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15 अगस्त 2022: देशभर में 76वां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया

देशभर में 15 अगस्त 2022 को 76वां स्वतंत्रता दिवस (76th Independence Day 2022) मनाया गया. इस दिन देश की स्वतंत्रता का 75 वर्ष सम्‍पन्‍न हुआ. इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह देश में चल रहे ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के साथ मनाया गया.

76वें स्वतंत्रता दिवस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी दिल्ली में ऐतिहासिक लालकिले की प्राचीर से लगातार 9वीं बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया और राष्ट्र को संबोधित किया.

प्रधानमंत्री के संबोधन के मुख्य बिंदु

  • 76वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत प्रेमियों और भारतीयों को आजादी के अमृत महोत्सव की बधाई दी.
  • प्रधानमंत्री ने ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान’ में ‘जय अनुसंधान’ को जोड़ नया नारा दिया. जय जवान, जय किसान का का नारा लालबहादुर शास्त्री ने दिया था, जबकि ‘जय विज्ञान’ को बाद में अटल बिहारी वाजपेयी ने जोड़ा था.
  • उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत सरकारी एजेंडा या कार्यक्रम नहीं है, यह जनआंदोलन है. हमें दुनिया पर निर्भर रहना छोडना होगा और भारत को आत्मनिर्भर बनाना होगा.
  • भाई-भतीजावाद, परिवारवाद देश की प्रतिभाओं को नुकसान पहुंचाता है, देश की क्षमताओं को नुकसान पहुंचाता है और भ्रष्टाचार को जन्म देता है.
  • भ्रष्टाचार देश को दीमक की तरह खोखला कर रहा है. हम भ्रष्टाचार के खिलाफ एक निर्णायक कालखंड में कदम रख रहे हैं.
  • उन्होंने देश वासियों के लिए 25 साल का ब्लूप्रिंट रखा और कहा कि यह ब्लूप्रिंट तभी कामयाब होगा जब हम पांच प्रण लेंगे. ये प्रण हैं – विकसित भारत बनाना, दासता के हर लक्षण को दूर करना, विरासत पर गर्व, एकता और एकजुटता और नागरिकों का कर्तव्य.

पहली बार तिरंगे को 21 तोपों की सलामी स्वदेशी तोप से दी गई

आजादी के 75 साल बाद यह पहली बार था जब लाल किले पर तिरंगे को 21 तोपों की सलामी देने के लिए ‘मेड इन इंडिया’ (भारत में निर्मित) तोप का इस्तेमाल किया गया. इसके लिए स्वदेश विकसित होवित्जर तोप ATAG का इस्तेमाल किया गया. इसका विकास DRDO ने किया है.

13-15 अगस्त: हर घर तिरंगा अभियान

13 से 15 अगस्त तक देश में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान मनाया गया. यह अभियान आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत शुरू किया गया था.

इस अभियान का उद्देश्य भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने पर लोगों को अपने घर पर राष्ट्र ध्वज फहराने के लिए प्रेरित करना था.

प्रधानमंत्री नेरेन्द्र मोदी ने ‘हर घर तिरंगा डॉट कॉम’ पर तिरंगे के साथ अपने चित्र साझा करने का सभी लोगों से अनुरोध किया था.

15 अगस्त 2022 को देश की स्वतंत्रता के 75 वर्ष सम्‍पन्‍न हुआ. इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह देश में चल रहे ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के साथ मनाया गया.

15 अगस्त 2022: श्री अरविंद घोष की 150वीं जयंती

15 अगस्त 2022 को श्री अरविंद घोष (श्री अरबिंदो) की 150वीं जयंती (सार्धशती) मनाई गई. उनका जन्म इसी दिन 1872 में कलकत्ता में हुआ था. महर्षि अरविंद की 150वीं जयंती का उत्सव मनाने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था.

श्री अरविंद घोष: एक दृष्टि

  • श्री अरविंद स्वतंत्रता के अग्रदूत, क्रांतिकारी, कवि, लेखक, दार्शनिक, ऋषि, मंत्रद्रष्टा एवं महान योगी थे.
  • केवल सात वर्ष की उम्र में उन्हें इंग्लैंड पढ़ने के लिए भेजा गया. 1910 तक, वह स्वतंत्रता आंदोलन के प्रभावशाली नेताओं में से थे. बाद में, वे आध्यात्मिक सुधारक बन गए.
  • अरविंदो घोष ने ‘कर्मयोगी’ नामक अंग्रेजी साप्ताहिक का संपादन किया था. वे वंदे मातरम जैसे समाचार पत्रों के संपादक भी थे.
  • श्री अरबिंदो घोष का मृत्यु 5 दिसम्बर 1950 को पुडुचेरी में हुआ था. पुडुचेरी में, श्री अरबिंदो आश्रम की स्थापना 1926 में हुई थी.
  • श्री अरबिंदो घोष को “अलीपुर षड्यंत्र केस” में अंग्रेज सरकार द्वारा गिरफ्तार किया गया था. उनको कोर्ट ने सन् 1909 में बाइज्जत बरी कर दिया था.
  • श्री अरबिंदो घोष की मुख्य कृतियाँ: एस्सेज़ ऑन गीता, द लाइफ़ डिवाइन, कलेक्टेड पोयम्स एण्ड प्लेज़, द सिंथेसिस ऑफ़ योगा, द ह्यूमन साइकिल, द आईडियल ऑफ़ ह्यूमन यूनिटी, ए लीजेंड एण्ड ए सिंबल, ऑन द वेदा, द फ़ाउन्डेशन ऑफ़ इंडियन कल्चर

14 अगस्त 2022: पहला ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मनाया गया

14 अगस्त 2022 को भारत में “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” मनाया गया था. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2021 को 75वें स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में इस दिवस को मनाने की घोषणा की थी.

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य भारत की वर्तमान और भावी पीढ़ियों को विभाजन के दौरान लोगों द्वारा सही गई यातना और वेदना का स्मरण दिलाना है.

14 अगस्त को भारत ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन लोगों को भारी मन से याद किया जिन्होंने हमारे तिरंगे के सम्मान और मातृभूमि के प्रति प्रेम लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी.

ब्रिटिश शासन से मुक्ति के साथ ही भारत का विभाजन हुआ था और पाकिस्तान अस्तित्व में आया था. धर्म के आधार पर भारत के विभाजन के पश्चात बड़े पैमाने पर हिंसा की घटनाएँ हुई, जिसके कारण लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ा और असंख्य लोग हिंसा में मारे गये. उन लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया है.

13 अगस्त: विश्व अंगदान दिवस से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

प्रत्येक वर्ष 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस (World Organ Donation Day) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य सामान्य मनुष्य को मृत्यु के बाद अंगदान करने की प्रतिज्ञा दिलाने के लिए प्रोत्साहित करना हैं. जागरूकता की कमी के कारण, लोगों के मन में अंगदान के बारे में भय और मिथक विद्यमान हैं.

अंगदान में अंगदाता के अंगों जैसे कि हृदय, लीवर (यकृत), गुर्दे, आंत, फेफड़े, और अग्न्याशय का दान उसकी मृत्यु के पश्चात ज़रूरतमंद व्यक्ति में प्रत्यारोपित करने के लिए किया जाता है.

27 नवम्बर को राष्ट्रीय अंगदान दिवस मनाया जाता है

27 नवम्बर को भारत में राष्ट्रीय अंगदान दिवस मनाया जाता है. 27 नवम्बर 2021 को राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोट्टो) ने देश में 12वां अंगदान दिवस (11th Organ Donation Day) मनाया था.

भारत सरकार ने 1994 में ‘मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम’ पारित किया था. इस अधिनियम का उद्देश्य मानव अंग व्यापार को रोकना तथा मृत्यु के बाद अंगदान को बढ़ावा देना था. 2011 में इस अधिनियम में संशोधन किया गया था.

श्रावणी पूर्णिमा: विश्व संस्कृत दिवस

भारत में प्रतिवर्ष श्रावणी पूर्णिमा के दिन विश्व संस्कृत दिवस (World Sanskrit Day) के रूप में मनाया जाता है. इस वर्ष यानी 2022 में श्रावणी पूर्णिमा 12 अगस्त को था.

सन् 1969 में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के आदेश से केन्द्रीय तथा राज्य स्तर पर संस्कृत दिवस मनाने का निर्देश जारी किया गया था. तब से संपूर्ण भारत में संस्कृत दिवस श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है.

श्रावणी पूर्णिमा का दिन इसीलिए चुना गया था क्योंकि प्राचीन भारत में इसी दिन शिक्षण सत्र शुरू होता था. इसी दिन वेद पाठ का आरंभ होता था तथा इसी दिन छात्र शास्त्रों के अध्ययन का प्रारंभ किया करते थे.

12 अगस्त: अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस (International Youth Day) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य युवाओं के मुद्दों और उनकी बातों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है.

इस वर्ष यानी 2022 में अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस का मुख्य विषय (थीम) “अंतर-पीढ़ीगत एकजुटता: सभी उम्र के लिए एक विश्व बनाना” (Intergenerational Solidarity: Creating a World for All Ages) है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1999 में यह दिवस मनाये जाने का फैसला किया था. अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन पहली बार साल 2000 में किया गया था. संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 1985 को ‘अंतरराष्ट्रीय युवा वर्ष’ घोषित किया था.

12 अगस्त: विश्‍व हाथी दिवस से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को विश्‍व हाथी दिवस (World Elephant Day) मनाया जाता है. इस दिवस का आयोजन हाथियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जाता है. एशियाई और अफ्रीकी हाथियों की घटती संख्‍या की ओर तत्‍काल ध्‍यान आकृष्‍ट करने के लिए यह दिवस 2012 से मनाया जा रहा है.

वर्ष 2011 में ‘एलीफैंट रिइंट्रोडक्शन फाउंडेशन’ (Elephant Reintroduction Foundation) और कनाडाई फिल्म निर्माता पेट्रीसिया सिम्स एवं माइकल क्लार्क द्वारा विश्व हाथी दिवस की कल्पना की गई थी. पहला विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त, 2012 को मनाया गया था.

वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) के हालिया आंकड़ों के अनुसार विश्व में लगभग 4,40,000 हाथी हैं.

भारत में हाथियों का संरक्षण

एशियाई हाथी की तीन उप-प्रजातियाँ हैं: भारतीय, सुमात्रन तथा श्रीलंकन. भारत में हाथी को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife (Protection) Act, 1972) की अनुसूची 1 में शामिल करते हुए भारतीय वन्यजीव कानून के तहत उच्चतम संभव संरक्षण प्रदान किया गया है. सरकार ने वर्ष 2011 में भारतीय हाथी को देश का राष्ट्रीय विरासत पशु घोषित किया था.

8 अगस्त 2022: ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 80वीं वर्षगांठ

8 अगस्त 2022 को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (अगस्त क्रांति दिवस) की 80वीं वर्षगांठ (80th Quit India Movement) मनाई गयी. आज से 80 साल पहले 1942 में आज ही के दिन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने बंबई अधिवेशन में ‘भारत छोड़ो प्रस्ताव’ को मंजूरी दी थी, इससे स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए एक बड़े आंदोलन का मार्ग प्रशस्त हुआ था.

8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने ब्रिटिश शासन खत्म करने का बिगुल बजाया था. इसकी नींव मुंबई के गोवलिआ टैंक, यानि की अगस्त क्रांति मैदान में रखी गयी थी. क्रिप्स मिशन की असफलता के बाद गांधी जी ने मुंबई में गोवालिया टैंक मैदान में अपने भाषण में ‘करो या मरो’ का आह्वान किया था.

भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा के एक दिन बाद ही महात्‍मा गांधी और अन्‍य कई नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था. बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के दौरान जयप्रकाश नारायण और राममनोहर लोहिया जैसे दूसरे पंक्ति के नेताओं ने आंदोलन में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई. भारत छोड़ो आंदोलन 1947 में भारत के एक संप्रभु राष्ट्र बनने से पहले आयोजित अंतिम प्रमुख सविनय अवज्ञा आंदोलन था.

प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं को अहमदनगर किले में कैद किया गया था

भारत छोड़ो आन्‍दोलन में महाराष्‍ट्र के अहमदनगर किले की विशेष भूमिका रही है. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बारह प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं को इसी किले में कैद कर रखा गया, जिनमें पंडित जवाहरलाल नेहरू भी शामिल थे. यहीं पर उन्होनें अपना लोकप्रिय ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ ग्रंथ लिखा. सन 2003 में, भारतीय पुरातत्वशास्त्र सर्वेक्षण ने अहमदनगर किले को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया.

गांधीजी को आगा खान पॅलेस में रखा गया था

भारत छोड़ो आन्‍दोलन का आरम्भ मुंबई में करने के पश्चात महात्मा गांधीजी को हिरासत में लेकर पुणे के आगा खान पॅलेस में रखा गया. उनके साथ उनकी पत्नी कस्तुरबा तथा उनके नीजी सचिव महादेव देसाई भी थे. इस दौरान कस्तुरबा तथा देसाई का यहीं पर देहान्त हुआ, उनकी समाधियां आगा खान पॅलेस में स्थित है.

7 अगस्त: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day) मनाया जाता है. इस दिवस का उद्देश्य हथकरघा उद्योग के महत्व एवं आमतौर पर देश के सामाजिक आर्थिक योगदान में इसके महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना और हथकरघा को बढ़ावा देना, बुनकरों की आय को बढ़ाना और उनके गौरव में वृद्धि करना है.

हथकरघा दिवस मनाने के लिए 7 अगस्‍त का दिन भारतीय इतिहास में विशेष महत्‍व का होने के कारण चुना गया है. इसी दिन 1905 में ब्रिटिश सरकार द्वारा बंगाल के विभाजन के विरोध में स्‍वदेशी आंदोलन शुरू हुआ था. इस दिन कोलकाता के टाउनहॉल में एक महा जनसभा में स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक रूप से शुरुआत की गई थी.

भारत सरकार ने इसी की याद में हर वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में घोषित किया था. पहला राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2015 में मनाया गया था. 7 अगस्त 2022 को 8वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया गया.

6 अगस्त 2022: हिरोशिमा पर परमाणु बमबारी की 77वीं वर्षगांठ

प्रत्येक वर्ष 6 अगस्त को हिरोशिमा दिवस (Hiroshima Day) और जापान में शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है. द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के दौरान जापान के हिरोशिमा पर इसी दिन में परमाणु बम गिराया गया था. इसे मानव इतिहास में काला दिन भी कहा जाता है. इसे दिवस के रूप में इसलिए मनाया जाता है, ताकि दुनिया इस तबाही से कुछ सीख ले. आज जापानी शहर पर परमाणु बमबारी की 77वीं वर्षगांठ है.

हिरोशिमा दिवस: मुख्य तथ्यों पर एक दृष्टि

  • अमेरिका दुनिया का इकलौता देश है, जिसने मानव इतिहास में सबसे बड़ा नरसंहार करने वाले परमाणु बमों का इस्तेमाल किया है.
  • द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने 6 अगस्त 1945 को जपान के हिरोशिमा नामक नगर में ‘लिटिल बॉय’ नामक यूरेनियम गिराया था. यह बम उस समय का सबसे शक्तिशाली बम माना जाता था.
  • हिरोशिमा को तबाह करने के बाद अमेरिका ने 9 अगस्त 1945 को नागासाकी पर ‘फैट मैन’ नामक प्लूटोनियम बम गिराया.
  • हिरोशिमा नगर जापान के होन्शु द्वीप में स्थित है जबकि नागासाकी क्यूशू द्वीप में स्थित है.

29 अगस्त: राष्‍ट्रीय खेल दिवस, मेजर ध्यानचंद का जन्म-दिन

प्रत्येक वर्ष 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस (National Sports Day) के रूप में मनाया जाता है. यह दिन सुप्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. उनका जन्म इसी दिन 1905 में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था.

राष्ट्रीय खेल दिवस के दिन देश के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है. इन सम्मान में ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार और द्रोणाचार्य पुरस्कारों के अलावा तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार, अर्जुन पुरस्कार आदि शामिल हैं.

मेजर ध्यानचंद: एक दृष्टि

  • मेजर ध्यानचंद ने भारत को ओलंपिक में 3 स्वर्ण पदक दिलवाए थे. भारत ने 1932 में 37 मैच में 338 गोल किए, जिसमें 133 गोल ध्यानचंद ने किए थे.
  • दूसरे विश्व युद्ध से पहले ध्यानचंद ने 1928 (एम्सटर्डम), 1932 (लॉस एंजिल्स) और 1936 (बर्लिन) में लगातार तीन ओलंपिक में भारत को हॉकी में स्वर्ण पदक दिलाए.
  • 1956 में ध्यानचंद को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया.