Tag Archive for: Bill

नई राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति ‘प्रहार’ का अनावरण

केंद्र सरकार ने भारत की पहली सार्वजनिक और व्यापक ‘राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति और रणनीति’ जारी की है. इसका नाम ‘प्रहार’ (PRAHAAR) दिया गया है. इस नीति की घोषणा केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने हाल ही में की थी.

यह नीति ‘आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) के स्पष्ट सिद्धांत पर आधारित है. इसका मुख्य उद्देश्य केवल आतंकी घटनाओं पर प्रतिक्रिया देना नहीं है, बल्कि खुफिया जानकारी (Intelligence-led) के आधार पर खतरों को पहले ही खत्म करना है.

प्रहार (PRAHAAR) का पूरन नाम

प्रहार (PRAHAAR) नाम अंग्रेजी के 7 अक्षरों से मिलकर बना है, जो इसकी रक्षा रणनीति के सात मुख्य स्तंभों को दर्शाते हैं:

  1. P (Prevention): खुफिया एजेंसियों (जैसे MAC और JTFI) के सटीक और रीयल-टाइम इनपुट से आतंकी हमलों को होने से पहले रोकना.
  2. R (Responses): पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा किसी भी खतरे के खिलाफ तुरंत, सटीक और आनुपातिक कार्रवाई करना.
  3. A (Aggregating): केंद्र और राज्यों की सभी सुरक्षा एजेंसियों को एक मंच पर लाकर एक दृष्टिकोण अपनाना.
  4. H (Human rights): कानून के शासन और मानवाधिकारों का पूरी तरह से सम्मान करते हुए आतंकवाद से निपटना और पीड़ितों को न्याय दिलाना.
  5. A (Attenuating): उन स्थितियों को जड़ से खत्म करना जो आतंकवाद को जन्म देती हैं, विशेषकर इंटरनेट के जरिए युवाओं में फैल रहे कट्टरपंथ को रोकना.
  6. A (Aligning): आतंकवाद की फंडिंग, हथियारों की सप्लाई चेन और सुरक्षित पनाहगाहों को खत्म करने के लिए वैश्विक संधियों (जैसे MLATs) और साझेदारों के साथ मिलकर काम करना.
  7. R (Recovery): किसी भी अप्रिय घटना के बाद देश और समाज को तुरंत सामान्य स्थिति में लाने के लिए ‘संपूर्ण-समाज’ का लचीलापन विकसित करना.

प्रहार की अन्य मुख्य विशेषताएं

  • धर्म और आतंकवाद का अलगाव: यह दस्तावेज बहुत ही स्पष्ट रूप से कहता है कि आतंकवाद का किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता या सभ्यता से कोई संबंध नहीं है और हिंसा को किसी भी वैचारिक या राजनीतिक आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता.
  • भविष्य के हाई-टेक खतरों से निपटना: पारंपरिक सीमा-पार आतंकवाद के साथ-साथ, यह नीति ड्रोन हमलों, हैकिंग, डार्क वेब, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग, और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाली टेरर फंडिंग पर कड़ा प्रहार करने पर केंद्रित है.
  • महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा: देश के अहम रणनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों जैसे- रेलवे, पावर ग्रिड, विमानन, बंदरगाह, रक्षा प्रतिष्ठान, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा सुविधाओं को साइबर और भौतिक हमलों से सुरक्षित करने पर विशेष जोर दिया गया है.
  • CBRNED हथियारों की रोकथाम: Chemical (रासायनिक), Biological (जैविक), Radiological (रेडियोलॉजिकल), Nuclear (परमाणु), Explosive (विस्फोटक), और Digital (डिजिटल) सामग्री तक आतंकियों की पहुंच को रोकने के लिए इसे एक बड़ी चुनौती माना गया है.

विकसित भारत – जी राम जी विधेयक 2025 संसद से पारित हुआ

संसद ने दिसंबर 2025 में ‘विकसित भारत – जी राम जी विधेयक 2025’ (Viksit Bharat – G RAM G Bill, 2025) पारित किया था. इसे राज्यसभा ने 18 दिसम्बर को मंज़ूरी दी थी. लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी थी.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 21 दिसंबर 2025 को इस विधेयक पर को मंजूरी दी थी, जिसके बाद अब यह अधिनियम (कानून) बन गया है.

विकसित भारत – जी राम जी अधिनियम 2025: मुख्य बिन्दु

  • ‘जी राम जी’ (G RAM G) का पूरा नाम है: Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission – Gramin.
  • इस अधिनियम ने 2005 के मनरेगा (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act- MGNREGA) अधिनियम की जगह लिया है.

G RAM G अधिनियम की मुख्य विशेषताएं और मनरेगा से इसके अंतर

रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी

  • मनरेगा के तहत साल में 100 दिन के काम की गारंटी थी, जिसे अब बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है.
  • यदि काम मांगने के 15 दिनों के भीतर रोजगार नहीं मिलता, तो सरकार बेरोजगारी भत्ता देने के लिए

‘पॉज विंडो’ (60 दिनों का अंतराल)

  • इस कानून में एक विशेष प्रावधान है जिसके तहत राज्य सरकारें साल में अधिकतम 60 दिनों तक कार्य रोकने (Pause) की अवधि तय कर सकती हैं.
  • इसका उद्देश्य बुवाई और कटाई के पीक सीजन के दौरान किसानों को मजदूरों की कमी से बचाना है, ताकि मजदूर खेती के कार्यों में योगदान दे सकें.

नया फंडिंग पैटर्न (60:40)

  • केंद्र और राज्य के बीच खर्च का अनुपात 60:40 होगा (मनरेगा में केंद्र का हिस्सा अधिक होता था).
  • पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 होगा.
  • बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश (UTs) का 100% खर्च केंद्र उठाएगा.

कार्य के प्राथमिकता क्षेत्र

नए कानून के तहत कार्यों को चार मुख्य श्रेणियों (Themes) में बांटा गया है:

  1. जल सुरक्षा: जल संरक्षण और संचयन से जुड़े कार्य.
  2. ग्रामीण बुनियादी ढांचा: गांवों में टिकाऊ संपत्तियों का निर्माण.
  3. आजीविका बुनियादी ढांचा: आय बढ़ाने वाले संसाधनों का विकास.
  4. जलवायु लचीलापन: चरम मौसम की घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले कार्य.

भुगतान और पारदर्शिता

  • मजदूरों को अब 15 दिन के बजाय हर हफ्ते मजदूरी का भुगतान किया जाएगा.
  • उपस्थिति के लिए डिजिटल माध्यम और भुगतान के लिए ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) का अनिवार्य उपयोग.
  • पारदर्शिता के लिए साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण (Public Disclosure) प्रणाली लागू की गई है.

विधेयक का उद्देश्य

विधेयक का उद्देश्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत की राष्ट्रीय भविष्य योजना के अनुरूप ग्रामीण विकास ढांचा स्थापित करना है.

विपक्ष का विरोध

विपक्षी दलों ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया है. उनका मुख्य ऐतराज योजना से ‘महात्मा गांधी’ का नाम हटाने और राज्यों पर वित्तीय बोझ (40% हिस्सा) बढ़ाने को लेकर है.

संसद ने ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन विधेयक 2025 पारित किया

संसद ने 22 अगस्त को ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन विधेयक 2025 पारित कर दिया है.

  • राष्ट्रपति ने लोकसभा और राज्यसभा द्वारा हाल ही में पारित ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन विधेयक (Promotion and Regulation of Online Gaming Bill) 2025 को 22 अगस्त को मंजूरी दे दी. राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही इस विधेयक ने अधिनियम का रूप ले लिया है.
  • सरकार का मानना ​​है कि ऑनलाइन मनी गेमिंग से जुड़ी लत, वित्तीय नुकसान और यहाँ तक कि आत्महत्या जैसे गंभीर परिणामों को ऐसी गतिविधियों की रोकथाम करके रोका जा सकता है.
  • कानून का उल्लंघन करने पर तीन साल तक की कैद और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने या दोनों का प्रावधान है. ऐसे खेलों का विज्ञापन करने पर ₹50 लाख या दो साल तक की कैद हो सकती है.
  • यह कदम भारत के 3.8 अरब डॉलर के गेमिंग उद्योग को प्रभावित करेगा, जिसने वैश्विक निवेशकों को आकर्षित किया है.

राष्ट्रपति की अनुशंसा पर सदन में प्रस्तुत

  • यह विधेयक भारतीय संविधान के अनुच्छेद 117 के अंतर्गत राष्ट्रपति की अनुशंसा पर सदन में प्रस्तुत किया गया था.
  • अनुच्छेद 117 में वित्तीय विधेयकों से संबंधित है. इसके तहत, राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना धन से संबंधित विधेयक को संसद में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है.

आगामी जनगणना में जाति गणना कराने का फैसला

सरकार ने आगामी जनगणना में जाति गणना भी कराने का फैसला किया है. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में 30 अप्रैल 2025 को हुई मंत्रिमंडल की राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCPA) ने यह निर्णय लिया.

कोविड-19 महामारी के कारण 2021 की जनगणना में देरी हुई है. अब इसकी 2025 में शुरू होने की उम्मीद है.

भारत में जनगणना का इतिहास

  • गवर्नर जनरल लॉर्ड मेयो के शासनकाल में, 1872 में पहली जनगणना शुरू की गई थी. यह जनगणना संपूर्ण भारत में नहीं की गई थी.
  • पहली पूर्ण जनगणना गवर्नर जनरल लॉर्ड रिपन के शासनकाल में 1881 में हुई, जो कि ब्रिटिश भारत की पहली समकालिक जनगणना थी. 1881 के बाद से, हर 10 साल में जनगणना की जाती रही है.
  • 1881 से, जनगणना गणना में जाति को शामिल किया गया था. आखिरी जाति गणना 1931 में हुई थी.
  • स्वतंत्रता के बाद, भारत सरकार ने जाति गणना बंद कर दी. हालाँकि, 1951 से हर जनगणना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आबादी की जनगणना की गई. कई विसंगतियों पाये के कारण सरकार ने  जाति के आंकड़ों को कभी जारी नहीं किया.
  • 2015 में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना से जाति के आंकड़ों को वर्गीकृत करने के लिए अरविंद पंगरिया की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था.

जातिगत जनगणना का महत्व

  • जातिगत जनगणना वंचित समूहों की पहचान करने और उन्हें नीति निर्माण की मुख्य धारा में लाने में मदद कर सकती है.
  • जनसंख्या पर उचित आँकड़े के बिना इन नीतियों के प्रभाव और प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

जातिगत जनगणना के नुकसान

  • जातियों को परिभाषित करना एक जटिल मुद्दा है, क्योंकि भारत में हजारों जातियाँ और उपजातियाँ पाई जाती हैं.
  • जातिगत जनगणना जाति व्यवस्था को सबल करेगी. इससे समाज में भ्रम, विवाद और विभाजन की वृद्धि की स्थिति बन सकती है.

सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान

  • संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का प्रावधान है.
  • 103वें संविधान संशोधन अधिनियम 2019 ने अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन किया और सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10% आरक्षण का प्रावधान किया.

संसद से पारित वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 प्रभाव में आया

  • वक्फ संशोधन अधिनियम (Waqf Amendment Bill) 08 अप्रैल 2025 से देश में प्रभावी. केंद्र सरकार ने इसको लेकर हाल ही में अधिसूचना जारी की थी.
  • अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने इससे संबंधित अधिसूचना भारत के राजपत्र (The Gazette of India) में प्रकाशित की थी.
  • वक्फ संधोशन विधेयक को संसद के दोनों सदनों और राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गई थी. जिसके बाद से यह अधिनियम बन गया.
  • राज्‍यसभा ने वक्फ संधोशन विधेयक को 4 अप्रैल मंजूरी दी थी. 128 सदस्‍यों ने इस विधेयक के पक्ष में और 95 ने विपक्ष में मतदान किया.
  • लोकसभा में 3 अप्रैल को 288 सदस्यों ने विधेयक के पक्ष में जबकि 232 सदस्यों ने विरोध में मतदान किया था. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अप्रैल को विधेयक को अपनी मंजूरी दी थी.
  • वक्फ संशोधन विधेयक 2025 का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, शासन संरचनाओं में सुधार करना और वक्फ संपत्तियों को दुरुपयोग से बचाना है.

वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के मुख्य बिन्दु

  • इस अधिनियम के तहत वक्फ बोर्ड अब किसी भी संपत्ति पर मनमाने तरीके से दावा नहीं कर सकता है.
  • विवाद की स्थिति में अदालत में भी चुनौती दी जा सकती है और पांच साल तक इस्लाम का पालन करने वाला ही वक्फ को संपत्ति दान कर सकता है.
  • आदिवासी बहुल राज्यों और इलाकों में जमीन सहित अन्य संपत्तियों को वक्फ संपत्ति घोषित नहीं की जा सकेगी. वक्फ की ऐसी संपत्ति जो राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, उसको बचा पाना मुश्किल होगा.
  • वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति होगी. इस्लाम धर्म के एक विशेषज्ञ का बोर्ड का सदस्य होना जरूरी है.
  • वक्फ बोर्ड और परिषद में दो महिला सदस्यों की नियुक्ति जरूरी. किसी भी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित करने से पहले सत्यापन अति आवश्यक.
  • जिला कलेक्टर वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण करेगा, स्वामित्व सुनिश्चित करेगा.
  • निर्णय लेने में गैर मुस्लिम, अन्य मुस्लिम, पसमांदा मुस्लिम, पिछड़े मुस्लिम और महिलाओं को भी शामिल किया जाएगा.

संसद ने त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक  पारित किया

  • संसद ने हाल ही में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक 2025 पारित था. राज्य सभा ने यह विधेयक 1 अप्रैल 2025 को पारित किया गया था, जबकि लोकसभा ने इसे 26 मार्च 2025 को पारित किया था. राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह अधिनियम बन जाएगा.
  • इस विधेयक का उद्देश्य गुजरात के आनंद में सहकारी विश्वविद्यालय स्थापित करना है. यह देश का पहला सहकारी विश्वविद्यालय होगा.
  • इस विधेयक के अनुसार ग्रामीण प्रबंधन संस्थान आनंद (IRMA) का नाम बदलकर त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय कर दिया जाएगा. IRMA की स्थापना 1979 में गुजरात के आनंद में एक सोसायटी के रूप में की गई थी.
  • IRMA की स्थापना भारत में श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीस कुरियन के नेतृत्व में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), भारत सरकार, गुजरात सरकार, भारतीय डेयरी निगम और स्विस एजेंसी फॉर डेवलपमेंट कोऑपरेशन के सहयोग से की गई थी.
  • भारत को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए IRMA के सहयोग से 1970 में ऑपरेशन फ्लड (श्वेत क्रांति) शुरू किया गया था.
  • त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय एक केंद्रीय विश्वविद्यालय होगा. यह सहकारी क्षेत्र की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए शिक्षा और क्षमता निर्माण प्रदान करेगा.

1 जुलाई से तीन नये आपराधिक कानून को लागू किया गया

भारतीय संसद द्वारा पारित तीन नये आपराधिक कानून को 1 जुलाई 2024 से लागू कर दिया गया. संसद के शीतकालीन सत्र 2023 के दौरान इन कानूनों को पारित किया गया था. ये कानून हैं-  भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य विधेयक.

मुख्य बिन्दु

  • भारतीय न्‍याय संहिता को भारतीय दण्‍ड संहिता (आईपीसी) 1860 के स्‍थान पर लागू किया गया है. यह देश में फौजदारी अपराधों से संबंधित प्रमुख कानून है.
  • भारतीय नागरिक सुरक्षा सं‍हिता को दण्‍ड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) 1973 के स्थान पर लागू किया गया है. इसमें गिरफ्तारी, अभियोग और जमानत की प्रक्रिया के प्रावधान हैं.
  • भारतीय साक्ष्‍य विधेयक, भारतीय साक्ष्‍य अधिनियम 1872 का स्‍थान लिया है. इसमें देश के न्‍यायालयों में साक्ष्‍यों की स्वीकार्यता से जुडे प्रावधान हैं.
  • नए कानूनों में पूराने औपनिवेशिक कानूनों के विपरीत ‘न्याय’ प्रदान करने पर जोर दिया गया है, जबकि औपनिवेशिक कानूनों में ‘सज़ा’ पर अधिक ध्यान दिया जाता था.
  • ये नये आपराधिक कानून जांच, सुनवाई और अदालती प्रक्रियाओं में प्रौद्योगिकी के उपयोग पर बल देते हैं.
  • नए आपराधिक कानूनों के प्रमुख प्रावधानों में घटनाओं की ऑनलाइन रिपोर्टिंग, किसी भी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करना और साथ ही पीड़ितों को एफआईआर की मुफ्त प्रति मिलना शामिल है.
  • इसके अलावा, गिरफ्तारी की स्थिति में व्यक्ति को इच्‍छानुसार किसी व्‍यक्ति को अपनी स्थिति के बारे में सूचित करने का अधिकार है.
  • नए कानून त्वरित न्याय और पीड़ितों के अधिकार सुनिश्चित करेंगे. नए कानूनों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच को भी प्राथमिकता दी गई है.
  • सरकार ने देश विरोधी गतिविधि के खिलाफ नए प्रावधानों के साथ राजद्रोह कानून को समाप्त कर दिया है.
  • सामूहिक दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध के लिए अब 20 वर्ष की कैद या आजीवन कारावास की सजा होगी. नाबालिग से दुष्कर्म के लिए मौत की सजा दी जाएगी.
  • नए कानूनों में भीड की हिंसा (मॉब लिंचिंग) के विरूद्ध भी प्रावधान हैं. नस्ल, जाति, समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा और अन्य कारणों से जो मॉब्लिंचिंग होता है. इसमें सात वर्ष के कारावास से लेकर मृत्यु की सजा, आजीवन करावास तक इसके अंदर जोड़ा गया है.

सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधन रोकथाम अधिनियम 2024 को लागू किया गया

सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधन रोकथाम अधिनियम 2024 को 22 जून से लागू कर दिया गया. इसकी आधिकारिक अधिसूचना हाल ही में कार्मिक मंत्रालय ने जारी की थी. इस अधिनियम में प्रतियोगी परीक्षाओं में कदाचार और अनियमितताओं पर नियंत्रण के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है.

मुख्य बिन्दु

  • सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधन रोकथाम विधेयक, 2024 संसद से पारित होने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे 12 फरवरी को मंजूरी दी थी.
  • संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), बैंकिंग भर्ती परीक्षा निकायों और अन्‍य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने के लिए यह अधिनियम बनाया गया है.
  • इस अधिनियम में धोखाधड़ी रोकने के लिए न्यूनतम तीन से पांच साल की कैद का प्रावधान रखा गया है. साथ ही धोखाधड़ी के संगठित अपराधों में शामिल लोगों को 5 से 10 साल की कैद और न्यूनतम एक करोड़ रुपये का जुर्माना देना होगा.

सार्वजनिक परीक्षा कदाचार रोकथाम विधेयक 2024 को मंजूरी

राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सार्वजनिक परीक्षा कदाचार रोकथाम विधेयक (Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Bill) 2024 को 13 फ़रवरी को मंजूरी दे दी. संसद ने हाल में बजट सत्र में यह विधेयक पारित किया था.

मुख्य बिन्दु

  • विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली और अनुचित तरीकों का इस्तेमाल रोकना है.
  • विधेयक में अपराध साबित होने पर तीन से 10 वर्ष तक के कारावास और 10 लाख से लेकर एक करोड़ रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है.
  • इस विधेयक के तहत आने वाले सभी अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समाधेय होंगे.

जल प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण संशोधन विधेयक 2024 संसद में पारित

संसद ने हाल ही में जल प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण संशोधन विधेयक 2024 पारित किया था. लोकसभा ने इसे 8 फ़रवरी को स्‍वीकृति दी, राज्यसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी थी.

मुख्य बिन्दु

  • जल प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण संशोधन विधेयक, 2024 के माध्यम से जल प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण अधिनियक, 1974 को संशोधित किया गया है.
  • अधिनियम के अंतर्गत जल प्रदूषण पर रोक लगाने और नियंत्रण के लिए केन्द्र और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थापना का प्रावधान है.
  • नए विधेयक के अंतर्गत कई उल्लंघनों को अपराधमुक्त किया गया है और जुर्माने लगाएं गए हैं. विधेयक के अनुसार प्रावधानों के उल्लंघन के लिए 10 हजार रुपये से 15 लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा.
  • शुरुआत में यह हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होगा.

संसद से तीन आपराधिक संहिता विधेयकों के पारित किया

भारतीय संसद से हाल ही में तीन तीन आपराधिक संहिता विधेयकों के पारित किया था. संसद के शीतकालीन सत्र 2023 के दौरान इन तीन विधेयकों को पेश किया गया था. ये विधेयक हैं-  भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक 2023.

भारतीय न्‍याय द्वितीय संहिता 2023, भारतीय दण्‍ड संहिता (आईपीसी) 1860 का स्‍थान लेगी. यह देश में फौजदारी अपराधों से संबंधित प्रमुख कानून है. भारतीय नागरिक सुरक्षा द्वितीय सं‍हिता 2023, दण्‍ड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) 1973 का स्‍थान लेगी. इसमें गिरफ्तारी, अभियोग और जमानत की प्रक्रिया के प्रावधान हैं. भारतीय साक्ष्‍य द्वितीय विधेयक 2023, भारतीय साक्ष्‍य अधिनियम 1872 का स्‍थान लेगी. इसमें देश के न्‍यायालयों में साक्ष्‍यों की स्वीकार्यता से जुडे प्रावधान हैं.

मुख्य बिन्दु

  • राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इन विधेयकों ने कानून का रूप ले लिया है. ये कानून औपनिवेशिक काल के पुराने आपराधिक कानूनों का स्थान लेंगे.
  • इन अधिनियमों में कानूनी, पुलिस और जांच प्रणालियों को अद्यतन किया गया है जिससे कमजोर लोगों के लिए सुरक्षा बढ़ती है. इससे संगठित अपराध और आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी प्रतिक्रिया की सुविधा भी मिलती है.
  • नए अधिनियमों में प्रथम सूचना रिपोर्ट से लेकर केस डायरी, आरोप पत्र और अदालत के फैसले तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल बनाने का प्रावधान है.
  • इन अधिनियमों में आतंकवादी गतिविधियों, मॉब लिंचिंग, भारत की संप्रभुता को खतरा पैदा करने वाले अपराधों को कानूनों में शामिल किया गया है और बलात्कार जैसे कई अपराधों में सजा में बढ़ोतरी की गई है.
  • भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों को एक नए अपराध की कैटेगिरी में डाला गया है. जबकि तकनीकी रूप से राजद्रोह को आईपीसी से हटा दिया गया है.
  • आतंकवादी कृत्य, जो पहले गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम जैसे विशेष कानूनों का हिस्सा थे, इसे अब भारतीय न्याय संहिता में शामिल किया गया है.
  • पॉकेटमारी जैसे छोटे संगठित अपराधों समेत संगठित अपराध से निपटने के लिए प्रावधान पेश किए गए हैं. पहले इस तरह के संगठित अपराधों से निपटने के लिए राज्यों के अपने कानून थे.
  • मॉब लिंचिंग, यानी जब पांच या अधिक लोगों का एक समूह मिलकर जाति या समुदाय आदि के आधार पर हत्या करता है, तो समूह के प्रत्येक सदस्य को आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी.
  • शादी का झूठा वादा करके संबंध बनाने को विशेष रूप से अपराध के रूप में पेश किया गया है. व्यभिचार और धारा 377, जिसका इस्तेमाल समलैंगिक यौन संबंधों पर मुकदमा चलाने के लिए किया जाता था, इसे अब हटा दिया गया है.
  • पहले केवल 15 दिन की पुलिस रिमांड दी जा सकती थी. लेकिन अब अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसे 60 या 90 दिन तक दिया जा सकता है.
  • छोटे अपराधों के लिए सजा का एक नया रूप सामुदायिक सेवा को शामिल किया गया है. सामुदायिक सेवा को समाज के लिए लाभकारी बताया गया है. जांच-पड़ताल में अब फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने को अनिवार्य बनाया गया है.
  • एफआईआर, जांच और सुनवाई के लिए अनिवार्य समय-सीमा तय की गई है. उदाहरण के लिए, अब सुनवाई के 45 दिनों के भीतर फैसला देना होगा, शिकायत के 3 दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करनी होगी.
  • अब सिर्फ मौत की सजा पाए दोषी ही दया याचिका दाखिल कर सकते हैं. पहले गैर सरकारी संगठन या नागरिक समाज समूह भी दोषियों की ओर से दया याचिका दायर कर देते थे.

संसद ने केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2023 पारित किया

संसद ने हाल ही में केंद्रीय विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक (Central Universities Amendment Bill) 2023 पारित किया है. राज्यसभा ने 14 दिसम्बर को इसे मंजूरी दी जबकि लोकसभा ने इसे पहले ही पारित कर चुका था.

मुख्य बिन्दु

  • यह विधेयक विभिन्‍न राज्‍यों में शिक्षण और अनुसंधान के लिए केंद्रीय विश्‍वविद्यालयों की स्थापना से सम्‍बंधित है.
  • इसमें तेलंगाना के लिए केंद्रीय जनजातीय विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना का प्रावधान है. इसका नाम सम्‍मक्‍का-सरक्‍का केन्द्रीय जनजातीय विश्‍वविद्यालय होगा.
  • इससे जनजातीय समुदाय के लोगों को उच्च शिक्षा और अनुसंधान की सुविधाएं प्राप्त होगी.