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जानिए क्या है हेलिकॉप्टर मनी और क्वांटिटेटिव ईजिंग, क्यों है चर्चा में

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए जारी लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधि ठप हो गयी है. इस कारण देश को भारी नुकसान हो रहा है जिसके लिए हर सेक्टर से वित्तीय पैकेज की मांग की जा रही है. इस बीच पूरे विश्व में इन दिनों ‘हेलिकॉप्टर मनी’ (Helicopter Money) की चर्चा हो रही है. ऐसे में जानते हैं आखिर क्या होता है हेलिकॉप्टर मनी.

क्या है हेलिकॉप्टर मनी?

जब किसी देश की अर्थव्यवस्था खराब हो जाती है तो उस देश का केन्द्रीय बैंक (भारत में भारतीय रिजर्व बैंक-RBI) बड़े पैमाने पर नोटों की छपाई कर सरकार को देता है. सरकार को यह राशि सेंट्रल बैंक को लौटना नहीं करना पड़ता है. इस राशि की मदद से मनी सप्लाई बढ़ जाती है जिससे मांग और महंगाई में तेजी आ जाती है. अमेरिकन इकनॉमिस्ट मिल्टन फ्राइडमेन ने इस प्रक्रिया को हेलिकॉप्टर मनी का नाम दिया था.

क्वांटिटेटिव ईजिंग क्या है?

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने हाल ही में क्वांटिटेटिव ईजिंग की बात कही है. उन्होंने केंद्र सरकार को केन्द्रीय अर्थव्यवस्था में फिस्कल डेफिसिट का टार्गेट GDP के 3 प्रतिशत के मुकाबले 5 प्रतिशत रखने का सुझाव दिया है.

इसके अलावा चंद्रशेखर राव ने ‘क्वांटिटेटिव ईजिंग’ (Quantitative Easing) के माध्यम से GDP का 5 प्रतिशत जारी करने को कहा है. भारत की GDP करीब 3 लाख करोड़ डॉलर है. इसका 5 प्रतिशत 15 हजार करोड़ डॉलर (करीब 11 लाख करोड़ रुपये) होता है.

हेलिकॉप्टर मनी की तरह क्वांटिटेटिव ईजिंग में भी केन्द्रीय बैंक नोटों की छपाई करता है लेकिन वह इस राशि से सरकारी बॉन्ड खरीदकर सरकार को पैसे देता है. सरकार को बाद में यह राशि केन्द्रीय बैंक को लौटना होता है.

कोविड-19 से प्रभावित लोगों के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा

सरकार ने कोविड-19 से प्रभावित प्रवासी मजदूरों और गरीबों के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की है. वित्‍तमंत्री निर्मला सीतारामन ने इस राहत पैकेज की घोषणा 26 मार्च को नई दिल्ली में की. घोषणा के तहत आठ कैटिगरीज में किसान, मनरेगा, गरीब विधवा-पेंशनर्स-दिव्यांग, जन-धन योजना-उज्ज्वला स्कीम, सेल्फ हेल्प ग्रुप (वुमन), ऑर्गनाइज्ड सेक्टर वर्कर्स (EPFO), कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को लाभ मिलेगा.

वित्‍तमंत्री द्वारा घोषित राहत पैकेज के मुख्य बिंदु

  1. कोरोना के मुकाबले में लगे विभिन्‍न वर्ग के लोगों को तीन महीने के लिए 50 लाख रुपये का बीमा भी कराया जाएगा. इनमें डॉक्टर, चिकित्सा-कर्मी, स्‍वास्‍थ्य-कर्मी, सफाई कर्मचारी और आशा कार्यकर्ता शामिल हैं.
  2. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ लोगों को अगले तीन महीने तक 5 किलो चावल या गेंहू मुफ्त उपलब्‍ध कराया जाएगा. यह इस समय दिए जा रहे 5 किलो राशन के अतिरिक्त होगा. इसके अतिरिक्‍त, प्रत्‍येक परिवार को 1 किलो दाल भी मुफ्त दी जाएगी.
  3. मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी में भी वृद्धि की घोषणा की गयी. देश में मनरेगा योजना का लाभ 5 करोड़ परिवारों को मिलता है. मनरेगा दिहाड़ी अब 182 से बढ़ाकर 202 रुपये कर दी गई है.
  4. जन-धन योजना वली करीब 20 करोड़ महिलाओं के खाते में अगले 3 महीने तक डीबीटी के जरिए हर महीने 500 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे.
  5. करीब 8.3 करोड़ BPL परिवारों को उज्जवला स्कीम के तहत 3 महीनों तक फ्री एलपीजी सिलेंडर दिए जाएंगे.
    वरिष्‍ठ नागरिकों, विधवाओं और दिव्‍यांगजनों को अगले तीन महीनों के दौरान एक-एक हजार रुपये की दो किस्‍तों में तदर्थ अनुदान दिया जाएगा.
  6. मौजूदा प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत 8 करोड़ 70 लाख किसानों और अन्‍य लोगों को अप्रैल के पहले सप्‍ताह तक उनके खाते में 2 हजार रुपये जमा कर दिए जाएंगे.
  7. अगले तीन महीनों के लिए एम्प्लॉयी और एम्प्लॉयर दोनों के हिस्से का EPF योगदान (बेसिक सैलरी का 24 पर्सेंट) सरकार करेगी. ये उन सभी ऑफिसेस के लिए है जिनमें 100 से ज्यादा एम्प्लॉयी हैं. 15000 रुपये से कम सैलरी लेने वाले 80 लाख मजदूरों को और 4 लाख संगठित इकाइयों को फायदा मिलेगा. EPFO अब EPF खाते की रकम का 75% या 3 महीने की सैलरी, जो कम हो, निकालने की परमिशन देगा.

RBI ने बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए 30,000 करोड़ रुपये नकदी डालने की घोषणा की

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए बाजार में 30,000 करोड़ रुपये की नकदी डालने की घोषणा की है. यह नकदी बांड की खरीद-बिक्री (खुले बाजार की गतिविधियां- OMO) के माध्यम से डाली जाएगी. यह खरीद 15,000-15,000 करोड़ रुपये की इसी महीने में होगी. इसकी नीलामी 24 मार्च और 30 मार्च को होगी.

RBI ने कोरोना वायरस महामारी के चलते वित्तीय बाजारों में पर्याप्त नकदी और कारोबार को सामान्य करने के लिए यह निर्णय लिया है.

उल्लेखनीय है कि RBI ने 20 मार्च को खुले बाजार गतिविधियों के जरिए 10,000 करोड़ रुपये की पूंजी डाली थी. केंद्रीय बैंक 19 दिसंबर 2022 को परिपक्व होने वाली प्रतिभूतियों पर 6.84 फीसदी, 25 मई 2025 को परिपक्व होने वालों पर 7.72 फीसदी, नौ जुलाई 2026 को परिपक्व होने वाली प्रतिभूतियों पर 8.33 फीसदी और 14 जनवरी 2029 को परिपक्व होने वाली प्रतिभूतियों पर 7.26 फीसदी ब्याज देगा.

जनगणना 2021: दो चरणों में सम्‍पन्‍न होगी, संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

भारत की जनगणना-2021 दो चरणों में सम्‍पन्‍न होगी. पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2020 तक चलेगा. इस चरण में आवास से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी. दूसरा चरण जनसंख्या की गणना का होगा जो 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 तक पूरे देश में एक साथ चलेगा. 2021 की जनगणना परंपरागत कागज और पेन के जरिए नहीं बल्कि एक मोबाइल फोन अनुप्रयोग (app) के माध्यम से की जाएगी.

पहले चरण में जनगणना कर्मी मोबाइल नम्बर, शौचालय, टेलीविजन, इन्टरनेट, वाहन और पेयजल के स्रोत सहित अन्य जानकारी मांगेंगे. जनगणनाकर्मी बिजली के मुख्य स्रोत, उपयोग किए गए पानी के निकलने की व्यवस्था, रसोई घर की उपलब्धता, LPG या PNG कनेक्शन तथा खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे मुख्य ईंधन से संबंधित जानकारी भी मांगेंगे.

जनगणना देश में नीतियां बनाने का प्रमुख आधार है. जनगणना से मिले आंकड़ों से देश की वास्तविक स्थिति सामने आती है. इन आंकड़ों से ही पता चलता है कि देश में कुल कितने लोग हैं, किस आयु वर्ग के कितने लोग हैं, किस भाषा को बोलने वाले लोग कितने हैं, किस धर्म के कितने लोग है, लोग कितने शिक्षित हैं, देश में कितने तरह के रोजगार हैं और कितने लोग किस रोजगार में लगे हैं, किन लोगों ने दस साल में अपने रहने का ठिकाना बदल लिया है आदि.

भारत की जनगणना: मुख्य तथ्य

  • भारत में हर दस साल में जनगणना होती है. साल 2011 में आख़िरी जनगणना हुई थी और 2021 में अगली जनगणना होनी है.
  • भारत में जनगणना 1872 से हो रही है और यह सिलसिला कभी नहीं टूटा है. भारत के आज़ाद होने के बाद जनगणना का काम साल 1948 के जनगणना अधिनियम के तहत होता है.
  • 1872 से लेकर 1931 तक की जनगणना में जाति भी गिनी जाती थी आज़ादी के बाद सरकार ने तय किया कि जनगणना में अब जाति नहीं गिनी जाएगी. 1951 से लेकर 2011 तक की जनगणना में जाति नहीं गिनी गई.
  • जनगणना का काम भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त का दफ़्तर करता है. यह दफ़्तर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है.

भारतीय डाक बिभाग देश में पहली बार फ्री डिजिटल लॉकर सर्विस शुरू किया

भारतीय डाक बिभाग (इंडिया पोस्ट) देश में पहली बार फ्री डिजिटल लॉकर सर्विस शुरू करने जा रहा है. इसकी शुरुआत 12 मार्च को कोलकाता में दो पोस्ट ऑफिस सॉल्ट लेक सिटी और न्यू टाउन में किया गया. इस सर्विस के तहत कस्टमर्स पोस्ट ऑफिसेज से अपना पार्सल अपनी सुविधा के हिसाब से प्राप्त कर सकेंगे.

डिजिटल लॉकर सर्विस यूरोपीय देशों में काफी चर्चित है लेकिन भारत में पहली बार शुरू हो रही है. यह सर्विस वर्किंग क्लास के ऐसे लोगों के लिए की गई है, जिनके घर पर कोई पार्सल रिसीव करने वाला नहीं होता है. ऐसे लोग ऑफिस के बाद पोस्ट ऑफिस में अपने लॉकर से अपनी सुविधा के हिसाब से अपना पार्सल ले सकते हैं.

कैसे काम करेगा?

यह सुविधा अपनाने वाले कस्टमर्स को इंडिया पोस्ट की ओर से जहां भी पार्सल ड्रॉप किया जाएगा, उसके एड्रेस के लिए एक खास लॉकर नंबर दिया जाएगा. इस डिजिटल पार्सल लॉकर में पार्सल ड्रॉप कर दिया जाएगा और कस्टमर के पास OTP का एक मैसेज आ जाएगा. कस्टमर्स पार्सल ड्रॉप होने के अगले सात दिनों तक अपना पार्सल लॉकर से निकाल सकेंगे.

EPFO ने निधि कोष जमा राशि पर ब्‍याज दर 8.5 प्रतिशत किया

कर्मचारी निधि कोष संगठन (EPFO) ने निधि कोष जमा राशि पर ब्‍याज दर 8.65 प्रतिशत से घटाकर 8.5 प्रतिशत कर दिया है. वित्त वर्ष 2019-20 के लिए ब्याज दरों में 0.15 फीसदी कटौती की गई है. नई ब्याज दर पिछले 7 सालों में सबसे कम है. इससे पहले वित्त वर्ष 2012-13 में PF पर ब्याज दर 8.5 फीसद दी थी.

श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने आज EPFO की शीर्ष निर्णायक संस्‍था- सेन्‍ट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्‍टी की नई दिल्‍ली में हुई बैठक के बाद यह घोषणा की.

चीन को पीछे छोड़कर भारत अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना

अमेरिका अब चीन को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है. वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018-19 में भारत और अमेरिका के बीच 87.95 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था. इस दौरान भारत का चीन के साथ द्विपक्षीय व्यापार 87.07 अरब डॉलर रहा. इसी तरह 2019-20 में अप्रैल से दिसंबर के दौरान भारत का अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार 68 अरब डॉलर रहा, जबकि इस दौरान भारत और चीन का द्विपक्षीय व्यापार 64.96 अरब डॉलर रहा.

भारत-अमेरिका व्यापर: एक दृष्टि

  • अमेरिका उन चुनिंदा देशों में से है, जिसके साथ व्यापार संतुलन का झुकाव भारत के पक्ष में है. वर्ष 2018-19 में भारत का चीन के साथ जहां 53.56 अरब डॉलर का व्यापार घाटा (trade deficit) रहा था, वहीं अमेरिका के साथ भारत 16.85 अरब डॉलर के व्यापार लाभ (trade surplus) की स्थिति में था.
  • भारत और अमेरिका आने वाले समय में भी आर्थिक संबंधों को बढ़ाने की कोशिश में जुटे हुए हैं. यदि दोनों देश ‘मुक्त व्यापार समझौता’ (FTA) कर लेते हैं तो द्विपक्षीय व्यापार बहुत आगे स्तर पर पहुंच सकता है.
  • अमेरिका के साथ FTA भारत के लिये बेहद फायदेमंद होगा क्योंकि अमेरिका भारतीय माल एवं सेवाओं का सबसे बड़ा बाजार है.
  • अमेरिका के साथ भारत का आयात और निर्यात दोनों बढ़ रहा है, जबकि चीन के साथ आयात-निर्यात दोनों में गिरावट आ रही है.
  • भारत अमेरिका में स्टील, स्टील उत्पाद और एल्युमिनियम उत्पादों का निर्यात करीब 22.7 अरब डॉलर का हुआ था.
    भारत को अमेरिका के साथ FTA करते वक्त सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि अमेरिका मक्का और सोयाबीन जैसे जिंसों का सबसे बड़ा उत्पादक व निर्यातक है.

भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण ने उत्‍तर प्रदेश में करीब 52806 टन स्वर्ण अयस्क का भंडार का पता लगाया

भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण (GSI) ने उत्‍तर प्रदेश में करीब 52806.25 टन स्वर्ण अयस्क के भंडार का पता लगाया है. यह स्वर्ण अयस्क राज्‍य के सोनभद्र जनपद में सोन पहाड़ी और हरदी एरिया में पाया गया है.

सोनभद्र जनपद में सोना खोजने के प्रयास लगभग दो दशक पूर्व शुरू किए गए थे. विभागीय अधिकारियों के अनुसार खानों के ब्लॉकों की जल्दी ही ई-टेंडरिंग शुरू की जाएगी. इस क्षेत्र में सोने की खानों के अलावा अन्य खनिज भी पाए गए हैं.

यह शुद्ध सोना नहीं

उल्लेखनीय है कि सोनभद्र में 52806.25 टन स्वर्ण अयस्क होने की बात कही गई है न कि शुद्ध सोना. प्रति टन अयस्क से औसतन 3.03 ग्राम सोना निकलता है. सोनभद्र में मिले स्वर्ण अयस्क से मिलने वाले शुद्ध सोना का अभी सर्वेक्षण किया जा रहा है.

कर्नाटक सबसे बड़ा सोना उत्पादक राज्य

कर्नाटक भारत का सबसे बड़ा सोना उत्पादक राज्य है. यहाँ सबसे ज्यादा सोना कर्नाटक की हुत्ती खदान से निकालता है. आंध्रप्रदेश दूसरा सबसे बड़ा सोना उत्पादक राज्य है. इनके अलावा झारखंड, केरल और मध्यप्रदेश में भी सोने की खदानें हैं.

भारत 2,940 अरब डॉलर GDP के साथ दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना

अमेरिका के रिसर्च इंस्टीट्यूट वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत अब विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के मामले में 2019 में 2,940 अरब डॉलर के साथ विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. GDP के मामले में भारत ने 2019 में ब्रिटेन और फ्रांस को पीछे छोड़ दिया है.

वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • रिपोर्ट में बताया है कि आत्मनिर्भर बनने की पॉलिसी से भारत अब आगे बढ़कर ओपन मार्केट वाली अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित हो रहा है.
  • ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था करीब 2830 अरब डॉलर की है जबकि फ्रांस की अर्थव्यवस्था का आकार 2710 अरब डॉलर का है.
  • क्रय शक्ति समता (purchasing power parity) के आधार पर भारत की GDP 10,510 अरब डॉलर है. यह जापान और जर्मनी से भी ज्यादा है.
  • भारत की आबादी अधिक होने की वजह से प्रति व्यक्ति जीडीपी 2,170 डॉलर है. GDP के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका की प्रति व्यक्ति जीडीपी 62,794 डॉलर है.
  • भारत का सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था का 60% और रोजगार का 28% के साथ विश्व में तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र है. विनिर्माण और कृषि अर्थव्यवस्था के दो अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं.
  • भारत में कई बड़े आर्थिक सुधार किये गए हैं. इनमें उद्योगों को नियंत्रण मुक्त किया जाना, विदेशी व्यापार और निवेश पर नियंत्रण कम किया जाना और पब्लिक सेक्टर की कंपनियों का निजीकरण किया जाना शामिल है.
  • अर्थव्यवस्था की विकास में इन उपायों से भारत को काफी मदद मिली है.

भारत में लिथियम का 14,100 टन भंडार खोजा गया, बैटरी के निर्माण में उपयोग

भारत में लिथियम का 14,100 टन भंडार खोजा गया है. यह भंडार बेंगलुरु से लगभग 100 किलोमीटर दूर मांड्या में मिला है. यहाँ आधा से 5 किलोमीटर तक के दायरे में लगभग 30,300 टन Li-20 उपलब्ध होने का अनुमान है, जो लिथियम मेटल के लगभग 14,100 टन के बराबर है. लिथियम का उपयोग मुख्य रूप से विद्युत वाहनों की बैटरी के निर्माण में किया जाता है.

सर्वाधिक लिथियम भंडार वाले देश

दूसरे देशों में मौजूद लिथियम के भंडार के मुकाबले भारत में लिथियम का भंडार काफी कम है. चिली में लिथियम का भंडार 86 लाख टन, ऑस्ट्रेलिया में 28 लाख टन, अर्जेंटीना में 17 लाख टन, पुर्तगाल में 60,000 टन का भंडार है. भारत में लिथियम का भंडार नहीं होने से अभी लिथियम की अपनी पूरी जरूरत का आयात इन्हीं देशों से किया जाता है. वहीं नीति आयोग ने अगले लिथियम-आयन बैटरियों के लिए 10 बड़ी फैक्ट्रियां बनाने का लक्ष्य तय किया है.

चालू वित्त वर्ष 2019-20 की छठी द्विमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा, नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 5-6 फरवरी को मुंबई में हुई. यह चालू वित्त वर्ष (2019-20) की छठी और अंतिम द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक थी. बैठक में मौद्रिक नीति समिति ने प्रमुख नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है.

प्रमुख नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं

इस बैठक में RBI ने रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करते हुए इसे 5.15% पर अपरिवर्तित रखी गई है. रिवर्स रेपो दर 4.90% और बैंक दर 5.40% बनी रहेगी. यह फैसला उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक के आधार पर मुद्रास्‍फीति की 4% दर के मध्‍यम अवधि लक्ष्‍य के मद्देनजर किया गया है. दिसम्बर में घोषित 5वीं द्विमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा में भी RBI ने प्रमुख नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया था.

रेपो रेट कम होने से कैसे लोगों को होता है फायदा?

रेपो रेट के कम होने से बैंकों को RBI से कम व्याज पर कर्ज मिलता है. इस सस्ती लागत का लाभ कर्ज लेने वाले ग्राहकों को मिलता है. इससे बैंकों को घर, दुकान, पर्सनल और कार के लिये लोन कम दरों पर देने का मौका मिलता है. ग्राहकों के चल रहे लोन पर EMI का भी कम होता है.

जीडीपी वृद्धि का पूर्वानुमान

रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिये GDP वृद्धि का पूर्वानुमान 5% रखा है. वर्ष 2020-21 के लिए यह अनुमान 6% निर्धारित किया गया है.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI): एक दृष्टि

  • भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) भारत का केन्द्रीय बैंक है. यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है.
  • RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को RBI ऐक्ट 1934 के अनुसार हुई. प्रारम्भ में इसका केन्द्रीय कार्यालय कोलकाता में था जो सन 1937 में मुम्बई आ गया.
  • पहले यह एक निजी बैंक था किन्तु सन 1949 से यह भारत सरकार का उपक्रम बन गया है.
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत अनिवार्य रूप से मौद्रिक नीति के संचालन की जिम्मेदारी सौपीं गई है.

वर्तमान दरें: एक दृष्टि

नीति रिपो दर5.15%
प्रत्‍यावर्तनीय रिपो दर4.90%
सीमांत स्‍थायी सुविधा दर5.40%
बैंक दर5.40%
CRR4%
SLR18.75%

क्या होता है रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर और एसएलआर?

महाराष्ट्र के वधावन में एक नए बंदरगाह की स्थापना के लिए सैद्धांतिक मंजूरी

सरकार ने महाराष्ट्र के वधावन में एक नए प्रमुख बंदरगाह की स्थापना के लिए सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दी है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में 5 फरवरी को हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह मंजूरी दी गयी. इस परियोजना की कुल लागत 65,544 करोड़ रूपये से ज्य़ादा होने की संभावना है.

दरअसल, इस परियोजना को मंजूरी सरकार के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 100 लाख करोड़ के निवेश की नीति का हिस्सा है. वधावन बंदरगाह के विकास के बाद भारत विश्व के शीर्ष 10 कंटेनर बंदरगाह वाले देशों में शामिल हो जाएगा.

जवाहरलाल नेहरु बंदरगाह देश का सबसे बड़ा बंदरगाह

वर्तमान में जवाहरलाल नेहरु बंदरगाह देश का सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह और विश्व का 28वां सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह है. यह अरब सागर तट पर मुंबई के दक्षिण में स्थित स्थित है. इसका निर्माण मुंबई बंदरगाह के यातायात के दबाव को कम करने के लिये किया गया था. यहाँ मुख्य रूप से यहाँ मालवाहक जहाजों का आवागमन होता है.