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6 अप्रैल को विकास और शांति के लिए अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया गया

प्रत्येक वर्ष 6 अप्रैल को विकास और शांति के लिए अंतर्राष्ट्रीय खेल दिवस (International Day of Sport for Development and Peace) मनाया जाता है. किसी भी व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक विकास में खेलों का अहम योगदान होता है. अतः खेलों के प्रति लोगों में जागरुकता लाने के लिए यह दिवस मनाया जाता है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस को मनाए जाने की पहली बार घोषणा अगस्त 2013 में की थी. इसके बाद 6 अप्रैल 2014 से अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति की ओर से मान्यता मिलने के बाद इसे हर साल मनाया जा रहा है.

सबसे पहले 1896 को एथेंस (ग्रीस) में 6 अप्रैल के ही दिन पहले ओलंपिक खेलों का आयोजन किया गया था. इसीलिए 6 अप्रैल के दिन अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस को मनाया जाता है.

5 अप्रैल: राष्ट्रीय समुद्री दिवस

प्रत्येक वर्ष 5 अप्रैल को देशभर में ‘राष्ट्रीय समुद्री दिवस’ (National Maritime Day) मनाया जाता है. इस वर्ष (5 अप्रैल 2023 को) राष्ट्रीय समुद्री दिवस का 60वां संस्करण मनाया गया. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को भारतीय जहाजरानी उद्योग की गतिविधियों और देश की अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका से अवगत कराना है.

राष्ट्रीय समुद्री दिवस-2023 का विषय (थीम)

राष्ट्रीय समुद्री दिवस के 60वें संस्करण का विषय ‘Amrit Kaal in Shipping’ है.

राष्ट्रीय समुद्री दिवस का इतिहास

5 अप्रैल, 1919 को पहला भारतीय जहाज मुंबई से ब्रिटेन की यात्रा पर निकला था. सिंधिया स्टीम नेवीगेशन कंपनी लिमिटेड का पहला स्टीम शिप ‘एसएस लॉयल्टी’ (SS Loyalty) मुंबई से लंदन की पहली समुद्री यात्रा पर रवाना हुआ था. इसकी याद में 1964 से हर साल 5 अप्रैल को राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाया जाने लगा.

4 अप्रैल: अन्तर्राष्ट्रीय खदान जागरूकता एवं खनन कार्य में सहायता दिवस

प्रत्येक वर्ष 4 अप्रैल को पूरे विश्व में ‘अंतरराष्ट्रीय खदान जागरूकता एवं खनन कार्य में सहायता दिवस’ (International Day for mine Awareness and Assistance in Mine Action- IMAD) मनाया जाता है. यह दिवस बारूदी सुरंगों (landmines) की वजह से पैदा हुए खतरे से सुरक्षा प्रदान करने, स्वास्थ्य और जीवन से सम्बंधित परेशानियों के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है.

IMAD 2023 का विषय (थीम)

इस वर्ष यानी 2023 में इस दिवस का मुख्य विषय (थीम)- ‘मेरा कार्य प्रतीक्षा नहीं कर सकता’ (Mine Action Cannot Wait) है.

IMAD का इतिहास

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ‘अंतरराष्ट्रीय खदान जागरूकता एवं खनन कार्य में सहायता दिवस’ को प्रत्येक वर्ष एक दिवस के रूप में मनाये जाने की घोषणा वर्ष 2005 में की थी. इस दिवस को पहली बार 4 अप्रैल 2006 को मनाया गया था.

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने अपनी हीरक जयंती मनाई

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 1 अप्रैल 2023 को अपनी हीरक जयंती मनाई. CBI की स्थापना इसी दिन 1963 में को गृह मंत्रालय के प्रस्‍ताव के जरिए की गई थी.

मुख्य बिन्दु

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में CBI के हीरक जयंती समारोहों का उद्घाटन किया था.
  • प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सीबीआई में उल्लेखनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक और सर्वोत्तम जांच अधिकारी के लिए स्वर्ण पदक प्रदान किए.
  • प्रधानमंत्री शिलंग, पुणे और नागपुर में CBI के नव-निर्मित कार्यालय परिसरों का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन भी किया. उन्होंने इस उपलक्ष्य में डाक-टिकट और स्मारक-सिक्का भी जारी किए.

2 अप्रैल: विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस

प्रत्येक वर्ष 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस (World Autism Awareness Day) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य ऑटिज्म से ग्रस्त लोगों को इससे लड़ने तथा इसका निदान करने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि वे समाज में अन्य लोगो की तरह पूर्ण और सार्थक जीवन जी सकें.

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2007 में 2 अप्रैल के दिन को विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस के रूप में घोषित किया था. पहला विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 2 अप्रैल 2008 को मनाया गया था. नीले रंग को ऑटिज्म का प्रतीक माना गया है.

इस वर्ष यानी 2023 में विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस का विषय (थीम) ‘कथा को बदलना: घर पर, काम पर, कला में और नीति निर्माण में योगदान’ (Transforming the narrative: Contributions at home, at work, in the arts and in policymaking) है.

ऑटिज्म (Autism): एक दृष्टि

  • ऑटिज्म एक आजीवन न्यूरोलॉजिकल विकार (disorder) है. इसके लक्षण जन्म से प्रथम तीन वर्षों में ही नज़र आने लगते. जिन बच्चों में यह रोग होता है उनका मानसिक विकास अन्य बच्चों से असामान्य होता है. यह जीवन-पर्यंत बना रहने वाला विकार है.
  • ऑटिज्म से ग्रसित व्यक्ति दूसरों से अलग स्वयं में खोया रहता है. ऑटिज्म के रोगी को मिर्गी के दौरे भी पड़ सकते हैं. यह बीमारी पूरी दुनिया में फैला हुआ है.

1 अप्रैल: भारतीय रिजर्व बैंक का स्थापना दिवस

प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का स्थापना दिवस (RBI Foundation Day) मनाया जाता है. इसकी स्थापना इसी दिन 1935 में हुई थी.

RBI की स्थापना

RBI की स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुसार 1 अप्रैल 1935 को हुई थी. प्रारंभ में RBI निजी स्वमित्व वाला था. 1949 में राष्ट्रीयकरण के बाद से इस पर भारत सरकार का पूर्ण स्वमित्व है. इसका केंद्रीय कार्यालय प्रारंभ में कोलकाता में स्थपित किया गया था जिसे 1937 में स्थायी रूप से मुंबई में स्थानांतरित किया गया. भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना से पहले, केंद्रीय बैंक के सभी कार्य इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा किया जाता था.

RBI के मुख्य कार्य

  • मौद्रिक नीति तैयार करना, उसका कार्यान्वयन और निगरानी करना.
  • वित्तीय प्रणाली का विनियमन और पर्यवेक्षण करना.
  • विदेशी मुद्रा का प्रबन्धन करना.
  • मुद्रा जारी करना, उसका विनिमय करना और परिचालन योग्य न रहने पर उन्हें नष्ट करना.
  • सरकार का बैंकर और बैंकों का बैंकर के रूप में काम करना.
  • साख नियन्त्रित करना.
  • मुद्रा के लेन-देन को नियंत्रित करना

केंद्रीय बोर्ड

रिजर्व बैंक का कामकाज केंद्रीय निदेशक बोर्ड द्वारा शासित होता है. भारत सरकार RBI अधिनियम के अनुसार इस बोर्ड को नियुक्‍त करती है. RBI केंद्रीय बोर्ड में एक गवर्नर और अधिकतम चार उप-गवर्नर होते हैं. यह नियुक्ति चार वर्षों के लिये होती है.

मुख्य तथ्य

बाबासाहेब आंबेडकर ने RBI की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी. बाबासाहेब ने बैंक की कार्यपद्धति हिल्टन यंग कमीशन के सामने रखा था. 1926 में ये कमीशन भारत में ‘रॉयल कमीशन ऑन इंडियन करेंसी एंड फिनांस’ के नाम से आया था. तब इसके सभी सदस्यों ने बाबासाहेब द्वारा लिखी गयी पुस्तक ‘दी प्राब्लम ऑफ दी रुपी – इट्स ओरीजन एंड इट्स सोल्यूशन’ (रुपया की समस्या – इसके मूल और इसके समाधान) की जोरदार वकालात की थी.

पूरे भारत में रिज़र्व बैंक के कुल 29 क्षेत्रीय कार्यालय हैं जिनमें से अधिकांश राज्यों की राजधानियों में स्थित हैं. शक्तिकांत दास भारतीय रिजर्व बैंक के वर्तमान गवर्नर हैं.

1 अप्रैल: ओडिशा दिवस से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल को ओडिशा दिवस (Odisha Day) मनाया जाता है. 1936 में इसी दिन ओडिशा को स्वतंत्र राज्य बनाया गया था. इस प्रकार 2023 में 87वां ओडिशा दिवस मनाया गया.

ओडिशा का गठन भाषाई आधार पर संयुक्त बंगाल प्रांत से अलग कर बनाया गया था. 1912 में बंगाल से बिहार और उड़ीसा को अलग किया गया था. 1 अप्रैल, 1936 में बिहार व उड़ीसा प्रांत का विभाजन अलग-अलग प्रांत में किया गया.

ओडिशा: एक दृष्टि

  • स्वतंत्रता के बाद ओडिशा तथा इसके आसपास की रियासतों ने भारत सरकार को अपनी सत्ता सौंप दी थी. 1949 में ओडिशा की सभी रियासतों का ओडिशा राज्य में सम्पूर्ण विलय हो गया था.
  • कलिंग, उत्कल और उद्र ओडिशा के प्राचीन नाम हैं. यह प्रदेश मुख्यत: भगवान जगन्नाथ की भूमि के लिए प्रसिद्ध है.
  • भारतीय राज्य ओडिशा देश के पूर्वी तट पर है. ओडिशा उत्तर में झारखण्ड, उत्तर पूर्व में पश्चिम बंगाल दक्षिण में आंध्रप्रदेश और पश्चिम में छत्तीसगढ़ है तथा पूर्व में बंगाल की खाड़ी है.
  • ओडिशा के उत्तर में छोटा नागपुर का पठार है. महानदी, ब्राह्मणी, कालिंदी और वैतरणी ओडिशा के दक्षिण में बहने वाली मुख्य नदियां हैं.

28 अप्रैल: विश्व कार्यस्थल स्वास्थ्य एवं सुरक्षा दिवस

प्रत्येक वर्ष 28 अप्रैल को दुनियाभर में ‘विश्व कार्यस्थल स्वास्थ्य एवं सुरक्षा दिवस’ (World Day for Safety and Health at Work) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य कार्यस्थलों पर कर्मकारों के सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की ओर ध्यान आकर्षित करना है.

2022 का मुख्य विषय (थीम)

इस वर्ष यानी 2022 में विश्व कार्यस्थल स्वास्थ्य एवं सुरक्षा दिवस का मुख्य विषय (थीम) ‘Workplace Stress: a collective challenge’ है.

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO): एक दृष्टि

  • विश्व कार्यस्थल स्वास्थ्य एवं सुरक्षा दिवस को मनाये जाने की घोषणा अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने की थी. इसे प्रतिवर्ष 2003 से मनाया जा रहा है.
  • ILO संयुक्त राष्ट्र की एकमात्र त्रि-पक्षीय संस्था है. यह श्रम मानक निर्धारित करने, नीतियाँ को विकसित करने एवं सभी महिलाओं तथा पुरुषों के लिये सभ्य कार्य को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम तैयार करने हेतु 187 सदस्य देशों की सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिकों को एक साथ लाता है.
  • ILO की स्थापना 29 अक्टूबर 1919 को की गयी थी. इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में है. इसके कुल 187 सदस्य हैं.

26 अप्रैल: विश्‍व बौद्धिक सम्‍पदा दिवस

प्रत्येक वर्ष 26 अप्रैल को विश्‍व बौद्धिक सम्‍पदा दिवस (World Intellectual Property Day) मनाया जाता है. इसी दिन 1970 में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन की स्थापना के लिए समझौता लागू हुआ था. इस दिवस को मनाये जाने का उद्देश्य बौद्धिक संपदा के अधिकारों (पेटेंट, ट्रेडमार्क, औद्योगिक डिजाइन, कॉपीराइट इत्यादि) के प्रति लोगों को जागरूक करना है.

बौद्धिक संपदा क्या है?

मानव बुद्धि से निर्मित रचनाएं बौद्धिक संपदा कहलाती है, जिन्हें छूकर महसूस नहीं किया जा सकता. इनमें मुख्य रूप से कॉपीराइट, पेटेंट और ट्रेडमार्क शामिल हैं. इनके अलावा ट्रेड सीक्रेट्स, प्रचार अधिकार, नैतिक अधिकार और अनुचित प्रतिस्पर्द्धा के खिलाफ अधिकार भी इसमें शामिल हैं.

विश्‍व बौद्धिक सम्‍पदा दिवस 2022 का विषय

इस वर्ष यानी 2022 के विश्व बौद्धिक सम्पदा अधिकार दिवस का मुख्य विषय (थीम)– IP and Youth: Innovating for a Better Future है.

विश्‍व बौद्धिक सम्‍पदा दिवस का इतिहास

संयुक्त राष्ट्र के विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) ने वर्ष 2000 में प्रतिवर्ष 26 अप्रैल को इस दिवस को मनाने की घोषणा की थी.

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO)

WIPO की स्थापना 1967 में हुई थी. इसका कार्य बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा तथा संवर्द्धन करना है. वर्तमान में भारत सहित इसके कुल 191 सदस्य देश हैं. इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है. भारत 1975 में WIPO का सदस्य बना था.

राष्ट्रीय बौद्धिक सम्पदा अधिकार नीति

भारत ने राष्ट्रीय बौद्धिक सम्पदा अधिकार नीति 2016 में स्वीकार की थी. जिसका मुख्य उद्देश्य बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है.

25 अप्रैल: विश्व मलेरिया दिवस, मलेरिया से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

प्रत्येक वर्ष 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस (World Malaria Day) के रूप में मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य मलेरिया के विषय में लोगों में जागरूकता लाना है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस दिन मलेरिया से बचाव, इससे मुक़ाबले के लिए प्रभावी रणनीति और इससे होने वाली मौतों में कमी लाने के उपायों पर जोर देता है.

विश्व मलेरिया दिवस 2022 का विषय

इस वर्ष यानी 2022 में विश्व मलेरिया दिवस का मुख्य विषय (थीम)- ‘मलेरिया रोग के बोझ को कम करने और जीवन बचाने के लिए नवाचार का उपयोग करें’ (Harness innovation to reduce the malaria disease burden and save lives) है.

मलेरिया क्या है?

मलेरिया एक प्रकार के परजीवी ‘प्लाजमोडियम’ से फैलने वाला रोग है. जिसका वाहक मादा ‘एनाफिलीज’ मच्छर होता है. जब संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो संक्रमण फैलने से उसमें मलेरिया के लक्षण दिखाई देने लगते हैं.

मलेरिया परजीवी ‘प्लाजमोडियम’ विशेष रूप से लाल रक्त कणिकाओं (RBC) को प्रभावित करता है जिससे शरीर में रक्त की कमी हो जाती है और मरीज कमजोर होता जाता है.

वर्ष 2030 मलेरिया के उन्मूलन का लक्ष्य

भारत ने 2027 तक मलेरिया मुक्त और 2030 तक मलेरिया को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा है. जबकि साल 2027 तक पूरे देश को मलेरिया मुक्त बनाया जाएगा.

विश्व मलेरिया दिवस का इतिहास

विश्व मलेरिया दिवस वर्ष 2007 में विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सदस्य राष्ट्रों द्वारा शुरू किया गया था. पहली बार विश्व मलेरिया दिवस ’25 अप्रैल, 2008′ को मनाया गया था.

मलेरिया से सबसे ज्यादा प्रभवित देश

विश्व में मलेरिया सबसे ज्यादा प्रभवित देश अफ्रीकी महाद्वीप का नाइजीरिया है. विश्व की 27 फीसदी मलेरिया पीड़ित लोग नाइजीरिया में रहते हैं. इस सूची में दूसरे स्थान पर अफ्रीका का ही कांगो गणराज्य है. यहां 10 फीसदी मलेरिया पीड़ित आबादी है. जबकि तीसरे स्थान पर 6 फीसदी आबादी के साथ भारत है. चौथे स्थान पर 4 फीसदी मरीजों के साथ मोजांबिक और 4 फीसदी के साथ घाना है.

मलेरिया का टीका ‘मॉसक्यूरिक्स’

मलेरिया के लिए इजाद किए गए वैक्सीन का नाम RTS-S/AS01 है. इस वैक्सीन का ट्रेड नेम मॉसक्यूरिक्स (Mosquirix) है. इस टीके को इंजेक्शन के जरिए दिया जाता है. इसे ब्रिटिश फार्मास्यूटिकल कंपनी ग्लाक्सोस्मिथक्लाइन द्वारा PATH मलेरिया वैक्सीन इनिशिएटिव के साथ मिलकर तैयार किया है. इस टीके की चार डोज़ निश्चित समय अंतरान पर दी जानी होती हैं.

24 अप्रैल: राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस, पंचायती राज से संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य

प्रत्येक वर्ष 24 अप्रैल को ‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ (National Panchayati Raj Day) के रूप में मनाया जाता है. यह दिन देश में ज़मीनी स्‍तर पर सत्‍ता के विकेन्‍द्रीकरण के इतिहास में महत्त्वपूर्ण दिन माना जाता है. इसी दिन 1993 में भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम (73rd Amendment Act) 1992 के जरिए पंचायती राज व्‍यवस्‍था लागू हुई थी.

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने इस पंचायतीराज दिवस के अवसर पर जम्‍मू कश्‍मीर के सांबा जिले के पल्ली पंचायत में आयोजित समारोह में हिस्‍सा लिया.

पंचायती राज क्या है?

सिर्फ केंद्र या राज्य सरकार ही पूरे देश को चलाने में सक्षम नहीं हो सकती है. इसके लिए स्थानीय स्तर पर भी प्रशासन की व्यवस्थ की गई है. इसी व्यवस्था को पंचायती राज का नाम दिया गया है.

त्रि-स्तरीय ढांचा

भारत में पंचायती राज त्रि-स्तरीय है. पंचायती राज में गांव के स्तर पर ग्राम सभा, ब्लॉक स्तर पर मंडल परिषद और जिला स्तर पर जिला परिषद होता है. इन संस्थानों के लिए सदस्यों का चुनाव होता है जो जमीनी स्तर पर शासन की बागडोर संभालते हैं.

भारत में पंचायती राज का इतिहास

भारत में प्राचीन काल से ही पंचायती राज व्यवस्था आस्तित्व में रही हैं. आधुनिक भारत में पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गाँव में 2 अक्टूबर 1959 को पंचायती राज व्यवस्था लागू की थी. 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत साल 2010 से हुई थी.

पंचायती राज से संबंधित संवैधानिक तथ्य

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 40 में राज्यों को पंचायतों के गठन का निर्देश दिया गया हैं.
  • भारतीय संविधान के 73वें संशोधन विधेयक से देश में पंचायती राज संस्था को संवैधानिक मान्यता दी गयी है.
  • भारतीय संसद ने 1992 में इस संशोधन विधेयक को पारित किया था. यह संशोधन विधेयक 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ था.
  • 73वें संशोधन के द्वारा संविधान के अनुच्छेद 243 में पंचायतों की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है. इस संशोधन के द्वारा संविधान में 11वीं अनुसूची जोड़ी गयी, इसमें पंचायत के 29 विषयों को शामिल किया गया है.
  • 73वें संशोधन में एक त्रि-स्तरीय ढांचे की स्थापना (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति तथा जिला पंचायत) का प्रावधन किया गया है.

पंचायती राज संस्था अवधारणा के लिए गठित मुख्य समिति और सिफारिशें

  1. बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिशें (1957)
  2. अशोक मेहता समिति की सिफारिशें (1977)
  3. पीवीके राव समिति (1985)
  4. डॉ एलऍम सिन्घवी समिति (1986)

गुरु तेग बहादुर जी का 400वां प्रकाश पर्ब मनाया गया

21 अप्रैल को गुरु तेग बहादुर जी का 400वां प्रकाश पर्ब मनाया गया था. इस अवसर पर 20-21 अप्रैल को दिल्ली के लालकिला परिसर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था.

400वें प्रकाश पर्ब पर प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने एक स्‍मारक सिक्‍का और डाक टिकट जारी किया और लालकिला से राष्‍ट्र को संबोधित किया. इस कार्यक्रम का आयोजन आजादी का अमृत महोत्‍सव के अंतर्गत संस्‍कृति मंत्रालय, दिल्‍ली सिक्‍ख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सहयोग से किया गया था.

गुरु तेग बहादुर जी: एक दृष्टि

  • गुरु तेग बहादुर जी सिक्खों के 9वें गुरु थे. सिखों के 8वें गुरु हरिकृष्ण राय जी की अकाल मृत्यु के बाद गुरु तेगबहादुर जी को गुरु बनाया गया था.
  • गुरु तेग बहादुर जी ने देश के अधिकांश भागों में गुरु नानक देवजी की शिक्षाओं का प्रचार किया था. गुरु तेग बहादुर जी ने 111 शबद और 15 रागों की रचना की थी और उनकी शिक्षाओं और रचनाओं को गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल किया गया है.
  • गुरु तेग बहादुर ने मुगल शासक औरंगज़ेब के शासन के दौरान गैर-मुस्लिमों के जबरन धर्मांतरण का विरोध किया था. 1675 में इस्लाम कबूल नहीं करने पर मुगल शासक औरंगज़ेब के आदेश से गुरु तेग बहादुर जी को यातनाएं देने के बाद उनका सिर कलम कर दिया गया था.
  • औरंगज़ेब ने दिल्ली के चांदनी चौक पर गुरु साहिब के शीश को काटने का हुक्म दिया था और गुरु साहिब ने हंसते-हंसते अपना शीश कटाकर बलिदान दे दिया. इसलिए गुरु तेगबहादुरजी की याद में उनके शहीदी स्थल पर एक गुरुद्वारा स‍ाहिब बना है, जिसका नाम गुरुद्वारा शीशगंज साहिब है.
  • गुरुतेग बहादुर की पुण्‍यतिथि 24 नवम्‍बर को प्रति वर्ष शहीदी दिवस (Guru Tegh Bahadur Martyrdom Day) के रूप में मनायी जाती है.