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भारत में वन की स्थिति रिपोर्ट-2019 जारी, वनों के क्षेत्रफल में पांच हजार वर्ग किलोमीटर की वृद्धि

पर्यावरण और वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 30 दिसम्बर को ‘भारत में वन क्षेत्र की स्थिति रिपोर्ट 2019’ (India State of Forest Report) जारी किया. यह रिपोर्ट भारतीय वन सर्वेक्षण (Forest Survey of India) द्वारा तैयार की गयी है.

भारत में वन क्षेत्र की स्थिति रिपोर्ट 2019: मुख्य तथ्य

  • इस सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार भारत में पिछले दो वर्ष में देश के हरित क्षेत्र में 5,188 वर्ग किमी की बढ़ोतरी हुई है जिसमें वन क्षेत्र और वन से इतर वृक्षों से आच्छादित हरित क्षेत्र भी शामिल है.
  • देश में कुल वन और वृक्षावरण 80.73 मिलियन हेक्टेयर हो गया है. यह देश के कुल क्षेत्रफल का 24.56 प्रतिशत है.
  • हरित क्षेत्र में बढ़ोतरी वाले दुनिया के अग्रणी देशों में भारत शामिल है और इसमें सरकार की पर्यावरण हितैषी विकास नीतियों का प्रमुख योगदान है.
  • बांस का हरित क्षेत्र 2.06 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 3229 वर्ग किमी हो गया है. देश में मैनग्रोव क्षेत्र 54 वर्ग किलोमीटर बढ़ गया. यह पिछले आकलन की तुलना में 1.1 प्रतिशत अधिक है.
  • 2017 में आकलन की तुलना में देश का कार्बन स्‍टॉक 42 करोड़ 60 लाख टन बढ़ गया है.
  • इस रिपोर्ट से भरोसा होता है कि भारत पैरिस समझौते का लक्ष्‍य हासिल करने के लिए सही दिशा में बढ़ रहा है.
  • वर्तमान आकलन से पूर्वोत्‍तर भारत में वनों का दायरा 765 वर्ग किलोमीटर घटने का पता चला है. यह पिछले आकलन की तुलना में 0.45 प्रतिशत कम है. असम और त्रिपुरा को छोड़कर पूर्वोत्‍तर के सभी राज्‍यों में वनक्षेत्र घटा है.

भारतीय वन सर्वेक्षण

भारतीय वन सर्वेक्षण (Forest Survey of India) दो साल के अंतराल पर ISFR रिपोर्ट प्रकाशित करता है. पहला रिपोर्ट 1987 में जारी किया गया था. तब से अब तक 16 आकलन पूरे हो चुके हैं. इस बार के आकलन में सबसे खास बात ये रही कि पहली बार ऑर्थो-रेक्टिफाइड सैटेलाइट आंकड़ों का उपयोग वनावरण मैपिंग के लिए किया गया है.

नीति आयोग ने भारत के सतत विकास लक्ष्‍य सूचकांक 2019-20 जारी किया

नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने 30 दिसम्बर को भारत के सतत विकास लक्ष्‍य सूचकांक (Sustainable Development Goals Index- SDG) का दूसरा संस्‍करण (2019-20) जारी किया. इस सूचकांक में देश के समग्र रैंक में सुधार हुआ है और यह 57 से 60 हो गया है. यह उपलब्धि जल, स्‍वच्‍छता, ऊर्जा और उद्योग क्षेत्रों में बेहतर काम के कारण हासिल की है.

सूचकांक की राज्‍यों की सूची में केरल, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना सबसे ऊपर हैं. इस वर्ष किसी भी राज्‍य को 100 अंकों में से 50 से कम नहीं मिले हैं. कुपोषण और स्‍त्री-पुरूष असमानता देश के लिए समस्‍या बनी हुई है जिस पर अधिक ध्‍यान देने की जरूरत है. स्वच्छ भारत अभियान, उज्जवला योजना सहित तमाम जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के चलते भी भारत का प्रदर्शन बेहतर हुआ है.

इस बार के सूचकांक के मुताबिक लैंगिक समानता और पोषण जैसे विषयों पर अभी राज्यों को और ज्यादा मेहनत की जरुरत है तो बिहार और झारखंड जैसे राज्यों को अन्य राज्यों की तरह तमाम पैमानों पर और काम करना होगा. उत्तर प्रदेश और असम जैसे राज्यों में स्वास्थ्य, शिक्षा, गरीबी, भूख जैसे तमाम मानकों पर पिछले साल अच्छा काम हुआ है, जिससे इन राज्यों की रैंकिंग और ज्यादा सुधरी है.

सतत विकास लक्ष्‍य सूचकांक: एक दृष्टि

  • सतत विकास लक्ष्‍य सूचकांक में संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित वर्ष 2030 के सतत विकास के लक्ष्‍य प्राप्‍त करने की दिशा में देश के राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों में हुई प्रगति का लेखा जोखा होता है.
  • इस सूचकांक में 100 मानकों के आधार पर राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों की प्रगति का आंकलन किया गया है.
  • ये सूचकांक बताते हैं कि देश और राज्‍य तथा केन्‍द्र शासित प्रदेश सतत विकास के लक्ष्‍यों को पाने के दिशा में क्‍या कर रहे हैं और इसे पाने के लिए कितना और समय लगेगा.