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यूरोप का सबसे बड़ा सक्रिय ज्‍वालामुखी माउंट एटना में विस्फोट

माउंट एटना ज्‍वालामुखी (Mount Etna Volcano) में हाल ही में विस्फोट हुआ था. मार्च 2017 में हुए विस्‍फोट के बाद यह सबसे बड़ा विस्‍फोट था. विस्फोट से पहले यहां भूकंप के झटके महसूस किए गए थे, जिसकी तीव्रता रिक्‍टर पैमाने पर 2.7 थी. इस विस्‍फोट के बाद 325 फीट की ऊंचाई तक लावा उठा. विस्फोट इतना ज्यादा बड़ा था कि राख करीब 5 किलोमीटर के इलाके में फैल गई.

माउंट एटना: एक दृष्टि

  • माउंट एटना यूरोप का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सक्रिय ज्‍वालामुखी है. इटली में स्थित यह ज्‍वालामुखी 11 हजार फीट ऊंचा और करीब 38 किलोमीटर चौड़ा है. विश्व का सबसे बड़ा सक्रिय ज्‍वालामुखी हवाई (Hawaii) का माउंट किलुआ (Mount Kilauea) है.
  • माउंट एटना ज्‍वालामुखी अफ्रीकी और यूरोशियाई टैक्‍टोनिक प्‍लेटों के बीच स्थित है और इसमें लगातार विस्‍फोट होता रहता है. यह 7 लाख साल पुराना है.
  • माउंट एटना से हर साल इतना लावा निकलता है कि 108 मंजिला इमारत को भरा जा सकता है. माउंट एटना ज्‍वालामुखी से हर साल करोड़ों टन लावा और 70 लाख टन कार्बन डाई ऑक्‍साइड, पानी और सल्‍फर डाई ऑक्‍साइड निकलता है.
  • संयुक्त राष्ट्र ने माउंट एटना को ‘डिकेड वोल्केनो’ का खिताब दिया है तथा इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल किया है.

IMO ने भारतीय नेविगेशन सिस्टम को विश्व व्यापी रेडियो नेविगेशन प्रणाली के रूप में मान्यता दी

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की समुद्री सुरक्षा समिति (MSC) ने इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (IRNSS) को विश्व व्यापी रेडियो नेविगेशन प्रणाली (WWRNS) के रूप में मान्यता दी है. IMO संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी है जो शिपिंग की सुरक्षा और जहाजों द्वारा समुद्री और वायुमंडलीय प्रदूषण की रोकथाम के लिए जिम्मेदार है.

अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चौथा देश

भारत अपना स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन सिस्टम रखने वाला चौथा देश बन गया है. इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन के पास अपना स्वयं का नेविगेशन सिस्टम था. GPS के विपरीत, हालांकि, IRNSS एक क्षेत्रीय है और वैश्विक नेविगेशन प्रणाली नहीं है.

IRNSS का नाम ‘नाविक’ रखा गया है

इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (IRNSS) को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने विकसित किया है. ये एक क्षेत्रीय स्वायत्त उपग्रह नौवहन प्रणाली है जो पूर्णतया भारत सरकार के अधीन है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका नाम भारत के मछुवारों को समर्पित करते हुए ‘नाविक’ रखा है.

IRNSS नाविक: एक दृष्टि

IRNSS भारत विकसित एक स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम है. इसे हिंद महासागर में जहाजों के नेविगेशन में सहायता के लिए सटीक स्थिति सूचना सेवा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. भारत अभी तक इस टेक्नॉलजी के लिए अमेरिका पर आश्रित था.

IRNSS देश की सीमा से 1500 किलोमीटर की दूरी तक के हिस्से में इसके उपयोगकर्ता को सटीक स्थिति की सूचना दे सकता है. यह भारतीय सीमा में लगभग 1500 किमी तक फैले हिंद महासागर में अमेरिका के स्वामित्व वाली ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) की जगह लेगा.

जहाजरानी मंत्रालय का नाम बदलकर अब मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स, शिपिंग और वाटरवेज किया गया

सरकार ने जहाजरानी यानी शिपिंग मंत्रालय (Shipping Ministry) का नाम बदलकर ‘बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय’ (Ministry of Ports, Shipping and Waterways) कर दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए नाम की घोषणा 8 नवम्बर को की.

सरकार ने हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय और कृषि मंत्रालय का नाम कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture & Farmers Welfare) किया था.

सूरत में रो-पैक्स फेरी सेवा की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए नाम की घोषणा सूरत में हजीरा और भावनगर जिले के घोघा के बीच रो-पैक्स फेरी सेवा की शुरुआत करने के दौरान की. इस रो-पैक्स सर्विस से दोनों जगहों के बीच सड़क यात्रा की 370 किलोमीटर की दूरी जल मार्ग के जरिए 90 किलोमीटर कम हो जाएगी. इस सर्विस से लगभग 9,000 लीटर प्रति दिन की काफी बचत होगी

रो-पैक्स फेरी वीसल ‘वोयेज सिम्फनी’ DWT 2500-2700 MT, 12000 से 15000 GT विस्थापन के साथ एक तीन मंजिला जहाज है. इसकी मुख्य डेक की भार क्षमता 30 ट्रक, ऊपरी डेक की 100 यात्री कार और यात्री डेक की क्षमता 500 यात्रियों और 34 क्रू और कर्मचारियों की है.