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जम्मू-कश्मीर में चूना पत्थर खनिज ब्लॉकों की पहली नीलामी

जम्मू-कश्मीर में चूना पत्थर खनिज ब्लॉकों की पहली नीलामी प्रक्रिया औपचारिक रूप से 24 नवंबर 2025 को जम्मू में शुरू की गई है. इसका उद्घाटन केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने किया.

मुख्य बिन्दु

  • यह खनन सुधारों के तहत जम्मू-कश्मीर में पहली खनन ब्लॉक नीलामी है, जो क्षेत्र में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगी.
  • जम्मू-कश्मीर में कुल सात चूना पत्थर ब्लॉक (लगभग 314 हेक्टेयर क्षेत्र) हैं जिसकी नीलामी प्रक्रिया शुरू हुई है. ये ब्लॉक अनंतनाग, राजौरी, और पुंछ जिले में हैं.
  • इस पहल से स्थानीय समुदायों के लिए रोज़गार सृजन, राजस्व वृद्धि, और औद्योगिक विस्तार होने की उम्मीद है, जो ‘विकसित भारत 2047’ के विजन में योगदान देगा.
  • यह नीलामी खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (MMDR Act), 2015 के तहत शुरू किए गए खनन सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम है.

कश्‍मीर घाटी में पहली मालगाड़ी पहुंची

  • भारतीय रेलवे ने 9 अगस्त 2025 को पंजाब के रूपनगर से कश्मीर के अनंतनाग तक पहली बार एक मालगाड़ी चलाई.
  • सीमेंट से लदी यह मालगाड़ी कश्मीर घाटी के अनंतनाग गुड्स शेड पहुँची, जो कश्मीर क्षेत्र को राष्ट्रीय मालगाड़ी नेटवर्क से जोड़ने में एक बड़ी उपलब्धि है.
  • इससे पहले इसी वर्ष जून में 272 किलोमीटर लंबे उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) का सफल शुभारंभ हुआ था.
  • 272 किलोमीटर लंबी USBRL तीन भागों में विभाजित है – 25 किलोमीटर उधमपुर-कटरा, 111 किलोमीटर कटरा-बनिहाल और 136 किलोमीटर बनिहाल-बारामूला लाइन.
  • इस मालगाड़ी संपर्क से देश भर के बाजारों तक पहुँच आसान होने से कश्मीरी फल और हस्तशिल्प उद्योग को नई जान मिलने की उम्मीद है.
  • रेल नेटवर्क द्वारा ढुलाई से फल उत्पादकों को फायदा होगा क्योंकि इससे परिवहन में लगने वाला समय और लागत दोनों कम हो जाएगी. कश्‍मीर घाटी में रहने वाले लोगों के लिए वस्‍तुओं की कीमतों में कमी आएगी.

अमरीका ने द रेजिस्टेंस फ्रंट को आतंकवादी संगठन घोषित किया

  • अमरीका ने द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को आतंकवादी संगठन घोषित किया है. इसकी घोषणा अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 18 जुलाई 2025 को की.
  • अमेरिकी विदेश विभाग ने TRF को विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) और वैश्विक स्तर पर विशेष रूप से नामित आतंकवादी (SDGT) की सूची में डाला है. अमेरिकी विदेश विभाग ने TRF को लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा बताया है.

पहलगाम आतंकवादी हमले के लिए जिम्मेदार

  • TRF ने 22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी ली थी. इस हमले में 26 पर्यटक मारे गए थे.
  • इस आतंकवादी हमले के कारण भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और पाकिस्तान स्थित 9 आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर दिया गया था.

आतंकवादी संगठन घोषित होने से क्या होगा असर

  • अमेरिका में TRF की संपत्तियाँ ज़ब्त कर ली जाएँगी और वे उनका उपयोग नहीं कर पाएँगे. इसके खाते फ्रीज किए जाएंगे और उस तक फंडिंग पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा.
  • TRF के सदस्यों को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी और उन्हें देश से निर्वासित कर दिया जाएगा. किसी अमेरिकी व्यक्ति या संस्था के लिए इस समूह को सहायता करना अवैध होगा.
  • इससे दूसरे देश भी अब TRF के खिलाफ कदम उठाने के लिए प्रेरित होंगे. पाकिस्तान और उन देशों पर भी दबाव बढ़ाएगा जो TRF जैसे संगठनों की अनदेखी करते रहे हैं.

द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) क्या है?

  • द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा का एक छद्म संगठन है. लश्कर-ए-तैयबा बडे़ इस्लामी आतंकवादी संगठनों में से एक है. लश्कर-ए-तैयबा को संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है.
  • TRF की शुरुआत 2019 में हुई थी. इसका मुख्यालय पाकिस्तान के मुरीदके में है. ये आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर में खासा सक्रिय रहा है.
  • इसका मकसद था कश्मीर में हाइब्रिड आतंकवाद को बढ़ावा देना यानी आम नागरिकों की आड़ में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना.
  • भारत सरकार के केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 5 जनवरी, 2023 को गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम 1967 के तहत TRF को आतंकवादी संगठन घोषित कर प्रतिबंधित कर दिया है.

उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल लिंक, दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च पुल का उद्घाटन

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जून 2025 को जम्मू के कटरा में आयोजित एक समारोह में 46 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत की विभिन्न रेल और विकास परियोजनाओं का उद्घाटन/शिलान्यास किया.
  • प्रधानमंत्री ने उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल लिंक (USBRL) परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किया. यह रेल लिंक कश्मीर घाटी को देश के बाकी हिस्सों जोड़ता है.
  • उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल लिंक (USBRL) परियोजना में चिनाब रेलवे आर्च पुल और अंजी खड्ड पुल शामिल हैं.

चिनाब रेलवे आर्च पुल

  1. चिनाब रेलवे आर्च पुल (Chenab Rail Arch Bridge), दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च पुल (Worlds Highest Railway Arch Bridge) है जो चिनाब नदी बना बना है. यह पुल जम्मू-कश्मीर के रायसी जिले के कौरी और बक्कल इलाकों को जोड़ता है.
  2. यह चिनाब नदी के तल से 359 मीटर ऊपर है. यह 1315 मीटर लंबा है और इसका मेहराब विस्तार 467 मीटर है. पुल की आयु 120 वर्ष है और इसे 1,486 करोड़ रुपये में बनाया गया है.

अंजी खड्ड पुल

  • अंजी खड्ड पुल (Anji Khad Bridge) भारत का पहला केबल-स्टेड रेल पुल है. यह चेनाब नदी की एक सहायक नदी अंजी नदी पर बना है. यह पुल, USBRL के कटरा-बनिहाल खंड को जोड़ता है.
  • यह पुल 725 मीटर लंबा है और इसका मुख्य फैलाव 290 मीटर है. यह पुल नदी तल से 331 मीटर ऊपर है, तथा 96 उच्च तन्य केबलों द्वारा टिका हुआ है.

USBRL परियोजना: एक दृष्टि

  • उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल लिंक (USBRL) परियोजना, पूरी तरह से विद्युतीकृत है और 36 सुरंगों और 934 पुलों के साथ 272 किलोमीटर लंबा है.
  • यह भारत की सबसे लंबी परिवहन सुरंग, USBRL-50 (टी-50) से होकर गुजरती है. टी-50 सुरंग 12.77 किलोमीटर लंबी है. यह कश्मीर में सुंबर और खारी स्टेशनों के बीच स्थित है.

मेडिकल कॉलेज की आधारशिला

प्रधानमंत्री ने कटरा में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की आधारशिला भी रखी. यह जम्मू-कश्मीर के रायसी जिले में स्थापित होने वाला पहला मेडिकल कॉलेज है.

प्रधान मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में सोनमर्ग सुरंग का उद्घाटन किया

  • प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 जनवरी 2025 को जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में सोनमर्ग सुरंग (टनल) का उद्घाटन किया. इस सुरंग को पहले Z-मोड़ सुरंग (Z-Morh tunnel) नाम से जाना जाता था.
  • लगभग 12 किलोमीटर लंबी इस सुरंग परियोजना का निर्माण 2,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया गया है. इसका निर्माण मई 2015 में शुरू हुआ था और जिसे 2024 में पूरा किया जाना था.
  • श्रीनगर-लेह NH-1 पर बनी इस सुरंग के बनने के बाद अब श्रीनगर-लेह हाइवे पर गगनगीर से सोनमर्ग के बीच एक घंटे की दूरी अब महज 15 मिनट में पूरी की जा सकेगी. इससे पूरे रास्ते को पूरा करने में पहले 3 से 4 घंटे का समय लगता था, वो दूरी अब सिर्फ 45 मिनट में पूरी हो जाएगी.
  • सोनमर्ग सुरंग, जोजिला टनल प्रोजेक्ट का हिस्सा है. जिसका मकसद पूरे साल श्रीनगर से लद्दाख तक आवाजाही सुचारू रूप से चालू रखना है.
  • इस सुरंग के जरिए श्रीनगर, द्रास, कारगिल और लेह के इलाके में सिक्योरिटी बेहतर करने में मदद मिलेगी. साथ ही बॉर्डर के नजदीकी इलाकों का इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत होगा.
  • सुरंग के बनने से पहले यहां जो सड़क थी, वो अंग्रेजी के ‘Z’ अक्षर के आकार की थी, इसीलिए इसका नाम जेड मोड़ टनल रखा गया था.
  • सुरंग के निर्माण में इस रोड पर पड़ने वाले हिमस्खलन प्रभावित उस हिस्से को हटा दिया गया है, जो अक्सर भारी बारिश के कारण महीनों तक बंद रहता था.

उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला ने 16 अक्टूबर 2024 को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. उनके साथ, पांच मंत्रियों ने भी शपथ ली. जम्मू क्षेत्र से नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक सुरिंदर कुमार चौधरी ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

मुख्य बिन्दु

  • जम्मू और कश्मीर के उप-राज्यपाल, मनोज सिन्हा ने श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक समारोह में मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिपरिषद को पद की शपथ दिलाई.
  • हाल ही में संपन्न चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की अगुवाई में गठबंधन को बहुमत मिला था. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के साथ विधान सभा चुनाव लड़ा था.
  • नेशनल कॉन्फ्रेंस 42 सीटों, जबकि कांग्रेस ने 6 सीटें जीतीं. भारतीय जनता पार्टी 26 सदस्यों के साथ विधान सभा में मुख्य विपक्षी दल है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता हैं.

6 साल बाद जम्मू और कश्मीर से राष्ट्रपति शासन हटा

  • 2018 में पीडीपी-बीजेपी गठबंधन सरकार के पतन के बाद से जम्मू और कश्मीर राष्ट्रपति शासन के अधीन था.
  • 13 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रपति द्वारा 6 साल बाद जम्मू और कश्मीर से राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया था.
  • उमर अब्दुल्ला ने दूसरी बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. इससे पहले वह जनवरी 2009 से जनवरी 2014 तक तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे.
  • 31 अक्टूबर 2019 को संसद ने जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया था. इस प्रकार वह केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री होंगे.
  • जम्मू और कश्मीर का विभाजन और उसके स्थिति में बदलाव भारतीय संसद द्वारा पारित जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के प्रावधान के तहत किया गया था.
  • जम्मू-कश्मीर में मंत्रिपरिषद
  • जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के अनुसार, जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या विधान सभा में कुल सदस्यों के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी.
  • जम्मू और कश्मीर विधान सभा की कुल संख्या 116 है. इनमें से 114 सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाने हैं, और दो सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जिन्हें उप-राज्यपाल द्वारा नामित किया जाएगा.
  • 114 सीटों में से 24 सीटें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के हैं जो अभी रिक्त है. इस प्रकार, वर्तमान जम्मू और कश्मीर विधान सभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 92 (90 निर्वाचित और 2 नामांकित महिला सदस्य) है.
  • इसलिए, मुख्यमंत्री सहित, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के मंत्रिपरिषद के सदस्यों की अधिकतम संख्या 9 से अधिक नहीं हो सकती.

जम्‍मू कश्‍मीर से अनुच्‍छेद-370 हटाने की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने जम्‍मू कश्‍मीर से अनुच्‍छेद-370 को रद्द करने के केन्द्र सरकार के निर्णय पर 11 दिसम्बर को अपना फैसला सुनाया था. 5 जजों की संविधान पीठ ने एकमत से दिए गए अपने फैसले में कश्मीर से आर्टकिल 370 को हटाने के निर्णय को सही बताया.

मुख्य बिन्दु

  • सर्वोच्च अदालत ने आर्टकिल 370 को एक अस्थायी प्रावधान बताते हुए इसको निरस्त करने के केंद्र के नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले को सही बताया.
  • कोर्ट ने साथ ही चुनाव आयोग को जम्मू-कश्मीर में जल्द से जल्द चुनाव कराने का आदेश दिया ताकि उसके राज्य का दर्जा बहाल हो सके. कोर्ट ने इसके लिए 30 सितंबर 2024 समय सीमा भी तय कर दी.
  • यही नहीं शीर्ष अदालत ने लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाए रखने को भी मंजूरी दे दी.
  • चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस सूर्यकांत की संविधान पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान ये फैसला सुनाया.
  • चीफ जस्टिस ने अपने फैसले में कहा कि भारत में जम्मू-कश्मीर का विलय होने के बाद उसकी संप्रभुता खत्म हो गई थी. यानी वो आंतरिक रूप से संप्रभु नहीं था.

बैक टू विलेज कार्यक्रम की सफलता के लिए एक समिति का गठन

जम्‍मू-कश्‍मीर सरकार ने ‘बैक टू विलेज’ यानी चलो गांव की ओर कार्यक्रम के पांचवें चरण की सफलता के लिए एक समिति का गठन किया है. इसमें वित्त, ग्रामीण और पंचायती-राज, सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य विभागों के उच्‍चाधिकारी शामिल हैं.

मुख्य बिन्दु

  • चलो गांव की ओर कार्यक्रम का उद्देश्य जनता और सरकारी अधिकारियों के साझा प्रयास से विकास के लाभ ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाना है.
  • कार्यक्रम दौरान सरकारी कर्मी प्रत्‍येक पंचायत में एक निश्‍चित समय तक रूककर लोगों से उनके विचार लेते हैं ताकि गांव की जरूरत के अनुरूप सेवा उपलब्ध कराई जा सके.

जम्मू कश्मीर में दुनिया का सबसे ऊंचा पुल की अंतिम आर्क को जोड़ा गया

जम्मू कश्मीर में, निर्माणाधीन विश्व के सबसे ऊंचे रेल पुल ने उस समय एक और उपलब्धि प्राप्त की जब 14 अगस्त को इसके अंतिम आर्क (गोल्डन ज्वाइंट) को जोड़ दिया गया.

मुख्य बिन्दु

  • यह रेल पुल जम्मू कश्मीर में, रियासी जिले के कौरी इलाके में चिनाब नदी पर निर्माणाधीन है. यह विश्व का सबसे ऊंचा रेल पुल होगा.
  • इस पुल के दोनों सिरों को हाई स्ट्रेंथ फ्रिक्शन ग्रिप (HSFG) बोल्ट की मदद से जोड़ा गया है. इसे ‘गोल्डन जॉइंट’ नाम दिया गया है.
  • यह कश्मीर को सीधा राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ता है. यह उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना के तहत बनाया गया है.
  • चिनाब दरिया की सतह से 359 मीटर की ऊंचाई पर इस पुल के अंतिम आर्क जुड़ते ही कोड़ी और बक्कल रेलवे स्टेशन आपस में जुड़ गए हैं.
  • यह पुल पेरिस के एफिल टावर से 30 मीटर ऊंचा है. हालांकि, पुल का अभी 98 फीसदी निर्माण पूरा हुआ है, जिसे दिसंबर 2022 तक पूरा किया जाएगा.
  • इस पुल पर 1,436 करोड़ रुपये खर्च होने हैं. 17 स्तंभों पर बने पुल की कुल लंबाई 1315 मीटर है.
  • 111 किलोमीटर लंबे कटड़ा-बनिहाल सेक्शन में निर्माणाधीन पुल का काम वर्ष 2004 में शुरू हुआ था. 120 साल की अवधि के लिए तैयार किए जा रहे पुल पर 260 किलोमीटर प्रतिघंटे के रफ्तार से चलने वाली हवाएं भी असर नहीं डाल सकेंगी.

जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग का चुनाव क्षेत्रों से संबधित आदेश लागू

जम्मू-कश्मीर परिसीमन (Jammu And Kashmir Delimitation) आयोग का चुनाव क्षेत्रों से संबधित आदेश 20 मई से लागू हो गया. केन्द्र सरकार की ओर से इसी दिन इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई थी.

परिसीमन आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई ने की. आयोग में पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चन्द्र और जम्मू-कश्मीर के चुनाव आयुक्त केके गुप्ता भी शामिल थे.

जम्मू कश्मीर परिसीमन आयोग की रिपोर्ट: मुख्य बिंदु

  • राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अनुसार विधानसभा की 7 सीटें बढ़ाई जानी हैं. इससे विधानसभा में सदस्यों की संख्या 83 से बढ़कर 90 की जानी हैं. परिसीमन आयोग ने जम्मू संभाग में 6 व कश्मीर संभाग में 1 विधानसभा सीट को बढ़ाया है.
  • केंद्र शासित प्रदेश बनने से पहले विधानसभा में सीटों की संख्या 87 थी जिसमें चार सीटें लद्दाख की थीं. लद्दाख के अलग होने से 83 सीटें रह गईं, जो बढ़ने के बाद 90 हो जाएंगी. आयोग ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के लिए आरक्षित 24 सीटों का परिसीमन नहीं किया है.
  • पहली बार अनुसूचित जनजाति के लिए जम्मू कश्मीर में 9 विधानसभा सीटों को आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है, जबकि अनुसूचित जाति के लिए पहले की तरह ही 7 विधानसभा सीटें आरक्षित रखी गई हैं. दो सीटों पर कश्मीर पंडित समुदाय और पीओजेके विस्थापितों के सदस्यों को मनोनीत किया जाएगा.
  • जम्मू-कश्मीर की लोकसभा सीटों में भी परिसीमन आयोग ने फेरबदल किया है. अब कश्मीर व जम्मू दोनों संभागों के हिस्से ढाई-ढाई लोकसभा सीटें (कुल 5 सीट) होंगी. पहले जम्मू संभाग में उधमपुर डोडा व जम्मू तथा कश्मीर में बारामुला, अनंतनाग व श्रीनगर की सीटें थीं. प्रत्येक लोकसभा सीट में 18 विधानसभा सीटें होंगी.

क्या होता है परिसीमन?

  • विधायी निकाय वाले क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा तय करने की प्रक्रिया परिसीमन कहलाती है. केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद प्रदेश में एक बार फिर परिसीमन के लिए आयोग बनाया गया है. इस बार सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई इस आयोग के अध्यक्ष हैं.
  • जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार परिसीमन 1995 में हुआ था. उस समय जम्मू-कश्मीर में 12 जिले और 58 तहसीलें हुआ करती थीं. वर्तमान में प्रदेश में 20 जिले हैं और 270 तहसील हैं. पिछला परिसीमन 1981 की जनगणना के आधार पर हुआ था. इस बार परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया गया है.

जम्मू कश्मीर परिसीमन आयोग की रिपोर्ट जारी, विधानसभा में सदस्यों की बढ़कर 90 हुई

जम्मू कश्मीर परिसीमन आयोग ने केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर के विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन पर अंतिम रिपोर्ट जारी कर दी है. 5 मई को आयोग ने एक बैठक के बाद रिपोर्ट को जारी की. आयोग के लिए 6 मई 2022 तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने की समय सीमा निर्धारित थी. रिपोर्ट के जारी होने के साथ ही केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराए जाने का रास्ता साफ हो गया है.

जम्मू कश्मीर परिसीमन आयोग की रिपोर्ट: मुख्य बिंदु

  • राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अनुसार विधानसभा की 7 सीटें बढ़ाई जानी हैं. इससे विधानसभा में सदस्यों की संख्या 83 से बढ़कर 90 की जानी हैं. परिसीमन आयोग ने जम्मू संभाग में 6 व कश्मीर संभाग में 1 विधानसभा सीट को बढ़ाया है.
  • केंद्र शासित प्रदेश बनने से पहले विधानसभा में सीटों की संख्या 87 थी जिसमें चार सीटें लद्दाख की थीं. लद्दाख के अलग होने से 83 सीटें रह गईं, जो बढ़ने के बाद 90 हो जाएंगी.
  • पहली बार अनुसूचित जनजाति के लिए जम्मू कश्मीर में 9 विधानसभा सीटों को आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है, जबकि अनुसूचित जाति के लिए पहले की तरह ही 7 विधानसभा सीटें आरक्षित रखी गई हैं. जम्मू कश्मीर की नई विधानसभा में कश्मीरी पंडितों और पीओजेके विस्थापितों को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है.
  • जम्मू-कश्मीर की लोकसभा सीटों में भी परिसीमन आयोग ने फेरबदल किया है. अब कश्मीर व जम्मू दोनों संभागों के हिस्से ढाई-ढाई लोकसभा सीटें (कुल 5 सीट) होंगी. पहले जम्मू संभाग में उधमपुर डोडा व जम्मू तथा कश्मीर में बारामुला, अनंतनाग व श्रीनगर की सीटें थीं. प्रत्येक लोकसभा सीट में 18 विधानसभा सीटें होंगी.

क्या होता है परिसीमन?

  • विधायी निकाय वाले क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा तय करने की प्रक्रिया परिसीमन कहलाती है. केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद प्रदेश में एक बार फिर परिसीमन के लिए आयोग बनाया गया है. इस बार सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई इस आयोग के अध्यक्ष हैं.
  • जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार परिसीमन 1995 में हुआ था. उस समय जम्मू-कश्मीर में 12 जिले और 58 तहसीलें हुआ करती थीं. वर्तमान में प्रदेश में 20 जिले हैं और 270 तहसील हैं. पिछला परिसीमन 1981 की जनगणना के आधार पर हुआ था. इस बार परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया गया है.

चिनाब नदी पर क्‍वार पनबिजली परियोजना के निर्माण की स्‍वीकृति दी गयी

जम्‍मू-कश्‍मीर के किश्‍तवाड जिले में चिनाब नदी पर क्‍वार पनबिजली परियोजना के निर्माण की स्‍वीकृति दी गयी है. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति ने 28 अप्रैल को यह स्‍वीकृति दी.

मुख्य बिंदु

  • 540 मेगावॉट की इस परियोजना पर 45 अरब रुपये से अधिक की लागत आएगी. बिजली के क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह निर्णय लिया गया है.
  • इसका निर्माण कार्य नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NHPC) की सब्सिडरी कंपनी चेनाव वैली पावर प्रोजेक्ट्स द्वारा किया जायेगा. इसमें 51 प्रतिशत शेयर NHPC का और 49 प्रतिशत शेयर जम्मू-कश्मीर के ट्रेड पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन का होगा.