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नियाग्रा में जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित की गई

जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक (G7 Foreign Ministers’ Meeting) 2025, 11 और 12 नवंबर 2025 को नियाग्रा (कनाडा) में आयोजित की गई थी. बैठक की मेजबानी कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने की थी.

  • जी-7 देश (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, कनाडा) और यूरोपीय संघ इस बैठक के मुख्य प्रतिभागी थे.
  • भारत, ब्राजील, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका, मैक्सिको आदि आमंत्रित अतिथि देश (Outreach Partners) थे. भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इसमें भाग लिया.

चर्चा के मुख्य विषय

  • इस बैठक में वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों पर विशेष जोर दिया गया.
  • मंत्रियों ने स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) की वकालत की और पूर्वी तथा दक्षिणी चीन सागर में किसी भी एकतरफा बलपूर्वक बदलाव का कड़ा विरोध किया.
  • गाजा संघर्ष पर चर्चा हुई, जिसमें युद्धविराम और मानवीय सहायता पर जोर दिया गया. क्षेत्र में शांति के लिए कूटनीतिक समाधानों का समर्थन किया.
  • यूक्रेन के लिए निरंतर समर्थन की पुष्टि की गई और रूस को सैन्य सहायता देने वाले तीसरे पक्षों (जैसे उत्तर कोरिया और ईरान) की आलोचना की गई.
  • महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने और किसी एक देश पर निर्भरता कम करने पर सहमति बनी.
  • बैठक के अंत में जारी संयुक्त बयान (Joint Statement) में समुद्री सुरक्षा, साइबर खतरों और गलत सूचनाओं से निपटने के लिए जी-7 देशों की एकजुटता को दोहराया गया.

भारत की भूमिका

  • विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने फ्रांस, जर्मनी और कनाडा के विदेश मंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं.
  • ‘आउटरीच सत्र’ में डॉ. जयशंकर ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और डिजिटल सुरक्षा पर भारत के दृष्टिकोण को रखा.
  • तनावपूर्ण संबंधों के बीच, डॉ. जयशंकर ने कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद से मुलाकात की, जिसे दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा गया.

51वां G-7 शिखर सम्मेलन कनानास्‍किस में आयोजित किया गया

  • 51वां G-7 शिखर सम्मेलन (51st G7 summit) 15 से 17 जून 2025 तक कनाडा के कनानास्‍किस में आयोजित किया गया था.
  • बैठक में G-7 के सदस्य देशों अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़, इटली के प्रधान मंत्री जियोर्जिया मेलोनी और मेजबान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी  ने भाग लिया.
  • इस वर्ष इस सम्‍मेलन के फोकस क्षेत्रों में समुदायों और विश्‍व की रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा का निर्माण और डिजिटल परिवर्तन में तेजी लाने के साथ-साथ भविष्य की साझेदारी को सुरक्षित करना शामिल था.

प्रधानमंत्री मोदी ने आउटरीच सत्र में भाग लिया

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस शिखर सम्मेलन में भाग लिया था. इस शिखर सम्मेलन में भारत की 12वीं और श्री मोदी की लगातार 6ठी भागीदारी थी.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने आउटरीच सत्र में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया था. प्रधानमंत्री मोदी इस बैठक में शामिल होने के लिए 17-18 जून को कनाडा की यात्रा पर थे.
  • भारत जी 7 का सदस्य नहीं है, लेकिन विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र एक उभरती आर्थिक शक्ति के रूप में, इसे 2019 से नियमित रूप से जी-7 के आउटरीच सत्र में आमंत्रित किया जाता रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ऊर्जा सुरक्षा’ पर आउटरीच सत्र में भाग लिया.

प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय बैठकें

  • प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान जी-7 देश के नेताओं के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें की थी.
  • प्रधानमंत्री मोदी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात नहीं कर पाए. डोनाल्ड ट्रंप इजरायल-ईरान युद्ध के कारण जी-7 शिखर सम्मेलन को बीच में छोड़ कर वापस चले गए थे.
  • पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप को इस साल के अंत में भारत में होने वाली 7वीं क्वाड शिखर बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया. डोनाल्ड ट्रंप ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है.

G7 संगठन: एक दृष्टि

  • G7 सात सबसे अधिक औद्योगिकीकरण वाले लोकतांत्रिक देशों का एक अनौपचारिक समूह है. जी 7 समूह, 1973 के अरब इजरायली युद्ध के बाद अरब देशों द्वारा कच्चे पेट्रोलियम तेल की कीमतों में वृद्धि के बाद फ्रांस की पहल पर बनाया गया था.
  • G7 में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमरीका सदस्य देश हैं. यूरोपीय संघ (ईयू) को भी G7 का एक मानक सदस्य माना जाता है लेकिन यह आधिकारिक सदस्य नहीं है, क्योंकि यह देशों का एक समूह है. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जी7 बैठकों में भाग लेते हैं और इसका प्रतिनिधित्व करते हैं.
  • गठन: वर्ष 1975 में फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति वैलेरी जिस्कार्ड डी एस्टेइंग के आह्वान पर विश्व के सर्वाधिक औद्योगीकृत, लोकतांत्रिक एवं गैर-समाजवादी 6 राष्ट्रों- फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, जर्मनी, एवं जापान ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक बैठक का आयोजन किया जिसमें इस समूह का गठन हुआ.
  • कनाडा सदस्य बना: वर्ष 1976 में कनाडा को इस समूह में शामिल कर लिया गया. कनाडा की सहभागिता के पश्चात यह समूह ‘G7’ के नाम से जाना जाने लगा.
  • रूस सदस्य बना: वर्ष 1994 में ‘G7’ में रूस के शामिल होने से यह समूह ‘G8’ के नाम से जाना गया.
  • रूस निलंबित: 27 मार्च, 2014 को इस संगठन से रूस को अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया गया. अब यह समूह पुनः ‘G7’ के नाम से जाना जाने लगा है.
  • मुख्यालय: ‘G7’ एक अनौपचारिक संगठन है जिसका कोई मुख्यालय अथवा सचिवालय नहीं है. इसके अध्यक्ष का चयन रोटेशन प्रणाली के आधार पर होता है.
  • अर्थशास्त्र: ‘G7’ देश में विश्व की जनसंख्या का 10.3% लोग रहते हैं. सदस्य देशों की GDP विश्व के GDP का 32.2% है, जबकि विश्व के निर्यात में 34.1% तथा आयात में 36.7% हिस्सा है.

50वां G-7 शिखर सम्‍मेलन इटली आयोजित किया गया, IMEC परियोजना के लिए सहमति

50वां G-7 शिखर सम्‍मेलन (50th G7 summit) 13 से 15 जून 2024 तक इटली के अपूलिया में आयोजित किया गया था. बैठक में जी 7 के सदस्य देशों संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन, कनाडा के प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो, यूनाइटेड किंगडम के प्रधान मंत्री ऋषि सुनक, जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़, और मेजबान इटली के प्रधान मंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने भाग लिया.

मुख्य बिन्दु

  • जी 7 शिखर बैठक में सदस्य देशों ने रूसी आक्रमण के खिलाफ लड़ाई में यूक्रेन का समर्थन किया. शिखर सम्मेलन के दौरान, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ एक 10-वर्षीय सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए.
  • समझौते के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका यूक्रेन को आधुनिक हथियार और गोला-बारूद प्रदान करेगा, लेकिन वह यूक्रेन में अमेरिकी सेना भेजकर रूस के साथ युद्ध में यूक्रेन की मदद नहीं करेगा.
  • G7 देश रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद जब्त की गई रूसी संपत्तियों से ब्याज का उपयोग करके यूक्रेन को 50 बिलियन डॉलर का ऋण प्रदान करने पर भी सहमत हुए.
  • अगली 51वीं शिखर बैठक 2025 में कैनानास्किस, अल्बर्टा, कनाडा में आयोजित की जाएगी.

प्रधानमंत्री मोदी ने आउटरीच सत्र में भाग लिया

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस शिखर सम्मेलन में भाग लिया था. इस शिखर सम्मेलन में भारत की 11वीं और श्री मोदी की लगातार पांचवीं भागीदारी थी.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इटली के प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा, अफ्रीका और भूमध्य सागर पर आउटरीच सत्र में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया था.
  • सम्मेलन से अलग श्री मोदी ने जी-7 देश के नेताओं के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें की थी.
  • प्रधानमंत्री  मोदी ने इतालवी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की और यूनाइटेड किंगडम के प्रधान मंत्री ऋषि सुनक के साथ चर्चा की.

आउटरीच सत्र क्या है?

  • जी 7 मेजबान देश को आउटरीच सत्र में भाग लेने के लिए अन्य देशों या बहुपक्षीय संस्थानों को आमंत्रित करने का अधिकार है जहां किसी विशेष मुद्दे या कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की जाती है.
  • G7 के आउटरीच सत्र में भाग लेने का निमंत्रण पाने वाले पहले भारतीय प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (वर्ष 2003) थे.
  • इस बार (2024 में), इटली ने अल्जीरिया, अर्जेंटीना, ब्राजील, भारत, जॉर्डन, केन्या, मॉरिटानिया, ट्यूनीशिया, तुर्किये और UAE को आमंत्रित किया था. इन देशों के अलावा अफ्रीकी विकास बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन, संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक के प्रमुखों को भी आमंत्रित किया गया था.

IMEC परियोजना के लिए सहमति

  • शिखर सम्मेलन में G-7 देशों ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) जैसी विशिष्ट अवसंरचना परियोजना के लिए अपनी सहमति जताई.
  • दिल्ली में भारत द्वारा आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान IMEC ढांचे को अंतिम रूप दिया गया था. इस पहल का उद्देश्य एशिया, मध्य पूर्व और पश्चिमी देशों के बीच एकीकरण को बढ़ावा देना है.
  • IMEC की योजना सऊदी अरब, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप को जोड़ने वाली सड़कों, रेलवे और शिपिंग मार्गों का एक व्यापक नेटवर्क स्थापित करने की है.
  • विशेष रूप से इसे चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) के जवाब में IMEC को सहयोगी देशों द्वारा अपने रणनीतिक प्रभाव को बढ़ाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है.
  • BRI चीन की एक प्रमुख अवसंरचना परियोजना है जो दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य एशिया, रूस और यूरोप को चीन से जोड़ती है.

G7 संगठन: तथ्यों पर एक दृष्टि

G7 सात सबसे अधिक औद्योगिकीकरण वाले लोकतांत्रिक देशों का एक अनौपचारिक समूह है. जी 7 समूह, 1973 के अरब इजरायली युद्ध के बाद अरब देशों द्वारा कच्चे पेट्रोलियम तेल की कीमतों में वृद्धि के बाद फ्रांस की पहल पर बनाया गया था. G7  में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमरीका सदस्य देश हैं.

गठन: वर्ष 1975 में फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति वैलेरी जिस्कार्ड डी एस्टेइंग के आह्वान पर विश्व के सर्वाधिक औद्योगीकृत, लोकतांत्रिक एवं गैर-समाजवादी 6 राष्ट्रों- फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, जर्मनी, एवं जापान ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक बैठक का आयोजन किया जिसमें इस समूह का गठन हुआ.

कनाडा सदस्य बना: वर्ष 1976 में कनाडा को इस समूह में शामिल कर लिया गया. कनाडा की सहभागिता के पश्चात यह समूह ‘G7’ के नाम से जाना जाने लगा.

रूस सदस्य बना: वर्ष 1994 में ‘G7’ में रूस के शामिल होने से यह समूह ‘G8’ के नाम से जाना गया.

रूस निलंबित: 27 मार्च, 2014 को इस संगठन से रूस को अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया गया. अब यह समूह पुनः ‘G7’ के नाम से जाना जाने लगा है.

मुख्यालय: ‘G7’ एक अनौपचारिक संगठन है जिसका कोई मुख्यालय अथवा सचिवालय नहीं है. इसके अध्यक्ष का चयन रोटेशन प्रणाली के आधार पर होता है.

अर्थशास्त्र: ‘G7’ देश में विश्व की जनसंख्या का 10.3% लोग रहते हैं. सदस्य देशों की GDP विश्व के GDP का 32.2% है, जबकि विश्व के निर्यात में 34.1% तथा आयात में 36.7% हिस्सा है.

47वां जी-7 शिखर सम्‍मेलन: प्रधानमंत्री मोदी की जर्मनी और UAE यात्रा

विकसित देशों के समूह जी-7 शिखर सम्मेलन (47th G7 summit) 27 जून को जर्मनी के श्लॉस एल्‍माओ में आयोजित किया गया था. इस सम्मेलन में सभी सदस्य देशों कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष ने भाग लिया.

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्‍ज के निमंत्रण पर इस सम्मेलन में हिस्सा लिया था. भारत के अलावा अर्जेन्‍टीना, इंडोनेशिया, सेनेगल और दक्षिण अफ्रीका भी सम्‍मेलन में आमंत्रित किए गए थे.

मुख्य बिंदु

  • जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकासशील देशों को छह खरब डॉलर की ढांचागत सहायता की घोषणा की गयी. इसे चीन की बेल्‍ट एंड रोड पहल (Belt and Road Initiative – BRI) के प्रति पश्चिमी देशों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है. अमरीका के राष्‍ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि यह एक निवेश है. यह जी-7 देशों के लिए लाभदायक है.
  • बेल्‍ट एंड रोड पहल (BRI)  एक वैश्विक बुनियादी ढांचा विकास रणनीति है, जिसे चीन ने 2013 में शुरू किया था. इसका उद्देश्य क्षेत्रीय एकीकरण में सुधार, वाणिज्य में वृद्धि और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए एशिया को अफ्रीका और यूरोप के साथ भूमि और समुद्री नेटवर्क से जोड़ना है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जर्मनी यात्रा

  • प्रधानमंत्री मोदी सम्‍मेलन से अलग जी-7 और अतिथि देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत की. उन्होंने म्‍यूनिख में जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्‍ज से मुलाकात की. दोनों नेता व्‍यापार, निवेश तथा लोगों के बीच सम्‍पर्क और बढ़ाने पर भी सहमत हुए.
  • प्रधानमंत्री मोदी ने शिखर सम्‍मेलन के दो सत्रों में भाग लिया. पहला सत्र जलवायु, ऊर्जा और स्‍वास्‍थ्‍य तथा दूसरा सत्र खाद्य सुरक्षा और स्‍त्री-पुरुष समानता से संबंधित था.
  • पहले सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने जी-7 समूह के देशों से आग्रह किया है कि वे हरित विकास, स्‍वच्‍छ ऊर्जा, सतत जीवन शैलियों और वैश्‍विक कल्‍याण के लिए भारत के प्रयासों में सहयोग दें. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी भारत में रहती है,लेकिन वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में भारत का योगदान केवल पांच प्रतिशत है.
  • खाद्य सुरक्षा और स्त्री-पुरूष समानता सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि भारत का दृष्टिकोण ‘महिला विकास’ से बदलकर ‘महिला नेतृत्व में विकास’ हो गया है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की UAE यात्रा

  • शिखर सम्‍मेलन में शामिल होने के बाद श्री मोदी 28 जून को संयुक्‍त अरब अमारात (UAE) गये थे. उन्होंने अबूधाबी में UAE के राष्‍ट्रपति और अबूधाबी के शासक शेख मोहम्‍मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की.
  • द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने व्‍यापक कार्यनीतिक साझेदारी और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई.
  • उनकी यात्रा का उद्देश्य वहां के पूर्व राष्‍ट्रपति और अबूधाबी के शासक शेख खलीफा बिन जायद अल नहयान के निधन पर व्‍यक्तिगत रूप से संवेदना प्रकट करना था.

G7 संगठन: तथ्यों पर एक दृष्टि

  • ‘G7’ सात विकसित देशों का समूह है जिसमें ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमरीका सदस्य देश हैं. भारत उन कुछ देशों में शामिल है जिन्‍हें शिखर सम्‍मेलन में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है.
  • गठन: वर्ष 1975 में फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति वैलेरी जिस्कार्ड डी एस्टेइंग के आह्वान पर विश्व के सर्वाधिक औद्योगीकृत, लोकतांत्रिक एवं गैर-समाजवादी 6 राष्ट्रों- फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, जर्मनी, एवं जापान ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक बैठक का आयोजन किया जिसमें इस समूह का गठन हुआ.
  • कनाडा सदस्य बना: वर्ष 1976 में कनाडा को इस समूह में शामिल कर लिया गया. कनाडा की सहभागिता के पश्चात यह समूह ‘G7’ के नाम से जाना जाने लगा.
  • रूस सदस्य बना: वर्ष 1994 में ‘G7’ में रूस के शामिल होने से यह समूह ‘G8’ के नाम से जाना गया.
  • रूस निलंबित: 27 मार्च, 2014 को इस संगठन से रूस को अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया गया. अब यह समूह पुनः ‘G7’ के नाम से जाना जाने लगा है.
  • मुख्यालय: ‘G7’ एक अनौपचारिक संगठन है जिसका कोई मुख्यालय अथवा सचिवालय नहीं है. इसके अध्यक्ष का चयन रोटेशन प्रणाली के आधार पर होता है.
  • अर्थशास्त्र: ‘G7’ देश में विश्व की जनसंख्या का 10.3% लोग रहते हैं. सदस्य देशों की GDP विश्व के GDP का 32.2% है, जबकि विश्व के निर्यात में 34.1% तथा आयात में 36.7% हिस्सा है.

46वां जी-7 देशों का शिखर सम्मेलन 2021 ब्रिटेन के कॉर्नवाल में आयोजित किया गया

46वां जी-7 देशों का शिखर सम्मेलन (46th G7 summit) 11-13 जून को ब्रिटेन के कॉर्नवाल में आयोजित किया गया था. यह इस सम्मेलन का 46वां संस्करण था. यह सम्मेलन ब्रिटेन की मेजवानी में आयोजित किया गया था जिसकी अध्यक्षता ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन ने की थी. इस वर्ष के शिखर सम्‍मेलन का विषय- ‘बिल्‍ड बैक बेटर’ यानी बेहतर भविष्‍य की ओर था.

इस वार्षिक सम्‍मेलन में सभी सदस्‍य देश – फ्रांस, इटली, कनाडा, अमरीका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन के नेता ने हिस्‍सा लिया. इसके आलावा यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लियन और यूरोपीय परिषद प्रमुख चार्ल्स माइकल ने भी सम्मेलन में भाग लिया.

सम्‍मेलन में शामिल नेता स्‍वास्‍थ्‍य और जलवायु परिवर्तन पर विशेष ध्‍यान देते हुए कोरोना महामारी से उबरने की तैयारियों पर अपने विचार रखे.

सम्मलेन के मुख्य बिंदु

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन ने मुख्य विचार-विमर्श की शुरूआत करते हुए कहा कि महामारी से उबरने के बाद वैश्विक रूप से सबके लिए समान व्यवस्था कायम करना और बेहतर स्थिति बहाल करना महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि जी-7 समूह एकजुट होकर जलवायु परिवर्तन की समस्याओं का समाधान करते हुए स्वच्छ और हरित विश्व का लक्ष्य हासिल करने की ओर बढ़ सकता है.

चीन के साथ प्रतिस्पर्धा के लिए एक बुनियादी ढांचा योजना का अनावरण

जी-7 के नेताओं ने चीन के वैश्विक अभियान के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक बुनियादी ढांचा योजना (Build Back Better World- B3W) का अनावरण किया. उल्लेखनीय है कि जी-7 देश, विकासशील देशों को ऐसे बुनियादी ढांचे की स्कीम का हिस्सा बनने का प्रस्ताव देने की योजना बना रहे हैं, जो चीन की अरबों-खरब डॉलर वाली ‘बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) को टक्कर दे सके.

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने जी-7 शिखर सम्मेलन में लोकतांत्रिक देशों पर बंधुआ मजदूरी प्रथाओं को लेकर चीन के बहिष्कार का दबाव बनाने की योजना तैयार की है.

वहीं, कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने चीन को लेकर हुई चर्चा की अगुवाई की. उन्होंने सभी नेताओं से अपील की कि वे चीन की ओर से बढ़ते खतरे को रोकने के लिए संयुक्त कदम उठाएं.

भारत को अतिथि देशों के रूप में आमंत्रण

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इस सम्‍मेलन में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी को आमंत्रित किया था. वर्तमान में ब्रिटेन इस समूह का अध्‍यक्ष देश है. इस बार के शिखर सम्‍मेलन के लिए भारत के साथ ऑस्‍ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका को अतिथि देशों के रूप में आमंत्रित किया गया था.

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 12 जून को जी-7 देशों के शिखर सम्‍मेलन के ऑनलाईन आउटरीच सत्रों में हिस्सा लिया. यह दूसरा अवसर था जब प्रधानमंत्री मोदी, जी-7 सम्‍मेलन में शामिल हुए. वर्ष 2019 में भी तत्‍का‍लीन अध्‍यक्ष फ्रांस ने भारत को सद्भावना निमंत्रण दिया था. उस सम्मलेन में उन्होंने जलवायु, जैव विविधता और महासागर तथा डिजिटल रूपांतरण सत्रों में अपने विचार रखे थे.

प्रधानमंत्री मोदी ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया. जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत की स्‍पष्‍ट प्रतिबद्धता के बारे में श्री मोदी ने भारतीय रेलवे द्वारा 2030 तक शून्‍य उत्‍सर्जन का लक्ष्‍य निर्धारित करने की चर्चा की. उन्‍होंने कहा कि भारत जी-20 देशों में एकमात्र राष्‍ट्र है जिसने पेरिस समझौते की प्रतिबद्धताओं को पूरा किया है. उन्‍होंने भारत द्वारा पोषित दो प्रमुख वैश्विक संगठनों-आपदा प्रतिरोधक बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (CDRI) और अंतर्राष्‍ट्रीय सौर गठबंधन के प्रयासों की चर्चा की.

‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ का नारा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन 2021 के दौरान ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ (One Earth One Health) का नारा दिया जिसका जर्मनी की चांसलर एंगेला मकेर्ल ने समर्थन किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कोविड-19 जैसी महामारियों की भविष्य में रोकथाम के लिए लोकतांत्रिक और पारदर्शी समाजों को विशेष रूप से जिम्मेदार बताते हुए वैश्विक नेतृत्व एवं एकजुटता कायम करने का आह्वान किया.

प्रधानमंत्री ने कोविड संबंधी प्रौद्योगिकियों पर पेटेंट (TRIPS) छूट के लिए भारत, दक्षिण अफ्रीका द्वारा WTO में दिए गए प्रस्ताव के लिए जी-7 के समर्थन का आह्वान भी किया.

TRIPS क्या है?

TRIPS का पूर्ण रूप Trade-Related Aspects of Intellectual Property Rights है. यह बौद्धिक संपदा अधिकारों पर एक बहुपक्षीय समझौता है जिसमें मुख्य रूप से पेटेंट, कॉपीराइट और औद्योगिक डिजाइन शामिल हैं. यह समझौता जनवरी 1995 में लागू हुआ था.

ब्रिटेन ने अध्‍यक्ष के तौर पर चार प्राथमिकताएं

ब्रिटेन ने अध्‍यक्ष के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान चार प्राथमिकताएं तय की हैं. इनमें भावी महामारियों से निपटने की तैयारियों के साथ कोरोना संक्रमण से उबरने में विश्‍व का नेतृत्‍व करना है, खुशहाल भविष्‍य के लिए स्‍वतंत्र और निष्‍पक्ष व्‍यापार को बढ़ावा देना, जलवायु परिवर्तन की समस्‍या का समधान और जैव विविधता का संरक्षण करना तथा साझा मूल्‍यों और मुक्‍त समाज का समर्थन करना है.

G7 संगठन: तथ्यों पर एक दृष्टि

  • ‘G7’ सात विकसित देशों का समूह है जिसमें ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमरीका सदस्य देश हैं. भारत उन कुछ देशों में शामिल है जिन्‍हें शिखर सम्‍मेलन में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है.
  • गठन: वर्ष 1975 में फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति वैलेरी जिस्कार्ड डी एस्टेइंग के आह्वान पर विश्व के सर्वाधिक औद्योगीकृत, लोकतांत्रिक एवं गैर-समाजवादी 6 राष्ट्रों- फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, जर्मनी, एवं जापान ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक बैठक का आयोजन किया जिसमें इस समूह का गठन हुआ.
  • कनाडा सदस्य बना: वर्ष 1976 में कनाडा को इस समूह में शामिल कर लिया गया. कनाडा की सहभागिता के पश्चात यह समूह ‘G7’ के नाम से जाना जाने लगा.
  • रूस सदस्य बना: वर्ष 1994 में ‘G7’ में रूस के शामिल होने से यह समूह ‘G8’ के नाम से जाना गया.
  • रूस निलंबित: 27 मार्च, 2014 को इस संगठन से रूस को अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया गया. अब यह समूह पुनः ‘G7’ के नाम से जाना जाने लगा है.
  • मुख्यालय: ‘G7’ एक अनौपचारिक संगठन है जिसका कोई मुख्यालय अथवा सचिवालय नहीं है. इसके अध्यक्ष का चयन रोटेशन प्रणाली के आधार पर होता है.
  • अर्थशास्त्र: ‘G7’ देश में विश्व की जनसंख्या का 10.3% लोग रहते हैं. सदस्य देशों की GDP विश्व के GDP का 32.2% है, जबकि विश्व के निर्यात में 34.1% तथा आयात में 36.7% हिस्सा है.

जी-7 ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर 15 प्रतिशत वैश्विक कर लगाने के समर्थन का फैसला किया

विश्व के वि‍कसि‍त देशों के संगठन जी-7 ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर 15 प्रतिशत वैश्विक न्यूनतम कर लगाने के ऐतिहासिक समझौते के समर्थन का फैसला किया है. लंदन में जी-7 के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में यह भी सहमति हुई. ब्रिटेन के वित्त मंत्री ऋषि सुनाक ने कल इस समझौते की घोषणा की.

मुख्य बिंदु

  • समझौते के अनुसार जिन देशों में कंपनियों के उत्पादों की बिक्री होती है, उन देशों को कंपनी के मुनाफे पर कम से कम 20 प्रतिशत कर लेने का अधिकार होगा. बड़ी और ज्यादा मुनाफा कमाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर अलग से 10 प्रतिशत कर लगाया जा सकता है.
  • जी-7 के मंत्रियों में यह भी सहमति हुई है कि कंपनियों की गतिविधियों से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि निवेशक फैसला कर सकें कि उन्हें कंपनियों में निवेश करना है या नहीं.
  • जी-7 के मंत्रियों ने कहा कि वे अलग-अलग देशों के आधार पर कम से कम 15 प्रतिशत वैश्विक न्यूनतम कर लागू कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

G-7 समूह देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक लन्दन में आयोजित की गयी

दुनिया के सात सर्वाधिक विकसित देशों के समूह G-7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक 5-6 मई को लन्दन में आयोजित की गयी. इस बैठक में मेज़बान ब्रिटेन के अलावा अमरीका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और जापान ने हिस्सा लिया. भारत को इस बैठक में अतिथि देश के रूप में आम‍ंत्रित किया गया था. विदेशमंत्री डॉ एस जयशंकर ने इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया.

इस बैठक में G-7 शिखर बैठक 2021 के लिए माहौल तैयार किया गया. यह बैठक जून 2021 में दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड के कॉर्नवाल में आयोजित क्या जायेगा. अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडेन राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार किसी अन्तर्राष्ट्रीय बैठक में शामिल होंगे.

G-7 समूह के विदेश मंत्रियों की बैठक: मुख्य बिंदु

  • बैठक में चीन, रूस और कोरोना महामारी को इस समय की सबसे बड़ी चुनौती माना गया. कोविड महामारी का एकमात्र स्थायी समाधान टीकाकरण बताया गया. वे सस्ती कोरोना वैक्सीन के लिए मिलकर काम करेंगे.
  • बैठक में जलवायु परिवर्तन और महामारी के बाद की स्थिति सहित दुनिया के सबसे अधिक ज्वलंत, भौगोलिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई.
  • ईरान से उन विदेशी और दोहरी नागरिकता वाले लोगों को रिहा करने का आह्वान किया, जिन्हें ईरानी जेलों में मनमाने ढंग से रखा गया है.
  • जी -7 चीन की प्रतिरोधी आर्थिक नीतियों को रोकने और रूस की भ्रामक सूचनाओं का मुकाबला करने के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देगा. समूह ने म्‍यांमा की सैन्‍य सरकार पर नयी पाबंदियां लगाने की भी चेतावनी दी.

ब्रिटेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 46वें G-7 शिखर सम्‍मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया

ब्रिटेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को G-7 शिखर सम्‍मेलन में अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है. यह बैठक जून 2021 में होगी. ब्रिटेन के उच्चायोग के अनुसार ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भी G-7 शिखर बैठक से पहले भारत की यात्रा पर आ सकते हैं. इससे पहले श्री जॉनसन ने ब्रिटेन में कोरोना वायरस की स्थिति के कारण भारत की यात्रा रद्द कर दी थी.

G-7 का विस्तार कर D-10 किये जाने का प्रस्ताव

इस वर्ष G-7 का विस्तार भी होने वाला है, जिसमें 10 लोकतांत्रिक देश शामिल होंगे और इसका नाम D-10 कर दिया जाएगा. D-10 दस लोकतांत्रिक देशों को दर्शाता है.

2021 में होने वाले 46वें G-7 शिखर सम्मेलन की मेजवानी ब्रिटेन कर रहा है. ब्रिटेन ने भारत, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया को G-7 राष्ट्रों के साथ शामिल करने का प्रस्ताव दिया है. इससे पहले अमेरिका ने भारत, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के साथ रूस को भी शामिल करने का प्रस्ताव दिया था.

G-7 क्या है?

G-7 दुनिया की सात सबसे विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है. इसके सदस्य देशों में अमरीका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं. चीन दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवथा है, फिर भी वो इस समूह का हिस्सा नहीं है. इसकी वजह यहां प्रति व्यक्ति आय संपत्ति जी-7 समूह देशों के मुक़ाबले बहुत कम है.

शुरुआत में यह छह देशों का समूह था, जिसकी पहली बैठक 1975 में हुई थी. बाद में कनाडा इस समूह में शामिल हो गया और इस तरह यह G-7 बन गया. 1998 में G-7 में रूस भी शामिल हो गया था और यह जी-7 से जी-8 बन गया था. लेकिन साल 2014 में यूक्रेन से क्रीमिया हड़प लेने के बाद रूस को समूह से निलंबित कर दिया गया.

भारत को 46वें G-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण, जानिए क्या है G-7

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भारत को 2021 में होने वाले 46वें G-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस सिलसिले में एक पत्र लिखा है. भारत की यात्रा पर आये ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमनिक राब ने श्री मोदी से मुलाकात कर उन्हें यह पत्र सौंपा. प्रधानमंत्री ने निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है.

G-7 का विस्तार कर D-10 किये जाने का प्रस्ताव

इस वर्ष G-7 का विस्तार भी होने वाला है, जिसमें 10 लोकतांत्रिक देश शामिल होंगे और इसका नाम D-10 कर दिया जाएगा. D-10 दस लोकतांत्रिक देशों को दर्शाता है.

2021 में होने वाले 46वें G-7 शिखर सम्मेलन की मेजवानी ब्रिटेन कर रहा है. ब्रिटेन ने भारत, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया को G-7 राष्ट्रों के साथ शामिल करने का प्रस्ताव दिया है. इससे पहले अमेरिका ने भारत, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के साथ रूस को भी शामिल करने का प्रस्ताव दिया था.

G-7 क्या है?

G-7 दुनिया की सात सबसे विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है. इसके सदस्य देशों में अमरीका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं. चीन दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवथा है, फिर भी वो इस समूह का हिस्सा नहीं है. इसकी वजह यहां प्रति व्यक्ति आय संपत्ति जी-7 समूह देशों के मुक़ाबले बहुत कम है.

शुरुआत में यह छह देशों का समूह था, जिसकी पहली बैठक 1975 में हुई थी. बाद में कनाडा इस समूह में शामिल हो गया और इस तरह यह G-7 बन गया. 1998 में G-7 में रूस भी शामिल हो गया था और यह जी-7 से जी-8 बन गया था. लेकिन साल 2014 में यूक्रेन से क्रीमिया हड़प लेने के बाद रूस को समूह से निलंबित कर दिया गया.

G7 देशों की 45वीं शिखर बैठक फ्रांस के बियारिट्ज में आयोजित किया गया

G7 देशों की 45वीं शिखर बैठक फ्रांस के बियारिट्ज में 24 से 26 अगस्त 2019 को आयोजित की गयी. फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैन्युअल मैक्रॉं ने इस शिखर बैठक की अध्यक्षता की. इस वार्षिक सम्‍मेलन में सभी सदस्‍य देश – फ्रांस, इटली, कनाडा, अमरीका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन के नेता ने हिस्‍सा लिया.

शिखर सम्‍मेलन में विश्‍व के नेता जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, विश्‍व व्‍यापार के बदलते परिदृश्‍य में असमानताएं और व्‍यापार सहित विभिन्‍न मुद्दों पर विचार विमर्श किया. जलवायु के मुद्दे पर हुई चर्चा में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप शामिल नहीं हुए. अमेरिका वर्ष 2015 के पैरिस जलवायु समझौते को भेद-भाव पूर्ण बताकर अलग हो गया था.

45वीं G7 में भारत को आमंत्रित किया गया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने इस सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधिव किया. हालांकि, भारत G7 समूह का हिस्सा नहीं है लेकिन फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुअल मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी को व्यक्तिगत तौर पर आमंत्रित किया था.

प्रधानमंत्री मोदी ने शिखर सम्मेलन में जलवायु, जैव विविधता और महासागर से संबंधित सत्र को सम्‍बोधित किया और इन मुद्दों पर भारत की चिंताएं सामने रखा. उन्होंने कहा कि भारत का एकबार इस्तेमाल में आनेवाली प्लास्टिक को खत्म करने, पानी के संरक्षण, सौर ऊर्जा का उपयोग, स्थायी भविष्य के लिए वनस्पतियों और जीवों की रक्षा करने की दिशा में बड़े पैमाने पर प्रयास कर रहा है. इस सत्र में जी-7 देशों के प्रमुख और विशेष आमंत्रित देशों के सदस्य हिस्सा ले रहे हैं.

श्री मोदी इस सम्‍मेलन से इतर इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, सेनेगल के राष्ट्रपति मैकी सॉल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल कई द्विपक्षीय बैठकें की.

इंग्लैंड: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. इस दौरान दोनों नेताओं ने व्‍यापार, निवेश, रक्षा और शिक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की.

अमेरिका: G7 शिखर सम्मेलन से इतर भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका को दो टूक जवाब देते हुए कहा भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं जिसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के लिए कोई गुंजाइश नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका लोकतांत्रिक मूल्यों वाले देश हैं और दोनों देश दुनिया की भलाई के लिए मिलकर काम कर रहे हैं. भारत- पाकिस्तान मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच विभिन्न मुद्दों को आपसी बातचीत के जरिए सुलझाने का भरोसा जताया. हालांकि पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने स्पष्ट कर दिया कि भारत और पाकिस्तान मिलकर अपनी समस्याओं पर चर्चा भी कर सकते हैं और समाधान भी कर सकते हैं. सम्मेलन में G7 देशों ने आग से निपटने के लिए संयुक्‍त रूप से 2 करोड़ डॉलर खर्च करने का निर्णय किया.

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव: प्रधानमंत्री और संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव के बीच कई मुद्दों पर सकारात्‍मक बातचीत हुई. दोनों नेताओं ने संयुक्‍त राष्‍ट्र में जलवायु शिखर सम्‍मेलन में भारत की सहभागिता और आपसी हित के अन्‍य मुद्दों पर विचार-विमर्श किया.

अमेजॉन के जंगलों में लगी आग से निपटने का संकल्‍प

G7 देशों ने अमेजॉन के जंगलों में लगी आग से निपटने और नुकसान की भरपाई करने का संकल्‍प लिया है. फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि शिखर सम्‍मेलन में शामिल नेता ब्राजील की मदद के लिए किसी समझौते पर सहमत होने के करीब हैं. जर्मनी की चांसलर अंगोला मर्केल ने कहा कि आग का प्रभाव विश्‍वव्‍यापी है, इसलिए जी-7 देशों को मिलकर इसका समाधान ढूंढना चाहिए.

G7 संगठन: तथ्यों पर एक दृष्टि

  • ‘G7’ सात विकसित देशों का समूह है जिसमें ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमरीका सदस्य देश हैं. भारत उन कुछ देशों में शामिल है जिन्‍हें शिखर सम्‍मेलन में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है.
  • गठन: वर्ष 1975 में फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति वैलेरी जिस्कार्ड डी एस्टेइंग के आह्वान पर विश्व के सर्वाधिक औद्योगीकृत, लोकतांत्रिक एवं गैर-समाजवादी 6 राष्ट्रों- फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, जर्मनी, एवं जापान ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक बैठक का आयोजन किया जिसमें इस समूह का गठन हुआ.
  • कनाडा सदस्य बना: वर्ष 1976 में कनाडा को इस समूह में शामिल कर लिया गया. कनाडा की सहभागिता के पश्चात यह समूह ‘G7’ के नाम से जाना जाने लगा.
  • रूस सदस्य बना: वर्ष 1994 में ‘G7’ में रूस के शामिल होने से यह समूह ‘G8’ के नाम से जाना गया.
  • रूस निलंबित: 27 मार्च, 2014 को इस संगठन से रूस को अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया गया. अब यह समूह पुनः ‘G7’ के नाम से जाना जाने लगा है.
  • मुख्यालय: ‘G7’ एक अनौपचारिक संगठन है जिसका कोई मुख्यालय अथवा सचिवालय नहीं है. इसके अध्यक्ष का चयन रोटेशन प्रणाली के आधार पर होता है.
  • अर्थशास्त्र: ‘G7’ देश में विश्व की जनसंख्या का 10.3% लोग रहते हैं. सदस्य देशों की GDP विश्व के GDP का 32.2% है, जबकि विश्व के निर्यात में 34.1% तथा आयात में 36.7% हिस्सा है.