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डेली कर्रेंट अफेयर्स
18-19 जनवरी 2021

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यूपीएससी, एसएससी, बैंक, रेलवे सहित केंद्र एबं राज्य सरकारों द्वारा आयोजित सभी प्रतियोगिता परीक्षा के लिए उपयोगी.

इंटरनेशनल माइग्रेशन 2021 रिपोर्ट जारी, दुनिया में भारतीय प्रवासियों की संख्या सबसे ज्यादा

संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों (UNDESA) के जनसंख्या विभाग ने हाल ही में ‘इंटरनेशनल माइग्रेशन 2021’ (Global Migration Report 2021) रिपोर्ट जारी किया है.

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • दूसरे देशों में सबसे ज्यादा प्रवासियों की संख्या के मामले में भारत पहले पायदान पर पहुंच गया है. 2020 में देश से बाहर रहने वाले लोगों की संख्या 18 मिलियन (1.80 करोड़) है.
  • बतौर प्रवासी भारत के सबसे ज्यादा लोग संयुक्त अरब अमीरात (3.5 मिलियन), अमेरिका (2.7 मिलियन) और सऊदी अरब (2.5 मिलियन) में रह रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके अलावा बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कुवैत, ओमान, कतर और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में भी रहते हैं.
  • 2020 में, प्रवासियों के मामले में भारत के बाद दूसरे अन्य बड़े देशों में मेक्सिको (11 मिलियन), रूस (11 मिलियन), चीन (10 मिलियन) और सीरिया (8 मिलियन) शामिल है.

ब्रिटेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 46वें G-7 शिखर सम्‍मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया

ब्रिटेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को G-7 शिखर सम्‍मेलन में अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है. यह बैठक जून 2021 में होगी. ब्रिटेन के उच्चायोग के अनुसार ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भी G-7 शिखर बैठक से पहले भारत की यात्रा पर आ सकते हैं. इससे पहले श्री जॉनसन ने ब्रिटेन में कोरोना वायरस की स्थिति के कारण भारत की यात्रा रद्द कर दी थी.

G-7 का विस्तार कर D-10 किये जाने का प्रस्ताव

इस वर्ष G-7 का विस्तार भी होने वाला है, जिसमें 10 लोकतांत्रिक देश शामिल होंगे और इसका नाम D-10 कर दिया जाएगा. D-10 दस लोकतांत्रिक देशों को दर्शाता है.

2021 में होने वाले 46वें G-7 शिखर सम्मेलन की मेजवानी ब्रिटेन कर रहा है. ब्रिटेन ने भारत, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया को G-7 राष्ट्रों के साथ शामिल करने का प्रस्ताव दिया है. इससे पहले अमेरिका ने भारत, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के साथ रूस को भी शामिल करने का प्रस्ताव दिया था.

G-7 क्या है?

G-7 दुनिया की सात सबसे विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है. इसके सदस्य देशों में अमरीका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं. चीन दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवथा है, फिर भी वो इस समूह का हिस्सा नहीं है. इसकी वजह यहां प्रति व्यक्ति आय संपत्ति जी-7 समूह देशों के मुक़ाबले बहुत कम है.

शुरुआत में यह छह देशों का समूह था, जिसकी पहली बैठक 1975 में हुई थी. बाद में कनाडा इस समूह में शामिल हो गया और इस तरह यह G-7 बन गया. 1998 में G-7 में रूस भी शामिल हो गया था और यह जी-7 से जी-8 बन गया था. लेकिन साल 2014 में यूक्रेन से क्रीमिया हड़प लेने के बाद रूस को समूह से निलंबित कर दिया गया.


रूस ने खुद को मुक्त आकाश संधि से अलग किया, जानिए क्या है खुला आसमान संधि

रूस ने खुद को मुक्त आकाश संधि (Open Skies Treaty) से अलग करने की औपचारिक घोषणा 15 जनवरी 2021 को कर दी. इससे पहले अमेरिका ने भी मुक्त आकाश संधि से अपने आप को अलग कर लिया था.

रूस ने अमेरिका का हवाला देते हुए ये फैसला लिया है. रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा, अमेरिका 2020 में इस समझौते से अलग हो गया था इसलिए संतुलन कायम करने के लिए रूस का यह निर्णय लेना जरूरी हो गया था.

खुला आसमान संधि (OST) क्या है?

खुला आकाश समझौता (Open Skies Treaty) या OST अमेरिका और रूस सहित 35 देशों के बीच ‘हवाई निगरानी’ (Aerial Surveillance Flights) के लिए एक संधि है. इस संधि में नाटो के सदस्य भी संधि में शामिल हैं. इस संधि पर वर्ष 2002 में हस्ताक्षर किए गए थे. इस संधि का उद्देश्य आपसी समझ को बढ़ाना है और सभी प्रतिभागियों में विश्वास उत्पन्न करता है.

OST में शामिल देश की सेना को किसी अन्य सदस्य देश की हवाई सीमा में अल्प सूचना पर एक निश्चित संख्या में निगरानी उड़ानों का संचालन करने की अनुमति देता है. संधि के तहत निगरानी विमान सैन्य प्रतिष्ठानों और गतिविधियों की जानकारी और तस्वीरें एकत्र कर सकता है.

इस संधि पर अब तक 34 देश हस्ताक्षर कर चुके हैं. किर्गिस्तान संधि पर हस्ताक्षर करने वाला 35वां देश है, लेकिन उसने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है.

अमेरिका ने रूस पर जासूसी का आरोप लगते हुए संधि से अलग हुआ था

अमेरिका ने मई 2020 में संधि तोड़ते हुए रूस पर आरोप लगाया था कि वो संधि के बहाने से टोह लेने की कोशिश कर रहा था. दरअसल साल 2017 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बात पर नाराज हो गए थे कि एक रूसी विमान ने गोल्फ कोर्स पर उड़ान भरी थी.

वैशिक असर

अब दो बेहद मजबूत देशों के OST से बाहर होने पर खतरे या शीत युद्ध की अटकलें तक लगाई जा रही हैं. दोनों देशों के बाहर आने से ये साफ है कि उनके बीच तनाव दोबारा बढ़ सकता है.

साल 2019 में भी दोनों ही देश Intermediate-Range Nuclear Forces (INF) संधि से अलग हो चुके हैं. इस संधि के तहत दोनों देशों ने मध्यम दूरी के घातक हथियारों को नष्ट करने का करार किया था ताकि परमाणु हथियारों की दौड़ रोकी जा सके.

खुला आसमान संधि में शामिल देश

बेलारूस, बेल्जियम, बोस्निया और हर्जेगोविना, बुल्गारिया, कनाडा, क्रोएशिया, चेक गणराज्य, डेनमार्क (ग्रीनलैंड सहित), एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जॉर्जिया, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आइसलैंड, इटली, कजाकिस्तान, लातविया, लिथुआनिया, लक्समबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, रूसी संघ, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन, तुर्की, यूक्रेन, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और किर्गिस्तान.


अमेरिका ने की तिब्बत में चीन के उत्पीड़न को रोकने के लिए कानून बनाया

अमेरिका ने की तिब्बत में चीन के उत्पीड़न को रोकने के लिए ‘द टिबेटन पॉलिसी एंड सपोर्ट एक्ट (TPSA)’ कानून बनाया है. चीन यहां 50 साल से ज्यादा समय से लगातार उत्पीड़न कर रहा है. इससे पहले तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री को अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने आमंत्रित किया था और उनके साथ आधिकारिक वार्ता की थी. चीन ने इस पर कड़ा विरोध जताया था.

अमेरिकी संसद में TPSA कानून को सत्ता पक्ष और विपक्ष का मजबूत समर्थन मिला है. इससे संबंधित प्रस्ताव को प्रतिनिधि सभा में सांसद जेम्स मैकगवर्न और क्रिस स्मिथ ने रखा था. जबकि सीनेट में मार्को रूबियो और बेन कार्डिन ने पेश किया था.

तिब्बत में दलाई लामा की निर्वासित सरकार

चीन तिब्बत की सांस्कृतिक पहचान नष्ट करने के लिए सुनियोजित चालें चल रहा है. तिब्बत के आध्यात्मिक प्रमुख दलाई लामा ने भारत में शरण ली हुई है और उनके संरक्षकत्व में यहीं से तिब्बत की निर्वासित सरकार कार्य कर रही है. एक समय मध्य एशिया का यह स्वतंत्र देश अब दुनिया के सबसे ज्यादा उत्पीड़न झेल रहे इलाकों में से एक है.

TPSA कानून में तिब्बती बौद्ध समुदाय का फैसला सर्वोपरि

TPSA कानून दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन के मामले में तिब्बती बौद्ध समुदाय का फैसला सर्वोपरि मानता है. अमेरिका दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन प्रक्रिया में चीन सरकार के हस्तक्षेप को मान्यता नहीं देता.


सड़क सुरक्षा के बारे में जागरूकता लाने के लिए राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह का शुभारंभ

भारत में 18 जनवरी से 17 फरवरी 2021 तक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के रूप में मनाया जा रहा है. इसका शुभारंभ रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नई दिल्ली में किया. इसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा के बारे में जागरूकता लाना और सड़क दुर्घटनाओं को कम करना है.

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में सड़क सुरक्षा पर एक फिल्म का उद्घाटन, वाघा बॉर्डर से कन्याकुमारी तक ‘राष्ट्रीय चैम्पियनशिप सुरक्षित गति प्रतियोगिता’ को झंडी दिखाकर रवाना करना और सड़क सुरक्षा के लिए पुरस्कार प्रदान करना शामिल है.


मशहूर शास्त्रीय संगीतकार उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान का निधन

मशहूर शास्त्रीय गायक और संगीतकार उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान का 17 जनवरी को मुम्बई में निधन हो गया. वह 89 वर्ष के थे. उन्हें संगीत के क्षेत्र में ‘जूनियर तानसेन’ के नाम से भी बुलाया जाता था.

भारत सरकार ने उन्हें 1991 में पद्म श्री, 2006 में पद्म भूषण और 2018 में पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया था. 2003 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था.

उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान रामपुर-सहसवान घराने से ताल्लुक रखते थे. उन्होंने मृणाल सेन की चर्चित फिल्म ‘भुवन शोम’ से अपने गायकी के करियर की शुरुआत की थी. हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में गुलाम मुस्तफा खान ने ‘उमराव जान’, ‘आगमन’, ‘बस्ती’, ‘श्रीमान आशिक’ जैसी फिल्मों में भी अपनी गायकी पेश किया था.

जानी-मानी गायिका आशा भोसले, गीता दत्त, मन्ना डे, सोनू निगम, हरिहरण, शान जैसे तमाम गायकों के करियर में गुलाम‌ मुस्तफा खान का भी अहम योगदान रहा है. बॉलीवुड के तमाम गायक उन्हें अपना गुरु मानते रहे हैं.

देश-दुनिया: एक संक्षिप्त दृष्टि

सामयिक घटनाचक्र का डेलीडोज

अहमदाबाद और सूरत मेट्रो रेल परियोजना का शिलान्यास

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से 18 जनवरी को अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण तथा सूरत मेट्रो रेल परियोजना की आधारशिला रखी. अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना दूसरे चरण की लंबाई 28.25 किलोमीटर है जिसमें दो कॉरीडोर होंगे. परियोजना खर्च 5384 करोड़ रुपये है. सूरत मेट्रो रेल परियोजना 40.35 किलोमीटर लंबी है और इसमें भी दो कॉरीडोर हैं. परियोजना की लागत 12000 करोड़ रुपये से अधिक है.

19वां ढ़ाका अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव आरंभ

बांग्लादेश में 16 जनवरी को 19वां ढ़ाका अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव आरंभ हुआ. बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ एके अब्दुल मोमेन ने महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर कहा कि बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान के जीवन पर बांग्लादेश और भारत द्वारा मिलकर बनाए जाने वाली फिल्म की शूटिंग इसी महीने शुरू होगी.

सूडान में जनजातीय हिंसा

सूडान में पश्चिम डार्फुर में जनजातीय हिंसा के कारण कई लोगों की मौत हो गयी. संयुक्‍त राष्‍ट्र की शांति सेना और अफ्रीकी संघ ने 13 वर्ष बाद सूडान को सुरक्षा जिम्‍मेदारी सौंप दी थी. इसके तीन से भी कम हफ्तों के बाद हिंसक घटनाएं शुरू हुई है.

केवड़िया को जोड़ने वाली आठ रेलगाड़ियां शुरू की गयी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्‍यम से देश के विभिन्न भागों से केवड़िया को जोड़ने वाली आठ रेलगाड़ियां झंडी दिखाकर रवाना कीं. इन रेलगाडि़यों के माध्‍यम से विश्‍व की सबसे ऊंची प्रतिमा सरदार पटेल के ‘स्टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ तक की यात्रा और सुगम हो जाएगी.

परिवहन संबंधी आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए लौह खनिज नीति-2021

रेल मंत्रालय ने खनिज लोहे के परिवहन के लिए मालगाडियों के आवंटन की नई नीति जारी की. इसका उद्देश्‍य ग्राहकों की वर्तमान आवश्‍यकताओं का ध्‍यान रखना और उनकी परिवहन संबंधी समूची आवश्‍यकताओं को पूरा करना है. नई नीति को लौह खनिज नीति-2021 नाम दिया गया है और यह 10 फरवरी 2021 से लागू हो जाएगी.

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June 16, 2026

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June 13, 2026

📝 डेली करेंट अफेयर्स: 10-12 जून 2026

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