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पृथ्वी एक गंभीर श्रेणी के भू-चुंबकीय तूफान की चपेट में आने की घटना

19 जनवरी 2026 को सौर गतिविधि के कारण पृथ्वी पर एक शक्तिशाली G4 (गंभीर) भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storm) की घटना घटी थी हाल के दिनों में चर्चा का विषय रही थी. यह सौर चक्र 25 (Solar Cycle 25) की सबसे शक्तिशाली घटनाओं में से एक थी.

घटना के मुख्य बिंदु

  • यह तूफान सूर्य के एक सनस्पॉट (AR4341) से निकले X1.9 श्रेणी के सोलर फ्लेयर के कारण उत्पन्न हुआ. इसके साथ एक बहुत तेज़ गति वाला कोरोनल मास इजेक्शन (CME) भी था, जिसने सूर्य से पृथ्वी तक की दूरी (लगभग 15 करोड़ किमी) केवल 25 घंटों में तय कर ली, जो सामान्यतः 3-4 दिन लेता है.
  • इस घटना के कारण यूरोप (फ्रांस, जर्मनी) और उत्तरी अमेरिका के कई हिस्सों में आसमान में रंगीन रोशनी (Auroras) देखी गई. आम तौर पर ये नजारे केवल ध्रुवीय क्षेत्रों तक सीमित होते हैं, लेकिन इस तूफान की तीव्रता के कारण ये मध्य अक्षांशों (mid-latitudes) तक दिखाई दिए.
  • दुनिया भर में शॉर्टवेव रेडियो ब्लैकआउट की खबरें आईं. सैटेलाइट्स और GPS सिस्टम पर भी इसका असर देखा गया, हालाँकि किसी बड़े पावर ग्रिड के फेल होने की खबर नहीं है.
  • यह पिछले 20 वर्षों में सबसे मजबूत सौर विकिरण तूफानों में से एक था, जिसने ध्रुवीय मार्गों से उड़ान भरने वाले विमानों और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए विकिरण का खतरा बढ़ा दिया था.

भारत के संदर्भ में

  • भारत भूमध्य रेखा के करीब है, इसलिए यहाँ ऑरोरा (Auroras) दिखाई देना बहुत दुर्लभ है (सिवाय लद्दाख के हनले जैसे अति-उच्च क्षेत्रों के).
  • लेकिन, इस तरह के तूफानों का असर भारत की सैटेलाइट संचार प्रणालियों और हाई-फ्रीक्वेंसी (HF) रेडियो पर पड़ता है, जो विमानन और समुद्री संचार के लिए महत्वपूर्ण हैं.

भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storm)

  • G4 श्रेणी का भू-चुंबकीय तूफान एक गंभीर (Severe) स्तर की घटना मानी जाती है. यह तब होता है जब सौर हवा की एक बहुत शक्तिशाली लहर पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराती है.
  • यह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में होने वाली एक बड़ी गड़बड़ी है, जो अक्सर सूर्य से आने वाले कोरोनल मास इजेक्शन (CME) के कारण होती है.
  • NOAA (National Oceanic and Atmospheric Administration) भू-चुंबकीय तूफानों को G1 (मामूली) से G5 (चरम) के पैमाने पर मापता है.
  • इसका मुख्य प्रभाव पावर ग्रिड, अंतरिक्ष यान और सैटेलाइट, नेविगेशन और रेडियो आदि पर पड़ता है.
  • इसका आम जनता के दैनिक जीवन पर सीधा शारीरिक प्रभाव नहीं पड़ता है. पृथ्वी का वायुमंडल हमें विकिरण से बचाता है. मुख्य चिंता तकनीक और बुनियादी ढांचे (infrastructure) के लिए होती है.
  • यह तब होता है जब सूर्य अपनी सतह से प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र का एक बड़ा बादल (CME) अंतरिक्ष में छोड़ता है. जब यह बादल पृथ्वी तक पहुंचता है, तो यह हमारे चुंबकीय क्षेत्र के साथ प्रतिक्रिया करता है, जिससे ऊर्जा का एक बड़ा प्रवाह उत्पन्न होता है.

इथियोपिया के हायली गुब्बी ज्वालामुखी में विस्फोट

इथियोपिया के हायली गुब्बी (Hayli Gubbi) ज्वालामुखी में 23 नवंबर 2025 को विस्फोट हो गया. यह  हाल की सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक घटनाओं में से एक रहा है क्योंकि यह विस्फोट लगभग 12,000 वर्षों में पहली बार हुआ है.

मुख्य बिन्दु

  • हायली गुब्बी ज्वालामुखी, इथियोपिया का अफ़ार क्षेत्र (Afar Region), अदीस अबाबा से लगभग 800 किमी उत्तर-पूर्व, इरिट्रिया सीमा के पास है. यह क्षेत्र ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट ज़ोन का हिस्सा है.
  • यह ज्वालामुखी लगभग 10,000 से 12,000 सालों में पहली बार फटा है (वैज्ञानिकों के अनुसार होलोसीन काल में इसका कोई ज्ञात विस्फोट रिकॉर्ड नहीं था).
  • इस विस्फोट का राख और धुएँ का गुबार समुद्र तल से 14 किलोमीटर से अधिक ऊँचाई तक पहुँचा था.
  • यह विस्फोट ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट ज़ोन की भूवैज्ञानिक गतिविधि को दर्शाता है, जहाँ अफ्रीकी और अरेबियन टेक्टोनिक प्लेट्स धीरे-धीरे एक-दूसरे से दूर जा रही हैं.

ज्वालामुखी शीतलन: विस्फोट और प्रभाव

  • जब कोई ज्वालामुखी फटता है, तो वह राख के कणों (Ash) के साथ-साथ बड़ी मात्रा में गैसों को भी वायुमंडल में छोड़ता है, जिसमें सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) प्रमुख होती है.
  • SO2 अंततः छोटे-छोटे सल्फेट एयरोसोल कणों (Sulfate Aerosols) में बदल जाती है.
  • ये सल्फेट एयरोसोल कण इतने छोटे होते हैं कि ये पृथ्वी की ओर आने वाले सूर्य के प्रकाश (Solar Radiation) को अंतरिक्ष में वापस परावर्तित कर देते हैं.
  • सूर्य के प्रकाश का कम हिस्सा पृथ्वी की सतह तक पहुँचने के कारण, पृथ्वी की निचली वायुमंडलीय परत (क्षोभमंडल) का तापमान अस्थायी रूप से कम हो जाता है. इसी को ज्वालामुखी शीतलन या ग्लोबल डिमिंग कहा जाता है.

अतीत के बड़े विस्फोट और प्रभाव

ज्वालामुखी विस्फोटवर्षदेखा गया प्रभाव
माउंट पिनाटुबो (फिलीपींस)1991वैश्विक तापमान में लगभग 0.5 डिग्री C की अस्थायी गिरावट
क्राकाटोआ (इंडोनेशिया)1883अगले कई वर्षों तक वैश्विक मौसम पैटर्न प्रभावित
माउंट टैम्बोरा (इंडोनेशिया)18151816 को बिना गर्मियों का वर्ष कहा गया

भारत पर प्रभाव

  • तेज ऊपरी हवाओं (जेट स्ट्रीम) के कारण, राख का विशाल बादल लाल सागर और अरब सागर को पार करते हुए भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों तक पहुँचा.
  • राजस्थान (जोधपुर-जैसलमेर), दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, पंजाब और हरियाणा के आसमान में राख का गुबार देखा गया.
  • ज्वालामुखी की राख अत्यंत महीन, घर्षणकारी (abrasive) और कांच जैसे कणों से बनी होती है. ये  कण विमान के जेट इंजन क टरबाइन ब्लेड पर जम सकती है, जिससे इंजन बंद हो सकता है. इसी खतरे के कारण कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों को रद्द किया गया.

डायएथिलीन ग्लाइकॉल क्या है? छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से कई बच्चों की मौत

  • हाल ही में मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कई बच्चों की किडनी फेल होने से दुखद मौत हो गई. जांच में इन मौतों का संबंध कथित तौर पर एक जहरीले कफ सिरप से पाया गया है.
  • प्रारंभिक जांच में, इन दुखद घटनाओं का मुख्य कारण ‘कोल्ड्रिफ’ (Coldrif) और ‘नेक्ट्रो-डीएस’ (Nextro-DS) नामक कफ सिरप का सेवन बताया गया है.
  • इन सिरप के नमूनों की जांच में डायएथिलीन ग्लाइकॉल नामक एक जहरीले रसायन की अत्यधिक मात्रा पाई गई है.

डायएथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol) क्या है?

  • डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) एक औद्योगिक विलायक है और मानव, विशेषकर बच्चों के लिए, अत्यंत जहरीला होता है. इसके सेवन से किडनी फेलियर, न्यूरोलॉजिकल क्षति और मृत्यु हो सकती है.
  • यह एक सस्ता और मीठा स्वाद वाला रसायन है, जिसका उपयोग अक्सर प्रोपीलीन ग्लाइकॉल या ग्लिसरीन के स्थान पर अवैध रूप से किया जाता है.

DEG का उपयोग

DEG का उपयोग विभिन्न औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है:

  • सॉल्वेंट: नाइट्रोसेल्यूलोज, तेल, रेजिन और रंजक (dyes) के लिए एक सॉल्वेंट (विलायक) के रूप में.
  • एंटीफ्ऱीज़: ब्रेक तरल पदार्थ (Brake Fluid) और कुछ एंटीफ्ऱीज़ (antifreeze) मिश्रणों में.
  • अन्य: पॉलीयूरेथेन फोम, प्लास्टिक बनाने वाले प्लास्टिसाइज़र, पेंट, स्याही और कुछ घरेलू क्लीनर के निर्माण में.

पिछले पांच दशकों में भारत की तटरेखा लगभग 50% तक बढ़ी

  • गृह मंत्रालय (MHA) की हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच दशकों में भारत की तटरेखा लगभग 50% तक बढ़ गई है. 1970 में यह 7,516 किलोमीटर थी, जो 2023-24 तक बढ़कर 11,098 किलोमीटर हो गई.
  • गुजरात, बंगाल और गोवा जैसे राज्यों में तटरेखा में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है. गुजरात में सबसे अधिक विस्तार दर्ज किया गया, जहां इसकी तटरेखा 1970 के 1,214 किलोमीटर से लगभग दोगुनी होकर पिछले 53 वर्षों में 2,340 किलोमीटर हो गई.
  • बंगाल में प्रतिशत के आधार पर सबसे अधिक वृद्धि हुई, जहां तटरेखा 157 किलोमीटर से बढ़कर 721 किलोमीटर हो गई, जो 357% की वृद्धि दर्शाती है.
  • राष्ट्रीय स्तर पर, तटरेखा 1970 के आंकड़ों की तुलना में 47.6% बढ़ी है.

बदलाव का मुख्य कारण

  • इस बड़े बदलाव का मुख्य कारण भारत की तटरेखा को मापने के लिए अपनाई गई नई कार्यप्रणाली है, जिसे राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक (National Maritime Security Coordinator) द्वारा परिभाषित किया गया है.
  • पुरानी विधियों में जहां सीधी रेखाओं में दूरी मापी जाती थी, वहीं नई विधि में खाड़ी (bays), नदीमुख (estuaries), जलमार्ग (inlets) और अन्य भू-आकृतिक संरचनाओं (geomorphological formations) जैसे जटिल तटीय संरचनाओं को मापने को शामिल किया गया है.
  • इस अद्यतन तकनीक ने तटरेखा की वास्तविक लंबाई को अधिक सटीक और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है.

भारत में ‘जेनरेशन बीटा’ के पहले बच्चे का जन्म मिजोरम में हुआ

भारत में ‘जेनरेशन बीटा’ के पहले बच्चे का जन्म मिजोरम में हुआ है. बच्चे का नाम फ्रेंकी रखा गया है और उसके पिता का नाम जेड्डी रेमरुअत्संगा और मां का नाम रामजिरमावी है. बच्चे का जन्म 1 जनवरी 2025 को रात के 12:03 में हुआ.

जेनरेशन बीटा क्या

साल 2025 से 2039 के बीच पैदा होने वाले बच्चे को जनरेशन बीटा नाम दिया गया है. जेनरेशन बीटा उस पीढ़ी को कहा गया है, जो इंटरनेट से जुड़ी तमाम सुविधाओं के बीच पैदा हुई है और जिनके लिए हर सुविधा महज एक क्लिक की दूरी पर ही है. जेनरेशन बीटा शब्द मार्क मैक्रिंडल ने गढ़ा है, जो समाजविज्ञानी हैं.

जनसंख्या जेनरेशन (Population generation) क्या है?

‘जनसंख्या जेनरेशन’ से तात्पर्य एक ही समय में जन्मी एक ही पीढ़ी के लोगों से है, जो किसी खास सामाजिक, सांस्कृतिक या ऐतिहासिक घटनाओं से प्रभावित होते हैं. हर पीढ़ी के लोगों के अपने अनुभव, तकनीक से जुड़ाव, और सामाजिक मूल्य होते हैं, जो उन्हें बाकी पीढ़ियों से अलग बनाते हैं.

जनसंख्या जेनरेशन: एक दृष्टि

  1. ग्रेटेस्ट जेनरेशन: 1901 से 1924 के दौर में पैदा हुई पीढ़ी को ग्रेटेस्ट जेनरेशन कहा गया था क्योंकि इन लोगों ने महामंदी और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अपना जीवनयापन किया था.
  2. साइलेंट जेरनेशन: साइलेंट जेरनेशन की अवधि 1925 से 1945 तक मानी गई थी. महामंदी और दूसरे विश्व युद्ध के परिणामों के चलते इस पीढ़ी को यह नाम मिला था.
  3. बेबी बूमर: 1946 से 1964 के बीच के जेनरेशन को बेबी बूमर कहा गया था. माना जाता है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद पूरी दुनिया में ही बड़े पैमाने पर आबादी में इजाफा हुआ था.
  4. जेनरेशन एक्स: 1965 से 1980 तक के पैदा हुए लोगों को जेनरेशन एक्स (या सैंडविच जनरेशन) कहा गया था. इस पीढ़ी के दौर में ही इंटरनेट की शुरुआत हुई और इन्होंने खुद को तेजी से बदला.
  5. जेनरेशन वाई: 1981 से 1996 तक जेनरेशन वाई (या मिलेनियल्स) थी, इस पीढ़ी के लोगों के बारे में माना जाता है कि इन्होंने तकनीक के साथ खुद को तेजी से बदला और हर चीज से अपडेट होते रहे.
  6. जेनरेशन जेड: यह वह जेनरेशन है, जिनका जन्म 1997 से लेकर 2012 के बीच हुआ है. इस जेनरेशन के समय में ही सोशल मीडिया और वीडियो गेम्स ने अधिक पैर फैलाए.
  7. जेनरेशन अल्फा: 2013 से 2024 तक पैदा हुए बच्चों को जेनरेशन अल्फा कहा जाता है. इस पीढ़ी के लोग जन्म से ही तकनीक में डूबे रहे हैं और स्मार्टफोन, टैबलेट और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने अधिक समय बिताते हैं.
  8. जनरेशन बीटा: साल 2025 से 2039 के बीच पैदा होने वाले बच्चे को जनरेशन बीटा नाम दिया गया है. जेनरेशन बीटा उस पीढ़ी को कहा गया है, जो इंटरनेट से जुड़ी तमाम सुविधाओं के बीच पैदा हुई है और जिनके लिए हर सुविधा महज एक क्लिक की दूरी पर ही है.

अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी और सम्मेलन केंद्र ‘भारत मंडपम’ का लोकार्पण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 जुलाई को नई दिल्‍ली के प्रगति मैदान में अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी सम्मेलन केंद्र (IECC कॉम्प्लेक्स) राष्ट्र को समर्पित किया था. इस केंद्र का नाम ‘भारत मंडपम’ दिया गया है.

मुख्य बिन्दु

  • इस परियोजना को लगभग 2.7 हजार करोड रुपये की लागत से विकसित किया गया है. ये परिसर देश में अन्‍तर्राष्‍ट्रीय बैठकों, सम्‍मेलनों और प्रदर्शनियों की मेजबानी करेगा.
  • लगभग 123 एकड़ के परिसर क्षेत्र में शंख के आकार में विकसित, यह भवन, भारत की पारंपरिक कला, संस्कृति और वास्तुशिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण हैं.
  • परिसर में कुल सात प्रदर्शनी हॉल हैं और यह छोटे और मध्यम उद्यमों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपने उत्पादों और सेवाओं को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा.
  • प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय ‘युगे युगीन भारत’ जल्द ही दिल्ली में बनाया जाएगा.

अहमदाबाद में अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव का आयोजन किया गया

गुजरात के अहमदाबाद में 8 से 14 जनवरी तक अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव (International Kite Festival) का आयोजन किया गया था. कार्यक्रम का उद्घाटन गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किया था.

  • इसका आयोजन गुजरात पर्यटन विभाग ने जी-20 की विषय-वस्‍तु ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्‍य’ के अनुरूप किया था.
  • इस महोत्सव में जी-20 सदस्य देशों सहित देश और दुनिया भर के बड़े पतंग बनाने वालों और उत्साही लोगों ने भाग लिया.
  • उत्तरायण के आधिकारिक उत्सव के हिस्से के रूप में 1989 से प्रतिवर्ष अहमदाबाद में अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव आयोजित किया जाता रहा है.

हैदराबाद को ‘वर्ल्ड ग्रीन सिटी’ का सम्मान दिया गया

हैदराबाद को ‘वर्ल्ड ग्रीन सिटी’ (World Green City) का पुरस्कार दिया गया है. दक्षिण कोरिया के जेजू में 14 अक्टूबर को आयोजित इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूसर्स (AIPH) 2022 में हैदराबाद को यह पुरस्कार दिया गया. इसके अलावा हैदराबाद ने ‘लिविंग ग्रीन फॉर इकोनॉमिक रिकवरी एंड इनक्लूसिव ग्रोथ’ की कैटेगरी में भी पुरस्कार जीता है.

हैदराबाद एकमात्र भारतीय शहर है जिसे यह सम्मान दिया गया है. हैदराबाद को ‘लिविंग ग्रीन फॉर इकोनॉमिक रिकवरी एंड इनक्लूसिव ग्रोथ’ की कैटेगरी का पुरस्कार राज्य के ‘तेलंगाना हरिताहरम’ कार्यक्रम के लिए दिया गया है.

गृह मंत्रालय ने PFI को 5 वर्ष के लिए प्रतिबंधित किया

केंद्र सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) को 5 वर्ष के लिए प्रतिबंधित कर दिया है. यह निर्णय केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने 28 सितम्बर को लिया था. निर्णय में UAPA के तहत इस संगठन को गैरकानूनी घोषित किया गया है.

मुख्य बिन्दु

  • अपने निर्णय में गृह मंत्रालय ने PFI के अतिरिक्त उससे जुड़े अन्य आठ संगठनों पर भी प्रतिबंध लगाया है.
  • आतंकी वित्तीय पोषण और आतंकी संपर्क के आरोप में देश के कई राज्यों में हाल ही में PFI पर लगातार छापेमारी की गई थी.
  • गृह मंत्रालय के अनुसार, PFI और उससे जुड़े सभी सहयोगी संगठनों पर UAPA के तहत पांच साल के लिए त्वरित प्रभाव से प्रतिबंध लगाया गया है.
  • PFI के अलावा रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI), ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (AIIC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO), नेशनल वीमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन, केरल जैसे सहयोगी संगठनों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है.
  • PFI का गठन 2006 में केरल में किया गया था. वह भारत में हाशिये पर मौजूद वर्गों के सशक्तिकरण के लिए नव सामाजिक आंदोलन चलाने का दावा करता है.

UAPA क्या है?

UAPA एक कानून है, जिसका पूरा नाम Unlawful Activities (Prevention) Act यानी गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम है. इस कानून का मुख्य उद्देश्य आतंकी गतिविधियों को रोकना होता है.

इस कानून के तहत पुलिस ऐसे आतंकियों, अपराधियों या संदिग्ध लोगों को चिह्नित करती है, जो आतंकी​गतिविधियों में शामिल होते हैं.

बाल यौन शोषण के खिलाफ सीबीआई की कार्रवाई ‘ऑपरेशन मेघा चक्र’

भारतीय जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने हाल ही में ‘ऑपरेशन मेघा चक्र’ (Operation Megh Chakra) नाम से एक बड़ा वैश्विक अभियान चलाया था. अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और संगठित साइबर वित्तीय अपराधियों के संरक्षण में चल रहे बाल यौन शोषण (Child Abuse) के खिलाफ यह अभियान चलाया गया था.

मुख्य बिन्दु

  • यह अभियान बाल यौन शोषण से जुड़े ऐसे मामलों से संबंधित था जहां पीड़ित से लेकर आरोपी, संदिग्ध लोगों समेत साजिशकर्ता वैश्विक स्तर पर अलग-अलग न्यायिक क्षेत्र के थे.
  • इस अभियान को बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन प्रसार के विरुद्ध सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है.
  • इंटरपोल की सिंगापुर स्थित क्राइम अगेंस्ट चिल्ड्रन (CAC) यूनिट का इनपुट मिलने के बाद CBI ने राष्ट्रीय स्तर पर ऑपरेशन ‘मेघा चक्र’ को अंजाम दिया था.
  • CBI के इस ऑपरेशन का नाम वास्तव में ‘क्लॉउड स्टोरेज’ से लिया गया, जिसके जरिये बाल यौन शोषण सामग्री का ऑनलाइन प्रसार और वितरण किया जाता था. इस तरह CBI ने इस ऑपरेशन को ‘मेघा चक्र’ नाम दिया.
  • CBI साइबर अपराध इकाई स्थापित करने वाली पहली प्रवर्तन एजेंसी भी है. प्रारंभिक छानबीन में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में बड़ी मात्रा में बाल यौन शोषण सामग्री मिली है.

गुजराती फिल्म ‘छेल्लो शो’ को ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि घोषित किया गया

गुजराती फिल्म छेल्लो शो को 95वें अकादमी पुरस्कारों (ऑस्कर 2023) के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि घोषित किया गया है. इसकी घोषणा फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने 20 सितम्बर को की.

मुख्य बिन्दु

  • छेल्लो शो को सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी में चुना गया है. यह फिल्म 14 अक्टूबर को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली है.
  • छेल्‍लो शो का शीर्षक अंग्रेजी में ‘लास्‍ट फिल्म शो’ है. इस फिल्‍म का रॉबर्ट डि‍ नीरो के ‘ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल’ में उद्घाटन फिल्म के रूप में वर्ल्‍ड प्रीमियर हुआ था. इसने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में कई पुरस्कार जीते हैं.
  • छेल्‍लो शो एक किशोर बालक की कहानी है. वह भारत के एक दूरदराज के गाँव में रहता है और सिनेमा के साथ उसका गहरा संबंध जुड जाता है. यह फिल्म दर्शाती है कि कैसे एक छोटा लड़का प्रोजेक्शन बूथ से फिल्‍में देखने में गर्मियों का पूरा समय बिताता है.

दिल्ली में राष्ट्रीय जनजातीय अनुसंधान संस्थान का उद्घाटन

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 7 जून को राष्ट्रीय जनजातीय अनुसंधान संस्थान (NTRI) का उद्घाटन किया. इसका निर्माण दिल्ली में किया गया है.

  • यह संस्थान आदिवासी विरासत और संस्कृति के संवर्धन और संरक्षण के लिए प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान होगा और शैक्षणिक, कार्यकारी और विधायी क्षेत्रों में आदिवासी अनुसंधान मुद्दों और मामलों का प्रमुख केंद्र होगा.
  • संस्थान प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों और संगठनों के साथ-साथ शैक्षणिक निकायों और संसाधन केंद्रों के साथ सहयोग करेगा.
  • यह जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRI), उत्कृष्टता केंद्रों (COE), और NFS के शोध विद्वानों की परियोजनाओं की निगरानी करेगा और अनुसंधान और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार के लिए मानदंड स्थापित करेगा. TRI राज्य स्तर पर जनजातीय मामलों के मंत्रालय का अनुसंधान निकाय है.
  • TRI जनजातीय विकास के लिए एक थिंक टैंक के रूप में कार्य करती है. TRI के मुख्य कार्य हैं- जनजातीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, उपयुक्त कानूनों के लिए राज्यों को इनपुट प्रदान करना, सूचना के प्रसार और जागरूकता पैदा करना.