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डेली कर्रेंट अफेयर्स
19-21 अप्रैल 2023

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चीन को पीछे छोड़ भारत विश्व की सबसे अधिक आबादी वाला देश बना

संयुक्त राष्ट्र (UN) के आंकड़ों अनुसार भारत ने दुनिया की सबसे अधिक आबादी के मामले में चीन को पीछे छोड़ दिया है. संयुक्त राष्ट्र के वर्ल्ड पॉपुलेशन डैशबोर्ड के अनुसार 2023 मध्य तक के अनुमानों के अनुसार भारत की आबादी 1.4286 अरब हो गई है यह चीन की आबादी 1.4257 अरब से कुछ ज्यादा है.

मुख्य बिन्दु

  • दुनिया की लगभग 2.4% भूमि वाला देश भारत कुल वैश्विक आबादी के लगभग पांचवें हिस्से का घर है. भारत में अमेरिका, अफ्रीका या यूरोप की पूरी आबादी से अधिक लोग रहते हैं.
  • यूएन के आंकड़ों के अनुसार भारत में दुनिया की सबसे युवा आबादी भी रहती है. भारत की आधी आबादी 30 साल से कम लोगों की है जिनकी औसत उम्र 28 वर्ष है. अमेरिका और चीन की बात की जाए तो वहां की औसत उम्र 38 वर्ष है.
  • भारत से लगभग तीन गुना बड़े चीन की भी स्थिति लगभग ऐसी ही है. पर यहां गौर करने वाली बात यह है कि भारत की आबादी अपेक्षाकृत युवा और बढ़ रही है. वहीं चीन की आबादी में वृद्धों की संख्या अधिक है और यह घट रही है.
  • ये आंकड़े संयुक्त राष्ट्र के ताजा अनुमानों पर आधारित हैं. भारत में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी. ऐसे तो हर 10 वर्ष के अंतराल पर देश में जनगणना की जाती है पर वर्ष 2021 में कोरोना संकट के कारण सरकार ने टालने का फैसला किया था.
  • भारत में 2022 में दो करोड़ 30 लाख बच्चों का जन्म हुआ. हालांकि भारत में जन्म दर (प्रति एक हजार की आबादी पर पैदा होने वाले बच्चों की संख्या) में 2004 के 24.1 की तुलना में गिरावट आई है और यह 2019 में 19.7 रह गया है.
  • 2022 में चीन में 1950 के बाद से सबसे कम केवल 95.6 लाख बच्चों का जन्म हुआ. जन्म से ज्यादा मौतें हुई इस कारण 1960 के बाद से चीन की आबादी में पहली बार गिरावट दर्ज की गई.
  • वहीं दूसरी ओर, भारत की आबादी में वर्ष 2060 के मध्य तक वृद्धि का अनुमान है, जबकि चीन में इस दौरान आबादी घटने का अनुमान है.

भारत में दुनिया की सबसे युवा आबादी वाला देश

आर्थिक विकास के मामले में भारत की युवा आबादी अहम रोल अदा कर सकती है, क्योंकि यहां कि दो तिहाई से अधिक आबादी काम करने की उम्र यानी 15 वर्ष से 64 वर्ष के बीच की है. ऐसे में भारत के पास वस्तुओं व सेवाओं के उत्पादन और उपभोग में वृद्धि लाने की असीम संभावना है.

देश की अर्थव्यवस्था के लिए बढ़ती आबादी के मायने

  • लगातार बढ़ती आबादी भारत के लिए संभावनाओं के साथ-साथ चुनौतियों भी बढ़ा रही है. देश की अर्थव्यवस्था 2025-26 तक 5 ट्रिलियन डॉलर और 2030 तक 7 ट्रिलियन डॉलर की हो सकती है. हालांकि बढ़ती आबादी सरकार के इस लक्ष्य को हासिल करने की राह का रोड़ा भी बन सकता है.
  • देश की आबादी के बढ़ने से अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. पहले ही भारत में गरीबी, भूख और कुपोषण जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए गंभीर प्रयास किए जाने की जरूरत है.
  • बढ़ती आबादी के साथ लोगों को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था, बेहतर शिक्षा, बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और शहरों व गांवों को अधिक सुविधाजनक बनाना सरकार के लिए और भी बड़ी चुनौती होगी.
  • बढ़ती आबादी के साथ देश के सामने जलवायु परिवर्तन, जल संकट, बेरोजगारी, स्वास्थ्य सुविधाओं की बुरी स्थिति आदि कई समस्याएं मुंह बाए खड़ीं हैं.
  • बढ़ती आबादी का मतलब है और बड़ा बाजार. इससे अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है. पर अगर हमने बढ़ती जनसंख्या से जुड़ी चुनौतियों की अनदेखी की तो हालात बुरी तरह बिगड़ भी सकते हैं.

केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय क्‍वांटम मिशन को मंजूरी दी

केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय क्‍वांटम मिशन (National Quantum Mission) को मंजूरी दी है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 19 अप्रैल को नई दिल्ली में एक बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया.

मुख्य बिन्दु

  • इस मिशन का उद्देश्य क्वांटम टेक्नोलॉजी पर आधारित आर्थिक उन्नति को बढ़ावा देना है. साथ ही, भारत को क्वांटम तकनीक और एप्लीकेशन की उपयोगिता के क्षेत्र में सबसे अग्रणी राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है.
  • इस मिशन को 2023-24 से सात वर्ष की अवधि के लिए छह हजार करोड रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है.
  • क्वांटम आधारित नेशनल मिशन को मंजूरी मिलने के बाद भारत सातवां ऐसा देश बन गया है जिसने क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए एक डेडिकेटेड मिशन शुरू किया है.
  • अमेरिका, चीन, फ्रांस, कनाडा, फिनलैंड और ऑस्ट्रिया पहले से ही क्वांटम तकनीक के क्षेत्र व इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में काम कर रहे हैं.

क्या है राष्ट्रीय क्वांटम मिशन

  • इस मिशन के तहत आगामी आठ वर्षों में भारत का लक्ष्य इंटरमीडिएट स्केल क्वांटम कंप्यूटर को विकसित करना है. जिनकी फिजिकल क्षमता 50-1000 क्यूबिट्स की होगी और इनकी उपयोगिता बहुत सारे प्लेटफॉर्म पर की जाएगी. खास करके सुपरकंडक्टिंग और फोटोनीक टेक्नॉलजी के लिए.
  • भारत में पृथ्वी के स्टेशन से 2000 किलोमीटर के रेंज तक सैटेलाइट बेस्ड सेक्योर क्वांटम आधारित संचार किये जा सकेंगे. इसके अलावा लंबी दूरी के लिए दूसरे अन्य देशों के साथ भी संचार स्थापित किए जा सकेंगे.
  • इसके अलावा राष्ट्रीय क्वांटम कार्यक्रम के तहत संचार और नेविगेशन के लिए स्वदेशी मैग्नेटोमीटर, परमाणु घड़ियों, सिंगल फोटॉन आदि के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा.
  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का संचार, स्वास्थ्य, वित्त, ऊर्जा, दवा डिजाइन और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों सहित कई उद्योगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

क्या है क्वांटम टेक्नोलॉजी?

क्वांटम प्रौद्योगिकी क्वांटम सिद्धांत पर आधारित होता है, जो परमाणु और उप-परमाणु स्तर पर ऊर्जा और पदार्थ की प्रकृति की व्याख्या करती है. इसकी सहायता से डेटा और इंफॉर्मेशन को कम-से-कम समय में प्रोसेस किया जा सकता है. यह महत्त्वपूर्ण क्षमता क्वांटम कंप्यूटरों को पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में बेहद शक्तिशाली बनाती है.


असम और अरुणाचल प्रदेश ने सीमा विवाद के निपटारे के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए

असम और अरुणाचल प्रदेश ने दोनों राज्यों के बीच अंतर-राज्य सीमा विवाद के निपटारे के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

मुख्य बिन्दु

  • यह समझौता नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने किया.
  • इस समझौते से दोनों राज्‍यों की सीमा पर स्थित 123 गांवों का विवाद समाप्त हो जाएगा. 1972 से इस सीमा विवाद को सुलझाने का प्रयास विफल रहा था.
  • 100 किलोमीटर से लंबी असम-अरूणाचल सीमा का विवाद के समाधान के लिए यह समझौता बहुत बड़ी उपलब्धि है.

पहला वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया गया

पहला वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन 20-21 अप्रैल को नई दिल्ली में आयोजित किया गया था. इस सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. इसमें लगभग 30 देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे. जिसमें विदेशों के लगभग 171 प्रतिनिधि और भारतीय बौद्ध संगठनों ने हिस्सा लिया.

मुख्य बिन्दु

  • सम्मेलन का आयोजन संस्कृति मंत्रालय अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के सहयोग से किया गया था.
  • वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन का महत्व भारत के लिए अधिक है क्योंकि बौद्ध धर्म का उदय सबसे पहले भारत में ही हुआ था.
  • पहली बार विभिन्न देशों के प्रमुख बौद्ध भिक्षु भारत आए और शिखर सम्मेलन में भाग लिए.
  • इस शिखर सम्‍मेलन में इस बात पर चर्चा हुई कि बौद्ध दर्शन और विचार की मदद से समकालीन चुनौतियों से कैसे निपटा जाए.
  • यह वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन अन्य देशों के साथ सांस्कृतिक और राजनयिक संबंधों को बढाने का एक माध्यम था.

19 अप्रैल: विश्व यकृत दिवस

प्रत्येक वर्ष 19 अप्रैल को विश्व यकृत दिवस (World Liver Day) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य यकृत संबंधित रोगों के बारे में जागरूकता फैलाना है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में लीवर की बीमारियां मृत्यु का 10वां सबसे आम कारण है.


21 अप्रैल: सिविल सेवा दिवस

प्रत्येक वर्ष 21 अप्रैल को सिविल सेवा दिवस (Civil Services Day) के रूप में मनाया जाता है. यह दिवस सिविल सेवकों को स्वयं को नागरिकों के लिए पुनर्समर्पित करने तथा अपनी वचनबद्धता को पुनर्सज्जित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है.

इसी दिन 1947 में पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने ‘आल इंडिया एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस ट्रेनिंग स्कूल’ के पहले बैच के अधिकारियों को दिल्ली के मेटकाफ़ हाउस में पहली बार संबोधित किया था. सरदार पटेल ने अपने संबोधन में सिविल सेवकों को ‘स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया’ के रूप में संबोधित किया था.

भारत सरकार ने वर्ष 2006 से इस दिवस को मनाने का निर्णय लिया था. 21 अप्रैल 2023 को देश में 17वां सिविल सेवा दिवस मनाया गया.

देश-दुनिया: एक संक्षिप्त दृष्टि

सामयिक घटनाचक्र का डेलीडोज

SCO के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रमुखों की बैठक

गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रमुखों की बैठक की अध्यक्षता की. इस दौरान संगठन के सदस्य-देशों के प्रतिनिधि अपने देशों में प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदा से निपटने के उपायों से संबंधित जानकारी साझा किए.

सीमावर्ती क्षेत्रों में बाड़ लगाने और सड़क बनाये जाने का निर्देश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमावर्ती क्षेत्रों में तेजी से बाड़ लगाने और सड़क बनाये जाने का निर्देश दिया है. श्री शाह ने कल नई दिल्ली में गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के चिंतन शिविर की अध्यक्षता की. चिंतन शिविर का उद्देश्य मंत्रालय के कामकाज की समीक्षा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘विजन2047’ लागू करने के लिए कार्य योजना तैयार करना है.

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