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अंतरिक्ष, बैंकिंग और पशुपालन क्षेत्रों में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गये

सरकार ने अंतरिक्ष, बैंकिंग और पशुपालन क्षेत्रों में सुधार के लिए हाल ही में कई निर्णय लिए हैं. प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में 24 जून को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ये निर्णय लिए गये. इसकी जानकारी परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष मंत्री जितेंद्र सिंह ने दी.

अंतरिक्ष से जुड़ी गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को मंजूरी

सरकार ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एतिहासिक सुधारों को लागू करते हुए अंतरिक्ष से जुड़ी गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को मंजूरी दी है. यह फैसला देश को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए किया गया है.

सरकार अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के प्रभावी सामाजिक-आर्थिक उपयोग के लिए ‘भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकार केंद्र’ (IN-SPACe) का गठन करेगी. IN-SPACe, Indian National Space Promotion and Authorization Centre का संक्षिप्त रूप है.

सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) अंतरिक्ष क्षेत्र की गतिविधियों को नया रूप देकर इसे आपूर्ति आधारित मॉडल से मांग आधारित मॉडल में बदलेगा.

पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास कोष की शुरुआत

एक और महत्त्वपूर्ण निर्णय में सरकार ने 15 हजार करोड़ रुपये के ‘पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास कोष’ (Animal Husbandry Infrastructure Development Fund) की शुरुआत की. इस कोष के तहत देश में पशुपालन, डेयरी और पशुधन संबंधी उद्यमों का विकास किया जायेगा. इसका उद्देश्य देश में करीब 35 लाख युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना है.

पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास कोष के तहत बैंक संबंधित क्षेत्रों में उद्यम शुरू करने के लिए 90 प्रतिशत तक ऋण देंगे. सरकार ने इस योजना के तहत सभी ऋण के लिए ब्याज में तीन प्रतिशत की छूट देने की घोषणा की है.

सहकारी बैंकों को RBI की निगरानी में लाने के लिए अध्यादेश

सरकार ने सभी सहकारी बैंकों को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की निगरानी में लाने के लिए एक अध्यादेश लाने का निर्णय किया. अध्यादेश को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद देश के 1,482 शहरी सहकारी बैंक और 58 बहु-राज्य सहकारी बैंक RBI की निगरानी (सुपरवाइजरी पॉवर्स) के अंतर्गत आ जाएंगे.

यह अध्यादेश इन बैंकों में जमाकर्ताओं की राशि को सुरक्षित रखने का आश्वासन देने के लिए किया गया है. अब RBI की शक्तियां जैसे कि अनुसूचित बैंकों पर लागू होती हैं, वैसे ही अब सहकारी बैंकों के लिए भी लागू होंगी.

SpaceX का ड्रैगन अंतरिक्ष यान दो अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पहुँचाया

अमेरिका के निजी अंतरिक्ष कंपनी स्‍पेसएक्‍स (SpaceX) का अंतरिक्ष यान ‘क्रू-ड्रैगन’ 31 मई को दो अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर सफलतापूर्वक अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन (International Space Station- ISS) पहुँचा. इस प्रकार SpaceX अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने वाली पहली निजी कंपनी बन गई है.

वाणिज्यिक अंतरिक्ष यात्रा में एक नये युग की शुरूआत

SpaceX के अंतरिक्ष यान क्रू-ड्रैगन का ऐतिहासिक प्रक्षेपण फ्लोरिडा में केनेडी अंतरिक्ष केन्‍द्र से 30 मई को किया गया था. यह अंतरिक्ष यान नासा के अंतरिक्ष यात्री- बॉब बेंकन और डग हर्ले को लेकर गया है. इस अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण से वाणिज्यिक अंतरिक्ष यात्रा में एक नये युग की शुरूआत हुई है.

प्रक्षेपण के 19 घंटे की यात्रा के बाद नासा के अंतरिक्ष यात्री बॉब बेंकन और डग हर्ले अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन (ISS) पर सफलतापूर्वक उतर गये हैं. ISS में पहले से उपस्थित नासा के अंतरिक्ष यात्री क्रिस्‍टोफर कैसिडी और रूस के अंतरिक्ष यात्री अनातोली इवानीशिन और इवान वैगनर ने उनका स्‍वागत किया. क्रू-ड्रैगन ISS से जुड़े अपने कार्यों के पूरा होने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को वापस कर लाएगा.

अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन क्या है?

अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन (International Space Station- ISS) बाहरी अन्तरिक्ष में मानव निर्मित उपग्रह है. इसे अनुसंधान और शोध के लिए बनाया गया है. इसे पृथ्वी की निकटवर्ती कक्षा में स्थापित किया गया है.

ISS विश्व की कई स्पेस एजेंसियों का संयुक्त उपक्रम है. इसे बनाने में संयुक्त राज्य की नासा के साथ रूस की रशियन फेडरल स्पेस एजेंसी (RKA), जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA), कनाडा की कनेडियन स्पेस एजेंसी (CSA) और यूरोपीय देशों की संयुक्त यूरोपीयन स्पेस एजेंसी (ESA) काम कर रही हैं.

स्‍पेसएक्‍स (SpaceX): एक दृष्टि

  • SpaceX का पूरा नाम ‘स्पेस एक्सप्लोरेशन टेक्नोलॉजीज कार्पोरेशन’ है. यह अन्तरिक्ष के क्षेत्र में कार्य करने वाली एक निजी कंपनी है. इसका मुख्यालय हैथॉर्न, कैलिफ़ोर्निया में है.
  • 2002 में अंतरिक्ष परिवहन लागत को कम करने और मंगल ग्रह के उपनिवेशीकरण को सक्षम करने के लक्ष्य के साथ उद्यमी एलन मस्क ने इसकी स्थापना की थी.
  • SpaceX ने फाल्कन और ड्रैगन अंतरिक्ष यान विकसित किया है, जो वर्तमान में पृथ्वी कक्षा में पेलोड वितरित करता है.

ISRO ने GSLV-F 10 जियो इमेजिंग सैटेलाइट, GISAT-1 के प्रक्षेपण की घोषणा की

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 5 मार्च को जियो इमेजिंग सैटेलाइट- GISAT-1 का प्रक्षेपण करेगा. यह प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से किया जायेगा.

इस प्रक्षेपण में GSLV-F 10 राकेट के माध्यम से GISAT-1 सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (भू-समकालीन स्थानांतरण कक्षा- GTO) में स्थापित किया जाएगा. इसके बाद, उपग्रह प्रणोदन प्रणाली का उपयोग करके अंतिम भूस्थिर कक्षा में पहुंच जाएगा. यह GSLV का 14वां उड़ान होगा.

GISAT-1: एक दृष्टि

  • GISAT-1 एक अत्याधुनिक तेजी से धरती का अवलोकन करने वाला उपग्रह है. इसका वजन 2,275 किलोग्राम है.
  • इस GSLV उड़ान में पहली बार चार मीटर व्यास का ओगिव आकार का पेलोड फेयरिंग (हीट शील्ड) प्रवाहित किया जा रहा है.
  • GISAT-1 में इमेजिंग कैमरों की एक विस्तृत श्रंखला है. ये निकट इंफ्रारेड और थर्मल इमेजिंग करने में सक्षम हैं. इन कैमरों में हब्बल दूरदर्शी जैसा 700 एमएम का एक रिची च्रीटियन प्रणाली का टेलीस्कोप का इस्तेमाल किया गया है.
  • इसमें कई हाइ-रिजोल्यूशन कैमरे हैं जो उपग्रह की ऑन-बोर्ड प्रणाली द्वारा ही संचालित होंगे. इसकी एक और खासियत ये है कि ये 50 मीटर से 1.5 किलोमीटर की रिजोल्यूशन में फोटो ले सकता है.

NASA ने सूर्य के ध्रुवों की तस्वीर लेने के लिए सोलर ऑर्बिटर स्पेसक्राफ्ट प्रक्षेपित किया

यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (NASA) ने 9 फरवरी को संयुक्त रूप से ‘सोलर ऑर्बिटर स्पेसक्राफ्ट’ प्रक्षेपित किया है. इस महत्वाकांक्षी मिशन का उद्देश्य पहली बार सूर्य के ध्रुवों की तस्वरी लेना है. 1.5 अरब डॉलर की लागत वाले इस स्पेसक्राफ्ट को फ्लॉरिडा के केप कैनावरल एयर फोर्स स्टेशन से ‘यूनाइटेड लॉन्च अलायंस एटलस 5’ रॉकेट के माध्यम से प्रक्षेपित किया गया.

सोलर ऑर्बिटर स्पेसक्राफ्ट 7 साल में कुल 4 करोड़ 18 लाख किलोमीटर दूरी तय करेगा. प्रक्षेपण के बाद पहले दो दिनों में इसके सोलर ऑर्बिटर अपने तमाम उपकरणों और ऐंटिना को तैनात करेगा जो धरती तक संदेश भेजेंगे और वैज्ञानिक आंकड़ों को जुटाएंगे. वैज्ञानिक सोलर ऑर्बिटर से सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र के बारे में और ज्यादा जानकारी हासिल कर सकेंगे.

सोलर ऑर्बिटर से पहले यूलिसेस मिशन प्रक्षेपित किया था

ESA और NASA ने इससे पहले 1990 में ‘यूलिसेस मिशन’ प्रक्षेपित किया था, जिससे वैज्ञानिकों को सूर्य के चारों तरफ के अहम क्षेत्र को पहली बार मापने में मदद की थी. यूलिसेस में कैमरा नहीं लगा था लेकिन सोलर ऑर्बिटर पर कैमरे लगे हैं जो सूर्य के ध्रुवों की पहली बार तस्वीर मुहैया कराएंगे.

क्रिस्टीना कोच ने किसी माहिला द्वारा सबसे लंबे समय तक अन्तरिक्ष में रहने का रिकॉर्ड बनाया

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच अन्तर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर लगभग 11 महीने बिताने के बाद 6 फरवरी को सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आईं. अंतरिक्ष में उनका यह मिशन किसी महिला का अब तक का सबसे लंबा मिशन था. कोच ने अंतरिक्ष में 328 दिन व्यतीत किये. इससे पहले नासा की पेगी व्हिटसन के पास था सबसे अधिक 289 दिन रहने का रिकॉड था.

क्रिस्टीना कोच के साथ यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के लुका परमितानो और रूसी अंतरिक्षक एजेंसी के अलेक्जेंडर स्कोवोर्तसोव भी थे. कोच 14 मार्च 2019 को पृथ्वी से रवाना हुई थीं. अपने मिशन के दौरान कोच ने 210 अनुसंधानों में हिस्सा लिया जो नासा के आगामी चंद्र मिशन और मंगल पर मानव को भेजने की तैयारियों में मददगार होंगे.

पेगी व्हिटसन का रिकॉर्ड तोडा, स्कॉट केली पहले स्थान पर

अमेरिकी की अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच ने पिछले वर्ष 28 दिसम्बर को किसी महिला द्वारा एक ही अंतरिक्ष उड़ान में 289 दिन रहने के पूर्ववर्ती रिकार्ड को तोड़ दिया था. उक्त रिकार्ड नासा की पेगी व्हिटसन ने 2016-2017 में बनाया था. अपने पहले ही मिशन में कोच लगातार सबसे लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने वाले अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों की सूची में स्कॉट केली के बाद दूसरे स्थान पर पहुँच गयी हैं जो 340 दिन तक लगातार अंतरिक्ष में रहे थे.

328 दिन में की 13.9 करोड़ किलोमीटर की यात्रा

अंतरिक्ष में 328 दिन के अपने प्रवास के दौरान कोच ने धरती के 5,248 चक्कर लगाते हुये 13.9 करोड़ किलोमीटर की यात्रा की है. उन्होंने अपने अंतिम स्पेसवॉक में जेसिका मीर के साथ बाहर निकली थीं. इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी स्पेसवॉक में पूरी तरह महिलाओं का दल अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर गया हो.

अन्तर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) क्या है?

  • अन्तर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन (International Space Station) मानव निर्मित एक उपग्रह है. यह बाहरी अन्तरिक्ष (पृथ्वी से करीब 350 किलोमीटर ऊपर) में औसतन 27724 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से परिक्रमा कर रहा है. ISS एक अन्तरिक्ष शोध स्थल जिसे बनाने की शुरुआत 1998 में हुआ था और यह 2011 तक बन कर तैयार हो गया था.
  • ISS कार्यक्रम, संयुक्त राज्य की नासा, रूस की रशियन फेडरल स्पेस एजेंसी (RKA), जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA), कनाडा की कनेडियन स्पेस एजेंसी (CSA) और यूरोपीय देशों की संयुक्त यूरोपीयन स्पेस एजेंसी (ESA) की कई स्पेस एजेंसियों का संयुक्त उपक्रम है.

ISRO ने स्कूली छात्रों के लिए यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम का दूसरा संस्करण शुरू किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 3 फरवरी को ‘युवा विज्ञानी कार्यक्रम- युविका’ (ISRO Young Scientist Programme) 2020 शुरू किया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूली छात्रों को अंतरिक्ष की जानकारी और उसकी टेकनोलॉजी की समझ को विकसित करना है.

युविका 2020 के लिए 24 फरवरी, 2020 तक www.isro.gov.in पर आवेदन किए जा सकते हैं. यह कार्यक्रम गर्मियों के छुट्टियों के दौरान दो सप्ताह 11 मई से 22 मई 2020 तक चलेगा.

इसरो का युविका कार्यक्रम 2019 में शुरू किया गया था. 2020 में इस कार्यक्रम का दूसरा संस्करण है. इस कार्यक्रम का मकसद बच्चों को स्पेस टक्नोलॉजी, स्पेस साइंस जैसी चीजों के बारे में जागरूक करना है.

योग्यता

जिन स्टूडेंट्स ने आठवीं की परीक्षा पास कर ली है और नौवीं में पढ़ाई कर रहे हैं, वह इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं. इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सीबीएसई, आईसीएसई और राज्‍य पाठ्यक्रम को मिलाकर हर राज्‍य/केंद्र शासित प्रदेश से तीन विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा.

चयन

उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन पंजीकरण के जरिए किया जाएगा. इसके लिए 24 फरवरी तक ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया चलेगी. 8वीं के प्राप्त मार्क्स और एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में प्रदर्शन के आधार स्टूडेंट्स का चयन होगा.

गगनयान मिशन में मानव से पहले रोबोट ‘व्‍योम मित्र’ को अन्तरिक्ष भेजा जायेगा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) गगनयान मिशन के अंतर्गत मानव को अन्तरिक्ष भेजने से पहले दो मानवरहित मिशनों का प्रक्षेपण करेगा. मानवरहित मिशन में ISRO ने अंतरिक्ष की स्थिति को बेहतर तरीके से समझने के लिए ह्यूमैनोयड मॉडल (मानव की तरह दिखने वाला रोबोट) भेजने की योजना बनाई है. इस ह्यूमनॉयड रोबोट को इसरो ने ‘व्योम मित्र’ नाम दिया है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख के सिवन ने कहा कि दिसंबर 2021 में भारत के प्रथम मानवयुक्त अंतरिक्षयान ‘गगनयान’ के प्रक्षेपण के मद्देनजर इसरो दिसंबर 2020 और जून 2021 में दो मानवरहित मिशनों का प्रक्षेपण करेगा. व्योम मित्र उसी का हिस्सा है.

गगनयान मिशन तीन चरणों में पूरा होगा

गगनयान मिशन तीन चरणों में पूरा किया जायेगा. दिसंबर 2020 और जून 2021 में दो मानवरहित मिशन और उसके बाद दिसंबर 2021 में मानवयुक्त अंतरिक्ष यान. व्योम मित्र, वैज्ञानिक की तरह हर हलचल पर नज़र रखेगी. यह एक इंसान की तरह काम करेगा और वहां की जानकारियां उपलब्ध कराएगा.

गगनयान मिशन का उद्देश्य

गगनयान मिशन के तहत 2022 तक तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजने का लक्ष्य है. इस मिशन का उद्देश्य न केवल अंतरिक्ष में भारत का पहला मानवयान भेजना है, बल्कि ‘निरंतर अंतरिक्ष मानव उपस्थिति’ के लिए नया अंतरिक्ष केंद्र स्थापित करना भी है. गगनयान इसरो के ‘अंतर-ग्रहीय मिशन’ के दीर्घकालिक लक्ष्य में भी मदद करेगा. अंतर-ग्रहीय मिशन दीर्घकालिक एजेंडे में शामिल है.

फ्रांस में दो हफ्ते का प्रशिक्षण

गगनयान मिशन के तहत अंतरिक्ष भेजे जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों का चयन कर लिया गया है. ये अंतरिक्ष यात्री भारतीय वायुसेना के हैं. इन चुने गए अंतरिक्षयात्रियों की सेहत की निगरानी के लिए फ्रांस, भारतीय फ्लाइट सर्जनों को प्रशिक्षण देगा. दो हफ्ते का यह प्रशिक्षण गगनयान अभियान का अहम पहलू है.

मानव अंतरिक्ष उड़ान पर अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्‍ठी आयोजित की गयी

मानव अंतरिक्ष उड़ान और अन्‍वेषण, वर्तमान चुनौतियां और भावी रूझान विषय पर अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्‍ठी बेंगलूरू में 22-24 जनवरी को आयोजित किया गया. भारतीय अं‍तरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया ने संयुक्‍त रूप से इसका आयोजन किया था. 2022 तक भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के मद्देनजर यह संगोष्‍ठी महत्त्वपूर्ण है.

ISRO के संचार उपग्रह जीसैट-30 का फ्रेंच गुयाना से सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के संचार उपग्रह जीसैट-30 का 17 जनवरी को सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया. यह प्रक्षेपण फ्रेंच गुयाना के कोउरू लांच बेस से ‘एरियन-5’ रॉकेट (अन्तरिक्ष-यान) के माध्यम से किया गया. फ्रेंच गुयाना दक्षिण अमेरिका के उत्तर पूर्वी तट पर फ्रांस के क्षेत्र में स्थित है.

जियोसिनक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में प्रक्षेपित किया गया
प्रक्षेपण में उपग्रह जीसैट-30 को जियोसिनक्रोनस (भूतुल्यकालिक) ट्रांसफर ऑर्बिट में प्रक्षेपित किया गया. आने वाले दिनों में धीरे-धीरे करके चरणबद्ध तरीके से उसे जियोस्टेशनरी (भूस्थिर) कक्षा में भेजा जाएगा. जियोस्टेशनरी कक्षा की ऊंचाई भूमध्य रेखा से करीब 36,000 किलोमीटर होती है. जीसैट-11 को जियोस्टेशनरी कक्षा में 74 डिग्री पूर्वी देशांतर पर रखा जाएगा.

उपग्रह जीसैट-30: एक दृष्टि

  • जीसैट-30 टेलीविजन, दूरसंचार और प्रसारण के लिए गुणवत्‍तापूर्ण सेवाएं उपलब्‍ध कराएगा.
  • 30 वर्ष की मिशन अवधि वाला यह उपग्रह डीटीएच, टेलीविजन अपलिंक और वीसैट सेवाओं के लिए क्रियाशील संचार उपग्रह है.
  • तीन हजार 357 किलोग्राम के इस उपग्रह में 12-सी और 12-केयू बैंड के ट्रांसपोंडर लगे हैं.
  • यह उपग्रह केयू बैंड में भारतीय मुख्य भूमि और द्वीपों को, सी बैंड में खाड़ी देशों, बड़ी संख्या में एशियाई देशों और आस्ट्रेलिया को कवरेज प्रदान करेंगा.
  • यह अपेक्षाकृत अधिक कवरेज के साथ इनसैट-4A का स्‍थान लेगा, जिसकी अवधि समाप्‍त हो रही है.
  • भारत के अलावा ऑस्‍ट्रेलिया, खाड़ी देश, और बड़ी संख्‍या में अन्‍य एशियाई देश भी इसके दायरे में आयेंगे.
  • जीसैट-30 का पेलोड विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किया गया है कि ट्रांसपोंडरों की संख्‍या अधिक से अधिक बढ़ाई जा सके.

ISRO मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए कर्णाटक के चल्लकेरे में केंद्र स्थापित करेगा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने मानव मिशन के लिए कर्णाटक के चल्लकेरे (चित्रदुर्गा) में विश्वस्तरीय “मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र” (HSFC) स्थापित करेगा. इस केंद्र में अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण से लेकर मानव मिशन से जुड़ी सभी गतिविधियां संचालित होंगी. ISRO ने इस केंद्र के विकास के लिए 2700 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया है.

यह नया केंद्र योजना के मुताबिक अगले तीन साल में तैयार होगा. इसके तैयार हो जाने के बाद मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम (HSP) से जुड़ी तमाम गतिविधियां चल्लकेरे स्थित केंद्र में स्थानांतरित हो जाएंगी.

ISRO के मौजूदा मानव मिशन “गगनयान” मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षित करने के लिए रूस भेजा जा रहा है लेकिन भविष्य में यहां ऐसी सुविधाएं होंगी कि विदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. दरअसल, विदेशों से सहायता के लिए भारत को भारी-भरकम राशि का भुगतान करना पड़ता है.

क्या है गगनयान मिशन?

गगनयान मिशन के तहत वर्ष 2022 तक तीन अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. इसके लिए चार अंतरिक्ष यात्रियों का चयन किया जा चुका है जिन्हें जनवरी के तीसरे सप्ताह में प्रशिक्षण के लिए रूस भेजा जाएगा. हालांकि, चल्लकेरे केंद्र के तैयार होने में अभी कम से कम तीन साल का समय लगेगा और संभवत: यह केंद्र पहले मानव मिशन के बाद ही अस्तित्व में आ पायेगा.

चल्लकेरे साइंस सिटी: एक दृष्टि

चल्लकेरे साइंस सिटी के उपनाम से मशहूर है. यहां रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (DRDO), भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), भारतीय विज्ञान संस्थान (IISC) और इसरो के केंद्र हैं जो लगभग 10 हजार एकड़ क्षेत्र में फैले हैं.

चीन ने ‘लॉन्ग मार्च 5’ रॉकेट का प्रक्षेपण किया, ‘शिजियान-20’ उपग्रह को प्रक्षेपित किया गया

चीन ने 27 दिसम्बर को ‘लॉन्ग मार्च 5’ रॉकेट का प्रक्षेपण किया. यह प्रक्षेपण दक्षिण चीन के हैनान में वेनचांग प्रक्षेपण स्थल से किया गया. प्रक्षेपण में इस राकेट के द्वारा ‘शिजियान-20’ नामक उपग्रह को प्रक्षेपित किया गया. यह चीन का सबसे उन्नत संचार उपग्रह है.

लॉन्ग मार्च-5: एक दृष्टि
‘लॉन्ग मार्च 5’ रॉकेट दुनिया के सबसे शक्तिशाली रॉकेट में से है. चीन इस रॉकेट के माध्यम से 2020 में मंगल ग्रह पर अपने तय मिशन को पूरा करने योजना है. यह राकेट 25 टन तक के भार ले जाने में सक्षम है.

अमेरिका ने अंतरिक्ष बल का गठन किया, अमेरिकी सेना का छठा आधिकारिक बल होगा

अमेरिका ने हाल ही में ‘अंतरिक्ष बल’ (Space Force) के गठन की घोषणा की है. यह अंतरिक्ष बल अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के तहत कार्य करेगा. इसके गठन के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण कानून 2020’ पर हस्ताक्षर किया है.

अंतरिक्ष बल अमेरिकी सेना का छठा आधिकारिक बल होगा. अन्य बलों में थलसेना, वायुसेना, नौसेना, मरीन और तटरक्षक बल शामिल हैं. यह कानून पेंटागन बल के लिए शुरुआती बजट तय करेगा जो सेना की पांच अन्य शाखाओं के लिए बराबर होगी.

अंतरिक्ष बल के गठन के उद्देश्य

  • अमेरिका ने चीन और रूस से लगातार मिल रही 21वीं सदी की सामरिक चुनौतियों के काट के लिए ‘अंतरिक्ष बल’ का गठन किया है. अंतरिक्ष विश्व का नया युद्ध क्षेत्र है. अमेरिकी अंतरिक्ष बल स्टार वार में यानि उपग्रह रोधी हथियार और उपग्रहों को मार गिराने वाले हथियारों के लिहाज से अपने वर्चस्व को कायम रखेगा.
  • अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने कहा है कि अंतरिक्षीय क्षमताओं पर हमारी निर्भरता बहुत तेजी से बढ़ी है और आज बाहरी अंतरिक्ष अपने आप में किसी युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो गया है. उन्होंने कहा कि उस क्षेत्र में अमेरिकी वर्चस्व को बरकरार रखना अब अमेरिकी अंतरिक्ष बल का मिशन है.
  • वर्ष 2003 के बाद से चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ा है. फरवरी 2019 में पेंटागन ने एक रिपोर्ट में कहा था कि चीन और रूस ने ऐसी प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए बड़े प्रयास शुरू कर दिए हैं जिनकी मदद से वे संघर्ष के हालात में अमेरिका और उसके सहयोगियों के उपग्रहों को नष्ट कर सकते हैं या उनमें गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं.

चीन की प्रतिक्रिया

अंतरिक्ष में एक ताकत के रूप में उभर रहे चीन ने अमेरिकी अंतरिक्ष बल के गठन को अंतरिक्ष में शांति और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया है. चीन ने इसे अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण इस्तेमाल पर अन्तर्राष्ट्रीय आम सहमति का गंभीर उल्लंघन और अंतरिक्ष में शांति तथा सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया है.

ISRO ने भारत की नवीनतम रडार इमेजिंग भू-पर्यवेक्षी उपग्रह RISAT-2BR1 का सफल प्रक्षेपण किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 11 दिसम्बर को भारत की नवीनतम रडार इमेजिंग भू-पर्यवेक्षी उपग्रह RISAT-2BR1 का सफल प्रक्षेपण किया. यह प्रक्षेपण आंध्रप्रदेश में श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C-48 प्रक्षेपण यान (राकेट) के माध्यम से किया गया.

44.4 मीटर लंबे PSLV-C-48 का यह 50वां मिशन था. इस प्रक्षेपण में RISAT-2BR1 को 576 किलोमीटर की कक्षा में स्थापित किया गया. इस प्रक्षेपण में PSLV-C-48 ने इस्राइल, इटली, जापान और अमरीका के 9 छोटे उपग्रह को भी प्रक्षेपित किया. न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड के साथ वाणिज्यिक समझौते के तहत ये विदेशी उपग्रह प्रक्षेपित किए गये.

RISAT-2BR1 उपग्रह: एक दृष्टि

  • RISAT-2BR1 का भार 628 किलोग्राम है. यह पृथ्‍वी के रडार चित्र लेने वाला भू-प्रेक्षपण उपग्रह है. यह उपग्रह दिन और रात में काम कर सकता हैं.
  • इस उपग्रह की आयु पांच साल है और ये सैन्य उपयोग के साथ-साथ कृषि, वानिकी और आपदा प्रबंधन में भी काम आएगा.
  • यह उपग्रह निगरानी के लिए सिंथेटिक अपर्चर राडार (SAR) का उपयोग करते हैं. इसके द्वारा ख़राब मौसम में भी निगरानी की जा सकती है.