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24 अप्रैल: राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस, पंचायती राज से संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य

प्रत्येक वर्ष 24 अप्रैल को ‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ (National Panchayati Raj Day) के रूप में मनाया जाता है. यह दिन देश में ज़मीनी स्‍तर पर सत्‍ता के विकेन्‍द्रीकरण के इतिहास में महत्त्वपूर्ण दिन माना जाता है. इसी दिन 1993 में भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम (73rd Amendment Act) 1992 के जरिए पंचायती राज व्‍यवस्‍था लागू हुई थी.

पंचायती राज क्या है?

सिर्फ केंद्र या राज्य सरकार ही पूरे देश को चलाने में सक्षम नहीं हो सकती है. इसके लिए स्थानीय स्तर पर भी प्रशासन की व्यवस्थ की गई है. इसी व्यवस्था को पंचायती राज का नाम दिया गया है.

त्रि-स्तरीय ढांचा

भारत में पंचायती राज त्रि-स्तरीय है. पंचायती राज में गांव के स्तर पर ग्राम सभा, ब्लॉक स्तर पर मंडल परिषद और जिला स्तर पर जिला परिषद होता है. इन संस्थानों के लिए सदस्यों का चुनाव होता है जो जमीनी स्तर पर शासन की बागडोर संभालते हैं.

भारत में पंचायती राज का इतिहास

भारत में प्राचीन काल से ही पंचायती राज व्यवस्था आस्तित्व में रही हैं. आधुनिक भारत में पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गाँव में 2 अक्टूबर 1959 को पंचायती राज व्यवस्था लागू की थी. 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत साल 2010 से हुई थी.

पंचायती राज से संबंधित संवैधानिक तथ्य

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 40 में राज्यों को पंचायतों के गठन का निर्देश दिया गया हैं.
  • भारतीय संविधान के 73वें संशोधन विधेयक से देश में पंचायती राज संस्था को संवैधानिक मान्यता दी गयी है.
  • भारतीय संसद ने 1992 में इस संशोधन विधेयक को पारित किया था. यह संशोधन विधेयक 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ था.
  • 73वें संशोधन के द्वारा संविधान के अनुच्छेद 243 में पंचायतों की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है. इस संशोधन के द्वारा संविधान में 11वीं अनुसूची जोड़ी गयी, इसमें पंचायत के 29 विषयों को शामिल किया गया है.
  • 73वें संशोधन में एक त्रि-स्तरीय ढांचे की स्थापना (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति तथा जिला पंचायत) का प्रावधन किया गया है.

पंचायती राज संस्था अवधारणा के लिए गठित मुख्य समिति और सिफारिशें

  1. बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिशें (1957)
  2. अशोक मेहता समिति की सिफारिशें (1977)
  3. पीवीके राव समिति (1985)
  4. डॉ एलऍम सिन्घवी समिति (1986)

24-30 अप्रैल 2024: विश्व टीकाकरण सप्ताह के रूप में मनाया गया

प्रत्येक वर्ष अप्रैल माह के आखिरी सप्ताह को ‘विश्व टीकाकरण सप्ताह’ (World Immunization Week) के रूप में मनाया जाता है. इसका उद्देश्य हर व्यक्ति को टीका-निवारणीय रोगों के बारे में जागरुकता फैलाना और इन रोगों से बचाव करना है. पहली बार विश्व टीकाकरण सप्ताह 2012 में मनाया गया था.

इस वर्ष यानी 2024 के विश्व टीकाकरण सप्ताह का विषय (थीम) ‘मानवीय रूप से संभव: सभी के लिए टीकाकरण’ (Humanly Possible: Immunization for All) था.

टीका-निवारणीय रोग: मुख्य तथ्य

  • टीकाकरण, टीका-निवारणीय रोगों जैसे कि ग्रीवा संबंधी कैंसर, डिप्थीरिया, हेपेटाइटिस बी, खसरा, मम्प्स, पर्टुसिस (खांसी), निमोनिया, पोलियो, रोटावायरस अतिसार (डायरिया), रूबेला और टेटनस इत्यादि से होने वाली मृत्यु से सुरक्षित करता है.
  • वर्ष 1988 से पोलियो मामलों में 99% से ज्यादा की कमी आयी है. वर्तमान में तीन देशों (अफगानिस्तान, नाइजीरिया और पाकिस्तान) में पोलियो-स्थानिक हैं. पोलियो वर्ष 1988 में 125 देशों में था.
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2014 में भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया था.
  • टीका (वैक्सीन) के दो भाग होते हैं- एंटीजन (antigen) और एडजुवेंट (adjuvant). एंटीजन बीमारी पैदा करने वाले परजीवी का एक टुकड़ा है. एडजुवेंट शरीर को खतरे के संकेत भेजता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को दृढ़ता से प्रतिक्रिया करने में मदद करता है.

भारत में टीकाकरण कार्यक्रम

मिशन इंद्रधनुष: भारत सरकार ने सभी बच्चों और गर्भवती महिलाओं का संपूर्ण टीकाकरण कवरेज प्राप्त करने के लिए दिसंबर 2014 में ‘मिशन इंद्रधनुष’ का शुभारंभ किया था. मिशन इंद्रधनुष के बाद पूर्ण टीकाकरण कवरेज में प्रतिवर्ष वृद्धि 1% से बढकर 6.7% हो गयी.

तीव्र मिशन इंद्रधनुष (IMI): प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने टीकाकरण कार्यक्रम में तेज़ी लाने के लिए 8 अक्टूबर 2017 को तीव्र मिशन इंद्रधनुष का शुभारंभ किया. इस कार्यक्रम के माध्यम से भारत सरकार का उद्देश्य दो वर्ष से कम उम्र के प्रत्येक बच्चों और उन सभी गर्भवती महिलाओं तक पहुंचना है, जो नियमित रूप से टीकाकरण कार्यक्रम के तहत छूट गए हैं.

28 अप्रैल: विश्व कार्यस्थल स्वास्थ्य एवं सुरक्षा दिवस

प्रत्येक वर्ष 28 अप्रैल को दुनियाभर में ‘विश्व कार्यस्थल स्वास्थ्य एवं सुरक्षा दिवस’ (World Day for Safety and Health at Work) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य कार्यस्थलों पर कर्मकारों के सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की ओर ध्यान आकर्षित करना है.

2024 का मुख्य विषय (थीम)

इस वर्ष यानी 2024 में विश्व कार्यस्थल स्वास्थ्य एवं सुरक्षा दिवस का मुख्य विषय (थीम) ‘जलवायु परिवर्तन और कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं स्वास्थ्य’ (Climate change and safety and health at work) है.

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO): एक दृष्टि

  • विश्व कार्यस्थल स्वास्थ्य एवं सुरक्षा दिवस को मनाये जाने की घोषणा अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने की थी. इसे प्रतिवर्ष 2003 से मनाया जा रहा है.
  • ILO संयुक्त राष्ट्र की एकमात्र त्रि-पक्षीय संस्था है. यह श्रम मानक निर्धारित करने, नीतियाँ को विकसित करने एवं सभी महिलाओं तथा पुरुषों के लिये सभ्य कार्य को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम तैयार करने हेतु 187 सदस्य देशों की सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिकों को एक साथ लाता है.
  • ILO की स्थापना 29 अक्टूबर 1919 को की गयी थी. इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में है. इसके कुल 187 सदस्य हैं.

26 अप्रैल: विश्‍व बौद्धिक सम्‍पदा दिवस

प्रत्येक वर्ष 26 अप्रैल को विश्‍व बौद्धिक सम्‍पदा दिवस (World Intellectual Property Day) मनाया जाता है. इसी दिन 1970 में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन की स्थापना के लिए समझौता लागू हुआ था. इस दिवस को मनाये जाने का उद्देश्य बौद्धिक संपदा के अधिकारों (पेटेंट, ट्रेडमार्क, औद्योगिक डिजाइन, कॉपीराइट इत्यादि) के प्रति लोगों को जागरूक करना है.

बौद्धिक संपदा क्या है?

मानव बुद्धि से निर्मित रचनाएं बौद्धिक संपदा कहलाती है, जिन्हें छूकर महसूस नहीं किया जा सकता. इनमें मुख्य रूप से कॉपीराइट, पेटेंट और ट्रेडमार्क शामिल हैं. इनके अलावा ट्रेड सीक्रेट्स, प्रचार अधिकार, नैतिक अधिकार और अनुचित प्रतिस्पर्द्धा के खिलाफ अधिकार भी इसमें शामिल हैं.

विश्‍व बौद्धिक सम्‍पदा दिवस 2024 का विषय

इस वर्ष यानी 2022 के विश्व बौद्धिक सम्पदा अधिकार दिवस का मुख्य विषय (थीम)– ‘आईपी और एसडीजी: नवाचार और रचनात्मकता के साथ हमारे साझा भविष्य का निर्माण’ (IP and the SDGs: Building Our Common Future with Innovation and Creativity) है.

विश्‍व बौद्धिक सम्‍पदा दिवस का इतिहास

संयुक्त राष्ट्र के विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) ने वर्ष 2000 में प्रतिवर्ष 26 अप्रैल को इस दिवस को मनाने की घोषणा की थी.

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO)

WIPO की स्थापना 1967 में हुई थी. इसका कार्य बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा तथा संवर्द्धन करना है. वर्तमान में भारत सहित इसके कुल 191 सदस्य देश हैं. इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है. भारत 1975 में WIPO का सदस्य बना था.

राष्ट्रीय बौद्धिक सम्पदा अधिकार नीति

भारत ने राष्ट्रीय बौद्धिक सम्पदा अधिकार नीति 2016 में स्वीकार की थी. जिसका मुख्य उद्देश्य बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है.

25 अप्रैल: विश्व मलेरिया दिवस, मलेरिया से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

प्रत्येक वर्ष 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस (World Malaria Day) के रूप में मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य मलेरिया के विषय में लोगों में जागरूकता लाना है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस दिन मलेरिया से बचाव, इससे मुक़ाबले के लिए प्रभावी रणनीति और इससे होने वाली मौतों में कमी लाने के उपायों पर जोर देता है.

विश्व मलेरिया दिवस 2024 का विषय

इस वर्ष यानी 2024 में विश्व मलेरिया दिवस का मुख्य विषय (थीम)- ‘अधिक न्यायसंगत दुनिया के लिए मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में तेजी लाएं’ (Accelerate the fight against malaria for a more equitable world) है.

मलेरिया क्या है?

मलेरिया एक प्रकार के परजीवी ‘प्लाजमोडियम’ से फैलने वाला रोग है. जिसका वाहक मादा ‘एनाफिलीज’ मच्छर होता है. जब संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो संक्रमण फैलने से उसमें मलेरिया के लक्षण दिखाई देने लगते हैं.

मलेरिया परजीवी ‘प्लाजमोडियम’ विशेष रूप से लाल रक्त कणिकाओं (RBC) को प्रभावित करता है जिससे शरीर में रक्त की कमी हो जाती है और मरीज कमजोर होता जाता है.

वर्ष 2030 मलेरिया के उन्मूलन का लक्ष्य

भारत ने 2027 तक मलेरिया मुक्त और 2030 तक मलेरिया को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा है. जबकि साल 2027 तक पूरे देश को मलेरिया मुक्त बनाया जाएगा.

विश्व मलेरिया दिवस का इतिहास

विश्व मलेरिया दिवस वर्ष 2007 में विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सदस्य राष्ट्रों द्वारा शुरू किया गया था. पहली बार विश्व मलेरिया दिवस ’25 अप्रैल, 2008′ को मनाया गया था.

मलेरिया से सबसे ज्यादा प्रभवित देश

विश्व में मलेरिया सबसे ज्यादा प्रभवित देश अफ्रीकी महाद्वीप का नाइजीरिया है. विश्व की 27 फीसदी मलेरिया पीड़ित लोग नाइजीरिया में रहते हैं. इस सूची में दूसरे स्थान पर अफ्रीका का ही कांगो गणराज्य है. यहां 10 फीसदी मलेरिया पीड़ित आबादी है. जबकि तीसरे स्थान पर 6 फीसदी आबादी के साथ भारत है. चौथे स्थान पर 4 फीसदी मरीजों के साथ मोजांबिक और 4 फीसदी के साथ घाना है.

मलेरिया का टीका ‘मॉसक्यूरिक्स’

मलेरिया के लिए इजाद किए गए वैक्सीन का नाम RTS-S/AS01 है. इस वैक्सीन का ट्रेड नेम मॉसक्यूरिक्स (Mosquirix) है. इस टीके को इंजेक्शन के जरिए दिया जाता है. इसे ब्रिटिश फार्मास्यूटिकल कंपनी ग्लाक्सोस्मिथक्लाइन द्वारा PATH मलेरिया वैक्सीन इनिशिएटिव के साथ मिलकर तैयार किया है. इस टीके की चार डोज़ निश्चित समय अंतरान पर दी जानी होती हैं.

24 अप्रैल: राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस, पंचायती राज से संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य

प्रत्येक वर्ष 24 अप्रैल को ‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ (National Panchayati Raj Day) के रूप में मनाया जाता है. यह दिन देश में ज़मीनी स्‍तर पर सत्‍ता के विकेन्‍द्रीकरण के इतिहास में महत्त्वपूर्ण दिन माना जाता है. इसी दिन 1993 में भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम (73rd Amendment Act) 1992 के जरिए पंचायती राज व्‍यवस्‍था लागू हुई थी.

पंचायती राज क्या है?

सिर्फ केंद्र या राज्य सरकार ही पूरे देश को चलाने में सक्षम नहीं हो सकती है. इसके लिए स्थानीय स्तर पर भी प्रशासन की व्यवस्थ की गई है. इसी व्यवस्था को पंचायती राज का नाम दिया गया है.

त्रि-स्तरीय ढांचा

भारत में पंचायती राज त्रि-स्तरीय है. पंचायती राज में गांव के स्तर पर ग्राम सभा, ब्लॉक स्तर पर मंडल परिषद और जिला स्तर पर जिला परिषद होता है. इन संस्थानों के लिए सदस्यों का चुनाव होता है जो जमीनी स्तर पर शासन की बागडोर संभालते हैं.

भारत में पंचायती राज का इतिहास

भारत में प्राचीन काल से ही पंचायती राज व्यवस्था आस्तित्व में रही हैं. आधुनिक भारत में पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गाँव में 2 अक्टूबर 1959 को पंचायती राज व्यवस्था लागू की थी. 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत साल 2010 से हुई थी.

पंचायती राज से संबंधित संवैधानिक तथ्य

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 40 में राज्यों को पंचायतों के गठन का निर्देश दिया गया हैं.
  • भारतीय संविधान के 73वें संशोधन विधेयक से देश में पंचायती राज संस्था को संवैधानिक मान्यता दी गयी है.
  • भारतीय संसद ने 1992 में इस संशोधन विधेयक को पारित किया था. यह संशोधन विधेयक 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ था.
  • 73वें संशोधन के द्वारा संविधान के अनुच्छेद 243 में पंचायतों की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है. इस संशोधन के द्वारा संविधान में 11वीं अनुसूची जोड़ी गयी, इसमें पंचायत के 29 विषयों को शामिल किया गया है.
  • 73वें संशोधन में एक त्रि-स्तरीय ढांचे की स्थापना (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति तथा जिला पंचायत) का प्रावधन किया गया है.

पंचायती राज संस्था अवधारणा के लिए गठित मुख्य समिति और सिफारिशें

  1. बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिशें (1957)
  2. अशोक मेहता समिति की सिफारिशें (1977)
  3. पीवीके राव समिति (1985)
  4. डॉ एलऍम सिन्घवी समिति (1986)

23 अप्रैल: विश्व पुस्तक दिवस, स्ट्रासबर्ग को विश्व पुस्तक राजधानी 2024 नामित किया गया

प्रत्येक वर्ष 23 अप्रैल को ‘विश्व पुस्तक दिवस’ (World Book Day) के रूप में मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों के बीच किताब पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना है.

चूंकि किताबी दुनिया में कॉपीराइट एक अहम मुद्दा है, इसलिए विश्व पुस्तक दिवस पर इस पर भी जोर दिया जाता है. इसी वजह से दुनिया के कई हिस्सों में इसे ‘विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस’ (World Book and Copyright Day) के तौर पर भी मनाया जाता है.

ब्रिटेन और आयरलैंड में 23 अप्रैल को सेंट जॉर्ज दिवस होता है. इस वजह से वहां मार्च के पहले गुरुवार को विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाता है.

विश्व पुस्तक राजधानी 2024

UNESCO प्रत्येक वर्ष विश्व पुस्तक राजधानी (World Book Capital) नामित करता है. यह पुस्तक राजधानी 23 अप्रैल से 1 वर्ष की अवधि के लिए रहती है. इस वर्ष फ्रान्स के स्ट्रासबर्ग (Strasbourg, France) को ‘विश्व पुस्तक राजधानी 2024’ के रूप में नामित किया गया है.

पुस्तक दिवस 2024 की थीम

इस वर्ष यानी वर्ष 2024 में विश्व पुस्तक दिवस का मुख्य विषय (थीम)- ‘रीड योर वे’ (Read Your Way) है.

विश्व पुस्तक दिवस का इतिहास

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने विश्व पुस्तक दिवस को प्रस्तावित किया था. पहला विश्व पुस्तक दिवस 23 अप्रैल, 1995 को मनाया गया था.

विश्व पुस्तक दिवस को 23 अप्रैल को मनाने का विचार स्पेन की एक परंपरा से आया. स्पेन में हर साल 23 अप्रैल को ‘रोज डे’ मनाया जाता है. इस दिन लोग प्यार के इजहार के तौर पर एक-दूसरे को फूल देते हैं.

1926 में जब स्पेन के विख्यात लेखक मिगेल डे सरवांटिस (Miguel de Cervantes) का निधन हुआ तो उस साल स्पेन के लोगों ने महान लेखक की याद में फूल की जगह किताबें बांटीं. स्पेन में यह परंपरा जारी रही जिससे ‘विश्व पुस्तक दिवस’ मनाने का विचार आया.

23 अप्रैल: संयुक्त राष्ट्र अंग्रेजी और स्पेनिश भाषा दिवस

प्रत्येक वर्ष 23 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र अंग्रेजी भाषा दिवस (UN English Language Day) मनाया जाता है. इसी दिन (23 अप्रैल को) संयुक्त राष्ट्र स्पेनिश भाषा दिवस भी मनाया जाता है. भाषा दिवस को मनाने का उद्देश्य बहु-भाषावाद तथा सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देना है.

विलियम शेक्सपियर का जन्मदिन

23 अप्रैल को अंग्रेजी के मशहूर विलियम शेक्सपियर का जन्म हुआ था और उनकी मृत्यु भी इसी दिन हुई थी. इसलिए संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने 23 अप्रैल को अंग्रेजी भाषा दिवस के तौर पर चुना.

संयुक्त राष्ट्र 6 आधिकारिक भाषाओं के लिए अलग-अलग दिवस

संयुक्त राष्ट्र के 6 आधिकारिक भाषाएं हैं. इन 6 आधिकारिक भाषाओं के लिए अलग-अलग दिवस निश्चित किये गये हैं:

  1. अरबी भाषा: 18 दिसम्बर
  2. चीनी भाषा: 20 अप्रैल
  3. अंग्रेजी भाषा: 23 अप्रैल
  4. स्पेनिश भाषा: 23 अप्रैल
  5. फ़्रांसिसी भाषा: 20 अप्रैल
  6. रूसी भाषा: 6 जून

22 अप्रैल 2024: पृथ्वी दिवस, ग्रह बनाम प्लास्टिक थीम पर मनाया गया

प्रत्येक वर्ष 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस (Earth Day) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय और पर्यावरण सुरक्षा के बारे में लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाना है.

पृथ्वी दिवस 2024 की थीम

इस वर्ष यानी 2024 के पृथ्वी दिवस का मुख्य विषय (थीम)- ‘ग्रह बनाम प्लास्टिक’ (Planet vs. Plastics) था.

पृथ्वी दिवस का इतिहास

1969 में यूनेस्‍को सम्‍मेलन में इस दिन को प्रस्‍तावित किया गया था. पहली बार, पृथ्वी दिवस 1970 में मनाया गया था. संयुक्त राष्ट्र ने 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा 2009 में की थी.

अमेरिका में पृथ्वी दिवस को ‘वृक्ष दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. अमेरिका के सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने 22 अप्रैल 1970 को इस कार्यक्रम को पर्यावरण शिक्षा के रूप में मनाने के लिये चुना था.

21 अप्रैल: सिविल सेवा दिवस

प्रत्येक वर्ष 21 अप्रैल को सिविल सेवा दिवस (Civil Services Day) के रूप में मनाया जाता है. यह दिवस सिविल सेवकों को स्वयं को नागरिकों के लिए पुनर्समर्पित करने तथा अपनी वचनबद्धता को पुनर्सज्जित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है.

इसी दिन 1947 में पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने ‘आल इंडिया एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस ट्रेनिंग स्कूल’ के पहले बैच के अधिकारियों को दिल्ली के मेटकाफ़ हाउस में पहली बार संबोधित किया था. सरदार पटेल ने अपने संबोधन में सिविल सेवकों को ‘स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया’ के रूप में संबोधित किया था.

भारत सरकार ने वर्ष 2006 से इस दिवस को मनाने का निर्णय लिया था. 21 अप्रैल 2023 को देश में 17वां सिविल सेवा दिवस मनाया गया.

लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार

सरदार वल्लभभाई पटेल के अनुसार, सिविल सेवक भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. वे लोक प्रशासन के सुचारू संचालन के लिए अथक प्रयास करते हैं. उनकी ज़िम्मेदारी सत्ताधारी पार्टी की नीतियों को क्रियान्वित करने की ओर है.

सिविल सेवा दिवस पर देश के विभिन्न अधिकारियों को लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार (Prime Minister’s Awards for Excellence in Public Administration) प्रदान किये जाते हैं.

पहले यह पुरस्‍कार अधिकारी के व्‍यक्तिगत कार्यों के आधार पर दिए जाते थे. लेकिन अब ये पुरस्‍कार विभिन्‍न जिलों के प्रमुख कार्यक्रमों के प्रदर्शन पर दिए जा रहे हैं.

19 अप्रैल: विश्व यकृत दिवस

प्रत्येक वर्ष 19 अप्रैल को विश्व यकृत दिवस (World Liver Day) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य यकृत संबंधित रोगों के बारे में जागरूकता फैलाना है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में लीवर की बीमारियां मृत्यु का 10वां सबसे आम कारण है.

यकृत (Liver): एक दृष्टि

  • यकृत मस्तिष्क के बाद शरीर का दूसरा सबसे जटिल अंग हैं. यह शरीर के पाचन तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
  • लीवर के प्रमुख कार्य- संक्रमणों से लड़ना, रक्त शर्करा (Blood Sugar) को नियमित करना, विषाक्त पदार्थों को निकालना, कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना, रक्त के थक्के का निर्माण करना, पित्त रस का स्त्रावण करना है.
  • हेपेटाइटिस शब्द का उपयोग यकृत सूजन के लिए किया जाता हैं. यह वायरल संक्रमण या अल्कोहल जैसे हानिकारक पदार्थों के संपर्क में आने के कारण होता है.
  • हेपेटाइटिस लक्षण रहित और सीमित लक्षणों के साथ हो सकता है. इसमें प्राय: पीलिया, अत्यधिक थकान (भूख में कमी) और अस्वस्थता हो सकती है.

18 अप्रैल: विश्व धरोहर दिवस, भारत के 42 स्थानों को विश्व धरोहर का दर्जा

प्रत्येक वर्ष पूरे विश्व में 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस (World Heritage Day) के रूप में मनाया जाता है. इसका उद्देश्य सांस्कृतिक-ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक विरासतों की विविधता का संक्षरण करना तथा स्मारकों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है.

विश्व धरोहर दिवस 2024 का विषय

इस वर्ष यानी 2024 के विश्व धरोहर दिवस का मुख्य विषय (थीम) ‘विविधता की खोज करें और अनुभव करें’ (Discover and Experience Diversity) है.

इतिहास

International Council on Monuments and Sites (ICOMOS) ने 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस को मनाये जाने का प्रस्ताव यूनेस्को को दिया था. यूनेस्को ने 1983 में इस प्रस्ताव को अनुमोदित किया था.

धरोहर स्थल क्या है?

विश्व धरोहर या विरासत सांस्कृतिक महत्व और प्राकृतिक महत्व के वह स्थल होते है जो बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं. दुनियाभर में कुल 1052 विश्व धरोहर स्थल हैं जो बहुत ही महत्वपूर्ण हैं. इनमें से 814 सांस्कृति, 203 प्राकृतिक और 35 मिश्रित स्थल हैं.

यूनेस्को में शामिल भारत के धरोहर स्थल

यूनेस्को ने भारत में 43 स्थानों, शहर, इमारतों, गुफाओं आदि को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया है. इनमें 35 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित धरोहर शामिल हैं. यूनेस्को में शामिल भारत के धरोहर स्थल इस प्रकार हैं:

क्रमांकविश्व विरासत स्थल और वर्गवर्षसंबंधित राज्य
1.आगरा का किला (सांस्कृतिक)1983उत्तर प्रदेश
2.अजंता की गुफाएं (सांस्कृतिक)1983महाराष्ट्र
3.एलोरा की गुफाएं (सांस्कृतिक)1983महाराष्ट्र
4.ताज महल (सांस्कृतिक)1983उत्तर प्रदेश
5.महाबलीपुरम के स्मारक (सांस्कृतिक)1984तमिलनाडु
6.सूर्य मंदिर (सांस्कृतिक)1984ओड़िशा
7.मानस वन्यजीव अभ्यारण्य (प्राकृतिक)1985असम
8.काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (प्राकृतिक)1985असम
9.केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (प्राकृतिक)1985राजस्थान
10.गोवा के चर्च (सांस्कृतिक)1986गोवा
11.फतेहपुर सीकरी (सांस्कृतिक)1986उत्तर प्रदेश
12.हम्पी के स्मारक (सांस्कृतिक)1986कर्नाटक
13.खजुराहो के मंदिर (सांस्कृतिक)1986मध्य प्रदेश
14.एलीफेंटा की गुफाएं (सांस्कृतिक)1987महाराष्ट्र
15.महान चोल मंदिर (सांस्कृतिक)1987/ 2004तमिलनाडु
16.पट्टाकल के स्मारक (सांस्कृतिक)1987कर्नाटक
17.सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान (प्राकृतिक)1987पश्चिम बंगाल
18.नंदादेवी राष्ट्रीय उद्यान व फूलों की घाटी (प्राकृतिक)1988/ 2005उत्तराखंड
19.सांची का स्तूप (सांस्कृतिक)1989मध्य प्रदेश
20.हुमायूं का मक़बरा (सांस्कृतिक)1993दिल्ली
21.क़ुतुब मीनार (सांस्कृतिक)1993दिल्ली
22.भारत के पर्वतीय रेलवे (दार्जिलिंग/नीलगिरी/शिमला) (सांस्कृतिक)1999/ 2005/ 2008पश्चिम बंगाल/ तमिलनाडु/ हिमाचल प्रदेश
23.महाबोधि मंदिर (सांस्कृतिक)2002बिहार
24.भीमबेटका गुफ़ाएं (सांस्कृतिक)2003मध्य प्रदेश
25.चंपानेर – पावागढ़ पार्क (सांस्कृतिक)2004गुजरात
26.छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सांस्कृतिक)2004महाराष्ट्र
27.लाल किला (सांस्कृतिक)2007दिल्ली
28.जंतर-मंतर (सांस्कृतिक)2010राजस्थान
29.पश्चिमी घाट (प्राकृतिक)2012गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल
30.राजस्थान के पहाड़ी किले (सांस्कृतिक)2013राजस्थान
31.रानी की वाव (सांस्कृतिक)2014गुजरात
32.ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान (प्राकृतिक)2014हिमाचल प्रदेश
33.नालंदा (सांस्कृतिक)2016बिहार
34.कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान (मिश्रित)2016सिक्किम
35.ली कार्बुसियर के स्थापत्य कार्य (सांस्कृतिक)2016चंडीगढ़
36.अहमदाबाद शहर (सांस्कृतिक)2017गुजरात
37.विक्टोरियन गोथिक और आर्ट डेको (सांस्कृतिक)2018महाराष्ट्र
38.जयपुर (सांस्कृतिक)2019राजस्थान
39.काकतीय रुद्रेश्‍वर मंदिर (सांस्कृतिक)2021तेलंगाना
40.धोलावीरा (सांस्कृतिक)2021गुजरात
41.शान्तिनिकेतन (सांस्कृतिक)2023पश्चिम बंगाल
42.होयसल मंदिर समूह (सांस्कृतिक)2023कर्नाटक
43.मोइदाम (सांस्कृतिक)2024असम
44.मराठा सैन्य परिदृश्य (सांस्कृतिक)2025महाराष्ट्र और तमिलनाडु

भारतीय संविधान में प्रावधान

भारतीय संविधान ने धरोहरों को संभालने की व्यवस्था की है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51 के अनुसार ‘यह प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि यह अपनी समृद्ध मिश्रित सांस्कृतिक विरासत का सम्मान और संरक्षण करें’.

यूनेस्को (UNESCO): एक दृष्टि

  • यूनेस्को या UNESCO, संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (United Nations Educational Scientific and Cultural Organization) का संक्षिप्त रूप है.
  • यह संयुक्त राष्ट्र का एक घटक निकाय है. इसका कार्य शिक्षा, प्रकृति तथा समाज विज्ञान, संस्कृति तथा संचार के माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देना है.
  • UNESCO का गठन 4 नवंबर 1946 को हुआ था. इसका मुख्यालय फ्रांस के पेरिस में है. UNESCO के वर्तमान अध्यक्ष आंद्रे अजोले हैं.