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ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा की

ईरान ने अपने विवादित परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमरीका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता के दौरान शक्ति प्रदर्शन करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को अस्थायी रूप से बंद करने की घोषणा की है.

मुख्य बिन्दु

  • 17 फरवरी 2026 को, ईरान के ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ ने इस जलडमरूमध्य में ‘स्मार्ट कंट्रोल ऑफ द स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ नाम से एक लाइव-फायर सैन्य अभ्यास किया था. ईरान का यह दुर्लभ कदम एक कूटनीतिक ‘शक्ति प्रदर्शन’ के तौर पर देखा जा रहा है.
  • होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘एनर्जी चोक पॉइंट’ (Energy Chokepoint) है. वैश्विक बाजार में समुद्री रास्ते से सप्लाई होने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 20% से 30% हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है.
  • दुनिया भर की तेल सप्लाई वाले इस अहम रास्ते में सैन्य तनाव और इसके बंद होने की खबर से ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ गई, जिसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तुरंत वृद्धि दर्ज की गई.

होर्मुज जलडमरूमध्य

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) ईरान (उत्तर) और ओमान (दक्षिण) के बीच स्थित एक बेहद संकरा समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है.

ईरान की संसद ने हॉर्मुज़ जलडमरुमध्य बंद करने के प्रस्‍ताव को स्‍वीकृति दी

  • ईरान की संसद ने हॉर्मुज़ जलडमरुमध्य (Strait of Hormuz) बंद करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है. हॉर्मुज़ जलडमरुमध्य तेल और गैस आपूर्ति के लिए विश्व का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है.
  • ईरानी संसद ने यह निर्णय फोर्दो, नतांज़ और इस्‍फाहान परमाणु केन्द्रों पर अमरीकी हमले की जवाबी कार्रवाई के रूप में लिया है.
  • इसे लागू करने का अंतिम फैसला ईरान की सर्वोच्‍च राष्‍ट्रीय सुरक्षा परिषद को लेना है. अभी परिषद ने यह निर्णय लागू करने का औपचारिक आदेश जारी नहीं किया है.
  • यदि यह निर्णय लागू होता है तो, पूरे विश्‍व में गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकता है.
  • अमरीका के विदेशमंत्री मार्को रूबियो ने ईरान के इस कदम की निंदा करते हुए इसे आर्थिक आत्महत्या बताया है.
  • अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि इसके पूरी तरह बंद होने से वैश्विक मुद्रास्फीति और आर्थिक स्थिरता पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है.

हॉर्मुज़ जलडमरुमध्य: एक दृष्टि

  • होरमुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला संकीर्ण समुद्री मार्ग है. यह पश्चिम एशिया की एक प्रमुख जलसन्धि है जो ईरान के दक्षिण में फ़ारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से अलग करता है.
  • सबसे संकरे इलाके में लगभग 33 किमी चौड़ी यह संकरी नहर ईरान (उत्तर) को अरब प्रायद्वीप (दक्षिण) से अलग करती है.
  • वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का 20-25 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से दुनियाभर में पहुंचता है. इसके बंद होने से वैश्विक आपूर्ति में तत्काल कमी आएगी, जिससे कीमतें बढ़ेंगी.

भारत पर कितना असर?

  • वर्तमान में भारत, प्रतिदिन 5.6 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात करता है. इसमें से करीब 1.5-2 मिलियन बैरल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से आता है.
  • भारत का 38 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से आ रहा है. रूस अपना तेल स्वेज नहर, केप ऑफ गुड होप या प्रशांत महासागर से भेजता है.
  • भारत लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) कतर से आयात करता है. कतर गैस भेजने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रयोग नहीं करता. भारत के पास एलएनजी आयात के लिए ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्राजील भी विकल्प हैं.
  • अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद की जाती है तो भारत पश्चिम अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों से भी तेल मंगा सकता है
  • भारत में ओएनजीसी के 500 कुएं हैं और अभी 42 बिलियन बैरल का रिजर्व है.

इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष, ईरान का ऑपरेशन सीवियर पनिशमेंट

इस्राइली वायुसेना ने 12 जून को ईरान पर हवाई हमले किए. इजरायल ने इसका नाम ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ दिया है.

ऑपरेशन राइजिंग लॉयन

  • इजरायल द्वारा शुरू किया गया ‘ऑपरेशन राइजिंग लॉयन’ का उद्देश्य ईरान के परमाणु क्षमता को खत्म करना है.
  • इस्राइली हमले में ईरान के परमाणु, सैन्‍य ठिकाने और रिवेल्‍यूशनरी गार्डस मुख्‍यालय को निशाना बनाया गया.
  • इस हमले में ईरान के रेवोल्‍यूशनरी गार्डस प्रमुख हुसैन सलामी और परमाणु ऊर्जा संगठन के पूर्व प्रमुख फरीदुल अब्‍बासी सहित कई शीर्ष सैन्‍य कमांडरों की भी मौत हो गई.
  • इस्राइल के हमले में ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया  जिससे ईरान के परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को गंभीर क्षति पहुंची.

ईरान का ऑपरेशन सीवियर पनिशमेंट

  • ईरान ने इस्राइल के हमलों की जवाबी कार्रवाई में 14 जून को सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे जिसे ऑपरेशन सीवियर पनिशमेंट नाम दिया गया है.
  • ईरान ने तेल अवीव और यरुशलम के रिहायशी इलाकों में बड़े पैमाने पर मिसाइलों से हमले किए. ऐसा पहली बार हुआ जब किसी देश की मिसाइलों ने इस्राइल की हवाई सुरक्षा को नाकाम कर दिया.  इस्राइल
  • इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल कैट्ज ने जानबूझकर इस्राइल के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाए जाने की बात कही है. उन्‍होंने कहा कि इस्राइल इसका करारा जवाब देगा.

क्षेत्रीय संघर्ष की आशंकाएं

  • दोनों देशों के बीच भीषण हमलों से व्यापक स्तर पर क्षेत्रीय संघर्ष की आशंकाएं बढ़ गई हैं.
  • इजराइल का सबसे बड़ा समर्थक देश, अमेरिका ने इजराइली हमले में शामिल नहीं होने की बात कही है. अमेरिका लंबे समय से इस तरह के हमले को रोकने के प्रयास कर रहा है, क्योंकि उसे डर है कि इससे पश्चिम एशिया में बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ जाएगा.
  • अमरीका और ईरान के मध्य 15 जून को मस्‍कट में होने वाली परमाणु वार्ता रद्द कर दी गई है. वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान ने यह वार्ता रद्द करने की घोषणा की.

भारत की प्रतिक्रिया

  • भारत ने ईरान और इस्राइल के बीच हाल के घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त करते हुए दोनों पक्षों से कहा कि वे तनाव को कम करने करने के लिए बातचीत और कूटनीति के रास्‍ते अपनाएं.
  • विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत के दोनों देशों के साथ घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं और उन्‍हें हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है.

ईरान ने IAEA समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया

  • इजरायल का यह हमला अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा 12 जून 2025 को लिए गए निर्णय के बाद हुआ है. IAEA ने ईरानी परमाणु कार्यक्रम को 1974 के समझौते की शर्तों का उल्लंघन बताया है.
  • IAEA के अनुसार ईरान शांतिपूर्ण नागरिक परमाणु कार्यक्रम की आवश्यकता से अधिक यूरेनियम का संवर्धन कर रहा है.

ईरान परमाणु अप्रसार संधि का सदस्य

  • ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य है, जिस पर 1968 में हस्ताक्षर किये गये थे. NPT के तहत, केवल पाँच देश- चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका, परमाणु हथियार रख सकते हैं.
  • एनपीटी के अन्य हस्ताक्षरकर्ता देश शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन सैन्य उद्देश्यों के लिए इसका उपयोग नहीं कर सकते.
  • भारत, पाकिस्तान और इज़राइल एनपीटी के सदस्य नहीं हैं लेकिन इनके पास भी परमाणु हथियार हैं.
  • भारत और पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों का परीक्षण किया है. इज़राइल ने अपने पास परमाणु हथियार हैं होने की बात कभी सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार नहीं की है.

ईरान का परमाणु कार्यक्रम

  • ईरान के पास एक सक्रिय परमाणु कार्यक्रम है और कई देशों को संदेह है कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है. वह अपने यूरेनियम संवर्धन स्तर को लगातार बढ़ा रहा है.

ईरान से दुनिया क्यों चिंतित है

  • ईरान एक शिया बहुल मुस्लिम देश है, जबकि सऊदी अरब, यूएई आदि जैसे अन्य अरब देश सुन्नी मुस्लिम देश हैं.
  • ईरान और सऊदी अरब के बीच गहरी दुश्मनी है और दोनों ही खुद को इस्लामी दुनिया के नेता के रूप में पेश करते हैं.
  • अगर ईरान को परमाणु हथियार मिल जाता है, तो सऊदी अरब पर परमाणु हथियार बनाने का दबाव होगा.
  • यह पश्चिम एशिया क्षेत्र में परमाणु हथियारों की दौड़ को बढ़ावा देगा, जो तेल और गैस भंडार से समृद्ध है और दुनिया के लिए एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है.
  • ईरानी सरकार ने खुले तौर पर कहा है कि वह इजरायल को नष्ट कर देगा और अमेरिका को अपना दुश्मन नंबर एक मानती है.
  • इजरायल का कहना है कि वह ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दे सकता, क्योंकि इससे उसका अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा.

ईरान राष्ट्रपति चुनाव: मसूद पेज़ेश्कियान ईरान के नए राष्ट्रपति चुने गए

ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में सुधारवादी नेता मसूद पेज़ेश्कियान (Masoud Pezeshkian) को जीत मिली है. वे देश के 9वें राष्ट्रपति चुने गए. उन्होंने 30 लाख वोटों से कट्टरपंथी नेता सईद जलीली को हराया. पजशकियान को 1.64 करोड़ वोट मिले. वहीं जलीली को 1.36 करोड़ वोट हासिल हुए.

मुख्य बिन्दु

  • ईरान में राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान 28 जून 2024 को हुआ था जिसमें चार उम्मीदवार थे. यहाँ कुल 61 मिलियन मतदाताओं में से केवल 40 प्रतिशत ने ही अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया जो देश में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरानी राष्ट्रपति चुनाव में सबसे कम मतदान प्रतिशत है.
  • इस चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को आवश्यक बहुमत वोट नहीं हासिल हुआ. मसूद पेज़ेश्कियान को लगभग 42.5 प्रतिशत वोट और जलीली को 38.7 प्रतिशत वोट मिले.
  • राष्ट्रपति चुनने के लिए 5 जुलाई 2024 को आवश्यक रन-ऑफ राष्ट्रपति चुनाव आयोजित किया गया था. इस बार पेज़ेश्कियान को 53.7 प्रतिशत वोट और जलीली को 44.3 प्रतिशत वोट मिले. इस प्रकार मसूद पेज़ेशकियान  को ईरान का नया निर्वाचित राष्ट्रपति घोषित किया गया.
  • ईरान में फरवरी 2023 में चुनाव हुए थे जिसमें इब्राहिम रईसी दोबारा देश के राष्ट्रपति बने थे. 19 मई 2024 को एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मृत्यु के बाद ईरान में राष्ट्रपति चुनाव की आवश्यकता हुई थी.

मसूद पेज़ेश्कियान

  • मसूद पेज़ेश्कियान पेशे से हार्ट सर्जन रहे हैं. वो फिलहाल देश के स्वास्थ्य मंत्री हैं. उन्हें एक हिजाब विरोधी और उदारवादी नेता के रूप में जाना जाता है.
  • उन्होंने ईरान में ‘एकता और सद्भाव’ लाने का वादा किया था. साथ ही ये भी वादा किया था कि वो दुनिया से ईरान के अलगाव को ख़त्म करेंगे. इसके बाद ही ईरान के लोगों का उनकी ओर झुकाव बढ़ना शुरू हुआ.
  • पेज़ेश्कियान ने पश्चिमी देशों के साथ साल 2015 के असफल परमाणु समझौते के नवीनीकरण पर सकारात्मक बातचीत का भी आह्वान किया है.
  • इस समझौते के मुताबिक़ ईरान पश्चिमी प्रतिबंधों में ढील के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाने के लिए सहमत हो गया था.

सईद जलीली

  • पेज़ेश्कियान के प्रतिद्वंद्वी कट्टरपंथी सईद जलीली पूर्व परमाणु वार्ताकार रह चुके हैं और उन्हें ईरान के सबसे ताक़तवर धार्मिक समुदायों में समर्थन मिलता रहा है. वे ईरान के यथास्थिति के पक्ष में थे.
  • जलीली पश्चिम विरोधी रहे हैं. वो परमाणु समझौते को बहाल करने के भी ख़िलाफ़ रहे हैं. उनकी नीतियां ईरान के लिए ज्यादा प्रतिबंध और अलगाव के समर्थन में थी.

ईरान में राष्ट्रपति चुनाव

  • ईरानी संविधान के अनुसार, जनता सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के माध्यम से राष्ट्रपति का चुनाव करती है. ईरान में जन्मा ईरान का नागरिक ही राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ सकता है.
  • ईरानी संविधान के अनुसार, जीतने वाले उम्मीदवार को डाले गए वैध वोटों में से 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करने होते हैं.
  • ईरानी राष्ट्रपति का कार्यकाल चार वर्ष का होता है, और वह पुनः चुनाव के लिए पात्र होते हैं.

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रइसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत

ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन की 19 मई को हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई. ये दुर्घटना जिस जगह पर हुई है, वहाँ मौसम काफ़ी ख़राब था जिस कारण उनका हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया.

  • हेलिकॉप्टर में ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी, विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन, ईरान के पूर्वी अज़रबैजान प्रांत के गवर्नर मलिक रहमती  शामिल थे.
  • राष्ट्रपति रईसी अज़रबैजान में क़िज़ कलासी और खोदाफरिन बांध का उद्घाटन करने गए थे. इस उद्घाटन के बाद वो तबरेज शहर की ओर जा रहे थे.
  • तबरेज़ ईरान के पूर्वी अज़रबैजान प्रांत की राजधानी है. इसी दौरान रास्ते में किसी जगह पर हेलिकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हुआ.
  • ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह ख़ामेनई ने हादसे के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के साथ आपात बैठक भी की है.

मोहम्मद मोखबर को ईरान का कार्यवाहक राष्ट्रपति

ईरान के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति की मृत्यु की स्थिति में, नया राष्ट्रपति चुने जाने तक उप-राष्ट्रपति, राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है. ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद मोखबर ने ईरान के कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाला है.

रूस ने ईरान के जासूसी उपग्रह ‘सुदूर खय्याम’ का प्रक्षेपण किया

रूस ने 10 अगस्त को ईरान के जासूसी उपग्रह ‘सुदूर खय्याम’ का प्रक्षेपण किया था. यह प्रक्षेपण रूसी सोयुज रॉकेट द्वारा दक्षिणी कजाकिस्तान में बैकोनूर कोस्मोड्रोम से किया गया था जो सफलतापूर्वक कक्षा में प्रवेश किया. इसका नाम फारसी वैज्ञानिक उमर खय्याम के नाम पर रखा गया है, जो 11वीं और 12वीं शताब्दी में रहते थे.

ईरान ने कहा कि इस उपग्रह का उपयोग पर्यावरण निगरानी के लिए किया जाएगा और यह पूरी तरह से उसके नियंत्रण में रहेगा. इसका उपयोग केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा.

मुख्य बिन्दु

  • सुदूर खय्याम उपग्रह उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरे से लैस है. यदि यह उपग्रह सफलतापूर्वक संचालित होता है, तो ईरान को अपने कट्टर दुश्मन इजराइल और मध्य पूर्व के अन्य देशों की निगरानी करने की क्षमता हासिल हो जाएगी.
  • पश्चिमी देशों ने इस उपग्रह के माध्यम से रूस द्वारा यूक्रेन में अपनी खुफिया क्षमता को बढ़ाने में उपयोग किए जाने का दावा किया है.
  • ईरान के पास नागरिक और सैन्य दोनों अंतरिक्ष कार्यक्रम हैं. अमेरिका को डर है कि इसका इस्तेमाल अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए कर सकता है.
  • यह उपग्रह एक मीटर-प्रति-पिक्सेल डेफिनेशन के साथ उच्च-रिज़ॉल्यूशन सर्विलांस छवियां प्रदान करेगा. पश्चिमी नागरिक उपग्रह लगभग आधा मीटर प्रति पिक्सेल की छवियां भेजते हैं, जबकि अमेरिकी जासूसी उपग्रहों के पास और उन्नत तकनीक है जिससे वे और हाई डेफिनेशन की तस्वीरें भेजते हैं.

इब्राहिम रईसी ने ईरान के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली

इब्राहिम रईसी (Ebrahim Raisi) ने 05 अगस्त 2021 को ईरान के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली. रायसी ने मौजूदा प्रधानमंत्री हसन रूहानी का स्थान लिया है. 19 जून को ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में रईसी को विजेता घोषित किया गया था. उनका कार्यकाल चार वर्ष का होगा.

इब्राहिम रईसी वह मार्च 2019 से ईरान के मुख्य न्यायाधीश भी हैं. वो राजनीतिक क़ैदियों को मौत की सज़ा दिए जाने के फ़ैसलों से जुड़े रहे हैं और उन पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू है.

ईरान और इसराइल

इसराइल के विदेश मंत्रालय ने रईसी को ईरान का सबसे कट्टरपंथी राष्ट्रपति कहा हैं. ईरान और इसराइल के बीच लंबे समय से छद्म युद्ध चल रहा है. दोनों देशों के बीच परिस्थिति बेहद जटिल है लेकिन तनाव की एक बड़ी वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी है.

ईरान ने पिछले साल हुई अपने शीर्ष परमाणु वैज्ञनिक की हत्या और इस साल अप्रैल में परमाणु संयंत्र पर हुए हादसे के लिए इसराइल को ज़िम्मेदार माना है. वहीं इसराइल का मानना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए नहीं है. इसराइल मानता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मक़सद परमाणु हथियार बनाना है.

ईरान और पश्चिमी देशों के बीच परमाणु समझौता

ईरान और पश्चिमी देशों के बीच 2015 में एक परमाणु समझौता हुआ था, जिसके बाद ईरान पर लगे सख़्त प्रतिबंध हटा लिए गए थे. हालांकि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2018 में अमेरिका को इस सौदे से बाहर कर लिया था और ईरान पर फिर से आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे. नए राष्ट्रपति जो बाइडन की सरकार अब फिर से समझौते में शामिल होने का रास्ता निकाल रही है.

ईरान में वर्तमान मुद्रा ‘रियाल’ को बदलकर ‘तोमान’ करने के लिए विधेयक

ईरान की संसद ने अपनी वर्तमान मुद्रा (करेंसी) ‘रियाल’ (Rial) में कई तरह के परिवर्तन के लिए हाल ही में एक विधेयक पारित किया है. इस विधेयक के अनुसार ‘रियाल’ में चार शून्य तक की कटौती की जाएगी और इसका नाम बदलकर तोमान (Toman) किया जाएगा. यानी एक तोमान का मूल्य 10,000 रियाल के बराबर होगी.

इस विधेयक को ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह खामनेई की अध्यक्षता वाली कमेटी के समक्ष पेश किया जाएगा.

मुद्रा में परिवर्तन की वजह

अमेरिका द्वारा ईरान लगाये गये कई प्रतिबंधों के कारण ईरानी मुद्रा रियाल के मूल्य में बड़ी गिरावट आई है. मुद्रा में गिरावट के कारण यहाँ मुद्रास्फीति (महँगाई दर) चरम पर है. मुद्रा से चार शून्य हटाने का फैसला देश की मुद्रा की मजबूती के लिए लिया गया है. ईरान सरकार के नए फैसले के बाद नई करेंसी ‘तोमान’ डॉलर के मुकाबले 15.6 के स्तर पर होगी.

तोमन पहले से प्रचालन में है

ईरान में तोमन का प्रचालन पहले से ही है. दरअसल अब तक ईरान की आधारिक मुद्रा रियाल थी. और दस रियाल को एक तोमन कहा जाता था. लेकिन अब नए बदलाव के बाद एक तोमन दस हजार रियाल के बराबर होगा.

ईरान ने सैन्य उपग्रह ‘नूर’ के प्रक्षेपण किये जाने की पुष्टि की

ईरान ने हाल ही में एक सैन्य उपग्रह (military satellite) के प्रक्षेपण किये जाने की पुष्टि की है. इस उपग्रह को ‘नूर’ नाम दिया गया है. यह उपग्रह पृथ्वी की सतह से 425 किलोमीटर ऊपर कक्षा में सफलतापूवर्क स्थापित किया गया है.

यह प्रक्षेपण ऐसे समय में किया गया है जब ईरान और अमेरिका के बीच खत्म हुए परमाणु समझौते तथा जनवरी में अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने को लेकर दोनों देशों के संबंधों में तनाव चल रहा है.

उल्लेखनीय है कि 3 जनवरी को अमेरिका द्वारा बगदाद एयरपोर्ट पर एक एयर स्ट्राइक की गई, जिसमें ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी. तब से अमेरिका-ईरान के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया है.

ईरान ने यूक्रेन के एक विमान को मानवीय भूल के कारण गिराए जाने को स्वीकार किया

ईरान ने यूक्रेन के एक विमान को मानवीय भूल के कारण गिराए जाने की बात स्वीकार कर ली है. ईरान ने स्वीकार किया है की उसकी सेना ने 8 जनवरी को यूक्रेन एयरलाइंस की उड़ान संख्या 752 के एक विमान को मानवीय भूल के कारण गैर इरादतन कार्रवाई में गिरा दिया था. इस दुर्घटना में 176 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की दुखद मृत्यु हुई थी. विमान में ईरान के 82, कनाडा के 63, यूक्रेन के 11, स्वीडन के 10, अफगानिस्तान के 4, जर्मनी के 3 और ब्रिटेन के 3 यात्री सवार शामिल थे.

दुर्घटना के तुरंत बाद ईरानी सेना ने इस दु:खद घटना के कारणों की जांच के लिए नागरिक उड्डयन संगठन से अलग, तकनीकी और परिचालन विशेषज्ञों की एक विशेष समिति गठित की थी. इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने इसे अमेरिकी दुस्साहस के कारण हुई मानवीय त्रुटि बताया है.

ईरान ने 2015 के परमाणु समझौते से अलग होने का फैसला किया

ईरान ने घोषणा की है कि अब वह 2015 के परमाणु समझौते को नहीं मानेगा. उसने कहा है कि अब वह इस समझौते के तहत आने वाले परमाणु संवर्धन की क्षमता, संवर्धन के स्‍तर, संवर्धित सामग्री के भंडार या अनुसंधान और विकास से जुडी सीमाओं का पालन नहीं करेगा. ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी को बगदाद में अमरीका द्वारा मारे जाने के परिपेक्ष्य में यह फैसला किया गया है.

यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख जोसेप बोरेल ने ईरान के विदेश मंत्री मोहम्‍मद जावेद ज़ारिफ को परमाणु समझौते पर चर्चा और सुलेमानी की हत्‍या से उत्‍पन्‍न संकट दूर करने पर बातचीत के लिए ब्रसेल्‍स आने का निमंत्रण दिया है. श्री बोरेल ने कहा कि 2015 में ईरान के परमाणु कार्यक्रम समझौते को बचाने के लिए क्षेत्र में राजनीतिक समाधान एक मात्र उपाय है.

जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के नेताओं ने भी ईरान से 2015 के परमाणु समझौते का उल्लंघन ना करने की अपील की है. जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल, फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने एक संयुक्त बयान में कहा कि हम ईरान से उन सभी कदमों को वापस लेने की अपील करते हैं जो परमाणु समझौते के अनुरूप नहीं है.

ईरान परमाणु समझौता: एक दृष्टि

ईरान ने P5+1 (China, France, Russia, the United Kingdom, and the US; plus Germany) देशों के साथ जिनेवा में एक परमाणु समझौता हस्ताक्षरित किया था. 2015 के इस परमाणु समझौते में ईरान अपनी संवेदनशील परमाणु गतिविधियों को सीमित करने और अन्तर्राष्ट्रीय निरीक्षकों को जांच की अुनमति देने पर राजी हुआ था. इसके बदले ईरान के खिलाफ लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंध को हटाने का प्रावधान था.

2018 में अमेरिका इस परमाणु समझौते से अलग हो गया था. परन्तु रूस, चीन, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम अभी भी इस समझौते में बना हुआ है.

इराक़ की संसद ने सभी विदेशी सैनिकों से देश छोड़ने को कहा

इराक़ की संसद ने 6 जनवरी को एक प्रस्ताव पास कर सभी विदेशी सैनिकों से मुल्क छोड़ने को कहा है. अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमले में ईरान की क़ुद्स फ़ोर्स के प्रमुख जनरल क़ासिम सुलेमानी की मौत के बाद इराक़ की संसद ने ये प्रस्ताव पास किया है. इराक ने देश में हुए अमेरिकी हवाई हमले की शिकायतें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् को सौंप दी हैं.

इराक़ में अभी अमरीका के पाँच हज़ार सैनिक हैं. इराकी संसद ने विदेशी बलों को इराक़ की ज़मीन, हवाई क्षेत्र और जलक्षेत्र के इस्तेमाल को रोकने और अमरीकी सेना को सभी तरह की मदद बंद किये जाने की बात भी कही है.

ईरान ने देश के महिलाओं को पुरुषों के मैच नहीं देखने के लिए लगी 40 वर्ष पुरानी पावंदी को हटाई

ईरान ने किसी फुटबॉल या दूसरे स्टेडियमों में महिलाओं के प्रवेश पर लगी 40 वर्ष पुरानी पावंदी को हटा लिया है. 10 अक्टूबर 2019 वहां 40 सालों बाद पहली बार ईरानी महिलाओं ने अपने देश का कोई फुटबॉल मैच स्टेडियम में जाकर देखा. 2022 फीफा विश्व कप क्वालीफायर का ये मैच ईरान और कंंबोडिया के बीच खेला गया. इसमें ईरान ने कंबोडिया को 14-0 से पराजित कर दिया.

फीफा के निर्देश पर पावंदी हटाई गयी

हाल ही में फुटबॉल की शीर्ष संस्था फीफा ने उसे यहां के स्टेडियमों में महिलाओं के आने पर लगी रोक को हटाने का आदेश दिया था. ऐसा नहीं करने पर ईरान को निलंबित किए जाने की चेतावनी भी मिली थी. निलंबन से डरकर ईरानी फुटबॉल संघ ने फीफा को आश्वस्त किया था कि वह महिलाओं को स्टेडियम में आने की इजाजत देगा.

ब्लू गर्ल की मृत्यु के बाद यह मामला शुरू हुआ

ब्लू गर्ल नाम से मशहूर एक ईरानी फुटबॉल प्रशंसक की हाल ही में हुई मृत्यु के बाद यह मामला शुरू हुआ था. उस महिला प्रशंसक को सुरक्षा अधिकारियों ने उस समय पकड़ लिया था जब वह पुरुष के वेश में फुटबॉल मैच देखने के लिए स्टेडियम में घुसने का प्रयास कर रही थी. इसके बाद उसने जेल जाने के डर से खुद को आग लगा दी, जिसके बाद उसकी अस्पताल में मृत्यु हो गई थी.