. YouTube पर आरोप है कि वह माता-पिता की सहमति के बिना के बच्चों के चैनलों के दर्शकों को कूकीज के जरिए ट्रैक करता था. YouTube इन कूकीज का इस्तेमाल लक्षित दर्शकों को विज्ञापन दिखाकर करोड़ों डॉलर कमाने के लिए करता था.