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भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता

भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने 27 जनवरी 2026 को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दिया है. इस समझौते को तकनीकी रूप से ‘व्यापक व्यापार और निवेश समझौता’ (Broad-based Trade and Investment Agreement – BTIA) कहा जाता है. दोनों संसदों (भारतीय और यूरोपीय संसद) से मंजूरी के बाद यह समझौता लागू होगा.

समझौते की घोषणा

इस समझौते की घोषणा भारत की यात्रा आए यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर की.

एंटोनियो कोस्टा (Antonio Costa) और उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) भारत के 77वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) समारोह के मुख्य अतिथि (Chief Guests) के रूप में भारत आए थे.

मदर ऑफ ऑल डील्स

यह समझौता भारत और EU दोनों के लिए अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक व्यापार सौदा है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (Mother of All Deals) कहा है. यह वैश्विक जीडीपी का 25% और वैश्विक व्यापार का एक-तिहाई कवर करता है.

समझौते की मुख्य बातें

  • यूरोपीय संघ को भारत के 99.5% निर्यात से शुल्क हटाएगा. भारत भी EU के 96.6% सामानों पर टैरिफ कम या खत्म करेगा.
  • यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क चरणबद्ध तरीके से 110% से घटाकर 10-40% के बीच लाया जाएगा. एक साल में केवल 50,000 लग्जरी कारें ही कम टैक्स पर आ सकेंगी ताकि भारतीय कार कंपनियों को नुकसान न हो.
  • 750ml से ऊपर की महंगी शराब बोतलों पर शुल्क 150% से घटाकर 50% और धीरे-धीरे 20% तक लाया जाएगा. सस्ती शराब पर शुल्क अभी भी रहेगा.
  • पास्ता, चॉकलेट और जैतून के तेल (Olive Oil) जैसे उत्पादों पर शुल्क 0% किया जाएगा. भारतीय कपड़ा, चमड़ा, फर्नीचर, खेल के सामान और आभूषण पर शुल्क 0% किया जाएगा.
  • भारत ने 102 और EU ने 144 सेवा क्षेत्रों (IT, शिक्षा, वित्त, पर्यटन) में पहुंच प्रदान की है.
  • भारतीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए डेयरी उत्पाद, सोया मील और अनाज जैसे क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा गया है.
  • यूरोपीय संघ ने अपने बीफ, पोल्ट्री और चीनी क्षेत्रों को उदार बनाने से मना किया है.
  • यूरोपीय कंपनियों को भारत के बैंकिंग, बीमा और लीगल सर्विसेज (कानूनी सलाह) में कुछ शर्तों के साथ काम करने की अनुमति मिली है.
  • अगर किसी यूरोपीय कंपनी और भारत सरकार के बीच विवाद होता है, तो उसे निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल में सुलझाया जाएगा.

भारत को मुख्य लाभ

  • कपड़ा (Textile), चमड़ा, रत्न और आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को यूरोपीय बाजार में जीरो ड्यूटी एंट्री मिलेगी. इससे लाखों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है.
  • भारतीय पेशेवरों (IT इंजीनियर्स, डॉक्टर्स) के लिए यूरोप में काम करना और वीजा प्राप्त करना आसान होगा. छात्रों के लिए ‘पोस्ट-स्टडी वर्क’ के बेहतर अवसर मिलेंगे.
  • भारत खुद को वैश्विक सप्लाई चेन में चीन के एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित कर सकेगा.

यूरोपीय संघ को मुख्य लाभ

  • यूरोप को भारत के रूप में एक विशाल और बढ़ता हुआ बाजार मिला है. भारत का मध्यम वर्ग यूरोपीय सामानों (जैसे लक्जरी कारें, ब्रांडेड कपड़े, शराब और खाद्य पदार्थ) का बड़ा उपभोक्ता बन रहा है.
  • इस समझौते से यूरोपीय कंपनियों को सीमा शुल्क के रूप में सालाना लगभग 4 अरब यूरो (₹36,000 करोड़) की बचत होगी, जिससे उनके उत्पाद भारत में सस्ते और प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे.
  • भारत के साथ यह समझौता यूरोप को चीन का एक विश्वसनीय और लोकतांत्रिक विकल्प प्रदान करता है.

बुल्गारिया आधिकारिक तौर पर यूरोजोन का 21वां सदस्य बना

बुल्गारिया 1 जनवरी 2026 को आधिकारिक तौर पर यूरो मुद्रा को अपनाने वाला यूरोजोन (Eurozone) का 21वां सदस्य बन गया है.

मुख्य बिन्दु

  • यह बुल्गारिया के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि वह 2007 में यूरोपीय संघ (EU) में शामिल होने के लगभग 19 साल बाद अपनी राष्ट्रीय मुद्रा ‘लेव’ (Lev) को छोड़कर ‘यूरो’ को अपना चुका है.
  • विनिमय दर 1 यूरो = 1.95583 बुल्गारियाई लेव निर्धारित की गई है. जनवरी 2026 के पूरे महीने तक लेव और यूरो दोनों मुद्राएँ साथ-साथ चलेंगी. 1 फरवरी 2026 से केवल यूरो ही वहां की एकमात्र कानूनी मुद्रा (Legal Tender) रह जाएगी.

यूरोजोन: एक दृष्टि

  • यूरोज़ोन (Eurozone) उन यूरोपीय संघ (EU) सदस्य देशों का एक समूह है, जिन्होंने यूरो (€) को अपनी एकमात्र आधिकारिक मुद्रा के रूप में अपनाया है.
  • यूरोज़ोन की औपचारिक शुरुआत 1 जनवरी 1999 को हुई थी, जब 11 देशों ने अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को छोड़कर केवल वित्तीय लेनदेन के लिए यूरो को अपनाया था. 2002 में इसके भौतिक सिक्के और नोट प्रचलन में आए.
  • यूरोज़ोन की मौद्रिक नीति का नियंत्रण यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) द्वारा किया जाता है, जिसका मुख्यालय फ्रैंकफर्ट (जर्मनी) में है.
  • किसी भी EU देश को यूरोज़ोन में शामिल होने के लिए ‘मास्ट्रिच मानदंड’ (Maastricht Criteria) को पूरा करना होता है. इनमें कम मुद्रास्फीति (inflation), स्थिर विनिमय दर और नियंत्रित सरकारी कर्ज जैसे आर्थिक मानक शामिल हैं.

यूरोज़ोन के सदस्य

  • प्रारंभिक सदस्य (1999): ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, लक्ज़मबर्ग, नीदरलैंड, पुर्तगाल और स्पेन
  • बाद में जुड़े सदस्य: ग्रीस, स्लोवेनिया, साइप्रस, माल्टा, स्लोवाकिया, एस्टोनिया, लातविया (2014), लिथुआनिया (2015), क्रोएशिया (2023)

यूरोपीय संघ (EU) बनाम यूरोज़ोन

  • यूरोपीय संघ 27 देशों का एक राजनीतिक और आर्थिक संघ है जबकि यूरोज़ोन, EU के भीतर उन देशों का समूह है जो ‘यूरो’ मुद्रा का उपयोग करते हैं.
  • डेनमार्क, स्वीडन, पोलैंड, चेक गणराज्य, हंगरी और रोमानिया EU के सदस्य देश होने के बावजूद वे अपनी राष्ट्रीय मुद्रा का ही उपयोग करते हैं और यूरोज़ोन का हिस्सा नहीं हैं.

यूरोज़ोन में शामिल होने के लाभ

  • सदस्य देशों के बीच व्यापार करते समय मुद्रा विनिमय (Currency Exchange) की कोई लागत नहीं आती.
  • साझा मौद्रिक नीति के कारण महंगाई पर बेहतर नियंत्रण रहता है.
  • अमेरिकी डॉलर के बाद यूरो दुनिया की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण आरक्षित मुद्रा (Reserve Currency) है.
  • अब पर्यटकों को मुद्रा विनिमय की झंझट से मुक्ति मिलेगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है.

प्रधानमंत्री ने यूरोपीय देश क्रोएशिया की आधिकारिक यात्रा संपन्न की

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 19 जून तक साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया की यात्रा पर थे. यात्रा की शुरुआत उन्होंने साइप्रस से की थी. साइप्रस के बाद वे जी-7 शिखर सम्‍मेलन हिस्सा लेने कनाडा गए थे.
  • प्रधानमंत्री मोदी यात्रा के अंतिम चरण में 18 जून को क्रोएशिया की सरकारी यात्रा पर गए थे. वे जी-7 शिखर सम्‍मेलन हिस्सा लेने के बाद यहाँ पहुंचे थे. वे क्रोएशिया की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं.
  • उन्होंने राजधानी ज़ाग्रेब में क्रोएशिया के राष्ट्रपति ज़ोरान मिलनोविच से भी मुलाकात की. क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच के साथ दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई.
  • दोनों प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में दोनों देशों के बीच चार समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए. ये समझौते कृषि और विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और ज़ाग्रेब विश्वविद्यालय में हिंदी पीठ की स्थापना से संबंधित हैं.

भारत-क्रोएशिया संबंध

  • भारत ने जुलाई 1992 में क्रोएशिया के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे. वर्ष 2024 (जनवरी-नवंबर) में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 306.03 मिलियन डॉलर था. इस दौरान, भारतीय निर्यात 251.59 मिलियन डॉलर, जबकि आयात 54.44 मिलियन डॉलर था.
  • क्रोएशियाई मूल के इवान फिलिप वेजडिन 1774 में एक मिशनरी के रूप में मालाबार आए थे. 1790 में उन्हें पहला संस्कृत व्याकरण प्रकाशित करने का श्रेय दिया जाता है. 1999 में तिरुवनंतपुरम में उनके सम्मान में एक पट्टिका का अनावरण किया गया था.

क्रोएशिया: एक दृष्टि

  • क्रोएशिया दक्षिण-पूर्वी यूरोप में पानोनियन प्लेन, और भूमध्य सागर के बीच स्थित एक देश है.
  • यह पहले यूगोस्लाविया का हिस्सा था, लेकिन 1992 में गृह युद्ध और यूगोस्लाविया के विघटन के बाद इसे स्वतंत्रता मिली.
  • क्रोएशिया पश्चिमी सैन्य गठबंधन, उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) और यूरोपीय संघ (ईयू) का हिस्सा है.

प्रधानमंत्री ने साइप्रस की आधिकारिक यात्रा संपन्न की

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 19 जून तक साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया की यात्रा पर थे. यात्रा की शुरुआत उन्होंने साइप्रस से की थी. साइप्रस के बाद वे जी-7 शिखर सम्‍मेलन हिस्सा लेने कनाडा गए थे. उन्होंने इस यात्रा का समापन क्रोएशिया की यात्रा से किया था.
  • यात्रा के पहले चरण में श्री मोदी 15 जून को साइप्रस की राजधानी निकोसिया पहुंचे थे. वह राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस के निमंत्रण पर साइप्रस गए थे.
  • 23 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने साइप्रस का दौरा किया. मोदी से पहले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2002 में साइप्रस का दौरा किया था.
  • प्रधानमंत्री मोदी 16 जून को राजधानी निकोसिया में साइप्रस के राष्‍ट्रपति नीकोस क्रिस्टो-डोलीडीज़ के साथ वार्ता बैठक की.
  • इस वार्ता में दोनों पक्षों के बीच दो समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए. एनएसई इंटरनेशनल एक्सचेंज और साइप्रस स्टॉक एक्सचेंज के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए.
  • यूरोबैंक साइप्रस के माध्यम से सीमा पार भुगतान के लिए साइप्रस में एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) की शुरूआत के लिए समझौता हुआ.
  • भारत और साइप्रस ने सभी प्रकार के आतंकवाद की निंदा की. दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक व्यापक और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया.
  • आतंकवाद, ड्रग्‍स और आर्म्‍स की तस्‍करी की रोकथाम के लिए दोनों देशों के बीच रीयल टाइम इन्‍फोर्मेशन एक्‍सचेंज का मैकेनिज्‍़म तैयार किया जाएगा.
  • प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-ग्रीस-साइप्रस व्यापार और निवेश परिषद के शुभारंभ का स्वागत किया.
  • प्रधानमंत्री मोदी की साइप्रस यात्रा तुर्की के लिए भी एक संकेत है, जिसका साइप्रस के साथ विवाद है और पाकिस्तान के साथ उसके घनिष्ठ सैन्य संबंध हैं.

प्रधानमंत्री मोदी को साइप्रस का सर्वोच्च सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निकोसिया में साइप्रस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस III’ से सम्मानित किया गया. साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स ने उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया.

साइप्रस: एक दृष्टि

  • साइप्रस पूर्वी भूमध्य सागर में स्थित एक द्वीप देश है. यह एक ब्रिटिश उपनिवेश था और 1960 में इसे स्वतंत्रता मिली थी. यह यूरोपीय संघ का सदस्य देश है.
  • भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. IMEC प्रस्तावित व्यापार और संपर्क मार्ग है जो भारत को मध्य पूर्व और यूरोप से जोड़ता है. इसमें रेल, सड़क तथा समुद्री मार्ग शामिल हैं.

साइप्रस का विभाजन

  • साइप्रस में दो मुख्य जातीय समूह हैं: ग्रीक और तुर्की. देश की आबादी का लगभग 4/5 भाग ग्रीक मूल के हैं, जबकि 1/5 भाग तुर्की मूल के हैं.
  • स्वतंत्रता के बाद दोनों समुदायों के बीच संघर्ष शुरू हो गया था. 1964 में, संयुक्त राष्ट्र ने साइप्रस में एक शांति सेना की स्थापना की थी.
  • 1974 में तुर्की ने साइप्रस पर आक्रमण कर तुर्की बहुल क्षेत्र पर कब्जा कर लिया और वहाँ तुर्की साइप्रस राज्य की स्थापना की.
  • तुर्की साइप्रस क्षेत्र ने 1983 में अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दी.  तुर्की को छोड़कर, विश्व का कोई भी देश इसे स्वतंत्रता देश के रूप में मान्यता नहीं देता है.

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की नीदरलैंड, डेनमार्क और जर्मनी की आधिकारिक यात्रा

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर 19 से 24 मई 2025 तक तीन यूरोपीय देशों नीदरलैंड, डेनमार्क और जर्मनी की आधिकारिक यात्रा पर थे.

नीदरलैंड

  • इस यात्रा के पहले चरण में उन्होंने 19 और 20 मई को नीदरलैंड का दौरा किया. नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टर्डम में प्रधानमंत्री डिक शूफ से मुलाकात की. विदेश मंत्री कैस्पर वेल्डकैंप के साथ द्विपक्षीय वार्ता की.
  • नीदरलैंड भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में से एक है. 2024-25 में, नीदरलैंड को भारत का निर्यात $22.76 बिलियन और कुल आयात लगभग $5 बिलियन था.
  • 2023-24 में, नीदरलैंड दुनिया भर में भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार और इसका सबसे बड़ा यूरोपीय बाजार था.

डेनमार्क

  • नीदरलैंड के बाद डॉ. जयशंकर 20 और 21 मई 2025 को डेनमार्क की यात्रा पर थे. उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का समर्थन करने के लिए डेनमार्क के प्रति आभार भी व्यक्त किया.
  • उन्होंने डेनमार्क की प्रधानमंत्री सुश्री मेटे फ्रेडरिकसेन से मुलाकात की. उन्होंने विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन के साथ द्विपक्षीय द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की.

जर्मनी

  • यात्रा के अंतिम चरण में, 22-24 मई को डॉ. जयशंकर जर्मनी गए. उनका जर्मनी दौरा ऐसे समय हुआ जब दोनों देश रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं. 2020 में, भारत और जर्मनी ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया था.
  • उन्होंने नवनिर्वाचित जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ से मुलाकात की और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में जर्मन सरकार के समर्थन के लिए भारत की सराहना व्यक्त की.
  • चांसलर मर्ज़ ने विविध क्षेत्रों में बहुआयामी भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने का पुरजोर समर्थन किया.
  • उन्होंने जर्मनी की राजधानी बर्लिन में, यूरोप में भारत के राजदूतों के सम्मेलन की अध्यक्षता की.

समुद्री प्लास्टिक कूड़े को हरित हाइड्रोजन में परिवर्तित करने के लिए शोध

  • भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने समुद्र/महासागरों में प्लास्टिक के कचरे को हरित हाइड्रोजन में परिवर्तित करने के लिए दो शोध परियोजनाएं शुरू की हैं. ये पहल भारत यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद के तहत शुरू की गई है.
  • दोनों परियोजनाओं में भारत और यूरोपीय संघ द्वारा संयुक्त रूप से कुल निवेश 391 करोड़ रुपये या 41 मिलियन यूरो होगा.
  • परियोजना को वित्तपोषण  भारत के केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और यूरोपीय संघ का होराइजन यूरोप संयुक्त रूप से करेगा.
  • इस परियोजना का उद्देश्य समुद्र/महासागर में माइक्रोप्लास्टिक, भारी धातुओं और लगातार कार्बनिक प्रदूषकों सहित विभिन्न प्रदूषकों का समाधान विकसित करना है.
  • यह शोध भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और यूरोपीय संघ की हाइड्रोजन रणनीति के उद्देश्यों के अनुरूप होगा.

रॉबर्ट फ्रांसिस प्रीवोस्ट को को रोमन कैथोलिक चर्च का नया पोप चुना गया

  • रॉबर्ट फ्रांसिस प्रीवोस्ट को 8 मई 2025 को वेटिकन स्थित रोमन कैथोलिक चर्च का नए पोप चुना गया. वह पोप चुने जाने वाले पहले अमेरिकी हैं.
  • रॉबर्ट फ्रांसिस प्रीवोस्ट वेटिकन में 267वां पोप हैं. पोप के रूप में चुने जाने के बाद, उन्होंने अपना नाम लियो XIV का रखा है.
  • पोप लियो XIV ने पोप फ्रांसिस का स्थान लिया है, जिनकी मृत्यु 21 अप्रैल 2025 को हुई थी.
  • रॉबर्ट फ्रांसिस प्रीवोस्ट का जन्म 1955 में शिकागो, संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ था. उनके पास संयुक्त राज्य अमेरिका और पेरू की दोहरी नागरिकता है.
  • 1952 में उन्हें पादरी नियुक्त किया गया और बाद में वे पेरू चले गये, जहां उन्होंने 20 वर्षों से अधिक समय तक काम किया.
  • 2014 में, तत्कालीन पोप फ्रांसिस ने उन्हें पेरु के चिक्लेयो का बिशप और 2023 में उन्हें कार्डिनल बनाया.

पोप क्या होता है?

रोमन कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च धर्म गुरु, रोम के बिशप एवं वैटिकन के राज्याध्यक्ष को पोप कहते हैं. सेंट पीटर, जो ईसा मसीह के 12 शिष्यों में से एक थे, को रोमन कैथोलिक चर्च द्वारा पहला पोप माना जाता है.

नए पोप का चुनाव: एक दृष्टि

  1. कार्डिनल्स कॉलेज नए पोप का चुनाव करेगा. इस कॉलेज में कैथोलिक चर्च के सबसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं. कार्डिनल्स कॉलेज के सदस्यों को पोप द्वारा नियुक्त किया जाता है.
  2. 80 वर्ष से अधिक आयु के सदस्य नए कार्डिनल के चुनाव में मतदान करने के पात्र नहीं होते हैं. वर्तमान में, कार्डिनल्स कॉलेज में 252 कार्डिनल शामिल हैं जिनमें से 138 नए पोप के लिए मतदान करने के पात्र हैं.
  3. मतदान के प्रत्येक दौर के बाद, मतपत्र जला दिए जाते हैं. यदि इससे काला धुआँ निकलता है, तो पोप नहीं चुना जाता है. यदि सफेद धुआँ निकलता है, तो यह नए पोप के चुनाव का संकेत देता है.

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता

  • यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 27-28 फ़रवरी को भारत की यात्रा पर थीं. यह उर्सुला लेयेन की तीसरी भारत यात्रा थी.
  • उर्सुला लेयेन के साथ यूरोपीय संघ के 22 कमिश्नर भी आए थे. यूरोपीय देशों के कॉलेज ऑफ कमिश्नर की यूरोप से बाहर ये पहली भारत यात्रा थी.
  • उर्सुला लेयेन की भारत यात्रा के दौरान, भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की दूसरी मंत्रिस्तरीय बैठक भी नई दिल्ली में आयोजित की गई थी.
  • प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 28 फ़रवरी को दिल्ली में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला लेयेन के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की. इस वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया.

संयुक्त वक्तव्य के मुख्य बिन्दु

  • भारत और यूरोपीय संघ 2025 में पारस्परिक रूप से लाभकारी मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देंगे.
  • स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु, जल, स्मार्ट और टिकाऊ शहरीकरण, कनेक्टिविटी और आपदा प्रबंधन के क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने पर सहमति.
  • भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को साकार करने के लिए कदम उठाएंगे.
  • IMEC को 2023 में नई दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन की बैठक के दौरान प्रस्तावित किया गया था. इसका उद्देश्य UAE और सऊदी अरब के माध्यम से यूरोपीय संघ के देशों को भारत से जोड़ना है.

भारत और यूरोपीय संघ संबंध

  • व्‍यापार, निवेश, जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और तकनीक समेत कई क्षेत्रों में भारत और यूरोप के बीच गहरी साझेदारी है और ये रिश्‍ते बीते कुछ वर्षों से और मजबूत हुए हैं.
  • सामान के व्यापार के मामले में यूरोपीय संघ, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. पिछले एक दशक में द्विपक्षीय व्यापार 90 फीसदी बढ़ा है.
  • 2023-24 में यूरोपीय संघ के साथ सामानों का द्विपक्षीय व्‍यापार 135 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा था. इसके अलावा नवीकरणीय और हाइड्रोजन क्षेत्र में भारतीय और यूरोपीय कंपनियों के बीच सहयोग काफी मजबूत है.
  • भारत की प्रमुख अंतर्राष्‍ट्रीय पहल, अंतर्राष्‍ट्रीय सौर गठबंधन में भी यूरोपीय संघ शामिल हो गया है, जो कि दोनों देशों के बीच गहराते रिश्‍तों को दर्शाता है.

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रिया की आधिकारिक यात्रा संपन्न की

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी 9-10 जुलाई 2024 को ऑस्ट्रिया की आधिकारिक यात्रा पर थे. पिछले 41 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की ये पहली ऑस्ट्रिया यात्रा थी. प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रिया के चांसलर के निमंत्रण पर वहाँ गए थे. उन्होंने रूस की अपनी दो दिवसीय सफल यात्रा के बाद दूसरे चरण में ऑस्ट्रिया का दौरा किया.

मुख्य बिन्दु

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वियना में ऑस्ट्रिया के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर वान डेर बेलेन और चांसलर कार्ल नेहमर के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की.
  • बैठक में व्यापार और निवेश, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा, आर्टिफि‍‍शियल इंटेलिजेंस, स्टार्ट-अप और सांस्कृतिक सहयोग तथा आपसी संबंधों के बारे में बातचीत हुई.
  • उन्होंने जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद सहित मानवता के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौतियों पर चर्चा की.
  • दोनों नेताओं की बैठक के बाद, ‘उन्नत भारत-ऑस्ट्रिया साझेदारी’ शीर्षक से एक संयुक्त बयान जारी किया गया.
  • संयुक्त बयान के अनुसार, भारत और ऑस्ट्रिया अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय शांति और समृद्धि में योगदान देने के लिए मिलकर काम करेंगे.
  • दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप, सभी पक्षों की भागीदारी के साथ यूक्रेन में शांतिपूर्ण समाधान की सुविधा के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया.
  • ऑस्ट्रिया ने 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बनने के भारत के प्रयासों का भी समर्थन किया.
  • प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रिया को अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की कुल सदस्यता 100 है. पराग्वे गठबंधन में शामिल होने वाला 100वां देश है.

राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ

  • प्रधान मोदी की यह आधिकारिक यात्रा उस समय हुई है जब भारत और ऑस्ट्रिया के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं.
  • भारत और ऑस्ट्रिया के बीच राजनयिक संबंध 1949 में स्थापित हुए थे. 1955 में ऑस्ट्रिया की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू थे. इंदिरा गांधी ने दो बार 1971 में और फिर 1983 में ऑस्ट्रिया की आधिकारिक यात्रा की थी.

ऑस्ट्रिया: एक दृष्टि

  • ऑस्ट्रिया मध्य यूरोप में स्थित स्थल से घिरा हुआ देश है. इसकी राजधानी वियना है. इसकी भाषा जर्मन और मुद्रा यूरो है. ऑस्ट्रिया यूरोपीय संघ का सदस्य है.
  • ऑस्ट्रिया के उत्तर में जर्मनी और चेक गणराज्य से, पूर्व में स्लोवाकिया और हंगरी, दक्षिण में स्लोवाकिया और इटली और पश्चिम में स्विटजरलैंड और लीश्टेनश्टाइन है.

पुर्तगाल के एंटोनियो कोस्टा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चुने गए

पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री एंटोनियो कोस्टा को यूरोपीय संघ की यूरोपीय परिषद का नया अध्यक्ष चुना गया है. वे वर्तमान अध्यक्ष बेल्जियम के चार्ल्स मिशेल की जगह लेंगे और 1 अक्टूबर 2024 को कार्यभार संभालेंगे.

यूरोपीय संघ की यूरोपीय परिषद

  • यूरोपीय परिषद 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ का शीर्ष निकाय है. यह यूरोपीय संघ का राजनीतिक एजेंडा तय करता है. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष का चुनाव यूरोपीय संघ के 27 सदस्यों द्वारा मतदान द्वारा किया जाता है.
  • यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष को 2.5 वर्ष की अवधि के लिए अधिकतम दो बार चुना जा सकता है. इस प्रकार, कोई व्यक्ति अधिकतम पाँच वर्षों तक यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष पद पर रह सकते हैं.
  • यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष यूरोपीय परिषद के भीतर सामंजस्य और आम सहमति को बढ़ावा देने के लिए भी काम करते हैं.
  • यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय शिखर बैठक में 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्व करते हैं.

यूरोपीय संघ (European Union): एक दृष्टि

  • यूरोपीय संघ मुख्यतः यूरोप में स्थित 27 देशों का एक राजनैतिक एवं आर्थिक मंच है जिनमें आपस में प्रशासकीय साझेदारी होती है. यह मास्ट्रिच संधि के द्वारा अस्तित्व में आया था. मास्ट्रिच संधि 1 नवंबर 1993 को लागू हुआ था.
  • मास्ट्रिच संधि का उद्देश्य एक सामान्य मुद्रा (यूरो), एक एकीकृत विदेश और सुरक्षा नीति और सामान्य नागरिकता अधिकारों की स्थापना करके यूरोपीय देशों के राजनीतिक और आर्थिक एकीकरण को आगे बढ़ाना था.
  • यूरोपीय संघ में 720 सदस्यीय यूरोपीय संसद है जिसके सदस्यों का चुनाव यूरोपीय संघ की जनता द्वारा किया जाता है.
  • वर्तमान में यूरोपीय संघ में 27 सदस्य देश हैं. इसका मुख्यालय ब्रुसेल्स (बेल्जियम) में है. यूरोपीय संसद लक्ज़मबर्ग, ब्रुसेल्स (बेल्जियम) और स्ट्रासबर्ग (फ्रांस) में बैठती है.

रोमानिया और बुल्गारिया शेंगेन क्षेत्र में शामिल हुए, जानिए क्या है शेंगेन क्षेत्र

बुल्गारिया और रोमानिया  शेंगेन (Schengen ) सदस्य बन गए हैं. यूरोपीय आयोग के अनुसार, दोनों देश 31 मार्च 2024 को आंशिक रूप से शेंगेन क्षेत्र (Schengen Area) में शामिल हो गए. यह दोनों देशों के यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ एकीकरण में एक महत्वपूर्ण कदम है.

मुख्य बिन्दु

  • शेंगेन नियम दोनों सदस्य देशों में लागू होंगे, जिसमें शेंगेन वीजा जारी करना भी शामिल है और आंतरिक वायु और समुद्री सीमाओं पर नियंत्रण हटा दिया जाएगा. इन दो सदस्य देशों का शेंगेन में शामिल होने से इस क्षेत्र का विस्तार हुआ है.
  • इसके साथ ही यात्रियों को उनके और दर्जनों अन्य यूरोपीय देशों के बीच स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति मिल गई. हालांकि ऑस्ट्रिया के विरोध के कारण भूमि सीमा पर जांच जारी रहेगी. प्रतिदिन लगभग 3.5 मिलियन लोग शेंगेन क्षेत्र की आंतरिक सीमा पार करते हैं.
  • यूरोपीय आयोग ने एक दशक से भी ज़्यादा समय से कहा है कि रोमानिया और बुल्गारिया शेंगेन क्षेत्र में पूर्ण प्रवेश के लिए तकनीकी मानदंडों को पूरा करते हैं. पूर्ण प्रवेश के लिए सभी सदस्य देशों से सर्वसम्मति से समर्थन की आवश्यकता होती है.
  • बुल्गारिया की राजधानी सोफ़िया हवाई अड्डा शेंगेन उड़ानों के लिए सबसे बड़े केंद्र के रूप में कार्य करता है, जो सभी उड़ानों का 70% हिस्सा है. आसान नियमों से दोनों देशों के पर्यटन क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है.
  • रोमानिया दक्षिण-पूर्वी यूरोप में है. इसकी राजधानी बुखारेस्ट है. यह देश कार्पेथियन पर्वत, डेन्यूब नदी और काला सागर तट का घर है. रोमानिया की आबादी लगभग 19 मिलियन है और यह यूरोपीय संघ का सदस्य है. आधिकारिक भाषा रोमानियाई है.
  • बुल्गारिया यूरोप के बाल्कन क्षेत्र में स्थित है, जिसकी सीमा उत्तर में रोमानिया और दक्षिण में तुर्की से लगती है. इसकी राजधानी सोफिया है. बुल्गारिया की आबादी लगभग 7 मिलियन है और यह काला सागर तट के किनारे ऐतिहासिक स्थलों के लिए जाना जाता है.

शेंगेन क्षेत्र क्या है?

  • शेंगेन क्षेत्र (Schengen Area) यूरोप के 27 देशों का एक समूह है. इस क्षेत्र में शामिल देशों के बीच सीमा नियंत्रण खत्म कर दिया गया है. यह दुनिया का सबसे बड़ा मुफ़्त यात्रा क्षेत्र है.
  • शेंगेन क्षेत्र के देशों की बीच, वीज़ा नीति, शरण नीति, और अपने पुलिस और न्यायिक अधिकारियों के बीच सहयोग के लिए समझौते हैं.
  • शेंगेन क्षेत्र की शुरुआत 1985 में पांच यूरोपीय संघ देशों – फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम, नीदरलैंड और लक्ज़मबर्ग – के बीच एक अंतर सरकारी परियोजना के रूप में हुई थी. धीरे-धीरे इसका विस्तार हुआ.
  • शेंगेन क्षेत्र के देशों के बीच आम तौर पर कोई पासपोर्ट नियंत्रण नहीं होता. अगर किसी के पास इनमें से किसी एक देश का वैध वीज़ा है, तो वह अन्य शेंगेन देशों की भी यात्रा कर सकता है.
  • शेंगेन क्षेत्र में शामिल देश: ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, क्रोएशिया, चेकिया, डेनमार्क, एस्टोनिया, फ़िनलैंड, फ़्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आइसलैंड, इटली, लातविया, लिकटेंस्टीन, लिथुआनिया, लक्ज़मबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन, और स्विट्जरलैंड.

विदेश मंत्री की साइप्रस और ऑस्ट्रिया यात्रा

विदेश मंत्री डॉ. सुब्रमण्‍यम जयशंकर 29 दिसम्बर से 3 जनवरी तक साइप्रस और ऑस्ट्रिया की आधिकारिक यात्रा पर थे. इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत की और कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए.

मुख्य बिन्दु

  • साइप्रस की 29-31 दिसंबर तक की अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की अध्यक्ष और कार्यवाहक राष्ट्रपति अनिता डेमेत्रिओ से मुलाकात की थी.
  • दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान द्विपक्षीय संबंधों, परस्पर हित से जुड़े क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई.
  • इस वर्ष भारत और साइप्रस के बीच राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है. इस अवसर पर साइप्रस डाक द्वारा जारी स्मारक डाक टिकटों का सेट जयशंकर को भेंट किया.
  • साइप्रस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा और सैन्य सहयोग पर सहमति-पत्र और ‘डिक्लरेशन ऑफ इंटेंट ऑन माइग्रेशन एंड मोबिलिटी’ पर भी हस्ताक्षर हुए.
  • साइप्रस के बाद जयशंकर दूसरे चरण में 31 दिसंबर से 3 जनवरी तक ऑस्ट्रिया की यात्रा पर रहे और वहां के विदेश मंत्री एलेक्सजेंडर शालेनबर्ग के आधिकारिक आमंत्रण पर ‘न्यू ईयर कंसर्ट’ में भी शामिल हुए.
  • बतौर विदेश मंत्री जयशंकर की यह पहली ऑस्ट्रिया यात्रा थी. पिछले 27 साल में पहली बार भारत के विदेश मंत्री ने ऑस्ट्रिया की यात्रा की.
  • अपनी इस यात्रा के दौरान जयशंकर ने ऑस्ट्रिया के राष्ट्रपति एलेक्सजेंडर वान दे बेलेन, ऑस्ट्रियाई संसद के अध्यक्ष वुल्फगैंग सोबोत्का से भेंट की. उन्होंने ऑस्ट्रिया के चांलसर कार्ल नेहारमर से भी मुलाकात की और विदेश मंत्री शालेनबर्ग से चर्चा की.