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डेली कर्रेंट अफेयर्स
3 मई 2020

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यूपीएससी, एसएससी, बैंक, रेलवे सहित केंद्र एबं राज्य सरकारों द्वारा आयोजित सभी प्रतियोगिता परीक्षा के लिए उपयोगी.

कश्मीरी सैफरन, मणिपुर के काले चावल सहित कई उत्पादों को GI Tag दिया गया

देश में उगाई जाने वाली कश्मीरी सैफरन, मणिपुर के काले चावल सहित कई उत्पादों को हाल ही में भौगोलिक संकेतक (GI Tag) पहचान दी गयी है.

कश्मीरी केसर

कश्मीरी केसर (Saffron) यानी जाफ़रान को GI Tag मिला है. जियोग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री (Geographical Indications Registry) ने कश्मीरी केसर को GI Tag नंबर 635 प्रदान किया है. भारत में केसर कश्मीर के कुछ क्षेत्र में उगाया जाता है.

मणिपुर का काला चावल (चक-हाओ)

मणिपुर के काले चावल को चाक-हाओ से भी जाना जाता है. चाक-हाओ के GI Tag के लिए आवेदन उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम लिमिटेड (NERAMAC) ने गया था. एंथोसायनिन एजेंट के कारण इस चावल का रंग काला होता है. यह चावल मिष्ठान, दलिया बनाने के लिए उपयुक्त है.

गोरखपुर का टेराकोटा

गोरखपुर टेराकोटा के लिए उत्तर प्रदेश के लक्ष्मी टेराकोटा मुर्तिकला केंद्र द्वारा आवेदन दायर किया गया था. गोरखपुर का टेराकोटा लगभग 100 वर्ष पुराना है जिसका उपयोग हस्तशिल्पियों द्वारा नक्काशी और आकृतियां बनाने में किया जाता है.

कोविलपट्टी की कदलाई मितई

कदलाई मितई तमिलनाडु के दक्षिणी भागों में बनाई जाने वाली मूंगफली कैंडी है. मूंगफली और गुड़ से कैंडी को तैयार की जाता है. इसमें विशेष रूप से थामीबरानी नदी के पानी का उपयोग किया जाता है.

पढ़ें पूरा आलेख, GI टैग क्या है…»

मणिपुर के थांगजाम धबाली सिंह को ‘ऑर्डर ऑफ राइजिंग सन’ से सम्मानित किया गया

जापान सरकार ने मणिपुर के डॉक्टर थांगजाम धबाली सिंह को ‘ऑर्डर ऑफ राइजिंग सन’ से सम्मानित किया है. उन्हें यह सम्मान भारत में जापान की बेहतर समझ को बढ़ावा देने और दोनों देशों के बीच संबंध को प्रगाढ़ बनाने के लिए दिया गया है.

थांगजाम धबाली सिंह पेशे से एलोपैथिक डॉक्टर और मणिपुर पर्यटन फोरम (MTF) के संस्थापक हैं. उन्हें 29 अप्रैल को जापान की सरकार ने ‘ऑर्डर ऑफ राइजिंग सन-गोल्ड एंड सिल्वर रेज’ से सम्मानित किया.
सिंह ने द्वितीय विश्वयुद्ध के इम्फाल युद्ध की 70वीं वर्षगांठ के मौके पर कार्यक्रम आयोजित कराया था जिसमें भारत में जापान के दूतावास के कई अधिकारियों समेत वहां के कई नागरिकों ने हिस्सा लिया था.

ऑर्डर ऑफ राइजिंग सन: एक दृष्टि

‘ऑर्डर ऑफ राइजिंग सन’ जापान की संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण के प्रचार और अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों में उपलब्धि के लिए किसी व्यक्ति को दिया जाता है. जापान के बादशाह मेइजी ने 1875 में इस सम्मान को शुरू किया था.


IIT मद्रास के प्रोफेसर थलप्पिल प्रदीप का चयन निक्केई एशिया पुरस्कार के लिए किया गया

जापान के प्रतिष्ठित 25वें निक्केई एशिया पुरस्कार (25th Nikkei Asia Prize) 2020 की घोषणा 1 मई को गयी. IIT मद्रास के प्रोफेसर थलप्पिल प्रदीप को इस पुरस्कार के लिए चुना गया है.

प्रोफेसर थलप्पिल प्रदीप

प्रोफेसर थलप्पिल प्रदीप का चयन ‘विज्ञान और प्रौद्योगिकी’ की श्रेणी में किया गया है. नैनो-प्रौद्योगिकी आधारित जल शुद्धिकरण (water purification) के उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.
उन्हें हाल ही में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था.

अन्य दो श्रेणी के पुरस्कार

भारतीय प्रोफेसर थलप्पिल प्रदीप के अलावे राम प्रसाद कदेल (नेपाल) को संस्कृति और समुदाय की श्रेणी में और एंथनी टैन और टैन होई लिंग (मलेशिया) को आर्थिक और व्यापार नवाचार श्रेणी में यह पुरस्कार दिया जायेगा.

निक्केई एशिया पुरस्कार: एक दृष्टि

  • निक्केई एशिया पुरस्कार जापान द्वारा प्रत्येक वर्ष तीन श्रेणियों- ‘आर्थिक और व्यापार नवाचार’ (Economic and Bussiness Innovation), विज्ञान और प्रौद्योगिकी (Science and Technology) तथा संस्कृति एवं समुदाय (Culture and Community) में प्रदान किया जाता है.
  • पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह (वर्ष 1997), इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति (वर्ष 2001) प्रो. सीएन राव (वर्ष 2008), डॉ. देवी प्रसाद शेट्टी (वर्ष 2014), अक्षय पात्र फाउंडेशन (वर्ष 2016) तथा नंदन नीलेकणि (वर्ष 2017) को इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले भारतीय हैं.

IDMC रिपोर्ट: 2019 में आपदाओं के कारण सबसे अधिक भारत में विस्थापित हुए

आंतरिक विस्थापन निगरानी केंद्र (IDMC) ने प्राकृतिक आपदाओं के कारण विस्थापित हुए लोगों पर एक वैश्विक रिपोर्ट हाल ही में जारी की है. इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में भारत में 50 लाख लोग चक्रवात और बाढ़ सहित विभिन्न आपदाओं के कारण विस्थापित हुए थे. यह संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है.

IDMC रिपोर्ट: मुख्य बिंदु

  • जिनेवा स्थित IDMC की रिपोर्ट के अनुसार 2019 में आपदाओं के कारण दक्षिण एशिया में 95 लाख विस्थापित हुए. यह संख्या 2012 के बाद सबसे ज्यादा है.
  • इतनी बड़ी संख्या में विस्थापन के कारणों में भारत और बांग्लादेश में मानसून के कारण आई बाढ़ तथा फोनी और बुलबुल जैसे चक्रवात भी थे जिनकी वजह से बड़ी संख्या में लोगों को अपने घरों से भागने पर मजबूर होना पड़ा.
  • रिपोर्ट के अनुसार भारत में 50,37,000 लोग विस्थापित हुए जबकि बांग्लादेश में ऐसे लोगों की संख्या 40,86,520 रही. अफगानिस्तान में 5,78,000 लोग विस्थापित हुए जबकि नेपाल में 1,21,000 और पाकिस्तान में 1,16,000 लोग विस्थापित हुए.
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि संघर्ष और हिंसा के कारण 2019 में भारत में लगभग 19,000 लोग विस्थापित हुए. इसमें मुख्य रूप से त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में पहली छमाही में राजनीतिक और चुनावी हिंसा के कारण 7,600 से अधिक लोग विस्थापित हुए.

देश-दुनिया: एक दृष्टि

सामयिक घटनाचक्र डेलीडोज

  • सात राज्यों की 200 नई मंडियां 1 मई से कृषि उत्‍पाद की बिक्री के लिए e-NAM यानी ई-राष्‍ट्रीय कृषि बाजार मंच में शामिल हो गई हैं. इनमें राजस्थान की 94, तमिलनाडु की 27, उत्तर प्रदेश और गुजरात की 25-25, ओडिशा की 16, आंध्र प्रदेश की 11 और कर्नाटक की दो मंडियाँ शामिल हैं. इसके साथ देश में e-NAM मंडियों की कुल संख्या 785 हो जाएगी. e-NAM एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित होता है जो राज्य की मंडियों से जुड़ा हुआ है.
  • उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन, राजधानी प्योंगयांग के पास एक उर्वरक कारखाने का उद्घाटन करते हुए 20 दिन में पहली बार सार्वजनिक रूप से नजर आए जिससे उन अटकलों पर विराम लग गया कि वह गंभीर रूप से बीमार हैं. इसमें उनकी बहन किम यो जोंग भी शामिल हुई. विश्लेषकों का अनुमान है कि किम के बाद उनकी बहन देश की बागडोर संभालेंगी.
  • उपभोक्‍ता कार्य मंत्री रामविलास पासवान ने एक राष्‍ट्र एक राशनकार्ड योजना में और पांच राज्‍यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल करने की स्‍वीकृति दे दी है. ये राज्‍य और केंद्रशासित प्रदेश हैं- उत्‍तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दादरा नगर हवेली तथा दमन और दीव. इस योजना में पहले से बारह राज्‍य शामिल हैं- ये हैं आंध्र प्रदेश, गोवा, गुजरात, हरियाणा, झारखण्‍ड, केरल, कर्नाटक, मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान, तेलंगाना और त्रिपुरा.
  • सरकार ने कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए 49 वन्य उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ा दिया है. इन उत्पादों के मूल्य में 16 प्रतिशत से 66 प्रतिशत तक की बढ़ोत्‍तरी की गयी है. इस मूल्य वृद्धि से कम से कम 20 राज्यों में वन उत्पादों की ख़रीद बढ़ेगी.
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