Tag Archive for: Environment

पलाऊ सन क्रीम के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बना

प्रशांत महासागरीय देश पलाऊ (Pacific nation Palau) सन क्रीम के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बन गया है. पलाऊ में 1 जनवरी 2020 से सन क्रीम पर यह प्रतिबंध उसमें इस्तेमाल होने वाले खतरनाक रसायन के चलते लगाया गया है. पलाऊ ने ऑक्सीबेंजोन और ऑक्टीनोजेट रसायनों से बनी क्रीम पर पाबंदी की घोषणा पहले ही कर दी थी.

पर्यावरण की रक्षा के लिए

सन क्रीम के इस्तेमाल पर प्रतिबंध पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए है. कोरल रीफ से घिरे यह द्वीप विभिन्न प्रकार के जीवों का घर है. इंटरनेशनल कोरल रीफ फाउंडेशन के मुताबिक, सन क्रीम के तौर पर इस्तेमाल होने वाले रसायन समुद्री जीवों के लिए जहर के समान हैं. वन्यजीवों पर खतरनाक असर को देखते हुए अमेरिका के वर्जिन आइलैंड्स और हवाई प्रांत में भी सन क्रीम पर पाबंदी लगाई जा चुकी है.

भारतीय जहाजों में सिंगल यूज प्‍लास्टिक पर प्रतिबंध

महासागरों के परिस्‍थितिकी तंत्र को बचाने के लिए पिछले साल नवंबर में भारत ने भी बड़ा कदम उठाया था. भारत के नौवहन महानिदेशालय (Directorate General of Shipping) ने साल 2020 से भारतीय जहाजों में सिंगल यूज प्‍लास्टिक (single use plastics) और उसके उत्‍पादों पर बैन लगा दिया था.

प्लास्टिक प्रदूषण को लेकर आई इंटरनेशनल मेरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (आईएमओ) की रिपोर्ट में कहा गया है कि सागरों और महासागरों में प्‍लास्टिक प्रदूषण यदि इसी तेजी से बढ़ता रहा तो सन 2050 तक महासागरों में प्लास्टिक की मात्रा मछलियों से ज्‍यादा होगी.

दिल्‍ली सरकार ने ‘इलेक्ट्रिक व्‍हीकल पॉलिसी 2019’ को मंजूरी दी

दिल्‍ली सरकार ने 23 दिसम्बर को ‘इलेक्ट्रिक व्‍हीकल नीति’ (Delhi Electric Vehicle Policy) 2019 को मंजूरी दी. राज्य में वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से इस नीति को मंजूरी दी गयी है. इस नीति को लागू करने के लिए एक इलेक्टिक वाहन बोर्ड का गठन किया जाएगा.

इस नीति के तहत सरकार ई-वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी देगी. इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि 2024 तक पंजीकृत होने वाले 25% नए वाहन इलेक्ट्रिक वाहन हों.

ई-वाहन नीति का पहला मसौदा नवंबर 2018 में सार्वजनिक किया गया था. यह नीति संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम, अंतर्राष्ट्रीय परिवहन परिषद, स्वच्छ परिवहन, निकाय जैसे कई विशेषज्ञ निकायों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के बाद बनाई गई है.

मैड्रिड में अन्तर्राष्ट्रीय जलवायु सम्मेलन ‘COP 25’ आयोजित किया गया

स्पेन के मैड्रिड में 2 से 14 दिसम्बर तक संयुक्त राष्ट्र का जलवायु सम्मेलन ‘COP 25’ (UN Climate Change Conference- UNFCCC COP 25) का आयोजन किया गया. यह सम्मेलन चिली में आयोजित किया जाना था लेकिन देश में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए इसके आयोजन में असमर्थता जताई थी. इस सम्मेलन में लगभग 200 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

दुनिया भर में, तापमान में वृद्धि, जंगलों में आग, बाढ़, सूखा आदि की बढती घटना को मानव निर्मित ग्लोबल वार्मिंग से जोड़ा जा रहा है, जो इस सम्मेलन के वार्ता का मुख्य हिस्सा था. इस जलवायु वार्ता में कार्बन बाजारों के बारे में कोई समझौता नहीं हो पाया.

यह सम्मेलन 2015 के पेरिस समझौते को पूरा करने में असफल रही जिसके कारण संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरेस ने इसे ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने के लिए एक गंवाया हुआ मौका कहा. दो सप्ताह की इस लंबी वार्ता में प्रमुख मुद्दों जैसे कि अनुच्छेद 6, हानि और क्षति, और दीर्घकालीन वित्तीय सहायता पर कोई समझौता नहीं हो सका.

COP 25 सम्मेलन में दुनिया के करीब दो सौ देशों के प्रतिनिधियों ने सामूहिक घोषणा-पत्र जारी किया. इसमें धरती के बढ़ते तापमान के लिए जिम्‍मेदार ग्रीन हाउस गैसों के उत्‍सर्जन में कटौती तथा जलवायु परिवर्तन से प्रभावित गरीब देशों की मदद की बात कही गई. जलवायु परिवर्तन पर अगली वार्ता (COP 26) ग्‍लासगो में होगी.

COP 25 में वैज्ञानिकों ने भविष्य में ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए शीघ्र बड़े कदम उठाने की आवश्यकता बताई. सम्मेलन में पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन से संबंधित आपदाओं पर चर्चा की गई, जिसमें अप्रत्याशित चक्रवात, अकाल और रिकॉर्ड-तोड़ ‘लू’ शामिल था.

भारतीय जलवायु कार्यकर्ता लिसिप्रिया कांगुजम चर्चा में रही

COP25 जलवायु सम्मेलन में भारत की आठ वर्षीय जलवायु कार्यकर्ता लिसिप्रिया कांगुजम की उपस्थिति चर्चा में रही. उसने दुनिया को भावी पीढ़ियों के प्रति उसके दायित्‍यों को याद दिलाया. सम्मेलन के दौरान कंगुजाम ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव अन्तोनियो गुतरश गुतरेस से मुलाकात की और दुनिया के बच्चों की ओर से एक ज्ञापन प्रस्तुत किया.

संयुक्तराष्ट्र महासचिव का संबोधन

सम्मेलन को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव अन्तोनियो गुतरश गुतरेस ने जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए विश्व में किए जा रहे प्रयास अपर्याप्त बताया. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से धरती का तापमान बढने का खतरा काफी बढ़ गया है. महासचिव ने कहा कि धरती का तापमान बढ़ने और मौसम पर इसके तीव्र प्रभाव का असर दुनिया-भर में महसूस किया जा रहा है.

वैज्ञानिकों ने अनुत्क्रमणीय परिवर्तन की चेतावनी जारी की

COP25 सम्मेलन में वैज्ञानिकों ने जलवायु पर कोई कार्रवाई नहीं किये जाने पर ‘अनुत्क्रमणीय परिवर्तन’ की चेतावनी जारी की. “वर्ल्ड साइंटिस्ट्स वार्निंग ऑफ ए क्लाइमेट इमरजेंसी” के सह-लेखक, विलियम मूमाव ने कहा कि वर्तमान वैश्विक प्रतिबद्धताएं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को रिवर्स करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं.

मोओमा द्वारा सह-लिखित एक अध्ययन जो नवंबर में बायोसाइंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ था, जलवायु परिवर्तन के चलते होने वाली ‘अनकही पीड़ा’ की चेतावनी दी थी. इस अध्ययन का समर्थन 11,000 वैज्ञानिकों ने किया था.

भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने किया

भारत रचनात्‍मक और सकारात्‍मक परिप्रेक्ष्‍य के साथ इस सम्‍मेलन में भाग लिया. सम्मेलन में भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व वन, पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने किया. सम्मेलन को संबोधित करते हुए पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मैड्रिड जलवायु सम्‍मेलन में अपने दीर्घावधि विकास हितों की सुरक्षा पर कम करने की बात कही.

सम्‍मेलन के दौरान मंत्रिस्‍तरीय बैठक के पूर्ण सत्र में पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने और अधिक देशों से अंतरराष्‍ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल होने का आह्वान किया है. ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए जीवाश्‍म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए 2015 में पेरिस में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी और फ्रांस के तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति फ्रांस्‍वा ओलांद ने अंतरराष्‍ट्रीय सौर गठबंधन का शुभारंभ किया था.

पर्यावरण की रक्षा के लिए भारत द्वारा उठाये गये मुख्य कदम

भारत पिछले चार वर्ष में जलवायु परितर्वन से निपटने के कार्य करने में अग्रणी रहा है. देश के चार सौ पचास गीगावाट के महत्‍वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रम ने पूरी दुनिया का ध्‍यान आकर्षित किया है. यह इस क्षेत्र में विश्‍व का सबसे बड़ा कार्यक्रम है.

भारत विश्‍व के कुछ ऐसे देशों में शामिल है, जहां वन क्षेत्र बढ़ा है. अंतर्राष्‍ट्रीय सौर गठजोड़ और आपदा अनुकूल बुनियादी ढांचे के लिए गठजोड़ का सबसे पहले प्रस्‍ताव कर प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने इस क्षेत्र में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया है.
जानिए क्या है UNFCCC-COP और पेरिस समझौता

पानीपत में बायोमास एथेनॉल का संयंत्र लगाने के लिए इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड को मंजूरी

सरकार ने हरियाणा के पानीपत में बायोमास एथेनॉल का संयंत्र लगाने की इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) को मंजूरी दी है. केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एथनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिये मंत्रालय ने इस परियोजना को 11 नवम्बर को मंजूरी दी. इसके तहत IOCL को 766 करोड़ रुपये की लागत से दूसरी पीढ़ी के बायोमास आधारित ईंधन (2G एथेनॉल) के संयंत्र को लगाने की मंजूरी दी गयी है.

इस परियोजना से न सिर्फ पर्यावरण हितैषी ईंधन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि किसानों की आय को दोगुना करने के सरकार के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी.

उल्लेखनीय है कि IOCL ने 100 किलोलीटर प्रतिदिन उत्पादन क्षमता वाले 2G एथेनॉल संयंत्र से पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित असर की आंकलन रिपोर्ट इस साल जून में मंत्रालय के समक्ष पेश करते हुये इसकी स्थापना के लिये मंजूरी का आवेदन किया था.

IOCL इस परियोजना में बायोमास आधारित ईंधन के रूप में एथेनॉल के उत्पादन के लिये धान और अन्य कृषि उत्पादों की पराली का इस्तेमाल किया जायेगा. संयंत्र में 100 किलोलीटर एथेनॉल के उत्पादन के लक्ष्य की प्राप्ति के लिये प्रतिदिन 473 टन पराली की आवश्यकता होगी.

क्या है एथेनॉल?

  • एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाडिय़ों में इंधन के रूप इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होता है लेकिन कई अन्य फसलों से भी इसे तैयार किया जा सकता है.
  • एथेनॉल इंधन के इस्तेमाल से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) का उत्सर्जन 35 फीसदी तक कम हो जाता है. यह सल्फर डाइऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन को भी कम करता है. इसमें 35 फीसदी फीसद ऑक्सीजन होता है.
  • एथेनॉल इंधन का सर्वाधिक इस्तेमाल ब्राजील में किया जाता है. यहाँ 40 फीसद गाडिय़ां पूरी तरह से एथेनॉल पर निर्भर हैं. बाकी गाडिय़ां भी 24 फीसदी एथेनॉल मिला ईंधन उपयोग हो रहा है.

विश्व भर के 11000 वैज्ञानिकों ने जलवायु आपातकाल की घोषणा की

विश्व भर के 153 देशों के 11000 वैज्ञानिकों ने जलवायु आपातकाल (Climate Emergency) की घोषणा कर दी है. ‘बायोसाइंस’ (Bioscience) नाम की पत्रिका में छपे एक लेख में 11258 मे से 69 भारतीय वैज्ञानिकों के भी हस्ताक्षर हैं.

जलवायु आपातकाल की घोषणा पिछले 40 सालों के दौरान कुछ क्षेत्रों के तय मानकों पर एकत्रित डेटा के आधार पर की गई है. यह घोषणा ऊर्जा उपयोग, सतह के तापमान, जनसंख्या वृद्धि, भूमि समाशोधन, वनों की कटाई, ध्रुवीय बर्फ द्रव्यमान, प्रजनन दर के वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित है.

वैज्ञानिकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन से जो हालात उपजे हैं उसने बचना आसान नहीं है. हालात सुधारने के लिए जलवायु पर हो रहे आघात तुरंत रोकना होगा. धरती के बढ़ते तापमान के लिए वैज्ञानिकों के समूह ने छह क्षेत्रों में तत्काल कदम उठाने पर जोर दिया है. ये हैं ऊर्जा, लघु प्रदूषक, प्रकृति, भोजन, अर्थव्यवस्था और जनसंख्या.

भारत ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाते हुए मिशन इनोवेशन की शुरुआत की

भारत ने बढ़ती ऊर्जा जरुरतो, जलवायु परिवर्तन और दुनियाभर में बढ़ते प्रदुषण के खतरे को देखते हुए स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाते हुए मिशन इनोवेशन (Mission Innovation) की शुरुआत की है. इस मिशन में भारत के साथ चौबीस देश भी जुड़े हुए है.

मिशन इनोवेशन के लिए आठ क्षेत्रों की पहचान की गई है. इन आठ क्षेत्रो में क्या-क्या प्रगति हुई है इसको लेकर नई दिल्ली में 4 से 6 नवम्बर को एक सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है. सम्मेलन में चौबीस देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे है.

भारतीय शोधकर्ताओं ने प्लास्टिक खाने वाले जीवाणु की खोज की

भारतीय शोधकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित दलदली भूमि से दो प्रकार के प्लास्टिक खाने वाले जीवाणुओं की खोज की है. जीवाणु के ये दो प्रकार– एक्सिगुओबैक्टीरियम साइबीरिकम जीवाणु DR11 और एक्सिगुओबैक्टीरियम अनडेइ जीवाणु DR14 हैं.

ग्रेटर नोएडा के शिव नाडर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा खोजे गए इन जीवाणुओं में पॉलिस्टरीन के विघटन की क्षमता है. पॉलिस्टरीन एकल इस्तेमाल वाले प्लास्टिक के सामान जैसे डिस्पोजेबल कप, प्लेट, खिलौने, पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री आदि को बनाने में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख घटक है.

यह खोज दुनियाभर में प्लास्टिक कचरे के पर्यावरण हितैषी तरीके से निस्तारण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है.

पर्यावरण संरक्षण के लिए 1,400 किलोमीटर लंबी ‘ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया’ को विकसित किया जाएगा

केंद्र सरकार देश में पर्यावरण के संरक्षण और हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए 1,400 किलोमीटर लंबी ‘ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया’ परियोजना पर विचार कर रही है. भारत में घटते वन और बढ़ते रेगिस्तान को रोकने के लिए यह परियोजना हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की कॉन्फ्रेंस (COP14) से आया है. इस परियोजना पर मंजूरी के बाद यह भारत में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए भविष्य में भी एक मिसाल की तरह होगा.

अफ्रीका के ‘ग्रेट ग्रीन वॉल’ तर्ज पर विकसित किया जायेगा

भारत सरकार की यह परियोजना अफ्रीका में बनी हरित पट्टी ‘ग्रेट ग्रीन वॉल’ की तर्ज पर विकसित किया जायेगा. अफ्रीका का ग्रेट ग्रीन वॉल सेनेगल से जिबूती तक बनी है. अफ्रीका में क्लाइमेट चेंज और बढ़ते रेगिस्तान से निपटने के लिए यह हरित पट्टी तैयार किया गया है. इसे ‘ग्रेट ग्रीन वॉल ऑफ सहारा’ भी कहा जाता है. इसपर करीब एक दशक पहले काम शुरू हुआ था.

गुजरात से लेकर दिल्ली-हरियाणा सीमा तक ‘ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया’

इस परियोजना के तहत गुजरात से लेकर दिल्ली-हरियाणा सीमा तक ‘ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया’ को विकसित किया जाएगा. इसकी लंबाई 1,400 किलोमीटर होगी, जबकि यह 5 किलोमीटर चौड़ी होगी.

इस परियोजना को थार रेगिस्तान के पूर्वी तरफ विकसित किया जाएगा. पोरबंदर से लेकर पानीपत तक बनने वाली इस ग्रीन बोल्ट से घटते वन क्षेत्र में इजाफा होगा. इसके अलावा गुजरात, राजस्थान, हरियाणा से लेकर दिल्ली तक फैली अरावली की पहाड़ियों पर घटती हरियाली के संकट को भी कम किया जा सकेगा.

यह ग्रीन बेल्ट लगातार नहीं होगी, लेकिन अरावली रेंज का बड़ा हिस्सा इसके तहत कवर किया जाएगा ताकि उजड़े हुए जंगल को फिर से पूरी तरह विकसित किया जा सके. इस परियोजना से पश्चिमी भारत और पाकिस्तान के रेगिस्तानों से दिल्ली तक उड़कर आने वाली धूल को भी रोका जा सकेगा.

2030 तक काम पूरा करने का लक्ष्य

भारत सरकार ‘ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया’ परियोजना को 2030 तक राष्ट्रीय प्राथमिकता में रखकर जमीन पर उतारने पर विचार कर रही है. इसके तहत 26 मिलियन हेक्टेयर भूमि को प्रदूषण मुक्त करने का लक्ष्य है.

कई राज्यों में रेगिस्तान का दायरा बढ़ने का खतरा

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 2016 में एक नक्शा जारी किया था, जिसके मुताबिक गुजरात, राजस्थान और दिल्ली ऐसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हैं, जहां 50 फीसदी से अधिक भूमि हरित क्षेत्र से बाहर है. इसके चलते इन इलाकों में रेगिस्तान का दायरा बढ़ने का खतरा है.

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन 2019 का न्यूयॉर्क में आयोजन

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन (Climate Action Summit) 23 सितम्बर को न्यूयॉर्क में आयोजित किया गया. इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य पेरिस समझौते का शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित करना था. सम्मेलन का उदघाटन संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने किया. उन्होंने दुनिया के नेताओं से जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई करने और समस्या के समाधान मुहैया कराने का आह्वान किया.

सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संबोधन

अमेरिका की यात्रा पर गये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया और संबोधित किया. श्री मोदी ने जलवायु परिवर्तन के रोक-थाम को जन-आंदोलन बनाने की बात कही.

उन्होंने जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले नुकसान की रोकथाम में भारत में किये गये उल्लेखनीय प्रयासों की चर्चा की:

  • भारत सरकार ने पंद्रह करोड़ परिवारों को स्वच्छ रसोई गैस उपलब्ध कराई है.
  • 15 अगस्त 2019 से ‘सिंगल यूज़’ प्लास्टिक का उपयोग प्रतिबंधित किया गया है.
  • जल के उचित उपयोग के लिए अगले पांच वर्षों में 50 अरब डॉलर खर्च किया जायेगा.
  • गैर-परंपरागत ईंधन उत्पादन के लक्ष्य को दोगुने से अधिक बढ़ाकर वर्ष 2022 तक 450 गीगावाट तक का लक्ष्य है.
भारत और स्वीडन मिलकर, “इंडस्ट्री ट्रांजीशन ट्रैक” के “लीडरशिप ग्रुप” का गठन.

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और स्वीडन के अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर, “इंडस्ट्री ट्रांजीशन ट्रैक” के “लीडरशिप ग्रुप” का गठन किया है. यह पहल सरकारों और निजी क्षेत्र को साथ लाकर इंटस्ट्री के लिए लो कार्बन Pathways बनाने में अहम भूमिका अदा करेगी.

ग्रेटा थनबर्ग चर्चा में रहीं

जलवायु परिवर्तन पर हुए सत्र को स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता सोलह वर्षीया ग्रेटा थनबर्ग ने विकसित देशों पर अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी न करने का आरोप लगाया. विश्व नेताओं को भावुकता से संबोधित करते हुए ग्रेटा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण लोग यातना झेल रहे हैं, मर रहे हैं और पूरी पारिस्थितिकीय प्रणाली ध्वस्त हो रही है.

ग्रेटा थनबर्ग ने स्वीडन की संसद के समक्ष पेरिस समझौते के मुताबिक कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए विरोध प्रदर्शन किये जाने के कारण चर्चित हो गयीं थीं.

सम्मेलन के मुख्य बिंदु
  • संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन में दुनिया की सबसे ज्‍यादा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित करने वाले उद्योगों को कम कार्बन उत्‍सर्जन वाली अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है.
  • भारत और स्‍वीडन के साथ अर्जेन्‍टीना, फिनलैण्‍ड, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैण्‍ड, लग्‍जमबर्ग, हॉलैण्‍ड, दक्षिण कोरिया तथा ब्रिटेन और कंपनियों के एक समूह ने उद्योगों में इस तरह के बदलाव लाने के लिए एक नये नेतृत्‍व समूह की घोषणा की है.

स्वास्थ्य कवरेज पर संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्चस्तरीय बैठक

न्यूयॉर्क में 23 सितम्बर को स्वास्थ्य कवरेज पर संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गयी. बैठक का उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र में वित्तीय और राजनीतिक सहयोग प्राप्त करना था. इस बैठक का शीर्षक “व्यापक स्वास्थ्य कवरेजः अधिक स्वस्थ विश्व के निर्माण की दिशा में सम्मिलित प्रयास” था. इस बैठक में विभिन्न देशों, राजनीतिक और स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रमुखों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बैठक को संबोधित किया.


क्रिकेटर रोहित शर्मा ने विलुप्त हो रहे इस जानवर के संरक्षण के लिए अभियान शुरू किया

भारतीय क्रिकेटर रोहित शर्मा ने विलुप्त हो रहे जानवर गैंडों (Rhinoceros) के संरक्षण के लिए एक अभियान शुरू किया है. रोहित शर्मा ‘WWF India’ और ‘एनीमल प्लैनेट’ के साथ मिलकर एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण के लिए इस अभियान पर कार्य करेंगे. रोहित ने खुद को इसके लिए ‘Rohit4Rhinos’ अभियान से जोड़ा है.

गैंडों का यह संरक्षण अभियान 22 सितंबर को विश्व राइनो दिवस (World Rhino Day) पर शुरू किया जाएगा. रोहित ‘WWF India’ में राइनो संरक्षण के लिए ब्रांड एंबेसडर हैं.


पर्यावरण मंत्रालय ने वनीकरण के लिए CAMPA को 47,436 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने CAMPA (Compensatory Afforestation Fund Management and Planning Authority) को 47,436 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की है. यह राशि वनीकरण को बढ़ावा देने और देश के हरित उद्देश्यों की प्राप्ति को प्रोत्‍साहन देने के लिए दिया गया है. केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने 29 अगस्त को इसकी घोषणा की.

जिन महत्वपूर्ण गतिविधियों पर इस धन का उपयोग किया जाएगा उनमें – क्षतिपूरक वनीकरण, जलग्रहण क्षेत्र का उपचार, वन्यजीव प्रबंधन, वनों में लगने वाली आग की रोकथाम, वन में मृदा एवं आद्रता संरक्षण कार्य, वन्‍य जीव पर्यावास में सुधार, जैव विविधता और जैव संसाधनों का प्रबन्‍धन, वानिकी में अनुसंधान कार्य आदि शामिल हैं.

हस्तांतरित की जा रही धनराशि राज्य के बजट के अतिरिक्त होगी. सभी राज्य इस धनराशि का उपयोग वन और वृक्षों का आवरण बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय स्‍तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के उद्देश्‍यों की पूर्ति के लिए वानिकी कार्यकलापों में करेंगे. इससे वर्ष 2030 तक 2.5 से 3 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के समान अतिरिक्त कार्बन सिंक (यानी वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण) होगा.


प्‍लास्टिक कचरे से डीजल बनाने वाले संयंत्र का देहरादून में उद्घाटन

भारतीय पेट्रोलियम संस्थान ने प्‍लास्टिक कचरे से डीजल बनाने वाले संयंत्र उत्‍तराखंड की राजधानी देहरादून में स्थापित किया है. केन्‍द्रीय विज्ञान और टेक्‍नोलाजी मंत्री डॉक्‍टर हर्षवर्धन ने 27 अगस्त को मुख्‍यमंत्री त्रिवेन्‍द्र सिंह रावत के साथ इस संयंत्र का संयुक्‍त रूप से उद्घाटन किया.

एक टन क्षमता का यह प्‍लांट वर्षों की सफलतापूर्वक की गई रिसर्च के परिणामस्‍वरूप देहरादून के IIT के कैम्‍पस में लगाया गया है. संस्‍थान ने विमानों के लिए जैव ईंधन बनाने के बाद प्‍लास्टिक से डीजल बनाने में यह कामयाबी हासिल की है.

भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसन्धान परिषद् (CSIR) की प्रयोगशाला है. इस संस्थान का कार्य पेट्रोकेमिकल, पेट्रोलियम रिफाइनिंग इत्यादि प्रक्रियाओं पर रिसर्च करना है.