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RBI ने पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड बनाने की घोषणा की

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 5 जून को पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (PIDF) बनाने की घोषणा की. यह फंड 250 करोड़ रुपए के शुरुआती योगदान के साथ बनाया जाएगा. यह फंड कुल 500 करोड़ रुपए का होगा. शेष राशि कार्ड जारी करने वाले बैंक और कार्ड नेटवर्क लगाएंगे.

इस फंड से टीयर-3 से लेकर टीयर-6 तक के केंद्रों और पूर्वोत्तर राज्यों में कारोबारियों को प्वाइंट ऑफ सेल (POS) मशीन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.

POS मशीन से कारोबारी भुगतान स्वीकार सकते हैं

POS मशीन के जरिये कारोबारी डिजिटल तरीके से भुगतान स्वीकार सकते हैं. इससे उन्हें नकदी को संभालने की जरूरत नहीं रहती. पिछले कुछ समय से RBI देश में ई-भुगतान प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है.

RBI ने देश की अर्थव्‍यवस्‍था को सहारा देने के लिए कई उपायों की घोषणा की

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 22 मई को कई उपायों की घोषणा की. RBI ने COVID-19 (कोरोना वायरस) से देश की अर्थव्‍यवस्‍था को सहारा देने के लिए ये घोषणाएं की.

RBI की घोषणा के मुख्य बिंदु

इन घोषणाओं में RBI ने बेंचमार्क ब्याज दरों में कमी किए जाने और सभी सावधि ऋण और पूंजीगत ऋण के मासिक भुगतान पर तीन महीने तक की राहत देने की घोषणा की.

RBI ने नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में 0.40 प्रतिशत की कमी करके उसे 4 प्रतिशत कर दिया है. रिवर्स रेपो दर में भी 40 आधार अंकों की कमी करके उसे 3.75 प्रतिशत किया गया है. इसी प्रकार बैंक दर को 4.65 प्रतिशत से घटाकर 4.25% कर दिया गया है.

RBI के अनुसार इस वित्त वर्ष (2020-21) की पहली छमाही (अप्रैल-सितम्बर) में महंगाई उच्च स्तर पर रह सकती है. RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि कोरोना लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है और इस साल अर्थव्यवस्था वृद्धि दर (GDP) के निगेटिव रहने का खतरा है.

रेपो रेट कम होने से कैसे लोगों को होता है फायदा?

रेपो रेट के कम होने से बैंकों को RBI से कम व्याज पर कर्ज मिलता है. इस सस्ती लागत का लाभ कर्ज लेने वाले ग्राहकों को मिलता है. इससे बैंकों को घर, दुकान, पर्सनल और कार के लिये लोन कम दरों पर देने का मौका मिलता है. ग्राहकों के चल रहे लोन पर EMI का भी कम होता है.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI): एक दृष्टि

  • भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) भारत का केन्द्रीय बैंक है. यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है.
  • RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को RBI ऐक्ट 1934 के अनुसार हुई. प्रारम्भ में इसका केन्द्रीय कार्यालय कोलकाता में था जो सन 1937 में मुम्बई आ गया.
  • पहले यह एक निजी बैंक था किन्तु सन 1949 से यह भारत सरकार का उपक्रम बन गया है.
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत अनिवार्य रूप से मौद्रिक नीति के संचालन की जिम्मेदारी सौपीं गई है.

वर्तमान दरें: एक दृष्टि

नीति रिपो दर4%
प्रत्‍यावर्तनीय रिपो दर3.65%
सीमांत स्‍थायी सुविधा दर4.25%
बैंक दर4.25%
CRR3%
SLR18%

क्या होता है रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर और एसएलआर?

तरुण बजाज को RBI के केंद्रीय निदेशक मंडल में निदेशक नियुक्त किये गये

केंद्र सरकार ने आर्थिक मामलों के सचिव तरुण बजाज को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के केंद्रीय निदेशक मंडल में निदेशक नियुक्त किया है. बजाज इस पद से सेवानिवृत्त हो रहे अतनु चक्रवर्ती का स्थान लेंगे. बजाज का नामांकन 5 मई से अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा.

तरुण बजाज 1988 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं. आर्थिक मामलों के सचिव बनाए जाने से पहले वह प्रधानमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त सचिव रह चुके हैं.

RBI ने म्यूचुअल फंड्स के लिए 50 हजार करोड़ रुपए की नकदी सहायता की घोषणा की

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने म्यूचुअल फंड्स (Mutual Fund) के लिए 50 हजार करोड़ रुपए की विशेष नकदी सहायता (लिक्विडिटी फैसिलिटी) की घोषणा की है. इसका उद्देश्य ‘कोविड-19’ की वजह से पूंजी बाजारों में अस्थिरता और म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री पर नकदी (Liquidity) का दबाव को कम करना है. RBI की यह ऋण सुविधा 27 अप्रैल से लेकर 11 मई, 2020 तक या पूरी रकम का इस्तेमाल होने तक, दोनों में से जो पहले होगा तब तक लागू रहेगी.

फ्रैंकलिन टेम्पलटन ने भारत में 6 डेट स्कीमों को बंद किया

अमेरिका के म्यूचुअल फंड हाउस ‘फ्रैंकलिन टेम्पलटन’ ने भारत में 6 डेट फंड्स को बंद कर दिया था, इससे म्यूचुअल फंड्स में नकदी की समस्या होने का डर लोगों का सताने लगा था. इसी को देखते हुए RBI ने 27 अप्रैल को म्‍यूचुअल फंड्स के लिए इस नकदी ऋण की घोषणा की, ताकि इंडस्ट्री में नकदी का संकट न हो.

RBI मौद्रिक नीति समिति की बैठक: रेपो दर घटाकर 4.4 प्रतिशत किया गया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 27 मार्च को मुंबई में हुई. RBI ने इस बैठक में COVID-19 (कोरोना वायरस) से देश की अर्थव्‍यवस्‍था पर पड़ने वाले प्रभाव से बचाने के लिए महत्त्वपूर्ण घोषणाएं की.

इस बैठक में RBI ने बेंचमार्क ब्याज दरों में कमी किए जाने और सभी सावधि ऋण और पूंजीगत ऋण के मासिक भुगतान पर तीन महीने तक की राहत देने की घोषणा की.

इस बैठक में RBI ने नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में 0.75 प्रतिशत की कमी करके उसे 4.4 प्रतिशत कर दिया है. रिवर्स रेपो दर में भी 90 आधार अंकों की कमी करके उसे 4 प्रतिशत किया गया है. इसी तरह नकद आरक्षी अनुपात (Cash Reserve Ratio) भी 4 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत किया गया है.

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि इन उपायों से अर्थव्यवस्था में तीन लाख चौहत्तर हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त उपलब्ध होंगे. इन घोषणाओं से नगदी के प्रवाह में सुधार होगा तथा मध्‍यम वर्ग और व्‍यापार जगत को राहत मिलेगी और कर्ज की दरों में कमी होगी.

रेपो रेट कम होने से कैसे लोगों को होता है फायदा?

रेपो रेट के कम होने से बैंकों को RBI से कम व्याज पर कर्ज मिलता है. इस सस्ती लागत का लाभ कर्ज लेने वाले ग्राहकों को मिलता है. इससे बैंकों को घर, दुकान, पर्सनल और कार के लिये लोन कम दरों पर देने का मौका मिलता है. ग्राहकों के चल रहे लोन पर EMI का भी कम होता है.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI): एक दृष्टि

  • भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) भारत का केन्द्रीय बैंक है. यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है.
  • RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को RBI ऐक्ट 1934 के अनुसार हुई. प्रारम्भ में इसका केन्द्रीय कार्यालय कोलकाता में था जो सन 1937 में मुम्बई आ गया.
  • पहले यह एक निजी बैंक था किन्तु सन 1949 से यह भारत सरकार का उपक्रम बन गया है.
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत अनिवार्य रूप से मौद्रिक नीति के संचालन की जिम्मेदारी सौपीं गई है.

वर्तमान दरें: एक दृष्टि

नीति रिपो दर4.40%
प्रत्‍यावर्तनीय रिपो दर4%
सीमांत स्‍थायी सुविधा दर4.65%
बैंक दर4.65%
CRR3%
SLR18.25%

क्या होता है रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर और एसएलआर?

RBI ने बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए 30,000 करोड़ रुपये नकदी डालने की घोषणा की

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए बाजार में 30,000 करोड़ रुपये की नकदी डालने की घोषणा की है. यह नकदी बांड की खरीद-बिक्री (खुले बाजार की गतिविधियां- OMO) के माध्यम से डाली जाएगी. यह खरीद 15,000-15,000 करोड़ रुपये की इसी महीने में होगी. इसकी नीलामी 24 मार्च और 30 मार्च को होगी.

RBI ने कोरोना वायरस महामारी के चलते वित्तीय बाजारों में पर्याप्त नकदी और कारोबार को सामान्य करने के लिए यह निर्णय लिया है.

उल्लेखनीय है कि RBI ने 20 मार्च को खुले बाजार गतिविधियों के जरिए 10,000 करोड़ रुपये की पूंजी डाली थी. केंद्रीय बैंक 19 दिसंबर 2022 को परिपक्व होने वाली प्रतिभूतियों पर 6.84 फीसदी, 25 मई 2025 को परिपक्व होने वालों पर 7.72 फीसदी, नौ जुलाई 2026 को परिपक्व होने वाली प्रतिभूतियों पर 8.33 फीसदी और 14 जनवरी 2029 को परिपक्व होने वाली प्रतिभूतियों पर 7.26 फीसदी ब्याज देगा.

RBI के डिप्टी गवर्नर एनएस विश्वनाथन ने अपने पद से इस्तीफा दिया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर एनएस विश्वनाथन ने 5 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. विश्वनाथन ने स्वास्थ्य कारणों से अपनी सेवानिवृत्ति से तीन महीने पहले ही पद छोड़ने का फैसला किया है. RBI ने विश्वनाथन से 31 मार्च तक पद पर बने रहने का अनुरोध किया है.

RBI में 29 साल से सेवारत डिप्टी गवर्नर 31 मार्च को कार्यमुक्त हो जाएंगे. बैंकिंग नियमन, सहकारी बैंकों, आर्थिक स्थिरता को देखने वाले विश्वनाथन को जून 2019 में एक साल का सेवा विस्तार दिया गया था. विश्वनाथन ने तीन गवर्नरों रघुराम राजन, उर्जित पटेल और शक्तिकांत दास के अधीन काम किया है.

विश्वनाथन के इस्तीके से पहले RBI ने जनवरी 2020 में माइकल पात्रा को नया डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया था. माइकल की नियुक्ति तीन साल के लिए दी गई. बता दें कि डिप्टी गवर्नर के साथ ही माइकल पात्रा RBI के कार्यकारी निदेशक और मौद्रिक नीति समिति (MPC) के सदस्य भी हैं.

माइकल पात्रा RBI के चार डिप्टी गवर्नर में से एक थे. पात्रा के अलावा तीन डिप्टी गवर्नर थे – एनएस विश्वनाथन, बीपी कनुनगो और एमके जैन. इनमें से विश्वनाथन ने इस्तीफा दिया है. वहीं शक्तिकांत दास RBI के गवर्नर हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने वित्तीय संस्थानों को क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित सेवाएं देने की इजाजत दी

सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित सेवाएं देने की इजाजत दे दी है. क्रिप्टोकरेंसी डिजिटल या आभासी मुद्राएं हैं, जिनमें मुद्रा इकाइयों के बनाने और फंड के लेन-देन का सत्यापन करने के लिए एन्क्रिप्शन तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है और यह व्यवस्था केंद्रीय बैंक से स्वतंत्र रहकर काम करती है.

कोर्ट ने RBI के सर्कुलर को रद्द किया

न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 4 मार्च को सुनाये अपने फैसले में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2018 के सर्कुलर को रद्द करते हुए यह आदेश दिया. RBI इस सर्कुलर के अनुसार देश में आभासी मुद्राओं से संबंधित कोई भी सेवा प्रदान करने पर रोक थी.

क्या है क्रिप्टोकरेंसी?

क्रिप्टोकरेंसी एक प्रकार की आभासी (वर्चुअल) मुद्रा है. आभासी से मतलब है कि अन्य मुद्रा की तरह क्रिप्टोकरेंसी का कोई भौतिक स्वरुप नहीं है. क्रिप्टोकरेंसी को आप ना तो देख सकते हैं और न ही छू सकते हैं. यह एक डिजिटल करेंसी है. बिटकॉइन, इथीरियम, रिप्पल, लाइटकॉइन इत्यादि कुछ प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी हैं.

जानिए क्या है क्रिप्टोकरेंसी…»

RBI ने बंधन बैंक पर नई शाखाएं खोलने पर लगे प्रतिबंध को हटाया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बंधन बैंक पर नई शाखाएं खोलने पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है. RBI ने बंधन बैंक की ओर से एक वित्तीय वर्ष में खोले जाने वाले कुल बैकिंग शाखाओं में से करीब 25 फीसदी शाखाएं ग्रामीण इलाकों में खोले जाने का आदेश दिया है, जहां बैंकिंग सुविधाएं मौजूद नहीं हैं.

सितंबर 2018 में लगा था प्रतिबंध

उच्चतम न्यायालय ने बंधन बैंक पर सितंबर 2018 में नई ब्रांच खोलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. कोर्ट ने शेयर होल्डिंग नियम को पूरा न करने के यह आदेश दिया था. उल्लेखनीय है कि RBI लाइसेंसिंग गाइडलाइन के अनुसार, बंधन फाइनेंशल होल्डिंग, बैंक प्रोमोटर कंपनी के शेयर को तीन साल में 82 फीसदी से घटाकर 40 फीसदी करना था. बैंक की समय सीमा अगस्त, 2019 में पूरी हो गई थी, जिसे पूरा करने में असफल रहा था.

बंधन बैंक 2015 में शुरू किया गया था

बंधन बैंक साल 2015 में ऑपरेशन में आया था. 2001 में इस बैंक ने माइक्रो फाइनेंस कंपनी के तौर पर शुरुआत की थी. RBI ने अप्रैल, 2014 में बंधन बैंक को एक यूनिवर्सल बैंक खोलने के लिए सशर्त मंजूरी दी थी. देश के अलग-अलग हिस्सों में इस बैंक के 937 शाखाएं हैं.

सरकार ने सहकारी बैंकों को RBI के विनियामक ढांचे के तहत लाने को मंजूरी दी

सरकार ने सहकारी बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के विनियामक ढांचे के तहत लाने को मंजूरी दी है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में 5 फरवरी को हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह मंजूरी दी गयी.

मंत्रिमंडल के इस फैसले से देश के 1540 सहकारी बैंक के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही आयेगी. सहकारी बैंकों के RBI के विनियामक ढांचे के तहत आ जाने के बाद इनको भी कमर्शियल बैंकों की तरह RBI के मापदंड लागू करने होंगे.

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास को ‘सेंट्रल बैंकर ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास को ग्रोथ को प्रोत्साहित करने और अर्थव्यवस्था में संतुलन के लिए ‘सेंट्रल बैंकर ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. फाइनेंशियल टाइम्स अखबार की ओर से शक्तिकांत दास को यह पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है.

इसके अलावा नेशनल बैंक ऑफ सर्बिया की मुखिया जोरगोवांका ताबाकोवी को ग्लोबल सेंट्रल बैंक का खिताब दिए जाने की घोषणा हुई है.

मैगजीन का कहना है कि शक्तिकांत दास ने भारत के बैंकिंग सिस्टम को सुधारने के लिए कई प्रयास किए हैं. दास ने एनपीए और फ्रॉड के संकट से जूझ रहे बैंकों को मदद की है. इसके अलावा उन्होंने शैडो बैंकिंग पर रोक लगाने के भी प्रयास किए हैं.

शक्तिकांत दास: एक दृष्टि

शक्तिकांत दास ने उर्जित पटेल के बाद केंद्रीय बैंक के गवर्नर के तौर पर जिम्मा संभाला था. इससे पहले वह वित्त सचिव, राजस्व सचिव के तौर पर भी केंद्र सरकार को अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

रघुराम राजन को मिला था ग्लोबल बैंकर का अवॉर्ड

शक्तिकांत दास से पहले पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को 2016 में ग्लोबल एंड एशिया पैसिफिक रीजन के सेंट्रल बैंकर ऑफ द ईयर के पुरस्कार से नवाजा जा चुका है. उन्हें 2015 में अमेरिका की ओर से नियमों में सख्ती किए जाने की चुनौती से निपटने पर यह सम्मान दिया गया था.

माइकल देबब्रत पात्रा को भारतीय रिजर्व बैंक का डिप्‍टी गवर्नर नियुक्‍त किया गया

माइकल देबब्रत पात्रा को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का डिप्‍टी गवर्नर नियुक्‍त किया गया है. जून 2019 से विरल वी आचार्य के त्‍यागपत्र के बाद से यह पद खाली था. श्री पात्रा को तीन साल के लिए इस पद पर नियुक्‍त किया गया है. फिलहाल श्री पात्रा रिजर्व बैंक में मौद्रिक नीति विभाग के कार्यकारी निदेशक है. डिप्‍टी गवर्नर के रूप में भी वे इस विभाग का कार्य देखते रहेंगे.

देबब्रत पात्रा की नियुक्ति के बाद RBI में डिप्‍टी गवर्नर की संख्या चार हो गयी है. RBI के अन्य तीन डिप्टी गवर्नर एनएस विश्वनाथन, बीपी कानूनगो और एमके जैन हैं.