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भारत ने लड़ाकू विमान तेजस के साथ पाइथन-5 मिसाइल की सफल परीक्षण श्रृंखला पूरी की

भारत ने लड़ाकू विमान तेजस (Tejas) की मारक क्षमता के कई सफल परीक्षण ‘पाइथन-5’ मिसाइल के साथ किया. रक्षा अनुसंधान विकास संस्थान (DRDO) ने यह परीक्षण श्रृंखला गोवा में हाल ही में आयोजित किया था. इस श्रृंखला में स्वदेश में बने हल्के लड़ाकू विमान ‘तेजस’ के साथ पाइथन-5 मिसाइल को एकीकृत किया गया था.

इस परीक्षण का लक्ष्य तेजस पर पहले से ही एकीकृत पाइथन डर्बी बियॉन्ड विजुअल रेंड (BVR) AAM की बढ़ी हुई क्षमता को सत्यापित करना था. डर्बी प्रक्षेपास्त्र ने तेज गति से हवा में करतब दिखा रहे लक्ष्य पर सीधा प्रहार किया और पाइथन प्रक्षेपास्त्र ने भी 100 प्रतिशत लक्ष्य पर वार किया और इस तरह अपनी पूर्ण क्षमताओं को प्रमाणित किया.

इस परीक्षणों से पहले बेंगलुरु में तेजस में लगी विमानन प्रणाली के साथ ‘पाइथन-5’ मिसाइल के एकीकृत होने के आकलन के लिये व्यापक हवाई परीक्षण किए गए. इनमें लड़ाकू विमान की वैमानिकी, फायर-नियंत्रण रडार, प्रक्षेपास्त्र आयुध आपूर्ति प्रणाली, विमान नियंत्रण प्रणाली शामिल थे.

पाइथन-5 मिसाइल: मुख्य तथ्य

  • पाइथन-5 मिसाइल हवा से हवा में मार करने में सक्षम पांचवीं पीढ़ी की मिसाइल है. यह इजरायल के हथियार निर्माता राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम द्वारा निर्मित मिसाइल है. पायथन 5, डर्बी मिसाइल का एक उन्नत संस्करण है.
  • पाइथन-5 की लंबाई 10.17 फीट है. इसका व्यास 6.29 इंच है. वजन 105 किलोग्राम है. यह इंफ्रारेड और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इमेजिंग के जरिए गाइड होती है.
  • इसकी मारक क्षमता 20 किलोमीटर है. यानी दुश्मन का जहाज अगर 20 किलोमीटर दूर पर हवा में स्थित हैं और वह दिखाई नहीं दे रहा है तो भी यह उसे नष्ट कर सकती है.
  • इस मिसाइल को स्वदेश में बने हल्के लड़ाकू विमान (फाइटर जेट) ‘तेजस’ के साथ एकीकृत किया गया है. यह मिसाइल दुश्मन के विमानों, हेलिकॉप्टरों और ड्रोन को तेजी से मर गिराने में सक्षम है. इस मिसाइल का उपयोग दुनिया के करीब 20 देशों की वायुसेना करती है.

सेना ने अपने सैन्य फार्म को 1 अप्रैल 2021 से औपचारिक रूप से बंद किया

सेना ने अपने सैन्य फार्म (Military Farm) को 1 अप्रैल 2021 से औपचारिक रूप से बंद कर दिया है. ये सैन्य फार्म सैनिकों को गायों का स्वास्थ्यप्रद दूध उपलब्ध कराने के लिए स्थापित किए गए थे.

सैन्य फार्म: एक दृष्टि

  • सैन्य फार्म की स्थापना सेना की इकाइयों को दूध की आपूर्ति के लिए 132 साल पहले ब्रिटिश काल में की गई थी.
  • स्वतंत्रता के बाद पूरे भारत में 30 हजार मवेशियों के साथ 130 सैन्य फार्म बनाए गए थे. पहला सैन्य फार्म 1 फरवरी 1889 को इलाहाबाद में स्थापित किया गया था.
  • ये सैन्य फार्म लगभग 20 हजार एकड़ भूमि पर फैले थे और सेना इनके रखरखाव पर सालाना लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च करती थी.
  • रक्षा मंत्रालय ने अगस्त 2017 में कई सुधारों की घोषणा की थी कि जिनमें सैन्य फार्म को बंद करना भी शामिल था.
  • इन फार्म में रखे गए मवेशियों को सेना ने बहुत ही साधारण मूल्य में अन्य सरकारी विभागों या सहकारी डेयरियों को देने का फैसला किया है.

DRDO ने SFDR मिसाइल का सफल परीक्षण किया, मारक क्षमता 100-200 किमी

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 5 मार्च को सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) मिसाइल का सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से किया गया. परीक्षण में ग्राउंड बूस्टर मोटर समेत सभी सिस्टम उम्मीदों पर खरे उतरे और उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया.

SFDR मिसाइल: मुख्य बिंदु

  • यह मिसाइल सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक पर आधारित है. यह तकनीक भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है.
  • यह मिसाइल भारत की सतह-से-हवा और हवा-से-हवा दोनों ही मिसाइलों को बेहतर प्रदर्शन करने और उनकी स्ट्राइक रेंज को बढ़ाने में मदद करेगा. इस मिसाइल की मारक क्षमता 100-200 किमी है.
  • भारत में SFDR परियोजना का लक्ष्य लंबी दूरी की मिसाइलों के प्रणोदन प्रणाली के तकनीकों को उन्नत करना है. इस प्रणाली में थ्रस्ट मॉड्यूलेटेड डक्टेड रॉकेट के साथ-साथ स्मोक नोजल-लेस मिसाइल बूस्टर शामिल है.
  • इस सिस्टम में थ्रस्ट मॉडुलन गर्म गैस प्रवाह नियंत्रक का उपयोग करके प्राप्त किया जाता है और इसके साथ ही यह प्रणाली एक ठोस ईंधन वाले वायु-श्वास रैमजेट इंजन का भी उपयोग करती है.

DAC ने तीनों सशस्त्र बलों के कई पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने तीनों सशस्त्र बलों के कई पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है. ये मंजूरी 23 फरवरी को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई (DAC) की बैठक में दी गयी. इस बैठक में तीनों सशस्त्र बलों की जरूरतों को लेकर विभिन्न हथियारों, प्लेटफार्म, सैन्य उपकरणों के पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी गयी.

इस बैठक में कुल 13,700 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन ‘आवश्यकताओं को भी स्वीकृति’ (AON) दी गयी. ये सभी AON रक्षा खरीद की उच्चतम प्राथमिकता श्रेणी में हैं. इनमें ‘इंडियन- IDDM (स्वदेश में डिजाइन तैयार, विकसित एवं विनिर्मित)’ शामिल हैं.

खरीद प्रस्ताव में शामिल ये सभी साजो सामान स्वदेश में डिजाइन तैयार, विकसित एवं विनिर्मित होंगे. इनमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित प्लेटफार्म भी शामिल हैं. DAC ने यह भी मंजूरी दी है कि सभी पूंजीगत खरीद अनुंबंध, डी एंड डी (डिजाइंड एवं डेवलप्ड) मामलों को छोड़ कर दो साल में संपन्न की जाएं.

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) क्या है?

रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council), तीनों सशस्त्र बलों की योजना और खरीद को स्वीकृति प्रदान करने वाली सर्वोच्च संस्था है. इसका गठन 2001 में राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली में सुधार की सिफारिश के आधार पर किया गया था.

DRDO ने सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल ‘VL-SRSAM’ के दो परीक्षण किए

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 22 फरवरी को सतह-से-हवा में कम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल (VL-SRSAM) के दो सफल परीक्षण किए. ये परीक्षण ओडिसा तट के पास चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज से किये गये.

DRDO ने इसे विशेष तौर पर नौसेना के लिए देश में ही डिजाइन और विकसित किया है. यह मिसाइल समुद्र में नजदीकी लक्ष्य सहित विभिन्न हवाई हमलों के खतरे से निपटने में सक्षम है. परीक्षण में मिसाइलों ने अत्यधिक सटीकता के साथ लक्ष्यों को भेद दिया. मिसाइलों को हथियार नियंत्रण प्रणाली के साथ तैनात किया गया था.

अत्याधुनिक अर्जुन टैंक को सेना में शामिल किया गया

स्वदेश विकसित अत्याधुनिक अर्जुन टैंक (MK-1A) को सेना में शामिल कर लिया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 फरवरी को चेन्‍नई में इस टैंक को सेना को सौंपा. नए अर्जुन टैंक पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तान में भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनात किया जाएगा.

  • अर्जुन युद्धक टैंक को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के CVRDE (Combat vehicle research and development establishment) ने देश में ही डिजाइन, विकसित और निर्मित किया है.
  • यह स्वदेशी गोला-बारूद का भी उपयोग करता है. यह किसी भी इलाके में दिन और रात के समय लक्ष्य को सटीकता से भेद सकता है.

सतह-से-हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया

भारत ने हाल ही में नई पीडी की Akash-NG मिसाइल (प्रक्षेपास्त्र) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था. यह परीक्षण चांदीपुर परीक्षण परिसर LC-3 से किया गया था.

आकाश मिसाइल: एक दृष्टि

  • आकाश, स्वदेश में निर्मित मध्यम दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल है. इसे को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया गया है. यह भारतीय थल सेना और भारतीय वायु सेना के साथ परिचालन सेवा में है.
  • इसको एंटी मिसाइल के तौर पर भी उपयोग में लाया जा सकता है. इसमें लड़ाकू जेट विमान क्रूज़ मिसाइलों और हवा-से-सतह वाली मिसाइलों के साथ-साथ बैलिस्टिक मिसाइलों जैसे हवाई लक्ष्यों को बेअसर करने की क्षमता है.
  • आकाश 30 किलोमीटर की एक अवरोधक सीमा के साथ सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल है. इसका वजन 720 किलोग्राम व्यास 35 सेंटीमीटर और लंबाई 5.78 मीटर है.
  • आकाश सुपर सोनिक गति पर 2.5 मैक के आसपास पहुंचती है यह 18 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच सकती है. इस मिसाइल को चरण बद्घ सारिणी फायर कंट्रोल रडार द्वारा निर्देशित किया जाता है, जिसे राजेंद्र कहा जाता है. यह बैटरी स्तर रडार (BLR) के रूप में लगभग 7 किलोमीटर तक के टारगेट की ट्रैकिंग कर सकता है.
  • आकाश मिसाइल का पहला परीक्षण 1990 में किया गया था. पिछले दिनों आकाश मिसाइल की खरीद में दक्षिण एशिया के नौ देशों एवं अफ्रीकी मित्र देशों ने रुचि दिखाई.

DRDO ने स्‍वदेशी स्‍मार्ट एंटी एयरफील्‍ड वैपन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 21 जनवरी को स्‍वदेशी स्‍मार्ट एंटी एयरफील्‍ड वैपन (SAAW) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. यह परीक्षण ओडिसा तट पर हॉक-1 विमान से किया गया. यह इस तरह का नौंवा सफल परीक्षण था. भारत ने SAAW का सफल परीक्षण कर एक और उपलब्धि हासिल की है.

स्‍वदेशी स्‍मार्ट एंटी एयरफील्‍ड वैपन: मुख्य बिंदु

  • स्‍वदेशी स्‍मार्ट एंटी एयरफील्‍ड वैपन (SAAW) का परीक्षण हॉक-1 विमान से किया गया. हॉक-1 का विकास हिन्‍दुस्‍तान एरोनॉटिक्‍स लिमिटेड (HAL) ने किया है. SAAW को पहले जगुआर विमान में लगाया गया था.
  • SAAW एक निर्देशित बम (गाइडेड बम) है. इसको DRDO के अनुसंधान केन्‍द्र RCI हैदराबाद ने विकसित किया है. इसका वजन 125 किलो हैं. इसे बेहद हल्के वजन वाला दुनिया का बेहतरीन गाइडेड बम बताया गया है.
  • 125 किलोग्राम वर्ग वाला यह स्‍मार्ट वैपन 100 किलोमीटर की रेंज में रडार और बंकर जैसे ठिकानों को मार सकता है.

DRDO ने पहली स्वदेशी मशीन पिस्टल बनाई

भारत ने अपनी पहली स्वदेशी मशीन पिस्टल विकसित की है. यह 9 मिमी मशीन पिस्टल (9 mm Machine Pistol) है. इसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO), भारतीय सेना और इन्फैंट्री स्कूल महू (MHOW) ने मिलकर बनाया है. इस 9 मिमी मशीन पिस्टल का नाम अस्मि (Asmi) रखा गया है. यानी गर्व, आत्मसम्मान और कड़ी मेहनत.

9 मिमी मशीन पिस्टल: एक दृष्टि

  • आर्मी के ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद बंसोड़ (Lt Col Prasad Bansod) ने इस पिस्टल को बनाने में मुख्य भूमिका निभाई है.
  • इस पिस्टल की डिजाइनिंग DRDO के आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैबलिशमेंट (ARDE) और आर्मी इन्फैंट्री स्कूल, महू ने मिलकर की है.
  • इसे बनाने में DRDO को सिर्फ 4 महीने लगे हैं. इसके दो वैरिएंट हैं. पहला एक किलोग्राम वजन का दूसरा 1.80 किलोग्राम वजन का.
  • इस पिस्टल का ऊपरी हिस्सा एयरक्राफ्ट ग्रेड के एल्यूमिनियम से बना है, जबकि निचला हिस्सा कार्बन फाइबर से बनाया गया है.
  • इस पिस्टल को बनाने के लिए थ्रीडी प्रिटिंग डिजाइनिंग की भी मदद ली गई थी. एक पिस्टल की उत्पादन लागत 50 हजार रुपए से कम है.
  • 100 मीटर की रेंज तक यह पिस्टल सटीक निशाना लगा सकती है. इसकी मैगजीन में स्टील की लाइनिंग लगी है यानी यह गन में अटकेगी नहीं. इसकी मैगजीन को पूरा लोड करने पर 33 गोलियां आती हैं.
  • इस पिस्टल का उपयोग क्लोज कॉम्बैट, वीआईपी सिक्योरिटी और आतंकरोधी मिशन में किया जा सकता है.

भारतीय नौसेना का तट रक्षक अभ्‍यास सी-विजिल-21 आयोजित किया गया

भारतीय नौसेना ने 12-13 जनवरी को तट रक्षक अभ्‍यास ‘सी-विजिल-21’ (Sea Vigil-21) आयोजित किया था. इसका उद्देश्य समुद्र के तटवर्ती इलाकों में चौकसी करना है. इससे पहले जनवरी 2019 में यह अभ्‍यास आयोजित किया गया था.

सी-विजिल-21: मुख्य बिंदु

  • इस अभ्‍यास में समुद्री तट की 7516 किलोमीटर सीमा को कवर किया गया. अभ्यास में देश का विशेष आर्थिक क्षेत्र भी शामिल था. इसमें अन्य समुद्री हितधारकों के साथ वह सभी 13 तटीय राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल थे जिनकी सीमाएं समुद्र के साथ लगी हैं.
  • इसमें शांतिकाल के साथ-साथ युद्ध के समय की जरूरतों को ध्‍यान में रखकर अभ्‍यास किया गया. इसके अलावा तटवर्ती इलाकों में सुरक्षा का उल्‍लंघन होने पर किये जाने वाले उपायों का भी अभ्‍यास किया गया.
  • इस अभ्‍यास में तटवर्ती इलाकों की सुरक्षा से संबंधित समूची प्रणाली के साथ-साथ भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के 110 से अधिक पोतों ने हिस्‍सा लिया.
  • समुद्री पुलिस और सीमाशुल्‍क विभाग को भी सुरक्षा अभ्‍यास में भागीदार बनाया गया था. अभ्‍यास के दौरान भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के विमानों और हेलीकॉप्‍टरों को भी तटवर्ती इलाकों में टोह लेने का अभ्‍यास कराया गया.

वायुसेना के लिए 83 तेजस लड़ाकू विमानों के रक्षा सौदे को मंजूरी

सरकार ने घरेलू रक्षा खरीद के तहत हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से 83 तेजस विमान खरीदने को मंजूरी प्रदान की है. यह मंजूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 13 जनवरी को हुई सुरक्षा मामलों पर मंत्रिमंडल समिति (CCS) की बैठक में दी गयी. इन विमानों की लागत करीब 48,000 करोड़ रुपए है. इस सौदे के तहत 73 हल्के लड़ाकू विमान तेजस MK-1A और 10 तेजस MK-1 प्रशिक्षण विमान शामिल हैं.

तेजस लड़ाकू विमान: एक दृष्टि

  • तेजस चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है. इसका डिजाइन एवं विकास स्वदेशी स्तर पर किया गया है. इसे एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा विकसित किया गया है.
  • तेजस की विशेषता यह है कि, कम ऊंचाई पर उड़कर यह दुश्मन पर नजदीक से सटीक निशाना साध सकता है. यह दुश्मन के रडार की पकड़ से बचने में सक्षम है.
  • तेजस हवा-से-हवा में और हवा-से-सतह पर मिसाइल दागने में सक्षम है. इसमें एंटीशिप मिसाइल, बम और रॉकेट भी लगाए जा सकते हैं. आधुनिक रडार और मिसाइल जैमर से भी इस लड़ाकू विमान को लैस किया गया है.
  • डर्बी और अस्त्र मिसाइल से भी ‘तेजस’ लैस हो सकता है. इतना ही नहीं, ‘तेजस’ लड़ाकू विमान के जरिए लेजर गाइडेड बम से दुश्मनों पर हमला किया जा सकता है.
  • ध्वनि की गति से दोगुनी रफ्तार से उड़ान भरने वाला लड़ाकू विमान ‘तेजस’ 2222 किमी प्रति घंटा की गति से उड़ान भरने में सक्षम है.
  • ‘तेजस’ एक बार में 3850 किमी की दूरी तक उड़ान भरने में सक्षम है. सभी तरह के हथियारों से लैस ‘तेजस’ का कुल वजन करीब 13,500 किलोग्राम, लंबाई 13.2 मीटर और ऊँचाई 4.4 मीटर है.

भारत ने हवा से गिराये जाने वाले कंटेनर सहायक-एनजी का पहला सफल परीक्षण किया

रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (DRDO) ने नौसेना के साथ मिलकर हवा से गिराये जाने वाले कंटेनर सहायक-एनजी (SAHAYAK-NG) का पहला सफल परीक्षण किया है. यह परीक्षण गोवा के तट से किया गया. परीक्षण में इस कंटेनर को IL-38SD विमान से गिराया गया.

सहायक-एनजी क्या है?

सहायक-एनजी भारत का पहला स्वदेशी कंटेनर है. यह GPS से लैस है और 50 किलो भार के साथ विमान से गिराया जा सकता है. इसके माध्यम से दूर तैनात जहाजों को जरूरत के सामानों की आपूर्ति की जा सकती है. DRDO और निजी कंपनी एवांटेल की दो प्रयोगशालाओं में इसका विकास हुआ है. हवा से गिराया जाने वाला सहायक-एनजी कंटेनर सहायक MKI का एडवांस वर्जन है.