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RBI की छठी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा: रेपो दर 5.25 प्रतिशत

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समि‍ति (MPC) की बैठक 4 से 6 फ़रवरी 2026 तक मुंबई में हुई थी. बैठक की अध्यक्षता बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की थी.

यह चालू वित्त वर्ष (2025-26) की छठी और अंतिम द्विमासिक (फ़रवरी-मार्च) मौद्रिक नीति (6th Bi-Monthly Monetary Policy) समीक्षा बैठक थी.

बैठक के प्रमुख निर्णय

नीतिगत दरें: समिति ने सर्वसम्मति से प्रमुख ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है:

  1. रेपो रेट (Repo Rate): 5.25%
  2. एसडीएफ (SDF) रेट: 5.00%
  3. एमएसएफ (MSF) रेट: 5.50%
  4. बैंक रेट (Bank Rate): 5.50%

आरबीआई ने अपना रुख ‘तटस्थ’ (Neutral) बनाए रखा है. इसका अर्थ है कि भविष्य में परिस्थितियों और डेटा के आधार पर दरों में बदलाव (कमी या वृद्धि) की संभावना खुली रखी गई है.

मानकवित्त वर्ष 2025-262026-27 (पहली तिमाही)2026-27 (दूसरी तिमाही)
जीडीपी वृद्धि7.4% (पहले 7.3% था)6.9%7.0%
मुद्रास्फीति2.1%4.0%4.2%

प्रमुख विनियामक और ग्राहक-केंद्रित उपाय: आरबीआई ने बैंकिंग ग्राहकों और छोटे व्यवसायों के लिए कई बड़े कदमों की घोषणा की है:

  • छोटे मूल्य के डिजिटल फ्रॉड (Fraud) के पीड़ितों को अब ₹25,000 तक का मुआवजा देने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है.
  • सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSEs) के लिए ‘कोलेटरल-फ्री’ (बिना गारंटी के) ऋण की सीमा को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख कर दिया गया है.
  • ऐसे NBFCs जिनका एसेट साइज ₹1,000 करोड़ तक है और जिनका कोई पब्लिक फंड या ग्राहक इंटरफेस नहीं है, उन्हें पंजीकरण से छूट दी गई है.

रेपो रेट कटौती का महत्व

  • रेपो रेट में कटौती से बैंकों पर ब्याज दरें घटाने का दबाव बढ़ेगा, जिससे होम लोन और अन्य कर्जों की EMI कम हो सकती है.
  • यह कटौती वित्तीय प्रणाली में तरलता (Liquidity) को बढ़ाएगी और उपभोक्ताओं तथा व्यवसायों के लिए उधार लेने की लागत को कम करके आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करेगी.

वर्तमान दरें: एक दृष्टि

नीति रिपो दर5.25%
प्रत्‍यावर्तनीय रेपो दर (RRR)3.35%
स्थायी जमा सुविधा (SDF)5.00%
सीमांत स्‍थायी सुविधा दर (MSF)5.50%
बैंक दर5.50%
नकद आरक्षित अनुपात (CRR)3.00%
वैधानिक तरलता अनुपात (SLR)18%

मौद्रिक नीति समि‍ति (MPC): एक दृष्टि

  • RBI की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) भारत सरकार द्वारा गठित एक समिति है. इसका गठन RBI अधिनियम 1934 के प्रावधानों के तहत 29 सितंबर 2016 को किया गया था.
  • यह भारत सरकार द्वारा निर्धारित मुद्रास्फीति लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आरबीआई की नीतिगत ब्याज दर निर्धारित करती है.
  • मौद्रिक नीति समिति में वर्तमान में 6 सदस्य हैं. इसमें तीन सदस्य RBI से होते हैं और तीन अन्य स्वतंत्र सदस्य भारत सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं.
  • समिति की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर करता है. इस समिति का गठन उर्जित पटेल कमिटी की सिफारिश के आधार किया गया था.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI): एक दृष्टि

  • भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) भारत का केन्द्रीय बैंक है. यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है.
  • RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को RBI ऐक्ट 1934 के अनुसार हुई. प्रारम्भ में इसका केन्द्रीय कार्यालय कोलकाता में था जो सन 1937 में मुम्बई आ गया.
  • पहले यह एक निजी बैंक था किन्तु सन 1949 से यह भारत सरकार का उपक्रम बन गया है.
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत अनिवार्य रूप से मौद्रिक नीति के संचालन की जिम्मेदारी सौपीं गई है.

क्या होता है रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर और एसएलआर?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 संसद में प्रस्तुत किया

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 प्रस्तुत किया. यह उनका लगातार 9वां बजट था. यह पहली बार था जब केंद्रीय बजट रविवार को पेश किया गया.

इस बजट में सरकार ने ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए आर्थिक विकास, रोजगार और राजकोषीय विवेक (fiscal prudence) पर जोर दिया है.

केंद्रीय बजट 2026-27: महत्वपूर्ण जानकारी

बजट का मुख्य विषय (Theme): 3 कर्तव्य

यह बजट ‘कर्तव्य भवन’ में तैयार किया गया पहला बजट है. यह तीन प्रमुख कर्तव्यों पर आधारित है:

  1. आर्थिक विकास में तेजी: उत्पादकता बढ़ाना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को लचीला बनाना.
  2. आकांक्षाओं की पूर्ति: लोगों की क्षमताओं का निर्माण करना ताकि वे भारत की समृद्धि में भागीदार बन सकें.
  3. समावेशी विकास (सबका साथ, सबका विकास): हर क्षेत्र, परिवार और समुदाय तक संसाधन और अवसर पहुँचाना.

प्रमुख वित्तीय आँकड़े

  • कुल व्यय: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अनुमानित व्यय ₹53.5 लाख करोड़ है.
  • पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure): बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए इसे बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है.
  • राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit): इसे सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.3% तक सीमित करने का लक्ष्य रखा गया है (जो पिछले वर्ष 4.4% था).
  • ऋण-जीडीपी अनुपात (Debt-to-GDP Ratio): इसे घटाकर 55.6% पर लाने का अनुमान है.

कर (Taxation) से जुड़ी घोषणाएँ

  • सरकार ने घोषणा की है कि एक नया और सरल ‘आयकर अधिनियम, 2025’ 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा. इसका उद्देश्य पुराने 1961 के कानून को बदलना और अनुपालन को आसान बनाना है.
  • मौजूदा वर्ष (Assessment Year 2026-27) के लिए आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
  • कैंसर की 17 प्रकार की दवाओं और कुछ दुर्लभ बीमारियों के उपचारों को सीमा शुल्क से छूट दी गई है.
  • निजी उपयोग के लिए आयातित सामानों पर शुल्क 20% से घटाकर 10% किया गया है.
  • लिथियम-आयन बैटरी निर्माण के लिए आवश्यक पूंजीगत वस्तुओं (Capital Goods) पर छूट दी गई है.

क्षेत्रवार प्रमुख घोषणाएँ

प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स

  • सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: भारत में चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए आवंटन बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया गया है.
  • इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स: इनके निर्माण को बढ़ावा देने के लिए भी ₹40,000 करोड़ की योजना प्रस्तावित है.

रेयर अर्थ कॉरिडोर (Rare Earth Corridor) का निर्माण

  • केंद्रीय बजट 2026-27 में ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ (Rare Earth Corridor) के निर्माण की एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई है.
  • यह पहल भारत को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने और चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
  • सरकार ने खनिज-समृद्ध चार तटीय राज्यों को इन समर्पित कॉरिडोर के लिए चुना है: ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल
  • इन राज्यों के चयन का मुख्य कारण वहां के तटीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला मोनाजाइट (Monazite) रेत है, जो रेयर अर्थ तत्वों (जैसे नियोडिमियम और प्रैसेओडिमियम) का प्रमुख स्रोत है.
  • इस परियोजना का लक्ष्य एक ऐसा इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम (एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र) बनाना है जहाँ- खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण प्रक्रियाएं एक ही क्षेत्र में हो सकें.
  • बजट आवंटन: इस क्षेत्र के लिए करीब 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

एमएसएमई (MSME) और उद्योग

  • SME ग्रोथ फंड: लघु उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए ₹10,000 करोड़ का फंड बनाया जाएगा.
  • कॉर्पोरेट मित्र: टियर-2 और टियर-3 शहरों में छोटे उद्योगों की मदद के लिए ‘कॉर्पोरेट मित्र’ का एक कैडर तैयार किया जाएगा.
  • केमिकल पार्क्स: हर राज्य में प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर आधारित 3 समर्पित केमिकल पार्क बनाने का प्रस्ताव है.

रक्षा बजट 2026-27 (Defense Budget)

  • कुल आवंटन: रक्षा क्षेत्र के लिए ₹7.85 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं. यह पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 15.19% की भारी वृद्धि है.
  • जीडीपी का हिस्सा: यह कुल अनुमानित जीडीपी का लगभग 2% है और सरकार के कुल खर्च का 14.67% हिस्सा है.
  • पूंजीगत व्यय (Capital Outlay): आधुनिकीकरण और नए हथियारों की खरीद के लिए ₹2.19 लाख करोड़ निर्धारित किए गए हैं (जो पिछले साल से 22% अधिक है).
  • स्वदेशीकरण: कुल पूंजीगत खरीद का 75% (लगभग ₹1.39 लाख करोड़) घरेलू उद्योगों से सामान खरीदने के लिए आरक्षित रखा गया है.
  • रक्षा पेंशन: इसके लिए ₹1.71 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है.

रेलवे बजट 2026-27 (Railway Budget)

  • रेलवे के लिए बुनियादी ढांचे और गति पर विशेष ध्यान दिया गया है.
  • पूंजीगत आवंटन (Capex): भारतीय रेलवे को ₹2.93 लाख करोड़ का अब तक का सबसे अधिक पूंजीगत आवंटन मिला है.
  • 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर: वित्त मंत्री ने देश के प्रमुख शहरों को जोड़ने के लिए 7 नए हाई-स्पीड कॉरिडोर (बुलेट ट्रेन जैसी परियोजनाएं) की घोषणा की है. ये मार्ग हैं:
  1. दिल्ली से वाराणसी
  2. मुंबई से पुणे
  3. पुणे से हैदराबाद
  4. हैदराबाद से बेंगलुरु
  5. हैदराबाद से चेन्नई
  6. चेन्नई से बेंगलुरु
  7. वाराणसी से सिलिगुड़ी
  • सुरक्षा (कवच): यात्री सुरक्षा के लिए ₹1.20 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिसमें ‘कवच’ (स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली) को तेजी से लागू करना शामिल है.
  • माल ढुलाई (Dedicated Freight Corridor): पश्चिम बंगाल के दानकुनी से गुजरात के सूरत तक एक नया समर्पित फ्रेट कॉरिडोर बनाया जाएगा.

शिक्षा और कौशल विकास

  • शिक्षा क्षेत्र के लिए बजट में ऐतिहासिक वृद्धि की गई है ताकि युवा शक्ति को भविष्य के लिए तैयार किया जा सके.
  • कुल आवंटन: शिक्षा मंत्रालय के लिए ₹1.39 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं (लगभग 8.27% की वृद्धि).
  1. स्कूल शिक्षा: ₹83,562 करोड़.
  2. उच्च शिक्षा: ₹55,727 करोड़.
  • तकनीकी संस्थानों का विस्तार: 3 नए NIPER (फार्मास्युटिकल शिक्षा), 1 नया NID (डिज़ाइन), और उत्तर भारत में एक नया NIMHANS (मानसिक स्वास्थ्य संस्थान) खोला जाएगा.
  • AI और डिजिटल: शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए ₹100 करोड़ और 15,000 स्कूलों में ‘कंटेंट क्रिएटर लैब्स’ स्थापित करने का प्रस्ताव है.

स्वास्थ्य क्षेत्र (Healthcare)

  • स्वास्थ्य बजट का मुख्य फोकस बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और डिजिटल हेल्थ मिशन पर है.
  • कुल आवंटन: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को ₹1,06,530.42 करोड़ मिले हैं (लगभग 10% की वृद्धि).
  • बायोफार्मा शक्ति (BioPharma SHAKTI): भारत को वैश्विक हब बनाने के लिए 5 वर्षों में ₹10,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा.

स्वास्थ्य मिशन:

  • PM-ABHIM (स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन): ₹4,770 करोड़ (67% की भारी वृद्धि).
  • आयुष्मान भारत (PM-JAY): ₹9,500 करोड़.

कृषि और किसान कल्याण

  • कृषि क्षेत्र को आधुनिक और अधिक लाभकारी बनाने के लिए तकनीक और विविधता पर जोर दिया गया है.
  • कुल आवंटन: कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए ₹1,62,671 करोड़ का प्रावधान किया गया है (लगभग 7% की वृद्धि).
  • भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR): किसानों की सहायता के लिए एक बहुभाषी AI टूल लॉन्च किया जाएगा जो खेती की सटीक जानकारी देगा.
  • नकद फसलों को प्रोत्साहन: नारियल, काजू, कोको और चंदन जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों (Cash Crops) की खेती के लिए विशेष सहायता दी जाएगी.

पशुपालन और मत्स्य पालन:

  • पशु चिकित्सा कॉलेजों और अस्पतालों के लिए ऋण-लिंक्ड सब्सिडी योजना.
  • 500 जलाशयों के एकीकृत विकास के माध्यम से नीली क्रांति (Blue Revolution) को बढ़ावा.
  • उर्वरक सब्सिडी: किसानों की लागत कम करने के लिए ₹1.70 लाख करोड़ से अधिक की उर्वरक सब्सिडी का प्रावधान जारी है.

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • राज्यों को हस्तांतरण: केंद्र सरकार राज्यों को करों और अनुदानों के रूप में लगभग ₹26.2 लाख करोड़ हस्तांतरित करेगी.
  • पर्यटन: पूर्वोत्तर भारत (अरुणाचल, सिक्किम आदि) में ‘बौद्ध सर्किट’ के विकास के लिए नई योजना शुरू की जाएगी.

वित्त मंत्री ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 29 जनवरी 2026 को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) 2025-26 पेश किया. यह दस्तावेज 1 फरवरी को आने वाले बजट से पहले अर्थव्यवस्था का ‘रिपोर्ट कार्ड’ होता है.

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: मुख्य बिन्दु

  • सर्वेक्षण में भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘गोल्डीलॉक्स फेज’ (Goldilocks Phase) में बताया है—जिसका अर्थ है उच्च विकास दर और नियंत्रित महंगाई का एक आदर्श संतुलन.
  • चालू वित्त वर्ष (2025-26) में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान है. अगले वित्त वर्ष (2026-27) में विकास दर 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है.
  • भारत लगातार चौथे वर्ष दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा.
  • अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान महंगाई दर गिरकर 1.7% के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गई है.
  • कृषि क्षेत्र में 3.1% और सेवा क्षेत्र में 9.1% की वृद्धि का अनुमान है. औद्योगिक विकास दर 6.2% रहने का अनुमान है.
  • दिसंबर 2025 में बेरोजगारी दर घटकर 4.8% रह गई है, जो रोजगार के बढ़ते अवसरों को दर्शाता है. महिलाओं की श्रम शक्ति में भागीदारी (LFPR) बढ़कर 41.7% हो गई है.
  • वित्त वर्ष 2024-25 में राजकोषीय घाटा घटकर 4.8% रह गया. वित्त वर्ष 2025-26 में इसे 4.4% तक लाने का लक्ष्य रखा गया है.
  • आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 एक बहुत ही सकारात्मक तस्वीर पेश करता है. यह बताता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था उच्च विकास के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ रही है.

भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बना

नवीनतम आर्थिक आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमानों के अनुसार, भारत अब जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (4th Largest Economy) बन गया है. भारत की जीडीपी वर्तमान में 4.18 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है.

मुख्य बिन्दु

  • यह उपलब्धि भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है क्योंकि भारत अब विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के और करीब पहुँच गया है.
  • आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत अपनी वर्तमान गति (7-8%) बनाए रखता है, तो वह 2027 के अंत तक जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा.

विश्व के शीर्ष 5 अर्थव्यवस्थाएं

रैंकदेशनॉमिनल जीडीपी (लगभग)
1अमेरिका~$29-30 ट्रिलियन
2चीन~$19-20 ट्रिलियन
3जर्मनी~$4.8 ट्रिलियन
4भारत~$4.4 – 4.5 ट्रिलियन
5जापान~$4.2 ट्रिलियन

भारत की उपलब्धि के महत्वपूर्ण कारक

  • वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की 7.4% की वृद्धि दर ने इसे प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज बनाए रखा है.
  • जापान की अर्थव्यवस्था में लंबे समय से जारी स्थिरता और येन (Yen) की कमजोरी के कारण उसकी जीडीपी में गिरावट आई.
  • UPI और डिजिटल इंडिया जैसे सुधारों ने उत्पादकता में भारी वृद्धि की है.
  • सरकार द्वारा सड़कों, रेलवे और बंदरगाहों पर बड़े पैमाने पर खर्च ने आर्थिक गतिविधियों को गति दी है.

भारतीय अर्थव्यवस्था से संबंधित कुछ मुख्य बिन्दु

  • ‘क्रय शक्ति समानता’ (Purchasing Power Parity) के आधार पर, भारत पहले से ही चीन और अमेरिका के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.
  • विशाल जनसंख्या के कारण ‘प्रति व्यक्ति जीडीपी’ (GDP per capita) के मामले में भारत अन्य शीर्ष देशों से काफी पीछे है.

2025-26 में जीडीपी में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने 7 जनवरी 2026 को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रथम अग्रिम अनुमान जारी किए. इसके अनुसार भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है. यह वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष (2024-25) की 6.5 प्रतिशत की तुलना में काफी बेहतर है.

वर्तमान वित्त वर्ष के लिए जीडीपी के पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार इसे 201 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है. जबकि 2024-25 के लिए इसका अनंतिम अनुमान 187 लाख करोड़ रुपये से अधिक था.

इन आंकड़ों के साथ भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है.

NSO द्वारा जारी रिपोर्ट: मुख्य बिंदु

  • वास्तविक जीडीपी (Real GDP): 7.4% (स्थिर कीमतों पर)
  • नॉमिनल जीडीपी (Nominal GDP): 8.0% (वर्तमान कीमतों पर)
  • सकल मूल्य वर्धित (GVA) वृद्धि: 7.3%
  • प्रति व्यक्ति उपभोग: 6.1% की वृद्धि

क्षेत्रवार अनुमानित वृद्धि दर

  • वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाएँ: 9.9%
  • व्यापार, होटल, परिवहन और संचार: 7.5%
  • विनिर्माण (Manufacturing): 7.0%
  • निर्माण (Construction): 7.0%
  • कृषि (Agriculture): 3.1%

अन्य संस्थानों के अनुमानों से तुलना

NSO का 7.4% का यह अनुमान भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अनुमान से भी थोड़ा अधिक है. दिसंबर 2025 की मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने इसे 7.3% रहने का अनुमान लगाया था. SBI (Ecowrap) रिपोर्ट के अनुसार यह वृद्धि 7.5% तक जा सकती है.

इलेक्‍ट्रोनिक घटक विनिर्माण योजना के तीसरे चरण के प्रस्तावों को मंजूरी

केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) ने 2 जनवरी 2026 को इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना (ECMS) के तीसरे चरण (Tranche-3) के तहत 22 नए प्रस्तावों को मंजूरी दी है.

मुख्य बिन्दु

  • इस योजना का मुख्य उद्देश्य विदेशों से आयात होने वाले महंगे इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों का निर्माण भारत में ही करना है. यह केंद्र सरकार का भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का वैश्विक हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
  • इसमें लगभग 41863 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है. इन परियोजनाओं से 2.58 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन होने की उम्मीद है.

योजना का महत्व

  • वर्तमान में भारत कई महत्वपूर्ण घटकों के लिए चीन और अन्य देशों पर निर्भर है. इस योजना से भारत आत्मनिर्भर बनेगा.
  • आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2026 को एक ‘ऐतिहासिक वर्ष’ बताया है क्योंकि इसी वर्ष 4 सेमीकंडक्टर इकाइयां अपना व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने वाली हैं.
  • सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को $500 बिलियन तक ले जाना है.

मंजूरी प्राप्त 22 प्रस्ताव मुख्य रूप से 11 श्रेणियों के उत्पादों का निर्माण करेंगे:

  • 5 मूल घटक (Bare Components): PCB (सर्किट बोर्ड), कैपेसिटर, कनेक्टर, एनक्लोजर (कैबिनेट) और लिथियम-आयन सेल.
  • 3 उप-संयोजन (Sub-assemblies): कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल और ऑप्टिकल ट्रांससीवर.
  • 3 आपूर्ति श्रृंखला वस्तुएं (Supply Chain items): एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न, एनोड सामग्री और लैमिनेट.

इन प्रस्तावों में देश-विदेश की कई दिग्गज कंपनियां शामिल हैं:

  • सैमसंग डिस्प्ले (Samsung Display Noida)
  • डिक्सन टेक्नोलॉजीज (Dixon Technologies)
  • फॉक्सकॉन (Yuzhan Technology India)
  • हिंडाल्को इंडस्ट्रीज (Hindalco)
  • टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics)

RBI की पाँचवी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा: रेपो दर में 25 प्रतिशत की कटौती

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समि‍ति (MPC) की बैठक 3 से 5 दिसंबर 2025 तक मुंबई में हुई थी. बैठक की अध्यक्षता बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की थी.

यह चालू वित्त वर्ष (2025-26) की पाँचवी द्विमासिक (दिसम्बर-जनवरी) मौद्रिक नीति (5th Bi-Monthly Monetary Policy) समीक्षा बैठक थी.

MPC की बैठक, दिसम्बर 2025: मुख्य बिंदु

RBI ने प्रमुख नीतिगत दर रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत (25 बेसिस पॉइंट्स) की कटौती की है.

RBI ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने आर्थिक अनुमानों को संशोधित किया है:

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि अनुमान:

  • पहले का अनुमान: 6.8%
  • नया अनुमान: 7.3%

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति अनुमान:

  • पहले का अनुमान: 2.6%
  • नया अनुमान: 2.0%

रेपो रेट कटौती का महत्व

  • रेपो रेट में कटौती से बैंकों पर ब्याज दरें घटाने का दबाव बढ़ेगा, जिससे होम लोन और अन्य कर्जों की EMI कम हो सकती है.
  • यह कटौती वित्तीय प्रणाली में तरलता (Liquidity) को बढ़ाएगी और उपभोक्ताओं तथा व्यवसायों के लिए उधार लेने की लागत को कम करके आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करेगी.

वर्तमान दरें: एक दृष्टि

नीति रिपो दर5.25%
प्रत्‍यावर्तनीय रेपो दर (RRR)3.35%
स्थायी जमा सुविधा (SDF)5.00%
सीमांत स्‍थायी सुविधा दर (MSF)5.50%
बैंक दर5.50%
नकद आरक्षित अनुपात (CRR)3.00%
वैधानिक तरलता अनुपात (SLR)18%

मौद्रिक नीति समि‍ति (MPC): एक दृष्टि

  • RBI की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) भारत सरकार द्वारा गठित एक समिति है. इसका गठन RBI अधिनियम 1934 के प्रावधानों के तहत 29 सितंबर 2016 को किया गया था.
  • यह भारत सरकार द्वारा निर्धारित मुद्रास्फीति लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आरबीआई की नीतिगत ब्याज दर निर्धारित करती है.
  • मौद्रिक नीति समिति में वर्तमान में 6 सदस्य हैं. इसमें तीन सदस्य RBI से होते हैं और तीन अन्य स्वतंत्र सदस्य भारत सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं.
  • समिति की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर करता है. इस समिति का गठन उर्जित पटेल कमिटी की सिफारिश के आधार किया गया था.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI): एक दृष्टि

  • भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) भारत का केन्द्रीय बैंक है. यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है.
  • RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को RBI ऐक्ट 1934 के अनुसार हुई. प्रारम्भ में इसका केन्द्रीय कार्यालय कोलकाता में था जो सन 1937 में मुम्बई आ गया.
  • पहले यह एक निजी बैंक था किन्तु सन 1949 से यह भारत सरकार का उपक्रम बन गया है.
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत अनिवार्य रूप से मौद्रिक नीति के संचालन की जिम्मेदारी सौपीं गई है.

क्या होता है रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर और एसएलआर?

केंद्र सरकार ने श्रम संहिताओं को पूरे देश में लागू किया

केंद्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 से चार श्रम संहिताओं (Four Labour Codes) को पूरे देश में लागू कर दिया. ये श्रम संहिताएँ भारत के श्रम कानूनों को सरल, आधुनिक और एकीकृत बनाने के लिए एक बड़ा सुधार है.

इन चार संहिताओं ने 29 पुराने और जटिल केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित कर दिया है, जिससे भारत का श्रम विनियमन ढांचा सरल और आधुनिक बन गया है.

ये चार संहिताएं निम्नलिखित हैं:

  1. मज़दूरी संहिता, 2019 (Code on Wages, 2019): न्यूनतम मजदूरी, समय पर वेतन भुगतान और बोनस से संबंधित.
  2. औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (Industrial Relations Code, 2020): औद्योगिक विवादों, श्रमिकों की छंटनी और कर्मचारियों की शर्तों से संबंधित.
  3. सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Code on Social Security, 2020): कर्मचारी भविष्य निधि (PF), राज्य बीमा (ESIC), ग्रेच्युटी और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों से संबंधित.
  4. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य-दशा संहिता, 2020 (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020): कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और श्रमिकों के कामकाजी घंटों से संबंधित.

प्रमुख बदलाव

  1. न्यूनतम मजदूरी की गारंटी: अब देश भर में सभी कर्मचारियों (असंगठित क्षेत्र के श्रमिक भी शामिल) को न्यूनतम मजदूरी का कानूनी अधिकार मिला है.
  2. गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सुरक्षा: पहली बार, ओला, ज़ोमैटो आदि के लिए काम करने वाले गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा (PF, ESIC, आदि) के दायरे में लाया गया है.
  3. ग्रेच्युटी का नियम: ग्रेच्युटी के लिए आवश्यक 5 साल की सेवा की शर्त को कुछ मामलों में घटाकर 1 साल कर दिया गया है.
  4. ओवरटाइम का भुगतान: सामान्य कार्य घंटों से अधिक काम करने पर सामान्य मजदूरी की कम से कम दोगुनी दर से भुगतान करना होगा.
  5. नियुक्ति पत्र: सभी कर्मचारियों के लिए नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) देना अनिवार्य कर दिया गया है.
  6. महिलाओं के लिए समान अवसर: महिलाओं को समान काम के लिए समान वेतन की गारंटी और सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए रात्रि पाली (Night Shift) में काम करने की अनुमति दी गई है.

निर्यातकों के लिए एक नई ऋण आश्वासन योजना को मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निर्यातकों के लिए एक नई ऋण आश्वासन योजना (Credit Guarantee Scheme for Exporters – CGSE) को मंजूरी दी है.

यह योजना निर्यातकों, खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), को वित्तीय सहायता और तरलता (liquidity) प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है.

CGSE योजना के मुख्य बिंदु

  • यह योजना भारतीय निर्यातकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और देश के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई है.
  • इस योजना का उद्देश्य भारत को 1 ट्रिलियन (एक लाख करोड़) डॉलर के निर्यात लक्ष्य का समर्थन करना और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देना है. यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को भी मजबूत करेगी.
  • यह योजना सदस्य ऋणदाता संस्थानों (MLIs) को राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के माध्यम से 100% क्रेडिट गारंटी कवरेज प्रदान करती है.
  • इसका उद्देश्य पात्र निर्यातकों (MSMEs सहित) को अतिरिक्त ऋण सुविधा के रूप में ₹20,000 करोड़ तक की सहायता प्रदान करना है.
  • इस योजना के तहत, निर्यातकों को बिना किसी संपार्श्विक (यानी, बिना किसी गारंटी या सुरक्षा) के ऋण तक पहुँचने में मदद मिलेगी.

मंत्रिमंडल ने निर्यात संवर्धन मिशन को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹25,060 करोड़ के परिव्यय के साथ निर्यात संवर्धन मिशन (Export Promotion Mission – EPM) को मंजूरी दी है.

यह एक प्रमुख पहल है, जिसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा को मज़बूत करने के लिए की गई थी. इसकी घोषणा विशेष रूप से MSME, पहली बार निर्यात करने वाले और श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बढावा देने के लिए की गई थी.

EPM के मुख्य बिन्दु

  • यह मिशन वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक चलेगा. इसका उद्देश्य निर्यातकों के लिए एक व्यापक, लचीला और डिजिटल रूप से संचालित ढाँचा प्रदान करना है.
  • यह मिशन निर्यात क्षेत्र की संरचनात्मक चुनौतियों जैसे सीमित और महंगा व्यापार वित्त, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन की उच्च लागत और कमजोर ब्रांडिंग को दूर करने पर ध्यान केंद्रित करेगा.
  • यह मिशन भारत के निर्यात को एकल, परिणाम-आधारित और अनुकूलनीय तंत्र की ओर ले जाकर वैश्विक व्यापार चुनौतियों का तेजी से जवाब देने में मदद करेगा.

मिशन का उद्देश्य और प्रभाव

  • EPM का लक्ष्य उन संरचनात्मक चुनौतियों को दूर करना है जो भारतीय निर्यात को बाधित करती हैं:
  • भारतीय निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना, विशेष रूप से कपड़ा, चमड़ा, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों में.
  • विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध सेवाओं में नए रोजगार के अवसर पैदा करना.
  • गैर-पारंपरिक जिलों और क्षेत्रों से निर्यात को बढ़ावा देना और नए बाजारों में विस्तार करना.

SJ-100 यात्री जेट के सह-उत्पादन के लिए भारत-रूस ने एक MoU पर हस्ताक्षर किए

भारत में एक पूर्ण यात्री विमान का उत्पादन के लिए भारत और रूस ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस समझौता ज्ञापन पर भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) ने 27 अक्टूबर 2025 को हस्ताक्षर किए हैं.

समझौते के मुख्य उद्देश्य

  • इस MoU के तहत, HAL को भारत में घरेलू ग्राहकों के लिए SJ-100 विमानों का निर्माण (Manufacture) करने का अधिकार प्राप्त होगा.
  • यह पहली बार होगा जब भारत में एक पूर्ण यात्री विमान का उत्पादन किया जाएगा, जिससे यह कदम भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के लिए एक बड़ा कदम है.

SJ-100 यात्री जेट

  • SJ-100 यात्री जेट को पहले सुखोई सुपरजेट 100 नाम से जाना जाता था. यह रूस द्वारा विकसित एक क्षेत्रीय यात्री विमान है. यह मध्यम दूरी की उड़ानों के लिए डिज़ाइन किया गया एक आधुनिक विमान है.
  • HAL का मानना है कि SJ-100 भारत की उड़ान योजना (UDAN Scheme) के तहत छोटी दूरी की कनेक्टिविटी के लिए गेम चेंजर साबित होगा.

रामयपटनम में विशाल ग्रीनफील्ड रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स निर्माण परियोजना

आंध्र प्रदेश के रामयपटनम में एक विशाल ग्रीनफील्ड रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स परियोजना विकसित की जा रही है. इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹1 लाख करोड़ है.

रामयपटनम ग्रीनफील्ड रिफाइनरी परियोजना

  • यह परियोजना भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) संयुक्त रूप से विकसित करेंगे. दोनों कॉम्पनियों इससे संबंधित एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं.
  • इस परियोजना की रिफाइनिंग क्षमता 9 से 12 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष होगी. इसमें 1.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष एथिलीन क्रैकर यूनिट भी शामिल होगी.
  • इस परियोजना के लिए आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा लगभग 6,000 एकड़ भूमि आवंटित की गई है. यह वित्तीय वर्ष 2030 तक वाणिज्यिक परिचालन शुरू करने की उम्मीद है.
  • यह परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पेट्रोकेमिकल आत्मनिर्भरता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.