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मध्यप्रदेश में धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक-2020 को मंजूरी दी गयी

मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने धर्म स्वातंत्र्य यानी धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक-2020 को मंजूरी दी है. नया अधिनियम मध्‍यप्रदेश में धार्मिक स्‍वतंत्रता अधिनियम 1968 की जगह लेगा.

प्रस्‍तावित कानून के अंतर्गत जो लोग धर्मांतरण के इच्‍छुक हैं, उन्‍हें दो महीने पहले जिला प्रशासन के समक्ष आवेदन करना होगा. केवल धर्म परिवर्तन करने के उद्देश्‍य से विवाह करने को शून्‍य माना जाएगा.

इस विधेयक के प्रावधानों के अंतर्गत किसी महिला के धर्म को जबरन परिवर्तित करने की सजा 10 वर्ष और कम से कम जुर्माना 50 हजार रुपए किया गया है. इस प्रकार के धर्म परिवर्तन करने वालों के अभिभावकों सहित रिश्तेदार भी इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

नाबालिगों, समूहों या अनुसूचित जाति और अनुसूजित जनजाति से संबंधित लोगों के धर्म परिवर्तन कराने के मामलों में भी विशेष प्रावधान किए गए हैं.

रीवा में एशिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना का उद्घाटन

मध्यप्रदेश के रीवा में 10 जुलाई को एशिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना का उद्घाटन किया गया. यह उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने वीडियो कान्‍फ्रेंस के माध्यम से किया गया. इस कार्यक्रम में राज्‍यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कई केन्‍द्रीय मंत्री उपस्थित थे.

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सौर ऊर्जा को 21वीं सदी के लिए ऊर्जा का सबसे महत्‍वपूर्ण स्रोत बताया. उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा, श्योर, प्योर और सिक्योर है.

रीवा सौर ऊर्जा परियोजना: एक दृष्टि

  • इस सौर उर्जा पार्क को मध्यप्रदेश उर्जा विकास निगम लिमिटेड (MPUVNL) और सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के संयुक्त उपक्रम रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (RUMSL) ने 1590 हैक्‍टेयर क्षेत्र में विकसित किया गया है.
  • इस परियोजना की लागत लगभग 4000 करोड़ रुपये है. इसमें कुल तीन इकाईयां है. प्रत्येक इकाई में 250 मेगावाट यानी कुल 750 मेगावाट विद्युत का उत्पादन हो रहा है.
  • मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 22 दिसम्बर 2017 को इस परियोजना का शिलान्यास किया था. परियोजना को लगभग ढाई साल के रिकार्ड समय में पूरा किया गया.
  • यह परियोजना इस मायने में भी महत्वपूर्ण है क्योकि इसमें प्रति यूनिट की क्रय दर 2 रुपये 97 पैसे है, जो अब तक की न्यूनतम दर है.
  • पर्यावरण की दृष्टि से देखे तो रीवा सौर परियोजना से प्रतिवर्ष 15.7 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के उर्त्सजन को रोका जायेगा जो 2 करोड़ 60 लाख पेड़ों को लगाने के बराबर है.
  • दिल्ली मेट्रो सहित राज्य के बाहर संस्थागत ग्राहकों को आपूर्ति करने वाली यह पहली अक्षय ऊर्जा परियोजना है. दिल्ली मेट्रो को इस परियोजना से 24 प्रतिशत ऊर्जा प्राप्त होगी.

शिवराज सिंह चौहान ने मध्‍यप्रदेश के 19वें मुख्‍यमंत्री के रूप में शपथ ली

शिवराज सिंह चौहान ने 23 मार्च को चौथी बार मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री के रूप में शपथ ली. राज्यपाल लालजी टंडन ने राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इससे पहले शिवराज सिंह चौहान को भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक दल की बैठक में नेता चुना गया था.

मध्‍यप्रदेश विधानसभा की स्थिति

230 सदस्यों वाली विधानसभा में 25 स्थान रिक्त हैं. वर्तमान में 205 सदस्य हैं, जिसमें BJP के 106, सपा 1, बसपा 2 और 4 निर्दलीय सदस्य हैं. इस प्रकार वर्तमान में मध्‍यप्रदेश विधानसभा में बहुमत के लिए 103 सदस्यों की जरूरत है.

मध्‍यप्रदेश विधानसभा: संक्षिप्त घटनाक्रम

2018 में संपन्न हुए मध्‍यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 114 और BJP के 109 सदस्य निर्वाचित हुए थे. 230 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 116 निर्वाचित सदस्यों की जरूरत थी. इस प्रकार कांग्रेस ने मुख्‍यमंत्री कमलनाथ की अगुवाई में बसपा, सपा और निर्दलीय निर्वाचित सदस्यों के समर्थन से सरकार बनाई थी.

उनकी सरकार को 15 महीने भी नहीं हुए थे कि कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया BJP में शामिल हो गये. सिंधिया के साथ-साथ कांग्रेस के 22 निर्वाचित सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया. कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गयी थी. जिस कारण मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 20 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. जिसके बाद BJP ने राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया था.

शिवराज सिंह चौहान: एक दृष्टि

  • शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली है. वे 2005 से 2018 तक लगातार 13 साल मुख्‍यमंत्री रह चुके हैं. इस दौरान उन्होंने तीन बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. 29 नवंबर, 2005 को उन्हें बाबूलाल गौर के स्थान पर राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया था.
  • उनके फिर मुख्‍यमंत्री बनने पर मध्यप्रदेश के इतिहास में पहला मौका होगा, जब कोई चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लिया हो. शिवराज के अलावा अब तक अर्जुन सिंह और श्यामाचरण शुक्ल तीन-तीन बार मुख्‍यमंत्री रहे हैं.
  • शिवराज सिंह पहली बार 1990 में बुधनी सीट से मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए और 1991 में पहली बार विदिशा सीट से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने पद से इस्तीफा दिया

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 20 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल लालजी टंडन को सौंपा. राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. विधानसभा में बहुमत न होने के चलते उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया है. कमलनाथ ने 17 दिसंबर 2018 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पर होने वाले मत विभाजन से पहले इस्तीफा दिया. उच्चतम न्यायालय ने राज्य विधानसभा में 20 मार्च को शाम पांच बजे तक बहुमत परीक्षण पूरा कर लिए जाने का निर्देश दिया था. न्यायालय ने यह आदेश मध्यप्रदेश विधानसभा में बहुमत परीक्षण के अनुरोध से जुड़ी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित 10 भाजपा नेताओं की याचिका पर दिया.

क्या है मामला?

मध्‍यप्रदेश में पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और सत्तारूढ़ कांग्रेस के 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था. इससे सदन में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 114 से घटकर 92 रह गई थी. दूसरी ओर, सदन में भाजपा के 107 सदस्य हैं. राज्‍य में बसपा के दो सदस्य हैं जबकि समाजवादी पार्टी का एक और चार निर्दलीय विधायक भी है.

230 सदस्यीय मध्यप्रदेश विधानसभा में दो सीटें पहले से खाली हैं. मौजूदा परिस्थितियों में बहुमत के लिए 104 विधायकों का समर्थन चाहिए. इस प्रकार कमलनाथ के इस्तीफे के बाद राज्य में भाजपा के नेतृत्‍व में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है.

24 जनवरी: राष्‍ट्रीय बालिका दिवस, जागरूक बालिका सशक्‍त मध्‍यप्रदेश दिवस

प्रत्येक वर्ष 24 जनवरी को राष्‍ट्रीय बालिका दिवस (National Girl Child Day) मनाया जाता है. य‍ह दिन केन्‍द्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा 2008 से प्रति वर्ष मनाया जाता है. राष्‍ट्रीय बालिका दिवस का उद्देश्‍य समाज में लोगों के बीच बेटियों के अधिकार को लेकर जागरूकता पैदा करना और बेटियों को सामाजिक व आर्थिक विकास के नए अवसर मुहैया कराना है.

राष्‍ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर लड़कियों की सुरक्षा, शिक्षा, लिंग अनुपात, स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर अलग-अलग तरह के अभियान चलाए जाते हैं.

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत

सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 2015 में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत की थी. इस अभियान के जरिए लड़कियों और महिलाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया जाता है. महिलाओं के प्रति होने वाली कई अमानवीय प्रथाओं जैसे भ्रूण हत्या अब कम हो गए हैं.

इन अभियानों से लोगों की मानसिकता को बदलने में मदद मिली है, खासकर ग्रामीण इलाकों में लड़कियों की शिक्षा को लेकर काफी जागरुकता आई है. समाज के लोगों की मानसिकता पर इन अभियानों का काफी असर हुआ है. अब लोग लड़कियों को लड़कों के बराबर सम्मान और अधिकार दे रहे हैं.

जागरूक बालिका सशक्‍त मध्‍यप्रदेश दिवस

मध्‍य प्रदेश में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के अंतर्गत 24 जनवरी को ‘जागरूक बालिका सशक्‍त मध्‍यप्रदेश’ के साथ राष्‍ट्रीय बालिका दिवस मनाया गया. इस दिन बालिकाओं की स्‍वास्‍थ्‍य की जांच की गयी.

ग्वालियर में शास्त्रीय संगीत उत्सव ‘तानसेन समारोह’ का आयोजन किया जा रहा है

मध्य प्रदेश में लोकप्रिय शास्त्रीय संगीत उत्सव ‘तानसेन समारोह’ का आयोजन 17 से 21 दिसम्बर तक ग्वालियर में किया जा रहा है. इस उत्सव इसकी शुरुआत हरिकथा और मिलाद के साथ हुई. यह उत्सव हर वर्ष भारतीय इतिहास के सबसे प्रतिष्ठित गायकों में से एक, ‘मियां तानसेन’ की याद में मनाया जाता है.

विद्याधर व्यास राष्ट्रीय तानसेन पुरस्कार से सम्मानित

प्रसिद्ध गायक पंडित विद्याधर व्यास को मध्‍य प्रदेश सरकार के राष्ट्रीय तानसेन पुरस्कार 2019 से सम्मानित किया गया. यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष भारतीय शास्त्रीय संगीत की जाने-माने हस्तियों को दिया जाता है. तानसेन पुरस्कार में दो लाख रुपये नकद और प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है.

तानसेन समारोह: एक दृष्टि

  • तानसेन समारोह देश के सबसे पुराने और सम्मानित शास्त्रीय संगीत समारोहों में से एक है. इसका आयोजन मध्‍य प्रदेश के संस्कृति विभाग के अंतर्गत उस्ताद अलाउद्दीन खां कला एवं संगीत अकादमी द्वारा किया जाता है.
  • इस समारोह में देशभर के जाने माने संगीतकार और गायक हिस्सा लेते है. इस बार तानसेन समारोह में विभिन्न सत्रों में ग्रीस, अमेरिका, ईरान और बेल्जियम के कलाकार भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे.

1 नवंबर: मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, केरल, हरियाणा और छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस

प्रत्येक वर्ष 1 नवंबर को मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, केरल, हरियाणा और छत्तीसगढ़ अपना स्थापना दिवस मनाते हैं. इन सभी राज्यों का गठन 1 नवंबर को ही हुआ था.

मध्य प्रदेश का गठन 1 नवंबर, 1956 को हुआ था. इसके गठन से पहले यह मध्य भारत में आता था. इस वर्ष 2019 में मध्य प्रदेश का 64वां स्थापना दिवस है. मध्य भारत प्रांत की उस समय दो राजधानियां थीं. ग्वालियर शीतकालीन राजधानी और इंदौर को ग्रीष्मकालीन राजधानी थी. मध्‍यप्रदेश के अस्तित्‍व में आने के साथ ही भोपाल को राजधानी बना दिया गया. डॉ. पटटाभि सीतारामैया मध्यप्रदेश के पहले राज्यपाल बने जबकि पंडित रविशंकर शुक्ल को पहला मुख्यमंत्री बनाया गया.

1 नवंबर 2000 को ही मध्य प्रदेश के कुछ भागों को अलग कर छत्तीसगढ़ नाम का एक नया राज्य अस्तित्व में आया था. इस वर्ष 2019 में छत्तीसगढ़ का 20वां स्थापना दिवस है. लगभग 44 प्रतिशत वन क्षेत्र और करीब 32 प्रतिशत जनजातीय जनसंख्‍या वाला यह राज्‍य खनिज संसाधनों के मामलों में काफी समृद्ध है.

कर्नाटक का गठन 1 नवंबर, 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अधीन किया गया था. पहले यह मैसूर राज्य कहलाता था. 1973 में पुनर्नामकरण कर इसका नाम कर्नाटक कर दिया गया था.

कर्नाटक, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलावा पंजाब, केरल और हरियाणा का भी गठन 1 नवंबर को है हुआ था. इस कारण ये राज्य भी अपना स्थापना दिवस 1 नवम्बर को मनाते हैं.

निवेश को आमंत्रित करने के लिए इंदौर में ‘मैग्निफिसेंट मध्यप्रदेश सम्मेलन’ का आयोजन किया गया

मध्य प्रदेश के इंदौर में 18 अक्टूबर को ‘मैग्निफिसेंट मध्यप्रदेश सम्मेलन’ (Magnificent Madhya Pradesh Summit) का आयोजन किया गया. मुख्यमंत्री कमलनाथ, उद्योगपति आदि गोदरेज सहित अन्य उद्योगपतियों ने दीप प्रज्वलित कर इसकी कार्यक्रम की शुरुआत की थी. सम्मेलन का मक़सद उद्योगपतियों को राज्य में उद्योगों के लिए दी जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी देना और निवेश के लिए आमंत्रित करना था.

मध्य प्रदेश सरकार ने फिल्म अभिनेता गोविंदा को राज्य का ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया

मध्य प्रदेश सरकार ने बॉलीवुड फिल्म अभिनेता गोविंदा को राज्य का ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया है. गोविंदा को ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त करने का उद्देश्य राज्य की परंपराओं और पर्यटन स्थलों की जानकारी को जनता तक पहुँचाना है. सरकार मध्यप्रदेश में एक फिल्म सिटी स्थापित करने की योजना है.


मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का निधन

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर का 21 अगस्त को भोपाल में निधन हो गया. वे 89 वर्ष के थे. बाबूलाल BJP के अकेले नेता रहे हैं जिन्‍होंने मध्‍यप्रदेश विधानसभा के लगातार 10 चुनाव जीते. उन्होंने गोविंदपुरा विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने 2004 में उमा भारती के मुख्‍यमंत्री पद से हटने के बाद प्रदेश की कमान संभाली थी.

राजनीति में आने से पहले श्री गौर ने भोपाल की कपड़ा मील में मजदूरी की थी. वे भारतीय मजदूर संघ के संस्‍थापक सदस्‍य भी थे. 1974 में मध्‍यप्रदेश शासन द्वारा उन्‍हें गोवा मुक्ति आंदोलन में शामिल होने के कारण स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानी का सम्‍मान भी प्रदान किया गया था.