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पूर्वोत्तर परिषद का 69वां पूर्ण अधिवेशन शिलांग में आयोजित किया गया

पूर्वोत्तर परिषद के 69वें पूर्ण अधिवेशन (69th Plenary Meeting of the North Eastern Council) का आयोजन 23-24 जनवरी को मेघालय के शिलांग में आयोजित किया गया. इस अधिवेशन में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय, पूर्वोत्तर परिषद, क्षेत्र की राज्य सरकारें के साथ-साथ विभिन्न विकासात्मक पहल और भविष्य की योजनाओं के कार्यों से जुड़े, चुने हुए केन्द्रीय मंत्रालयों के प्रेजेन्टेशन दिखाए गये.

अधिवेशन की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह ने की. अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के बहुत से क्षेत्र अभी विकसित नहीं हो पाए हैं. इसके लिए कैबिनेट ने तय किया है कि परिषद को आवंटित राशि का 30 फीसद हिस्सा विकास कार्यो पर खर्च किया जाए.

पूर्वोत्तर परिषद: मुख्य बिंदु

  • पूर्वोत्तर (उत्तर-पूर्वी) परिषद, पूर्वोत्तर राज्यों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए नोडल एजेंसी है. इस परिषद में आठ राज्य- अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा शामिल हैं.
  • पूर्वोत्तर परिषद के अधिवेशन में विभिन्‍न विकास परियोजनाओं की समीक्षा की जाती है. केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस परिषद के अध्यक्ष और केन्‍द्रीय पूर्वोत्‍तर विकास मंत्री जितेन्‍द्र सिंह इसके उपाध्‍यक्ष हैं.

राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला द्वारा राष्ट्रीय माप पद्धति सम्‍मेलन का आयोजन

राष्ट्रीय माप पद्धति सम्‍मेलन (National Metrology Conclave) 2021 का हाल ही में आयोजन किया गया था. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 4 जनवरी को  इस सम्मलेन का वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उद्घाटन किया था. इस सम्मलेन का आयोजन वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR-NPL) द्वारा किया गया था.

यह आयोजन राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL) की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया गया था. सम्‍मेलन का विषय- ‘राष्‍ट्र के समावेशी विकास के लिए माप पद्धति’ (Metrology for the Inclusive Growth of the Nation) था.

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर राष्ट्रीय परमाणु समय मापक (नेशनल एटॉमिक टाइमस्‍केल) और भारतीय निर्देशक द्रव्य राष्ट्र को समर्पित किया और राष्ट्रीय पर्यावरण संबंधी मानक प्रयोगशाला की आधारशिला भी रखी थी.

नेशनल एटॉमिक टाइमस्‍केल, भारतीय मानक समय को 2.8 नैनोसेकंड की सटीकता के साथ दर्शाता है. भारतीय निर्देशक द्रव्‍य का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रयोगशालाओं को गुणवत्ता आश्वासन उपलब्‍ध कराना है. राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला औद्योगिक उत्सर्जन निगरानी उपकरणों के प्रमाणीकरण में आत्मनिर्भरता हासिल करने में सहायता करेगी.

राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला: एक दृष्टि

राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला (NPL) नई दिल्ली में स्थित है. यह प्रयोगशाला वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के अधीन है. यह भारत में SI मापन पद्धति का अनुरक्षण करती है.

छठा भारत अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव 2020 आयोजित किया गया

छठा भारत अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) 2020 का आयोजन 22-25 दिसम्बर को वर्चुअल माध्यम से किया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महोत्‍सव का उद्घाटन किया था. इस महोत्सव का आयोजन दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड डेवलपमेंट स्टडीज (NISTADS) ने किया था. IISF 20200 का लक्ष्य युवाओं में 21वीं शताब्दी के कौशल विकसित करना था.

इस वर्ष IISF-2020 की शुरुआत प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के जन्म दिवस 22 दिसंबर को की गयी थी, जबकि इसका समापन 25 दिसंबर को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस के अवसर पर हुआ था.

भारत अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF)

समाज में वैज्ञानिक मानसिकता को बढ़ावा देने के लिये विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने विज्ञान भारती के साथ मिलकर वर्ष 2015 में भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) की परिकल्‍पना की थी. इस वर्ष IISF का छठा संस्करण था.

IISF का उद्देश्य आम लोगों को विज्ञान के साथ जोड़ना है. साथ ही इस सोच को विकसित करना है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित लोगों के जीवन में सुधार लाने में किस तरह सहायक हो सकते हैं. इस महोत्सव का दीर्घकालिक उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान का अध्ययन करने के लिए प्रेरित करना है.

अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव 2020 में कुल 20 फिल्मों को पुरस्कार दिए गये

अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) 2020 में देश एवं दुनिया की कुल 20 फिल्मों को पुरस्कार दिए गये. इनमें छह फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय और 14 फिल्मों को राष्ट्रीय श्रेणी में पुरस्कृत किया गया.

मुख्य पुरस्कार: एक दृष्टि

अंतराष्ट्रीय श्रेणी
‘आत्मनिर्भर भारत और/या विश्व कल्याण के लिए विज्ञान’ विषय पर केंद्रित फिल्म का सर्वोच्च पुरस्कार जर्मनी के अंग्रेजी भाषा की फिल्म ‘द इंस़ेक्ट रेस्क्यूअर्स’ को दिया गया.

‘विज्ञान तथा कोविड-19 पर जागरूकता और अन्य स्वास्थ्य आपात स्थितियां’ विषय पर केंद्रित समारोह का सर्वोच्च पुरस्कार ईरान के अश्कान हतामी द्वारा निर्देशित पारसी भाषा की फिल्म ‘नाइट नर्स’ को मिला है.

राष्ट्रीय श्रेणी
स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं द्वारा निर्मित फिल्मों में अंग्रेजी फिल्म ‘द ट्रायल्स ऐंड ट्रिअम्फ्स ऑफ जीएन रामचंद्रन’ को ‘आत्मनिर्भर भारत और/या वैश्विक कल्याण के लिए विज्ञान’ विषय पर समारोह का सर्वोच्च पुरस्कार मिला है. इस फिल्म का निर्माण विवेक कन्नादी और निर्देशन राहुल अय्यर ने किया है.

‘कोविड-19 जागरूकता तथा विज्ञान और अन्य स्वास्थ्य आपात स्थितियां’ विषय पर हिंदी फिल्म ‘राजा, रानी और वायरस’ को स्वतंत्र फिल्मकारों की श्रेणी में समारोह का सर्वोच्च पुरस्कार दिया गया. इस फिल्म का निर्माण बीकन टेलीविजन ने और निर्देशन सीमा मुरलीधरा ने किया है.

इन दोनों पुरस्कारों के रूप में प्रत्येक को एक लाख रुपये नकद, ट्रॉफी और प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाता है.

इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2020 का आयोजन किया गया

इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2020 का आयोजन 8-10 दिसम्बर को वर्चुअल माध्यम से किया गया. यह IMC का चौथा संस्करण था. इसका आयोजन दूरसंचार विभाग और सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) द्वारा किया गया था. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसके उद्घाटन सत्र को सम्‍बोधित किया था.

IMC 2020 का विषय ‘समावेशी नवाचार – स्मार्ट, सुरक्षित और स्थायी’ (Inclusive Innovation – Smart, Secure, Sustainable) है. इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल समावेशन और स्थाई विकास, उद्यमिता और नवाचार के लक्ष्यों को आगे बढ़ाना था. इन लक्ष्यों में दूरसंचार और उभरते हुए प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में विदेशी और स्थानीय निवेश आकर्षित करना और अनुसंधान तथा विकास को प्रोत्साहित करना भी शामिल था.

इस कार्यक्रम में विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारी, दूरसंचार और वैश्विक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और 5G, आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थींग्स, डेटा एनेलेटिक्स, क्लाउड और ऐज कमप्यूटिंग, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा, स्मार्ट शहर और ओटोमेशन जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया.

इंडिया ग्‍लोबल वीक वर्चुअल सम्मेलन आयोजित किया गया

‘इंडिया ग्‍लोबल वीक’ 2020 वर्चुअल सम्मेलन का आयोजन 9-11 जुलाई को किया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन का उद्घाटन किया था.

इस सम्मेलन में तीस देशों से करीब पांच हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. इस सम्मेलन का विषय- ‘पुन: प्रवर्तक बनें : भारत और बेहतर नया विश्‍व’ (Be The Revival: India and a Better New World) था.

प्रधानमंत्री के अलाबा इस आयोजन में भाग लेने वाले अन्य गणमान्‍य वक्ताओं में विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर, रेल, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, ब्रिटेन के विदेश मंत्री डॉमिनिक राब और गृह सचिव प्रीति पटेल, भारत में अमेरिकी राजदूत केन जस्टर और अन्य शामिल थे.

इस वर्चुअल सम्मेलन में आत्म निर्भार भारत अभियान पर “never-seen-before” कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया जिसमें सुप्रसिद्ध सितार वादक पंडित रविशंकर के 100वें जन्‍मदिन पर उन्‍हें श्रद्धांजलि अर्पित की गयी.

सेना के कमाण्‍डरों का सम्‍मेलन नई दिल्‍ली में आयोजित किया गया

सेना के कमाण्‍डरों के सम्‍मेलन का पहला चरण 27 से 29 मई तक नई दिल्‍ली में आयोजित किया गया था. सम्‍मेलन में थल सेना के शीर्ष अधिकारियों ने सुरक्षा संबंधी मौजूदा और नई उभरती चुनौतियों के विभिन्‍न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया.

मानव संसाधन प्रबंधन संबंधी मुद्दों, गोली-बारूद के प्रबंधन संबंधी अध्‍ययन, एक ही स्‍थान पर स्थित प्रशिक्षण संगठनों का विलय करने और सैन्‍य प्रशिक्षण निदेशालय के मुख्‍यालय सेना प्रशिक्षण कमान में विलय के बारे में भी सम्‍मेलन में चर्चा हुई.

सेना के कमाण्‍डरों का सम्‍मेलन: एक दृष्टि

सेना के कमाण्‍डरों का सम्‍मेलन प्रत्येक दो वर्ष में आयोजित किया जाता है. यह सम्मलेन अप्रैल 2020 में आयोजित किया जाना था लेकिन COVID-19 आपातकाल के कारण आयोजित नहीं किया जा सका था. इस सम्‍मेलन को दो चरणों में कराने का निर्णय लिया गया था. इसका दूसरा चरण 24 से 27 जून तक आयोजित किया जाएगा.

प्रधानमंत्री ने ग्राम सरपंचों को वीडियो कान्‍फ्रेसिंग के जरिए सम्‍बोधित किया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 24 अप्रैल को राष्‍ट्रीय पंचायत राज दिवस पर देश-भर के ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और सरपंचों को वीडियो कान्‍फ्रेसिंग के जरिए सम्‍बोधित किया.

उन्होंने अपने संबोधन में कोरोना वायरस से निपटने में ग्रामीण भारत के योगदान की सराहना की. श्री मोदी ने गांव, जिला, और देश को अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए अपने-अपने स्तर पर आत्मनिर्भर बनने की बात कही.

एकीकृत ई-ग्राम स्‍वराज पोर्टल और मोबाइल ऐप

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक एकीकृत ई-ग्राम स्‍वराज पोर्टल और मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया. यह एकीकृत पोर्टल पंचायती राज मंत्रालय की एक नई पहल है. इससे ग्राम पंचायतों को अपनी विकास योजनाएं बनाने और लागू करने में सहायता मिलेगी.

यह निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने में भी महत्त्वपूर्ण कदम साबित होगा. ये भविष्‍य में ग्राम पंचायत के अलग-अलग कामों का लेखा-जोखा रखने वाला सिंगल प्‍लेटफॉर्म (सिम्‍पलीफाईड वर्क वेट अकाउंटिंग एप्‍लीकेशन फॉर पंचायती राज) बनेगा.

स्वामित्व योजना की शुरूआत

उन्होंने छह राज्‍यों के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रायोगिक तौर पर ‘स्वामित्व योजना’ की शुरूआत की. इस योजना का उद्देश्य संपत्ति को लेकर भ्रम और झगड़े को खत्म करना है. पढ़ें पूरा आलेख…»

पूर्वी क्षेत्रिय परिषद की 24वीं बैठक ओडिसा के भुवनेश्वर में आयोजित की गयी

पूर्वी क्षेत्रिय परिषद की 24वीं बैठक 28 फरवरी को ओडिसा में भुवनेश्वर में आयोजित की गयी. गृहमंत्री अमित शाह ने इस बैठक की अध्यक्षता की. ओडिसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक बैठक के उपाध्यक्ष थे.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, ओड़िसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने इस बैठक में हिस्सा लिया. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जगह राज्य के वित्तमंत्री रामेश्वर ओराम बैठक में शामिल हुए.

बैठक में विभिन्न राज्यों के बीच पानी से जुड़े विवाद, बिजली की लाइनों, कोयला खदानों पर रॉयल्टी, रेल परियोजनाओं के लिए भूमि और वन संबंधी मंजूरी, जघन्य अपराधों की जांच, सीमावर्ती राज्यों में पशुओं की तस्करी, दूर-दराज के क्षेत्रों में दूरसंचार और बैंकिंग संबंधी बुनियादी ढांचे के अभाव सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई.

सम्‍मेलन में राज्‍यों के प्रमुख मुद्दों और अन्तर्राज्यी तथा केन्‍द्र-राज्‍य संबंधों पर चर्चा की गई. ओडिसा के मुख्‍यमंत्री नवीन पटनायक ने पूर्वी क्षेत्र के राज्‍यों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की. पटनायक ने कहा कि पूर्वी क्षेत्र के राज्‍यों को दी जाने वाली केन्‍द्रीय राशि को दोगुना किये जाने की जरूरत है, ताकि वे राष्‍ट्रीय मानदंड के स्‍तर तक पहुंच सकें.

क्षेत्रिय परिषदें: एक दृष्टि

केंद्र एवं राज्‍यों के बीच मिलकर काम करने की संस्कृति विकसित करने के उद्देश्‍य से 1956 में राज्‍य पुनर्गठन कानून (States Reorganisation Act) संसद द्वारा पारित किया गया था. इस कानून के तहत 5 क्षेत्रिय परिषदें स्थापित की गई थीं. ये क्षेत्रिय परिषदें हैं:

  1. उत्तरी क्षेत्रिय परिषद: इसमें हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, पंजाब, राजस्थान राज्य, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ शामिल हैं.
  2. मध्य क्षेत्रिय परिषद: मध्य क्षेत्रिय परिषद में छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश राज्य शामिल हैं.
  3. पूर्वी क्षेत्रिय परिषद: पूर्वी क्षेत्रिय परिषद में बिहार, झारखंड, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल को रखा गया है.
  4. पश्चिमी क्षेत्रिय परिषद: इसमें गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र राज्य और संघ राज्य क्षेत्र दमन और दीव और दादरा और नगर हवेली है.
  5. दक्षिणी क्षेत्रिय परिषद: इसमें आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलाडु, राज्य और संघ राज्य क्षेत्र पुद्दुचेरी शामिल हैं.

पूर्वोत्तर परिषद: पूर्वोत्तर के राज्यों को पूर्वोत्तर परिषद अधिनियम (North Eastern Council Act), 1972 के तहत गठित पूर्वोत्तर परिषद में रखा गया है.

केंद्रीय गृहमंत्री सभी क्षेत्रिय परिषदों का अध्यक्ष और प्रत्येक आंचलिक परिषद में शामिल किये गए राज्यों के मुख्यमंत्री एक वर्ष की अवधि (बारी-बारी रोटेशन से) के लिये उस क्षेत्रिय परिषद का उपाध्यक्ष होता है.

नीति आयोग ने गुवाहाटी में SDG पर सम्‍मेलन 2020 का आयोजन किया, जानिए क्या SDG

नीति आयोग 24 से 26 फरवरी तक गुवाहाटी में सतत विकास लक्ष्‍य (Sustainable Development goals- SDG): पूर्वोत्‍तर राज्यों की भागीदारी, सहयोग और विकास सम्‍मेलन 2020 का आयोजन किया. सम्‍मेलन का उद्घाटन पूर्वोत्‍त्‍र राज्‍यों के सभी मुख्‍यमंत्रियों और अन्य प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया गया था.

SDG कार्यक्रम में उत्‍तर-पूर्व राज्‍यों, केन्‍द्रीय मंत्रालयों,‍ शिक्षाविदों नागरिक समाज और अन्तर्राष्ट्रीय विकास संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्‍सा लिया. इस कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों में उत्‍तर-पूर्व में एसडीजी स्‍थानीयकरण, आर्थिक समृद्धि और स्‍थायी आजीविका, जलवायु अनुकूल कृषि, स्‍वास्‍थ्‍य और पोषण जैसे मुद्दे शामिल थे.

सतत विकास लक्ष्‍य (SDG): एक दृष्टि

  • सतत विकास लक्ष्‍य (Sustainable Development Goals) वैश्विक विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय किये गये लक्ष्य हैं. संयुक्त राष्ट्र ने इन लक्ष्यों को प्राप्त करने की समय-सीमा 2030 तय की है.
  • 2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की 70वीं बैठक में ‘2030 सतत् विकास हेतु एजेंडा’ के तहत सदस्य देशों द्वारा 17 विकास लक्ष्य अर्थात् SDG (Sustainable Development goals) तय किये गए थे.
  • SDG का मुख्य उद्देश्य विश्व से गरीबी को पूर्णतः खत्म करना तथा सामाजिक न्याय और पूर्ण समानता स्थापित करना है.
  • भारत में 2030 तक SDG को प्राप्त करने की जिम्मेदारी नीति आयोग को दी गयी है.

संयुक्त राष्ट्र का 17 विकास लक्ष्य (SDG)

  1. गरीबी के सभी रूपों की पूरे विश्व से समाप्ति.
  2. भूख की समाप्ति, खाद्य सुरक्षा और बेहतर पोषण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा.
  3. सभी आयु के लोगों में स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वस्थ जीवन को बढ़ावा.
  4. समावेशी और न्यायसंगत गुणवत्तायुक्त शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही सभी को सीखने का अवसर देना.
  5. लैंगिक समानता प्राप्त करने के साथ ही महिलाओं और लड़कियों को सशक्त करना.
  6. सभी के लिये स्वच्छता और पानी के सतत् प्रबंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना.
  7. सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा तक पहुँच सुनिश्चित करना.
  8. सभी के लिये निरंतर समावेशी और सतत् आर्थिक विकास, पूर्ण और उत्पादक रोज़गार तथा बेहतर कार्य को बढ़ावा देना.
  9. लचीले बुनियादी ढाँचे, समावेशी और सतत् औद्योगीकरण को बढ़ावा.
  10. देशों के बीच और भीतर असमानता को कम करना.
  11. सुरक्षित, लचीले और टिकाऊ शहर और मानव बस्तियों का निर्माण.
  12. स्थायी खपत और उत्पादन पैटर्न को सुनिश्चित करना.
  13. जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों से निपटने के लिये तत्काल कार्रवाई करना.
  14. स्थायी सतत् विकास के लिये महासागरों, समुद्रों और समुद्री संसाधनों का संरक्षण और उपयोग.
  15. सतत् उपयोग को बढ़ावा देने वाले स्थलीय पारिस्थितिकीय प्रणालियों, सुरक्षित जंगलों, भूमि क्षरण और जैव-विविधता के बढ़ते नुकसान को रोकने का प्रयास करना.
  16. सतत् विकास के लिये शांतिपूर्ण और समावेशी समितियों को बढ़ावा देने के साथ ही साथ सभी स्तरों पर इन्हें प्रभावी, जवाबदेहपूर्ण बनाना ताकि सभी के लिये न्याय सुनिश्चित हो सके.
  17. सतत् विकास के लिये वैश्विक भागीदारी को पुनर्जीवित करने के अतिरिक्त कार्यान्वयन के साधनों को मजबूत बनाना.

श्री राम जन्‍मभूमि न्‍यास की पहली बैठक, नृपेंद्र मिश्रा मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख होंगे

अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए गठित ‘श्री राम जन्‍मभूमि न्‍यास’ की पहली बैठक 19 फरवरी को नई दिल्ली में हुई. इस बैठक में महंत नृत्य गोपाल दास को इस न्‍यास (ट्रस्‍ट) का अध्यक्ष और चंपत राय को महासचिव बनाया गया है. पन्‍द्रह सदस्यीय न्‍यास का गठन नवंबर 2019 में अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन में किया गया है.

मंदिर निर्माण समिति का गठन

श्री राम जन्‍मभूमि न्‍यास की पहली बैठक में मंदिर निर्माण के बारे में निर्णय लेने के लिए ‘मंदिर निर्माण समिति’ बनाये जाने का फैसला लिया गया. इस समिति के प्रमुख नृपेंद्र मिश्रा होंगे. नृपेंद्र मिश्रा प्रधानमंत्री मोदी के पूर्व प्रधान सचिव हैं. साथ ही गोविंद देवगिरि को इस समिति कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

मंदिर निर्माण समिति अपनी रिपोर्ट रखेगी. इसी रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट की अयोध्या बैठक में मंदिर निर्माण की तारीख तय की जाएगी. भवन निर्माण समिति सभी प्रशासनिक और अन्य कार्यों के लिए विशेषज्ञों के साथ मिलकर निर्णय करेगी.

11वीं रक्षा प्रदर्शनी 2020 लखनऊ में आयोजित किया गया, 5वीं भारत-रूस रक्षा उद्योग बैठक


रक्षा मंत्रालय के 11वीं रक्षा प्रदर्शनी (11th DefExpo India) 2020 का आयोजन लखनऊ में 5 से 8 फरवरी तक किया गया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस प्रदर्शनी के समापन सत्र की अध्‍यक्षता की. यह अब तक का सर्वश्रेष्‍ठ आयोजन रहा. इस रक्षा प्रदर्शनी में दो सौ से अधिक प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण के समझौता ज्ञापनों पर हस्‍ताक्षर किए गए और कई रक्षा उत्‍पाद जारी किए गए.

हर दूसरे वर्ष आयोजित होने वाली यह 11वीं रक्षा प्रदर्शनी थी. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया था. 70 से ज्‍यादा देशों के 1000 से अधिक कंपनियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया. रक्षा प्रदर्शनी-2020 के दौरान लखनऊ में ‘पहला भारत-अफ्रीका रक्षा सम्‍मेलन’ और ‘5वीं भारत-रूस रक्षा उद्योग बैठक’ भी आयोजन किया गया था.

5वीं भारत-रूस रक्षा उद्योग बैठक, 14 समझौता ज्ञापनों पर हस्‍ताक्षर

लखनऊ में रक्षा प्रदर्शनी-2020 के दौरान ‘5वीं भारत-रूस रक्षा उद्योग बैठक’ आयोजित किया गया. इस बैठक में दोनों देशों के बीच 14 समझौता ज्ञापनों पर हस्‍ताक्षर किये गये. जो प्रमुख कंपनियां इन समझौता-पत्रों का हिस्सा बनी उनमें भारत की तरफ से BHEL, भारत डायनामिक्स लिमिटेड और विस्टा कंट्रोल शामिल थीं वहीं रूस की ओर से इमवर्शिया, यूवी जेड, और BEML शामिल रहीं.

यह समझौता-पत्र विभिन्न रक्षा साजो-सामान के उत्पादन से जुड़े हुए थे जिनमें T-72, T-90, राडार सिस्टम, ASB रॉकेट लॉन्चर और 3D मॉडलिंग के पुर्जे शामिल है.

आगामी 5 वर्षों में 5 बिलियन डॉलर के रक्षा निर्यात का लक्ष्य

रक्षा प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अगले पांच वर्षों में पांच अरब डॉलर (35 हज़ार करोड़ रुपये) के रक्षा निर्यात का लक्ष्य तय किया है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में भारत का रक्षा उपकरण निर्यात लगभग दो हजार करोड़ रुपये था. पिछले दो वर्षों में यह बढ़कर 17 हज़ार करोड़ रुपये हो गया है.

रायसीना डायलॉग के पांचवे संस्करण का आयोजन दिल्ली में किया गया

रायसीना डायलॉग के पांचवे संस्करण का आयोजन 14 से 16 जनवरी तक दिल्ली में किया गया. इसकी मेजबानी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने किया था. इस सम्‍मेलन का विषय ‘नेविगेटिंग द अल्‍फा सेंच्‍युरी’ था. इसका आयोजन विदेश मंत्रालय और ऑबजर्वर रिसर्च फाउंडेशन ने संयुक्‍त रूप से किया था. सम्‍मेलन सौ से अधिक देशों के करीब सात सौ अंतर्राष्‍ट्रीय प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सम्‍मेलन के उद्घाटन सत्र में भाग लिया था. न्‍यूजीलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री हेलन क्‍लार्क, अफगानिस्‍तान के पूर्व राष्‍ट्रपति हामिद करजई, कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री स्‍टीफन हार्पर, स्‍वीडन के पूर्व प्रधानमंत्री कार्ल बिल्‍ट, डेनमार्क के पूर्व प्रधानमंत्री आंद्र फोग रासमुसेन, भूटान के पूर्व प्रधानमंत्री त्‍शेरिंग टोबगे और दक्षिण कोरिया के पूर्व प्रधानमंत्री हान स्‍युंग-सू भी उद्घाटन सत्र में शामिल हुए थे.

इस सम्‍मेलन में रूस, ईरान, आस्‍ट्रेलिया, मालदीव, दक्षिण अफ्रीका, डेनमार्क, उज्‍बेकिस्‍तान और यूरोपीय संघ समेत कुल 12 देशों के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया था. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन इस बैठक में आने वाले थे, लेकिन उन्होंने देश के जंगलों में आग की वजह से फैसला बदल लिया. अमरीका और ईरान के बीच चल रहे गतिरोध के बीच ईरान के विदेशमंत्री जावेद जरीफ का संवाद में हिस्‍सा लेना अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण था.

क्या है रायसीना डायलॉग?

रायसीना डायलॉग भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक मुद्दों पर भारत का वैश्विक सम्‍मेलन है. यह वैश्विक समुदाय के सामने सबसे चुनौतीपूर्ण मुद्दों को संबोधित करने के लिये प्रतिबद्ध है.
यह सम्‍मेलन संवाद के द्वारा बेहतर समन्‍वय स्‍थापित करने की भारत की पहचान को दर्शाता है.
भारत के विदेश मंत्रालय का मुख्यालय रायसीना पहाड़ी (साउथ ब्लॉक), नई दिल्ली में स्थित है, इसी के नाम पर इसे रायसीना डायलॉग के रूप में जाना जाता है. इसका आयोजन विदेश मंत्रालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है.

रायसीना डायलॉग 2020: मुख्य बिंदु

  • भारत-चीन संबंघों की चर्चा करते हुए विदेशमंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत और चीन को अच्‍छे पड़ोसियों की तरह महत्‍वपूर्ण मुद्दों को सुलझाना चाहिए.
  • अमरीका और ईरान के बीच के तनाव का उल्लेख करते हुए विदेशमंत्री ने कहा कि ये दोनों ही सम्प्रभुत्ता सम्पन्न देश हैं और इन्हें ही आपस में निपटना है.
  • उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के विरूद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है. एस जयशंकर ने कहा कि भारत पेरिस जलवायु समझौते का पालन करता है और भारत के रूख से विश्व के देश सहमत है.
  • रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया.
  • प्रमुख रक्षा अध्‍यक्ष (CDS) जनरल बिपिन रावत ने आतंकवाद को प्रायोजित करने वालों के विरूद्ध कड़ी वैश्विक कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया है.
  • ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ ने कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव दूर करने में भारत महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.