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जम्मू और कश्मीर के गुलमर्ग में दुनिया का सबसे बड़ा इग्लू कैफे खोला गया

जम्मू और कश्मीर के गुलमर्ग में दुनिया का सबसे बड़ा इग्लू कैफे का निर्माण किया गया है. यह इग्लू कैफे गुलमर्ग के प्रसिद्ध स्की-रिसॉर्ट में खोला गया है. इस इग्लू के निर्माता सैयद वसीम शाह हैं. इस कैफे का नाम स्नोग्लू (Snowglu) है. बर्फ से बने घर को इग्लू कहा जाता है.

यह न केवल दुनिया का सबसे बड़ा, बल्कि सबसे ऊंचा इग्लू कैफे भी है. इसकी ऊंचाई 37.5 फीट है जबकि इसका व्यास 44.5 फीट है. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार दुनिया का सबसे बड़ा इग्लू कैफे स्विटजरलैंड में है जिसकी ऊंचाई 33.8 फीट और व्यास 42.4 फीट है. इसकी मोटाई 5 फीट है. यह इग्लू कैफे 15 मार्च तक खड़ा रहेगा. इसके बाद गर्मियां आने पर इसे आमजन के लिए बंद कर दिया जाएगा.

जम्मू-कश्मीर में दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल ‘आर्क ब्रिज’

जम्मू-कश्मीर में विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे पुल ‘आर्क ब्रिज’ बनाया जा रहा है. चिनाब नदी पर बनाये जा रहे इस पुल का काम 5 अप्रैल को पूरा हो गया.

आर्क ब्रिज: एक दृष्टि

चिनाब नदी पर बने रहे इस रेलवे पुल की लंबाई 1315 मीटर है. जबकि नदी के तल से इसकी ऊंचाई 359 मीटर है. ब्रिज के एक तरफ लगे पिलर की ऊंचाई 131 मीटर है. यह रेलवे पुल पेरिस के एफिल टॉवर से 35 मीटर ऊंचा है.
इस पुल का निर्माण उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना के तहत चिनाब नदी पर किया गया है. इस रेलवे पुल की मदद से कश्मीर को रेलवे के माध्यम से देश के बाकी राज्यों और शहरों से जोड़ा जाएगा.

चेनाब नदी पर 850 मेगावाट क्षमता वाली रेटले पनबिजली परियोजना को मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जम्‍मू कश्‍मीर 850 मेगावाट क्षमता वाली रेटले पनबिजली परियोजना के लिए 5282 करोड रुपये मंजूर किए हैं. यह परियोजन किश्‍तवाड़ में चेनाब नदी पर बनाई जा रही है.

यह परियोजना राष्‍ट्रीय पनबिजली निगम (NHPC) और जम्‍मू कश्‍मीर राज्‍य बिजली विकास निगम (JKSPDC) का सयुंक्‍त उद्यम है. इसमें NHPC की 51 प्रतिशत और JKSPDC की 49 प्रतिशत हिस्‍सेदारी है.

रेटले परियोजना साठ महीने में पूरी हो जाएगी. इससे बनने वाली बिजली से ग्रिड में सुधार किया जा सकेगा जिससे बिजली आपूर्ति बेहतर होगी.

जम्मू और कश्मीर काडर के अधिकारियों का AGMUT काडर में विलय किया गया

सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर काडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFOS) अधिकारियों का AGMUT (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केन्‍द्रशासित प्रदेश) काडर में विलय कर दिया है.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस संबंध में अधिसूचना ‘जम्मू कश्मीर पुनगर्ठन संशोधन अध्यादेश 2021’ को 7 जनवरी को मंजूरी दी. केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय ने इस अधिसूचना को राष्ट्रपति के मंजूरी के लिए भेजा था.

इस नयी व्‍यवस्‍था से अब देश के अन्‍य राज्‍यों में नियुक्‍त इन सेवाओं के अधिकारी जम्‍मू कश्‍मीर में तैनात किए जा सकेंगे और जम्‍मू कश्‍मीर में नियुक्‍त ऐसे अधिकारियों को दूसरे राज्‍यों में भेजा जा सकेगा. इस संबंध में केंद्र सरकार के नियमों के तहत जरूरी संशोधन किए जाएंगे. जिन अधिकारियों को अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित काडर मिला हैं वह केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के तहत ही काम करते रहेंगे.

जम्मू-कश्मीर में 28400 करोड़ रुपये के औद्योगिक विकास पैकेज की घोषणा

जम्मू-कश्मीर में 28400 करोड़ रुपये के औद्योगिक विकास पैकेज की घोषणा की गयी है. जम्मू-कश्मीर के उप-राज्‍यपाल मनोज सिन्हा ने 7 जनवरी को इसकी घोषणा की. जम्मू-कश्मीर के औद्योगिक क्षेत्र के लिए औद्योगिक विकास पैकेज-2021 की मंजूरी केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी थी.

इस पैकेज का उद्देश्य मौजूदा औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देना, नई इकाइयां स्थापित करना, चार लाख पचास हजार रोजगार पैदा करना और कम से कम 20000 करोड़ रुपये का निवेश करना है. यह पैकेज 2037 तक लागू रहेगा.

यह पैकेज सभी प्रकार की औद्योगिक इकाइयों के लिए आकर्षक बनायीं गयी हैं. इसके अंतर्गत छोटी इकाइयों को संयंत्र और मशीनरी में 50 करोड़ रुपये तक निवेश करने पर 7.5 करोड़ रुपये तक पूंजी प्रोत्साहन मिलेगा.

जम्‍मू-कश्‍मीर के सभी निवासियों को प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना ‘सेहत’ की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 26 दिसम्बर को जम्‍मू-कश्‍मीर के सभी निवासियों को स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा उपलब्‍ध कराने की आयुष्‍मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना ‘सेहत’ की शुरूआत की. ‘सेहत’ योजना के तहत जम्‍मू-कश्‍मीर के सभी निवासियों को 5 लाख रुपए तक का नि:शुल्‍क स्‍वास्‍थ्‍य बीमा उपलब्‍ध कराया जाएगा.

उल्‍लेखनीय है कि जम्‍मू कश्‍मीर में पहले ही गरीबी रेखा के नीचे गुजर बसर करने वाले लगभग 14 लाख परिवार आयुष्‍मान भारत योजना से 2018 से लाभन्वित हो रहे हैं. अब जम्‍मू-कश्‍मीर सरकार के इस योजना से जम्‍मू कश्‍मीर के सभी परिवार को यह लाभ उपलब्‍ध होगा. इस योजना से पूरे जम्‍मू कश्‍मीर के एक करोड लोगों को लाभ होगा.

जम्मू-कश्मीर में भूमि स्वामित्व अधिनियम संबंधी कानून में संशोधन किया गया

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में भूमि स्वामित्व अधिनियम संबंधी कानून में संशोधन किया है. इस संशोधन के बाद अब देश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में अपने घर या कारोबार के लिए जमीन खरीद सकता है. हालांकि खेती की जमीन सिर्फ राज्य के लोगों के लिए ही रहेगी.

5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35-A के प्रावधान खत्म होने के बाद यह संशोधन किया गया है. अगस्त 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर की एक अपनी अलग संवैधानिक व्यवस्था थी. उसके तहत जम्मू-कश्मीर के सिर्फ स्थायी नागरिकों (जिनके पास राज्य का स्थायी नागरिकता प्रमाण पत्र हो) को ही जमीन खरीदने की अनुमति थी. संशोधन के बाद नागरिकता प्रमाण पत्र की अनिवार्यता सिर्फ कृषि भूमि की खरीद के लिए होगी.

जम्मू और कश्मीर पंचायती राज अधिनियम को अपनाने की मंजूरी दी गयी

जम्मू और कश्मीर में पंचायती राज अधिनियम को अपनाने की हाल ही में मंजूरी दी गयी है. यह मंजूरी 21 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में दी गयी.

पंचायती राज अधिनियम को अपनाने से अब जम्मू-कश्मीर में पंचायती राज के तीन स्तर होंगे. यहाँ के लोगों को अब देश के बाकी हिस्सों की तरह ही अपने स्थानीय प्रतिनिधियों का चुनाव करने का अधिकार होगा.

पंचायती राज व्यवस्था: एक दृष्टि

पंचायती राज, ग्रामीण स्थानीय स्वशासन है. यह 1992 में 73वें संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा संवैधानिक रूप से अपनाया गया था. पंचायती राज व्यवस्था के तीन स्तर हैं ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत, ब्लॉक स्तर पर मंडल परिषद या ब्लॉक समिति तथा जिला स्तर पर जिला परिषद्.

मनोज सिन्हा जम्मू-कश्मीर के नए उपराज्यपाल नियुक्त, गिरीश चंद्र मुर्मू का इस्तीफा

मनोज सिन्हा जम्मू-कश्मीर के नए उपराज्यपाल नियुक्त किये गये हैं. उन्होंने गिरीश चंद्र मुर्मू का स्थान लिया है. मुर्मू ने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया था. मुर्मू का इस्तीफा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूर कर लिया है.

5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान समाप्त कर दिये थे और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया था. इसी के बाद 31 अक्टूबर को मुर्मू को उपराज्यपाल नियुक्त किया गया था. मुर्मू से पहले जब जम्मू-कश्मीर पूर्ण राज्य था तब सत्यपाल मलिक यहां के राज्यपाल थे.

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में नया डोमिसाइल ऐक्ट लागू हुआ

केंद्र शासित प्रदेश (UT) जम्मू-कश्मीर में 19 मई से नया डोमिसाइल ऐक्ट लागू हो गया. सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन आदेश 2020 में सेक्शन 3A जोड़ा गया है. इसके तहत राज्य/UT के निवासी होने की परिभाषा तय की गई है.

क्या है नया डोमिसाइल ऐक्ट?

  • जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने नए डोमिसाइल सर्टिफिकेट (प्रोसीजर) रूल्स 2020 को लागू कर दिया है. इसी के साथ प्रदेश में स्थानीय नागरिक प्रमाण पत्र (PRC) की जगह डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी करने के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया गया है.
  • नए डोमिसाइल नियमों के मुताबिक, कोई व्यक्ति जो जम्मू-कश्मीर में कम से कम 15 साल रहा है और 10वीं या 12वीं की परीक्षा यहां के किसी संस्थान से पास कर चुका है, तो वह जम्मू-कश्मीर का निवासी कहलाने का हकदार होगा.
  • नए डोमिसाइल ऐक्ट के तहत पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी, सफाई कर्मचारी और दूसरे राज्यों में शादी करने वाली महिलाओं के बच्चे भी अब डोमिसाइल के हकदार होंगे.

जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के चार राज्यों के परिसीमन के लिए आयोग का गठन किया गया

सरकार ने देश के पांच राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश के लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन के लिए हाल ही में एक आयोग का गठन किया है. यह आयोग जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के चार राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नगालैंड का परिसीमन करेगा.

पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई अध्यक्ष नियुक्त

कानून मंत्रालय की जारी अधिसूचना के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को इस परिसीमन आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. सेवानिवृत्त जस्टिस देसाई को एक साल के लिए या अगले आदेश तक इस आयोग की अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा और जम्मू-कश्मीर तथा चार राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्तों को इस आयोग का पदेन सदस्य बनाया गया है.

जम्मू-कश्मीर, असम, अरूणाचल प्रदेश, मणिपुर और नगालैंड में परिसीमन

परिसीमन आयोग ‘जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून’ के प्रावधानों के तहत जम्मू-कश्मीर में लोकसभा एवं विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन करेगा जबकि ‘परिसीमन कानून 2002’ के प्रावधानों के मुताबिक असम, अरूणाचल प्रदेश, मणिपुर और नगालैंड में परिसीमन होगा.

जम्मू-कश्मीर में वर्तमान स्थिति

जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन से पहले यहाँ के विधानसभा में 111 सीटें थीं. इनमें लद्दाख की 4 सीटें और गुलाम कश्मीर (पाकिस्तान के कब्जे में) की 24 सीटें शामिल हैं. अब लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश बन चुका है. लद्दाख के 4 सीटें अलग हो जाने के बाद तरह जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 107 सीटें रह गईं.

यह परिसीमन 2011 की जनसंख्या के आधार पर होगा. परिसीमन के बाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 7 सीटें बढ़ेंगी और इनकी संख्या बढ़कर 114 हो जाएंगी.

राज्य के पुनर्गठन के बाद जम्मू-कश्मीर में लोकसभा की सीटों में कोई बदलाव नहीं होगा. वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में लोकसभा की 5 सीटें और लद्दाख में एक सीट हैं. इस तरह लोकसभा सीटों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा.

जम्मू और कश्मीर में अंतिम परिसीमन 1995 में हुआ था. तब राज्य में सीटों की संख्या बढ़ाकर 75 से 87 की गई थी. उसके बाद फारूक अब्दुल्ला सरकार ने जम्मू कश्मीर विधानसभा ने प्रस्ताव पास कर परिसीमन पर रोक लगा दी थी.

2002 के चुनावों में कश्मीर और लद्दाख के मुकाबले जम्मू में मतदाताओं की संख्या अधिक थी. इसके बावजूद कश्मीर में सीटों की संख्या अधिक रही और लगातार कश्मीर केंद्रित दल ही राज्य की सत्ता पर काबिज रहे. यही वजह है कि कश्मीरी दल परिसीमन नहीं होने देना चाहते थे.

क्या है परिसीमन और परिसीमन आयोग?

परिसीमन का तात्पर्य किसी देश या प्रांत में निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं के पुनर्निर्धारण से है. निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं के पुनर्निर्धारण परिसीमन आयोग द्वारा किया जाता है. संविधान के अनुच्छेद 82 के मुताबिक, सरकार हर 10 साल बाद परिसीमन आयोग का गठन कर सकती है. इसके तहत जनसंख्या के आधार पर विभिन्न विधानसभा व लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण होता है.

परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) का गठन

परिसीमन आयोग का गठन भारत सरकार की ओर से ‘परिसीमन अधिनियम, 2002’ की धारा 3 के अन्तर्गत किया जाता है. इस सम्बन्ध में अधिसूचना भारत के राष्ट्रपति के ओर से जारी की जाती है. अब तक चार बार परिसीमन आयोग का गठन हो चुका है. पहली बार 1952 में इस आयोग का गठन किया गया था. इसके बाद 1962, 1972 और 2002 में इस आयोग का गठन किया गया था.

यूरोपीय संघ और खाड़ी के देशों के प्रतिनिधियों का दल जम्मू-काश्मीर की यात्रा की

यूरोपीय संघ और खाड़ी के देशों के प्रतिनिधियों के 25 सदस्‍यों का एक दल 12-13 फरवरी को जम्मू-काश्मीर की यात्रा की. इस समूह में जर्मनी, कनाडा, फ्रांस, न्यूजीलैंड, मैक्सिको, इटली, अफगानिस्तान, ऑस्ट्रिया, उज्‍बेकिस्तान, पॉलैंड के अलावा यूरोपीय संघ के राजनयिक भी शामिल थे. इस यात्रा का उद्देश्य जम्मू-काश्मीर में अगस्‍त 2019 में अनुच्‍छेद 370 हटाए जाने के बाद जमीनी स्‍तर पर जानकारी प्राप्‍त करना था.

इस दल ने बारामूला और श्रीनगर का दौरा कर वहां विभिन्‍न व्‍यापार संघो, प्रशिक्षित युवाओं, सरपंचों और सिविल सोसायटी समूहों से बातचीत की. इस बातचीत में प्रदेश में व्‍यापार और पर्यटन से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई. इस प्रतिनिधिमंडल ने 13 फरवरी को जम्‍मू का दौरा किया और उपराज्‍यपाल गिरीश चन्‍द्र मुर्मू सहित प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की. उन्होंने उच्च न्यायालय का भी दौरा किया और जम्मू-कश्मीर के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल से मुलाकात की.

इसके पहले भारत में अमरीका के राजदूत केन्‍नेथ जस्‍टर सहित 15 प्रतिनिधियों के एक दल ने जनवरी में जम्‍मू कश्‍मीर का दो दिनों का दौरा किया था.