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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वीडन, ब्रिटेन और जर्मनी की यात्रा

Commonwealth Head of Government Meeting CHOGM 2018
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन यूरोपीय देशों की यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन यूरोपीय देशों की यात्रा समाप्त कर 21 अप्रैल को स्वदेश लौट आए. प्रधानमंत्री ने 16 से 20 अप्रैल तक इस यात्रा में स्वीडन, ब्रिटेन और जर्मनी की यात्रा की. उन्होने अपनी यात्रा की शुरुआत स्वीडन से की जहाँ नोर्डिक देशों के सम्‍मेलन में भाग लिया. इस यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री ने लंदन में आयोजित चोगम में हिस्सा लिया. स्वीडन और ब्रिटेन की सफल यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल के साथ दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने के तरीकों पर चर्चा की.

स्वीडन

प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा की शुरुआत की स्वीडन से की. तीन दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली स्वीडन यात्रा थी. स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में प्रोटोकॉल तोड़ते हुए हवाई अड्डे पर उनकी अगवानी स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टेफान लोफवेन ने की.

स्वीडन में प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों की शुरूआत स्वीडन के राजा किंग कार्ल सोलहवें गुस्ताफ से मुलाक़ात से शुरू हुई. स्वीडन किंग के आधिकारिक आवास रॉयल कैस्टल में हुई इस मुलाक़ात के दौरान द्विपक्षीय सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई.

भारत और स्वीडन के बीच समझौते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 अप्रैल को स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टेफ़ान लवैन के साथ राजधानी स्टॉकहोम में द्विपक्षीय वार्ता की. इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच आपसी संबंधो को मजबूत करने पर बात हुई. भारत और स्वीडन के बीच नवोन्मेष (इनोवेशन पार्टनरशिप) और सयुंक्त कार्ययोजना (ज्वाइंट एक्शन प्लान) पर सहमति बनी. साथ ही सुरक्षा सहयोग खासकर साइबर सुरक्षा और मजबूत करने का फैसला हुआ है.

स्टॉकहोम में पहले भारत-नॉर्डिक सम्मेलन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 अप्रैल को स्‍टॉकहोम में आयोजित भारत- उत्‍तरी यूरोप (नोर्डिक) देशों के सम्‍मेलन में भाग लिया. इस सम्मेलन का आयोजन नॉर्डिक देशों के प्रधानमंत्रियों और भारत तथा स्‍वीडन द्वारा किया गया था. प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार इस सम्‍मेलन में भाग लिया. इसमें नार्वे, स्वीडल, फिनलैंड, डेनमार्क, आइसलैंड के शासनाध्यक्षों ने हिस्सा लिया.
क्या है नॉर्डिक्स? नॉर्डिक्स उत्तरी यूरोप और उत्तरी अटलांटिक के भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्र हैं, जहां वे सबसे ज्यादा नॉर्डेन (शाब्दिक रूप से ‘उत्तर’) के नाम से जाना जाता है. नार्डिक क्षेत्र में स्वीडन, फिनलैंड, नार्वे, आइसलैंड व डेनमार्क जैसे देश हैं शामिल हैं. गौरतलब है कि स्वीडन नार्डिक देशों का सदस्य भी है और ये संगठन उच्च आय वाले समाज का प्रतिनिधित्व करता है.

स्‍वीडन के प्रमुख कारोबारियों से मुलाकात

भारत-स्वीडन के साथ विर्निमाण क्षेत्र में मज़बूती के साथ क़दम रख रहा है. साथ ही दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1.8 अरब डॉलर है. ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन के प्रमुख उद्योगपतियों से भी मुलाक़ात की. गौरतलब है कि 170 से अधिक स्वीडिश कंपनियों का लगभग 1.4 अरब डॉलर का निवेश भारत में है. साथ ही स्वीडन में रहने वाले तकरीबन 20 हज़ार भारतीयों के लिए भी प्रधानमंत्री का दौरा काफी उत्साह वाला है.

ब्रिटेन

अपनी इस यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री 18 अप्रैल को स्‍वीडन से ब्रिटेन पहुँचे. ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे के आमंत्रण पर हो रही पीएम की इस यात्रा में दोनों देश तमाम मसलों पर बात किये. दोनों देशों के मजबूत संबंधों को याद करते हुए पीएम ने यात्रा पर रवानगी से पहले उम्मीद जताई थी कि उनकी इस यात्रा से दोनों देशों के परस्पर सहयोग को नई गति मिलेगी.

भारत की बात सबके साथ

प्रधानमंत्री ने 18 अप्रैल को लंदन में आयोजित ‘भारत की बात सबके साथ’ कार्यक्रम को संबोधित किया. यह प्रधानमंत्री के साथ सीधी बातचीत का विशेष आयोजन था, जिसमें वे भारत से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दिए.

राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (चोगम)

राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (कामनवेल्थ हेड्स ऑफ़ गवर्नमेंट मीटिंग- चोगम) का आयोजन 19 और 20 अप्रैल को लंदन में किया गया. 20 साल बाद ब्रिटेन ने चोगम की मेजबानी की. 53 राष्ट्रमंडल देशों के शासनाध्यक्षों ओर प्रतिनिधियों ने इस बैठक में हिस्सा लिया. चोगम की यह बैठक ऐसे समय हुई जब ब्रिटेन यूरोपीय संघ को छोड़ चुका है और राष्ट्रमंडल देशों के साथ संबंधों को नए सिरे से गढ़ने की कोशिश कर रहा है. वर्ष 2009 के बाद यह पहली बार था, जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री कॉमनवेल्थ शिखर सम्मेलन का हिस्सा लिया. माल्टा में हुई पिछली बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी शामिल नहीं हो सके थे.

लंदन के बकिंघम पैलेस में आयोजित चोगम की आधिकारिक उद्घाटन ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय ने किया. इस मौके पर ब्रिटेन का प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने राष्ट्रमंडल के सदस्य देशों से मिलकर काम करने का आह्वान किया. बैठक के एजेंडे में जलवायु परिवर्तन, छोटे द्वीपीय देशों पर मंडराते खतरे प्रमुख थे. इसके अलावा शांति स्थापना और बेहद गरीब देशों को मदद भी एजेंडे में थे. बैठक में शांति, समृद्धि, सुरक्षा, व्यापार और निवेश पर ध्यान दिया गया है. इसके अलावा वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग को बढ़ाने, संगठित अपराध और साइबर अपराध पर मुख्य ध्यान रहा.

चोगम से पहले भारत-ब्रिटेन का संयुक्त बयान

राष्ट्रमंडल सम्मेलन से पहले भारत-ब्रिटेन संयुक्त बयान में भी दोनों देशों ने मिलकर राष्ट्रमंडल को मजबूत करने और साझा तथा वैश्विक चुनौतियों से निपटने का संकल्प जताया.
संयुक्त बयान के मुख्य बिन्दु

  1. ब्रिटेन और भारत जरुरी कदम उठाकर सभी राष्ट्रमंडल नागरिकों के लिए एक अधिक स्थायी, समृद्ध, सुरक्षित और न्यायपूर्ण भविष्य बनाने में मदद करने के लिए संकल्प व्यक्त करेंगे.
  2. दोनों देश प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए दुनिया भर के देशों के साथ मिलकर काम करेंगे.
  3. साइबर अपराध से निपटने में सदस्य देशों की क्षमता बढ़ाने के लिए मदद करेंगे.
  4. विश्व व्यापार संगठन के व्यापार समझौते को लागू करने में तकनीकी मदद देकर सदस्य देशों की मदद करेंगे.
  5. 2020 तक साइबर सुरक्षा पर मिलकर काम करने का निर्णय

राष्ट्रमंडल देशों ने 2020 तक साइबर सुरक्षा पर मिलकर काम करने का निर्णय लिया है. राष्ट्रमंडल देशों के शासनाध्यक्षों के सम्मेलन में 53 देश अपने साइबर सुरक्षा ढांचे के मूल्यांकन और सशक्तिकरण तथा कार्रवाई के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए. 20 अप्रैल को जारी विज्ञप्ति में, इस घोषणा को साइबर सुरक्षा सहयोग के क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी घोषणा बताया गया.

अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता

चोगम की बैठक शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे के बीच हुई द्विपक्षीय बातचीत के दौरान भी राष्ट्रमंडल समूह को फिर से पुनर्जीवित करने पर चर्चा हुई थी. दोनों नेताओं के बीच युवाओं पर ध्यान देने की बात को शामिल किया गया, जिनकी आबादी में 60 फीसदी की हिस्सेदारी है. प्रधानमंत्री मोदी युवा और महिला के विकास के लिए 16 वर्ष से कम आयु के तीस लड़कों और तीस लड़कियों को भारत में बीसीसीआई के माध्यम से क्रिकेट प्रशिक्षण देने की भी बात कही. इसके अलावा, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने लंदन में ही ऑस्‍ट्रेलिया, बंगलादेश, दक्षिण अफ्रीका, त्रिनिडाड और टोबैगो, गाम्बिया और मॉरीशस जैसे देशों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की.

कॉमनवेल्थ चीफ के रूप में महारानी के उत्तराधिकारी होंगे प्रिंस चार्ल्स

महारानी एलिजाबेथ के पुत्र प्रिंस चार्ल्स 53 सदस्यीय राष्ट्रमंडल के अगले प्रमुख होंगे. राष्ट्रमंडल के सभी नेताओं ने इस पर अपनी सहमति जताई है. यह फैसला महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के एक घर वाटरलू चैंबर में हुए रिट्रीट में लिया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस रिट्रीट के दौरान वहां मौजूद थे.

क्या है राष्ट्रमंडल?

ब्रिटिश शासन से मुक्त हुए देशों के बीच विश्वास पैदा करने और आपसी साझेदारी को बढावा देने के लिए इसकी स्थापना की गयी थी. राष्ट्रमंडल देशों का शिखर सम्मेलन प्रत्येक दो साल में आयोजित किया जाता है. राष्ट्रमंडल दुनिया के सबसे पुराने राजनीतिक समूहों में से एक है.

जर्मनी

स्वीडन और ब्रिटेन की सफल यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी 20 अप्रैल को जर्मनी पहुंचे. प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल के साथ दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने के तरीकों पर चर्चा की.

जर्मनी की चांसलर के तौर पर चौथी बार मर्केल के पद भार संभालने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह पहली मुलाकात थी. प्रधानमंत्री मोदी की ये तीसरी जर्मनी यात्रा है. दोनों नेता सबसे पहले साल 2015 में हनोवर मेस्सी में दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक मेले में मेक इन इंडिया के वैश्विक लॉन्च के मौके पर एक मंच पर आये थे. मई 2017 में दोनों देशों के संबंधों में नयी उड़ान देखने को मिली जब भारत-जर्मनी अंतर सरकारी वार्ता के दौरान दोनों नेता मिले. दोनों देशों के बीच 12 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं.

जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. जनवरी 2000 से अबतक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में जर्मनी सातवें नंबर पर आता है. जर्मनी के निवेशकों ने कई सेक्टरस में भारत में निवेश किया है. इसमें परिवहन, विद्युत उपकरण, धातु उद्योग,केमिकल , सेवा क्षेत्र,निर्माण क्षेत्र और ऑटोमोबाइल क्षेत्र मुख्य रूप से शामिल हैं. जर्मन ऑटो इंडस्ट्री की दिग्गज कंपनियां भारत के बाजार में पहली ही उतर चुकी हैं. इसमें वोक्सवैगन, बीएमडब्लू और ऑडी जैसी कंपनियां शामिल हैं. इन कंपनियों ने भारत में विनिर्माण संयंत्र भी स्थापित किए हैं. इसके अलावा दूसरी जर्मन कंपनियों की बात करें तो उसमें सीमेंस, बॉश, ड्यूश बैंक और लुफ्थांसा शामिल हैं.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जर्मनी भारत का अहम सहयोगी रहा है. भारत-जर्मनी में मजबूत द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग भी रहा है. भारत की अनेक क्षेत्रों में मौजूदा प्राथमिकताएं नवीकरणीय ऊर्जा, कौशल विकास, स्मार्ट सिटी, पानी और अपशिष्ट प्रबंधन, नदियों, रेलवे आदि की सफाई जैसे अधिकांश क्षेत्रों पर जर्मनी की विशेषज्ञता और अनुभव का लाभ मिल सकता है.

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