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बहु-भाषावाद पर भारत के समर्थन से लाया गया प्रस्‍ताव संयुक्‍त राष्‍ट्र में पारित

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में बहु-भाषावाद पर भारत के समर्थन से लाया गया प्रस्‍ताव पारित हो गया है. इस प्रस्‍ताव में पहली बार हिन्‍दी भाषा को भी शामिल किया गया था.

बहु-भाषावाद पर संयुक्‍त राष्‍ट्र में प्रस्‍ताव: मुख्य बिंदु

  • प्रस्‍ताव में संयुक्‍त राष्‍ट्र से हिन्‍दी सहित सभी अधिकृत और अनधिकृत भाषाओं में महत्वपूर्ण संचार और संदेशों के प्रचार-प्रसार का आग्रह किया गया था. प्रस्ताव पारित होने के बाद अब UN के सभी कामकाज और जरूरी संदेश इन भाषाओं में भी पेश किए जाएंगे.
  • पहली बार इस तरह के प्रस्‍ताव में हिन्‍दी भाषा का उल्‍लेख किया गया है. इसके अतिरिक्‍त बांग्‍ला और उर्दू भाषा का भी प्रस्‍ताव में पहली बार उल्‍लेख हुआ है.
  • भारत हिन्‍दी भाषा में संचार और मल्‍टी मीडिया सामग्री के प्रचार-प्रसार के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र वैश्विक संचार विभाग को 2018 से बजट के अतिरिक्त योगदान उपलब्ध करा रहा है.
  • इन प्रयासों के तहत 2018 में ‘हिन्‍दी एट द रेट यूएन’ परियोजना शुरू की गई. इसका उद्देश्‍य हिन्दी भाषा में संयुक्‍त राष्‍ट्र के जन-सम्‍पर्क को बढावा देना और दुनिया भर में वैश्विक मुद्दों के बारे में हिन्‍दी भाषी लाखों लोगों को जागरूक करना है.

वैश्विक खाद्य संकट पर संयुक्त राष्ट्र FAO का रिपोर्ट

वैश्विक खाद्य संकट पर हाल ही में एक वार्षिक रिपोर्ट ‘ग्लोबल रिपोर्ट ऑन फ़ूड क्राइसिस’ (Global Report on Food Crises) 2022 जारी की थी. इस रिपोर्ट में विश्व स्तर पर तीव्र खाद्य असुरक्षा पर चर्चा की गयी है.

यह रिपोर्ट ग्लोबल नेटवर्क अगेंस्ट फ़ूड क्राइसिस (GNAFC) द्वारा जारी की गई है. यह कृषि संगठन (FAO), विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI) का सह-प्रायोजित वैश्विक पहल है. इसकी स्थापना वर्ष 2016 में यूरोपीय संघ, FAO और WFP द्वारा की गई थी.

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • संघर्ष, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक संकट ने लोगों की आजीविका को तबाह कर दिया है, जिससे 2021 में भूख का सामना करने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 193 मिलियन हो गई.
  • वर्ष 2021 में भुखमरी की समस्या का सामना कर रहे 53 देशों में, 193 मिलियन से अधिक लोगों ने तीव्र खाद्य असुरक्षा का अनुभव किया. सबसे अधिक प्रभावित कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, इथियोपिया, यमन और अफगानिस्तान हैं.
  • वर्ष 2020 की तुलना में 2021 में वैश्विक स्तर पर लगभग 40 मिलियन से अधिक लोगों ने संकट या बदतर स्तर पर तीव्र खाद्य असुरक्षा का अनुभव किया.

भारत को संयुक्त राष्ट्र ECOSOC के चार प्रमुख निकायों के लिए चुना गया

भारत को संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) के चार प्रमुख निकायों के लिए चुना गया है. ये निकाय हैं-

  1. विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी आयोग (Commission on Science and Technology for Development)
  2. आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों पर समिति (Committee for Economic, Social and Cultural Rights)
  3. सामाजिक विकास आयोग (Commission for Social Development)
  4. गैर-सरकारी संगठनों पर समिति (Committee on NGOs)

आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC)

आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर द्वारा स्थापित संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के छह प्रमुख अंगों में से एक है. इसमें महासभा द्वारा चुने गए संयुक्त राष्ट्र के 54 सदस्य शामिल हैं.

प्रीति सरन को CESR का राजदूत चुना गया

आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की समिति (CESR) के लिए, मौजूदा राजदूत प्रीति सरन (Preeti Saran) को फिर से चुन लिया गया है. 2018 में, वह पहली बार इस समिति में एशिया प्रशांत सीट के लिए चुनी गईं थीं. 1 जनवरी 2019 को, उनका पहला चार साल का कार्यकाल शुरू हुआ था.

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अफ्रीकी मूल के लोगों के एक स्थायी मंच की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अफ्रीकी मूल के लोगों के लिए एक स्थायी मंच की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इसका उद्देश्य नस्लवाद, नस्ली भेदभाव, विदेशियों से नफरत और असहिष्णुता जैसी चुनौतियों को कम करना है.

  • 193 सदस्यीय महासभा ने इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी. इस प्रस्ताव में एक ऐसे मंच की मांग की गई है जो अफ्रीकी मूल के लोगों की सुरक्षा और उनके जीवन की गुणवत्ता तथा आजीविका में सुधार के लिए काम करे और जिस समाज में वे रहते हैं उसमें उनका पूर्ण समावेश सुनिश्चित करे.
  • नए फोरम में 10 सदस्य होंगे, जिनमें से 5 सभी क्षेत्रों से महासभा द्वारा चुने जाएंगे और 5 को मानवाधिकार परिषद द्वारा क्षेत्रीय समूहों के साथ-साथ अफ्रीकी मूल के लोगों के संगठनों के परामर्श से नियुक्त किया जाएगा.
  • महासभा ने कहा, सभी मनुष्य स्वतंत्र हैं, उनके अधिकार तथा गरिमा समान है और उनमें समाज के विकास तथा कल्याण में रचनात्मक योगदान देने की क्षमता है. नस्ली श्रेष्ठता का कोई भी सिद्धांत वैज्ञानिक रूप से गलत, नैतिक रूप से निंदनीय, सामाजिक रूप से अन्यायपूर्ण तथा खतरनाक है और इन्हें खारिज किया जाना चाहिए.
  • महासभा द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव में कहा गया है कि नस्लवाद, नस्ली भेदभाव, विदेशियों से नफरत और असहिष्णुता से निपटने की कोशिशों के बाद भी ये व्यापक रूप से जारी हैं और इसकी निंदा की जानी चाहिए.

कोस्टारिका की अर्थशास्त्री रेबेका ग्रीनस्पैन को अंकटाड का महानिदेशक नियुक्त किया गया

संयुक्तराष्ट्र महासभा ने व्यापार एवं विकास का संगठन (UNCTAD) के महानिदेशक पद पर कोस्टारिका की महिला अर्थशास्त्री रेबेका ग्रीनस्पैन (Rebeca Grynspan) की नियुक्ति किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. रेबेका इसका नेतृत्व संभालने वाली पहली महिला और मध्य अमेरिकी क्षेत्र की पहली व्यक्ति होंगी. इस पद के लिए रेबेका का नामांकन संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने किया था.

रेबेका ग्रीनस्पैन, वर्तमान में इबेरो-अमेरिकी शिखर बैठकों की तैयारी करने वाले मंच इबेरो-अमेरिकन जेनरल सेक्रेटेरिएट की महासचिव हैं. वह 2010-14 तक UNDP (संयुक्तराष्ट्र विकास कार्यक्रम) की उप-प्रशासक रही थीं.

UNCTAD क्या है?

UNCTAD, व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र का एक संगठन है. इसका पूर्ण रूप United Nations Conference on Trade and Development है. इसका मुख्यालय जिनेवा में है. इसे 1964 में स्थायी अंतर-सरकारी निकाय के रूप में स्थापित किया गया था.

UNCTAD, संयुक्त राष्ट्र सचिवालय का एक हिस्सा है. इस संगठन का मुख्य कार्य दुनिया में व्यापार एवं विकास को बढ़ावा देना है.

UNCDF ने भारतीय मूल की प्रीति सिन्हा को अपना कार्यकारी सचिव नियुक्त किया

संयुक्त राष्ट्र पूंजी विकास कोष (UNCDF) ने भारतीय मूल की प्रीति सिन्हा को अपना कार्यकारी सचिव नियुक्त किया है. उन्होंने जूडिथ कार्ल की जगह ली है. UNCDF में उनका लक्ष्य महिलाओं, युवाओं, छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों को छोटे कर्ज की सुविधा उपलब्ध कराने का होगा.

वह कम विकसित देशों (LDC), समुदायों, स्थानीय सरकारों और छोटे व्यवसायों को सक्षम और सशक्त बनाने और समावेशी अर्थव्यवस्थाओं का निर्माण करते हुए कोरोना महामारी की आर्थव्यवस्था पर प्रभावों को दूर करने के लिए काम करेंगी.

प्रीति सिन्हा, जिनेवा की एक डेवलपमेंट फाइनेंस फर्म ‘फाइनेंसिंग फॉर डेवलपमेंट LLC’ की CEO और प्रेसिडेंट के रूप में काम कर चुकी हैं. इससे पहले, वह नई दिल्ली में सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए निजी क्षेत्र के थिंक-टैंक यस ग्लोबल इंस्टीट्यूट की प्रबंधक थीं. यह संस्था भारत में प्रभाव निवेश पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करती है. उन्होंने अफ्रीकी विकास बैंक में वरिष्ठ संसाधन जुटाने की भूमिका भी निभाई है.

संयुक्त राष्ट्र पूंजी विकास कोष (UNCDF): एक दृष्टि

UNCDF का गठन 1966 में हुआ था. इसका मुख्यालय न्यूयार्क में है. UNCDF का काम दुनिया के 47 सबसे कम विकसित देशों (LDC) को छोटे कर्ज उपलब्ध कराना है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र को संबोधित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 सितम्बर को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 75वें सत्र को ऑनलाइन संबोधित किया. प्रधानमंत्री मोदी का संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह तीसरा संबोधन था. इससे पहले उन्होंने 2014 और 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया था. संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री मोदी ने हिंदी में ही अपनी बात रखी.

प्रधानमंत्री का उद्बोधन मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र में सुधार, भारत में चल रहे लोककल्याणकारी योजनाएं, कोरोना वैक्सीन के लिए भारत का वैश्विक सहयोग और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर केंद्रित था.

प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के मुख्य बिंदु

  • प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को पुरजोर तरीके से उठाया. उन्होंने 1945 में गठित संयुक्त राष्ट्र के इक्कीसवीं सदी में प्रासंगिकता पर सवाल उठाया.
  • भारत को संयुक्त राष्ट्र के डिसिजन मेकिंग स्ट्रक्चर से अलग रखा जाएगा? एक ऐसा देश जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, एक ऐसा देश जहां विश्व की 18 प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या रहती है, एक ऐसा देश जहां सैकड़ों भाषाएं हैं, सैकड़ों बोलियां हैं, अनेकों पंथ हैं, अनेकों विचारधाराएं हैं.
  • 2 अक्टूबर को विश्व अहिंसा दिवस और 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पहल भारत ने ही की थी. कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंटरनैशनल सोलर अलायंस ये भारत के ही प्रयास हैं.
  • भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी से लेकर ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी तक, सिक्यॉरिटी ऐंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन इसकी सोच या फिर इंडो-पसिफिक क्षेत्र के प्रति हमारे विचार सभी में इस दर्शन की झलक दिखाई देती है.
  • विश्व के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश के तौर पर भारत की वैक्सीन प्रोडक्शन और डिलिवरी क्षमता पूरी मानवता को इस संकट से बाहर निकालने के लिए काम आएगी.
  • बीते कुछ वर्षों में रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म इस मंत्र के साथ भारत ने करोड़ों भारतीयों के जीवन में बड़े बदलाव लाने का काम किया है. भारत ने सिर्फ 4-5 साल में 400 मिलियन से ज्यादा लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा, 600 मिलियन लोगों को खुले में शौच से मुक्त किया और 500 मिलियन से ज्यादा लोगों को मुफ्त इलाज से जोड़ करके दिखाया. आज भारत डिजिटल ट्रांजैक्शन में दुनिया के अग्रणी देशों में है. भारत 2025 तक अपने प्रत्येक नागरिक को टीबी से मुक्त करने के लिए बहुत बड़ा अभियान चला रहा है. भारत अपने गांवों के 150 मिलियन घरों में पाइप से पीने का पानी पहुंचाने का अभियान चला रहा है. भारत ने अपने 6 लाख गांवों को ब्रॉडबैंड ऑप्टिकल फाइबर से कनेक्ट करने की बहुत बड़ी योजना की शुरुआत की है.

टीएस तिरुमूर्ति संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि नियुक्त किये गये

सरकार ने टीएस तिरुमूर्ति को संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में भारत का स्थायी प्रतिनिधि नियुक्त किया है. वह भारतीय विदेश सेवा के 1985 बैच के अधिकारी है और फिलहाल विदेश मंत्रालय में सचिव पद पर कार्यरत हैं. तिरुमूर्ति इससे पहले जेनेवा में भारत के परमानेंट मिशन का हिस्‍सा रहे हैं. इसके अलावा उन्‍होंने फॉरेन सेक्रटरी के ऑफिस में डायरेक्‍टर और जॉइंट सेक्रटरी (UN, इकनॉमिक एंड सोशल) का जिम्‍मा भी संभाला है.

सैयद अकबरुद्दीन सेवानिवृत

टीएस तिरुमूर्ति ने न्यूयॉर्क में सैयद अकबरुद्दीन की जगह ली है. अकबरुद्दीन 30 अप्रैल को सेवानिवृत हो गये. वह 2016 से इस पद पर थे. उन्होंने इस वैश्विक मंच पर तमाम मुद्दों पर देश का रुख सफलतापूर्वक रखा है. आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद के सरगना मसूद अजहर को UN की ओर से ग्‍लोबल आतंकी घोषित करवाने में अकबरुद्दीन ने अहम भूमिका निभाई थी.

संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ के पूर्व महासचिव जेवियर पेरेज़ डी क्यूएलर का निधन

संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ के पूर्व महासचिव जेवियर पेरेज़ डी क्यूएलर का 4 मार्च को उनके पैतृक देश पेरू में निधन हो गया. वे 1981 से लेकर 1991 तक संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ के महासचिव रहे. पेरेज़ डी क्यूएलर ईरान-इराक युद्ध और अल सल्वाडोर में चल रहे गृह-युद्ध के दौरान संयुक्‍त राष्‍ट्र के प्रमुख रहे थे.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में अपने दो कार्यकालों के दौरान उन्होंने लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, एशिया और मध्य पूर्व में शांति समझौते किए. उनकी एक प्रमुख उपलब्धि आठ वर्षों के संघर्ष के बाद 1988 में ईरान और इराक के बीच युद्ध विराम के लिए बातचीत रही.

ईरान-इराक युद्ध के अलावा 1991 में अपने दूसरे कार्यकाल के अंत में डी क्यूएलर ने पश्चिमी सहारा में युद्ध की स्थिति को खत्म करने व अल सल्वाडोर, कंबोडिया व निकारागुआ में गृह-युद्ध को खत्म करने में मदद की.

24 अक्टूबर: संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस, विश्व विकास सूचना दिवस

प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को पूरे विश्व में संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस (United Nations Day) मनाया जाता है. इस वर्ष 2019 में 74वां संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस है. 1945 में संयुक्त राष्ट्र का गठन सभी के लिए शांति, विकास और मानव अधिकारों के समर्थन करने के लिए किया गया था.

संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 24 अक्तूबर 1945 को विश्व के 50 देशों ने संयुक्त राष्ट्र अधिकार-पत्र पर हस्ताक्षर कर किया था. भारत शुरुआती दिनों से ही इसका सदस्य है.

संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाएं हैं- अरबी, चाइनीज, अंग्रेजी, फ्रेंच, रसियन और स्पैनिश. आधिकारिक भाषाएं छह हैं, लेकिन यहां पर संचालन भाषा केवल अंग्रेजी और फ्रेंच हैं.

24 अक्टूबर: विश्व विकास सूचना दिवस

प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को विश्व विकास सूचना दिवस (World Development Information Day) मनाया जाता है. यह दिवस आम जनता के बीच सूचना के प्रसार के महत्व को दर्शाता है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1972 में विकास की समस्याओं की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने और उनके समाधान हेतु इस दिवस की शुरुआत की थी. महासभा ने यह निर्णय लिया था कि यह दिवस संयुक्त राष्ट्र दिवस की तारीख़ यानी 24 अक्टूबर को ही मनाया जाना चाहिए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र को संबोधित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितम्बर को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 74वें सत्र को संबोधित किया. प्रधानमंत्री मोदी का संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह दूसरा संबोधन था. पिछली बार 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया था. संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री मोदी ने हिंदी में ही अपनी बात रखी.

प्रधानमंत्री का उद्बोधन आतंकवाद, स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन, गरीबी उन्मूलन जैसे मुद्दों पर केंद्रित था.

प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के मुख्य बिंदु

आतंकवाद और शांति

  • आतंकवाद मानवता और दुनिया के लिए चुनौती हैं. इस मुद्दे पर बंटी हुई दुनिया उन सिद्धांतों को चोट पहुंचाती है, जिनके आधार पर यूएन का गठन हुआ है.
  • सवा सौ साल पहले स्वामी विवेकानंद ने विश्व धर्म संसद से दुनिया को एक संदेश दिया था. यह संदेश था, सद्भाव और शांति. भारत की ओर से आज भी दुनिया के लिए यही संदेश है.
  • पूरा विश्व इस साल महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहा है. सत्य और अहिंसा का उनका संदेश विश्व की शांति और प्रगति के लिए आज भी महत्वपूर्ण है.

जलवायु परिवर्तन

  • हमारा कार्बन उत्सर्जन और ग्लोबल वार्मिंग में सबसे कम योगदान रहा है, लेकिन पर्यावरण के लिए हमारे प्रयास बड़े हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने इंटरनैशनल सोलर अलायंस की स्थापना का भी जिक्र किया.
  • प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आने वाले 5 सालों में हम जल संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ ही 15 करोड़ घरों को पानी की सप्लाई से जोड़ने वाले हैं.

स्वच्छता और स्वास्थ्य

  • भारत में स्वच्छता को लेकर चलाए जा रहे मिशन की बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमने 5 साल में 11 करोड़ शौचालय दिए हैं.
  • दुनिया ने टीबी से मुक्ति के लिए 2030 का समय रखा है, लेकिन हम 2025 तक भारत को इससे मुक्त करने के लिए काम कर रहे हैं.
  • भारत दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ स्कीम चला रहा है. 50 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपये के इलाज की मदद दी जा रही है.

गरीबी उन्मूलन

  • उन्होंने जनधन अकाउंट, बैंकों में सीधी सब्सिडी का जिक्र किया.
  • हम अगले 5 सालों में दूरदराज के गांवों को जोड़ने के लिए सवा लाख किलोमीटर से ज्यादा सड़कें बनाने जा रहे हैं.
  • 2022 तक हम गरीबों के लिए दो करोड़ और घरों का निर्माण करने जा रहे हैं.


सेवानिवृत्त भारतीय लेफ्टिनेंट जनरल अभिजीत गुहा को यमन में UN मिशन का प्रमुख नियुक्त किया गया

संयुक्त राष्ट्र (UN) महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने भारतीय सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अभिजीत गुहा को यमन के हुदैदा शहर में UN मिशन का प्रमुख नियुक्त किया गया है. अभिजीत हुदैदा समझौते को सहायता देने वाले UN मिशन (UNMHA) की अगुआई करने के साथ ही रिडिप्लायमेंट कोआर्डिनेशन कमेटी (RCC) का अध्यक्ष पद भी संभालेंगे.

वह डेनमार्क के लेफ्टिनेंट जनरल माइकल लॉलेसगार्ड की जगह लेंगे, जिन्होंने 31 जनवरी से 31 जुलाई 2019 तक यह जिम्मेदारी संभाली थी.

अभिजीत 2013 में भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए थे. वह 2009 से 2013 तक संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षक अभियान विभाग में उप सैन्य सलाहकार और सैन्य सलाहकार रह चुके हैं. वह कंबोडिया में भी संयुक्त राष्ट्र के सैन्य पर्यवेक्षक के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने अफ्रीका और पश्चिम एशिया में संयुक्त राष्ट्र की कई जांच की अगुआई भी की है.